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दवाइयों की उपलब्धता बनाए रखें, मरीजों की सहूलियत का रखें ध्यान : मनोज पिंगुआ

22-Jun-2024
रायपुर।  (  शोर संदेश  )  लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ तथा संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं ऋतुराज रघुवंशी एवं उनके टीम ने शनिवार को महासमुंद जिले के स्वास्थ्य केन्द्रों, ड्रग वेयर हाउस एवं ग्रामों का आकस्मिक निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।दवाइयों की उपलब्धता बनाए रखें, मरीजों की सहूलियत का भी ध्यान रखें।
अपर मुख्य सचिव एवं उनके टीम द्वारा सर्वप्रथम सीजीएमएससी ड्रग वेयर हाउस का निरीक्षण किया गया, जहाँ पर दवाईयों के रखरखाव व उपलब्धता हेतु इंडेट की जानकारी ली गई। ड्रग वेयर हाउस के साईनेज बोर्ड प्रदर्शित करने, रंग रोगन करने एवं विभिन्न दवाईयों व सामग्रियों को व्यवस्थित रखने तथा परिसर की उचित साफ-सफाई रखने तथा दवाईयों के वितरण में नियर एक्यपायरी दवाईयों का पहले वितरित किया जावे तथा वितरण नहीं हो पाने की स्थिति में राज्य कार्यालय को अवगत कराते हेतु निर्देशित किया गया।
मितानिन की नेम प्लेट पर मोबाइल नंबर प्रदर्शित करने के निर्देश
अपर मुख्य सचिव ने उसके उपरांत ग्राम कोहरी का औचक निरीक्षण किया गया, जहाँ पर मितानीन डोमेश्वरी चक्रवती से भेंट किया गया, उनके घर के सामने नेम प्लेट प्रदर्शित पाया गया है, जिसमें मोबाईल नम्बर भी अंकित करने हेतु निर्देशित किया गया। उनकी मितानीन दवाई पेटी का निरीक्षण किया गया तथा तथा मितानीन दीदी से ग्राम की जनसंख्या, समस्त का स्वास्थ्य जाँच, सिकलिन जॉच एवं ग्राम में किसी प्रकार की अन्य स्वास्थ्यगत समस्याओं पर जानकारी ली गई।
तदुपरांत अपर मुख्य सचिव ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र झलप वि.ख. महासमुन्द का निरीक्षण किया गया, जहाँ पर ऑनलाईन ओपीडी पर्ची एवं संबंधित पोर्टल की जानकारी ली गई। लैब टेस्ट, दवाईयों की उपलब्धता, एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता, संस्थागत प्रसव व आईपीडी की जानकारी ली गई। संस्था के नेत्र सहायक अधिकारी से उक्त क्षेत्र में स्कूलों में किये गये नेत्र जाँच तथा निःशुल्क चश्मा वितरण की जानकारी ली गई। आईपीडी के विरूध्द शत् प्रतिशत् आयुष्मान क्लेम करने तथा विगत वर्ष आयुष्मान क्लेम से प्राप्त राशि एवं इस वर्ष उक्त राशि में वृध्दि आदि की जानकारी लेते हुए मरीजों को उचित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु हेतु निर्देशित किया गया।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उप स्वास्थ्य केन्द्र) टेका का निरीक्षण
इसके उपरांत आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उप स्वास्थ्य केन्द्र) टेका वि.ख. पिथौरा का निरीक्षण किया गया, जहाँ पर ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक (महिला) से स्वास्थ्य सुविधाओं व उपलब्ध दवाईयों तथा गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाले सुविधाओं की जानकारी लेते उच्च जोखिम वाली महिलाओं की सूची बोर्ड में प्रदर्शित करते हुए उनका नियमित फॉलोअप करने हेतु निर्देशित किया गया।
मरीजों से स्वास्थ्य सुविधा की गुणवत्ता तथा प्रदाय किये जा रहे भोजन के बारे में जानकारी ली गई
अपर मुख्य सचिव ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र झलप एवं उप स्वास्थ्य केन्द्र टेका को NQAS हेतु तैयार करने हेतु निर्देशित किया गया है। निरीक्षण के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बसना का निरीक्षण किया गया, उक्त संस्था के एक्स-रे कक्ष, ओपीडी आईपीडी कक्ष एवं लैब आदि का निरीक्षण किया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बसना में पोषण पुर्नवास केन्द्र प्रारंभ करने हेतु प्रस्ताव भेजने तथा सिजेरियन प्रसव प्रारंभ करने हेतु आवश्यक कार्यवाही के निर्देश सीएमएचओ महासमुन्द को दिया गया। आईपीडी के विरूध्द शत् प्रतिशत् आयुष्मान क्लेम करने हेतु निर्देशित किया गया। मरीजों से स्वास्थ्य सुविधा की गुणवत्ता तथा प्रदाय किये जा रहे भोजन के बारे में जानकारी ली गई।
निरीक्षण के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सरायपाली का भी निरीक्षण किया गया, जहाँ पर सर्वप्रथम ओपीडी कक्ष में ऑनलाईन पर्ची एवं संबंधित पोर्टल की जानकारी ली गई। उसके उपरांत फार्मेसी कक्ष में दवाई वितरण प्रणाली की जानकारी लेते हुए संस्था में उपलब्ध दवाईयों की जानकारी ली गई। इसी कड़ी में लैब का निरीक्षण किया गया, जहाँ पर लैब रिपोर्ट के ऑनलाईन एंट्री एवं मरीजों को व्हाट्सअप व हार्ड कॉपी में दिये जाने की जानकारी प्रदाय किया। इसके उपरांत एक्स-रे कक्ष, स्टोर रूम का भ्रमण किया गया। पोषण पुर्नवास केन्द्र सरायपाली के निरीक्षण के दौरान भर्ती बच्चे के मॉ से संस्था द्वारा दिये जा रहे भोजन व नास्ता व उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली गई तथा उन्हें डिस्जार्च होने के उपरांत शासन की ओर से मरीजों को दिये जाने वाले राशि की जानकारी दी गई। इसके उपरांत लेबर रूम में भर्ती मरीजों से प्रदाय स्वास्थ्य सुविधा की गुणवत्ता व प्रसव उपरांत कितने दिनों तक भर्ती रखे जाने आदि के संबंध में चिकित्सकों से जानकारी ली गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सरायपाली में सिजेरियन प्रसव प्रारंभ करने हेतु निश्चेतना विशेषज्ञ की पदस्थापना एवं अन्य आवश्यक सुविधा हेतु प्रस्ताव प्रेषित करने हेतु निर्देशित किया गया। निरीक्षण के दौरान उप संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, सीएमएचओ महासमुन्द, डीपीएम महासमुन्द एवं राज्य स्तर के अधिकारी उपस्थित रहे।

*खाना खाने के बाद करें वॉक, कंट्रोल में रहेगा डायबिटीज़*

22-Jun-2024

एक ताज़ा स्टडी के मुताबिक़ खाना खाने के बाद महज़ 10 से 15 मिनट की वॉक करने से डायबिटीज़ कंट्रोल में रहता है। खासकर, जो लोग प्री डायबिटिक है अगर वो खाना खाने के बाद तुरंत वॉक करते हैं तो इससे डायबिटीज का खतरा टल जाएगा। आयरलैंड यूनिवर्सिटी की रिसर्च के मुताबिक़ है डायबिटीज या प्री डायबिटीज के मरीजों को ये वॉक खाना खाने के एक से डेढ़ घंटे के बीच में ही कर लेनी चाहिए। क्योंकि खाना खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल हाई होता है। ऐसे में कुछ मिनट की वॉक से ये तेज़ी से घटकर नॉर्मल हो जाता है।

बेहतर डाइट और एक्सरसाइज से डायबिटीज होगा कंट्रोल

डॉक्टरों ने डायबिटीज को काबू में रखने और उससे निजात पाने के लिए नया फॉर्म्युला ईजाद किया है। हेल्थ क्सपर्ट के मुताबिक़ अगर डायबिटीज के मरीजों के भोजन में 20% प्रोटीन, 50-56% कार्बोहाइड्रेट और 30% से कम फैट शामिल हो तो डायबीटीज को कंट्रोल में रखा जा सकता है। जीवन शैली में बदलाव के अलावा भोजन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा घटाकर और प्रोटीन की मात्र बढ़ाकर लगाम लगाई जा सकती है। डाइट के साथ ही डायबिटीज के मरीजों को नियमित रूप से एक्सरसाइज़ और योगा करना चाहिए। योग या एक्सरसाइज़ करने से सिर्फ डायबिटीज ही कंट्रोल नहीं होता है बल्कि और भी कई परेशानियों से आराम मिलता है। एक्सरसाइज़ करने से ब्लड शुगर की मात्रा कम होती है और इन्सुलिन बढ़ता है। आप अपने एक्सरसाइज़ में ब्रिस्क वॉक, स्विमिंग, सीढ़ियां चढ़ना और डांस जैसी कई एक्टिविटी शामिल हैं।


*बीएसपी के सेक्टर नौ हॉस्पिटल में शुरू हुई ब्रेस्ट कैंसर की ब्रेस्ट कन्जर्विंग सर्जरी*

22-Jun-2024

भिलाई (शोर सन्देश)। ब्रेस्ट कैंसर संपूर्ण विश्व एवं हमारे देश की महिलाओं में होने वाली एक आम कैंसर है। पारंपरिक रूप से इसके इलाज में पूरे स्तन को सर्जरी द्वारा निकाला जाता था, जिससे महिलाओं में कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्याओं का समना करना पड़ता था किन्तु समय के साथ ब्रेस्ट कैंसर के उपचार एवं सर्जरी में बदलाव आते गए अब इसके ईलाज में पूरे स्तन को निकालने की आवश्यकता नहीं पड़ती, सिर्फ  गठान ट्यूमर वाले भाग को निकालना पड़ता है।सर्जरी की इस पद्धति को ब्रेस्ट कन्जर्विंग सर्जरी बीसीएस कहा जाता है। अब यह सर्जरी भिलाई इस्पात संयंत्र के मुख्य चिकित्सालय जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र में शुरू हो गई है। हाल ही में स्तन कैंसर से पीडि़त दो महिलाओं में यह सर्जरी सफलतापूर्वक किया गया। यह सर्जरी, मुख्य सलाहकार एवं युनिट प्रमुख बी सी एस डॉ. मनीष देवांगन के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम द्वारा किया गया। टीम के अन्य सदस्यों में वरिष्ठ सलाहकार डॉ. धीरज शर्मा एवं सलाहकार डॉ. राज शेखर राव शामिल थे। मुख्य चिकित्सा अधिकार प्रभारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. रविन्द्रनाथ एम ने सर्जरी टीम के सभी डॉक्टरों के सराहनीय प्रयासों से इस उपलब्धि के लिए उनकी प्रशंसा की। उन्होंने यह भी बताया कि जेएलएन अस्पताल में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत नि:शुल्क सर्जरी की सुविधा भी प्रदान की जाती है और अब तक 132 मरीजों ने इसका लाभ लिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. प्रमोद बिनायके ने समस्त सर्जरी टीम को बधाई दी। उन्होने बताया यह सर्जरी न सिर्फ  भिलाई इस्पात संयंत्र बल्कि इस अंचल के सभी नागरिकों  के लिए काफी लाभप्रद साबित होगी।मुख्य चिकित्सा अधिकार (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. विनीता द्विवेदी के अनुसार, यह सर्जरी ब्रेस्ट कैंसर से लड़ रही महिलाओं के लिए मददगार साबित होगी, जिससे वह आत्मविश्वास के साथ सर्जरी के बाद भी अपना जीवन निर्वहन कर सकेगी। इस सर्जरी को सफल बनाने में प्रमुख रेडियो डायग्नोसिस डॉ. प्रतिभा ईस्सर, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अतुल श्रीवास्तव, मुख्य सलाहकार एनेस्थीसिया डॉ. जयिता सरकार एवं वरिष्ठ सलाहकार पैथोलॉजी डॉ. प्रिया साहू की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

 

हार्ट अटैक के बाद फट गई थी दिल की दीवाल, मेकाहारा के डॉक्टरों ने बचाई जान...

02-Dec-2023

रायपुर (शोर संदेश ) डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय  के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में हार्ट अटैक के कारण दिल में हुए छेद जिसको मेडिकल भाषा में "वेन्ट्रीकुलर सेप्टल रफ्चर (वी.एस.आर. VSR)' कहा जाता है,ऐसे मरीज की सफल सर्जरी कर एवं मरीज की जान बचाकर चिकित्सा जगत में नया इतिहास रच दिया गया। यह ऑपरेशन हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. कृष्णकांत साहू एवं टीम द्वारा किया गया। ऑपरेशन के 15 दिनों बाद मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। हार्ट सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू एवं टीम की इस शानदार सफलता पर अस्पताल अधीक्षक डॉ. एस. बी. एस. नेताम ने बधाई दी है।

डाॅ. साहू बताते हैं, कि यह मरीज आज से कुछ माह पहले उनके ओपीडी में छाती में दर्द की शिकायत से पहुंचे। ईसीजी एवं अन्य जांच से पता चला कि उनको हार्ट अटैक आया है एवं उनको एंजियोग्राफी के लिए तत्काल कार्डियोलाॅजी विभाग में भेज दिया गया। वहां पर एंजियोग्राफी करने से पता चला कि उनके हृदय की मुख्य कोरोनरी आर्टरी (धमनी) में ब्लाक (रूकावट) है जिसको कार्डियोलाजिस्ट द्वारा एन्जियोप्लास्टी (stent स्टेंट लगाने) के बाद एक से दो दिन तक मरीज ठीक रहा परन्तु तीसरे ही दिन उसकी सांस फूलने लगी, पेशाब बनना बंद हो गया, बी.पी. बहुत ही कम (70/40mmHg) हो गया एवं शरीर में पानी भरना प्रांरभ हो गया एवं उसके बाद कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा पुनः इकोकार्डियोग्राफी करने पर पता चला कि उनकी दो वेन्ट्रीकल, लेफ्ट और राइट वेन्ट्रीकल के बीच की दीवाल में हार्ट अटैक के कारण बड़ा सा छेद हो गया था|। इसी छेद को ही वेन्ट्रीकुलर सेप्टल रफ्चर कहते है। यह छेद इसलिए होता है क्योंकि हार्ट अटैक में हृदय की धमनी में थक्का बनने के कारण रक्त प्रवाह में रूकावट आ जाती है, जिससे हृदय की मांसपेशियों में रक्त नहीं पहुँच पाने के कारण गलना प्रांरभ हो जाता है एवं गली हुई मांसपेशियां हृदय के ब्लड प्रेशर को झेल नहीं पातीं और उस स्थान पर छेद हो जाता है। यदि यही छेद हृदय के बाहरी दीवाल में होता है, तो मरीज की मृत्यु कुछ ही मिनटों में हो जाती है।

 



इकोकार्डियोग्राफी में पता चला कि यह छेद (V. S. R.) इतना बड़ा था, कि इसमें कोई भी छेद बंद करने वाली डिवाइस नहीं लग सकती थी इसलिए इस मरीज को हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में डाॅ. कृष्णकांत साहू के पास रिफर कर दिया गया। डाॅ. साहू बताते हैं कि इस मरीज की स्थिति बहुत ही ज्यादा खराब थी। ब्लड प्रेशर 70/40 mmHg एवं आक्सीजन सैचुरेशन (SPO2) 80% हो रहा था। पेशाब का आना बिल्कुल बंद हो गया था। फेफड़ों में सूजन था (पल्मोनरी एडीमा) था एवं हृदय केवल 20 प्रतिशत कार्य कर रहा थ। ऐसे मरीजों की बचने की संभावना बिल्कुल ना के बराबर होती है। इस स्थिति को एक्युट कार्डियक फेल्योर विद पल्मोनरी एडीमा कहा जाता है।

 



इस मरीज को आईसीयू में रखकर वेन्टीलेटर एवं दवाईयों के सर्पोट से ब्लड प्रेशर एवं अन्य हीमोडायनेमिक्स को ठीक करने की कोशिश की गई। दवाईयों के प्रांरभ होने से मरीज का ब्ल्ड प्रेशर ठीक हुआ एवं पेशाब आना प्रांरभ हुआ। मरीज के शरीर में लगभग 12 से 13 लीटर पानी जमा हो गया था। वजन 72 किलो से 57 किलो में आ गया। रक्त में क्रिएटिनिन लेवल 7.2mg  से 0.8mg आने में लगभग 58 दिन से भी ज्यादा लग गए। डॉ. साहू के मुताबिक, इस प्रकार के अधिकांश मरीज हम तक पहुंच ही नहीं पाते एवं रास्ते में ही दम तोड़ देते है।

ऐसे हुआ ऑपरेशन
मरीज एवं उनके रिश्तेदारों को समझा दिया गया था, कि इस प्रकार की बीमारी (वेन्ट्रीकुलर सेप्टल रफ्चर) में बचने की उम्मीद ना के बराबर होती है क्योंकि मरीज का हृदय 20 प्रतिशत ही काम कर रहा था। इस ऑपरेशन में मरीज के हृदय की धड़कन को हार्ट लंग मशीन की सहायता से रोककर बाएं वेन्ट्रीकल को काटकर छेद वाले हिस्से को विशेष प्रकार के कपड़े (जिसको डबल वेल्योर डेक्रान कहा जाता है) से रिपेयर किया गया एवं लेफ्ट वेन्ट्रीकल के मृत दीवाल को काटकर अलग किया गया एवं विशेष तकनीक से लेफ्ट वेन्ट्रीकल की साइज को छोटा किया गया, जिसको "वाल्युम रिडक्सन लेफ्ट वेन्ट्रीकुलोप्लास्टी" कहा जाता है। आपरेशन के पश्चात् मरीज के हृदय को सर्पोट देने के लिए इंट्रा एओर्टिक बलून पंप (IABP machine ) लगाया गया।
 
यह मरीज ऑपरेशन के बाद 03 दिनों तक वेन्टीलेटर सपोर्ट में रहा एवं ऑपरेशन के 15 दिनों बाद मरीज को अस्पताल से छुटी दे दी गयी। डिस्चार्ज के समय मरीज एवं उनके रिश्तेदारों की आंखों में खुशी के आंसू थे, क्योंकि ऑपरेशन के पहले ही उनको बता दिया गया था कि ऐसी बीमारी वाले मरीज ऑपरेशन के बाद भी नहीं बच पाते। उनके रिश्तेदारों का कहना था कि हमें आपके हार्ट सर्जरी विभाग के डाॅक्टरों पर बहुत विश्वास था और है क्योंकि मरीज सिंचाई विभाग में शासकीय सेवा में कार्यरत् है। तो हम कोई भी बडे़ से बड़े अस्पताल जा सकते थे लेकिन हमको विश्वास यहां के डॉक्टरों पर ज्यादा था।


युवाओं में नेतृत्व व परोपकार की भावना जागृत करता है एनएसएस : ज्ञानेश शर्मा

25-Sep-2023

रायपुर (शोर सन्देश))। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आज उच्च शिक्षा विभाग के तहत संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना का स्थापना दिवस एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वर्ष 2022-23 के राज्य स्तरीय सेवा योजना के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्यक्रम अधिकारी, संस्था एवं स्वयंसेवकों को पुरस्कार राशि के तौर पर कुल मिलाकर 3 लाख रूपए की चेक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

समारोह में छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष ज्ञानेश शर्मा, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.एस.कुरिल विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय सेवा योजना की स्थापना 24 सितंबर 1969 को हुआ था। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत लगभग एक लाख 4 हजार स्वयंसेवक जुड़े है।       छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष ज्ञानेश शर्मा ने राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत चलाए जा रहे कार्यो की सराहना की। उन्होंने सभा में मौजूद राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक, कार्यक्रम अधिकारी एवं कार्यक्रम समन्वयक को संबोधित करते हुए कहा कि इस योजना के तहत छात्र-छात्राएं शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन सहित आपदा एवं विकट परिस्थितियों में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। एन.एस.एस. युवाओं का संगठन हैं इसमें शामिल युवाओं में संगठात्मक क्षमता, नेतृत्व कौशल का विकास होता है। इसमें शामिल छात्र अनेक सामुदायिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। जिससे उनके व्यक्तित्व में निखार आता है और उनमें परोपकार की भावना का विकास होता है। उन्होंने कहा कि एन.एस.एस. के कार्यक्रमों में योग को शामिल किया गया है। शर्मा ने लोगों से योग को दिनचर्या में शामिल करने का आग्रह करते हुए कहा कि प्रतिदिन योग करने से शारीरिक एवं मानसिक क्षमता का विकास होता है और हम जो जीवन में हासिल करना चाहते हैं उसे हासिल कर सकते हैं।    इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का नारा ‘‘मैं से पहले हम‘‘ संगठन को और भी मजबूत बनाता है। एन.एस.एस. के जुड़े स्वयंसेवक रक्तदान, वृक्षारोपण, जागरूकता से संबंधित कार्य सहित आपदा के समय अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि एन.एस.एस. के तहत चलाए जा रहे कार्यों से छात्रों में व्यक्तित्व का विकास होता है। अगर व्यक्ति में शैक्षणिक प्रगति के साथ-साथ व्यक्तित्व का भी विकास हो तो वह जो बनना चाहे बन सकता हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में 2004 से एन.एस.एस. की शुरूआत हुई। आज विश्वविद्यालय के 5 हजार से ज्यादा छात्र-छा़त्राएं इस संगठन से जुड़कर देश व समाज के प्रति अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि एन.एस.एस. से नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। इसमें शामिल छात्र देशप्रेम का भावना से ओतप्रोत होते हैं और समाज को आगे बढ़ाने में भी इनका योगदान महत्वपूर्ण होता है।

 



कार्यक्रम में विश्वविद्यालय स्तर पर अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर, संस्था (ईकाई) स्तर पर कमला नेहरू महाविद्यालय कोरबा, संस्था (ईकाई) स्तर पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अघिना सलका सरगुजा, कार्यक्रम अधिकारी महाविद्यालय स्तर पर श्रीमती कमला बाई दीवान शासकीय महाविद्यालय बलौदा, महासमुंद और संजय बघेल विज्ञान एवं कला महाविद्यालय पामगढ़ जांजगीर-चांपा, कार्यक्रम अधिकारी विद्यालय स्तर पर वीरेन्द्र कुमार बंजारे शासकीय उच्चतर विद्यालय चैतमा कोरबा एवं डॉ. गणेश प्रसाद साहू शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भोथली धमतरी सहित महाविद्यालय स्तर के 14 एवं विद्यालय के 6 स्वयं सेवक का पुरस्कार राशि का चेक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

 

 



कार्यक्रम का संचालन एन.एस.एस. समन्वयक डॉ.आर.पी. अग्रवाल ने किया। समारोह मे डॉ. नीता वाजपेयी एन.एस.एस. अधिकारी उच्च शिक्षा विभाग, डॉ. पीके सांगोड़े कार्यक्रम समन्वयक राष्ट्रीय सेवा योजना इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, डॉ. अशोक तोती क्षेत्रीय निदेशक भारत सरकार युवा कार्यक्रम खेल मंत्रालय, डॉ. संजय शर्मा अधिष्ठाता छात्र कल्याण इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय सहित राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी एवं स्वयंसेवक मौजूद थे।

 

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय स्तर पर अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर, संस्था (ईकाई) स्तर पर कमला नेहरू महाविद्यालय कोरबा, संस्था (ईकाई) स्तर पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अघिना सलका सरगुजा, कार्यक्रम अधिकारी महाविद्यालय स्तर पर श्रीमती कमला बाई दीवान शासकीय महाविद्यालय बलौदा, महासमुंद और संजय बघेल विज्ञान एवं कला महाविद्यालय पामगढ़ जांजगीर-चांपा, कार्यक्रम अधिकारी विद्यालय स्तर पर वीरेन्द्र कुमार बंजारे शासकीय उच्चतर विद्यालय चैतमा कोरबा एवं डॉ. गणेश प्रसाद साहू शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भोथली धमतरी सहित महाविद्यालय स्तर के 14 एवं विद्यालय के 6 स्वयं सेवक का पुरस्कार राशि का चेक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन एन.एस.एस. समन्वयक डॉ.आर.पी. अग्रवाल ने किया। समारोह मे डॉ. नीता वाजपेयी एन.एस.एस. अधिकारी उच्च शिक्षा विभाग, डॉ. पीके सांगोड़े कार्यक्रम समन्वयक राष्ट्रीय सेवा योजना इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, डॉ. अशोक तोती क्षेत्रीय निदेशक भारत सरकार युवा कार्यक्रम खेल मंत्रालय, डॉ. संजय शर्मा अधिष्ठाता छात्र कल्याण इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय सहित राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी एवं स्वयंसेवक मौजूद थे।

*धान खरीदी को लेकर मंत्री चौबे का बड़ा बयान, कहा : नवंबर से पहले शुरू होगी खरीदी...*

25-Aug-2023

रायपुर (शोर सन्देश)। प्रदेश में धान खरीदी को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि इस बार प्रदेश में में धान खरीदी एक नवंबर से पहले होगी। मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि धान खरीदी मौसम पर आधारित प्रक्रिया है, इसलिए धान खरीदी पर सब कैबिनेट निर्णय लेगी। बता दें कि प्रदेश में इस बार नवंबर में ही विधानसभा चुनाव हैं, इसके पहले खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में 1 नवंबर से ही धान खरीदी की गई थी। लेकिन इस बार सरकार इसके पहले से ही खरीदी करने का प्लान बना रही है। आपको बाता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य ने खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी तक 107 लाख 51 हजार 858 मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी कर एक नया रिकॉर्ड कायम कर बीते साल 98 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था। छत्तीसगढ़ देश में पंजाब के बाद दूसरा राज्य है, जहां सर्वाधिक मात्रा में धान खरीदा गया है। समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों की संख्या के मान से यदि देखा जाए, तो छत्तीसगढ़ पूरे देश में अव्वल स्थान पर है। राज्य में 23 लाख 41 हजार 935 किसानों ने अपना धान समर्थन मूल्य पर बेचा है।


सुबह कौन सा फल खाना चाहिए जानिए यहां

06-Aug-2023

 आजकल की लाइफस्टाइल में स्वस्थ रहना भी एक टास्क से कम नहीं है। शरीर को फिट रखने के लिए पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जो हमें ताजे फलों और सब्जियों से मिलते हैं। बीमारियों से बचने और खुद को फिट रखने के लिए डाइट में फलों की मात्रा ज्यादा रखनी चाहिए। फल खाने से पातन तंत्र अच्छे से काम करता है और आप हेल्दी रहते हैं। दिन की शुरुआत अगर फलों से करें तो आप पूरे दिन एनर्जेटिक महसूस करेंगे। अब लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि खाली पेट कौन सा फल सबसे अच्छा है? यहां हम आपको उन फलों के नाम बताने वाले हैं जिन्हें आप सुबह के समय खा सकते हैं।


फल कितने बजे खाना चाहिए?

कुछ फल हैं जिन्हें आप खाली पेट सुबह खा सकते हैं लेकिन कई फल ऐसे भी हैं जिन्हें नाश्ते और लंच के बीच के समय यानी 10 बजे से लेकर 12 बजे तक खाएं तो सेहत पर अच्छा असर पड़ता है। ऐसे बहुत से फल हैं जिनमें फाइबर की मात्रा प्रोटीन से ज्यादा होती है, जिस वजह से इन्हें सुबह के समय खाने के बजाए मिड मॉर्निंग में खाने से फायदा मिलता है।


खाली पेट खाए जाने वाले फलों के नाम


कीवी

फाइबर के साथ कई पोषक तत्वों से भरपूर कीवी को आप खाली पेट खा सकते हैं। डेंगू की बीमारी में भी कीवी फायदेमंद होता है, इसे खाने से पाचन तंत्र अच्छे से काम करता है और शरीर को एनर्जी मिलती है।


सेब

खाली पेट आप सेब खा सकते हैं, इसे खाने से आपको वजन कंट्रोल करने में भी फायदा मिलेगा। पोषक तत्वों से भरपूर सेब खाने से आपको कब्ज, गैस से छुटकारा मिलेगा और पाचन तंत्र दुरुस्त होगा।


अनार

एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर अनार का सेवन आप खाली पेट कर सकते हैं। अनार खाने से शरीर में आयरन की कमी पूरी होगी और इम्यूनिटी भी बूस्ट होगी।


पपीता

पपीता खाने के शरीर को अनेक फायदे मिलते हैं। पपीता खाली पेट खाया जा सकता है। फाइबर से भरपूर पपीता वजन कंट्रोल करने में सहायक है और कोलेस्ट्रॉल लेवल भी सही रखता है। इसे खाने से अपच, कब्ज और पेट फूलना जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।

ये लेख सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)


इन बीमारियों में खाएं करौंदा, मिलेगा लाभ

04-Aug-2023

करौंदा का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में बस इसका खट्टापन आता है। फिर इसका अचार आता है। लेकिन, करौंदा के फायदे इससे काफी ज्यादा हैं। जी हां, करौंदा एक ऐसा फल है जिसमें विटामिन सी के अलावा सबसे ज्यादा विटामिन बी और आयरन होता है। इसके अलावा इसमें कुछ खास एंटीऑक्सीडेंट्स, जैसे एल्कलॉइड्स, टैनिन, कैरिसोन ट्राइटरपीनोइड्स और फ्लेवोनॉइड्स होते हैं। ये तमाम चीजें दिल की सेहत को बेहतर बनाने के साथ शरीर में सूजन को कम करते हैं। तो, आइए आज जानते हैं उन बीमारियों के बारे में जिनमें करौंदा का सेवन फायदेमंद है।

स्कर्वी
स्कर्वी की बीमारी, शरीर में विटामिन सी की कमी के कारण होती है। करौंदा विटामिन सी से भरपूर होता है जो कि इसकी कमी को दूर कर सकता है। इसके अतिरिक्त, इस कसैले फल में एंटीस्कॉर्ब्यूटिक गुण होता है जो कि स्कर्वी के लक्षणों जैसे कि दांत से खून आना, जोड़ों का दर्द, कमजोरी या थकान और घावों में सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। तो, अगर आप चाहते हैं इस बीमारी से बचना तो, करौंदा खाएं।

ब्लैडर इंफेक्शन में फायदेमंद है करौंदा
ब्लैडर इंफेक्शन में आप करौंदा का सेवन कर सकते हैं। दरअसल, करौंदा जो कि एंटी बैक्टीरियल है और एंटी एंफ्लेमेटरी भी आपको ब्लैडर इंफेक्शन के लक्षणों को कम कर सकता है। ब्लैडर यानी कि पेशाब की थैली जिसे समय-समय पर साफ करना यानी पूरी तरह से फ्लश ऑउट करके डिटॉक्स करना बेहद जरूरी है। ऐसे में करौंदा जो कि ड्यूरेटिक है यानी मूत्रवर्धक है ब्लैडर को फ्लश ऑउट करके साफ करने में मददगार है।

दिल के मरीजों के लिए फायदेमंद
करौंदा हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। सप्ताह में दो बार इसका सेवन हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मददगार है। ये दिल के दौरे और हाई बीपी जैसे हृदय रोगों का खतरा कम करता है और साथ ही शरीर के सभी अंगों में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। तो, अगर आप अपने दिल को हेल्दी रखना चाहते हैं तो भी आपको करौंदा का सेवन करना चाहिए।

एनीमिया में खाएं करौंदा
एनीमिया में आप करौंदा खा सकते हैं। ये असल में आयरन से भरपूर है जो कि शरीर में रेड ब्लड सेल्स को बढ़ावा देता है और खून की कमी से बचाता है। तो, अगर आपके शरीर में खून की कमी है या फिर आप एनीमिया के लक्षणों से पीड़ित हैं तो आप करौंदा खा सकते हैं या फिर इसका जूस पी सकते हैं। तो, इन तमाम कारणों से आपको करौंदा खाना चाहिए।

(ये लेख सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)


अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने 3 अगस्त को मनाया जाएगा अंगदान महोत्सव

01-Aug-2023

 रायपुर  (शोर संदेश ) अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने प्रदेश में 3 अगस्त को भारतीय अंगदान दिवस पर अंगदान महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने परिपत्र जारी कर सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र (SHRC) के संचालक को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। संचालक, चिकित्सा शिक्षा ने भी सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों के डीन को परिपत्र जारी कर इसके आयोजन के निर्देश दिए हैं।
केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने तथा इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए सभी राज्यों को 3 अगस्त को अंगदान महोत्सव के आयोजन के लिए निर्देशित किया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने पत्र में राज्यों को बताया है कि भारत सरकार ने देश में अंग खरीदी और वितरण की एक कुशल और संगठित प्रणाली प्रदान करने और दाताओं की एक राष्ट्रीय रजिस्ट्री बनाए रखने के लिए एक शीर्ष संगठन राष्ट्रीय अंग और उत्तक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के साथ ही क्षेत्रीय और राज्य स्तर पर समान संगठनों की स्थापना की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संचालक भोसकर विलास संदिपान ने भारत सरकार के पत्र का उल्लेख करते हुए सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र को जारी परिपत्र में कहा है कि अंगदान और प्रत्यारोपण की सुविधा के लिए स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। एक अंगदाता आठ लोगों की जान बचा सकता है। अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता और इसके लिए उपलब्ध अंगदाताओं के बीच एक बड़ा अंतर मौजूद है। अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने 3 अगस्त को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों के अधीनस्थ चिकित्सालयों में अंगदान महोत्सव का आयोजन करने को कहा है। मिशन ने इस दौरान अंगदान के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार कर लोगों को जागरूक करने के साथ ही प्रतिज्ञा समारोह जैसी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जनसामान्य के बीच अंग एवं उत्तक दान के बारे में जानकारी प्रसारित करने को कहा है।

 

 


अगर आपकी आंखों में भी हो रही हैं ये समस्याएं तो हो जाएं सावधान

31-Jul-2023

 देशभर में इन दिनों आई फ्लू के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही हैं। मानसून के सीजन में यूं तो हर साल कंजक्टिवाइटिस के मामले देखने को मिलते हैं, लेकिन बीते वर्षो की तुलना में इस साल आई फ्लू के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञ और डॉक्टर लगातार लोगों को सावधानी बरतनी की सलाह दे रहे हैं।

आंख के सफेद हिस्से और पलकों के अंदरूनी हिस्से कंजक्टिवा को ढकने वाली पतली और पारदर्शी परत में सूजन होने की वजह से आई फ्लू की समस्या होती है। अगर समय रहते कंजेक्टिवाइटिस का इलाज न किया जाए, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि इसके लक्षणों और संकेतों की सही समय पर पहचान कर इसका तुरंत इलाज किया जाए, ताकि इसके गंभीर परिणामों से खुद को बचाया जा सके। आप निम्न लक्षणों से इसकी पहचान कर सकते हैं।

लाल या गुलाबी आंखें

कंजेक्टिवाइटिस के सबसे आम और पहचानने योग्य लक्षणों में से एक आंखों का लाल होना है। ब्लड वेसल्स के फैलाव के कारण कंजक्टिवा में सूजन हो जाती है, जिसकी वजह से आंखें गुलाबी या लाल दिखाई देने लगती है। यह रेडनेस एक या दोनों आंखों को प्रभावित कर सकती हैं। अगर आपकी आंख लगातार लाल या गुलाबी रंग की नजर आ रही है, तो यह आई फ्लू का लक्षण हो सकता है।

अत्यधिक आंसू आना

अगर आपको अचानक आंखों से आंसू या पानी आने की समस्या हो रही है, तो सतर्क हो जाएं। सूजन या जलन की वजह से अक्सर आई फ्लू में आंखों से पानी आने लगता है। यूं तो स्वस्थ आंखों के लिए आंसू जरूरी है, लेकिन अगर आपको रेडनेस और असुविधा के साथ आंखों से लगातार पानी आ रहा है, तो यह कंजेक्टिवाइटिस हो सकता है।

आंखों से डिस्चार्ज निकलना

कंजेक्टिवाइटिस की वजह से अक्सर आंखों के प्रभावित हिस्से से डिस्चार्ज होने लगता है। हालांकि इसकी कंसिस्टेंसी और रंग अलग हो सकते हैं। आंखों से निकलने वाला यह डिस्चार्ज पतला, पानी जैसा तरल भी हो सकता है या फिर पीले या हरे रंग का गाढ़ा पदार्थ भी हो सकता है। इसकी वजह से पलकों के आसपास पपड़ी भी जम सकती है। खासकर सोने के बाद। अगर आपको भी आंखों में इस तरह का असामान्य डिस्चार्ज देखने को मिल रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

खुजली और जलन

आंखों में तेज खुजली और जलन भी कंजेक्टिवाइटिस के सामान्य लक्षण हैं। दरअसल, कंजक्टिवा में सूजन की वजह से यह समस्या हो सकती है। अगर आपको लगातार आंखों को रगड़ने या मलने की तीव्र इच्छा हो रही है, तो यह कंजेक्टिवाइटिस हो सकता है। हालांकि, ध्यान रखें कि इस दौरान आंखों को रगड़ने से बचें, क्योंकि इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

रोशनी के प्रति संवेदनशीलता (फोटोफोबिया)

अगर आपको अचानक ही प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता का अनुभव होने लगा है, तो हो सकता है कि आप कंजेक्टिवाइटिस से पीड़ित हैं। आई फ्लू के दौरान तेज रोशनी के संपर्क में आने से अक्सर आंखों में दर्द होने लगता है। इसे फोटोफोबिया के नाम से भी जाना जाता है। अगर आप प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता के साथ ही आंखों से जुड़ी अन्य लक्षणों को खुद में देख रहे हैं, तो तुरंत किसी नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।

धुंधली दृष्टि

कुछ लोगों को कंजेक्टिवाइटिस की वजह से अस्थाई रूप से ब्लर विजन की समस्या भी हो सकती है। अगर आपको अचानक ही देखने में परेशानी होने लगी है और आंखों में अन्य बदलाव नजर आ रहे हैं, तो हो सकता है कि आप कंजेक्टिवाइटिस का शिकार हो चुके हैं।



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