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स्वास्थ्य विभाग : होम क्वारेंटाइन सेंटर में रहने वाले नियमों का कड़ाई से करें पालन

23-May-2020

रायपुर (छत्तीसगढ़) स्वास्थ्य विभाग ने होम-क्वारेंटाइन और क्वारेंटाइन सेंटर्स में रह रहे लोगों से नियमों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है। कोविड-19 का संक्रमण रोकने दूसरे राज्यों से आए सभी नागरिकों को क्वारेंटाइन किया जा रहा है। प्रवासियों को शासन की ओर से बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटर्स या होम-क्वारेंटाइन के जरिए दो हफ्ते तक स्थानीय व्यक्तियों के संपर्क से अलग रखा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने तैनात डॉक्टरों की टीम की ओर से क्वॉरेंटाइन किए गए लोगों के स्वास्थ्य की नियमित जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार कोरोना वायरस के लक्षण वाले व्यक्तियों के ही सैंपल जांच के लिए संग्रह किए जा रहे हैं। क्वारेंटाइन में रह रहे लोगों में लक्षण दिखने पर ही जांच के लिए सैंपल लिए जाएंगे। बाहर से आए हुए सभी लोगों को अपनी सम्पूर्ण जानकारी स्थानीय प्रशासन को देना अनिवार्य है। ऐसे व्यक्ति शहरी क्षेत्रों में अपनी जानकारी वार्ड पार्षद, नगर निगम के कर्मचारी या संबंधित पुलिस थाने में दे सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कोटवार, पंचायत सचिव, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी या स्थानीय थाने में जानकारी दी जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग के हेल्पलाइन नंबर 104 पर फोन करके भी जानकारी दर्ज करा सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने होम-क्वारेन्टाइन में रह रहे सभी लोगों से नियमों का कड़ाई से पालन कर अपने सामाजिक दायित्व के निर्वहन और समाज की सुरक्षा का ध्यान रखने की अपील की है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर महामारी नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्यवाही सुनिश्चित करने विभाग ने जागरूक नागरिकों, जन-प्रतिनिधियों एवं समीप में रहने वाले लोगों से पुलिस को जानकारी उपलब्ध कराने की भी अपील की है।
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मास्क लगाना जरूरी, सही तरीके से करें सर्जिकल मास्क का निपटान : एन.जी.टी.
राज्य में सभी लोगों को मास्क या कपड़े से मुंह ढंकना अनिवार्य है। सामान्यत: दो तरह के मास्क प्रचलन में हैं। कपड़े के मास्क का उपयोग करने के बाद उसे साबुन या डिटरजेंट और गर्म पानी से अच्छी तरह धोकर धूप में कम से कम पांच घंटे तक सुखाएं। धूप नहीं मिलने की स्थिति में मास्क को सुखाने के बाद पांच मिनट तक आयरन (प्रेस) अवश्य करें।
सर्जिकल मास्क का उपयोग 6 से 8 घंटे तक ही किया जाना चाहिए। उपयोग के बाद इसका समुचित निस्तारण अनिवार्य है। एन.जी.टी. के दिशा-निर्देशों के अनुसार सर्जिकल मास्क को उपयोग के बाद सेनिटाईज कर कैची से काटें, ताकि इसका उपयोग किसी और के द्वारा किया जा सके। कटे हुए मास्क को एक बंद कचरे के डिब्बे में 72 घंटे रहने दें। तदुपरांत इसे दैनिक उपयोग में लाए जा रहे कचरे के डिब्बे में डालें। 


स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी विकासखंडों को रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में किया वर्गीकृत

23-May-2020

स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति के आधार पर किया वर्गीकरण
रायपुर, (शोर सन्देश) राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी विकासखंडों को रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में वर्गीकृत किया है। विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना शुक्रवार को जारी की। केन्द्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रदेश के सभी विकासखंडों और शहरी क्षेत्रों में कोविड-19 के सक्रिय मामलों की संख्या, इनके दोगुने होने की दर तथा प्रति एक लाख जनसंख्या पर सैंपल जांच के आधार पर उन्हें रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में वर्गीकृत किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने 22 मई की स्थिति के आधार पर यह वर्गीकरण किया गया है। इसे हर सोमवार को अद्यतन किया जाएगा। विभाग ने कलेक्टरों और जिला दंडाधिकारियों की ओर से घोषित कोविड-19 प्रभावित कंटेमेंट जोन की सूची भी जारी की है। प्रदेश में 21 मई की स्थिति में कंटेमेंट जोन घोषित क्षेत्रों की संख्या 44 है। रेड, ऑरेंज ग्रीन जोन तथा कंटेमेंट जोन घोषित क्षेत्रों की संख्या इस प्रकार है।

रेड जोन में बालोद- 1, बिलासपुर- 2, कोरबा- 1, जांजगीर- 7, बलौदाबाजार- 5, बस्तर- 3, बेमेतरा - 1, बीजापुर- 1, दंतेवाड़ा- 1, धमतरी- 6, दुर्ग- 2, मुंगेली- 2, रायगढ़- 2 और ओरेंज जोन में राजनांदगांव- 5, सरगुजा- 7, कांकेर- 3, रायपुर- 5, बलरामपुर- 5, गरियाबंद- 1 जशपुर- 2, कोण्डागांव- 1, कोरिया- 2, महासमुन्द- 5, सूरजपुर- 3, कवर्धा- 2, बिलासपुर- 3 और रायगढ़-6 है। 


सभी मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण करवाएं - सीईओ

08-May-2020

जगदलपुर (छत्तीसगढ़) जिला पंचायत सीईओ इन्द्रजीत चंद्रवाल ने कोर कमेटी की बैठक लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए। जिले की सीमा में आने वाले लोगों की जानकारी त्वरित दें और सभी आने वाले मजदूरों का स्वास्थ्य परिक्षण करवाया जाए। बैठक में सभी राजस्व अधिकारियों को उनके क्षेत्र में आने वाले मजदूरों की सम्भावित सूची अनुसार मिलान करवाने और आने वाले मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण करवाना सुनिश्चित करने कहा गया। सभी ग्राम पंचायतों में स्थापित सभी क्वारेंटाईन सेंटर की व्यवस्था और नोडल अधिकारियों की ड्यूटी लगाने के सम्बंध में भी चर्चा की गई बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी से सीमा चेकपोस्ट में की जा रही स्वास्थ्य परीक्षण की जानकारी ली गई और स्वास्थ्य विभाग ने किए जा रहे सर्वे की भी स्थिति का संज्ञान लिए। आवश्यक सामग्री की आपूर्ति के लिए जिले में रहे ट्रकों के ड्राइवर और हेल्पर ने प्रशासन के निर्धारित नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं इसकी सतत् निगरानी करने के निर्देश सबंधित अधिकारी को दिए। जिले के किसानों ने अपनी सब्जियों को नष्ट करने की खबर पर सीईओ ने कृषि-उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किए कि विभाग के मैदानी कर्मचारियों को किसानों से सम्पर्क कर आवश्यक सहयोग देने के लिए निर्देश दी। इस अवसर पर सहायक कलेक्टर अबिनाश मिश्रा, अपर कलेक्टर अरविंद एक्का सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। 


भिलाई इस्पात संयंत्र ने मरीजों के प्रयोग के लिए वेंटिलेटर का किया निर्माण

03-May-2020

 भिलाई(chhatishgarh), आजकल हम सब सबसे अधिक वेंटिलेटर्स की चर्चा सुन रहे हैं, जिसके बारे में पहले बहुत कम जानकारी रही है वर्तमान परिदृश्य में इसकी बेहद जरूरत महसूस की जा रही है चूँकि कोरोना वायरस के चपेट में आने वाले मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होती है और जब मरीज खुद सांस नहीं ले पाते हैं तब वेंटिलेटर्स ऐसे मरीजों की जिंदगी बचाती हैं भिलाई इस्पात संयंत्र ने देश प्रदेश में बड़े पैमाने पर वेंटिलेटर्स की उपलब्धता की आवश्यकता को महसूस करते हुए आतंरिक संसाधनों से वेंटिलेटर का निर्माण किया है। केंद्रीय अनुरक्षण विभाग के सीआरएमईए ईआरएसए ईटीएलए इंस्ट्रूमेंटेशन तथा इनकास विभागों दवारा संयुक्त रूप से निर्मित इस वेंटिलेटर का उद्घाटन आज सेल के डायरेक्टर ;प्रोजेक्ट एवं व्यापार योजनाद्ध एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनिर्बान दासगुप्ता ने उद्घाटन किया।

वेंटिलेटर क्या है-
आखिर ये वेंटिलेटर है क्याघ् और कोरोना वायरस संक्रमित लोगों के लिए यह कितना और क्यों जरूरी है, आखिर क्यों देश विदेश की बड़ी कंपनियां भी वेंटिलेटर बनाने में जुट गई हैं, बहुत सरल भाषा में कहें तो यह एक मशीन है जो ऐसे मरीजों की जिंदगी बचाती है जिन्हें सांस लेने में तकलीफ है या खुद सांस नहीं ले पा रहे हैं। यदि बीमारी की वजह से फेफड़े अपना काम नहीं कर पाते हैं तो वेंटिलेटर सांस लेने की प्रक्रिया को संभालते हैं। इस बीच डॉक्टर इलाज के जरिए फेफड़ों को दोबारा काम करने लायक बनाते हैं। इसलिए वेंटिलेटर का चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष महत्व है।सामान्यत: वेंटिलेटर का उपयोग आईसीयू में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए किया जाता है।भिलाई इस्पात संयंत्र ने देश प्रदेश में बड़े पैमाने पर वेंटिलेटर्स की आवश्यकता को महसूस किया है।
आतंरिक संसाधनों से निर्मित
इस समय देश प्रदेश आपदा की स्थिति में हैंए इस मुश्किल की घडी में भिलाई इस्पात संयंत्र पूरी तरह से देश प्रदेश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं। इस आपदा की घड़ी में इस्पात की अग्रणी ईकाई भिलाई इस्पात संयंत्र हमेशा की ही तरह अपने मजबूत बुलंद इरादों के साथ देश सेवा के लिए अपने अनुभवों को उत्पाद के रूप में परिणित कार्यान्वित करने को अग्रसर एवं संकल्पित है। इसी सोच के तहत वेंटिलेटर के महत्व को देखते हुए भिलाई इस्पात संयंत्र के केंद्रीय अनुरक्षण विभाग ने चुनौती को अवसर में बदला है।मुख्य महाप्रबंधक विद्युत के मार्गदर्शन में आंतरिक संसाधनों का उपयोग करते हुए वेंटिलेटर का निर्माण किया है। प्रायोगिक तौर पर बनाए गए वेंटिलेटर के निर्माण में संयंत्र में उपयोग में आने वाली विभिन्न मशीनों में प्रयुक्त कलपुर्जों को निकाल कर उपयोग किया गया है।
इसका संचालन होगा आसान
सुरक्षा के मद्देनजर इस मशीन में कई उपाय किए गए हैं। मरीज की अवस्था को देखते हुए एंबू बैग की रफ्तार को पीएलसी की सहायता से आसानी से कम या ज्यादा किया जा सकता हैए जिससे उचित मात्रा में हवा मरीज को प्राप्त हो सके। आकार में छोटा होने के कारण इसका संचालन आसान है। विदित हो कि इस प्रायोगिक वेंटिलेटर का उपयोग किसी वास्तविक मरीज पर नहीं किया गया है वर्तमान मे इसका केवल संयंत्र स्तर पर तकनीकी ट्रायल लिया गया है। इस वेंटीलेटर के निर्माण के अलावा टीम ने एक अन्य प्रकार का वेंटीलेटर का निर्माण भी पूर्णत: आतंरिक संसाधनों से किया है जिसका प्रयोग अति गंभीर मरीजों के लिए किया जा सकेगा। इसके अलावा अस्पताल में प्रयोग होने वाले एक पुराने खराब पड़े वेंटीलेटर को भी टीम ने सुधार कर तैयार किया है।
वेंटीलेटर निर्माण के सृजनशील सदस्य हैं
इस वेंटिलेटर का निर्माण विद्युत संगठन के सीजीएम एवं विभाग प्रमुख पी के सरकार के मार्गदर्शन में पूरा हुआ। इस उपकरण को बनाने में मुख्य रूप से सीआरएमई से मानस रंजन रथ, ईटीएल से दीपक जैन, उमाशंकर बड़वाल, अरूप राय, ईआरएस विभाग से कुंतल बघेल, रेमी थॉमा, इंस्ट्रूमेंटेशन विभाग से जीके कुंडू, सी एस सोनी, डीएनडी से तुषार सिंह, मार्स विभाग से हरीश सचदेव, इनकास से गीतांजलि वर्मा, एसएमएस 2 से बालम सिंह, मेंटेनेंस सेक्टर . 9 से मोहिंदर, एके वर्मा आदि लोगों का सक्रिय भूमिका रही है। वेंटिलेटर की जांच एवं गुणवत्ता परखने के लिए जवाहरलाल नेहरू मुख्य चिकित्सालय का भी सहयोग प्राप्त हुआ है।


पीलिया से बचाव के लिए दुर्ग निगम ने लिया 134 स्थानों से पानी का सेम्पल

03-May-2020

 दुर्ग(chhatishgarh), राज्य शासन के निर्देशानुसार शहर के आम नागरिकों को पीलिया एवं जलजनित रोगों से बचाव के अंतर्गत निगम द्वारा सप्लाई की जा रही पानी का अनेक स्थानों से सेम्पल लेकर पीएचई विभाग से नियमित जांच करायी जा रही है। इस दिशा में विगत दिनों विभिन्न 14 वार्डो के 134 स्थानों से सप्लाई की गई पानी का सेम्पल लेकर पीएचई विभाग से जांच करायी गयी। पीएचई विभाग ने माना सप्लाई की जा रही पेयजल निर्धारित मानक एवं गुणवत्ता के अनुरुप पाया गया है। निगम द्वारा समस्त वार्डो में शुद्ध और स्वच्छ क्लोरिनेटेड पेयजल आपूर्ति की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा निकाय क्षेत्र में गर्मी के समय होने वाले महामारी पीलिया जलजनित जैसे रोगों से बचाव का उपाय करने निकायों को निर्देशित किया गया है। इस संबंध में विधायक अरुण वोरा जी ने भी पानी की जांच कर स्वच्छ पानी सप्लाई करने कहा है। महापौर श्री बाकलीवाल एवं आयुक्त श्री बर्मन के मार्गदर्शन में नगर निगम दुर्ग द्वारा विगत सप्ताह तमेरपारा वार्ड 30 में हेमन्त देवांगन घर के पास, गिरधर अग्रवाल घर, नारायण निवास के पास, गोपाल देवांगन घर के पास, वाटर एटीएम धमधा नाका नया सब्जी गंजमंडी के पास, वार्ड 28 पचरीपारा में आसनदास घर के पास, नासीर खान घर, यादव स्कूल के पास, हनुमान मंदिर के पास, अशोक कुमार मिश्रा घर के पास, वार्ड 32 ब्राम्हण पारा में नरेन्द्र निर्मलकर घर के पास, जैन गली का पानी, जैन गली में विष्णु जोशी घर के पास, गोस्वामी घर के पास, जैन गली राकेश झा घर के पास, धर्मेन्द्र बाकलीवाल घर के पास, सुमान प्रेस घर के पास, मुकेश कुमार सोनी घर के पास, प्रीति देवांगन के घर, कीर्ति देवांगन घर, एच.एल.पाण्डेय घर, भोला ताम्रकार, दया सागर घर के पास, कुमार बाई ताम्रकार, श्ंाकर लाल ताम्रकार घर के पास, मैथिलपारा सिकोला बा? के सामने, अनिल जैन घर के पास, ललित जैन घर के पास, बल्लू जैन घर के पास, वार्ड 20 आदित्य नगर जोन कार्यालय के पास, सिंधिया नगर, अनुमान नगर, बोरसी भाठा मैदान,पदमनाभपुर सब्जी मंडी, राजेन्द्र पार्क, न्यू बस स्टैण्ड, पुलगांव चैक, सुभाष नगर, वार्ड 43 देवांगन किराना स्टोर, मुरलीधर निर्मलकर, आर.एन.चैहान घर, कामिनी सेन घर, अनुसुईया घर, विजय देशमुख घर, लक्ष्मण वाडेकर घर, वार्ड 6 राजेश यादव घर के पास, संतोष यादव, गौकरण सोनी के घर, कृष्णा किराना स्टोर के पास, दरोगा गली गो?पारा, वार्ड 14 महेतरुराम घर के पास, पार्वती राय घर के पास, मीना बाई घर के पास, वार्ड 16 विजय कुमार घर के पास, रंजन सिन्हा घर के पास, शांति भास्कर घर के पास, वार्ड 17 रामानंद शुक्ला घर के पास बलराम साहू घर के पास, संतोष कुमार घर के पास, वार्ड 18 धनसिंह देवांगन घर के पास, मनीराम साहू, किशनराम घर के पास, वार्ड 19 सीमा यादव घर के पास, केशव साहू घर के पास, चंद्रलता घर के पास, वार्ड 34 में शांति बाई घर के पास, जानकी बाई घर के पास, सरिता बाई घर के पास, भोला निषाद, आंगनबा? केन्द्र के पास, वार्ड 44 इंदिरा विश्वकर्मा, शाहीन बेगम घर, शिवराम देवांगन, यशोदा विश्वकर्मा, प्रकाश कुमार घर के पास इसके अलावा वार्ड 15 करहीडीह वार्ड, वार्ड 16 सिकोला बस्ती वार्ड, कसारीडीह वार्ड 43, मठपारा वार्ड 3 सहित कुल 134 स्थानों से पानी का सेम्पल लेकर जांच करायी गयी। जो निर्धारित मानक गुणवत्ता के अनुरुप पाया गया। इस प्रकार निगम द्वारा नियमित रुप से प्रतिदिन पानी का परीक्षण हेतु सेम्पल लेकर जांच हेतु भेजा जा रहा है। तथा शहर के वार्डो में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।


कोरोना एवं पीलिया की रोकथाम एवं नियंत्रण में मितानिनो की अहम भूमिका

03-May-2020

 भिलाई(chhatishgarh) नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र में कोरोना वायरस एवं पीलिया के रोकथाम हेतु निगम प्रशासन हर संभव प्रयास किया जा रहा है। सभी वार्डों में निगम कर्मी घर घर जाकर क्लोरीन टैबलेट बांट रहे है तथा आमजन को शुद्ध या उबला हुआ पानी पीने की सलाह दे रहे है। जोन कं. 01, 02 एवं 04 के जोन आयुक्त ने अपने अपने क्षेत्र के मितानीनों की बैठक लेकर पीलिया बीमारी से आमजन को बचाने योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर चर्चा किए इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया। निगम के स्वास्थ्य विभाग अभियंताओं के साथ मितानीनों का वाटसअप ग्रुप बनाया जा रहा है ताकि पेयजल में दिक्कत होने या किसी व्यक्ति को पीलिया संक्रमण लक्षण होने होने पर तत्काल विस्तृत जानकारी दी जा सके। निगम पाइपलाइन का संधारण, बोरिंग, पावर पंप, पेयजल की जांच, क्लोरीन टैबलेट का वितरण करने के कार्य में लगातार जुटा हुआ है। सभी मितानीनों की बैठक आयोजित की गई जिसमें जलजनित बीमारी पीलिया से बचाव के कार्य में मितानीन भी अपनी भूमिका निभांएगें मितानीनों को पीलिया के लक्षण से संबंधित जानकारी दी गई। मितानीनों को वाटसअप ग्रुप बनाया जा रहा है जिसमें वे कहीं भी पेयजल से संबंधित जानकारी किसी व्यक्ति को पीलिया संक्रमित लक्षण दिखाई देने पर तत्काल विस्तृत जानकारी ग्रुप के माध्यम से भेजेंगे ताकि शीघ्रता से अग्रिम कार्यवाही की जा सके। भिलाई निगम क्षेत्र में विगत माह से क्लोरीन टैबलेट घर-घर बांटे जा रहे है जिसका मितानीनें जानकारी एकत्रित करेंगी और वितरण में छूटे हुए घरों में तत्काल क्लोरीन टेबलेट वितरण करेंगी इसके लिए इन्हें क्लोरीन टेबलेट प्रदान किया गया। भिलाई निगम क्षेत्रांतर्गत अब तक 308384 नग क्लोरीन टेबलेट का वितरण किया जा चुका है इसके साथ ही प्रतिदिन पानी की शुद्धता की जांच की जा रही है। विभिन्न जल स्रोत जैसे कुआं, बोर, टंकी, हस्त पंप आदि के पानी का सैंपल जोन द्वारा लेकर 77 एमएलडी जल शोधन संयंत्र के लैब में भेजकर परीक्षण किया जा रहा है। क्लोरीन टेबलेट के उपयोग की जानकारी बांटे जाने वाले सभी घरों में देने मितानिनो को कहा गया। पीलिया के संभावित मरीज पाए जाने पर तत्काल निकटम स्वास्थ्य केन्द्र से उपचार करवाने के लिए प्रेरित करने कहा गया। बता दें कि क्षेत्रों में मितानिन सक्रियता से कार्य करती है और घर-घर से इनका अच्छा संपर्क होता है।


आपातकालीन चिकित्सा सुविधा के लिए मिली नई एम्बुलेंस

03-May-2020

 दंतेवाड़ा (chhatishgarh) कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने आज राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कटेकल्याण के लिए प्रदत्त नई एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने उक्त एम्बुलेंस में उपलब्ध सुविधा तथा उपकरणों के बारे में जानकारी ली और कहा कि इस नई एम्बुलेंस के माध्यम से जिले के सर्वाधिक दूरस्थ कटेकल्याण इलाके के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा शीघ्रता से उपलब्ध होगी। कलेक्टर श्री वर्मा ने उक्त एम्बुलेंस का समुचित संचालन सहित रखरखाव सुनिश्चित करने का निर्देश अधिकारियों को दिया।इस मौके पर सीईओ जिला पंचायत सच्चिदानंद आलोक, अपर जिला दण्डाधिकारी अभिषेक अग्रवाल, सीएमएचओ डॉ एसपी शाण्डिल्य, सिविल सर्जन जिला अस्पताल डॉ एमके नायक और अन्य अधिकारी मौजूद थे।


बेरोजगार लोगों से अधिक नौकरी वाले रहते हैं परेशान, विश्वास न हो तो पढ़ लीजिए ये रिपोर्ट

13-Aug-2019

 कैनबरा: ऑस्ट्रेलिया में पांच में चार कामकाजी लोग असुरक्षित कामकाजी प्रथा के माहौल में हैं और वे इसके कारण घायल हो रहे हैं, बीमार हो रहे हैं या फिर काम पर दर्दनाक स्थितियों के कारण दोनों से पीड़ित हो जा रहे हैं. एक सर्वेक्षण से यह खुलासा हुआ है. समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट में कहा गया कि \'वर्क शुडन्ड हर्ट\' नाम के इस सर्वेक्षण को ऑस्ट्रेलियन काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एसीटीयू) ने सोमवार को जारी किया, जिसमें 26,000 कामगारों का सर्वेक्षण किया गया. इस सर्वेक्षण से खुलासा होता है कि करीब 80 फीसदी कामकाजी लोग अपने काम के कारण घायल, बीमार या दोनों हैं,

जबकि 16 फीसदी किसी ऐसे आदमी को जानते थे, जिसकी काम के दौरान मौत हो गई, या फिर काम से जुड़ी बीमारियों के कारण मौत हो गई. इसमें यह भी पाया गया कि 47 फीसदी प्रतिभागियों ने बताया कि पिछले 12 महीनों में उन्हें काम के दौरान संकटपूर्ण या दर्दनाक स्थितियों का सामना करना पड़ा और 31 फीसदी ने कहा कि उन्हें सहकर्मियों, क्लाइंट्स या ग्राहकों द्वारा गाली दी गई, धमकी दी गई या मारपीट की गई.

पांच में से तीन कामगारों ने कहा कि पिछले 12 महीनों से वे खराब मानसिक स्वास्थ्य का सामना कर रहे हैं, क्योंकि उनका नियोक्ता असुरक्षित कामकाजी स्थितियों को सुधारने में असफल है. एसीटीयू के सहायक सचिव लियाम ओब्रायन ने फेयरफैक्स मीडिया को सोमवार को बताया कि चोट लगने या मानसिक स्वास्थ्य खराब होने की घटनाओं से \'पूरी तरह से बचा जा सकता\' था.

उन्होंने कहा, "काम पर किसी को तकलीफ नहीं होनी चाहिए - चाहे वह मानसिक रूप से हो या शारीरिक रूप से हो." उन्होंने आगे कहा, "वर्क शुडन्ट हर्ट सर्वेक्षण से पता चलता है कि बहुत सारे कामकाजी लोग काम पर हिंसा, प्रताड़ना और खराब कामकाजी स्थितियों का सामना कर रहे हैं जबकि इसमें से ज्यादातर को रोका जा सकता है."


गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर का लक्षण हो सकता है पेट दर्द, कभी न करें इग्नोर

13-Aug-2019

 गर आपको बार-बार पेटदर्द की शिकायत हो रही है तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें, क्योंकि गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर में भी सामान्य तौर पर पेट दर्द की ही शिकायत होती है. 

नई दिल्लीः सामान्य तौर पर जब भी किसी को पेट दर्द की शिकायत होती है तो वह मेडिकल स्टोर में जाकर पेट दर्द की दवाई ले लेता है या फिर घरेलू नुस्खों से ही पेटदर्द से छुटकारा पाने में लग जाता है, लेकिन इसी पेटदर्द की अनदेखी कई बार आपको गंभीर बीमारियों का लक्षण हो सकता है. ऐसे में कोशिश करें कि कभी भी पेटदर्द और अपच को आप इग्नोर न करें. अगर आपको बार-बार पेटदर्द की शिकायत हो रही है तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें, क्योंकि गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर में भी सामान्य तौर पर पेट दर्द की ही शिकायत होती है. बता दें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर (पेट की आंतों या पेट के कैंसर) भारत में चौथा सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को होने वाला कैंसर बन गया है. पिछले साल जीआई कैंसर के 57,394 मामले सामने आए.

 

क्या है गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर
दरअसल, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर पेट की आंतों का या फिर कहें, पेट का कैंसर होता है. जो धीरे-धीर बढ़ता जाता है और शरीर के आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरु कर देता है. यह कैंसर शरीर के अंदर आंतों, गुर्दे, पित्ताशय, पैनक्रियाज और पाचन ग्रंथि को चपेट में लेने लगता है और इन्हें निष्क्रिय बना देता है. इसलिए कभी भी पेट दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए और जरूरत पड़े तो बार-बार पेट दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लेना चाहिए.




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