
00 बी.1.617 हो सकता है भारत में तेजी से मामले बढ़ा रहे कोरोना वायरस का नया स्वरूप
कोरोना की दूसरी लहर देश में मौत व तेजी से फैले संक्रमण के भयावह आंकड़े प्रस्तुत कर रहे हैं। वैज्ञानिकों को आशंका है कि इसकी वजह वायरस का नया स्वरूप बी.1.617 हो सकता है, जिसमें दोहरा म्यूटेशन है। हालांकि पुष्टि के लिए अभी विस्तृत अध्ययन का इंतजार है, लेकिन इस वायरस के नए मामलों के पीछे होने का एक बड़ा संकेत महाराष्ट्र से जुटाए गए वायरस के जीनोम सीक्वेंस से मिला है। पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) ने इस वर्ष 361 सैंपलों के वायरस की जीनोम सीक्वेंसिंग की। बीते हफ्ते खुलासा हुआ कि इनमें से 220 सैंपलों में वायरस का यही बी.1.617 स्वरूप है। इसके अलावा दिल्ली, पश्चिम बंगाल, गुजरात, कर्नाटक और मध्यप्रदेश सहित 10 राज्यों से जुटाए सैंपल में इसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई है।
00 दोहरा म्यूटेशन
म्यूटेशन यानी वायरस में समय के साथ प्राकृतिक रुप से आया बदलाव। यह बदलाव उसे विभिन्न परिस्थितियों में जीवित रहने में मदद करते हैं। यही वजह है कि इन बदलावों से वायरस ऐसा नया स्वरूप लेता है, जो कई बार पहले से ज्यादा खतरनाक होता है। दोहरे म्यूटेशन वाले वायरस में दो अलग अलग म्यूटेशन वाले वायरस में आए बदलाव एक साथ शामिल होते हैं। बी.1.617 में यही हुआ है।
00 अनुमान: 60 प्रतिशत इसे से प्रभावित
शुरुआती जीनोम सीक्वेंस डाटा और चिकित्सकों के अनुभव इशारा कर रहें हैं कि वायरस का यह स्वरूप तेजी से फैल सकता है और फैल भी रहा है। यह एक संक्रमित सदस्य से पूरे परिवार को तेजी से चपेट में ले रहा है। लक्षण भी देरी से नजर आ रहे हैं। कई बार रोग बेहद गंभीर होने के बाद पता चल रहा है। यह सार दावे वैज्ञानिक शोध में प्रमाणित नहीं हुए हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह करीब 60 प्रतिशत मरीजों में मिल सकता है। एनआईवी के 360 सैंपलों में से भी यह प्रतिशत मे मिला था। वायरस की पहली लहर से बच्चे दुर्लभ मामलों में ही संक्रमित हो रहे थे। लेकिन दोहरे म्यूटेशन वाले इस वायरस की वजह से हर पांचवां संक्रमित इसी आयुवर्ग का है। खतरनाक बात यह है कि अधिकतर बच्चों में आरटी-पीसीआर टेस्ट भी संक्रमण की पुष्टि नहीं कर पा रहा। हरियाणा में पिछली बार 100 में से एक संक्रमित बच्चा था, आज आठ हैं। दिल्ली में आठ महीने से 12 साल के कई बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए हैं। कर्नाटक में करीब 30 हजार बच्चों के संक्रमित होने का अनुमान है। गुजरात के सूरत में 10 साल के छोटे 280 बच्चे संक्रमित, 14 दिन के नवजात की मौत भी हो चुकी है।
00 भारत में पहली बार कोरोना वायरस में मिले दो म्यूटेशन...
कोरोन वायरस का बी.1.617 स्वरूप दो म्यूटेशन रखता है, ई484क्यू और एल452आर। दोनों म्युटेशन वायरस के उसी जानेमाने स्पाइक प्रोटीन में हुए हैं, जिनसे यह वायरस हमारे शरीर में मौजूद कोशिकाओं को पकड़ता और पनपता है।
00 इंग्लैंड, द.अफ्रीका और अमेरिका से संबंधित
म्यूटेशन ई484क्यू: यह पहले यूनाइटेड किंगडम और दक्षिण अफ्रीका में तबाही मचा चुके वायरस में मिले ई484क्यू नामक म्यूटेशन का करीबी है।
एल452आर: अमेरिका के कैलिफोर्निया वाले वायरस में मिला था। यह कोशिका से जुड़ने की क्षमता बढ़ाता है । यह वजह है कि यह तेजी से फैल रहा है।

00 कलेक्टर के निर्देश पर कार्रवाई
कवर्धा (शोर सन्देश)। जिले में कोविड नियंत्रण के लिए शासकीय अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों को भी कोविड गाइड लाइन के दायरे में इलाज की अनुमति दी गई है, ताकि सही समय पर उपचार कराकर मरीजों की जानें बचाई जा सके। इसके लिए बाकायदा स्वास्थ्य विभाग द्वारा निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया गया व नियमानुसार कोविड मरीजों के इलाज की अनुमति प्रदान की गई। लेकिन कुछ अस्पतालों से लगातार मरीजों से अधिक पैसे वसूलने, कोविड गाइड लाइन का पालन न करने व प्रॉपर रिपोर्ट नही करने की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। जन शिकायतों के मद्दे नजर आज शहर के एक निजी अस्पताल चन्द्रायण हेल्थ केयर के यंहा कलेक्टर रमेश कुमार शर्मा के निर्देश पर जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापामार कार्रवाई की। उक्त कार्रवाई के सम्बंध में जिला सर्विलेंस अधिकारी डॉ केशव ध्रुव व डीपीएम नीलू धृतलहरे ने बताया कि निजी अस्पताल चन्द्रायण हेल्थ केयर में निरीक्षक दल ने बहुत सी गड़बड़ियां पाई। मरीजों के रिकॉर्ड से लेकर , राशि वसूलने तक कोई जानकारी प्राप्त नही हुई। उक्त आधार पर सम्बन्धित निजी अस्पताल के संचालक को नोटिस जारी की गई व आगामी समय में कोई कोविड पेशेंट एडमिट न करने का निर्देश दिया गया है। 00 समस्त निजी अस्पतालों पर निरीक्षण टीम की नजर रहेगी
कलेक्टर रमेश कुमार शर्मा ने कोविड जैसे महामारी के दौर पर जनसहयोग की जगह निजी अस्पताल द्वारा अतिरिक्त राशि वसूली पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम बनाकर कोविड इलाज करने वाले सभी निजी अस्पतालों के डेली निरीक्षण करने व रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए शासन द्वारा जारी राशि ही मरीजो से ली जानी चाहिए। आज की कार्रवाई में तहसीलदार बिसाहिन चौहान, जिला सर्विलेंस अधिकारी डॉ केशव ध्रुव, डीपीएम नीलू धृतलहरे, नर्सिग एक्ट नोडल डॉ स्वदेश जायसवाल, ड्रग इंस्पेक्टर जितेंद्र पाटीदार व आयुष्मान कार्यक्रम के जिला सलाहकार सैय्यद असलम अली शामिल थे।

रायपुर (शोर सन्देश)। कोरोना वायरस संक्रमण की लगातार फैल रही दहशत एवं आशंकाओं के बीच राजधानीवासियों के लिए राहत भरी खबर यह है कि सही समय पर इलाज मिल जाने से कोरोना संक्रमित मरीज अस्पताल से ठीक होकर घर भी जा रहे हैं। अम्बेडकर अस्पताल में कोरोना के क्रिटिकल केयर प्रभारी डॉ. ओ. पी. सुंदरानी के मुताबिक अस्पताल में 1 अप्रैल 2021 से 15 अप्रैल 2021 तक कुल 534 मरीज डिस्चार्ज होकर जा चुके हैं। वर्तमान में अस्पताल में लगभग 500 मरीज भर्ती हैं उनका उपचार चल रहा है। अस्पताल में नये मरीजों का भर्ती होना, उपचार के बाद मरीजों का ठीक होकर डिस्चार्ज होना, फिर नये मरीजों का भर्ती होना यह क्रम लगातार चलता रहता है परंतु इन सबके बीच मरीजों के डिस्चार्ज होने से परिवार वाले भी खुश हो जाते हैं और इससे सभी लोगों के बीच सकारात्मकता का माहौल बन रहा है। डॉ. सुंदरानी के मुताबिक कोरोना के विरूद्ध जारी संघर्ष में सकारात्मकता और एहतियात ही विजय का मूलमंत्र है। अभी लॉकडाउन चल रहा है ऐसे में हमें घर बैठकर ही इस लड़ाई को जीतना है। हमारे स्वास्थ्य कार्यकर्ता, पुलिस और सफाई से जुड़े लोग दुगुने मेहनत के साथ अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। आप भी एक जिम्मेदार नागरिक की तरह लॉकडाउन का पालन कर अपनी जिम्मेदारी निभाईये और जो बीमार हैं उनका समय पर उपचार करवाईये। सोशल मीडिया में डराने वाले संदेशों को बिना सोचे-समझे दूसरों को फारवर्ड न करें। कोई भी संदेश जिसके बारे में आप ज्यादा नहीं जानते उन्हें वायरल करने से बचें। ये ऐसे प्रयास हैं जिन्हें आप कर सकते हैं और इस महामारी से उबरने में लोगों की मदद कर सकते हैं।
00 रिपोर्ट आने के बाद तुरंत भर्ती हुआ :
राजिम रोड हसदा नं. 2 निवासी 53 वर्षीय झम्मन साहू बताते हैं कि मेरी कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद बिना देर करते हुए घरवालों ने मुझे अम्बेडकर में भर्ती कराया। 5 अप्रैल को अम्बेडकर के आईसीयू में भर्ती हुआ और 15 अप्रैल को ठीक होकर डिस्चार्ज भी हो गया। आज मैं अपने घर में पोस्ट कोविड पीरियड में हूं और डॉक्टरों द्वारा बताये गये दिशानिर्देशों का पालन भी कर रहा हूं। अम्बेडकर में हुए इलाज के बाद काफी राहत महसूस कर रहा हूं। झम्मन साहू की तरह कई लोगों की कहानियां है जिन्होंने कोरोना को मात दी हैं।

रायपुर (शोर सन्देश)। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में कोविड-19 के मद्देनजर केन्द्र सरकार से 285 वेन्टिलेटर जल्द से जल्द उपलब्ध कराने की मांग की है। राज्य की अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्रीमती रेणु जी पिल्ले ने 12 अप्रैल को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय केन्द्र सरकार के सचिव को पत्र भेजा है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ को भारत सरकार से पिछले वर्ष 230 वेन्टिलेटर प्राप्त हुए थे। राज्य सरकार प्रदेश के सभी जिलों में ऑक्सीजनयुक्त बेड और आईसीयू की सुविधावृद्धि के लिए समुचित उपाय कर रहा है। अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य ने पत्र में उल्लेख किया है कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में कोविड-19 के अपेक्षित मामलों की अनुमानित संख्या को देखते हुए अप्रैल के अंत में प्रत्येक कोविड अस्पताल में वेन्टिलेटर की आवश्यकता का आकलन किया गया है। इसे ध्यान में रखते हुए वर्तमान में राज्य में 285 वेन्टिलेटर की अतिरिक्त आवश्यकता है। इसे जल्द से जल्द उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। 18 साल के ऊपर सभी उम्र के लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाने की मांग को लेकर एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है। वकील रश्मि सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे है, ऐसे में सभी 18 साल के ऊपर सभी उम्र के लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाई जाए। इससे पहले तहसीन पूनावाला ने भी सुप्रीम कोर्ट में कोरोना वैक्सीन को लेकर याचिका दायर की। इस याचिका में 45 वर्ष से अधिक आयु के ही लोगों को कोविड-19 का टीका लगाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी गई। याचिका में मांग की गई है कि कोरोना का टीका सभी नागरिकों को दी जाए। याचिका में तहसीन पूनावाला ने कहा, ‘यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाना जरूरी हो गया है कि टीका केवल 45 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए ही उपलब्ध नहीं हो बल्कि 45 वर्ष से कम आयु के ऐसे सभी व्यक्तियों के लिए भी उपलब्ध हो जिन्हें ऐसे काम पर लगाया जाता है, जिससे उन्हें हर दिन बाहर जाना पड़ता है।’

00 2 दर्जन होटलों से अटैच हुए 23 निजी अस्पताल
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते दिल्ली सरकार ने सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाई है। 11 सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए बेड की संख्या को बढ़ाकर 5221 कर दिया है। आईसीयू बेड की संख्या में भी बढ़ोतरी की गई है। साथ ही 5 सरकारी अस्पतालों में बैंक्विट हॉल को जोड़कर भी बेड की संख्या बढ़ाई गई है। इसके अलावा 23 निजी अस्पतालों से करीब दो दर्जन होटल और बैंक्विट हॉल को जोड़कर 2112 बेड का इंतजाम किया गया है। इन होटलों में दूसरे चरण में 282 और बेड बढ़ाए जाएंगे। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि एलएनजेपी अस्पताल में 1500, जीटीबी अस्पताल में 1500 बेड कोरोना मरीज के लिए उपलब्ध हैं।
00 कहां कितने बेड्स उपलब्ध
राजीव गांधी अस्पताल में 650, बीएचके अस्पताल में 200, बुराड़ी अस्पताल में 450, अंबेडकर अस्पताल में 200, डीडीयू अस्पताल में 200, डीसीबी अस्पताल में 213, एसजीएम अस्पताल में 48, एडीजी अस्पताल में 60 और एसआरसी अस्पताल में 200 बेड उपलब्ध कराए गए हैं। इन 11 अस्पतालों में बेड की संख्या 5221 पहुंच गई है।
00 दिल्ली सरकार के 5 अस्पतालों में बैंक्विट हॉल को जोड़ा
इसके साथ ही दिल्ली सरकार के 5 अस्पतालों में बैंक्विट हॉल को जोड़कर बेड की संख्या बढ़ाई गई है। लोकनायक अस्पताल के साथ शहनाई बैंक्विट हॉल और राउड एवेन्यू स्कूल को जोड़ दिया गया है। शहनाई बैंक्विट हॉल में 120 और राउड एवेन्यू स्कूल में 120 बेड क्षमता होगी।
00 इन अस्पतालों में जोड़े गए बैंक्वेट हॉल
इसी प्रकार बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल में ग्रैंड उत्सव बैंक्विट हॉल को जोड़ा गया है। जिसमें 75 बेड उपलब्ध हैं। दीपचंद बंधु अस्पताल मोजैक सैंडोज बैंक्वेट हॉल को जोड़ा गया है जहां 250 बेड की क्षमता है। राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के साथ यमुना स्पोर्ट्स कंपलेक्स को जोड़ा गया है। जहां 200 बेड की क्षमता है। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के साथ गोल्डन बैंक्विट हॉल को जोड़ा गया है। यहां 110 बेड का इंतजाम किया गया है। इन बैंक्वेट हॉल की कुल क्षमता 875 बेड की है। अस्पतालों का दायित्व है कि वह यहां पर डॉक्टर उपलब्ध करवाएं।

रायपुर (शोर सन्देश)। राज्य शासन द्वारा कोविड उपचार की अनुमति प्राप्त प्राइवेट अस्पताल जो कि डाॅ खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना एवं आयुष्मान भारत योजना में पंजीकृत भी है, ऐसे समस्त अस्पतालों में कोविड उपचार की दर संबंधी आदेश जारी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस योजना के तहत प्रतिदिन के मान से जनरल वॉर्ड हेतु- रू 2000 , एच डी यू (ऑक्सीजन के साथ) 5500 रूप्ये,आईसीयू (बिना वेंटिलेटर के) रू 7000 और आईसीयू (वेंटिलेटर के साथ)- रू 9000 रूपये निर्धारित किए गए हैं। आरटी पी सी आर की दर 550 रखी गई है। उपरोक्त पैकेज दर की परिभाषा एबी - पीएमजेवाई 2.0 गाइडलाइन के अनुसार होगी। सीटी स्कैन की दजांच पर विषेष परिस्थिति में प्रतिबंध हटाया जाता है जिससे कोविड 19 महामारी के दौरान भर्ती मरीज को इसकी सुविधा मिल सके। ज्ञात हो कि इसके पूर्व विभाग ने 12 अप्रैल को निजी अस्पतालों में उक्त योजनाओं के तहत पंजीकृत लोगों के लिए 20 प्रतिशत बिस्तर आरक्षित करने के आदेश जारी किए थे।

00 इंजेक्शन की खेप को औषधि विभाग ने किया सील
रायपुर (शोर सन्देश)। छत्तीसगढ़ में जिस कदर कोरोना संंक्रमण विकराल हो रहा है। रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदेश की राजधानी के थोक दवा बाजार में इंजेक्शन की खेप पहुंच तो गई है, लेकिन औषधि विभाग के अफसरों ने इंजेक्शन को सील कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि औषधि विभाग के अफसर इंजेक्शन की वाइल अपने रिकमंडेशन पर ही देने के निर्देश थोक दवा विक्रेताओं को दिए हैं। इसके साथ ही मरीजों के परिजनों को दवा देेने पर रोक लगा दी गई है। वहीं राज्य सरकार का कहना है कि इंजेक्शन अस्पतालों में सीधे मरीज के लिए उपलब्ध होंगे, लेकिन बाजार में दवा उपलब्ध होने के बाद भी मरीजों के लिए मंगलवार दोपहर तक दवा उपलब्ध नहीं कराई गई है। यहां पर सरकार का निर्णय तो सटिक है पर औषधि विभाग के अफसरों की तरफ से दिए गए निर्देश कुछ और ही बयां कर रहे हैं। यदि बाजार में दवा है और परिजनों को उपलब्ध नहीं कराना है तो अस्पतालों को अब तक क्यों नहीं भेजा गया? और यदि नहीं भेजा गया तो परिजनों को दवा देने पर विभाग ने रापेक क्यों लगाई है। क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार राजधानी में कर रहा है या फिर दवाई की सप्लाई रोक कर अफसर अपने चहेतों को देने की फिराक में हैं। यहां पर सबसे बड़ी बात यह भी है कि जिस रेमडेसिविर इंजेक्शन काो थोक दवा बाजार से मरीजों के परिजन थोक के दाम पर खरीद रहे थे तो अब अस्पताल से वहीं दवाएं खुदरा मूल्य पर उपलब्ध होंगी। औषधि विभाग का यह फरमान मरीजों को फायदा पहुंचाने के लिए है या अस्पतालों के लिए यह तो विभाग के अफसर ही जानें, लेकिन पूरा सिस्टम आज इस आपदा की स्थिति को अवसर बनाकर अस्पतालों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष फायदा पहुंचा रहा है। यहां पर विभाग यदि अस्पतालों को इंजेक्शन की सप्लाई देना खहता है तो अस्पताल के लिए विक्रय मूल्य का निर्धारण भी आवश्यक है, क्योंकि जब से इंजेक्शन की मांग प्रदेश में बढ़ी है मनचाहे दाम पर इसकी बिक्री हो रही है। पैसे के बल पर समाज का एक वर्ग तो इसे मुंहमांगे दाम पर खरीद रहा है, लेकिन उसी समाज का एक वर्ग घंटों लाइन में खड़े होने के बाद भी दवा तक नहीं पहुंच पा रहा है। अब ये तो आने वाले वक्त पर ही पता चलेगा कि दवाओं को सील कर विभाग के अफसर क्या करना चाहते हैं।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। भारत में कोरोना का कहर तेजी से बढ़ रहा है। इस बीच 11 अप्रैल यानी ज्योतिबा फुले जयंती से देश में `टीका उत्सव` की शुरुआत की गई है। पहले ही दिन देशवासियों ने कोविड-19 की वैक्सीन लगवाने के लिए बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि पहले दिन 27 लाख से ज्यादा लोगों ने वैक्सीन की डोज ली। इसके साथ ही देश में कुल 10,43,65,035 लोग कोरोना वैक्सीन की डोज ले चुके हैं। देश में 11 से 14 अप्रैल के बीच चल रहे टीकाकरण अभियान को `टीका उत्सव` नाम दिया गया है।
मंत्रालय ने का कहना है कि देशभर में टीका उत्सव अभियान के पहले दिन कई कार्यस्थल टीकाकरण केंद्रों का संचालन हुआ। देश में औसतन 45,000 टीकाकरण केंद्रों का संचालन हो रहा है। लेकिन रविवार को 63,800 केंद्रों का संचालन हुआ। इसके अलावा मत्रालय ने कहा, कोरोना वैक्सीन की डोज देने की संख्या 16 लाख होती है। पर टीका उत्सव के पहले दिन रात आठ बजे तक 27 लाख से अधिक लोगों को कोरोना वैक्सीन की डोज दी गई। आपको बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 11 अप्रैल यानी ज्योतिबा फुले जयंती से हम देशवासी `टीका उत्सव` की शुरुआत कर रहे हैं। ये `टीका उत्सव` 14 अप्रैल यानी बाबा साहेब आंबेडकर जयंती तक चलेगा। ये उत्सव, एक प्रकार से कोरोना के खिलाफ दूसरी बड़ी जंग की शुरुआत है। इसमें हमें व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ ही सामाजिक स्वच्छता पर विशेष बल देना है। हमें ये चार बातें, जरूर याद रखनी है।
-जो लोग कम पढ़े-लिखे हैं, बुजुर्ग हैं, जो स्वयं जाकर टीका नहीं लगवा सकते, उनकी मदद करें।
-जिन लोगों के पास उतने साधन नहीं हैं, जिन्हें जानकारी भी कम है, उनकी कोरोना के इलाज में सहायता करें।
-मैं स्वयं भी मास्क पहनूं और इस तरह स्वयं का भी बचाव करूं और दूसरों को भी बचाने का काम करूं, इस पर बल देना है।
-किसी को कोरोना होने की स्थिति में माइक्रो कन्टेनमेंट जोन बनाने का नेतृत्व समाज के लोग करें। जहां पर एक भी कोरोना का पॉजिटिव केस आया है, वहां परिवार के लोग, समाज के लोग माइक्रो कन्टेनमेंट जोन बनाएं।

रायपुर (शोर सन्देश)। छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण इन दिनों चरम पर है, इस वक्त उपचार केलिए उपयोग में लाइ जाने वाली दवा रेमिडेसिविर के लिए खाद्य एवं औषधि विभाग के उपसंचालक ने रायपुर में इंजेक्शन मिलने वाली दुकानों की सूची जारी की है। जारी आदेश के अनुसार यह सूची 27 मार्च की है। यहां सबसे बड़ी बात यह है कि सूचीबद्ध सभी दवा दुकानों में उपरोक्त इंजेक्शन उपलब्ध ही नहीं है। रायपुर के एक ही दवा दुकान कुमार मेडिकल में यह दवाई मिल रही है, जहां मरीजों के परिजनों को सुबह से लेकर शाम तक लाइन में खड़े होकर दवाई का इन्तजार करना पड़ रहा है। उल्लेखीय है कि सूची में मौजूद नामों में मेडिकल काम्प्लेक्स की 8 दुकानें हैं, जिनमें सिर्फ एक ही दुकान में इंजेक्शन उपलब्ध है, जिस कारण मरीजों के परिजनों को दवाई के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ रहा है। आज रविवार होने के बाद भी लोग सुबह से ही कतार बढ़ होकर दवाई का इन्तजार कर रहे हैं, लेकिन दोपहर 2 बजे तक दवाई दुकान ही नहीं खुली है। इसके साथ ही शेष दुकानों में स्टॉक नहीं होने की बात कही जा रही है। ऐसी में आज राजधानी में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगभग 4 हजार के पार पहुँच गयी है। ऐसे में पूरे प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार ही 11 हजार के पार प्रति मरीज यह दवाई 6 वाइल की जरुरत है, ऐसे में प्रदेश में एक दिन में लगभग 12 हजार वाइल की जरुरत प्रतिदिन है, लेकिन यह दवाई प्रतिदिन 300 से 400 वाइल राजधानी पहुँच रही है, इसके साथ ही जनऔषधी केंद्र में 900 रूपये में मिलने वाली एक वाइल बाजार में 5000 से 5400 रूपये प्रति वाइल मिल रही है। ऐसे में राज्य सरकार को इंजेक्शन के पर्याप्त इंतजाम की व्यवस्था करने की दिशा में विचार करना चाहिए साथ ही आपदा के वक्त को अवसर बना कर लाभ कमाने वालों पर भी कठोर कार्रवाई करने की दिशा में विचार करने की जरुरत है।