एक व्यक्ति के नेत्रदान से आ सकती है दो लोगों की आंखों में रौशनी : डॉ गर्ग
रायपुर(शोर सन्देश)। पं. जवाहर लाल नेहरु स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के नेत्र रोग विभाग में कल 25 अगस्त से राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य जनजागरूकता के माध्यम से लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित करना है। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एम. एल. गर्ग ने आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिवर्ष 25 अगस्त से 8 सिंतबर के बीच राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष कोरोना काल को देखते हुए जनजागरण अभियान के लिए इलेक्ट्रानिक मीडिया, प्रिंट मीडिया एवं सोशल मीडिया प्लेटफार्म का उपयोग किया जा रहा है। नेत्र चिकित्सकों, नेत्र सहायकों, नेत्र काउंसर एवं इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के सोशल मीडिया प्लेटफार्म वॉट्सअप के माध्यम से लिंक भेजकर ऑनलाइन नेत्रदान पखवाड़ा का शुभारंभ किया जाएगा। विशेष आयोजनों के तहत समाचार पत्रों, दूरदर्शन, आकाशवाणी, वेबिनार इत्यादि के जरिए नेत्रदान हेतु चर्चाएं, व्याख्यान, गोष्ठियां किया जाना प्रस्तावित है। प्रतिवर्ष लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक एवं प्रेरित करने के उद्देश्य से जनजागरण सम्बन्धी कार्यक्रम किये जाते हैं जिसके अंतर्गत नेत्र परीक्षण शिविर लगाने के साथ-साथ पाठशाला, महाविद्यालय आदि स्थानों पर व्याख्यान दिये जाते हैं। डॉ. गर्ग कहते हैं एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों की जिंदगी रौशन हो सकती है इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर इसका आयोजन किया जाता है। जनसाधारण की भागीदारी के लिए शैक्षणिक संस्थाओं, सामाजिक संस्थाओं एवं गैर शासकीय संस्थाओं का सहयोग लिया जाता है। सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों के अंतर्गत पोस्टर प्रतियोगिता, निबंध, नुक्कड़ नाटक, नेत्रदान सम्बन्धी रैली का आयोजन किया जाता है। मीडया के सहयोग से नेत्रदान सम्बन्धी चर्चायें, गोष्ठी, व्याख्यान आदि का प्रसारण किया जाता है।
अंधत्व के निवारण के लिए भिन्न-भिन्न पद्धतियों का आवश्यकतानुसार उपयोग किया जाता है। जैसे - मोतियाबिंद हो जाये तो उसका ऑपरेशन हो सकता है। कांचबिंद हो जाने तो उसका निवारण दवाओं एवं ऑपरेशन से किया जाता है। दृष्टिदोष का इलाज चश्मे से होता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि से अगर रौशनी जाने का खतरा है तो उसके लिये दवाईयां एवं ऑपरेशन का उपयोग किया जाता है। इसी प्रकार और भी अन्य बीमारियां हैं जिनका उपचार ऑपरेशन और अन्य विधियों से किया जाता है और खोयी रौशनी वापस आ जाती है किंतु यदि कोई व्यक्ति कार्नियल ओपेसिटी से अंधत्व का शिकार हो जाये तो इसका इलाज नेत्रदान से प्राप्त कार्निया का प्रत्यारोपण करके ही किया जा सकता है। इसके लिए किसी अन्य प्रकार की दवा प्रभावी नहीं होती है। नेत्र का कार्निया अर्थात् स्वच्छ पटल जो सामने से देखने पर आंख की पुतली के रंगों के अनुसार काला या हल्का भूरा दिखाई देता है, आंख का पारदर्शी भाग है। इसमें सफेदी हो जाती है जिसे हम कार्नियल ओपेसिटी कहते हैं लेकिन सामान्य भाषा में इसे आंख का फूला होना या सफेद होना कहते हैं।
देशभर में हमें मोटे तौर पर लगभग दो लाख कार्निया की हर साल आवश्यकता होती है लेकिन प्राप्ति केवल 60 हजार कार्निया की होती है। इस तरह अतिरिक्त 20 हजार कार्निया की आवश्यकता प्रतिवर्ष और जुड़ जाती है इसलिए नेत्रदान पखवाड़े के माध्यम से नेत्रदान को प्रवृत्त करने हेतु जनजागरण की आवश्यकता होती है।