
महासमुन्द (शोर सन्देश)। महिला बाल विकास विभाग ने रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री के प्रदाय के लिए कुल 34 सेक्टरों के लिए महिला स्व-सहायता समूहों से 31 दिसम्बर तक आवेदन फॉर्म निर्धारित किया गया था। महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि जिसे संशोधित कर 15 दिवस की अवधि तक और बढ़ा दी गई है। इनमें आवेदन फॉर्म वितरण की अंतिम तिथि 14 जनवरी 2021 व रजिस्टर्ड डाक और कोरियर के माध्यम से आवेदन फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 15 जनवरी निर्धारित की गई है।

भिलाई-3 (शोर सन्देश)। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भिलाई 3 व चरोदा शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के बीईईटीओ व सुपरवाइजर सैय्यद असलम ने बताया कि प्रतिदिन प्रा स्वास्थ्य केंद्र भिलाई 3 व चरोदा शहरी स्वास्थ्य केंद्र में दो पालियों मे कोविड जांच किया जाता है। ओसत प्रतिदिन 22 से 25 सैम्पल लिए जा रहे है विगत दो सप्ताह से पाजिटिव मरीजों के मिलने मे कमी आ रही है आज दोनो पालियों मे रैपिड एंटिजन टेस्ट मे लगभग 23 सैम्पल लिए गये सभी की रिपोर्ट निगेटिव रही है। प्रभारी चिक अधिकारी डा देवेन्द्र बेलचंदन ने बताया कि बीते 9 महीने में दिसंबर के अंतिम दो सप्ताह मे पाजिटिव केसेस मे निरंतर कमी आ रही है जिसका प्रमुख कारण समुदाय में जागरूकता ओर सरकारी हेल्थ सेक्टर के सरकारी तंत्र की कुशल कार्य प्रणाली रही है। प्रभारी बीईईटीओ व सुपरवाइजर सैय्यद असलम ने बताया कि अभी आगे भी सचेत रहने की आवश्यकता है नियंत्रण व रोकथाम मे सभी ने अपने दायित्वों को ईमानदारी से पूरा किया है। सैय्यद असलम ने बताया कि बीते 7 महीनों मे हमने 3131 एंटिजन टेस्टिंग किऐ ओर 1021 आर टी पी सी आर सैम्पल लिए 366 टूर्नाट सैम्पल जांच मे भेजे जिसमे अब 566 कोरोना से संक्रमित मिले है जिसमे से 502 लोग स्वास्थ्य हो चुके है । आमजनता से अपील है कि स्वास्थ्य विभाग की जारी गाइड लाइन का पालन करते हुए स्वंय व परिवार के साथ क्षेत्र की जनता को स्वस्थ रखने मे अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा कर भिलाई 3 चरोदा क्षेत्र मे सहयोग करे।

रायपुर (शोर सन्देश)। कोरोना वैक्सीन की ताजा स्थिति पर आज प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने पत्रकारों से चर्चा की। मंत्री सिंहदेव ने बताया कि आज इंग्लैंड में एक कंपनी को वैक्सीन की अनुमति मिल गई है, यह अनुमति पहले चरण की अनुमति है। अब लगभग 7 से 10 दिन के भीतर वैक्सीन को पूरी तरह अप्रूव कर दिया जाएगा और जनसामान्य के लिए उपलब्ध कर दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ ने केंद्र सरकार को फ्रंट रो वॉरियर्स की सूची भेज दी है। मंत्री सिंहदेव ने बताया कि रिसर्च अभी लगातार आगे बढ़ रहा है। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में देश में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
मंत्री ने कहा, इसे देश के 30 करोड़ लोगों तक पहुंचाने के लिए 6 महीने का समय लगेगा। पहले फेस में वैक्सीन की 5
करोड़ डोज कम्पनी ने तैयार कर ली है। यह वैक्सीन दो डोज में पूर्ण होगा, पहले डोज के बाद दूसरे डोज की समयावधि निर्भर है। यह वायरस पर्यावरण में फैला हुआ है, हो सकता है यह जनरेशन तक रहे। वर्त्तमान में भारत में कोरोना के अब तक 4000 नुट्रेन्स की पहचान की जा चुकी है। देश में 80 करोड़ लोगों तक वैक्सीन पहुँचाने में लगभग 2 साल लग सकते हैं। प्रदेश में कोरोना का नया स्ट्रेन न फैले यही पहली प्राथमिकता है। नए स्ट्रेन के सैम्पल भेजे गए हैं, इसकी जानकारी अब तक लैब से नहीं आई है। पिछले दिनों की तुलना में प्रदेश में टेस्टिंग कम हुई है, जिसके कारन संक्रमित मरीजों की संख्या भी काम हुई है। फिर भी प्रदेश में संक्रमण की औसत संख्या 4 प्रतिशत से कम हो गई है। उन्होंने चिंता जताई है कि जब प्रदेश में 0 से लाखों मरीज मिल सकते हैं, तो नए स्ट्रेन से 10 हजार से सभी लोग संक्रमित हो सकते हैं।

दुर्ग, (शोर सन्देश)। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्नमूलन कार्यक्रम के तहत जिले के पाटन ब्लॉक को कुष्ठ मुक्त करने को कुष्ठ रोगी खोज अभियान चलाया जा रहा है । “मेरा ग्राम कुष्ठ मुक्त ग्राम” की परिकल्पना को साकार करने को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व मितानिन द्वारा गाँव के घर-घर सर्वे में कुष्ठ के स्ंदिग्ध मरीजों की पहचान की जा रही है । अभियान के अंतर्गत ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर पाटन, झिट व गाढ़ाडीह सेक्टर में 85 संभावित मरीजों की खोज की गई । इन संभावित मरीजों की तीनों नॉन मेडिकल अस्सिटेंट ( एनएमए) दल द्वारा जांच में 2 पीबी और 2 एमबी स्तर के कुल 4 नए कुष्ठ प्रभावित मरीज मिले हैं । बाँकी 81 लोगों के शरीर में दाद, खाज-खुजली, बेमची सहित अन्य प्रकार के चर्म रोग से प्रभावित मरीजों के लिए चर्म रोग निदान और उपचार शिविर का आयोजन किया जाएगा। नॉन मेडिकल अस्सिटेंट ( एनएमए) दल द्वारा रानी तराई, बटरेल, भिलाई-3 सेक्टर के 20-20 गांवों में संभावित मरीजों की सत्यापन कार्य अंतिम चरण में जारी है। बीएमओ डॉ आशीष शर्मा ने बताया, “पाटन ब्लॉक में घर-घर सर्वे के लिए 24 नॉन मेडिकल अस्सिटेंट ( एनएमए) व सेवानिर्वित्त एनएमए को जांच दल में सत्यापन के लिए लगाया गया है “मेरा ग्राम कुष्ठ मुक्त ग्राम” अभियान को सफल बनाने को पाटन ब्लॉक के 112 ग्राम पंचायतों के 146 गाँव स्तर पर ग्राम पंचायतों के स्थानीय जनप्रतिनिधि सरपंच, पंच, सामाजिक कार्यकर्ता मितानिन व आंगनबाड़ी कार्यकर्तायों का उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में 4,500 लोगों को ट्रेनिंग दिया गया था।“ डॉ शर्मा ने बताया, “महिलाओं की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए कुष्ठ निदान उन्मूलन के इस कार्यक्रम में मितानिनों को भी लगाया गया है। इसके अलावा अभियान में सेवानिवृत्त एनएमए से उनके अनुभवों का लाभ लेने के लिए भी कुष्ठ खोज में सहयोग लिया जाएगा। इनकी मॉनिटरिंग के लिए एएनएम व सुपरवाइजरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। दुर्ग जिले की प्रति 10,000 जनसंख्या पर 2.0 कुष्ठ प्रसार दर है। अभियान से इसे 01 से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है ।“ इस अभियान के तहत मेरा ग्राम कुष्ठ मुक्त ग्राम की परिकल्पना को साकार करने की व्यापक योजना के तहत पुराने कुष्ठ प्रभावित लगभग 200 मरीजों के परिवार के सदस्यों को भी पीईपी के तहत कुष्ठ की दवाई की एक खुराक खिलाई गई। गाँव को कुष्ठ मुक्त बनाने की दिशा में जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग मांगा जा रहा है। ग्राम पंचायतों को आधार बनाकर जनप्रतिनिधियों से भी अपील कराई जा रही है । इस अभियान में अधिक से अधिक लोगों को जुड़नें और सफल बनाने के लिए जागरूकता प्रचार रथ भी रवाना किया गया है। प्रत्येक परिवारों को कार्ड में कुष्ठ रोग के लक्षण व पहचान के बारे में जानकारियां देकर जागरूक किया जा रहा है। इस कार्ड में परिवार के मुखिया द्वारा परिवार के सदस्यों के शरीर में असामान्य दिखने वाले लक्षणों की पहचान कर तीन दिन बाद मितानिन दीदीयों को वापस दिया जा रहा है। कुष्ठ से मिलते जुलते किसी भी लक्षण नजर आने पर संबंधित परिवार के सदस्यों की जांच व स्क्रीनिंग स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा करते हुये निशुल्क इलाज़ और दवाई प्रदान किया जा रहा है । मितानिन व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के गृहभ्रमण करने के दौरान कोरोना संक्रमण से बचाव के दो गज दूरी और मास्क लगाना जरूरी के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है ।अभियान को सफल बनाने ट्रेनर एसडी बंजारे, अजय रावत, अल्का रावत, आरपी उपाध्याय , शारदा साहू , डिपी वर्मा, अजया देवांगन, माया कश्यप , टी आर साहू, के एस वर्मा, सी एल मैत्री , अंजाना शर्मा, पी आर साहू, जे डी मानिकपुरी , एमके देवांगन , बीएल माहेश्वरी, मोहनलाल देवांगन, पीआर बंजारे, एसके देवांगन , नर्द प्रसाद वर्मा, एस के वर्मा व जेके सबजई द्वारा ग्राम पंचायतों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

00 मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के स्वास्थ्य शिविर लगने से लोगों में भारी खुशी
भिलाई (शोर सन्देश)। घर के पास मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना की मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहन आने से बहुत सी सहायता स्वास्थ्य को लेकर मिल रही है। कहीं जाने का समय नहीं मिलता है परंतु स्वास्थ्य शिविर घर के पास ही सुविधा दे रही है। स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से हर चीज की सुविधा यहां पर अच्छी है। ब्लड प्रेशर एवं शुगर जैसी हर प्रकार की जांच सुविधा शिविर में उपलब्ध है। घुटने में परेशानी थी और शरीर में थकावट तथा कमजोरी थी। स्वास्थ्य शिविर में प्राप्त दवाई का उपयोग करने से राहत मिली है। लोग शिविर में समय समय पर आते हैं, और चिकित्सा सलाह भी प्राप्त करते हैं। स्वास्थ्य शिविर में आकर हर कोई अपना मुफ्त इलाज करा रहा है। 00 बबीता- पावर हाउस भिलाई
अपने स्वास्थ्य का चेकअप कराने मोबाइल मेडिकल यूनिट के स्वास्थ्य शिविर में आई हूं। मैंने यहां के लैब में थायराइड, बीपी, शुगर एवं हिमोग्लोबिन का टेस्ट कराया है। स्वास्थ्य संबंधी सभी प्रकार की सुविधा मोबाइल मेडिकल यूनिट के वाहन में मौजूद है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह योजना वरदान है। मुफ्त इलाज, मुफ्त दवाइयां मिल रही है।
संगीता जैन-छत्तीसगढ़ प्रदेश में स्वास्थ्य को लेकर सरकार ने जो योजना लाई है। बहुत अच्छी योजना है। अपने मोहल्ले में ही मैंने अपना इलाज कराया है। मुझे घर पहुंच सेवा दवाइयां मुफ्त में प्राप्त हुई है। जिससे अपने आपको खुश किस्मत समझता हूं। सरकार की इस योजना से खुश हूं। इस योजना से लोगों की स्वास्थ्य गत परेशानियां दूर हो रही है।
अब्दुल निशान-अस्पतालों में इलाज कराने से खर्च बहुत आता है, भीड़-भाड़ भी रहती है। मोहल्ले में ही मोबाइल मेडिकल यूनिट की एंबुलेंस आ रही है। पता चला स्वास्थ्य शिविर मोहल्ले में ही लगी हुई है। तो बीपी, शुगर का चेक कराने आई हूं। फ्री में इलाज के लिए सभी चिकित्सक टीम और प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय श्री भूपेश बघेल को इस योजना के लिए धन्यवाद देती हूं। राजकुमारी-छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जन-जन के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने स्लम स्वास्थ्य योजना की शुरूआत की गई है, महापौर एवं भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव तथा निगम आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी के निर्देशन में योजना का बेहतर क्रियान्वयन नगर पालिक निगम, भिलाई के क्षेत्रों में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से लग रहे स्वास्थ्य शिविर में आए हुए व्यक्तियों/मरीजों ने स्वास्थ्य परीक्षण एवं इलाज उपरांत अपने अनुभवों को साझा किया। लोगों का नि:शुल्क जांच व इलाज करने अनुभवी एवं प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम प्रतिदिन सुबह रूट चार्ट अनुसार गली-मोहल्लों में मोबाइल मेडिकल यूनिट लेकर पहुंच रही है, जहां लोग सर्दी, खांसी, बुखार, मलेरिया जैसी सामान्य बीमारियों के उपचार कराने के साथ ही बीपी, शूगर, पेशाब, हिमोग्लोबिन जैसी आवश्यक जांच की नि:शुल्क सुविधा का भी लाभ उठा रहे हैं। भिलाई निगम क्षेत्र में बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने मोबाइल यूनिट संचालित हो रही है। दाई दीदी क्लीनिक में गर्भवती महिलाओं एवं कुपोषित बच्चों की संपूर्ण जांच की जा रही है। छत्तीसगढ शासन की मंशा अनुसार स्लम क्षेत्रों में नागरिकों/श्रमिकों को समुचित स्वास्थ्य सेवाये उनके निवास के समीप उपलब्ध कराने योजना की शुरुआत की गई है। निगम आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी लगातार स्वास्थ्य शिविर स्थलों का निरीक्षण कर रहे हैं। दाई-दीदी क्लीनिक में महिला डाक्टर, महिला स्टॉफ द्वारा जांच की सुविधा। स्वास्थ्य शिविर में संगठित एवं असंगठित भवन व अन्य संनिर्माण कर्मकारो का पंजीयन कराने सुविधा। मरीजों की जांच पश्चात आवश्यकता होने पर नि:शुल्क दवाई वितरण। नि:शुल्क जांच, पैथोलॉजी टेस्ट में हीमोग्लोबीन, शुगर, पेशाब व बीपी जैसे अन्य की नि:शुल्क जांच। अनुभवी व प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीम द्वारा इलाज की सुविधा उपलब्ध है।

बेमेतरा (शोर सन्देश)। कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम और कोविड-19 की व्यवस्थाओं में अग्रिम पंक्ति पर रहकर कार्य करने वाले जिला अस्पताल के तीन कोरोना वॉरियर्स को आज सम्मानित किया गया। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस एक्जीक्यूटिव ब्रांच मैनेजर टीआर साहू द्वारा शारीरिक दूरी के नियमों के पालन के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में तीन लोगों को कोरोना योद्धा सम्मान-2020 प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर श्री साहू ने कहा कोरोना वॉरियर्स की कर्तव्य परायणता और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर ही कोरोना महामारी के खिलाफ जंग जीती जा रही है| उन्होंने कहा इस वैश्विक महामारी में अपने प्राण को जोखिम में डालकर चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करने सेवा देने वाले कारोना योद्धाओं का सम्मान किया जा रहा है। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस द्वारा सम्मानित होने वालों में जिला अस्पताल बेमेतरा में सेवा दे रहे ट्रु-नाट लैब प्रभारी डॉ ऊर्चिता पटेल, दंत चिकित्सक डॉविजया रमन और संजय तिवारी आईसीटीसी (एमएलटी) को कोरोना योद्धा सम्मान-2020 दिया गया। इस अवसर पर जिला अस्पताल के डॉक्टर, मेट्रन, अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।
00 ट्रु-नाट लैब से 24 घंटे के भीतर मिले सेम्पल का रिपोर्ट : कोरोना ट्रु-नाट लैब प्रभारी डॉ ऊर्चिता पटेल बताती हैं वह बीते मार्च से ही हर दिन निरंतर ड्यूटी पर मुस्तैद रही हैं। उन्होंने कहा वैश्विक महामारी के इस दौर में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच चिकित्सक से लैब स्टॉफ तक सभी जी-जान से टीम वर्क में जुटे हुए हैं। ये सभी अपनी जिम्मेवारियों का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। लेकिन, कोरोना की इस लड़ाई में सबसे कठिन कार्य लैब प्रभारी कर रहे हैं। डॉ ऊर्चिता पटेल ने बताया जब कोविड-19 की वजह से लॉक डाउन शुरु हुआ तब जिला अस्पताल के लैब में ट्रु-नाट मशीन नहीं थी| ट्रु-नाट मशीन स्थापना के लिए मेडिकल कॉलेज से ट्रेनिंग लेकर कई तरह की दिक्कतों का सामना करते हुए लैब की शुरु की गई। एंटीजन टेस्ट रिपोर्ट के बाद सेम्पल ट्रु-नाट मशीन से 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट आने से कोविड-19 के पॉजेटिव मरीजों को आइशोलेशन करने में सुविधाएं मिलने लगी। डॉ पटेल ने बताती हैं लैब टेक्नीशियन, डॉक्टर, एमएमटी ने सैंपल जांच में सराहनीय कार्य किया है। अब तक 3,092 से अधिक लोगों के सैंपल जांचेगए जिसमें से 230 का रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव मिला।
00 लैब में सेम्पल कलेक्शन और जांच से लेकर मशीनों की रखरखाव की जिम्मेदारी : कोरोना योद्धा संजय तिवारी आईसीटीसी (एमएलटी) एचआईवी एड्स के लैब अतिरिक्त कोरोना महामारी में आपात कालीन सेवाएं प्रदान करने में तत्पर रहें। कोरोना मरीज की पहचान से इलाज तक की प्रक्रिया में लैब टेक्नीशियन का जांच कार्य एवं कोरोना मरीजों के सैंपल लेने का कार्य अत्यधिक जोखिम भरा था क्योंकि सैंपल लेने के दौरान मरीज और लैब टेक्नीशियन के बीच दूरी न के बराबर रहती है। संजय तिवारी बताते हैं मेडिकल लैबरेटरी टेक्निशन (Medical laboratory technician) का कार्य डाक्टरों के निर्देश पर करते हैं। कोरोना योद्धा संजय तिवारी बताते हैं कोरोना वायरस के सेम्पल और मशींस के रख-रखाव से लैबरेटरी में नमूनों की जांच और विश्लेषण में काम आने वाला घोल भी लैब टेक्निशन ही बनाते हैं। मेडिकल साइंस के साथ-साथ लैब सुरक्षा नियमों और जरूरतों के बारे में पूरी जानकारी अपडेट रखना पड़ता है। लैब टेक्निशन होने की वजह से कोरोना नमूनों की जांच का काम करते रहे हैं। उन्होंने बताया जांच के दौरान एमएलटी (Medical laboratory technician) कुछ सैंपलों को आगे आरटीपीसीआर की जांच या फिर जरूरत के अनुसार उन्हें सुरक्षित भी रखने का जिम्मेदारी भरा कार्य करना होता है।

00 चंडीगढ़ के विशेषज्ञों ने राज्य के डाक्टरों से साझा की कोविड मैनेजमेंट की नवीनतम जानकारी
00 यूनीसेेफ के सहयोग से आयोजित हुआ वेबीनार
रायपुर (शोर सन्देश)। चंडीगढ़ पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट एवं यूनीसेफ के संयुक्त तत्वावधान में क्रिटिकल केयर मैनेजमेंट आफ कोविड 19, चैलेंज एंड रिकमेंडेशन पर एक वेबिनार आयोजित किया गया। चंडीगढ़ पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टी्ट्यॅट पीजीआईएमई आर के इंटेंसिव केयर यूनिट एवं एनेस्थेसिया के विभागाध्यक्ष डाॅ जीडी पुरी इसके मुख्य वक्ता थे। वेबीनार में राज्य की राष्टीय स्वास्थ्य मिशन संचालक डाॅ प्रियंका शुक्ला ,यूनीसेफ के हेल्थ विशेषज्ञ डा श्रीधर ने संयोजक, मेकाहारा के विशेषज्ञ डाॅ ओपी सुंदरानी, डाॅ सुभाष मिश्रा, चंडीगढ़ के चिकित्सकों में डा राजराजन गणेशन,डा नोएल जेम्स,डा इन्दरपाल सिंह सहगल, डॉ. अनन्या राय, डॉ. मनोज गोयल, डॉ. जयश्री मुरली धरन ने भाग लिया। वेबीनार में छत्तीसगढ़ के मेडिकल कालेजों के कोविड मरीजों का इलाज करने वाले डाॅक्टर,जिला अस्पतालेां एवं प्राइवेट अस्पतालोे के डाक्टर ने भाग लिया। डाॅ. पुरी ने कोविड मरीजों के इलाज, कोविड मैनेजमेंट एवं उनके इलाज आदि के संबंध में नवीनतम जानकारी साझा की। वेबीनार मे डाॅ. पुरी ने कहा कि कोरोना के संकमण के केस बढ़ रहे हैं। संक्रमण को कम करने की जिम्मेदारी मेडिकल स्टाॅफ के साथ ही समाज की भी है। यह इस सदी का भयावह पैन्डेमिक है। इसकी रोकथाम के लिए समाज को भी आगे आकर कार्य करना चाहिए। चिकित्सकों ने इलाज में उपयोग हो रही दवाइयो हाइडोक्सीक्लोरोक्वीन, आइवरमेक्टिन, रेमंडेसिविर, एंटीवायरल दवाइयों एवं मरीजों के इलाज के संबंध में प्रश्नों का समाधान किया। डाॅ. पुरी ने कहा कि वर्तमान रिसर्च मे यह देखा गया कि प्लाज्मा थेरेपी के सकारात्मक परिणाम सामने नही आए। इसलिए इतने महंगे उपचार की आवश्यकता नही देखाी गई। चंडीगढ़ की टीम ने डाक्टरो की शंकाओं का समाधान किया और भविष्य में भी हर संभव परामर्श का आश्वासन दिया।

बेमेतरा (शोर सन्देश)। संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें, छ.ग. द्वारा विज्ञापित सीधी भर्ती के पद ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक पुरूष (एमपीडब्ल्यू) पद हेतु पात्र/अपात्र सूची में प्राप्त दावा आपत्ति के निराकरण, एवं उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा याचिका में पारित आदेश अनुसार चयन समिति के निर्णय उपरांत संवर्गवार 21 पदों में (अनारक्षित, अनु.जाति, अनु.ज.जाति, अपिव, दिव्यांग) अभ्यार्थियों की चयन सह प्रतीक्षा सूची जिले के वेबसाईट www.bemetara.gov.in में एवं विभागीय वेबसाईट www.cghealth.nic.in में प्रकाशन किया गया है, अतएव दिव्यांग अभ्यार्थीगण उक्त सूची का अवलोकन कर सकते है।

रायपुर (शोर सन्देश)। राज्य में कोरोना के साथ-साथ मौत का मामला भी तेजी से बढ़ रहा हैं। खबर राजधानी रायपुर के एम्स अस्पताल की है, 49 साल के एक कोरोना मरीज ने तीसरे मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी के मुताबित घटना की सूचना मिलने पर आमानाका पुलिस अस्पताल पहुंच जांच में जुटी है। बताया जा रहा है की आत्महत्या करने वाला व्यक्ति का तीसरे मंजिल पर कोरोना वार्ड के सी-ब्लॉक में उसका इलाज चल रहा था। इसी बीच मौका देख वह तीसरे माले से कूद गया, घटना के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया।

00 8 दिन में वसूले गए 80 हजार, अंततः वापस लौटे विवेक श्रीवास्तव
रायगढ़ (शोर सन्देश)। पेट की आंतों में अल्सर, किडनी के दर्द से पीड़ित रायगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार विवेक श्रीवास्तव इलाज के लिए राजधानी रायपुर के अस्पताल में 8 दिन तक भर्ती रहने के बाद आधे अधूरे इलाज से तंग आकर वापस अपने शहर रायगढ़ लौटने को मजबूर हो गए। रायपुर के अस्पताल में उनसे 8 दिन में बतौर फीस 80 हजार रुपये वसूल लिए गए, जबकि उनके पास आयुष्मान कार्ड (डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य कार्ड) भी था। लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें उस कार्ड के एवज में किसी तरह का लाभ देने से साफ इनकार कर दिया। जबकि सरकार की ओर से आयुष्मान कार्ड पर 5 लाख रुपये तक प्रदेश के किसी भी अस्पताल में निशुल्क इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई है। बहरहाल राजधानी रायपुर के अस्पताल से पत्रकार विवेक श्रीवास्तव रायगढ़ वापस होने के लिए रवाना हो चुके थे। दीवाली से कुछ दिन पहले जब रायगढ़ में उन्हें पेट में असहनीय दर्द हुई तो वे इलाज के लिए रायगढ़ के ही मेट्रो बालाजी अस्पताल में गए थे। लेकिन वहां भी उन्हें आयुष्मान कार्ड का लाभ देने से इनकार कर दिया गया था। इसी तरह रायपुर के बालाजी अस्पताल में उन्हें सरकार की योजनाओं का कोई लाभ देने से इनकार कर दिया गया। तब वे राजधानी के ही गुढ़ियारी रोड स्थित सुयश हॉस्पिटल में 8 दिन पहले भर्ती हुए थे। वहां उन्हें अल्सर के अलावे हार्निया की भी तकलीफ की बात बताई गई। सुयश हॉस्पिटल में भी उन्हें आयुष्मान कार्ड या छत्तीसगढ़ सरकार की किसी भी योजना का लाभ देने से साफ इनकार कर दिया गया और इलाज के नाम पर उनसे 8 दिन के दरम्यान 80 हजार रुपये वसूल लिए गए और 5 दिन और रूकने की बात वहां के डॉक्टरों ने कही। 5 दिन और का मतलब सीधे-सीधे और 50 हजार रुपये पत्रकार विवेक श्रीवास्तव के लिए इतनी बड़ी राशि का इंतजाम करना असंभव जैसी बात थी इसलिए वे आधे-अधूरे इलाज के बाद ही अस्पताल से खुद ही छुट्टी लेकर वापस रायगढ़ के लिए रवाना हुए। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक वे रायगढ़ नहीं पहुंचे थे।
यहां यह बताना होगा कि अभी कल ही नेशनल प्रेस डे के अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उनकी सरकार द्वारा पत्रकारों के हित में बनाई गई कई योजनाओं का लंबा-चौड़ा बखान किया था। जिसमें पत्रकारों को इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई थी लेकिन नेशनल प्रेस डे के दूसरे ही दिन एक बीमार पत्रकार ने इलाज के दौरान अपनी आपबीती बताकर भूपेश सरकार के ढपोरशंखीय योजनाओं की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि जब यह एक पत्रकार के साथ अस्पतालों में ऐसा सुलूक किया जा रहा है तो आमजन के साथ कैसा सुलूक किया जाता होता इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकार के आयुष्मान योजना में राज्य के निवासियों को 5 लाख रुपये तक निशुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराने की सुविधा की घोषणा तो बड़े जोर-शोर से की गई थी लेकिन असलियत कुछ और ही है। सरकारी योजनाओं के लाभ से जब पत्रकारों को वंचित किया जा सकता है तो आमजन उन योजनाओं का लाभ किस हद तक ले पाते होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। वरिष्ठ पत्रकार विवेक श्रीवास्तव ने रायपुर के सुयश अस्पताल से लौटते हुए सोशल मीडिया में पोस्ट किया है कि अगर सरकारी योजनाएं कागजी हैं तो सरकार नाटक-नौटंकी करना छोड़ क्यों नहीं देती।