
लोग गर्मी से राहत पाने के लिए डाइट में तरह-तरह की चीज़ें शामिल करते हैं। इस मौसम में फिट रहने के लिए खानपान का विशेष ख्याल रखना चाहिए। गर्मी में डिहाइड्रेशन, खाना सही से न पचने जैसी तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी डाइट में उन चीज़ों को शामिल करें, जिससे आप इस मौसम में होने वाली परेशानियों को मात दे सकें। आज आपको कुछ खास हरे रंग के जूस के बारे में बताएंगे, जिन्हें पीने से आप ऊर्जावान महसूस करेंगे।
एलोवेरा का जूस
एलोवेरा जूस में औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसके सेवन से आप कई बड़ी बीमारियों से बच सकते हैं। यह विटामिन-ए, विटामिन-सी, सोडियम, आयरन, कैल्शियम जैसे तत्वों से भरपूर होता है। यह शरीर की कई परेशानियों को दूर करने के साथ स्किन के लिए भी गुणकारी माना जाता है। गर्मी में इसे पीने से आप दिनभर ताजगी महसूस कर सकते हैं।
गन्ने का जूस
गर्मियों का सुपर एनर्जी ड्रिंक माना जाता है गन्ने का जूस। यह आपको रिफ्रेश करने के साथ कई रोगों से बचाने में मदद करता है। इसमें फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह ग्रीन जूस आपको डिहाइड्रेशन से बचाती है, इसके अलावा यह पाचन तंत्र को बेहतर करने में भी मददगार है।
लौकी का जूस
लौकी सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसका जूस भी उतना ही फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन-सी, फॉस्फोरस, आयरन जैसे तत्व मौजूद होते हैं। आप अपनी डेली डाइट में लौकी का जूस शामिल कर सकते हैं। इसे पीने से आपको कई परेशानियों से राहत मिल सकती हैं।
करेले का जूस
करेले का टेस्ट जितना कड़वा होता है, यह सेहत के लिए उतना ही फायदेमंद माना जाता है। करेले का जूस डायबिटीज के मरीजों के लिए रामबाण है। इसे पीने से कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने में भी मदद मिलती है।
पालक का जूस
गर्मी के मौसम में हरी पत्तेदार सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है। ऐसे में आप अपनी डाइट में पालक का जूस भी शामिल कर सकते हैं। यह शरीर को हाइड्रेट करने के साथ खून की कमी को भी दूर करता है।

नई दिल्ली (शोर संदेश)। देश में कोरोना का खतरा एक बार फिर बढ़ने लगा है। ताजा जानकारी के मुताबिक, भारत में बीते 24 घंटों में कोरोना के 1,249 नए मरीज सामने आए हैं। इसके साथ ही देश में महामारी के सक्रिय मरीजों की संख्या 7,927 हो गई है। यानी इतने मरीजों का इलाज देश के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, इस दौरान 2 मरीजों की मौत हुई। ये कर्नाटक और गुजरात के थे। इस दौरान 925 लोगों ने कोरोना को मात दी। मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की र 98.8 प्रतिशत है जबकि मृत्यु दर 1.19 प्रतिशत है। इस बीच, केंद्र सरकार ने लोकसभा को बताया कि आईसीएमआर के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि दो महीने से अधिक समय में अस्पतालों में भर्ती होने वाले श्वसन संक्रमण के 50 प्रतिशत मामले एच3एन2 इन्फ्लूएंजा के हैं। स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने एक लिखित उत्तर में कहा कि एक जनवरी से 20 मार्च के बीच एच3एन2 इन्फ्लूएंजा के कुल 1,161 मामले सामने आए हैं, जो मौसमी इन्फ्लूएंजा वायरस का एक उपप्रकार है। उन्होंने कहा कि इनमें से ज्यादातर मामलों में खांसी और बुखार के लक्षण दिखाई दिए। मंत्री ने कहा कि एच3एन2 एक वायरल श्वसन संक्रमण है और इसके उपचार में एंटीबायोटिक दवाओं की कोई भूमिका नहीं है।

नई दिल्ली (शोर संदेश)। दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने नया कारनामा कर दिया है। डॉक्टरों की टीम ने महिला के गर्भ में पल रहे भ्रूण के दिल को महज 90 सेकंड में ठीक कर दिया। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के कार्डियोथोरेसिक साइंसेज सेंटर में अंगूर के आकार के दिल का सफल बैलून डाइलेशन किया गया है। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और प्रसूति एवं स्त्री रोग के भ्रूण चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम ने इस प्रक्रिया को सफल बनाया। इस प्रक्रिया के बाद मां और गर्भ में पल रहे बच्चे की स्थिति बेहतर है। भ्रूण चिकित्सा विभाग के साथ कार्डियोलॉजी और कार्डियक एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टर भ्रूण की निगरानी कर रहे हैं। इस दौरान देखा जा रहा है कि भविष्य में भ्रूण के दिल के कक्ष का विकास सही से होगा या नहीं। डॉक्टरों का कहना है कि गर्भ में रहने के दौरान बच्चे में होने वाले गंभीर हृदय रोगों का निदान किया जा सकता है। गर्भ में इलाज से बच्चे का विकास जन्म के बाद बेहतर हो सकता है।
*यह थी समस्या*
डॉक्टरों का कहना है कि गर्भस्थ के दिल में यह एक अवरुद्ध वाल्व का गुब्बारा फैलाव है। इस प्रक्रिया को अल्ट्रासाउंड की मदद से की जाती है। इस प्रक्रिया में मां के पेट के माध्यम से बच्चे के दिल में एक सुई डाली गई। फिर गुब्बारे कैथेटर का उपयोग करके, रक्त प्रवाह में सुधार के लिए बाधित वाल्व को खोला गया। इस प्रक्रिया के बाद डॉक्टरों का दावा है कि भ्रूण का दिल बेहतर विकसित होगा और जन्म के समय हृदय रोग कम गंभीर होगा। डॉक्टर ने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया से भ्रूण के जीवन का खतरा हो सकता है। इसे अत्यधिक सावधानी के साथ किया जाता है। आम तौर पर एंजियोग्राफी के तहत ऐसी प्रक्रिया की जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं कर सकते थे। यहां सब कुछ अल्ट्रासाउंड मार्गदर्शन के तहत किया जाता है। इसे करने के लिए ज्यादा समय भी नहीं ले सकते थे, यदि समय ज्यादा लगता तो बच्चा मर सकता था। एम्स में कार्डियोथोरेसिक साइंसेज सेंटर की टीम के वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा यह प्रक्रिया महज 90 सेकंड में की गई।
तीन बार हुआ था नुकसान
एम्स में आई 28 वर्षीय गर्भवती महिला इससे पहले तीन बार गर्भपात हो चुका था। महिला अपने बच्चे को खोना नहीं चाहती थी। डॉक्टरों द्वारा बच्चे की हृदय की स्थिति के बारे में बताए जाने और परिणाम में सुधार की इच्छा के साथ प्रक्रिया के लिए सहमति देने के बाद माता-पिता वर्तमान गर्भावस्था को जारी रखना चाहते थे।

नई दिल्ली (शोर संदेश) । एच3एन2 वायरस का खतरा भारत में तेजी से बढ़ता जा रहा है। हरियाणा और कर्नाटक के अब ये वायरस धीरे-धीरे सभी राज्यों में फैलता जा रहा है। एच3एन2 वायरस की चपेट में आकर आज भारत में तीसरे मरीज की मौत हो चुकी है। गुजरात के वडोदरा में 58 साल की महिला एच3एन2 वायरस का शिकार हो कर दम तोड़ दिया है। सैंपल जांच के लिए पुणे लैब भेजे जाएंगे। यह वायरस स्वाइन फ्लू का म्यूटेटेड वायरस बताया जा रहा है। एच3एन2 से हरियाणा और कर्नाटक में भी दो मरीजों की मौत हो चुकी है। आपको बताएं कि, पिछले कुछ महीनों में देश में फ्लू के मामले अचानक से बढ़ गए हैं अधिकांश संक्रमण H3N2 वायरस के कारण हो रहा है , जिसे “हांगकांग फ्लू” के रूप में भी जाना जाता है. यह वायरस देश में अन्य इन्फ्लुएंजा उपप्रकारों की तुलना में अधिक अस्पताल में भर्ती होने का कारण बन रहा है. इस वायरस के लक्षणों में लगातार खांसी, बुखार, ठंड लगना, सांस फूलना और घरघराहट शामिल हैं, साथ ही मरीजों ने मतली, गले में खराश, शरीर में दर्द और दस्त की भी शिकायत देखने को मिल रहा है. आपको बताएं कि, ये लक्षण लगभग एक सप्ताह तक बने रह सकते हैं. कोविड जैसे नियमो के पालन से ही इस वायरस से बचा जा सकता है। इन्फ्लूएंजा से बचने के लिए भी मास्क काफी जरूरी है. ये वायरस भी रेस्पिरेटरी इंफेक्शन है जो एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है. मास्क लगाने से इससे बचाव हो सकेगा. साथ ही छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अगले कुछ सप्ताह तक अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना होगा. अगर इन लोगों को खांसी-जुकाम या हल्के बुखार की शिकायत है तो डॉक्टर से मिलना चाहिए. अगर दो या दिन में लक्षण ठीक हो रहे हैं तो ये अच्छा संकेत है, लेकिन इससे ज्यादा दिनों तक लक्षणों का बने रहना खतरा हो सकता है. ऐसे में सेहत का विशेष ध्यान रखना है.

रायपुर (शोर संदेश)। विश्व किडनी दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में बच्चों के लिए पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी के विशेष क्लिनिक का शुभारंभ किया गया। जिसमें किडनी रोगों से पीड़ित बच्चों का इलाज किया जाएगा। अभी एम्स में प्रत्येक सप्ताह लगभग बीस बाल किडनी रोगी पीड़ित पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों ने किडनी रोगों से बचने के लिए जीवन शैली में आवश्यक परिवर्तन अपनाने को कहा है। विशेष क्लिनिक का उद्घाटन करते हुए निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर ने कहा कि इससे बच्चों में किडनी रोग के कारणों और इसके उपचार के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे भविष्य में किडनी रोग से पीड़ित बच्चों पर शोध भी संभव हो सकेगा। विभागाध्यक्ष डॉ. विनय राठौर ने बताया विशेष क्लिनिक प्रत्येक गुरुवार को नौ से एक बजे तक आयोजित होगा। वर्तमान में विभाग में 90 बाल किडनी रोगी रजिस्टर्ड हैं जिनमें से लगभग 10 को नियमित डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है। इन्हें मुख्य रूप से चेहरे, पैर और पेट पर सूजन की शिकायत होती है।
उन्होंने बताया कि विभाग में औसतन 1500 किडनी रोगी प्रतिमाह आ रहे हैं। इनमें लगभग 100 रोगी नए होते हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते किडनी रोग को रोकने के लिए जीवन शैली में आवश्यक परिवर्तन करने होंगे। इसके लिए प्रति दिन आठ से दस गिलास पानी पीने की आदत डालें जिससे डिहाइड्रेशन से बचा जा सके। कोई भी दवा खासतौर पर दर्द निवारक, बिना चिकित्सकीय परामर्श के न लें। इसके साथ ही अधिक नमक के सेवन से बचते हुए मौसमी सब्जियां और फलों को अपने नियमित आहार में शामिल करें। फास्ट फूड से भी स्वयं को बचाने की आवश्यकता है। शुगर और बीपी को भी नियमित चेक करवाते रहे। योग से भी किडनी रोगों से बचाव किया जा सकता है। इससे पूर्व विभाग की नर्सिंग ऑफिसर उर्मिला की याद में पौधारोपण किया गया। उर्मिला के परिजनों ने हाल ही में उसकी किडनी और कॉर्निया दान की थी। इसके साथ ही पोस्टर प्रजेंटेशन और वॉकाथान के माध्यम से परिसर के आसपास के लोगों को नियमित रूप से पैदल चलने और साइकलिंग करने का संदेश दिया गया जिससे किडनी और फेफड़े स्वस्थ रहे। कार्यक्रमों का आयोजन नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और नर्सिंग कालेज के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें प्रो. अनिल कुमार गोयल, डॉ. दिबाकर साहू, डॉ. रोहित ने भाग लिया।

रायपुर (शोर संदेश) ।मुख्यमंत्री बघेल ने रविवार को रायपुर में एम्स के समीप टाटीबंध में श्रीगहोई वैश्य समाज, रायपुर द्वारा बनवाए गए नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री बघेल ने इस अवसर पर राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त को नमन करते हुए कहा की एम्स में मरीजों के इलाज के दौरान मरीजों और उनके परिजनों के रुकने की व्यवस्था के लिए समाज द्वारा यह भवन बनवाया गया है। गहोई वैश्य समाज रायपुर ने सेवाभाव से यह बहुत ही प्रशंसनीय और पुनीत कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं आप सबको नवनिर्मित भवन के लोकार्पण की बधाई देता हूँ। सामाजिक भवनों, धर्मशालाओं में समाज के उत्थान और विकास की चर्चाएं भी होती हैं, दूसरे समाज के लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ के बाहर दूसरे राज्यों से आने वाले मरीजों के लिए यह भवन काफी उपयोगी होगा। कई बार इलाज के लिए काफी समय के लिए रुकना पड़ता है, ऐसे में इस भवन के माध्यम से मरीजों और उनके परिजनों की रुकने की समस्या का समाधान हो सकेगा और उन्हें काफी राहत प्रदान करेगा। अस्पताल के मरीजों के लिए आप कमरे उपलब्ध कराएंगे, इस कार्य को मरीज और उनके परिजन कभी नहीं भुला पाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज का यह कार्य उच्च कोटि की मानव सेवा है। समाज द्वारा नया रायपुर में सामाजिक भवन के लिए जमीन की मांग पर उन्होंने कहा कि कोई भी समाज जिसके पास जमीन नहीं है, उन्हें सामाजिक कार्यों के लिए निर्धारित राशि देने पर भू खण्ड दिया जा रहा है। कलेक्टर गाइडलाइन को भी हमने 30 प्रतिशत कम कर दिया है। बघेल ने कहा कि समाज के नाम से जमीन की रजिस्ट्री करा लें ,भवन बनाने के लिए सहायता दी जाएगी।
नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने कार्यक्रम का अध्यक्षता की। विशेष अतिथि के रूप में सांसद सुनील सोनी, संसदीय सचिव विकास उपाध्याय, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष एवं विधायक कुलदीप जुनेजा, विधायक बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर महापौर एजाज ढेबर भी उपस्थित थे।
गहोई समाज के अध्यक्ष अशोक बानी ने बताया कि अत्याधुनिक सुविधायुक्त यह भवन विशेष रूप से एम्स रायपुर के मरीजों के परिजनों के ठहरने के लिए बनाया गया है। सचिव संजय गुप्ता व कोषाध्यक्ष पंकज सरावगी ने बताया कि भवन के लोकार्पण समारोह में समाज के विभिन्न स्थानों से समाज के लोग एकत्रित हुए हैं।

रायपुर (शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन शुक्रवार को बिलासपुर में एम्स खोलने का मुद्दा उठा। कांग्रेस विधायक शैलेश पांडेय ने स्वास्थ्य मंत्री से पूछा कि बिलासपुर में एम्स के लिए राज्य शासन ने क्या कार्यवाही की। स्वास्थ्य मंत्री ने लिखित जवाब में कहा कि फिलहाल कोई कार्यवाही नहीं की गई है। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने चुटकी लेते हुए कहा कि बाबा कि चल रही है क्या अगर चलेगी तो ये ताजमहल बनवा देंगे वहीं जेसीसीजे विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा, आप शासकीय संकल्प ले आइए हम समर्थन करेंगे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बिलासपुर संभाग में अच्छी शिक्षा का अभाव है, जब भी एम्स खुले बिलासपुर में खुले। मंत्री ने जवाब देते हुए कहा बिलासपुर में एम्स के लिए नई दिल्ली को पत्र लिखा जा चुका है। एम्स की स्थापना बड़ा कठीन निर्णय है। बहुत से ऐसे राज्य है जहां एक भी एम्स नहीं है। पहली प्राथमिकता तो ये होगी कि दूसरे एम्स की ज़रूरत कहा है, तो पहला विकल्प बस्तर और दूसरा सरगुजा आया था। छत्तीसगढ़ एम्स को लेकर अभी फ़िलहाल भारत सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। दूसरे एम्स को बिलासपुर में स्थापित करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
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जशपुर (शोर सन्देश ) नया रायपुर के श्री सत्य साई संजीवनी हार्ट हॉस्पिटल में जिले के आरबीएसके टीम का 3 दिनों का इंटरएक्टिव प्रशिक्षण राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आरबीएस भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है जिसका उद्देश्य बच्चों को व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है। छत्तीसगढ़ में, आरबीएस कार्यक्रम को चिरायु कार्यक्रम कहा जाता है। इस कार्यक्रम के तहत, आंगनवाडियों और सरकारी स्कूलों में सभी बच्चों की जांच मोबाइल स्वास्थ्य टीमों द्वारा आयोजित की जाती है, जिसमें एक पुरुष एमओ, एक महिला एमओ, एक एएनएम, एक फार्मासिस्ट और एक प्रयोगशाला तकनीशियन शामिल हैं। जशपुर जिले के कलेक्टर डॉ रवि मित्तल ने जिले में चिरायु कार्यक्रम की समीक्षा की, जिसमें आरबीएसके कार्यान्वयन में कई कमियों को नोट किया गया था। जिला प्रशासन के अनुरोध के अनुसार, यूनिसेफ छत्तीसगढ़ कार्यालय ने एक तकनीकी भागीदार के रूप में सत्य साई अस्पताल को शामिल किया । जनवरी 2023 में 8 में से 6 टीमों का बेसलाइन मूल्यांकन किया गया था। इसके बाद, प्रत्येक 80 कर्मचारियों के 2 बैचों में टीमों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। डॉ. श्रुति प्रभु, प्रमुख, पब्लिक हेल्थ ने आरबीएस बेसलाइन मूल्यांकन और प्रशिक्षण कार्यक्रम का नेतृत्व किया। 3 दिनों में, प्रशिक्षण सत्र और डेमन्स्ट्रैशन सभी प्रमुख विषयों को कवर करते हुए आयोजित किए गए थे। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल के साथ आरबीएस टीम के सदस्यों को सुसज्जित करना था । डॉ. श्रुति प्रभु ने एंट्रोपोमेट्री और ग्रोथ चार्ट, ग्रुप सी के रोगों और किशोर स्वास्थ्य के बारे में चर्चा की। डॉ. पायल अरोड़ा ने आनुवांशिकी रोग, न्युरल ट्यूब दोष और समूह ए, बी और डी के रोगो को विस्तार से समझाया । डॉ.एम.एस. रवींद्र, सलाहकार बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजिस्ट ने जन्मजात हृदय रोगों और मामलों के प्रदर्शन के बारे में बताया। डॉ. दीपशिखा अग्रवाल, निदेशक एमजीएम अस्पताल बाल चिकित्सा आंखों की स्थिति पर विस्तृत। डॉ. निखिल शुक्ला ने प्रतिभागियों को पब्लिक हेल्थ विभाग और इसकी विभिन्न गतिविधियों के बारे में सूचित किया। डॉ. मयंक चंद्रकर ने बच्चों में दंत रोगों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में इंटरैक्टिव सत्र, समूह चर्चा और व्यावहारिक प्रदर्शन शामिल थे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रतिभागी विषय वस्तु की गहन समझ हासिल करें। विलास भोस्कर, एमडी, एनएचएम और डॉ. भगत, डीडी, बाल स्वास्थ्य समापन के लिए मुख्य अतिथि थे। स्टेट आरबीएसके टीम के सदस्य डॉ. संगीता पाटनवार और अभिषेक ने चिरायु डेटा रिपोर्टिंग पर प्रशिक्षण प्रदान किया। आरबीएस प्रशिक्षण कार्यक्रम योजना के तहत बच्चों को प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि देश में प्रत्येक बच्चा सर्वोत्तम संभव स्वास्थ्य सेवा सेवाएं प्राप्त करता है और यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सभी प्रतिभागियों को अध्ययन सामग्री और जलपान सहित सभी आवश्यक संसाधनों के साथ प्रदान किया गया था। अंतिम वैलेडिक्टरी समारोह में श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल, नया रायपुर में सौभाग्यम में हुआ। इस कार्यक्रम के सफलतापूर्वक आयोजन में नर्सिंग ऑफिसर किरण वर्मा, प्रीती साहू, कॉउंसलर फरज़ाना, ललिता, नितेश, सुशीला का उल्लेखनीय योगदान रहा। प्रत्येक प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि से प्रमाण पत्र प्राप्त किया। प्रतिभागियों को इस शानदार इंटरैक्टिव प्रशिक्षण से लाभ मिला। सरकार ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश में बाल स्वास्थ्य सेवाओं के समग्र सुधार हेतु भाग लेने के लिए सभी पात्र आरबीएस टीम के सदस्यों को आमंत्रित किया। देखा जाय तो श्री सत्य साई संजीवनी हॉस्पिटल और छत्तीसगढ़ हेल्थ डिपार्टमेंट की यह पहल देश में सभी बच्चों को स्वस्थ रखने की ओर पहला कदम है। अभी मीलों आगे जाना है।

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रायपुर (शोर संदेश)। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कोविड की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डाॅ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय में आज कोरोना प्रबंधन (कोविड मैनेजमेंट) प्रोटोकॉल का मॉक ड्रिल किया गया। शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप कोरोना प्रबंधन मॉक ड्रिल के दौरान एक प्रतीकात्मक मरीज के माध्यम से चिकित्सकीय, नर्सिंग, पैरामेडिकल स्टाफ के रैपिड रिस्पांस(त्वरित प्रतिक्रिया) को परखा गया। चिकित्सालय के विशेषीकृत कोरोना वार्ड में मॉक ड्रिल के दौरान इस बात की सुनिश्चितता की गई कि यदि भविष्य में कोरोना का कोई संभावित प्रकरण आता है तो किस तत्परता से उसका उपचार किया जाएगा। इस दौरान सभी तरह के जीवन रक्षक उपकरणों का प्रतीकात्मक रूप से उपयोग करते हुए उनकी क्रियाशीलता की जांच की गई। स्वास्थ्य मंत्री श्री टी. एस. सिंहदेव ने ऑनलाइन जुड़कर माॅकड्रिल को देखा और तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान चिकित्सा महाविद्यालय की अधिष्ठाता डाॅ. तृप्ति नागरिया, अम्बेडकर अस्पताल अधीक्षक डाॅ. एस. बी. एस. नेताम, अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. विनित जैन, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ एवं कोरोना के आईसीयू इंचार्ज डाॅ. ओ. पी. सुंदरानी, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डाॅ. आर. के. पंडा, नेत्र रोग विभाग से डाॅ. संतोष सिंह पटेल, जनरल सर्जरी से डाॅ. संदीप चंद्राकर समेत चिकित्सालय के नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ एवं तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे। अस्पताल अधीक्षक डाॅ. एस. बी. एस. नेताम ने कोरोना की तैयारियों के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना के संभावित प्रकरणों से निपटने के लिए अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था है। वर्तमान में चिकित्सालय में मेडिकल ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता है। ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए दो पीएसए ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट, एक क्रायोजेनिक टैंक के साथ ही साथ मैनिफोल्ड सिस्टम है। वर्तमान में 20 बेड का कोरोना आईसीयू तथा 12 बेड का ट्राइएज वार्ड तैयार है। इसके अलावा ऑक्सीजन युक्त 60 बेड की व्यवस्था है। जरूरत पड़ने पर बेड को बढ़ाया जाएगा। दवाईयों, पीपीई किट तथा जांच किट की उपलब्धता है। फिलहाल चिकित्सालय में कोरोना के कोई केस नहीं है। शासन के निर्देशानुसार कोविड से निपटने के लिए चिकित्सालय स्तर पर पूरी तैयारियां कर ली गई हैं।
