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*खून का निकलना बंद न हो तो यह हीमोफीलिया का हो सकता है लक्षण*

16-Apr-2022

रायगढ़ (शोर संदेश) शरीर पर चोट लगने की स्थिति में खून का निकलना बंद ना हो रहा हो तो यह हीमोफीलिया रोग का लक्षण भी हो सकता है। यह लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए क्योंकि हीमोफीलिया के दौरान होने वाला आंतरिक रक्तस्राव अंगों और ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है और जीवन को खतरे में डाल सकता है।

 
इस आशय का प्रचार-प्रसार करने के लिए जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हीमोफीलिया रोग के विषय में जनजागरुकता के उद्देश्य से हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर विभिन्न माध्यमों से यह प्रचारित करने का प्रयास किया जाता है कि हीमोफिलिया या पैतृक रक्तस्राव एक आनुवांशिक (माता-पिता से बच्चों में होने वाली) रोग है जो आमतौर पर पुरुष को होती है और महिला द्वारा फैलती है। हीमोफीलिया एक अनुवांशिक स्थिति है। यह स्थिति इलाज योग्य नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को कम करने और भविष्य की स्वास्थ्य जटिलताओं को रोकने के लिए इसका इलाज किया जा सकता है।
 
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएन केसरी ने बतायाः “हीमोफीलिया दिवस के अवसर पर इस रोग के लक्षण, कारण की जानकारी देते हुए इससे बचाव संबंधी उपायों का प्रचार-प्रसार किया जाता है ताकि पीड़ित को इसके खतरे तथा सावधानीपूर्वक बचाव के प्रति सचेत किया जा सके। हीमोफीलिया रोग होने का खतरा नवजात शिशुओं पर भी रहता है। यह गर्भवती महिला से शिशु में फैलता है।”
 
इस तरह प्रभावित करता है हीमोफीलिया :
हीमोफीलिया एक ऐसी दुर्लभ स्थिति है, जिसमें रक्त का थक्का ठीक से नहीं जमता है। हीमोफीलिया पीड़ित लोगों में कुछ निश्चित प्रोटीन की कमी होती है जिसे क्लॉटिंग कारक कहा जाता है। ऐसे 13 प्रकार के क्लॉटिंग (रक्त स्कंदन) कारक हैं, जो चोट वाले स्थान पर खून के बहाव को रोकने के लिए प्लेटलेट्स के साथ काम करते हैं। प्लेटलेट छोटे रक्त कोशिकाएं हैं जो अस्थि-मज्जा में बनती हैं। स्कंदन कारक का अत्यधिक नुकसान रक्तस्राव को जन्म देता है। एक सहज या आंतरिक रक्तस्राव मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंग के भीतर होने पर जीवन के लिए घातक हो सकता है।
 
हीमोफीलिया के होते हैं लक्षण :
हीमोफीलिया के लक्षण अलग-अलग तरह से प्रकट होते हैं। यदि शरीर में क्लॉटिंग-कारक के स्तर में बहुत कम मात्रा में कमी हो तो शरीर में शल्य चिकित्सा या आघात (गंभीर चोट) के बाद ही खून बह सकता है और यदि क्लॉटिंग-कारक के स्तर में कमी गंभीर होती है तो सहज रूप में रक्तस्राव का अनुभव हो सकता है। रक्तस्राव बाहरी या आंतरिक रूप में भी हो सकता है।
 
सहज रक्तस्राव के लक्षण :
-कट या चोटों से ज्यादा खून बहना
– अस्पष्ट चोटें
– टीकाकरण के बाद असामान्य रक्तस्राव होना
– जोड़ों में दर्द, सूजन आना
-शरीर में नीले-नीले निशानों का बनना
-मसूढ़े से खून बहना
-कई बड़ी या गहरी चोटें उत्पन्न होना
-मूत्र या मल में खून निकलना
– शिशुओं में अस्पष्ट चिड़चिड़ाहट
– बार-बार नाक से खून आना
 
मस्तिष्क रक्तस्राव के लक्षण :
सिरदर्द, उल्टी, सुस्ती, व्यवहार में परिवर्तन, चक्कर आना, दृष्टि की समस्याएं, लक़वा और दौरे आदि समस्याएँ शामिल हो सकती हैं।
 
मामूली चोट के लिए प्राथमिक चिकित्सा :
दवा और पट्टी का उपयोग आमतौर पर रक्तस्राव को रोकने के लिए किया जाता है। त्वचा के निचले छोटे क्षेत्रों में खून बहने को रोकने के लिए एक बर्फ पैक का उपयोग किया जा सकता है।मुंह में मामूली रक्तस्राव को कम करने के लिए आइस पॉप का उपयोग किया जा सकता है।
 
राहत के अन्य उपाय : 
-नियमित व्यायाम
-दांत और मुंह को स्वच्छ रखना
-रक्त दान करते समय या रक्त स्थानांतरण के दौरान हीमोफीलिया रोग की जांच
-टीकाकरण सुनिश्चित कर लेना चाहिए।

*बड़ी खबर : कोरोना की फिर से आहट, केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा…*

18-Mar-2022

नई दिल्ली (शोर संदेश)। विश्व के दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप के कुछ हिस्सों में कोरोना वायरस के फिर से मामले बढ़ने लगे हैं। इसका हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वे इंफ्लूएंजा जैसी बीमारी और सांस संबंधी गंभीर संक्रमण की फिर से निगरानी शुरू करें, ताकि किसी भी तरह के शुरुआती संकेत नजरअंदाज नहीं हो सकें और कोविड नियंत्रण में रहे।

इंफ्लूएंजा-जैसी बीमारी और सांस संबंधी गंभीर संक्रमण के मामलों की जांच सरकार के लिए कोविड प्रबंधन के स्तंभ रहे हैं। बहरहाल, इसकी जांच हाल में रोक दी गई थी, क्योंकि भारत में कोविड-19 के मामले कम आ रहे हैं. निगरानी बढ़ाने के तहत आईएलआई और एसएआरआइ से पीड़ित अस्पताल में भर्ती मरीजों की कोविड जांच कराई जाएगी और संक्रमित नमूनों को जीनोम अनुक्रमण के लिए भेजा जाएगा। भूषण ने पत्र में कहा कि अगर मामलों के नए कलस्टर उभर रहे हैं तो प्रभावी निगरानी की जाए और ILI और SARI मामलों की नियमों के तहत जांच की जाए और उन पर नजर रखी जाए ताकि किसी भी तरह के शुरुआती संकेत नजरअंदाज न हों और कोविड संक्रमण का प्रसार नियंत्रण में रहे।


*ओमिक्रॉन को कोविड-19 का अंतिम वैरिएंट मानना साबित हो सकता है खतरनाक : WHO*

26-Jan-2022

 नई दिल्ली (शोर संदेश)। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने चेतावनी दी है कि ओमिक्रॉन को कोविड-19 का अंतिम वैरिएंट मानना खतरनाक साबित हो सकता है। संगठन ने कहा कि कोरोना वायरस के और अधिक वैरिएंट  सामने आने की आशंका है।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के कार्यकारी बोर्ड की बैठक के दौरान संयुक्‍त राष्‍ट्र स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के महानिदेशक एधनॉम गेब्रियासिस ने कहा कि परीक्षण और वैक्‍सीन जैसे उपायों के व्‍यापक उपयोग से ही इस वर्ष महामारी के घातक दौर से उबरना सम्‍भव होगा। उन्‍होंने सूक्ष्‍मजीव रोधी उपचारों के खिलाफ प्रतिरोधी क्षमता से निपटना, मानव स्‍वास्‍थ्‍य पर जलवायु परिवर्तन के घातक असर और तम्‍बाकू का इस्तेमाल कम से कम करने जैसे वैश्विक स्‍वास्‍थ्‍य मुद्दो पर संगठन की उपलब्धियों का भी उल्‍लेख किया। लेकिन, कहा कि महामारी के घातक दौर से उबरना सामूहिक प्राथमिकता होगी। श्री गेब्रियासिस ने कोरोना संक्रमण से निपटने में अनुशासित और एकजुट प्रयासों की अपील की।


*भारत में मिला ओमिक्रॉन का नया वैरिएंट BA-2 इंदौर में 4 बच्चों समेत 16 मरीजों में पुष्टि*

24-Jan-2022

 नई दिल्ली (शोर संदेश)। दुनियाभर में कहर ढा रहे कोरोना के ओमिक्रॉन वर्जन के बीच वायरस के एक और वैरिएंट का खतरा मंडराने लगा है। इस वैरिएंट को BA-2 नाम दिया गया है। मध्य प्रदेश के इंदौर में ओमिक्रॉन के सब वैरिएंट BA-2 ने दस्तक दे दी है। ओमिक्रॉन के नए स्ट्रेन से शहर में 16 लोग संक्रमित मिले हैं। इनमें 6 बच्चे भी हैं। वहीं, देशभर से 530 सैम्पल जांच के लिए भेजे गए है। UK, ऑस्ट्रेलिया और डेनमार्क में भी इसके केस सामने आए हैं। यह वैरिएंट ओमिक्रॉन की तरह ही तेजी से फैलता है। ऐसे में इसकी पहचान न होने पर इसके संक्रमण को रोक पाना बड़ी चुनौती है। चिंता की बात यह है कि टेस्ट किट की पकड़ में भी नहीं आ रहा है। इसी वजह से इसे ‘स्टेल्थ’ यानी छिपा हुआ वर्जन कहा जा रहा है। ब्रिटेन, स्वीडन और सिंगापुर में से हर एक देश ने 100 से ज्यादा सैम्पल जांच के लिए भेजे हैं।


*कोरोना के इलाज की गाइडलाइन बदली कई दवाओं के इस्‍तेमाल पर लगी रोक*

18-Jan-2022

नई दिल्ली (शोर संदेश)। कोरोना के इलाज को लेकर सरकार की ओर से नई गाइडलाइंस जारी की गई है। इसमें मरीजों को तीन श्रेणियों में बांटे जाने के साथ ही कई दवाओं के इस्‍तेमाल पर रोक लगा दी गई है। नई गाइडलाइन में कहा गया है कि इसका कोई प्रमाण नहीं मिला है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद कोरोना के जिन मरीजों को आक्सीजन की जरूरत नहीं होती है उन्हें इंजेक्शन के जरिये स्टेरायड देना लाभकारी है। एम्स, आइसीएमआर- कोविड-19 नेशनल टास्क फोर्स और स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त निगरानी समूह (डीजीएचएस) द्वारा ‘क्लीनिकल गाइडेंस फार मैनेजमेंट आफ एडल्ट कोविड-19 पेसेंट’ के नाम से संशोधित गाइडलाइंस जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि संक्रमण के प्रारंभिक चरण में या ज्यादा मात्रा में या जरूरत से अधिक समय तक स्टेरायड जैसी ताकत बढ़ाने वाली दवाओं के इस्तेमाल से ब्लैक फंगस जैसे संक्रमण का खतरा रहता है। गाइडलाइंस के मुताबिक मध्यम स्तर के संक्रमण वाले मरीज को इंजेक्शन मिथाइलप्रेडनिसोलो 0.5 से एक एमडी प्रति केजी को दो समान डोज या इसके बराबर डेक्सामेथासोन की डोज आमतौर पर पांच से 10 दिन तक दी जा सकती है। गंभीर संक्रमण होने पर रोगी को यह दवा की एक से दो एमजी प्रति केजी को दो समान डोज में पांच से 10 दिन तक दिया जा सकता है। हल्के संक्रमण के मामले में बीमारी शुरू होने के पांच दिन बाद भी अगर बुखार रहता है और खांसी आती है तो बिडसोनाइड 800एसीजी की पांच दिन तक दो डोज ली जा सकती है। अगर खांसी दो से तीन हफ्ते तक लगातार बनी रहती है तो मरीज को टीबी यानी क्षयरोग या अन्य जांच करानी चाहिए। मध्यम या गंभीर तरह के संक्रमण पर आपात स्थितियों में रेमडेसिविर देने की अनुसंशा की गई है, लेकिन यह दवा सिर्फ अस्पताल में भर्ती मरीजों को ही दी जा सकती है और जो आक्सीजन पर नहीं हों। अगर किसी मरीज में संक्रमण के 24 से 48घंटे के भीतर ही गंभीर लक्षण दिखने लगते हैं तो उसे तोसिलिजुमैब देने की अनुमति दी गई है। आइसीयू वाले मरीजों को भी यह दवा दी जा सकती है। सरकार की ओर से बदली गई नई गाइडलाइंस में संक्रमितों की तीन श्रेणियां बनाई गई हैं। इनमें हल्का, मध्यम और गंभीर इंफेक्‍शन के रूप में मरीजों का वर्गीकरण किया गया है। नई गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि किसी भी श्रेणी के मरीजों के इलाज में एंटीवायरल दवा मोलनुपिराविर और मोनोक्लोनल एंडीबाडी काकटेल को शामिल नहीं किया गया है। समाचार एजंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक इसके अलावा आइवरमेक्टिन, फेविपिराविर और डाक्सीसाइक्लिन जैसी दवाइयों को भी गाइडलाइंस से बाहर रखा गया है।



*मार्च से शुरू हो जाएगा 12-14 साल के बच्चों का टीकाकरण*

17-Jan-2022

नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारत में कोरोना टीकाकरण की रफ्तार तेजी से बढ़ती जा रही है। इस बीच केंद्र सरकार के कोविड-19 वर्किंग ग्रुप (NTAGI) के अध्यक्ष डॉक्टर एनके अरोड़ा ने एलान किया है कि भारत में 12 से 14 साल के बच्चों का टीकाकरण मार्च में शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि तब तक 15 से 18 साल के किशोरों का टीकाकरण पूरा हो जाने की उम्मीद है। ऐसे में अगले चरण में बच्चों को टीका लगाए जाने की उम्मीद है। डॉक्टर अरोड़ा के मुताबिक, देश में 15-18 आयु वर्ग के 7.5 करोड़ लोग हैं। इनमें से 3.45 करोड़ किशोरों को कोरोना की वैक्सीन लग चुकी है। चूंकि, किशोरों को कोवाक्सिन लगाई जा रही है, इसलिए 28 से 42 दिन के अंदर उन्हें टीके की दूसरी खुराक भी दे दी जाएगी। यानी 15-18 आयु वर्ग का वैक्सिनेशन मार्च तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद 12 से 14 साल वाले बच्चों का टीकाकरण पूरे जोर-शोर से शुरू किया जा सकेगा।


*इन देशों में आई ओमिक्रॉन संक्रमण में गिरावट, भारत में लगेगा वक्त*

16-Jan-2022

नई दिल्ली (शोर संदेश)। तीन महीने बाद दुनिया के छह देशों में ओमिक्रॉन स्वरूप के संक्रमण में यूटर्न देखने को मिलने लगा है। जिन देशों में गिरावट दिख रही है उनमें यूके, कनाडा, इटली,आयरलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड शामिल हैं। इन देशों में संक्रमण प्रसार का ग्राफ अब नीचे की ओर बढ़ने लगा है। हालांकि भारत में अभी ऐसी स्थिति दिखाई नहीं दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अभी यूटर्न आना बाकी है। चूंकि दूसरे देशों में करीब एक महीने से भी अधिक समय पहले से ओमिक्रॉन के मामले मिलने शुरू हुए थे। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर का पीक भारत में अगले कुछ सप्ताह में ही स्पष्ट हो पाएगा।

आंकड़ों के अनुसार देश में अभी कोरोना की तीसरी लहर चल रही है, जिसमें दैनिक संक्रमण दर 16 फीसदी पार चली गई है और साप्ताहिक संक्रमण भी 13 फीसदी पर आई है। बीते तीन दिन से देश में रोजाना दो लाख से अधिक मामले मिल रहे हैं। वहीं सात से 15 जनवरी के बीच देश में 17.50 लाख से भी ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं।

पांच फीसदी मरीज हो रहे अस्पतालों में भर्ती
विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में अभी पांच फीसदी से भी कम मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करने की नौबत आ रही है। हालांकि एक आशंका यह भी कि अगले कुछ दिन में यह दर पांच से 10 फीसदी हो सकती है।

कोरोना और बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि जहां ओमिक्रॉन की वजह से संक्रमण की नई लहर बीती लहर से ज्यादा असरदार दिखाई दी है। ऐसे में अगर भारत में दूसरी लहर से तुलना करें तो अभी कोरोना का प्रसार और अधिक होने की आशंका है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि ब्रिटेन में जब पहली बार ओमिक्रॉन वैरिएंट का पता चला तब वहां करीब छह फीसदी मरीज भर्ती हो रहे थे।

कई गुना बढ़ी सक्रिय मरीजों की संख्या
स्वास्थ्य मंत्रालय की ही एक रिपोर्ट के अनुसार बीते 12 जनवरी तक कई राज्यों में पिछले हफ्ते की तुलना में सक्रिय केस की संख्या कई गुना तक बढ़ गई। उत्तर प्रदेश में कोरोना के सक्रिय मामले 14 गुना 3,173 से बढ़कर 44,466 तक पहुंच गए हैं। जबकि पंजाब में 8.65, मध्य प्रदेश में 10.95 और बिहार में 11.27 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कोरोना से ठीक होने की दर अब 94.83 फीसदी
पश्चिम बंगाल के कोलकाता और हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति जिले में हर दूसरा नमूना संक्रमित मिला है। जबकि सबसे अधिक अरुणाचल प्रदेश के दो जिलों में 77 फीसदी तक संक्रमण दर पहुंच गई है। बहरहाल शनिवार को लगातार तीसरे दिन देश में दो लाख से अधिक लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। देश में कोरोना की रिकवरी दर में लगातार कमी आ रही है।

फिलहाल यह 95 से कम होकर 94.83 फीसदी तक पहुंच गई है। इनके अलावा कोरोना की दैनिक संक्रमण दर 16.66 फीसदी और साप्ताहिक संक्रमण दर 12.84 फीसदी दर्ज की गई है। पिछले एक दिन में 16,13,740 सैंपल की जांच हुई है। हर दिन संक्रमित रोगियों की संख्या बढ़ने की वजह से कोरोना की सक्रिय दर 3.85 फीसदी तक पहुंच गई है। देश में अभी 14,17,820 कोरोना मरीज उपचाराधीन हैं।

आंकड़ों के अनुसार, 3 से 9 जनवरी तक देश के 29 राज्यों में 129 जिले गंभीर श्रेणी में थे लेकिन बीते छह दिन में लगातार बढ़ते मामलों के चलते अब 32 राज्यों में इन गंभीर जिलों की संख्या 236 तक पहुंच गई है। इतना ही नहीं देश के 154 जिलों में भी हालात सामान्य नहीं है। यहां कोरोना की साप्ताहिक संक्रमण दर पांच से 10 फीसदी के बीच है। इसलिए सरकार ने इन सभी जिलों को चिंताजनक श्रेणी में रखा है। हालांकि एक राहत यह भी है कि देश के 344 जिलों में अभी भी संक्रमण दर पांच फीसदी से नीचे है।


*ओमिक्रॉन-डेल्टा वैरिएंट को निष्क्रिय कर देती है इस वैक्सीन की बूस्टर खुराक*

12-Jan-2022

हैदराबाद (शोर संदेश)। भारत की पहली स्वदेशी वैक्सीन कोवाक्सिन को लेकर एक बड़ा एलान हुआ है। इस टीके को बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने दावा किया है कि कोवाक्सिन का बूस्टर डोज कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन और डेल्टा वैरिएंट को निष्क्रिय कर देता है। कंपनी ने बूस्टर पर जारी शोध के शुरुआती नतीजे आने के बाद यह दावा किया है। इससे पहले भारत बायोटेक ने कहा था कि कोवाक्सिन बूस्टर डोज के उसके परीक्षणों में बिना किसी गंभीर प्रतिकूल घटना के लंबी अवधि के लिए सुरक्षित दिखाया। कोवाक्सिन निर्माता कंपनी ने कहा कि डोज लेने वालों से 90 फीसदी में कोरोना के खिलाफ (दूसरी खुराक के 6 महीने बाद) मजबूत एंटीबॉडी प्रतिक्रिया देखी गई।

15-18 साल के किशोरों के टीकाकरण में भी कोवाक्सिन का इस्तेमाल
भारत बायोटेक की कोवाक्सिन से ही 15 से 18 साल के किशोरों का टीकाकरण किया जा रहा है। हाल ही में भारत बायोटेक ने कहा था कि दूसरे और तीसरे चरण के अध्ययन में उसकी कोवाक्सिन दो से 18 वर्ष आयुवर्ग में सुरक्षित, अच्छी तरह सहन करने योग्य और इम्युनिटी बढ़ाने वाली पाई गई है। भारत बायोटेक के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्णा इल्ला की मानें तो बच्चों और किशोरों पर कोवैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के डाटा बेहद उत्साहजनक हैं।


राजधानी में ओमिक्रॉन की घुसपैठ 4 संक्रमितों में हुई इसकी पुष्टि

11-Jan-2022

 रायपुर (शोर संदेश)। प्रदेश में कोरोना की तीसरी लहर ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन की वजह से प्रदेश में दहशत है। राजधानी रायपुर में 4 ओमिक्रोन मरीजों की पुष्टि हुई है। संक्रमितों में से दो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लौटे थे, वहीं दो लोग यहीं के हैं, जो इसकी चपेट में आए हैं। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि ओमिक्रोन बिना विदेश यात्रा के बगैर भी अपनी चपेट में ले रहा है।

इस मामले में छत्तीसगढ़ के महामारी नियंत्रण विभाग के निदेशक डॉ. सुभाष मिश्रा ने कहा कि जिन लोगों के नमूने हमने जीनोम अनुक्रमण के लिए भुवनेश्वर, ओडिशा भेजे थे, उनमें से 4 की रिपोर्ट आई है। वे ओमिक्रोन से संक्रमित पाए गए हैं। सभी रायपुर के रहने वाले हैं। इनमें से दो की ट्रेवल हिस्ट्री है। वे यूएई-दुबई से लौटे थे। यहां जांच की गई तो वे पॉजिटिव पाए गए। उसके बाद उनके नमूने जीनोम अनुक्रमण के लिए भेजे गए थे।


*किशोरों के कोरोना टीकाकरण के लिए जुटा शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग*

30-Dec-2021

 दक्ष कमांड सेंटर के `वार रूम` में हुई महत्वपूर्ण बैठक

रायपुर (शोर संदेश)। जिले में किशोर बालक-बालिकाओं के शत-प्रतिशत कोविड-19 टीकाकरण के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। कलेक्टर सौरभ कुमार के निर्देश पर रायपुर स्मार्ट सिटी लि. के अतिरिक्त प्रबंध संचालक चन्द्रकांत वर्मा एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक चतुर्वेदी ने आज `दक्ष` कमांड सेंटर के वार रूम में शिक्षा,स्वास्थ्य व चिकित्सा विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर शत-प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को पूरा करने रायपुर जिले में की जा रही तैयारियों को अंतिम रूप दिया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मीरा बघेल भी बैठक सम्मिलित थी।कोरोना संक्रमण की संभावित लहर को रोकने रायपुर जिले में की जा रही तैयारियों के संबंध में कलेक्टर सौरभ कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार सुबह ही एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें नगर निगम कमिश्नर प्रभात मलिक, रायपुर स्मार्ट सिटी लि. के अतिरिक्त प्रबंध संचालक चंद्रकांत वर्मा, सी.ई.ओ. जिला पंचायत मयंक चतुर्वेदी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मीरा बघेल सहित स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के जिला अधिकारी सम्मिलित थे। इस बैठक में किशोरों के टीकाकरण के संबंध में दिए गए दिशा-निर्देशों के परिपालन के लिए दक्ष कमांड सेंटर के `वार रूम` में तत्काल बैठक आयोजित कर दिशा-निर्देश दिए गए।इस बैठक में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग को पूर्ण समन्वय के साथ शत-प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को पूरा करने हर स्कूल में 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं का चिन्हाकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में निर्देशित किया गया है कि टीकाकरण का यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम रोस्टर के अनुरूप निष्पादित किया जाए एवं संबंधित स्कूल एवं महाविद्यालय स्टाफ का भी इस महत्वपूर्ण कार्य में सहयोग लें।टीकाकरण रजिस्ट्रेशन के संबंध में अवगत कराया गया है कि किशोरों के टीकाकरण के लिए www.cowin.gov.in पोर्टल पर पंजीयन 1 जनवरी 2022 से शुरू हो रहा है, 15-18 आयु वर्ग के बालक-बालिकाएं अपना पंजीयन इस पोर्टल पर जाकर कर सकेंगे। वहीं जिन किशोरों को ऑनलाइन पंजीयन में किसी भी प्रकार की असुविधा होगी, उनके लिए टीकाकरण स्थल पर भी पंजीयन की सुविधा उपलब्ध रहेगी। बैठक में जिला रोजगार अधिकारी केदार पटेल, जिला टीकाकरण अधिकारी आशीष वर्मा, स्वास्थ्य विभाग जिला कार्यक्रम अधिकारी मनीष मैजरवार, जिला शिक्षा कार्यक्रम समन्वयक के.एस. पटले, सिटी प्रोग्राम मैनेजर अंशुल ठुड्गर, स्वतंत्र रहंडाले उपस्थित थे।

 



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