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स्वास्थ

छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस-बीडीएस काउंसिलिंग का मॉपअप-राउंड स्थगित

16-Oct-2024
रायपुर। ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने नीट 2024 एमबीबीएस-बीडीएस में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग मॉपअप राउंड को स्थगित कर दिया है। कांग्रेस मेडिकल सेल ने मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई छात्रों के प्रवेश को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद मॉपअप राउंड को स्थगित किया गया है।
दरअसल, मॉकअप राउंड के तहत मंगलवार को सीट का आवंटन होना था, लेकिन चिकित्सा शिक्षा के कमिश्नर कार्यालय से जारी आदेश में मॉकअप राउंड को कैंसिल करने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। वहीं इस मामले पर कांग्रेस मेडिकल सेल के अध्यक्ष डॉ राकेश गुप्ता ने इसे सत्य की जीत बताई है।
 

मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन के दौरान बिजली का तार भीड़ पर गिरा,सात से ज्यादा लोग झुलसे ,एक गंभीर

13-Oct-2024
बालोद/रायपुर। ( शोर संदेश )  बालोद जिले के गुरुर ब्लॉक में शनिवार मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन के दौरान बिजली का तार भीड़ पर गिर पड़ा। इस हादसे में सात से ज्यादा लोग झुलस गए, जिसमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। सभी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मौके पर पहुंची पुलिस घटना की जांच कर रही है ।
संजारी चौकी प्रभारी सहायक उप निरीक्षक लता तिवारी ने बताया कि कंवर गांव में धूमधाम से दुर्गा विसर्जन का कार्यक्रम था।कुछ लोगों में देगी सवार था और जो पारंपरिक डांग होते हैं वो बिजली के तार से टकरा गए । जिसके बाद से तार टूटकर गिर गया। जहां डांग पकड़ने वाला परमेश्वर पटेल बुरी तरह घायल हो गया ।साथ ही उसके आसपास खड़े लोग भी करंट के चपेट में आ गए। बिजली के तार की चपेट में सबसे पहले डांग पकड़ा शख्स परमेश्वर पटेल आया, इसके बाद दूसरे लोग भी बिजली तार के संपर्क में आए । बिजली की चपेट में आए लोगों को आनन फानन में 108 की मदद से जिला अस्पताल लाया गया । सभी का इलाज फिलहाल जारी है।घायलों में तीन महिलाएं और 14 साल का बच्चा भी शामिल है । घटना में एक की हालत गंभीर है ।
स्थानीय निवासी और जनपद सदस्य डिकेश्वरी बंधु ने बताया कि गांव में विसर्जन का कार्यक्रम चल रहा था । इसी दौरान लोगों की भीड़ पर बिजली का तार टूटकर गिर पड़ा ।मौके पर चीख पुकार मच गई. सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया गया है ।मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि एक मरीज की हालत गंभीर है। बाकी लोगों की हालत स्थिर है। कुल सात लोगों का इलाज जिला अस्पताल में किया जा रहा है।  

निजी हॉस्पिटल पर 31 लाख का जुर्माना

09-Oct-2024
रायपुर।   ( शोर संदेश )  राज्य नोडल एजेंसी छत्तीसगढ़ द्वारा आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजनांतर्गत नियम विरूद्ध कार्य करने वाले अस्पतालों पर नियमित रूप से कार्यवाही की जा रही है। राज्य नोडल एजेंसी को अस्पतालों के विरूद्ध अनावश्यक पैकेज ब्लॉक करने, अनावश्यक आई.पी.डी. एवं आई.सी.यू. के पैकेज ब्लॉक करने, योजनांतर्गत लाभ देने से मना करने, अतिरिक्त नगद राशि लिए जाने इत्यादि की शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिसके कारण अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। 
अस्पतालों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण संतोषजनक नही होने अथवा स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होने वाले अस्पतालों पर कार्यवाही की गई है। इसके अंतर्गत बाबूजी केयर हॉस्पिटल रायपुर एवं समता हॉस्पिटल डोण्डी लोहारा बालोद द्वारा अनावश्यक रूप से पैकेज ब्लॉक करने व उच्चाधिकारियों के आदेश पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देने के कारण इनका योजनांतर्गत पंजीयन निरस्त कर दिया गया है।
जय अम्बे मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल रायपुर द्वारा गलत तरीके से आई.सी.यू. के पैकेज ब्लॉक करने के कारण जारी स्पष्टीकरण का जवाब संतोषजनक नहीं होने पर राशि 31 लाख 32 हजार रूपए का जुर्माना लगाया गया एवं तीन माह के लिए अस्पताल को योजना से निलंबित किया गया है। 

पीलिया के अब तक 15 मरीजों की पुष्टि

22-Sep-2024
रायपुर।   ( शोर संदेश )  छत्तीसगढ़ के रायपुर में पीलिया के मामले लगातार सामने आ रहे है। सुरजनगर के बीएसयूपी कॉलोनी में अब तक 15 पीलिया से पीड़ित मरीजों की पुष्टि हुई हैं। पीलिया के मामले सामने आने के बाद से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। स्वास्थ्य टीम डोर टू डोर जाकर सर्वे का काम कर रही है।
इससे पहले शहर के बोरियाखुर्द के आरडीए कॉलोनी से भी पीलिया के मरीज मिले है। दरअसल पिछले दिनों से पीलिया के मरीजों में लगातार वृद्धि हो रही हैं। जिसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। बीएसयूपी कॉलोनी के रहने वाले सूरज यादव ने बताया की निगम ने वाटर एटीएम लगाया है।
जिसमें कीड़े मिलें है और अब इसके बाद टाइफाइड और पीलिया से लोग प्रभावित हो रहे हैं। लाभांडी के संकल्प सोसाइटी में भी टाइफाइड का क़हर जारी है। हाल ही में बीएसयूपी और पीएम आवास के लोगों ने पानी और अन्य समस्याओं को लेकर निगम का घेराव किया था। लेकिन इसके बाद भी स्थिति नहीं बदली है। राजधानी जैसे शहर में लोग साफ़ पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। गंदे पानी पीने के कारण लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। 

रायगढ़ में डेंगू के 18 मरीज मिले

15-Sep-2024
रायगढ़।  ( शोर संदेश )  शुरुआती हायतौबा के बाद शहर में डेंगू से बचाव और उपायों पर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग सुस्त है। मरीज और उनके परिजनों का बुरा हाल है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक शुक्रवार को ही शहर में 18 डेंगू मरीज मिले। हालांकि असल आंकड़े सरकारी से दो गुना अधिक हैं।
निजी अस्पतालों में जगह नहीं है। वार्ड और कमरे डेंगू मरीजों से भरे हैं। मरीजों में प्लेटलेट्स तेजी से गिर रहा है, मरीजों के परिजन दिनभर डोनर ढूंढते हैं, डोनर मिलने के बाद सेपरेटर मशीन की सहायता से प्लेटलेट्स लेकर जान बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य अमला बना रहा छूटे हुए का आयुष्मान कार्ड

14-Sep-2024
रायपुर।   ( शोर संदेश )   कलेक्टर डाॅ. गौरव सिंह के निर्देश पर जिले का स्वास्थ्य अमला घर-घर पहुंचकर छूटे हुए का आयुष्मान कार्ड बना रहे हैं। इसके लिए कलेक्टर ने आगामी 10 दिनों तक खंड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में पहुंचकर कर्मचारी अधिक से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाएं। इसके लिए प्रशिक्षण भी कर्मचारियों को दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि कलेक्टर डाॅ. गौरव सिंह के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मिथिलेश चैधरी ने बैठक लेकर जिले में आयुष्मान योजना का लाभ अधिक से अधिक दिलाने के निर्देश दिए है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी घर-घर पहुंचकर नागरिकों का आयुष्मान कार्ड बना रही है। इसमें पांच लाख रूपए तक इलाज की सुविधा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मिथिलेश चौधरी ने बताया कि नागरिकों के निरंतर आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं, लेकिन जिन नागरिकों का आयुष्मान कार्ड नहीं बना हैं, उनका कार्ड जल्द से जल्द बनाया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर पर पहुंचकर आयुष्मान कार्ड बना रही है। इसके लिए शहरी क्षेत्रों के एएनएम, सुपरवाइजर की बैठक भी बुलाई गई थी। बैठक में सभी को निर्देश भी दिए गए है।

शासकीय चिकित्सकों के वेतन में वृद्धि, प्राध्यापकों को अब आदिवासी इलाके में 2.25 लाख तो अन्य जगहों पर 1.90 लाख रुपए वेतन

13-Sep-2024
रायपुर।  ( शोर संदेश )  स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा निर्णय लिया है। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के सीनियर रेसीडेंट व प्रदर्शक (पीजी), सहायक प्राध्यापक, सह प्राध्यापक एवं प्राध्यापक के वेतन में ऐतिहासिक वृद्धि का आदेश जारी किया गया है। यह आदेश 1 सितंबर से राज्य के शासकीय मेडिकल कालेजों में प्रभावी होगा।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार गैर अनुसूचित क्षेत्रों के मेडिकल कालेज में पदस्थ प्राध्यापक का वेतन 1 लाख 55 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 90 हजार रूपए कर दिया गया है। इसी तरह से सह प्राध्यापक का वेतन 1 लाख 35 हजार से 1 लाख 55 हजार, सहायक प्राध्यापक का वेतन 90 हजार से 1 लाख तथा सीनियर रेसीडेंट व प्रदर्शक (पीजी) का वेतन 65 हजार रूपए से बढ़ाकर 75 हजार रूपए कर दिया गया है। अनुसूचित क्षेत्रों के मेडिकल कालेज में पदस्थ प्राध्यापक का वेतन 1 लाख 90 हजार रूपए से बढ़ाकर 2 लाख 25 हजार रूपए कर दिया गया है।
सह प्राध्यापक का वेतन 1 लाख 55 हजार से 1 लाख 85 हजार, सहायक प्राध्यापक का वेतन 90 हजार से 1 लाख 25 हजार तथा सीनियर रेसीडेंट व प्रदर्शक (पीजी) का वेतन 65 हजार रूपए से बढ़ाकर 95 हजार रूपए कर दिया गया है।
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के संविदा चिकित्सकों के लिए जारी पुनरीक्षित संविदा वेतनमान के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र में लगभग 46 फीसदी तथा गैर अनुसूचित क्षेत्र में लगभग 23 फीसदी की वेतन वृद्धि की गयी है।
वेतन में हुई ऐतिहासिक बढ़ोतरी: जायसवाल 
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने वेतन वृद्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को लेकर कोई समझौता नहीं होगा। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में पढ़ने वाले भावी डाक्टरों का ये अधिकार है कि उन्हें अच्छी गुणवत्ता वाला शिक्षक और शिक्षा मिले। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में राज्य के प्रत्येक वर्ग के लिए खुशियों का पिटारा शामिल है।

स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी डॉक्‍टरों के लिए खोला खुशियों का पिटारा, 46% तक बढ़ा वेतन

12-Sep-2024
रायपुर।   ( शोर संदेश )    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अगुवाई में राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के सीनियर रेसीडेंट, प्रदर्शक (पीजी), सहायक प्राध्यापक, सह प्राध्यापक और प्राध्यापकों के वेतन में ऐतिहासिक वृद्धि का आदेश जारी किया है, जो 1 सितंबर 2024 से प्रभावी होगा।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के द्वारा जारी आदेश के अनुसार गैर अनुसूचित क्षेत्रों के मेडिकल कालेज में पदस्थ प्राध्यापक का वेतन 1 लाख 55 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 90 हजार रूपए कर दिया गया है। इसी तरह से सह प्राध्यापक का वेतन 1 लाख 35 हजार से 1 लाख 55 हजार, सहायक प्राध्यापक का वेतन 90 हजार से 1 लाख तथा सीनियर रेसीडेंट व प्रदर्शक (पीजी) का वेतन 65 हजार रूपए से बढ़ाकर 75 हजार रूपए कर दिया गया है।
जारी आदेश के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों के मेडिकल कालेज में पदस्थ प्राध्यापक का वेतन 1 लाख 90 हजार रूपए से बढ़ाकर 2 लाख 25 हजार रूपए कर दिया गया है। इसी तरह से सह प्राध्यापक का वेतन 1 लाख 55 हजार से 1 लाख 85 हजार, सहायक प्राध्यापक का वेतन 90 हजार से 1 लाख 25 हजार तथा सीनियर रेसीडेंट व प्रदर्शक (पीजी) का वेतन 65 हजार रूपए से बढ़ाकर 95 हजार रूपए कर दिया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस फैसले को राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि वेतन वृद्धि का यह निर्णय राज्य सरकार की स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता और शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
अनुसूचित क्षेत्रों में संविदा चिकित्सकों के वेतन में 46% तक की वृद्धि की गई है, जबकि गैर अनुसूचित क्षेत्रों में यह वृद्धि लगभग 23% की है।

वैज्ञानिकों ने की ऐसी एंटीबॉडी की खोज, जो कोरोना के सभी वैरिएंट के इलाज में होगी मददगार

09-Sep-2024
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  चार साल पहले कोरोना वायरस ने दुनियाभर में हाहाकार मचाया. इस वायरस के चलते दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत हुई. जबकि करोड़ों लोग इस बीमारी से प्रभावित हुए. दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस से बचने के लिए वैक्सीन तो तैयार कर ली. लेकिन भविष्य में इस बीमारी के नए वैरियंट से लड़ने के लिए अभी और खोज जारी है. इस बीच वैज्ञानिकों ने एक ऐसी एंटीबॉडी का पता लगाया है जो भविष्य में कोविड-19 के नए वैरियंट के इलाज में मददगार साबित होगी.
कोरोना के सभी वैरियंट से लड़ सकती है ये एंटीबॉडी
शोधकर्ताओं के मुताबिक, उन्होंने एक अत्यधिक प्रभावी एंटी बॉडी की पहचान की है जो सार्स कोवि-2 वेरिएंट के साथ-साथ संबंधित कोरोना वायरस को भी बेअसर कर सकती है, जो कि कोविड-19 और संभावित भविष्य की महामारी के खिलाफ बेहतर उपचार और टीकों की आशा प्रदान करती है.
वैज्ञानिक मोटे तौर पर कोविड-19 को दुनिया भर में एक स्थानिक बीमारी मानते हैं, जिसका व्यवहार काफी हद तक उस फ्लू जैसा है, लेकिन उन्होंने लंबे समय तक चलने वाली कोविड स्थितियों पर भी सावधानी जताई है, जो संक्रमण की रोकधाम करती है. जर्नल सेल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि शोध का नेतृत्व ऑस्टिन के टेक्सास विश्वविद्यालय और चैपल हिल के उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने किया है.
क्या है इस एंटीबॉडी में खास
वैज्ञानिकों की मानें तो हाल की खोजी गई इस एंटीबॉडी में सभी प्रमुख सार्स-सीओवी-2 वेरिएंट, 2003 के सार्स वायरस और अन्य चमगादड़ और पैंगोलिन कोरोनावायरस को पूरी तरह से बेअसर करने में मददगार माना गया है.

देश में आया पहला मामला… मंकीपॉक्स का बंदरों से क्या है कनेक्शन

09-Sep-2024
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )   अफ्रीकी और कई यूरोपीय देशों के बाद भारत में मंकीपॉक्स का पहला संदिग्ध मामला सामने आया है. युवा संक्रमण प्रभावित देश से भारत लौटा है. लक्षण दिखने के बाद उसे आइसोलेशन में रखा गया है. उसके सैम्पल की जांच की जा रही है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीका के कई देश मंकीपॉक्स से प्रभावित हैं और युवा वहां से लौटा था. मंकीपॉक्स का कनेक्शन बंदर से जोड़ा जाता है, लेकिन चौंकाने वाली बात है कि यह 100 फीसदी अनिवार्य नहीं है कि इसका वायरस बंदर से ही फैले. फिर सवाल उठता है कि बीमारी का नाम का बंदरों के नाम पर क्यों और कैसे पड़ा.
अमेरिकन हेल्थ एजेंसी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट कहती है, इस बीमारी को पहले मंकीपॉक्स के नाम से जाना जाता है, लेकिन बाद में इसका नाम एमपाॅक्स किया गया. हालांकि, आम बोलचाल की भाषा में भी एमपॉक्स की जगह इसे मंकीपॉक्स कहा जाता है.
मंकीपॉक्स में कैसे जुड़ा बंदर का नाम?
एमपाक्स एक जूनोटिक डिजीज है यानी यह जानवरों और इंसानों के बीच फैल सकती है. इसका पहला मामला 1958 में सामने आया था. बंदरों में इसका वायरस मिला था. यही वजह है कि इस बीमारी का नाम मंकीपॉक्स पड़ा, हालांकि यह वायरस इसमें कहां से आया अब तक इसका पता नहीं चल पाया. 


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