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रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने 18 दिसम्बर को स्वर्णप्राशन

18-Dec-2024
रायपुर । ( शोर संदेश )  रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने 18 दिसम्बर को रायपुर के शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय चिकित्सालय में बच्चों को स्वर्णप्राशन कराया जाएगा। विभिन्न रोगों से रोकथाम एवं इम्युनिटी बढ़ाने के लिए बच्चों को पांच दवाईयों से बने बाल रक्षा किट भी वितरित किए जाएंगे। स्वर्णप्राशन के लिए आने वाले बच्चों के माता-पिता का देश का प्रकृति परीक्षण अभियान के तहत प्रकृति परीक्षा भी की जाएगी।
आयुर्वेद महाविद्यालय चिकित्सालय में हर पुष्य नक्षत्र तिथि में शून्य से 16 वर्ष के बच्चों को स्वर्णप्राशन कराया जाता है। चिकित्सालय के कौमारभृत्य बाल रोग विभाग में सवेरे नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक इसका सेवन कराया जाता है। यह औषधि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, श्वसन संबंधी एवं अन्य रोगों से रक्षा करने के साथ ही एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाने में अत्यंत लाभकारी है। यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में भी मदद करता है। स्वर्णप्राशन हर महीने की पुष्य नक्षत्र तिथि में शून्य से 16 वर्ष के बच्चों को पिलाई जाने वाली औषधि है।

 


स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मरीजों के सफल उपचार के लिए एसीआई की टीम की प्रशंसा की

18-Dec-2024
रायपुर। ( शोर संदेश )   पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में दो हृदय रोगियों के धमनियों में जमे कैल्शियम को ऑर्बिटल एथेरेक्टोमी प्रक्रिया के जरिये हटाते हुए हृदय में रक्त प्रवाह को सुगम बनाया गया। एथेरेक्टोमी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उपयोग एंजियोप्लास्टी से पहले कैल्सीफाइड ब्लॉक (प्लाक) को खोलने के लिए किया जाता है। इसमें 1.25 मिमी का डायमंड-कोटेड ड्रिल डिवाइस होता है जो कैल्शियम को लगभग दो माइक्रोन आकार के महीन कणों में बदल देता है। सरल शब्दों में कहें तो यह कैल्शियम को चूर-चूर करके महीन आकार के कण बना देता है। इस पद्धति के जरिये धमनियों को अच्छी तरह से साफ करके रक्त प्रवाह को सुगम बनाया जाता है। आर्बिटल एथेरेक्टोमी का उपयोग भारी (हैवी) कैल्सीफाइड कोरोनरी धमनियों वाले रोगियों के इलाज के लिए किया जाता है।
 इस प्रक्रिया में एक पतले कैथेटर के जरिये धमनी के अंदर अपने अक्ष पर घूमने वाला हीरे का लेप किये हुए बर को प्रविष्ट कराया जाता है जो कैल्सिफाइड सतह को धीरे-धीरे पीस कर बाहर निकालता है और धमनी की सतह को चिकना कर देता है। इस चिकनी सतह में रक्त का प्रवाह सुगमता से होता है जिससे दिल के दौरे पड़ने की संभावना कम हो जाती है।
 स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मरीजों के सफल उपचार के लिए टीम को बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। एसीआई में हृदय रोग विशेषज्ञों की अनुभवी एवं समर्पित टीम ने कोरोनरी ऑर्बिटल एथेरेक्टोमी पद्धति से हृदय रोगियों के लिए नयी उपचार सुविधा की शुरुआत की है। शासकीय चिकित्सालय में इस तकनीक का उपयोग कर एसीआई ने उपलब्धि हासिल की है। हृदय रोग के उपचार की दिशा में एसीआई की टीम द्वारा किये जा रहे नवाचार मरीजों में अच्छे जीवन की नई उम्मीद जगा रहे हैं।

केस के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि रायपुर निवासी 77 वर्षीय को-मॉर्बिड बुजुर्ग मरीज को बी. पी., शुगर की समस्या के साथ-साथ उनके हृदय की पम्पिंग क्षमता काफी कम थी। एंजियोग्राफी रिपोर्ट में हृदय की बायीं मुख्य एवं तीनों नसों में कैल्शियम का जमाव था। इस वजह से सामान्य एंजियोप्लास्टी पद्धति से एंजियोप्लास्टी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में ऑर्बिटल एथरेक्टोमी प्रक्रिया के जरिए कैल्शियम को हटाते हुए एंजियोप्लास्टी की गई। वहीं भिलाई निवासी 68 वर्षीय मरीज की नसों में कैल्शियम का जमाव था। बाहर के अस्पताल में एंजियोग्राफी करवाया था। वहां पर बाईपास सर्जरी का सुझाव दिया गया। मरीज वहां से सुझाव लेकर एसीआई आया और एसीआई में उसके लेफ्ट साइड की मुख्य नस में बहुत ज्यादा कैल्शियम जमा होने की वजह से ऑर्बिटल एथेरेक्टोमी पद्धति का उपयोग करते हुए सफलतापूर्वक एंजियोप्लास्टी कर दी गई। एक दिन में ही मरीज स्वस्थ होकर अपने घर चला गया।
 
क्या है ऑर्बिटल एथेरेक्टोमी प्रक्रिया
कार्डियोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कुणाल ओस्तवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि ऑर्बिटल एथेरेक्टोमी प्रक्रिया में धमनी में एक पतली कैथेटर डाली जाती है। इस कैथेटर में एक घूमता हुआ हीरा-लेपित बर (डायमंड कोटेड बर (किसी उपकरण या धातु की खुरदरी सतह)) होता है जो विशेष वृत्ताकार धुरी पर 360 डिग्री घूमते हुए नसों के अंदर जमे हुए कैल्शियम को खुरचकर निकालता है। कैल्शियम के जमाव को तोड़कर या पीसकर, यह प्रक्रिया रक्त प्रवाह के लिए एक चिकनी सतह बनाती है, जिससे एंजियोप्लास्टी करने एवं स्टंट लगाने में सहूलियत प्राप्त होती है और रुकावटों की संभावना कम हो जाती है। ऐसी नसें जिनमें सामान्य तरीके से एंजियोप्लास्टी एवं स्टंटिंग नहीं की जा सकती। उनमें यह तरीका अपनाया जाता है। यह कैल्शियम को इतने छोटे टुकड़ों में तोड़ता है कि वह आर्टरिज के कैपिलरी के द्वारा ही निकल जाता है।

सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती है कमल ककड़ी

17-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) आपने भी कभी न कभी कमल ककड़ी की सब्जी जरूर खाई होगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कमल ककड़ी को अंग्रेजी में लोटस कुकुंबर कहते हैं। कमल ककड़ी सेहत से जुड़ी कई समस्याओं का इलाज करने में कारगर साबित हो सकती है। इसके अलावा कमल ककड़ी खाकर आप अपनी सेहत को दमदार बना सकते हैं।
अगर आप अपनी हड्डियों को मजबूत बनाना चाहते हैं तो इस सब्जी को अपनी डाइट का हिस्सा बना लीजिए। कमल ककड़ी में पाए जाने वाले तमाम तत्व आपकी गट हेल्थ को काफी हद तक इम्प्रूव कर सकते हैं। इस सब्जी का सेवन कर न केवल आप अपना डाइजेशन सुधार सकते हैं बल्कि पेट से जुड़ी तमाम समस्याओं से भी खुद का बचाव कर सकते हैं।
अगर आप अपने बढ़ते हुए वेट पर काबू पाना चाहते हैं तो कमल ककड़ी का सेवन करना शुरू कर दीजिए। फाइबर रिच इस सब्जी को खाकर आप अपने वेट को लूज कर सकते हैं। इसके अलावा डायबिटीज को मैनेज करने के लिए भी कमल ककड़ी का सेवन किया जा सकता है। इस तरह के हेल्थ बेनिफिट्स उठाने के लिए सही मात्रा में कमल ककड़ी को कंज्यूम करना बेहद जरूरी है।
कमल ककड़ी में विटामिन के, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है। कमल ककड़ी में पाए जाने वाले पौष्टिक तत्व आपकी ओवरऑल हेल्थ को काफी हद तक इम्प्रूव कर सकते हैं। कमल ककड़ी आपकी स्किन और हेयर हेल्थ के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है।


स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए नगरीय प्रशासन विभाग ने जारी किए 55.58 करोड़

17-Dec-2024
रायपुर। ( शोर संदेश )  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं के निर्बाध और सुचारू संचालन के लिए 55 करोड़ 58 लाख रुपये जारी किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने नगरीय निकायों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के संचालन के लिए सभी जिलों में गठित जिला अर्बन पब्लिक सर्विस सोसाइटीज को आज कुल 55 करोड़ 58 लाख रुपये जारी किए हैं। इनमें दिसम्बर-2024 तक की सेवाओं के भुगतान के साथ ही आगामी मार्च-2025 तक का अग्रिम भुगतान शामिल है। इससे मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत शहरी लोगों को निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेगी।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने साेमवार काे जानकारी देते हुए बताया कि शहरी स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए शासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार को शहरी क्षेत्रों में, विशेषकर स्लम बस्तियों में रहने वाले परिवारों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं उनके मुहल्ले तक पहुंचाने तथा मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के मार्च-2025 तक सुचारू और निर्बाध संचालन के लिए बड़ी राशि जारी की गई है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में पिछले एक साल में 40 हजार से अधिक स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर 27 लाख से अधिक मरीजों का नि:शुल्क इलाज किया गया है। साथ ही 24 लाख से अधिक मरीजों को मुफ्त दवाईयां और 8 लाख मरीजों को निःशुल्क लैब टेस्ट की सुविधा प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत मुख्यमंत्री दाई-दीदी क्लीनिक योजना में पिछले एक वर्ष में एक लाख 75 हजार से अधिक महिलाओं का इलाज किया गया है। योजना के तहत नगरीय निकायों में महिला डॉक्टरों, महिला फार्मासिस्ट्स, महिला लैब टेक्नीशियन्स, एएनएम और महिला चालकों की टीम द्वारा एक वर्ष में 2995 शिविर आयोजित किए गए हैं। दाई दीदी क्लिनिक्स में पौने दो लाख महिलाओं के उपचार के साथ ही एक लाख 62 हजार से ज्यादा महिलाओं को नि:शुल्क दवाईयां और 49 हजार से अधिक महिलाओं को मुफ्त लैब टेस्ट का लाभ मिला है। योजना के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल प्राथमिकता से की जा रही है।

 


करी पत्ता का पानी भी सेहत को बनाता है दमदार

16-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) अगर आपको भी यही लगता है कि औषधीय गुणों से भरपूर करी पत्ते का इस्तेमाल महज खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है, तो आपको अपनी इस गलतफहमी को दूर कर लेना चाहिए। करी पत्ता आपकी सेहत पर फायदों की बौछार कर सकता है। अगर आप भी करी पत्ते का पानी पीने के कुछ कमाल के फायदों के बारे में नहीं जानते हैं, तो आपको भी महज एक हफ्ते के लिए इस नेचुरल ड्रिंक को अपनी डाइट का हिस्सा बनाकर देखना चाहिए।
करी पत्ते का पानी बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में एक गिलास पानी डालें। अब इस पानी में मुट्ठीभर करी पत्ते डालकर इसे अच्छी तरह से बॉइल करें। उबलने के बाद, जब ये पानी हल्का ठंडा हो जाए, तब आप इसे छानकर पी सकते हैं। बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए आपको सुबह-सुबह करी पत्ते का पानी पीना चाहिए। करी पत्ते का पानी आपकी हार्ट हेल्थ से लेकर आपकी लिवर हेल्थ तक के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
हर रोज करी पत्ते का पानी पीकर आप अपनी वेट लॉस जर्नी को काफी हद तक आसान बना सकते हैं। करी पत्ते का पानी आपके शरीर में जमा एक्स्ट्रा फैट को बर्न करने में कारगर साबित हो सकता है। इसके अलावा अगर आप अपनी इम्यूनिटी को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो भी आपको करी पत्ते का पानी पीना शुरू कर देना चाहिए। करी पत्ते का पानी आपकी गट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है यानी एसिडिटी और कब्ज जैसी पेट से जुड़ी समस्याओं से खुद का बचाव करने के लिए करी पत्ते के पानी को पिया जा सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि करी पत्ते में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन्स, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-माइक्रोबियल गुणों की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है। यही वजह है कि आयुर्वेद के मुताबिक करी पत्ते को सेहत के लिए वरदान माना जाता है।


सेहत के लिए वरदान है नीम के पत्ते

16-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) अगर आपको हर समय थकान और कमजोरी महसूस होती है तो नीम के पत्तों का सेवन करना शुरू कर दीजिए। नीम के पत्ते आपकी गट हेल्थ को काफी हद तक इम्प्रूव कर सकते हैं। पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए नीम के पत्तों का सेवन किया जा सकता है। बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए हर रोज सुबह-सुबह नीम के 4-5 पत्तों को चबाएं।
अगर आप अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो आप नीम के पत्तों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। नीम के पत्तों को रेगुलरली चबाने से आप खुद को बार-बार बीमार पड़ने से बचा सकते हैं। नीम के पत्ते आपकी बॉडी को डिटॉक्सिफाई करने में कारगर साबित हो सकते हैं। नीम के पत्तों को आंखों की सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नीम के पत्तों में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन सी, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, फॉस्फोरस, पोटैशियम जैसे पौष्टिक तत्वों की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा नीम की पत्तियां एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर होती हैं। इन तत्वों की वजह से ही आयुर्वेद एक्सपर्ट नीम की पत्तियों का सेवन करने की सलाह देते हैं।


डॉक्टरों को बताना होगा कितने मरीज डिस्चार्ज हुए, कितने की मौत हुई, रेफर क्यों किए

13-Dec-2024
रायपुर।( शोर संदेश ) रायपुर मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में सेवा दे रहे डॉक्टरों का मूल्यांकन अब सख्त होने जा रहा हैं, अब डॉक्टरों को जानकारी देनी होगी कि यूनिटवाइज कितने मरीज भर्ती हुए, कितनों ने लामा या डामा करवाया, कितने मरीजों की मौत हुई, मरीज रेफर किए हैं तो क्यों, ओपीडी से कितने मरीजों को आईपीडी में भर्ती किया गया आदि। इसके अलावा सर्जिकल विभाग के डॉक्टरों के लिए अलग से गाइडलाइन जारी की गई है। 
कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन किरण कौशल ने सभी डीन व अस्पताल अधीक्षकों को पत्र लिखकर डॉक्टरों का मूल्यांकन तत्काल शुरू करने को कहा है। हर माह के पहले सप्ताह में डॉक्टरों के काम की जानकारी सीएमई कार्यालय भेजी जाएगी। वहीं, माह के दूसरे सप्ताह में वीसी के माध्यम से चर्चा होगी। दरअसल, लामा व डामा के केस में परिजन मरीज को आंबेडकर अस्पताल से रिफर करवाकर किसी निजी अस्पताल में ले जाते हैं। इस तरह के केस में कई बार पर्याप्त इलाज नहीं मिलने की बात भी सामने आती रही है। यही नहीं, कुछ जूनियर डॉक्टर लामा को हथियार बनाकर मरीजों को जबर्दस्ती अस्पताल से चले जाने को कहते हैं। इसमें एक नोटशीट बनती है, जिसमें अटेंडेंट को हस्ताक्षर करना होता है।
अब डॉक्टरों को ये बताना होगा कि उनकी यूनिट में हर माह में कितने मरीज लामा व डामा हो रहे हैं। किसी मरीज की मौत हुई है तो भी उन्हें बताना होगा? हालांकि इसमें नोट करने वाली बात तो है, लेकिन अगर मरीज गंभीर स्थिति में अस्पताल आए तो इसमें डॉक्टरों की लापरवाही नहीं मानी जाएगी। फिर भी यूनिटवाइज मरीजों की मौत की संख्या से कुछ सवाल उठ सकते हैं।


सर्जिकल विभाग के डॉक्टरों के लिए अलग गाइडलाइन जारी की गई है। सर्जन को बताना होगा कि कौनसी सर्जरी की, सर्जरी या उसके बाद कॉम्प्लीकेशन तो नहीं हुआ? यही नहीं ये भी बताना होगा कि कितनी सर्जरी की और सर्जरी के दौरान या बाद में कितने मरीजों की मौत हुई? इसके साथ ही डॉक्टरों को अब रिसर्च का टॉपिक और कितने रिसर्च का पब्लिकेशन हुआ, ये भी जानकारी भेजनी होगी। जर्नल का नाम, कॉन्फ्रेंस में साइंटिफिक प्रेजेंटेशन भी बताना होगा। कॉन्फ्रेंस कहां हुआ या क्या अवार्ड मिला, गूगल शीट में ये जानकारी देनी होगी।
इस संबंध में कुछ डॉक्टरों का कहना हैं कि काम करने वाले डॉक्टरों के लिए यह कोई डरने वाली बात नहीं है। डरना तो उन डॉक्टरों को चाहिए जो समय बिताने के लिए कॉलेज या अस्पताल आते हैं। यानी जिनका पूरा ध्यान प्राइवेट प्रेक्टिस पर होता है। उन्हें अब बताना होगा कि कितने भर्ती हुए, कितने डिस्चार्ज, बेड की क्या स्थिति है? हाल में डीन ने सभी एचओडी को पत्र लिखकर इस तरह की जानकारी मांगी थी। चर्चा है कि डीन के कदम के बाद संचालनालय ने यह कदम उठाया है।

सर्दी में घर पर बनाएं स्वादिष्ट और हेल्दी सहजन का सूप

13-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है। इस मौसम में गर्मा-गर्म सूप पीने का एक अलग ही मजा होता है। ठंड के समय हर कोई कुछ गर्म और पौष्टिक खाना चाहते हैं, तो आप इस मौसम में सूप के ऑप्शन तलाशते हैं, तो आप घर पर बने सूप का मजा ले सकते हैं। घर पर बने सूप का एक शानदार विकल्प हो सकता है और इसे बनाना भी काफी किफायती है, क्योंकि इस बनाने के लिए सामग्रियां बेहद कम मात्रा में उपयोग किया जाता है। आइए जानते हैं सहजन का सूप घर पर कैसे सरल तरीके से बना सकते हैं।

सामग्री

- 1 कप दाल

- ताजी सहजन के छोटे टुकड़े

- 1 कटा हुआ टमाटर

- 1 कटा हुआ प्याज

- थोड़ी सी अदरक

- सर्दियों में सहजन का सूप बनाने के लिए आपको मुट्ठी भर दाल, ताजी सहजन के छोटे टुकड़े, कटे हुए टमाटर, प्याज और थोड़े से अदरक की आवश्यकता होगी।

- सबसे पहले आप सभी सब्जियों को अच्छे से धोकर, छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। इन सामग्रियों को एक बर्तन में एक चम्मच हल्दी और करीब एक से डेढ़ गिलास पानी के साथ रखें। इन सभी चीजों को नरम होने तक पकने दें।

- फिर आप इस मिश्रण को ठंडा होने दें। फिर, इसे मिक्सर में डालकर मुलायम पेस्ट बना लें। इसके बाद आप पेस्ट को छलनी के छान लें ताकि गूदा और रेशे अलग हो जाएंगे।

- अब आप जरुरत के हिसाब से गाढ़ारपन को बरकार रखने के लिए गूदे में थोड़ा सा पानी जरुर मिलाएं, लेकिन सूप के स्वाद को सही रखने के लिए आवश्यकतानुसार ही पानी डालें।

- अगर आपको थोड़ा सा मसाला पसंद हैं तो आप स्वाद के लिए थोड़ी काली मिर्च और नमक मिला सकते हैं। इस मिश्रण को उबाल लें और इसे 3 से 4 मिनट तक उबलने दें। और तैयार है आपका स्वाद और पोषक तत्वों से भरपूर सहजन सूप (ड्रमस्टिक) तैयार है। यह सूप स्वाद के साथ ही हेल्थ के लिए सबसे बेहतरीन स्वाद से भरपूर है।


हर रोज खाएं प्रोटीन से भरपूर भुने हुए चने

13-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  हेल्थ एक्सपर्ट्स अक्सर भुने हुए चने को डाइट प्लान का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भुने हुए चने में पाए जाने वाले तमाम पौष्टिक तत्व आपकी ओवरऑल हेल्थ को काफी हद तक बूस्ट कर सकते हैं। अगर आप सही मात्रा में और सही तरीके से भुने हुए चने खाते हैं, तो आपकी सेहत पर ढेर सारे पॉजिटिव असर पड़ सकते हैं। भुने हुए चने में प्रोटीन, फाइबर, एंटी ऑक्सीडेंट, फैटी एसिड और फोलेट जैसे तत्व अच्छी खासी मात्रा में पाए जाते हैं।

अगर आप अपनी वेट लॉस जर्नी को आसान बनाना चाहते हैं, तो प्रोटीन और फाइबर रिच भुने हुए चने खाना शुरू कर दीजिए। भुने हुए चने खाकर आपका पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करेगा। इतना ही नहीं, भुने हुए चने की मदद से हार्मोन के स्तर को भी कंट्रोल किया जा सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लिमिट में रहकर भुने हुए चने का सेवन करने से आपकी गट हेल्थ पर पॉजिटिव असर पड़ सकता है। पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए भी भुने हुए चने को डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा भुने हुए चने आपकी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में भी कारगर साबित हो सकते हैं।

क्या आप हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे हैं? अगर हां, तो आप भुने हुए चने खाकर अपने ब्लड प्रेशर को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं। अगर आप अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो हर रोज भुने हुए चने का सेवन करना शुरू कर दीजिए। कुल मिलाकर भुने हुए चने आपकी ओवरऑल हेल्थ के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।


यूरिक एसिड कंट्रोल करने वाली सब्जी है टिंडा

12-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  सर्दियों में हाई यूरिक एसिड के मरीज की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ जाती हैं। ठंड के कारण हड्डियों में दर्द और अकड़न होने लगती है ऊपर से अगर यूरिस एसिड बढ़ जाए तो फिर दर्द के कारण चलना फिरना भी मुश्किल हो जाता है। हालांकि डाइट से यूरिक एसिड को कम किया जा सकता है। सर्जियों में ऐसी कई सब्जियां मिलती है जो हाई यूरिक एसिड को कम करने में मदद करती हैं। ऐसी ही सब्जी है टिंडा, जो स्वाद में काफी लौकी जैसा ही लगता है। यूरिक एसिड में डिंटा खाने से जोड़ों में जमा प्यूरीन आसानी से निकल जाता है। जानिए यूरिक एसिड में टिंडा खाने के फायदे और इसे कितने दिन खाने से आराम मिलेगा?
यूरिक एसिड को खाने से काबू करना है तो इसके लिए डाइट में लोग प्रोटीन और हाई फाइबर फूड शामिल करने जरूरी हैं। खाने में लौकी, तोरई और टिंडा की सब्जी जरूर शामिल करें। रोजाना इन सब्जियों के खाने से 1-2 महीने में ही शरीर में जमा यूरिक एसिड निकल जाएगा।
टिंडा खाने में भले ही लोगों को ज्यादा स्वादिष्ट न लगे, लेकिन टिंडा में कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं। टिंडा खाने से शरीर को विटामिन सी, कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन, फास्फोरस, डाइट्री फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मिलते हैं। फाइबर रिच टिंडा खाने से पाचन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। टिंडा खाने से कब्ज की समस्या भी दूर भाग जाती है।
पोटेशियम, मैग्नीशियम और मैग्नीज ज्यादा होने के कारण टिंडा हार्ट के लिए भी अच्छी सब्जी माना जाता है। टिंडा पानी से भरपूर सब्जी है जो वजन घटाने और शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करती है। इसके अलावा विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन बी6 और विटामिन के ओवर ऑल हेल्थ में सुधार लाने मे मदद करते हैं। टिंडा खाने से किडनी फंक्शन में सुधार आता है और किडनी में जमा टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो लगातार 1-2 महीने टिंडा खाने से आप यूरिक एसिड को कंट्रोल कर सकते हैं। टिंडा के अलावा लौकी भी हाई यूरिए एसिड को तेजी से कम करती है। टिंडा और लौकी खाने से पेट से जुड़ी समस्याएं भी दूर होती हैं और जोड़ों के दर्द में भी आपको आराम मिलेगा।    

 



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