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*10 किलोमीटर पैदल चलकर गांव में लगाया हेल्थ कैंप*

19-Oct-2022

दन्तेवाड़ा (शोर संदेश)। जिले के स्वास्थ्य विभाग से लगातार अंदरूनी ग्राम में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। पूर्व में भी विभाग से पहुंचविहीन ग्राम पंचायतों का चिन्हांकन कर उन पंचायतों में स्वास्थ्य विभाग से  हेल्थ कैंप के माध्यम से स्वास्थ्य शिविर और  विभाग की योजनाओं अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाया जा रहा है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग कुआकोंडा विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत गुमियापाल के आश्रित ग्राम बेंगपाल में आज स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। उक्त शिविर में विभाग  22 चिकित्सक एवं पैरा मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई थी। रास्ता कठिन होने के कारण स्वास्थ्य कर्मियों को लगभग 10 किलोमीटर पैदल और पहाडि़यों का रास्ता तय कर बेंगपाल पहुंचना पड़ा। विभाग ने  लगातार ऐसे ग्रामों में पहुंचकर स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जा रही है। 380 आबादी वाले इस गांव में स्वास्थ्य विभाग  लगभग 108 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। जिसमें सभी लोगों का मलेरिया की भी जांच की गई लक्षण वाले मरीजों की लैब जांच के साथ ही निशुल्क दवाइयों का वितरण, मच्छरदानी का वितरण और  स्वास्थ्य शिक्षा भी दिया गया। दो कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन कर एनआरसी भेजने के लिए परिजनों को जानकारी दी गई। इतनी बड़ी संख्या में स्वास्थ्य दल को देखकर गांव वालों के चेहरों में खुशी नजर आई । आने वाले दिनों में विभाग से  ऐसे ही और स्वास्थ्य के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जाएगी। उप स्वास्थ्य दल में उक्त स्वास्थ्य दल में आरएमए नीरज साहू, डॉक्टर रवि कोरी, खंड विस्तार प्रशिक्षण अधिकारी मालती नेताम, आर एच ओ  राजेश बेहरा,समीम रजा,  नैना कश्यप, संजय मरावी,  ममता ठाकुर, महेश कुमार,  मीना वेद,  मनीषा देहरी,  सुरेखा मंडावी,  शिवेंद्र नाग,फार्मासिस्ट  महेश पोर्ते,संतोष शामिल थे। 


*केन्द्रीय विद्यालय में नपाध्यक्ष ने बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाई*

09-Sep-2022

महासमुन्द (शोर संदेश)। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर आज जिला स्तरीय स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन जिला मुख्यालय महासमुंद के केन्द्रीय विद्यालय में नगर पालिका अध्यक्ष  राशि महिलांग ने बच्चों को कृमिनाशक दवा एलबेन्डाजोल की गोली खिलाकर किया। इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा कि कृमि के कारण थकान, खून की कमी, पढ़ाई में मन नहीं लगता इसीलिए सभी बच्चों को कृमिनाशक टेबलेट खाना चाहिए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.आर. बंजारे ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत जिले के समस्त ऑगनबाड़ी केन्द्रों एवं शासकीय विद्यालयों, शासकीय अनुदान प्राप्त शालाओं, केन्द्रीय विद्यालयो, नवोदय विद्यालय, मदरसों, निजी स्कूलोें, अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों, महाविद्यालयों, तकनीकी शिक्षा संस्थानों के माध्यम से एक से 19 वर्षीय बच्चों, किशोर एवं किशोरियों को कृमिनाशक दवा की गोली का सेवन कराया गया है तथा छूटे हुए बच्चों के लिए मॉप-अप दिवस 14 सितम्बर  को आयोजित किया जाएगा। वर्ष में 2 बार एलबेन्डाजोल की गोली का सेवन कराया जाता है। 1 से 2 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों को आधी गोली चम्मच के द्वारा पानी में चुरा करके तथा 2 से 19 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों को 1 पूरी गोली चबाकर पानी के साथ दी जाएगी। शाला त्यागी 6 से 19 वर्षीय बालक-बालिकाओं को निकटतम चिन्हॉकित ऑगनबाड़ी केन्द्रों में एलबेन्डाजोल की गोली सेवन करायी जाएगी। एलबेन्डाजोल की गोली बच्चों और बड़ों के लिए सुरक्षित है। उन्होने बच्चों से कहा कि, अपने शरीर को स्वच्छ रखे साथ ही शौच जाने के पहले एवं बाद में साबुन या हैण्डवास से हाथ जरूर धोएं। केन्द्रीय विद्यालय के पूर्व प्राचार्य श्री अशोक चन्द्राकर ने कहा कि  बच्चों को घर का बना हुआ स्वच्छ भोजन करना चाहिए। सब्जियों को अच्छी तरह धो कर ही उपयोग में लाना चाहिए। बच्चों को बाहर का बना हुआ फास्ट फूड एवं जंक फूड नहीं खाना चाहिए। इस अवसर पर जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अरविंद गुप्ता, जिला कार्यक्रम प्रबंधक  रोहित कुमार वर्मा, प्राचार्य केन्द्रीय विद्यालय  एस.के. सिंग, आर.एम.एन.सी.एच.ए. सलाहकार डॉ. मुकुन्द राव, जिला समन्वयक  नरेन्द्र चन्द्रकार सहित शिक्षक गण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।


*बच्चों को खिलाई गई कृमि नाशक एलबेन्डाजोल की गोली*

09-Sep-2022

कांकेर (शोर संदेश)। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर आज जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों व महाविद्यालयों में 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों व किशोर-किशोरियों को कृमि नाशक दवाई एलबेन्डाजोल की गोली खिलाई गई। संसदीय सचिव व कांकेर विधानसभा क्षेत्र के विधायक शिशुपाल शोरी ने आज स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय नरहरदेव कांकेर में विद्यार्थियों को एलबेन्डाजोल की गोली खिलाकर इस अभियान की शुरूआत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कृमि से बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास रूक जाता है तथा स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, जिससे बचाव के लिए सरकार की ओर से 1 से 19 वर्ष के बच्चों को कृमि नाशक दवाई एलबेन्डाजोल की गोली खिलाई जा रही है। बच्चों को अच्छा पढ़ाई करने के लिए समझाईश देते हुए उन्होंने कहा कि स्वस्थ्य शरीर में स्वस्थ्य मस्तिष्क का विकास होता है, आप सब स्वस्थ्य रहकर अच्छा पढ़ाई करें और अच्छा नागरिक बनकर जिले के नाम रोशन करें। मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.एल. उईके ने बताया कि जिले में 1 लाख 82 हजार 669 बच्चों को कृमिनाशक दवाई एल्बेंडाजोल खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। आज जिले के सभी स्कूलों, आंगनबाड़ी केन्द्रों व महाविद्यालयों मेंं लक्षित वर्ग के बच्चों को कृमि नाषक दवाई खिलाई जा रही है तथा जो बच्चे उक्त दवाई खाने से छूट जाएंगे उन्हें मापअप दिवस 14 सितम्बर को एलबेन्डाजोल की गोली खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देषानुसार प्रत्येक छ: माह में अभियान चलाकर बच्चों को एलबेन्डाजोल की गोली खिलाई जाती है, ताकि वे कृमि मुक्त रहें। उन्होंने बताया कि 1 से 2 वर्ष के बच्चों को आधी गोली और 02 से 19 वर्ष के बच्चों को एक गोली का खुराक दिया जाता है। कार्यक्रम में जनपद पंचायत कांकेर के उपाध्यक्ष रोमनाथ जैन, नगरपालिका परिषद कांकेर के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र ठाकुर, गफ्फार मेमन, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता एस.एल. मरकाम तथा संस्था के प्राचार्य रचना वास्तव व शिक्षक-शिक्षिकाएं व स्कूली बच्चे उपस्थित थे।

 

*12.15 लाख बच्चों को दी जाएगी कृमिनाशक दवा*

08-Sep-2022

जगदलपुर (शोर संदेश )।कृमि संक्रमण से बचाव के लिए 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों के लिये आज कृमिमुक्ति दिवस के तहत कृमिनाशक दवा खिलाई जाएगी। इस दौरान बस्तर संभाग के 7 जिलों में सर्वाधिक बस्तर में 3.34 लाख, बच्चों को यह गोली खिलायी जाएगी जबकि कांकेर में 2.93 लाख, कोंडागांव में 2.31 लाख, दंतेवाड़ा में 1.12 लाख, बीजापुर में 95,118, सुकमा में 92,721, वहीं नारायणपुर में 55,715 से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिलेगा। इस प्रकार बस्तर सम्भाग में 12.15 लाख बच्चों को कृमि नाशक एल्बेंडाजोल की गोली खिलाये जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस सम्बंध में सीएमएचओ डॉ.आर.के.चतुर्वेदी ने बताया: "कृमिमुक्ति अभियान के तहत 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोर-किशोरियों को पेट के कीड़ों से बचाने की दवा आज खिलाई जाएगी। किसी कारणवश दवा खाने से छूटे हुए बच्चों और किशोर-किशोरियों को 14 सितम्बर के दिन मॉपअप चरण में दवा खिलाई जाएगी। बस्तर जिले में इस वर्ष 3.34 लाख बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों, एवं शासकीय विद्यालयों/ शासकीय अनुदान प्राप्त शालाओं / केंद्रीय विद्यालयों/ नवोदय विद्यालय/ मदरसों/ निजी स्कूलों/ अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों/ महाविद्यालयों/ तकनीकी शिक्षा संस्थानों में कृमिनाशक दवा खिलाई जाएगी।“  आगे जानकारी देते हुए उन्होंने बताया: " कृमि संक्रमण के पनपने से बच्चे के शरीर में खून की कमी हो जाती है। वह हमेशा थकान महसूस करते हैं और उनका शारीरिक, मानसिक विकास भी बाधित होता है। साथ ही बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। इसलिये 1 से 19 वर्ष के बच्चों, किशोर-किशोरियों को कृमि से बचाव के लिए एल्बेंडाजॉल की गोली खिलाया जाना आवश्यक है। कार्यक्रम के दौरान कोविड 19 संबंधित दिशा निर्देशों का पालन किया जाएगा । 1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली (200 एमजी) चूर्ण बनाकर पानी के साथ, 2 से 3 वर्ष तक के बच्चों को 1 गोली पूरी तरह से चूर्ण बनाकर पानी के साथ तथा  3 वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को एक पूरी गोली (400 एमजी) चबाकर के पानी के साथ सेवन कराया जाएगा। एल्बेंडाजोल की गोली बच्चों और बड़ों के लिए सुरक्षित है। दवा खाने के उपरांत यदि कोई प्रतिकूल प्रभाव हो तो प्रबंधन के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपचार की व्यवस्था भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा  रहेगी। कृमि मुक्ति दिवस पर बीमार बच्चों या पहले से कोई अन्य दवाई ले रहे बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोली नहीं दी जाएगी।" कृमिमुक्ति कार्यक्रम के नोडल अधिकारी सी.आर.मैत्री ने बताया: "एल्बेंडाजोल की दवा कृमि से मुक्ति की क्षमता रखती है। इससे स्वास्थ्य और पोषण में सुधार होता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है और एनीमिया नियंत्रण में रहता है। इसके साथ ही सीखने की क्षमता और कक्षा में उपस्थिति में सुधार होता है। कृमि संक्रमण चक्र की रोकथाम के लिए यह गोली बच्चों को देना आवश्यक है। कृमि से बचाव के लिये दैनिक जीवन में कुछ नियमों का पालन बहुत जरूरी है। नाखून साफ व छोटे रखें, हमेशा साफ पानी पिएं, आस-पास सफाई रखें, खाने को हमेशा ढककर रखें, साफ पानी से फल व सब्जियां धोएं, खुले में शौच न करें, हमेशा शौचालय का प्रयोग करें, हाथ साबुन और साफ पानी से धोएं विशेषकर खाने से पहले और शौच जाने के बाद।"


*कबीरधाम बना राज्य का पहला मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मुक्त जिला*

26-Aug-2022

रायगढ़ (शोर संदेश) कबीरधाम राज्य का पहला मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मुक्त जिला बन गया है। मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मुक्त छत्तीसगढ़ कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के अन्य जिलों में भी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से मरीजों का सर्वे कर मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए ऑन स्पॉट मरीजों का पंजीयन कर यह ऑपरेशन किया जा रहा है। राज्य का पहला मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मुक्त जिले के बारे में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कबीरधाम ने राज्य नोडल अधिकारी अंधत्व निवारण को पत्र भेजकर मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मुक्त जिला होने की जानकारी दी है, जिसमें 23 अगस्त तक की स्थिति में जिले में मोतियाबिंद से दृष्टिहीन कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं होना बताया गया है। साथ ही सर्वे कर चिन्हांकित दोनों आंखों के दृष्टिहीन 1,128 मरीजों एवं एक आंख में मोतिाबिंद से दृष्टिहीन 2,124 मरीजों का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किए जाने संबंधी जानकारी भी साझा की गई है। इस संबंध में संचालक महामारी नियंत्रण एवं राज्य कार्यक्रम अधिकारी अंधत्व निवारण, डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया “योजना के तहत मोतियाबिंद से दृष्टिहीन हुए मरीजों का सर्वे राज्य के सभी जिलों में किया जा रहा है। प्रतिमाह सर्वे रिपोर्ट राज्य को सौंपकर मोतियाबिंद दृष्टिहीन लोगों और उनके ऑपरेशन की अद्धतन जानकारी दी जाती है, ताकि नया दृष्टिहीन मरीज ना मिले और सभी को आंखों की रोशनी मिल सके। इसी क्रम में कबीरधाम जिला राज्य का पहला  मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मुक्त जिला बन गया हैI उन्होंने आगे बताया कि भी जिले चिन्हांकित मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन अपनी सुविधा के अनुसार कर रहे हैं।  इसी कड़ी में जुलाई 2022 तक दुर्ग में 90, कोरिया में 300, बीजापुर में 298, बलरामपुर में 280 तथा बेमेतरा में 227 चिन्हांकित पंजीकृत मरीजों की सूची भेजी है, जिनका सितंबर तक मोतियाबिंद ऑपरेशन किया जाएगा। वहीं बिलासपुर में 627 तथा  अंबिकापुर सरगुजा में 2,387 में मोतियाबिंद दृष्टिहीन अभी तक चिन्हांकित हुए हैं लेकिन वहां सर्वे कार्य अभी जारी है। जल्द ही चयनित मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन भी किया जाएगा। चिन्हांकित मरीजों में एक आंख में मोतियाबिंद और दोनों आंख में मोतियाबिंद के मरीज शामिल हैं। दृष्टिहीनता की स्थिति निर्मित ना हो इसलिए सर्वे - मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मिटाने के लिए सभी जिलों में सर्वे चल रहा है। मितानिन, स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं नेत्र नेत्र सहायक अधिकारियों को अधिकृत किया गया है, ताकि सर्वे कर स्पॉट में ही सर्वेक्षित मरीजों का रजिस्ट्रेशन कर मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जा सके। सभी जिले सर्वेक्षित चिन्हांकित मरीजों का अपनी सुविधानुसार माह तय कर मोतियाबिंद ऑपरेशन कर रहे हैं। हालांकि अभी जिनको दोनों आंखों में मोतियाबिंद है, उनको प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही एक आंख में मोतियाबिंद वाले मरीजों का भी सर्वे कर ऑपरेशन किया जा रहा है जिससे की दृष्टिहीनता की स्थिति निर्मित ना हो सके।

 

 

 

*एक माह में कोरोना से मौतें 35 फीसदी बढ़ीं, डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने चेताया*

18-Aug-2022

नई दिल्ली (शोर संदेश)। कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। पिछले चार सप्ताहों में दुनियाभर में इस महामारी से मौतों की संख्या में 35 फीसदी की चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है। इसे देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख डॉक्टर टेड्रोस घेब्रेयसस ने दुनियाभर के लोगों के लिए वीडियो संदेश जारी कर फिर चेताया है। यह लगातार तीसरा साल है, जब कोविड-19 वायरस समूची दुनिया के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। कोरोना महामारी को लेकर महामारी विशेषज्ञ व नेता बार-बार कह रहे हैं कि हमें कोरोना के साथ जीना सीखना होगा। इस पर घेब्रेयसस ने कहा कि हम यह नहीं मान लें कि बीमारी खत्म हो गई है। हमें इससे खुद के और दूसरों के बचाव के लिए साधनों से हमेशा लैस रहना होगा। घेब्रेयसस ने अपने ताजा संदेश में कहा, हम सब कोरोना वायरस व महामारी से थक व उब गए हैं, लेकिन यह वायरस अभी नहीं थका है। कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट अब भी प्रमुख वैरिएंट  बना हुआ है। पिछले एक महीने में, BA.5 सब स्ट्रेन 90 फीसदी से अधिक नमूनों में मिला है। अपने वीडियो संदेश में डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा- 'एक चार सप्ताह में 15,000 लोगों ने कोविड से जान गंवाई। यह संख्या बर्दाश्त के बाहर है, क्योंकि हमारे पास संक्रमण को रोकने और लोगों की जान बचाने के लिए सारे संसाधन हैं। हम में से कोई भी असहाय नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति टीका लगवाए और जरूरत पड़ने पर बूस्टर (खुराक) लें। मास्क पहनें और सुरक्षित शारीरिक दूरी बनाए रखें।' उन्होंने निराश होकर यह भी कहा कि अस्पतालों की बढ़ती संख्या के बावजूद हम टीकों की असमान पहुंच के साथ नहीं रह सकते हैं। कोरोना महामारी से अब तक दुनियाभर में 59 करोड़ से अधिक संक्रमित हो चुके हैं। इस दौरान 64 लाख से अधिक मौतें हुई हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा 9.3 करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं। भारत में लगभग 4.4 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं।


*टीबी न फैले, इसलिए शुरू किया टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट*

05-Jul-2022

कवर्धा (शोर संदेश)। क्षय (टीबी) रोग पर नियंत्रण के लिए कबीरधाम जिले में नई शुरुआत की गई है। इसके अंतर्गत टीबी रोग से ग्रसित लोगों को दवा देने के साथ ही टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट (टीपीटी) भी दिया जा रहा है ताकि खासकर फेफड़े वाली टीबी जैसी अन्य संक्रामक टीबी को फैलने से रोका जा सके। इस शुरुआत के साथ कबीरधाम छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां टीपीटी दिया जाना शुरू किया गया है। जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. बीएल राज ने बतायाः टीबी रोग पर नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों के अंतर्गत टीबी ग्रस्त लोगों के उपचार के लिए उन्हें नियमित रूप से दवाई तो दी ही जा रही है। साथ ही अब इंफेक्शन मोड पर भी दवा शुरू की गई है और टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट (टीपीटी) दिया जा रहा है, ताकि संक्रमण भविष्य में बीमारी का रूप न ले पाए। उन्होंने आगे बतायाः किसी न किसी के शरीर में बैक्टीरिया हो सकता है इसलिए टीपीटी उन घरों में विशेष रूप से दी जा रही है, जहां टीबी संचार का खतरा है-जैसे-फेफड़े वाली टीबी के मरीज के घर। इस पहल से टीबी रोग पर नियंत्रण करने में काफी हद तक सफलता मिल सकती है। टीबी रोग पर नियंत्रण के उद्देश्य से जिले के शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र में सघन सर्वे अभियान भी चलाया जा रहा है जिसके अंतर्गत टीबी के संभावित मरीज को चिन्हित करने के लिए सभी आयु वर्ग के लोगों की जांच की जा रही है। रोग की पुष्टि होने की स्थिति में नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में पीड़ित का उपचार शुरू कराया जाएगा। जिला कार्यक्रम समन्वयक आनंद दास महंत ने बतायाः छत्तीसगढ़ को वर्ष 2023 तक टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे प्रयासों की कड़ी में कबीरधाम जिले में लगातार जन-जागरुकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसे प्राथमिकता में रखकर जिले की जेल, खदान, आश्रय गृह व अन्य संवेदनशील जगहों के साथ ही गांव तथा शहर की विशेषकर मलिन बस्तियों में टीबी रोगी के चिन्हांकन के लिए 25 मई से सघन सर्वे किया जा रहा है, जो कि 10 जुलाई तक चलेगा। इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उन घरों के लोगों को टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट (टीपीटी) दिया जा रहा हैए जहां टीबी के संचार का खतरा है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुजॉय मुखर्जी ने बतायाः टीबी रोग पर नियंत्रण करने हेतु जिले में पहली बार टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट शुरू किया गया है। टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट के लिए राज्य के 12 जिलों का चयन किया गया है जिनमें सबसे पहले कबीरधाम जिले में इसकी शुरुआत की गई है। यह सेवा चिन्हित टीबी ग्रस्त लोगों के घरों में दी जा रही है, ताकि लक्षण महसूस होने पर शुरुआत में ही टीबी रोग को फैलने से रोका जा सके।


*बच्चों में गर्मी से होने वाली बीमारियों से रहे सावधान*

26-May-2022

रायगढ़ (शोर संदेश) जिले का तापमान बीते दो सप्ताह से लगातार बदल रहा है। हालांकि गर्मी में कमी नहीं आई है पर बीच-बीच मे हुई बारिश ने उमस को बढ़ा दिया है। बुधवार से नौतपे की भी शुरुआत हो गई है। यानी मौसम में अभी लगातार बदलाव होंगे। इसी के कारण मौसम संबंधित बीमारियों के बढ़ने की संभावना है। छोटे बच्चों में उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत ज्यादा आ रही है। जिला चिकित्सालय के बाल रोग विभाग में ऐसे बच्चों की तादाद ओपीडी में बढ़ी है। विदित हो कि बच्चों को बाहर का खाना बेहद पसंद होता है। बाहर के खाने से होने वाली बीमारियां गर्मियों के मौसम में आम हो जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि गर्मी में खाना आसानी से ख़राब हो जाता है। संक्रमित और अस्वच्छ खाना खाने से दस्त और उल्टियां शुरू हो सकती है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। यहां तक कि घर पर बने खाने को भी पुराना करके न खाने की सलाह डॉक्टर देते हैं। इसी तरह बच्चों को खुले मैदान या बाहर खेलना पसंद होता है। जिससे गर्म मौसम में उन्हें लू लग सकती है। हाइपरथर्मिया एक ऐसी स्थिति है जहां शरीर का तापमान असामान्य रूप से ऊंचा हो जाता है, यह संकेत देता है कि यह पर्यावरण से आने वाली गर्मी को नियंत्रित नहीं कर सकता है। गर्मी से थकावट और हीट स्ट्रोक चिकित्सा आपात स्थिति हैं जो हाइपरथर्मिया के अंतर्गत आती हैं। हाइपरथर्मिया से पीड़ित बच्चा सिर दर्द, बेहोशी, चक्कर आना, ज़्यादा पसीना आना, अकड़न जैसे लक्षणों का अनुभव कर सकता है।


*फूड पॉइजनिंग से 18 साल की छात्रा की मौत, 15 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती*

02-May-2022

कासरगोड (शोर संदेश)। केरल के कासरगोड जिले के एक होटल में खराब खाना खाने से एक 18 साल की लड़की  की मौत हो गई है जबकि 15 से अधिक लोग गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती कराए गए हैं। सभी एक लोकल होटल से लोकप्रिय अरबी डिश शावरमा खाया था। पहली दृष्टि में मामला फूड प्वाइजनिंग का है। फिलहाल, अस्पताल में भर्ती अन्य लोगों की हालत स्थिर है। वहीं घटना के बाद जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर है। 

एक लड़की की गई जान 

डॉक्टरों ने बताया कि कान्हांगड के जिला अस्पताल में इलाज के दौरान एक 18 साल की लड़की की मौत हो गई। जिला चिकित्सा अधिकारी ए वी रामदास ने कहा कि अस्पताल में भर्ती सभी की हालत स्थिर है और देर से अस्पताल लाए जाने के कारण डॉक्टर युवती की जान नहीं बचा सके। उन्होंने कहा कि अधिकांश संक्रमितों को तीन अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। ये सभी लोग एक होटल से स्पेशल डिश शवारमा खाए थे। सबको मेडिकल निगरानी में रखा गया है। वहीं बड़े पैमाने पर फूड प्वाइंजनिंग  के मामले सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। लोकल होटल जहां इन लोगों ने शावरमा खाया था, उस होटल को बंद करा दिया गया है। जांच के दौरान यह पाया गया कि कूल बार-कम-बेकरी बिना फूड सेफ्टी लाइसेंस के चल रही थी।


*अगर आपकी आंखों में भी आता है लगातार पानी ? तो है बड़ी गड़बड़ी का संकेत…*

29-Apr-2022

नई दिल्ली (शोर संदेश)। आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर बहुत ही ज्यादा ही सावधान हो गए हैं और होना भी चाहिए। क्योंकि बदलते समय और मौसम की वजह से आपकी किसी भी वक्त किसी भी तरह की परेशानी हो सकती है। कई लोगों की आंखों (Eyes)में लगातार पानी आता रहता है, जिसकी वजह से उन्हें अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि आप भी आंखों में से पानी आने की समस्या को इग्नोर कर रहे है। तो ये आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है.यहां पर हम आपको बताएंगे आंख में पानी या आंसू (Tears) आने के क्या है कारण।

अधिकांश मामलों में आंखों से पानी आना बिना इलाज के बंद हो जाता है, लेकिन कभी-कभी ऐसी स्थिति भी होती हैं जिनके कारण लगातार आंखों से पानी आता रहता है। यह काफी कॉमन समस्या है। अगर आपके आंखों से लंबे समय से पानी आ रहा है और आंखें लाल हो रही हैं तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। लगातार आंखों में आंसू आने के कुछ कारण हो सकते हैं। तो आइए उन कारणों के बारे में भी जान लीजिए जो आंखों में अधिक पानी या आंसू आने का कारण बनते है।

सूखी आंखें (Dry Eyes) :
अगर किसी की आंख में पर्याप्त आंसू नहीं बन रहे हैं तो आंख जल्दी सूख जाती है। ऐसे में आंख में पानी, तेल का सही बैलेंस नहीं बन पाता। हवा से लेकर मेडिकल कंडीशन तक इस स्थिति का कारण हो सकता है। इसलिए कभी-कभी आंख अचानक से अधिक पानी निकालकर आंख सूखने का संकेत देती है।

पिंकआई (Pinkeye/Conjunctivitis) :
बच्चों और वयस्कों दोनों की आंखों में पानी आने का यह एक सामान्य कारण है। इस स्थिति में आंख गुलाबी या लाल हो सकती हैं और उनमें खुजली-चुभन भी महसूस हो सकती है। बैक्टीरिया या वायरस से संक्रमण पिंकआई का सबसे अहम कारण है। वायरल संक्रमण के लिए उपचार की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन इसके लिए एंटीबायोटिक आई ड्रॉप की आवश्यकता हो सकती है।

एलर्जी (Allergie) :
पानी भरी हुई, खुजली वाली आंखें अक्सर खांसी, बहती नाक और अन्य एलर्जी के लक्षणों के साथ आती हैं, लेकिन किसी कारण से आंखों की एलर्जी होना भी काफी आम बात है। इसलिए आंखों की साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।

ब्लॉक आंसू वाहिनी (Blocked Tear Duct) :
आंसू आंख के ऊपर की आंसू ग्रंथियों से बाहर निकलते हैं। ग्रंथियों से निकलने के बाद आंसू पुतली की सतह पर फैलते हैं और कोने में बनी नलिकाओं में चले जाते हैं। अगर ये नलिकाएं बंद हो जाती हैं तो आंसू बनते तो हैं लेकिन बाहर नहीं निकल पाते। बहुत सी चीजें समस्या का कारण बन सकती हैं जैसे संक्रमण, चोट, यहां तक कि बुढ़ापा भी।

पलकों की समस्या (Blocked Tear Duct) :
हमारी पलकें विंडशील्ड वाइपर की तरह काम करती हैं। जब हम पलक झपकाते हैं तो वे आंखों में आंसू फैलाती हैं और जो अतिरिक्त नमी को बहा देती हैं, लेकिन कभी-कभी वे ठीक से काम नहीं कर पातीं। पलकें अगर अंदर की तरफ झुक जाती हैं तो उनके कारण आंंख की पुतली में रगड़ आने लगती है, जिसे एन्ट्रोपियन कहा जाता है। इसके कारण आंखों से पानी आने लगता है। यदि आपकी पलकें अंदर की ओर झुकी हुई हैं, तो इसके लिए सर्जरी की जरूरत हो सकती है।

आंख पर खरोंच :
गंदगी, धूल और कॉन्टैक्ट लेंस से पुतली और कॉर्निया में खरोंच लग सकती है। यदि ऐसा होता है तो आंखों में से पानी आने लगता है क्योंकि यह काफी संवेदनशील हिस्सा होता है। हालांकि, ये खरोंच आमतौर पर 1 या 2 दिनों में ठीक हो जाती है। अगर आपको कॉर्नियल खरोंच हो तो डॉक्टर को दिखना महत्वपूर्ण हो जाता है।

आईलैशेस की समस्या (Eyelash Problems) :
जिस तरह भौहों के बाल गलत दिशा में बढ़ते हैं, उसी तरह कभी-कभी आईलैशेस भी गलत दिशा में बढ़ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो वे आंखों में रगड़ का कारण बनते हैं और उनसे आंसू आने लगते हैं।

ब्लेफेराइटिस (Blepharitis) :
यह स्थिति आपकी पलकों में सूजन का कारण बनती है. इस स्थिति में आँखों में चुभन होती है, पानी आता है, आंखें लाल होती हैं, पपड़ी बनने लगती है। इसका कारण एलर्जी और संक्रमण हो सकता है।

अन्य कारण (Other Benefits) :
बेल्स पाल्सी, सोजोग्रेन सिंड्रोम, क्रोनिक साइनस इन्फेक्शन, थायरॉइड की समस्या और रुमेटीइड आर्थराइटिस जैसी कई मेडिकल कंडीशन के कारण आंख में से पानी आ सकता है। अगर आपकी आंखों में से बार-बार पानी आता है तो डॉक्टर से मिलें 


 




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