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किसान

*कृषि को उन्नत खेती में बदलने और निरंतरता बनाए रखने की जरूरत : तोमर*

13-Oct-2022

नई दिल्ली (शोर संदेश)।केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि कृषि क्षेत्र हमारे देश की रीढ़ है और हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं कृषि की अर्थव्यवस्था में इतनी ताकत है कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी देश आसानी से पार पा सकता है। कोविड महामारी के दौरान भारतीय कृषि क्षेत्र ने यह करके दिखाया है। देश के 80 करोड़ लोगों को भारत सरकार ने खाद्यान्न सुरक्षा प्रदान की, साथ ही मित्र देशों की मदद भी की। आज अधिकांश कृषि उत्पादों के मामले में हम दुनिया के पहले या दूसरे स्थान पर हैं। इसके बावजूद कृषि क्षेत्र के समक्ष कुछ चुनौतियां हैं। कृषि उन्नत खेती में बदले, कृषि में टेक्नालॉजी का प्रयोग हो व इसकी निरंतरता बनी रहे, इस दिशा में काम करने की जरूरत है। श्री तोमर ने यह बात एसोसिएटेड चेम्बर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री आफ इंडिया (एसौचेम) द्वारा कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए उन्नत बीज और कृषि सामग्री एकीकरण’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में वर्चुअली कही। श्री तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र जितना मजबूत व फायदेमंद होगा, देश उतना मजबूत होगा। आज कृषि के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर विचार करने की जरूरत है। सभी तरह की अनुकूलताओं के बाद भी कृषि का क्षेत्र और उसकी लाभ-हानि प्रकृति पर काफी निर्भर करती है। खेती के प्रति लोगों की उत्सुकता व लगाव बढ़ना चाहिए, खेती अगली पीढ़ी के लिए आकर्षक हो और खेती करने वालों को खेती के लिए रोका जा सके, इस दिशा में और अधिक काम करने की जरूरत है। श्री तोमर ने कहा कि किसानों और बाजार के बीच की दूरी कम करने, ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने, बिचौलियों का दखल खत्म करने के लिए सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में छोटे किसानों की संख्या अधिक है, जिनके पास छोटा रकवा है व निवेश के लिए राशि नहीं है, ऐसे किसानों के लिए केंद्र सरकार 10 हजार नए एफपीओ बना रही हैं, जिनके लिए 6,865 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है और छोटे-छोटे किसानों को जोड़ा जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि किसान समूह में खेती करें, जिससे आदान की लागत कम आए, उत्पादन गुणवत्ता को सुधारा जा सके, छोटे किसान महंगी फसलों की ओर जा सकें व अपनी शर्तों पर उपज मूल्य प्राप्त कर सकें। एफपीओ उत्पादों की प्रोसेसिंग भी कर सकते हैं। इसके लिए बिना गारंटी के दो करोड़ रु. तक के लोन की व्यवस्था सरकार ने की है।

 


*कुपोषण में कमीं से किसानों की बढ़ी आमदनी*

08-Oct-2022

महासमुंद (शोर संदेश)।अपनी बाड़ी की ताजी साग सब्जियों का मजा ही अलग है। कुपोषणता को दूर करने के साथ परिवार की अतिरिक्त आमदनी बढ़ाने में यह लाभदायक हो रही है। महासमुंद ज़िले में पोषण बाड़ी योजना के तहत ज़िले में पिछले वर्ष 3922 पोषण बाड़ियों को चिन्हित कर योजना का क्रियान्वयन किया गया है। इनमें महासमुंद सहित विकासखंड बागबाहरा और सरायपाली में 785-785 पोषण बाड़ी का चयन किया गया। वही पिथौरा ब्लॉक में 783 तथा बसना में 784 पोषण बाड़ियाँ चयनित की गई। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण करने घर के समीप उपलब्ध भूमि पर फल, सब्जी एवं पुष्प की खेती कृषकों द्वारा कराया जाना ही सुराजी गांव योजना अंतर्गत बाड़ी की परिकल्पना का मुख्य आधार हैं। योजनान्तर्गत महिलाओं/महिला स्व-सहायता समूह को तथा ग्राम के गरीब तबके और कमजोर वर्गों के परिवारों को जिनके घर पर बाड़ी के लिए जगह हैं, किन्तु बाड़ी की गतिविधि नहीं कर रहे है। उन्हें इस योजना का लाभ दिये जाने हेतु महासमुंद ज़िले में पोषण बाड़ियों का चिन्हित कर योजना बनाई गयी। इन बाड़ियों में सब्ज़ी-भाजी के साथ लगभग 60 हज़ार फलदार पौधें भी रोपें जा रहे है। कृषि की दृष्टि के कम विकसित क्षेत्रों में नई तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादन में वृद्धि के उपायों से जुड़े विभिन्न विषयों पर कृषि से जुड़े विभागों के ज़िला अधिकारियों द्वारा किसानों से चर्चा भी की जा रही है ज़िला उद्यानिकी द्वारा ख़रीफ़ सीजन को ध्यान रखते हुए चयनित ग्राम पंचायतों की पोषण बाड़ी योजना के तहत फलदार पौधें भी दिए जा रहे है। सब्ज़ी बीज मिनीकिट किसानों को दिए जा रहे है। इन बाड़ी से ग्रामीण परिवारों के अतिरिक्त आय में वृद्धि हो रही है। भूमिहिनों को रोजगार के अवसर मिल रहे तथा कृषक परिवार का भोजन संतुलित भी हो रहा है। “पोषण बाड़ी विकास योजना“ में स्थानीय विभिन्न प्रजातियों के पौधों को बढ़ावा देना भी शामिल हैं। जिसमें भाजी की स्थानीय प्रजातियों को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जा रहा हैं। इसका प्रमुख कारण भाजियों में उपलब्ध पोषक तत्व हैं। भाजी के अधिकाधिक उपयोग से आयरन एवं आयोडीन की कमी को दूर किया जा सकेगा। सामान्य के साथ यह आदिवासी परिवारों का पर्यावरण से जुड़ते हुए आजीविका उपार्जन करने का सशक्त माध्यम यह योजना बन रही है। ग्रामीण परिवेश में आत्मनिर्माण लाने के लिए एवं कुपोषण मुक्ति में यह योजना कारगार साबित हो रही है। स्व-उत्पादित फसल का उपयोग यह सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य है। बाजारों या कही अन्य जगह से खरीदी गई सब्जियाँ महँगी होती हैं, राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन का मुख्य उद्देश्य है कि किसान स्वयं की खाली पड़ी जमीन (बाड़ी) में सब्जियों की फसल उगाएँ और ताजे रूप में इसका सेवन करें। अतिरिक्त आय सब्जी की फसल बाड़ी में उगाकर, स्वयं के उपयोग के पश्चात किसान शेष उत्पाद का विक्रय स्थानीय बाजारों में कर रहे हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आय की प्राप्ति हो रही है। ग्रामीण अब घर की बाड़ी से आत्मनिर्भर बन रहे है और अधिक आय अर्जित कर रहे। हरी-ताजी साग-सब्ज़ी उत्पादन के साथ फलदार ताजे-रसीले फलों से ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण में भी कमी लाने का सार्थक और सकारात्मक प्रयास भी है।सहायक संचालक उद्यानिकी श्री आर.एस. वर्मा की माने तो ज़िले में किसानों के घर के समीप 3922  बाड़ियाँ चयनित की गयी है। यहाँ स्थानीय जलवायु वातावरण पानी की उपलब्धता मिट्टी और मौसम के अनुरूप उन्नत किस्म की साग-सब्ज़ियों, फल लेने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। इसमें अपेक्षित सफलता मिल रही है। किसानों को विभिन्न प्रजातियो के फलदार पौधों नीबू, आम, करोदा, अमरूद, मुनगा, पपीता और कटहल आदि का वितरण किया गया है। बतादें कि पोषण बाड़ी योजना गोठान योजना का एक हिस्सा है। यह छत्तीसगढ़ सरकार की गोठान योजना का अंग है जो स्वयं नरवा, ग़रवा, घुरवा और बाड़ी  का अंश है। पोषण बाड़ी योजना छत्तीसगढ़ शासन के उद्यान विभाग की महत्वपूर्ण योजना है। यह योजना बाड़ी विकास योजना से मिलती जुलती है। इस योजना के अंतर्गत सरकार के द्वारा किसानों को उनकी स्वंय की बाड़ी में सब्जी की फसल उगाने के लिये बीज प्रदाय की जाती है। यह बीज उन्हें निःशुल्क दी जाती है। बीज वितरण का कार्य ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारियों के द्वारा की जाती है जो उद्यान विभाग से संबंधित होते हैं। इस योजना के तहत प्रति बाड़ी 1000 रुपए का प्रावधान है। इस राशि से किसान हितग्राहियों को ख़रीफ़ मौसम में फलदार पौधें, सब्ज़ी बीज और वर्मी खाद मुहैया कराया जाता है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि चालू मानसून शुरुआत से किसानों की माँग अनुसार आम व ग्राफ़्टेड आम के पौधों का वितरण किया जा रहा है। महासमुंद के नज़दीक बम्हनी स्थित पौध नर्सरी में आम के ग्राफ़्टेड पौधें एवं अन्य विभिन्न प्रजातियो के फलदार पौधें तैयार किए गए है। जिन्हें हितग्राहियों की माँग अनुसार उन्हें उपलब्ध कराया जा रहा है।

 

 


*छत्तीसगढ़ में 25 लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदेगी सरकार : भूपेश बघेल*

20-Sep-2022

रायपुर (शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने राज्य में 1 नवम्बर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी किए जाने की घोषणा की है। राज्य में धान उपार्जन के लिए व्यापाक तैयारियां शुरू कर दी गई है। धान खरीदी दौरान किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत न होने पाए, इसको लेकर सभी धान खरीदी केन्द्रों में आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए है। राज्य में फिलहाल धान उपार्जन के लिए नए किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया जारी है, जो 31 अक्टूबर तक चलेगी। सरकार की किसान हितैषी नीतियों के चलते राज्य में साल दर साल किसानों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए यह अनुमान है कि इस साल पंजीकृत किसानों की संख्या 25 लाख के पार पहुंच जाएगी। बीते वर्ष 24.05 लाख किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन कराया था, जबकि वर्ष 2020-21 में पंजीकृत किसानों की संख्या 21.52 लाख थी। विपणन वर्ष 2021-22 में किसानों की संख्या विपणन वर्ष 2020-21 की तुलना में ढाई लाख से ज्यादा बढ़ गई थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की किसान हितैषी नीतियों के चलते बीते तीन सालों में पंजीकृत धान के रकबे और किसानों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। धान बेचने के लिए पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या वर्ष 2018-19 में 16.96 लाख थी, जो कि वर्ष 2021-22 में बढ़कर 24.05 लाख हो गई है। विपणन वर्ष 2022-23 में पंजीकृत किसानों की संख्या 25 लाख के पार पहुंचने का अनुमान है। पंजीकृत किसानों की वास्तविक संख्या का सही आंकड़ा 31 अक्टूबर 2022 को पंजीयन समाप्त होने के बाद ही पता चल पाएगा। इसी तरह धान का पंजीकृत रकबा भी बीते तीन सालों में 25.60 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 30.26 लाख हेक्टेयर हो गया है। इस साल पंजीकृत रकबे में और वृद्धि अनुमानित है। राज्य में इस साल धान के फसल की बेहतर स्थिति को देखते हुए बीते वर्ष की तुलना में ज्यादा खरीदी का अनुमान है। वर्ष 2018-19 में 80.38 लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2019-20 में 83.94 लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2020-21 में 92.02 लाख मीटरिक टन तथा वर्ष 2021-22 में 98 लाख मीटरिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी हुई है। सरकार की गांव, गरीब, किसान, व्यापार और उद्योग हितैषी नीतियों से समाज के सभी वर्गों में खुशहाली है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धान और तेंदूपत्ता की देश में सबसे अधिक कीमत पर खरीदी, किसानों की कर्ज माफी, सिंचाई कर की माफी, सुराजी गांव योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना और गोधन न्याय योजना के जरिए राज्य के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अब तक एक लाख करोड़   रूपए से अधिक की राशि सीधे ग्रामीणों, किसानों, पशुपालकों और लघु वनोपज संग्राहकों के बैंक खाते में पहुंचा चुकी है, यही वजह है कि छत्तीसगढ़ के बाजारों में लगातार रौनक बनी हुई है। यहां व्यापार-व्यवसाय की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है। छत्तीसगढ़ राज्य देश का इकलौता राज्य है, जहां समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के साथ-साथ खरीफ की सभी प्रमुख फसलों के उत्पादक किसानों को प्रति एकड़ के मान से 9 से 10 हजार रूपए की इनपुट सब्सिडी दी जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य में किसान की बेहतरी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के 17.82 लाख किसानों पर बकाया 9270 हजार करोड़ रूपए का कृषि ऋण माफ, 325 करोड़ रूपए का सिंचाई कर तथा 5 लाख से अधिक किसानों को निःशुल्क एवं रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराकर सालाना लगभग 900 करोड़ रूपए की राहत दी है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना से राज्य में फसल उत्पादकता एवं फसल विविधिकरण को बढ़ावा मिला है। इस योजना के जरिए किसानों को इनपुट सब्सिडी देकर कृषि लागत में मदद की जा रही हैं। बीते दो सालों में इस योजना के तहत 14,665 करोड़ रूपए की सीधी मदद किसानों को दी गई है। इस योजना से लाभान्वित होने वालों में किसानों में से 90 प्रतिशत लघु सीमांत कृषक अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति पिछड़ा वर्ग एवं गरीब तबके के है।

 

 


*गोधन न्याय योजना से ग्रामीण हो रहे लाभान्वित, ललिता बाई ने गोबर बेचकर खरीदा स्मार्ट फोन*

16-Sep-2022

कोरबा (शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी गोधन न्याय योजना का सीधा लाभ ग्रामीण किसानों को मिल रहा है। ग्राम पंचायत अमरपुर की निवासी ललिता बिंझवार ने गोधन न्याय योजना के तहत् 20 हजार 936 रुपए का गोबर बेचकर स्मार्ट फोन खरीदा है। स्मार्ट फोन से जहां बच्चों की आनलाईन पढाई में सुविधा मिली है। वहीं दूसरी ओर अमरपुर गौठान में हो रही गोबर ब्रिकी की आनलाईन एन्ट्री इसी स्मार्ट फोन से कर रही है। पशुपालक ललिता बिंझवार पति नर्मदा बिंझवार के पास 10 पशु है। उनके पास वन अधिकार पट्टाधारी कृषि भूमि है। जिसमें वह कृषि कार्य करते हैं। उन्होने योजना प्रारंभ से लेकर अब तक लगभग 105 क्ंिवटल गोबर की बिक्री की है। जिससे उन्हें लगभग 21 हजार रुपए का लाभ मिला है। पहले ललिता बाई के घर में कीपेड मोबाईल था। जिसमें इन्टरनेट की सुविधा नही थी। जिससे उसके बच्चों के आनलाईन पढ़ाई नहीं हो पाती थी। ललिता ने गोधन न्याय योजना के तहत बेचे गये गोबर से प्राप्त पैसों में से 15 हजार रुपए का स्मार्ट फोन खरीदा है। स्मार्ट फोन से अब बच्चों की आनलाईन पढ़ाई की सुविधा प्राप्त हो गयी है। इसके साथ ही अमरपुर गौठान में होने वाली गोबर खरीदी की आनलाईन एन्ट्री भी वह इसी स्मार्ट फोन से कर रही है। 

 

*भारत-जापान के बीच हुई 2+2 की बैठक, इन मुद्दों पर रहा जोर...*

08-Sep-2022

नई दिल्ली (शोर संदेश)।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने आज जापान की राजधानी टोक्यो में अपने जापानी समकक्ष विदेश मंत्री हयाशी योशिमासा और रक्षा मंत्री यासुकाजु हमदा के साथ दूसरी भारत-जापान 2+2 विदेश और रक्षा मंत्री स्तरीय बैठक की। इस बैठक के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा कि मंत्रियों ने रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी सहयोग के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करने के लिए दोनों देशों के लिए विशाल क्षमता को स्वीकार किया। बयान में कहा गया कि उन्होंने मानव रहित ग्राउंड व्हीकल/रोबोटिक्स और भारत-जापान संयुक्त कार्य समूह के रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी सहयोग के क्षेत्रों में चल रहे सहयोग पर संतोष व्यक्त किया और रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी में भविष्य के सहयोग के लिए ठोस क्षेत्रों की पहचान करने के लिए सहमति व्यक्त की। विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता समाप्त होने पर कहा कि हमने आपसी हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय मुद्दों की विस्तृत श्रृंखला को कवर किया। हम विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का अनुसरण कर रहे हैं। भारत और जापान के बीच रक्षा उपकरण और तकनीकी सहयोग बढ़ाना प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से एक है। इससे पहले राजनाथ सिंह और जापान के उनके समकक्ष यासुकाजु हमदा ने द्विपक्षीय वार्ता में द्विपक्षीय व बहुपक्षीय अभ्यास जारी रखने को लेकर प्रतिबद्धता व्यक्त की और इस बात को लेकर सहमति व्यक्त की कि सैन्य अभ्यास के जल्द से जल्द शुरू होने से दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच ‘‘अधिक सहयोग’’ बढ़ेगा।आपको बता दें कि जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस रिश्ते को और मजबूती मिली। यही कारण है कि दोनों देश अब बातचीत को और मजबूती से आगे बढ़ाने की कोशिश में लगे हुए हैं। 5 महीने पहले जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा भारत दौरे पर आए थे। इस दौरान दोनों देशों ने अपने रिश्ते को और मजबूत करने के संकल्प को दोहराए थे। इसी दौरान जापान ने भारत में अगले पांच वर्ष तक 3,20,000 करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की थी। अपने आप में जापान का यह भारत में बड़ा निवेश है। जापान के साथ भारत ने 2019 में ‘टू प्लस टू’ संवाद की शुरुआत की थी।


*फिर से बड़े आंदोलन की तैयारी में देश के किसान, 'ट्रैक्टरों को बनाएं टैंक'*

08-Sep-2022

सहारनपुर(शोर संदेश)।क्या देश में एक बार फिर से किसी बड़े आंदोलन की तैयारी हो रही है? यह प्रश्न इसलिए उठ खड़ा हुआ है क्योंकि पिछले सप्ताह अपने आप को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाले आंदोलनजीवी योगेंद्र यादव ने कहा था कि वह देश में कुछ आंदोलनों की भूमिका तैयार करने में जुटे हैं और अब किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि देश को किसान आंदोलन की तरह एक बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहना चाहिए। हम आपको बता दें कि भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सहारनपुर जिले में चौरा खुर्द की महापंचायत को संबोधित करते हुए बड़े ऐलान किये हैं। उन्होंने एक और आंदोलन के लिए सभी को तैयार रहने के लिए कहा कि जल्द ही आंदोलन की तारीख और स्थान बता दिया जायेगा। राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों को अपनी आवाज खुद ही उठानी होगी क्योंकि विपक्ष से उम्मीद करना बेमानी है। राकेश टिकैत ने किसानों से कहा कि वह अपने ट्रैक्टरों पर बंपर लगवा लें ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें टैंकों के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार ने किसान आंदोलन के समापन के समय एमएसपी पर जिस कमेटी के गठन का वादा किया था वह भी छलावा साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि यूपी के किसानों को पंजाब के किसानों से सीखना चाहिए कि अपने हक की लड़ाई कैसे लड़ी जाती है। राकेश टिकैत ने कहा कि यह सरकार सबकुछ बेचने पर आमादा है इसलिए यह नस्ल और फसल की लड़ाई है। राकेश टिकैत ने कहा कि इस सरकार ने यूपी में चुनावों से पहले बिजली के बिल आधे कर दिये थे और घोषणापत्र में कई-कई वादे किये थे लेकिन अब बढ़े हुए बिजली के बिल आ रहे हैं। भाजपा और मोदी-योगी सरकार पर हमला जारी रखते हुए टिकैत ने कहा कि इस सरकार की नजर हमारी जमीनों पर ही नहीं बल्कि रेहडी, पटरी और छोटे दुकानदारों के कारोबार पर भी है। ऐसे में इन लोगों को भी आंदोलनों से जोड़ना होगा। राकेश टिकैत ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार मंडियों को नुकसान पहुंचाने और मंडियों की जगह आरएसएस को देने की योजना बना रही है। टिकैत ने अग्निवीर योजना की आलोचना करते हुए भी कहा कि यह योजना युवाओं के साथ धोखा है इसलिए नौजवानों और किसानों को संगठित रहना पड़ेगा।

 

 


*किसानों को तीन दिनों मेें मुआवजा राशि वितरित करने के निर्देश*

06-Sep-2022

बिलासपुर(शोर संदेश)।कलेक्टर सौरभ कुमार ने अतिवृष्टि से प्रभावित फसलों की मुआवजा राशि प्रभावित किसानों को अगले तीन दिनों में वितरित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शिविर लगाकर सामूहिक रूप से किसानों को मुआवजा राशि वितरित किये जायें।  सौरभ कुमार आज यहां समय-सीमा की बैठक में राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली फ्लैगशिप योजनाओं में प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने गोबर खरीदी में ज्यादा किसानों की सहभागिता पर संतुष्टि जाहिर करते हुए निरंतर यह प्रगति बनाये रखने के निर्देश दिए हैं। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती जयश्री जैन, डीएफओ कुमार निशांत, एडीएम आर.ए.कुरूवंशी सहित विभागीय वरिष्ठ अफसर मौजूद थे। कलेक्टर ने बैठक में सिलसिलेवार प्राथमिकता वाली राज्य सरकार की योजनाओं की बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने मस्तूरी एवं कोटा ब्लॉक में हाट-बाजार क्लिीनिक योजना में कम उपलब्धि पर असंतोष जताते हुए और ज्यादा लोगों को लाभान्वित करने की कार्य-योजना पर काम करने को कहा है। भू-अर्जन प्रकरणों के निराकरण में तेजी लाने के लिए शुक्रवार को राजस्व अधिकारी एवं कार्यएजेन्सियों की संयुक्त बैठक बुलाई गई है। उन्होंने वोटर आईडी कार्ड में आधार सीडिंग के कार्य में और तेजी लाने को कहा है। कलेक्टर ने कहा कि भारत नेट परियोजना के अंतर्गत हर ग्राम पंचायत मुख्यालय को इन्टरनेट सुविधा मुहैया कराई जायेगी। इसके लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित एक अन्य बैठक में भारत सरकार के उपक्रम गेल इण्डिया लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित नागपुर से झारसुगुड़ा गैस पाईप लाईन हेतु विभिन्न नहरों एवं नदी-नालों के नीचे पाईप लाईन लगाने एवं बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 50 नहर रोड पाटलिपुत्र कॉलोनी में सीसी रोड निर्माण के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

 

 


*बड़ी खबर : समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए 110 लाख मीट्रिक टन का टारगेट...*

05-Sep-2022

रायपुर (शोर संदेश)। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए 110 लाख मीट्रिक टन का टारगेट राज्य सरकार ने तय किया है। इसकी जानकारी छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने ट्वीटर पर पोस्ट कर की है। 



*गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी : बकाया राशि में 10 करोड़ का भुगतान जारी...*

29-Aug-2022

कवर्धा (शोर संदेश)। गन्ने की रिकवरी दर में राष्ट्रीय स्तर पर कीर्तिमान बनाने वाली कबीरधाम जिले के पंडरिया में संचालित लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना ने त्यौहारी सीजन में अपने शेयर धारक गन्ना उत्पाद किसानों को बड़ी सौगात दी है। सहकारी शक्कर कारखाना प्रबंधन ने अपने शेयर धारक किसानो को बकाया राशि में 10 करोड़ 4 लाख रुपए का भुगतान जारी कर दिया है। लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना पंडरिया प्रबंध संचालक श्री सतीश पटले ने बताया कि सहकारी शक्कर कारखाना द्वारा शेयर धारी किसानों से दिनाँक 17 नवंबर 2021 से 12 अप्रैल 2022 तक 7200 किसानों से 2.95 लाख मीट्रिक टन गन्ने की खरीदी की गई थी। खरीदी की गई गन्ने का कुल मूल्य एफआरपी पर 81 करोड़ का हुआ था, जिसका भुगतान किसानों को किया जाना था। उक्त ज़ारी करने योग्य भुगतान में से 10.4 करोड़ ज़ारी किया गया। इस प्रकार 66 करोड़ राशि जो की 4 मार्च 2022 तक का होता हैं, ज़ारी कर दिया गया हैं। शेष राशि जो कुल का 19% (15करोड़) हैं  जल्द ही भुगतान कर दिया जाएगा। इस प्रकार अब तक 81% राशि का भुगतान ज़ारी हो गया है। पूर्व वर्षों में भी भुगतान पूर्ण करने में सितंबर, अक्टूबर तक का समय लग जाता था। उल्लेखनीय है कि कबीरधाम जिले में राज्य शासन द्वारा सचांलित छत्तीसगढ़ के दो सहकारी शक्कर कारखाना लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना मार्यादित पंडरिया और भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना राम्हेपुर कवर्धा ने देश के सभी सहकारी शक्कर कारखाना को पीछे छोड़ते हुए रिकवरी दर के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर नया कीर्तिमान रचा है। यह दोनो सहकारी शक्कर कारखाना छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थापित है।


*तेंदूपत्ता संग्रहों के खातों में मुख्यमंत्री ने ट्रांसफर किए 34 करोड़*

17-Jun-2022

रायपुर (शोर संदेश)। मुख्यमंत्री बघेल ने शुक्रवार को अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में वर्ष 2020 में हुए तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य के लिए 432 समितियों के 4 लाख 72 हजार संग्राहकों को 34 करोड़ 41 लाख रुपए की राशि प्रोत्साहन पारिश्रमिक के रूप में सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। कार्यक्रम में वन मंत्री मोहम्मद अकबर, संसदीय सचिव चंद्रदेव राय, मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा, राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, अपर मुख्य सचिव वन एवँ जलवायु परिवर्तन विभाग सुब्रत साहू, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवँ वन बल प्रमुख राकेश चतुर्वेदी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (कैम्पा ) व्ही श्रीनिवास राव, प्रबंध संचालक राज्य लघु वनोपज संघ संजय शुक्ला भी उपस्थित हैं। मुख्यमंत्री ने वन वृत्त स्तर पर रायपुर, बिलासपुर, कांकेर, जगदलपुर और सरगुजा में वनोपजों और उत्पादों के परीक्षण के लिए स्थापित प्रयोगशालाओं का लोकार्पण किया।




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