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मशरूम की खेती से एसएचजी दीदी को मिली जीवन नई उड़ान

16-Jul-2024
दुर्ग।  ( शोर संदेश ) जिले के छोटे से गाँव मतवारी में रहने वाली जागृति साहू की कहानी प्रेरणा से भरी हुई है। पढ़ी-लिखी जागृति ने दो विषयों में पोस्टग्रेजुएट और बी.एड. की डिग्री प्राप्त की है। बचपन से ही जागृति का सपना था कि वह एक शिक्षक बने, लेकिन किस्मत ने कुछ और ही लिखा था। किसी कारणवश वह अपने इस सपने को पूरा नहीं कर पाई, जिससे वह निराश हो गईं।
जागृति के पति चंदन साहू बताते है कि शिक्षक न बन पाने से जागृति के व्यवहार में बहुत परिवर्तन आया। निराशा की वजह से वे ज्यादा बात भी नहीं करती थी। वे कहते हैं ’’मैंने उस वक्त सोचा कि किसी काम में व्यस्त होने से शायद इनका मन लगे। चुंकी मेरी बेटी और मुझे मशरूम बहुत पसंद था तो मैंने उन्हें मशरूम की खेती करने का सुझाव दिया। बेटी की पसंद की वजह से जागृति ने यह कार्य प्रारंभ किया। देखते ही देखते बेटी की छोटी सी पसंद के लिए शुरू किया गया कार्य जागृति को उंचाईयों तक ले गया। धीरे-धीरे, उन्होंने अपनी रुचि को बढ़ाते हुए हर्बल गुलाल और घरेलू वस्तुएं बनानी शुरू कीं। साल 2019 में, जागृति ने 33 लाख रुपये का मशरूम बेचा, जो उनके मेहनत और समर्पण का परिणाम था। जागृति ने अपने साथ और महिलाओं को भी मुनाफ़ा दिलाया। वे अपने आस पास के गाँव की दीदियों को भी प्रशिक्षण देकर स्वावलंबन की राह दिखाई।’’
जागृति के कार्यों में व्यवसाय के साथ समाज के प्रति उत्तरदायित्व भी दिखता है। वे बताती हैं की जब उन्हें कैमिकल वाले गुलाल से होने वाले नुक़सान के बारे में पता चला तब उन्होंने उसके विकल्प के बारे में सोचना शुरू किया। थोड़े अध्ययन के बाद उन्होंने पाया की घर पर उगने वाली साग-भाजी और फूलों से ही हर्बल गुलाल बनाया जा सकता है। उन्होंने अपने समूह की दीदियों के साथ मिलकर हर्बल गुलाल का उत्पादन प्रारंभ किया। पहले वर्ष समूह की दीदियों ने केवल 35 हज़ार रुपये का गुलाल विक्रय किया। पिछले वर्ष उनके समूह को हर्बल गुलाल के लिए बहुत सारे ऑर्डर्स आए, उन्होंने लगभग 8 लाख 25 हज़ार रुपये की बिक्री की।
जागृति का सफर यहीं नहीं रुका। जागृति ने शासन की योजनाओं का लाभ लिया और एक सामान्य महिला से अपनी अलग पहचान बनाई। मशरूम की खेती से नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करने पर उन्हें “मशरूम लेडी ऑफ़ दुर्ग” कहा जाने लगा। जागृति का सफ़र एक सामान्य महिला से लेकर लखपति दीदी बनने और आज ड्रोन दीदी के रूम में कृषि को उन्नति की ओर ले जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल नमो ड्रोन दीदी में चयनित होकर उन्होंने ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण लिया। आज वह एक प्रमाणित ड्रोन पायलट हैं और ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से जानी जाती हैं। ड्रोन के माध्यम से वह खेतों में दवाइयों का छिड़काव करती हैं और इस नई तकनीक का लाभ किसानों तक पहुंचाती हैं। इससे किसानों का समय तो बचता है साथ ही श्रम और खर्च भी कम होता है।
जागृति साहू की कहानी हमें सिखाती है कि किस तरह संघर्ष और मेहनत से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है और सफलता प्राप्त की जा सकती है। वे बताती हैं की शुरू में लोग उनपर हंसा करते थे और आज उनकी मेहनत और राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार की लाभकारी योजनाओं की बदौलत लोग उनका उदाहरण देने लगे हैं।
जागृति शिक्षक तो नही बन पाईं परंतु आज वे कई महिलाओं के लिए व्यवहारिक एवं व्यवसायिक शिक्षक की मिशाल हैं। जागृति कई महिलाओं को ड्रोन, मशरूम उत्पादन एवं घरेलू वस्तुओं के उत्पादन संबंधित तकनीकी एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण दे रही हैं। जिससे उनके साथ-साथ अन्य महिलाएं भी स्वावलंबन की ओर अग्रसर हो रही हैं। अपने कौशल व सरकार की योजना के माध्यम से ड्रोन दीदी जागृति ने स्वयं के साथ साथ अन्य महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान किया है।  
 

 


जैविक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे गोंदईया के किसान

13-Jul-2024
बिलासपुर।  ( शोर संदेश )   जैविक खेती की ओर कदम बढ़ा कर जिले के किसान अब खेती-किसानी में क्रांति ला रहे है। भूमि की गुणवत्ता में सुधार लाने में भी अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे है। बिल्हा विकासखण्ड के ग्राम गोंदईया में समूह की महिलाएं कचरा प्रबंधन कर एवं अपशिष्ट से तैयार जैविक उर्वरक एवं खाद का उपयोग कर सब्जी उत्पादन कर रहीे हैं। इस खेती से उन्हें 60 हजार से लेकर 70 हजार तक का वार्षिक लाभ हो रहा है। महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुधार आया है और वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों में बखूबी अपना योगदान दे रही हैं।
समूह की महिलाओं ने बताया कि गांव में मनरेगा के तहत एसएलडब्ल्यूएम शेड, नाडेफ एवं वर्मी टेंक निर्माण किया गया है। इन कार्याें के लिए मनरेगा अंतर्गत लगभग 9.28 लाख रूपये की राशि स्वीकृत हुई थी। शेड के माध्यम ठोस एवं तरल अपशिष्ट के रूप में निकलने वाले कचरे का प्रबंधन कर जैविक खाद बनाया जा रहा है। अपशिष्टों को विभिन्न स्त्रोतों से एकत्र कर अपशिष्ट प्रबंधन प्रक्रिया के माध्यम से उनका निपटान किया जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि शेड निर्माण कार्य से अस्वच्छता संबंधी समस्याओं का निदान हुआ है। ग्राम पंचायत में स्वच्छता का माहौल बना है। ठोस एवं तरह अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य प्रतिदिन किया जा रहा है। जिसमें प्रत्येक परिवार को डस्टबीन दी गई एवं तिपहिया वाहन खरीदे गए है। जिसके माध्यम से कचरा का प्रबंधन किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत सरपंच, रोजगार सहायक एवं अधिकारी-कर्मचारी प्रशंसा के पात्र है, जिन्होंने शेड निर्माण के संबंध में उन्हें अवगत कराया एवं निर्माण हेतु प्रेरित किया। सभी ग्रामीण इस कार्य से अत्यंत खुश है। उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है। पहले गंदगी का वातावरण रहता था। ठोस एवं तरल कचरा खुल में इधर उधर पड़ा रहता था। उक्त निर्माण से अब कचरा का प्रबंधन हुआ है। स्व सहायता समुहों को रोजगार एवं आजीविका का साधन प्राप्त हुआ, जिससे उनके जीवन में आर्थिक सुधार संभव हो पाया है।
 

मुख्यमंत्री के निर्देश पर किसानों को सुगमता से मिल रहा है खाद-बीज

11-Jul-2024
रायपुर।   ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रदेश के किसानों को उनकी मांग के अनुरूप सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण किया जा रहा है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। प्रदेश के किसानों को अब तक 8.61 लाख मीट्रिक टन खाद जो लक्ष्य का 63 प्रतिशत वितरित हो चुका है। इसी प्रकार किसानों को 7.85 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 80 प्रतिशत है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून की बौछारों के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। राज्य में अब तक 23.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बोनी हो चुकी है। राज्य सरकार द्वारा इस खरीफ सीजन में 48.63 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बोनी का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 08 जुलाई 2024 की स्थिति में प्रदेश में अब तक 200.8 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1236 मिमी है।  
अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2024 के लिए प्रदेश में 9.78 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 9.04 लाख क्विटल बीज का भंडारण कर अब तक 7.85 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 80 प्रतिशत है।
इसी प्रकार प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 13.68 लाख मेट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 12.80 लाख मेट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 8.61 लाख मेट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 63 प्रतिशत है।     
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कृषि विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश के किसानों को सुगमता से उनकी मांग के अनुरूप खाद-बीज सुगमता से उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा है।
 

किसानों को अब तक 8 लाख मीट्रिक टन खाद व 7 लाख क्विंटल बीज वितरित

10-Jul-2024
रायपुर ।   ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रदेश के किसानों को उनकी मांग के अनुरूप सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण किया जा रहा है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। प्रदेश के किसानों को अब तक 8.61 लाख मीट्रिक टन खाद जो लक्ष्य का 63 प्रतिशत वितरित हो चुका है। इसी प्रकार किसानों को 7.85 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 80 प्रतिशत है।
 
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून की बौछारों के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। राज्य में अब तक 23.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बोनी हो चुकी है। राज्य सरकार द्वारा इस खरीफ सीजन में 48.63 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बोनी का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 08 जुलाई की स्थिति में प्रदेश में अब तक 200.8 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1236 मिमी है।  
अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2024 के लिए प्रदेश में 9.78 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 9.04 लाख क्विटल बीज का भंडारण कर अब तक 7.85 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 80 प्रतिशत है।
इसी प्रकार प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 13.68 लाख मेट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 12.80 लाख मेट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 8.61 लाख मेट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 63 प्रतिशत है।    
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कृषि विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश के किसानों को सुगमता से उनकी मांग के अनुरूप खाद-बीज सुगमता से उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा है।
 

23 लाख हेक्टेयर में हो चुकी खरीफ फसलों की बुआई

09-Jul-2024
रायपुर ( शोर संदेश )  । राज्य में खरीफ फसलों की बुआई तेजी चल रही है। कृषि विभाग से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार अब तक धान, अन्य अनाज के फसलों सहित दलहन-तिलहन, गन्ना की बुआई 23 लाख एक हजार 960 हेक्टेयर में हो चुकी है, जो कि चालू खरीफ सीजन के लिए निर्धारित बुआई के लक्ष्य का 47 प्रतिशत है। अब तक राज्य में 20 लाख 27 हजार 370 हेक्टेयर में धान, 96 हजार 600 हेक्टेयर में मक्का, 10 हजार 910 हेक्टेयर में कोदो, 2980 हेक्टेयर में कुटकी, 1110 हेक्टेयर में रागी, 48 हजर 730 हेक्टेयर में दलहन, 43 हजार 640 हेक्टेयर में तिलहन, 54 हजार 810 हेक्टेयर में अन्य फसलों तथा 12 हजार 480 हेक्टेयर में गन्ना की बुआई पूरी कर ली गई है।
राज्य में खरीफ सीजन 2024 में कुल 48 लाख 63 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई का लक्ष्य है, जिसमें 38 लाख 65 हजार 380 हेक्टेयर में धान, 3 लाख 65 हजार 930 हेक्टेयर में मक्का सहित कोदो-कुटकी, रागी एवं ज्वार की फसलें, 2 लाख 89 हजार 450 हेक्टेयर में दलहन, एक लाख 62 हजार 610 हेक्टेयर में तिलहन, 14 हजार 800 हेक्टेयर में गन्ना तथा एक लाख 64 हजार 830 हेक्टेयर में साग-सब्जी एवं अन्य फसलों की खेती का लक्ष्य निर्धारित है।
राज्य में लक्ष्य के विरूद्ध अब तक धान की बोता-बोनी 18 लाख 95 हजार 670 हेक्टेयर में तथा धान का रोपा एक लाख 32 हजार हेक्टेयर में लगाया जा चुका है। धान की बोता और रोपा बोनी को मिलाकर कुल 20 लाख 27 हजार 670 हेक्टेयर में धान की बुआई हुई है जो कि धान बोनी के लक्ष्य का 52 प्रतिशत है।  
दलहन फसलों के अंतर्गत अरहर की बोनी 27,860 हेक्टेयर में, मूंग की 3940 हेक्टेयर में, उड़द की 16,830 हेक्टेयर में तथा कुल्थी की बोनी 100 हेक्टेयर में हो चुकी है, जो कि दलहनी फसलों के लिए निर्धारित 2 लाख 89 हजार 450 हेक्टेयर की बोनी के लक्ष्य का 17 प्रतिशत है। 
इसी तरह खरीफ सीजन 2024 में तिलहन फसलों के अंतर्गत अब तक राज्य में 15,080 हेक्टेयर में मूंगफली, 2240 हेक्टेयर में तिल, 26,000 हेक्टेयर में सोयाबीन, 310 हेक्टेयर में रामतिल की बोनी हो चुकी है, जो कि तिलहन फसलों की बोनी के लक्ष्य का 27 फीसद है। साग-सब्जी एवं अन्य फसलों की बोनी 54,810 हेक्टेयर में की गई है, जो निर्धारित लक्ष्य का 35 प्रतिशत है। राज्य में गन्ना की बुआई लगभग पूर्णता की ओर है। 15,280 हेक्टेयर में गन्ना की खेती के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 12,480 हेक्टेयर में गन्ना लगाया जा चुका है, जो कि लक्ष्य का 84 प्रतिशत है।

 

कलेक्टर ने किसानों से पूछा-खाद, बीज की कोई कमी तो नहीं

03-Jul-2024
रायपुर।  ( शोर संदेश ) कलेक्टर डाॅ. गौरव सिंह ने धरसींवा के खाद बीज भंडारण केंद्र में पहुंचे और वहां मौजूद किसानों से बातचीत की। कलेक्टर ने किसानों से कहा कि खाद, बीज समय-समय पर मिल रहा है या नहीं। इस पर किसानों ने कहा कि समिति में खाद, बीज की कोई कमी नहीं है। कलेक्टर ने समिति प्रबंधकों से कहा कि खाद, बीज की कोई कमी नहीं होनी चाहिए। स्टाॅक हमेशा उपलब्ध रखा जाए। कलेक्टर ने धरसींवा, कुरा और पथरी व बरबंदा गांव के राशन कार्ड दुकानों का निरीक्षण किया और नए राशन कार्ड का वितरण जल्द से जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही कार्डधारियों से भी पूछा कि राशन समय पर मिल रहा है या नहीं। इस पर सभी राशन कार्डधारियों ने संतुष्टि जताई और समय पर राशन उपलब्ध होने की बातें कलेक्टर को बताई। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ विश्वदीप, सहायक कलेक्टर अनुपमा आनंद व एसडीएम नंद कुमार चैबे उपस्थित थे।
 

*किसानों की सुविधा के लिए खुलेंगे 25 नए धान खरीदी केंद्र, आदेश जारी...*

06-Oct-2023

रायपुर (शोर सन्देश)।किसानों-ग्रामीणों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 एवं आगामी खरीफ विपणन वर्षों के लिए  राज्य शासन ने विभिन्न जिलों में नवीन धान उपार्जन केंद्र खोलने की अनुमति प्रदान की है। इस आशय का आदेश खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है। नवीन धान उपार्जन केंद्रों में राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखण्ड के अंतर्गत देवकट्टा और डोंगरगांव विकासखण्ड के संबलपुर में खोले जाएंगे। इसी तरह सक्ती जिले के सक्ती विकासखड के अंतर्गत नन्दौरखुर्द, महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखण्ड के अंतर्गत बोडराबांधा और आमगांव, मुंगेली जिले के लोरमी विकासखण्ड के औराबांधा, बलरामपुर जिले के रामचन्द्रपुर विकासखण्ड के डुमनपान, कोण्डागांव जिले के फरसगांव विकासखण्ड के बड़ेओड़गांव, केशकाल विकासखण्ड के कुएमारी और कोण्डागांव विकासखण्ड के नवागांव तथा गरियाबंद जिले के छुरा विकासखण्ड के पीपरछेड़ी और उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखण्ड के बंडापाल व कोयलीबेड़ा विकासखण्ड के बेलगाल में नवीन धान उपार्जन केंद्र खोले जाएंगे। इसी प्रकार मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मानपुर विकासखण्ड के मुरारगोटा, बीजापुर जिले के बीजापुर विकासखण्ड के चेरपाल, खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के खैरागढ़ विकासखण्ड के ठेलकाडीह, उत्तर बस्तर दंतेवाड़ा जिले के दंतेवाड़ा विकासखण्ड के बड़ेगोडरे व अरनपुर, रायगढ़ जिले के घरघोड़ा विकासखण्ड के बटुराकछार, धरमजयगढ़ विकासखण्ड के कटाईपाली सी, सरगुजा (अम्बिकापुर) जिले के बतौली विकासखण्ड के बोदा व मंगारी तथा सीतापुर विकासखण्ड के बेलजोरा में नवीन धान उपार्जन केंद्र खोले जाने की अनुमति प्रदान की गई है।


*मुख्यमंत्री 9 को करेंगे गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 23 करोड़ का भुगतान*

08-Sep-2023

रायपुर (शोर सन्देश)। मुख्यमंत्री बघेल गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 9 सितम्बर को अपने निवास कार्यालय रायपुर में गोधन न्याय योजना के ऑनलाईन राशि वितरण कार्यक्रम में योजना के हितग्राहियों के बैंक खातों में 23 करोड़ 93 लाख रूपए अंतरित करेंगे। इसमें गोबर विक्रेताओं को 5.36 करोड़ रूपए, गौठान समितियों को 1.63 करोड़ रूपए एवं स्व-सहायता समूहों की 1.14 करोड़ रूपए की लाभांश राशि के साथ ही स्व-सहायता समूहों को 12.32 करोड़ रूपए तथा सहकारी समितियों को 1.23 करोड़ रूपए की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि और स्वावलंबी गौठान समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्यों को 2.25 करोड़ रूपए की मानदेय राशि शामिल है। गोधन न्याय योजना के तहत हितग्राहियों को 551 करोड़ 31 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 9 सितम्बर कोे 29 करोड़ 93 लाख रूपए के भुगतान के बाद कुल भुगतान का यह आंकड़ा बढ़कर 581.24 करोड़ रूपए हो जाएगा। मुख्यमंत्री गौठानों में 15 अगस्त से 31 अगस्त तक क्रय किए गए 2.68 लाख क्विंटल गोबर के एवज में गोबर विक्रेताओं को 5.36 करोड़ रूपए का ऑनलाइन भुगतान करेंगे। गौठानों में अब तक 133.22 क्विंटल गोबर की खरीदी हो चुकी है, जिसकी एवज में पशुपालन किसानों को 261.08 करोड़ रूपए का भुगतान भी किया जा चुका है। 9 सितम्बर को 5.36 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद गोबर क्रय की कुल राशि 266.44 करोड़ रूपए हो जाएगी। गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 09 सितम्बर को भुगतान की जाने वाली 2.77 करोड़ रूपए की राशि के बाद इनको होने वाले भुगतान की राशि 275.01 करोड़ रूपए हो जाएगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस मौके पर गोबर से कम्पोस्ट खाद के उत्पादन से जुड़े स्व-सहायता समूहों को कम्पोस्ट खाद के विक्रय पर प्रति किलोग्राम एक रूपए के मान से कुल 12 करोड़ 32 लाख रूपए तथा सहकारी समितियों को प्रति किलो 10 पैसे मान से कुल 1 करोड़ 23 लाख रूपए प्रोत्साहन राशि के रूप में ऑनलाईन जारी करेंगे। मुख्यमंत्री स्वावलंबी गौठानों के 42 हजार 644 सदस्यों को मानदेय के रूप में 2 करोड़ 25 लाख रूपए उनके बैंक खातों में भी अंतरित करेंगे। गौरतलब है कि गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी के मामले में स्वावलंबी गौठान समितियों की भागीदारी लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य में निर्मित एवं संचालित 10288 गौठानों में से 6252 गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं, जो स्वयं की राशि से गोबर विक्रेताओं से गोबर क्रय कर रहे है। स्वावलंबी गौठानों ने अब तक 76 करोड़ 42 लाख रूपए का गोबर स्वयं की राशि से क्रय किया है। 9 सितम्बर को गोबर विक्रेताओं को भुगतान की जाने वाली राशि 5.36 करोड़ रूपए में से 3.33 करोड़ रूपए की राशि स्वावलंबी गौठानों द्वारा तथा 2.03 करोड़ रूपए का भुगतान विभाग द्वारा किया जाएगा।


ब्रम्हास्त्र और जीवामृत की बिक्री से 60.82 लाख की आय
गौमूत्र से तैयार जैविक कीटनाशक और फसल वृद्धिवर्धक जीवामृत की बिक्री से महिला स्व-सहायता समूहों को 60 लाख 82 हजार 900 रूपए की आय अर्जित हो चुकी है। गौठानों में 4 रूपए लीटर की दर से गौमूत्र खरीदकर महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं इससे ब्रम्हास्त्र और जीवामृत तैयार कर रही हैं, जिसे किसानों को रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। किसान अब महंगे रासायनिक पेस्टिसाइट के बदले जैविक कीटनाशक ब्रम्हास्त्र और जीवामृत का उपयोग खेती में करने लगे हैं। गौठानों में अब तक 2 लाख 36 हजार 81 लीटर गौमूत्र क्रय किया गया है, जिसका मूल्य 9 लाख 44 हजार 324 रूपए है। गौठानों में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा गौमूत्र से अब तक 1,00,843 लीटर कीटनाशक ब्रम्हास्त्र और 35,445 लीटर वृद्धिवर्धक जीवामृत का उत्पादन किया जा चुका है, जिसका विक्रय किया जा रहा है। राज्य के किसानों द्वारा अब तक 97,024 लीटर जैविक कीटनाशक ब्रम्हास्त्र और 33698 लीटर वृद्धिवर्धक जीवामृत क्रय कर खेती में उपयोग किया गया है, जिससे समूहों को कुल 60 लाख 82 हजार 900 रूपए की आय हुई है।

गोबर से निर्मित प्राकृतिक पेंट से पौने 6 करोड़ की आय
गौठानों से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों को अब विविध आयमूलक गतिविधियों के संचालन के साथ-साथ गोबर से प्राकृतिक पेंट के उत्पादन से भी आय होने लगी है। गोबर से निर्मित प्राकृतिक पेंट, डिस्टेम्पर और पुट्टी से 5 करोड़ 76 लाख 91 हजार रूपए की आय हुई है। वर्तमान में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने के लिए गौठानों में 52 यूनिटें स्थापित की जा चुकी है, जिसमें से 50 यूनिटों में गोबर से प्राकृतिक पेंट उत्पादन किया जा रहा है। क्रियाशील यूनिटों के माध्यम से अब तक 2,50,635 लीटर प्राकृतिक पेंट, 1,12,332 लीटर डिस्टेम्पर तथा 9064 किलो पुट्टी का उत्पादन किया गया है, जिसमें से 1,94,630 लीटर   प्राकृतिक पेंट, 83,268 लीटर डिस्टेम्पर तथा 2840 किलो पुट्टी के विक्रय से कुल 5 करोड़ 76 लाख 91 हजार रूपए की आय हुई है।

300 रीपा स्थापित, एसएचजी को 179.70 करोड़ की आय
गौठानों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 300 रूरल इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित किए गए हैं, जहां महिला समूहों एवं ग्रामीण उद्यमियों द्वारा विविध प्रकार की आयमूलक गतिविधियां संचालित की जा रही है। महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा गौठानों में वर्मी खाद का उत्पादन सामुदायिक बाड़ी से सब्जी उत्पादन, मशरूम उत्पादन, मछली, बकरी, मुर्गी पालन, पशुपालन, गोबर, दीया, गमला, अगरबत्ती तथा अन्य गतिविधियां संचालित की जा रही है, जिससे महिला समूहों को आय हो रही है। गौठानों से 18214 महिला स्व-सहायता  समूह जुड़े हैं, जिनकी सदस्य संख्या 2,14,086 है। आयमूलक गतिविधियों से महिला समूहों 179 करोड़ 70 लाख रूपए की आय हो चुकी है।

6 हजार से अधिक गौठानों में 30 क्विंटल से ज्यादा गोबर खरीदी
गोधन न्याय योजना के तहत 10,288 गांवों में निर्मित एवं संचालित गौठानों में से 6 हजार 180 गौठान ऐसे है, जहां हर पखवाड़े 30 क्विंटल या उससे अधिक की गोबर खरीदी हो रही है। बीते पांच महीनों से 30 क्विंटल या इससे अधिक गोबर खरीदी करने वाले गौठानों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। हर पखवाड़े 30 क्विंटल या इससे अधिक गोबर क्रय करने वाले गौठानों की संख्या अप्रैल 2023 में 3498, मई  में 4584, जून में 5419, जुलाई में 5581 थी, जो अगस्त 2023 में बढ़कर 6180 हो गई है।
 
गोबर विक्रेताओं की संख्या में 46 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी
गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गोबर विक्रेताओं की संख्या और गोबर खरीदी की मात्रा में भी हर महीने वृद्धि हो रही है। बीते एक सालों में गोबर खरीदी की मात्रा बढ़कर लगभग दोगुनी हो गई है। अगस्त 2022 में 2.67 लाख क्विंटल गोबर खरीदा गया था, जबकि अगस्त 2023 में गोबर खरीदी की यह मात्रा बढ़कर 4.89 लाख क्विंटल हो गई है। बीते एक साल में गोधन न्याय योजना से लाभान्वित पशुपालकों की संख्या एक लाख से अधिक की बढ़ोत्तरी हुई है। अगस्त 2022 में लाभान्वित पशुपालकों की संख्या 2,52,685 थी, जो अगस्त 2023 में बढ़कर 3,69,571 हो गई है, यह वृद्धि 46 प्रतिशत है।


कृषि विभाग ने की किसानों से ‘पास मशीन’ से ही खाद लेने अपील

05-Sep-2023

 रायपुर (शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ शासन कृषि विभाग के निर्देशानुसार राज्य के समस्त जिले के कृषकों को गुणवत्तायुक्त बीज, उर्वरक तथा कीटनाशक दवाई उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि आदान विक्रय केन्द्रों का लगातार निरीक्षण तथा अनियमितता पर कार्यवाही की जा रही है।  
शासन के निर्देशानुसार अनुदान प्राप्त उर्वरकों का विक्रय पास मशीन के माध्यम से किया जाना अनिवार्य है, पास मशीन से विक्रय पश्चात् ही उर्वरकों का अनुदान निर्माता कंपनी को प्राप्त होता है। इसलिये फुटकर उर्वरक विक्रेता किसी भी परिस्थिति में बिना पास के अनुदान प्राप्त उर्वरकों का विक्रय नही करना चाहिये तथा कृषकों को उर्वरक विक्रय किये बिना भी कतिपय कंपनियों के किसी प्रकार के प्रलोभन में आकर पास से उर्वरक स्कंध नही घटाना चाहिये। फुटकर उर्वरक विक्रेताओं द्वारा उर्वरकों के बिना वास्तविक बिक्री के फर्जी (फेक) पास सेल करने का प्रयास किया जा सकता है, इसलिये राज्य के समस्त जिले के विभिन्न अनुविभागों में नियुक्त अनुविभागीय कृषि अधिकारी, विकासखंडो में नियुक्त वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं उर्वरक निरीक्षकों को नियमित रूप से उर्वरक विक्रय केन्द्रों की निगरानी करने तथा उर्वरक विक्रय केन्द्रों में उपलब्ध भौतिक स्कंध एवं पास में उपलब्ध स्कंध का मिलान करने तथा दोनो स्कंध में भिन्नता पाये जाने पर उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत तत्काल कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये गये है।

कृषि विभाग ने कृषकों से भी अपील की है कि पास के माध्यम से उर्वरकों का क्रय करें तथा पक्का बिल अवश्य प्राप्त करें। 


मुख्यमंत्री को नागरिकों ने लड्डुओं से तो किसानों ने धान से तौला...

23-Aug-2023

रायपुर (शोर सन्देश)।   मुख्यमंत्री बघेल ने अपने जन्मदिन पर दुर्ग जिले के कुम्हारी में आयोजित लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में क्षेत्रवासियों को 55 करोड़ 33 लाख 56 हजार के विकास कार्यों की सौगात दी। जिसमें 7 करोड़ 95 लाख 43 हजार रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं 47 करोड़ 38 लाख 13 हजार रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। मुख्यमंत्री को कार्यक्रम में नागरिकों ने उनके जन्मदिवस पर मंच में लड्डुओं और किसानों ने धान से तौला।
मुख्यमंत्री बघेल ने नगर पालिका परिषद कुम्हारी क्षेत्रांतर्गत विभिन्न विकास कार्यों हेतु 4 करोड़ 73 लाख 93 हजार रुपए एवं दुर्ग के कृषि उपज मंडी समिति अंतर्गत 3 निर्माण कार्यों हेतु 3 करोड़ 21 लाख 50 हजार रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इसी प्रकार भूमिपूजन अंर्तगत उन्होंने विकासखंड पाटन की भिलाई डिस्ट्रीब्यूट्री एवं इसके 5 नग माइनर नहरों के जीर्णाेद्धार एवं लाइनिंग कार्य हेतु 13 करोड़ 61 लाख 36 हजार, कुम्हारी बड़ा तालाब (वार्ड क्रमांक 13) से कुम्हारी शमशान घाट तक 1.5 किमी क्षेत्र में मार्ग एवं पुलिया निर्माण हेतु 3 करोड़ 49 लाख 15 हजार रुपए, नगर पालिका परिषद कुम्हारी क्षेत्रान्तर्गत विभिन्न विकास कार्यों हेतु 4 करोड़ 1 लाख 85 हजार रुपए एवं कृषि उपज मंडी समिति, दुर्ग के अंतर्गत 16 निर्माण कार्यों हेतु 26 करोड़ 25 लाख 77 हजार रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया।

 

मुख्यमंत्री ने पाटन क्षेत्र के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की धरती को नमन करते हुए सभी नागरिकों को जन्मदिवस की आशीष देने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि पाटन क्षेत्र में राजनीतिक जागरूकता शुरू से रही है। पाटन क्षेत्र के बुजुर्ग लोगो के आशीर्वाद से आज प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला है। छत्तीसगढ़ प्रदेश किसानों का प्रदेश है। सरकार ने किसानों के आर्थिक स्थिति को ऊपर उठाने योजनाएं संचालित कर रही है। सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ हितग्राहियों को मिल रहा है। विगत पौने पांच साल में 1 लाख 70 करोड़ की राशि विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों के खाते में डाले गए हैं। सरकार कोरोना काल के विषम परिस्थिति में भी लोगों के साथ खड़ी थी, हम सेवाभाव से आगे बढ़े हैं। हर व्यक्ति हर परिवार को ध्यान में रख कर योजना बनायी हैं। इन योजनाओं के सुचारू संचालन से हितग्राही लाभान्वित हो रहे है। उन्होंने कहा कि आज कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ लाभकारी व्यवसाय बन गया है। 




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