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किसान

रसायन मुक्त खेती से अनिमा खेस्स बनीं प्रेरणा, जैविक खेती से बढ़ी आय

12-Mar-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश ) सरगुजा जिले के सीतापुर ब्लॉक के ग्राम धर्मपुर की एक प्रगतिशील महिला किसान अनिमा खेस्स ने आधुनिक खेती की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव पेश किया है। पिछले तीन वर्षों से रासायनिक खेती को अलविदा कह कर जैविक खेती अपनाते हुए अनिमा न केवल शुद्ध अनाज उपजा रही हैं, बल्कि लागत में कमी लाकर अपनी आय भी बढ़ा रही हैं।
अनिमा बताती हैं कि पहले वे पारंपरिक रूप से रासायनिक खादों का प्रयोग करती थीं, जिससे खेती की लागत अधिक आती थी और मिट्टी की सेहत भी बिगड़ रही थी। उन्होंने कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के माध्यम से विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया। सतत सीखने की ललक ने उन्हें जैविक खेती के गुर सिखाए, जिसे अब वे अपने जीवन का मुख्य आधार बना चुकी हैं।
जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अनिमा ने बाजार पर निर्भरता पूरी तरह खत्म कर दी है। वे अपने घर और बाड़ी में ही जैविक खाद और कीटनाशक तैयार कर रही हैं। केंचुआ टैंक के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली वर्मी कंपोस्ट खाद का निर्माण कर रही हैं, स्वदेशी तकनीक में कंडा पानी, नाडेप और पंचपत्ती घोल, नीम तेल और स्थानीय जड़ी-बूटियों से तैयार घोल जैविक कीटनाशक बना रहीं हैं,जो फसलों को सुरक्षित रखते हैं।
अनिमा खेश का मानना है कि जैविक खेती के दोतरफा फायदे हैं। एक ओर जहाँ रासायनिक खादों और महंगे कीटनाशकों पर होने वाला खर्च शून्य हो गया है, वहीं दूसरी ओर परिवार और समाज को जहर मुक्त, पौष्टिक आहार मिल रहा है। वे कहती हैं, “जैविक खेती न केवल हमारी जेब बचाती है, बल्कि हमारे शरीर और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखती है।“
एक सजग किसान होने के नाते अनिमा अब अपने स्व-सहायता समूह की अन्य दीदियों को भी जैविक खेती के महत्व और उद्देश्यों के बारे में जागरूक कर रही हैं। वे प्रशिक्षण के माध्यम से सीखी बातों को अन्य महिलाओं तक पहुँचाकर उन्हें भी प्राकृतिक खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

 

मिलेट्स की खेती से बढ़ रही किसानों की आय, दंतेवाड़ा में नई पहल

12-Mar-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश ) मिलेट्स (मोटा अनाज) की खेती कम लागत, कम पानी और बिना रसायनों के होने वाली एक अत्यधिक लाभदायक व पौष्टिक खेती है, जो 80-90 दिनों (जून-जुलाई से) में तैयार होती है। ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, कुटकी जैसे मिलेट्स बंजर या कम उपजाऊ भूमि के लिए भी उपयुक्त हैं। दंतेवाड़ा जिला अब मिलेट्स उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत दंतेवाड़ा जिले में मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की जा रही है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग के प्रयासों से अब किसान पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती में नए प्रयोग कर रहे हैं। इससे किसानों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मदद मिल रही है।
दंतेवाड़ा जिले के कृषि इतिहास में पहली बार लगभग 300 प्रगतिशील किसान उन्नत ‘विधि’ से रागी (मडिया) की खेती कर रहे हैं। इस नई पद्धति से रागी उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पोषक अनाजों की खेती को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। रागी को पोषण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसमें कैल्शियम और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
इस पहल को सफल बनाने के लिए कृषि विभाग और भूमगादी की टीम गांव-गांव जाकर किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दे रही है। किसानों को बुवाई की सही विधि, पौधों के बीच उचित दूरी, जैविक खाद का उपयोग और फसल प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है। इससे किसानों में आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के प्रति उत्साह बढ़ रहा है।
विधि’ से रागी की खेती कई तरह से लाभदायक मानी जाती है। इस पद्धति में बीज कम लगता है, जिससे लागत घटती है। साथ ही पारंपरिक खेती की तुलना में पानी की आवश्यकता भी कम होती है, जो वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए काफी उपयोगी है। पौधों को पर्याप्त जगह मिलने से उनका बेहतर विकास होता है और उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है। यह पद्धति जैविक और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा देती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है।
दंतेवाड़ा जिले में रागी के साथ-साथ कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी अन्य फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विभाग किसानों को बहुफसली प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है, ताकि उनकी आय के स्रोत बढ़ सकें और खेती अधिक टिकाऊ बन सके।
इस पहल से दंतेवाड़ा के किसान पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संतुलित उपयोग करते हुए कृषि में नई पहचान बना रहे हैं। मोटे अनाजों की खेती को बढ़ावा मिलने से न केवल किसानों की आय बढ़ने की संभावना है, बल्कि पोषण सुरक्षा और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
 

मध्यप्रदेश के किसानों का ग्राम लिंगाडीह आरंग में मखाना खेती भ्रमण एवं प्रशिक्षण संपन्न

12-Mar-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश ) धान के कटोरे कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में अब एक नई फसल अपनी पहचान बना रही है - सुपर फूड मखाना, जिसे काला हीरा भी कहा जाता है। स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर मखाने की खेती अब राज्य में आधुनिक तकनीक और नवाचार के साथ हो रही है।
मखाना उत्पादन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर एवं अध्यक्ष जनपद सदस्य आरंग, रिंकू चंद्राकर ने की. मध्य प्रदेश के किसानो  सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि चंद्रहास चंद्राकर ने कहा की केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों के  आर्थिक उन्नति के लिए विशेष रूप से कार्य कर रही है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी के प्रयासों से छत्तीसगढ़ मखाना बोर्ड सेन्ट्रल सेक्टर स्कीम में शामिल हुआ है इसके लिए हम उनका आभार व्यक्त करते हैं.हमारे मुख्य मंत्री श्री विष्णु देव साय कृषि मंत्री राम विचार नेताम जी के द्वारा मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने विशेष प्रयास किया जा रहा है चंद्राकर ने कहा की छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यवसायिक उत्पादन आरंग ब्लॉक के ग्राम लिंगाडीह के किसान स्व. कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा प्रारंभ किया गया था। राज्य का प्रथम मखाना प्रसंस्करण केंद्र का उद्घाटन 5 दिसंबर 2021 को ग्राम लिंगाडीह में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। अब मखाना उत्पादन में प्रदेश में आरंग का नाम अपनी अलग पहचान बना चुका है.   कार्यक्रम के अध्यक्ष जनपद सदस्य रिंकू चंद्राकर ने कहा किया हमारे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश का प्रथम मखाना उत्पादन एवं संस्करण केंद्र हमारे क्षेत्र ग्राम लिंगाडीह में स्थापित हुआ है.छटेरा, निसदा एवं अन्य गांव में भी इसके विस्तार हेतु प्रयास किया जा रहे हैं हमारे इस केंद्र में न केवल हमारे प्रदेश के बल्कि अन्य प्रदेश के लोग भी यहां मखाना की खेती सीखने आ रहे हैं जो हमारे प्रदेश के लिए गर्व की बात है. 
मध्य प्रदेश के उमरिया जिला से 50 किसानों का एक भ्रमण दल कृषि विभाग के द्वारा मखाना की खेती के भ्रमण हेतु रायपुर जिला के आरंग ब्लॉक स्थित ओजस फॉर्म का भ्रमण किया। इस दौरान किसानों ने मखाना की खेती के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की और अपने अनुभव साझा किए।
राष्ट्रीय मखाना महोत्सव 2024 एवं 2025 में सम्मानित मखाना उत्पादक किसान  एवं ओजस फार्म दाऊजी मखाना के प्रबंधक संजय नामदेव ने मखाना की खेती के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ में 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और उत्पादन लगभग 10 क्विंटल के आसपास प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि 6 माह की अवधि वाले फसल में किसी भी प्रकार का कीट व्याधि का प्रकोप नहीं होता है और न ही किसी प्रकार की चरी और चोरी की समस्या रहती है। इंदिरा गाँधी कृषि विश्व विद्यालय के सब्जी विज्ञान के पी एच डी छात्र डॉ योगेंद्र चंदेल ने किसानों को मखाना की खेती के लिए आवश्यक तकनीक और संसाधनों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मखाना की खेती तालाब एवं खेत दोनों विधि से की जाती है अधिकतम उत्पादन के लिए धान की तरह खेत की मताई 1 मीटर की दुरी पर 55 दिन के नर्सरी की 4000 पौधो की रोपाई एक मीटर पौधा से पौधा एवं कतार से कतार की दुरी पर रोपाई समय समय पर नींदाई  खाद प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से करने पर अधिकतम उत्पादन मिलता है मखाना की खेती प्रसंसकरण एवं विपणन के लिए हमारे द्वारा किसानों को  प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाती है।
ICAR-CIPHET (केंद्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान), लुधियाना, पंजाब से प्रशिक्षण प्राप्त शिव नारायण साहू ने मखाना के प्रोसेसिंग की जानकारी देते हुए बताया कि 1 किलो मखाना के बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप प्राप्त होता है, जिसकी बाजार में कीमत ₹700 से लेकर ₹1000 तक होती है। उन्होंने बताया कि यदि किसान मखाना का उत्पादन कर स्वयं प्रसंस्करण कर पैकेजिंग करके भेजते हैं तो प्रति एकड़ अधिकतम लाभ प्राप्त हो सकता है।
इस भ्रमण के दौरान किसानों ने मखाना की खेती के बारे में शिव साहू से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मखाना की खेती से उन्हें अच्छा मुनाफा हो सकता है और यह उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकता है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मखाना बोर्ड से इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को मखाना की खेती के लिए प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाती है, और उन्हें इसके लिए सब्सिडी भी दी जाती है।
इस भ्रमण में मध्य प्रदेश के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से भ्रमण दल प्रभारी दहायत एवं भ्रमण दल में शामिल किसानों ने बताया कि वे मखाना की खेती के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उत्साहित हैं और इसे अपने खेतों में अपनाने के लिए तैयार हैं।





 

स्व-सहायता समूह से मिली ताकत, सब्जी उत्पादन से बदली आरती सिंह की जिंदगी

11-Mar-2026
रायपुर,। ( शोर संदेश )  मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के जनपद पंचायत भरतपुर के विकासखंड भरतपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कुवांरी की निवासी आरती सिंह ने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया और आज वे गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
आरती सिंह मां महामाया स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने समूह के माध्यम से 60 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया और इस राशि का उपयोग सब्जी उत्पादन शुरू करने में किया। शुरुआत में छोटे स्तर पर शुरू किया गया यह प्रयास आज एक सफल आजीविका में बदल चुका है।
आरती अपने खेत में गोभी, टमाटर, आलू, प्याज, बैंगन, लहसुन और मटर जैसी विभिन्न सब्जियों का उत्पादन करती हैं। इसके साथ ही वे गेहूं की खेती भी करती हैं। मौसम के अनुसार फसल परिवर्तन और मेहनत के कारण उनकी सब्जियों की गुणवत्ता बेहतर रहती है, जिससे गांव के साथ-साथ आसपास के बाजारों में भी उनकी सब्जियों की अच्छी मांग बनी रहती है।
लगातार परिश्रम और खेती की बेहतर योजना के कारण आज सब्जी उत्पादन और कृषि से उनकी वार्षिक आय लगभग 1 लाख 13 हजार 10 रुपये तक पहुंच गई है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उनके जीवन में आत्मविश्वास व सम्मान भी बढ़ा है। अब वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने के साथ-साथ बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी प्रयासरत हैं।
आरती की यह सफलता कहानी केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनकी सफलता को देखकर कई महिलाएं भी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो रही हैं। इससे गांव में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को नई दिशा मिल रही है।

 

गांव की सीमा वर्मा ने अपनाई ड्रोन तकनीक, किसानों की खेती हुई आसान

07-Mar-2026
रायपुर,( शोर संदेश )   कभी सीमित संसाधनों और आर्थिक परेशानियों के बीच जीवन बिताने वाली बिलासपुर जिले के ग्राम पंचायत पौंड़ी, जनपद पंचायत मस्तूरी की सीमा वर्मा आज अपने साहस, मेहनत और नई तकनीक को अपनाने की लगन से सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर उन्होंने न केवल अपने जीवन की दिशा बदली, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। गांव में आज ड्रोन दीदी कहलाती हैं।
वर्ष 2014 में सीमा वर्मा ने जय मां गायत्री स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी नई यात्रा की शुरुआत की। शुरुआत में उन्होंने समूह के साथ बचत और छोटे-छोटे कार्यों के माध्यम से आर्थिक स्थिति मजबूत करने का प्रयास किया। ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार के अवसर मिले और उन्होंने पैरा मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने इस कार्य को आगे बढ़ाया, जिससे उन्हें नियमित आय मिलने लगी।
कुछ नया सीखने और आगे बढ़ने की इच्छा ने सीमा को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद शासन की सहायता से उन्हें ड्रोन सेट, जनरेटर और ई-वाहन उपलब्ध कराया गया। इसके बाद उन्होंने किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक का छिड़काव करना शुरू किया। आज सीमा वर्मा ड्रोन तकनीक के माध्यम से किसानों की खेती को आसान बना रही हैं और सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं। गांव में लोग उन्हें अब स्नेहपूर्वक ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से पुकारते हैं।
सीमा वर्मा की यह प्रेरक यात्रा साबित करती है कि सही अवसर, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी अपने हौसले के दम पर नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। ‘बिहान’ योजना ने उनके जीवन को नई दिशा दी और उनके सपनों को नई उड़ान प्रदान की।
 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का संबल, बालोद की रोहनी बनीं उद्यमिता की मिसाल

07-Mar-2026
रायपुर,( शोर संदेश )  छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं प्रदेश की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित महतारी वंदन योजना आज हजारों महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की नई राह खोल रही है। बालोद जिले के ग्राम खैरडीह की रोहनी पटेल की कहानी इसी परिवर्तन की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बीच इस योजना से मिली सहायता को अवसर में बदलकर अपने जीवन को नई दिशा दी है।
रोहनी पटेल का जीवन लंबे समय तक संघर्षों से भरा रहा। पति की असमय मृत्यु के बाद उनके सामने परिवार की जिम्मेदारियों का बड़ा बोझ आ गया। घर में वृद्ध सास की देखभाल और कॉलेज में पढ़ रहे दो बच्चों के भविष्य की चिंता ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया। सीमित संसाधनों और आय का कोई स्थायी साधन न होने के कारण परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद रोहनी ने हिम्मत नहीं हारी और बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ संघर्ष करती रहीं।
इसी दौरान राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई। एकीकृत बाल विकास परियोजना देवरी के माध्यम से उन्हें योजना का लाभ मिलने लगा और हर माह मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि ने उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया। रोहनी ने इस राशि को केवल घरेलू खर्चों में खर्च करने के बजाय इसे भविष्य के लिए निवेश के रूप में देखने का निर्णय लिया।
लगातार छह से सात महीनों तक प्राप्त हुई किस्तों को उन्होंने सावधानीपूर्वक संचित किया और उसी संचित राशि से अपने खेत में सब्जी उत्पादन का कार्य शुरू किया। उन्होंने बीज, खाद और आवश्यक कृषि उपकरणों की व्यवस्था की और पूरे समर्पण के साथ खेती में जुट गईं। उनकी मेहनत का सकारात्मक परिणाम सामने आया और खेत में उगी ताजी सब्जियों ने उनके जीवन में नई उम्मीदों का संचार कर दिया।
आज रोहनी पटेल अपने खेत में विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगाकर आसपास के ग्रामीण बाजारों में बेच रही हैं। इस कार्य से उन्हें नियमित और सम्मानजनक आय प्राप्त हो रही है। सब्जी विक्रय से होने वाली आय से वे अपने परिवार की दैनिक आवश्यकताओं को सहजता से पूरा कर पा रही हैं। उनके बच्चों की कॉलेज की पढ़ाई भी बिना किसी बाधा के जारी है और वे अपनी वृद्ध सास की सेवा-देखभाल भी अच्छे से कर रही हैं। महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक सहायता ने रोहनी के जीवन में केवल आर्थिक संबल ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और उद्यमी बनने की प्रेरणा भी प्रदान की है। आज वे अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं।
रोहनी पटेल ने इस परिवर्तन के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में नया आत्मविश्वास जगाया है और अब वे सम्मान के साथ अपने परिवार का भरण-पोषण कर पा रही हैं। प्रदेश सरकार की यह योजना आज छत्तीसगढ़ की लाखों महिलाओं के लिए केवल एक वित्तीय सहायता ही नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान की मजबूत नींव बन चुकी है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से राज्य की महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
 

बिहान ने बदली रत्ना की तकदीर, फूलों की खेती से बनीं आत्मनिर्भर

06-Mar-2026
रायपुर( शोर संदेश )। छत्तीसगढ़ शासन की ‘बिहान’ (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) योजना ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत डिगमा की निवासी रत्ना मजुमदार इसकी प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई हैं। उन्होंने मेहनत और आधुनिक तकनीक के सहारे फूलों की खेती को सफल व्यवसाय में बदल दिया है।
रत्ना बताती हैं कि उनके ससुर पारंपरिक रूप से छोटे स्तर पर फूलों की खेती करते थे। स्व-सहायता समूह ‘माँ महामाया समूह’ से जुड़ने के बाद उन्होंने इस कार्य को व्यावसायिक रूप देने का निर्णय लिया। समूह के माध्यम से उन्हें एक लाख रुपये का ऋण मिला, जिससे उन्होंने एक एकड़ में आधुनिक पद्धति से फूलों की खेती शुरू की। आज उनकी खेती दो एकड़ तक फैल चुकी है।
रत्ना ने खेती में ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) जैसी आधुनिक तकनीक अपनाई है। उन्होंने बताया कि उन्नत किस्म के पौधे कोलकाता से मंगाए जाते हैं, जो लगभग 24 दिनों में फूल देना शुरू कर देते हैं और तीन महीने तक उत्पादन देते हैं। वर्तमान में वे गेंदा फूल की लाल, नारंगी और पीली किस्मों की खेती कर रही हैं, वहीं सर्दियों में चेरी की खेती भी करती हैं। नवरात्रि, शिवरात्रि, रामनवमी और दीपावली जैसे त्योहारों में फूलों की मांग बढ़ने से उन्हें अच्छा लाभ मिलता है। उन्होंने समूह से लिया ऋण समय पर चुका दिया है और अब होने वाले मुनाफे को खेती के विस्तार में लगा रही हैं।
रत्ना अपनी सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं को देते हुए कहती हैं कि बिहान से जुड़कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। आज वे न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि समाज में नई पहचान भी बना रही हैं।

छुईखदान में पान की खेती को पुनर्जीवित करने की पहल, किसानों को मिला तकनीकी सहारा

03-Mar-2026
रायपुर (शोर संदेश) ।  खैरागढ़  छुईखदान, गंडई जिले के विकासखण्ड छुईखदान में पूर्व में पान की खेती व्यापक रूप से की जाती थी, किन्तु तकनीकी मार्गदर्शन के अभाव एवं आवश्यक प्लांटिंग मटेरियल की उपलब्धता न होने के कारण यह परंपरागत खेती धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई थी। पान की इस पारंपरिक फसल को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा वर्ष 2023-24 में विकासखण्ड छुईखदान में पान अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने की घोषणा की गई। यह केन्द्र रानी अवंती बाई लोधी कृषि महाविद्यालय छुईखदान में स्थापित किया गया है।
पान उत्पादक कृषकों को प्रोत्साहित करने के लिए शेडनेट हाउस अधोसंरचना निर्माण हेतु 50 प्रतिशत विभागीय अनुदान प्रदान किया जा रहा है। वर्तमान में 7 कृषकों द्वारा प्रति कृषक 500 वर्गमीटर क्षेत्रफल में शेडनेट हाउस का निर्माण कराया गया है, जिसके लिए प्रति कृषक 1.77 लाख रुपये का अनुदान उद्यानिकी विभाग द्वारा प्रदान किया गया है। इनमें से 6 कृषक वर्तमान में पान की खेती कर रहे हैं। इस पहल से पान उत्पादक कृषक प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों में भी अनुकूल वातावरण में पान की खेती कर बेहतर आय अर्जित कर सकेंगे।
आवश्यक प्लांटिंग मटेरियल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कृषि महाविद्यालय के सहयोग से जिले में स्थापित शासकीय उद्यान रोपणी कुकुरमुड़ा एवं बीरूटोला में भी पान की खेती का प्रदर्शन प्लॉट तैयार किया जा रहा है।
जिला प्रशासन द्वारा इस विशेष पहल की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है।  कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत द्वारा समय-समय पर स्थल निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। साथ ही, रानी अवंती बाई लोधी कृषि महाविद्यालय छुईखदान के विषयवस्तु विशेषज्ञों द्वारा कृषकों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है, जिससे जिले में पान की खेती को पुनः स्थापित कर किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।

ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से किसान ने कमाई 16 लाख रुपये

01-Mar-2026
रायपुर। ( शोर संदेश ) किसान वैज्ञानिक पद्धति, उन्नत बीज और सही मार्गदर्शन के साथ खेती करें, तो कम भूमि में भी अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इसी कड़ी में मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड के ग्राम करही के किसान चिंतामणि बंजारे ने नवाचार और आधुनिक तकनीक को अपनाकर खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया है। उन्होंने परंपरागत सब्जी खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 10 एकड़ क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती कर लगभग 1100 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उन्हें करीब 16 लाख रुपये की आमदनी हुई है।
कृषक चिंतामणी ने बताया कि सामान्य फसल की तुलना में ग्राफ्टेड बैगन में लागत अपेक्षाकृत कम आती है, जबकि उत्पादन अधिक मिलता है, परिणामस्वरूप आय दो से तीन गुना तक बढ़ जाती है। ग्राफ्टेड बैंगन की विशेषता इसकी मजबूत जड़ प्रणाली, रोग प्रतिरोधक क्षमता और अधिक उत्पादन है। पहले वे सामान्य सब्जियों की खेती करते थे, जिसमें लाभ सीमित और जोखिम अधिक था। किंतु उद्यान विभाग के प्रोत्साहन, तकनीकी सलाह और उन्नत पौध सामग्री के उपयोग ने उनकी खेती की दिशा ही बदल दी। उचित सिंचाई प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और नियमित देखभाल से फसल की गुणवत्ता बेहतर रही, जिससे बाजार में उन्हें अच्छा मूल्य प्राप्त हुआ। आज वे आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी उन्नत तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ग्राफ्टेड बैंगन की खेती ने उनके परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ गांव में आधुनिक कृषि की नई सोच को भी प्रोत्साहित किया है।
 

धान विक्रय पर किसानों को बड़ी राहत, डीबीटी से खातों में पहुंची अंतर राशि

01-Mar-2026
सारंगढ़ बिलाईगढ़  ( शोर संदेश )।  जिला मुख्यालय में कृषक उन्नत योजना के अंतर्गत आदान सहायता राशि वितरण समारोह का आयोजन शुक्ला भवन सारंगढ़ में किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय वर्चुअल माध्यम से जुड़े। इस दौरान उपस्थित किसानों ने मुख्यमंत्री का संबोधन सुना और सरकार की विभिन्न कृषक हितैषी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 442948.84 मे.टन धान विक्रय के भुगतान राशि 104934.58 लाख रूपये जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के 84058 किसानों के खाते में सीधे डीबीटी के माध्यम से अंतर राशि 3237.96 लाख रुपये का हस्तांतरण बटन दबाकर किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसान, जिला पंचायत के अध्यक्ष संजय भूषण पाण्डेय, सदस्य लता लक्षमे, शिवकुमारी साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष सारंगढ़ ममता ठाकुर, पूर्व विधायक कामदा जोल्हे, सत्ता धारी दल के जिला अध्यक्ष ज्योति पटेल, उप संचालक कृषि आशुतोष श्रीवास्तव, खाद्य अधिकारी गणेश कुर्रे, पत्रकारगण आदि उपस्थित थे।
कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे द्वारा किसानों को सहायता एवं प्रोत्साहन राशि के प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इसी क्रम में ग्राम सालर के किसान चोकलाल को बोनस राशि का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। प्रमाण पत्र पाकर किसान ने सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई। 14 महिलाओं को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर वितरित किए गए। हितग्राही महिलाओं ने योजना का लाभ मिलने पर प्रसन्नता जाहिर की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
 

 



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