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सरकार घरेलू गैस सप्लाई में एलपीजी के साथ पीएनजी पर भी दे रही जोर : पीएम मोदी

24-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) राज्यसभा में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर सरकार की रणनीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सरकार ईंधन के किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है और घरेलू गैस सप्लाई में एलपीजी के साथ-साथ पीएनजी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दशक में देश में पीएनजी कनेक्शन के विस्तार में अभूतपूर्व प्रगति हुई है और हाल के वर्षों में इस गति को और तेज किया गया है। साथ ही एलपीजी के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के प्रयास भी लगातार जारी हैं, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार का लगातार प्रयास रहा है कि हर क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम हो और भारत आत्मनिर्भर बने। मौजूदा समय में देश का 90% से अधिक व्यापार विदेशी जहाजों पर निर्भर है, जो किसी वैश्विक संकट में चुनौती बन सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए ‘मेड इन इंडिया’ जहाज निर्माण के लिए करीब 70 हजार करोड़ रुपए का अभियान शुरू किया गया है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत शिप बिल्डिंग, शिप ब्रेकिंग और मेंटेनेंस-ओवरहॉलिंग जैसी सुविधाओं के विकास पर तेजी से काम कर रहा है। बीते वर्षों में हुए प्रयासों का परिणाम है कि देश अब अपनी जरूरत के अधिकांश हथियारों का निर्माण खुद कर रहा है।
उन्होंने कहा कि एक समय भारत जीवन रक्षक दवाओं के कच्चे माल (एपीआई) के लिए काफी हद तक विदेशों पर निर्भर था, लेकिन अब देश में ही एपीआई इकोसिस्टम विकसित करने के लिए व्यापक प्रयास किए गए हैं। इसी तरह रेयर अर्थ मिनरल्स में विदेशी निर्भरता कम करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है और इससे उबरने में समय लगेगा। भारत पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े, इसके लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप का गठन किया है, जो नियमित रूप से बैठकर इंपोर्ट-एक्सपोर्ट से जुड़ी चुनौतियों का आकलन करता है। सरकार शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म रणनीतियों के तहत हालात पर नजर बनाए हुए है।
 

हमारी सरकार की कोशिश है कि ईंधन के किसी एक ही स्रोत पर ज्यादा निर्भरता ना रहे : राज्यसभा में पीएम मोदी

24-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को संसद के उच्च सदन में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उससे बनी परिस्थितियों से हम सभी परिचित हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को तीन सप्ताह से अधिक का समय हो चुका है। इस युद्ध ने पूरे विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइजर जैसे जरूरी सामान के रूटीन सप्लाई प्रभावित हो रही है।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार की कोशिश है कि ईंधन के किसी एक ही स्रोत पर ज्यादा निर्भरता ना रहे। सरकार घरेलू गैस सप्लाई में एलपीजी के अलावा पीएनजी पर भी बल दे रही है। बीते दशक में देश में पीएनजी कनेक्शन पर अभूतपूर्व काम हुआ है। बीते दिनों में इस काम को और तेज किया गया है। साथ ही, एलजी के घरेलू उत्पादन को भी बड़े पैमाने पर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा, “कोई भी संकट हो, वह हमारे हौसलों और हमारे प्रयासों दोनों की परीक्षा लेता है। देश ऐसे संकटों का बेहतर तरीके से सामना कर सके, इसके लिए बीते 11 वर्षों में निरंतर निर्णय लिए गए हैं। एनर्जी इंपोर्ट का डायवर्सिफिकेशन ऐसे ही प्रयासों का हिस्सा है। पहले क्रूड ऑयल, एलएनजी, एलपीजी, ऐसी एनर्जी जरूरतों के लिए 27 देशों से इंपोर्ट किया जाता था। वहीं आज भारत 41 देशों से एनर्जी इंपोर्ट कर रहा है। बीते दशक में भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारों को भी प्राथमिकता दी है। हमारी तेल कंपनियां संकट के समय के लिए काफी मात्रा में पेट्रोल और डीजल का भंडार रखती हैं। बीते 11 वर्षों में 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक तक स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी डेवलप किया गया है और 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है। साथ ही, बीते दशक में भारत की रिफायनिंग कैपेसिटी भी अच्छी-खासी बढ़ाई गई है। मैं आपके माध्यम से सदन को और देश को या यह देना चाहता हूं कि भारत के पास क्रूड ऑयल के पर्याप्त स्टोरेज के और निरंतर सप्लाई की व्यवस्थाएं हैं।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि हर सेक्टर में दूसरे देशों पर निर्भरता कम से कम हो। हम ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर हों, यही एकमात्र विकल्प है। जैसे भारत का 90% से अधिक तेल विदेशी जहाजों पर होता है, यह स्थिति किसी भी वैश्विक संकट में भारत की स्थिति को और भी गंभीर बना देती है। इसलिए सरकार ने मेड इन इंडिया जहाज बनाने के लिए करीब 70000 करोड़ रुपए का अभियान शुरू किया है। भारत आज शिप बिल्डिंग, शिप ब्रेकिंग, मेंटेनेंस एंड ओवरहालिंग, ऐसी हर सुविधा का निर्माण पर तेज गति से कम कर रहा है।
उन्होंने आगे कहा, “भारत अपने डिफेंस सेक्टर को भी अधिक रेसिलियंट बना रहा है। बीते दशक में किए गए प्रयासों से भारत आज अपनी जरूरत के अधिकांश हथियार भारत में ही बना रहा है। एक समय था, जब भारत अपने जीवन रक्षक दावों के कच्चे माल यानी API के लिए भी दूसरे देशों पर बहुत अधिक निर्भर था। बीते वर्षों में देश ने भारत में ही API इकोसिस्टम बनाने के लिए अनेक प्रयास किए हैंं। इसी प्रकार रेयर अर्थ मिनिरल्स में विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।”
पीएम मोदी ने कहा कि जैसा कि हम देख रहे हैं, इस युद्ध को लेकर पल-पल में हालात बदल रहे हैं। इसलिए मैं देशवासियों से भी कहूंगा कि हमें हर चुनौती के लिए तैयार रहना ही होगा। इस युद्ध के दुष्प्रभावों के लंबे समय तक रहने की प्रबल आशंका है। लेकिन मैं देशवासियों को भरोसा देता हूं, सरकार सतर्क है, तत्पर है और पूरी गंभीरता से रणनीति बना रही है, हर निर्णय ले रही है। देश की जनता का हित हमारे लिए सर्वोपरि है। यही हमारी पहचान है, यही हमारी ताकत है।
 

दिल्ली बजट 2026: इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा समेत हर क्षेत्र को मिला जोरदार बूस्ट

24-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) दिल्ली सरकार ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1,03,700 करोड़ रुपए का बजट पेश किया। बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि दिल्ली के हर नागरिक के बेहतर जीवन का रोडमैप है। इस बजट में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने पर खास जोर दिया गया है, जिसके तहत कुल बजट का 21 प्रतिशत हिस्सा ‘ग्रीन बजट’ के रूप में रखा गया है। 
सरकार के अनुसार, दिल्ली की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। 2024-25 में दिल्ली का जीएसडीपी 12.13 लाख करोड़ रुपए रहा, जो 2025-26 में बढ़कर 13.27 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है। सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए पीडब्ल्यूडी को 5,921 करोड़ रुपए और शहरी विकास विभाग को 7,887 करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव रखा है। यमुनापार के विकास के लिए 300 करोड़ रुपए, अनधिकृत कॉलोनियों के विकास के लिए 800 करोड़ रुपए और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 787 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
750 किमी सड़कों के पुनर्विकास, नए फ्लाईओवर, अंडरपास और 25 करोड़ की लागत से फुटओवर ब्रिज बनाए जाएंगे। बारापुला कॉरिडोर जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पावर सेक्टर के लिए 3,942 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली लाइनों को भूमिगत करने पर जोर रहेगा। रेखा गुप्ता ने कहा कि जल और सीवर व्यवस्था के लिए 9,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। एसटीपी क्षमता को 707 एमजीडी से बढ़ाकर 814 एमजीडी किया गया है और लक्ष्य 1,500 एमजीडी तक पहुंचाने का है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 12,645 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। कई अधूरे अस्पताल पूरे किए जाएंगे और आईसीयू सुविधाओं के विस्तार के लिए 150 करोड़ रुपए दिए गए हैं। आयुष्मान योजना का दायरा 7.5 लाख लोगों तक बढ़ाया गया है। 750 नए आरोग्य मंदिर खोले जाएंगे। नवजात बच्चों के लिए ‘अनमोल’ योजना शुरू होगी, जिसमें 56 तरह की जांच मुफ्त होगी।
रेखा गुप्ता ने कहा कि शिक्षा के लिए 19,148 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। 8,777 स्मार्ट क्लासरूम बनाए जाएंगे और छात्राओं को मुफ्त साइकिल दी जाएगी। मेधावी छात्रों को लैपटॉप भी दिए जाएंगे। नई आईटीआई, एडुसिटी, और खेल विश्वविद्यालय जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी प्रस्तावित हैं। महिला एवं बाल विकास के लिए 7,406 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, मुफ्त गैस सिलेंडर और ‘लखपति बिटिया योजना’ जैसी योजनाएं लागू रहेंगी। इसके अलावा, 50,000 नए सीसीटीवी कैमरे और 11 नए वन स्टॉप सेंटर बनाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन के लिए 8,374 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। 2027 तक 7,500 बसें, जिनमें 5,800 इलेक्ट्रिक होंगी, सड़कों पर उतारी जाएंगी। 2029 तक 12,000 ई-बसों का लक्ष्य है। दिल्ली मेट्रो और नमो भारत कॉरिडोर पर भी निवेश बढ़ाया गया है। एमएसएमई सेक्टर के लिए नई योजनाएं लाई जाएंगी। 32,000 एमएसएमई को ट्रेनिंग और 15,000 को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। सरकार नई वेयरहाउसिंग, सेमीकंडक्टर और ड्रोन पॉलिसी भी लाने जा रही है।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि पर्यटन बजट को 121 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 412 करोड़ रुपए कर दिया गया है। दिल्ली में पहली बार इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा और शहर के सौंदर्यीकरण पर 300 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पर्यावरण के लिए 822 करोड़ रुपए का प्रावधान है। प्रदूषण नियंत्रण, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और कार्बन क्रेडिट योजना पर काम होगा। कचरा निपटान क्षमता को 7,000 से बढ़ाकर 15,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।
 

भारत में निर्वाचित सरकार के प्रमुख के रूप में पीएम मोदी के नाम दर्ज हुई ऐतिहासिक उपलब्धि

22-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग को पीछे छोड़ते हुए भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने का रिकॉर्ड बना लिया है। पवन कुमार चामलिंग ने 8,930 दिनों तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यकाल को मिलाकर 8,931 दिन पूरे कर लिए हैं। यह एक दुर्लभ और उल्लेखनीय उपलब्धि है, जो दशकों की निरंतर सार्वजनिक सेवा और नेतृत्व को दर्शाती है।
उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी ने अपनी मुख्यमंत्री काल के दौरान भी गुजरात के सबसे लंबे समय तक सीएम बने रहने का रिकॉर्ड बनाया था। वे मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लंबा अनुभव रखने वाले प्रधानमंत्री हैं। इसके साथ ही देश की आजादी के बाद लगातार तीन लोकसभा चुनाव (2014, 2019 और 2024) जीतने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। यह उपलब्धि दृढ़ता, अनुभव और निरंतर जनसमर्थन को रेखांकित करती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को वडनगर, गुजरात में हुआ था। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 1985 में भाजपा में शामिल होकर उन्होंने पार्टी संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय योगदान दिया। नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। वह गुजरात के चार बार मुख्यमंत्री रहे। 2001, 2002, 2007 और 2012 विधानसभा चुनावों के बाद गुजरात सरकार का नेतृत्व किया। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल 22 मई 2014 तक रहा। लगभग 12 वर्ष और 7 महीने तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे।
नरेंद्र मोदी भारत के 14वें और वर्तमान प्रधानमंत्री हैं, जो 26 मई 2014 से लगातार पद पर बने हुए हैं। जून 2024 में उन्होंने तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। वे लगातार तीसरी बार जीतने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने 4,000 से अधिक दिनों तक पद पर रहकर सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्रियों में अपना स्थान बनाया है।

विधानसभा चुनाव 2026 के लिए ईसीआई ने सभी मतदान केंद्रों पर न्यूनतम सुविधाओं और मतदाता सहायता को अनिवार्य करने की घोषणा की

22-Mar-2026
नई दिल्ली।   ( शोर संदेश )  भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने चुनावी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश दिए हैं कि 2,18,807 मतदान केंद्रों पर सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाएं (एएमएफ) और मतदाता सहायता की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए। ईसीआई ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के आम चुनावों व 6 राज्यों में उपचुनाव की तारीखों की घोषणा की थी।
आयोग के अनुसार, सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाओं में पीने का पानी, वेटिंग एरिया, टॉयलेट, रोशनी, दिव्यांग वोटरों के लिए सही ढलान वाला रैंप, एक स्टैंडर्ड वोटिंग कम्पार्टमेंट और सही साइनेज शामिल हैं। राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से यह भी कहा गया है कि वे कतार में खड़े मतदाताओं के लिए नियमित अंतराल पर बैठने की व्यवस्था (बेंच) करें, ताकि वोटर अपनी बारी का इंतजार करते हुए बैठ सकें।
ईसीआई ने रविवार को जानकारी दी कि मतदाता जागरूकता बढ़ाने के लिए सभी पोलिंग स्टेशनों पर चार यूनिफॉर्म और स्टैंडर्ड वोटर फैसिलिटेशन पोस्टर (वीएफपी) लगाए जाएंगे। इनमें मतदान केंद्र का विवरण, उम्मीदवारों की सूची, क्या करें और क्या न करें, मान्य पहचान पत्रों की सूची व मतदान प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
चुनाव आयोग के अनुसार, हर मतदान केंद्र परिसर में वोटर असिस्टेंस बूथ (वीएबी) स्थापित किए जाएंगे, जहां बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) या अन्य कर्मचारी मतदाताओं को उनके मतदान केंद्र और मतदाता सूची में क्रम संख्या ढूंढने में सहायता करेंगे। ये बूथ स्पष्ट संकेतों के साथ आसानी से दिखाई देंगे।
चुनाव आयोग ने बताया कि मतदाताओं की सुविधा के लिए एक और पहल के तहत मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार के बाहर मोबाइल फोन जमा करने की सुविधा भी दी जाएगी। मतदाता अपना स्विच ऑफ किया हुआ मोबाइल एक निर्धारित वॉलंटियर के पास जमा कर सकेंगे और मतदान के बाद वापस ले सकेंगे।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि एएमएफ और अन्य उपायों का प्रावधान अनिवार्य है और सभी मतदान केंद्रों पर इसकी सख्ती से निगरानी की जाएगी। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मतदान तिथियों से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि मतदाताओं को सहज और सुखद मतदान का अनुभव मिल सके।
 

जामा मस्जिद में लोगों ने अदा की ईद-उल-फितर की नमाज, देश में अमन और भाईचारे की मांगी दुआ

21-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  ईद-उल-फितर के मौके पर शनिवार को जामा मस्जिद में काफी बड़ी तादाद में लोग इकट्ठा हुए और सबने मिलकर ईद की नमाज अदा की। सभी लोगों ने नमाज अदा करने के बाद एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।  
एक स्थानीय ने समाचार एजेंसी से बातचीत में बताया कि एक महीने के रोजे रखने के बाद ईद का दिन आता है, इसलिए इसका इंतजार हर किसी को रहता है। ये दिन अल्लाह की तरफ से एक खास इनाम होता है। पूरे महीने सब्र, इबादत और खुदा की बंदगी करने के बाद ये खुशी का दिन नसीब होता है। यही वजह है कि लोग इसे बहुत प्यार और इज्जत के साथ मनाते हैं।
उन्होंने कहा कि ईद का असली पैगाम मोहब्बत फैलाना है। सिर्फ अपने लिए खुश होना नहीं, बल्कि उन लोगों को भी खुशी देना है जो किसी वजह से खुशी नहीं मना पाते, जैसे गरीब लोग या जरूरतमंद लोग। उनकी मदद करना, उनके साथ बैठना, उन्हें भी अपने साथ शामिल करना यही असली ईद है। उन्होंने कहा कि हम सबको मिलजुल कर रहना चाहिए और समाज में प्यार और भाईचारा बढ़ाना चाहिए।
स्थानीय ने बताया कि आज के दिन सुरक्षा का भी खास ध्यान रखा गया है। पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है ताकि कोई दिक्कत न हो और लोग आराम से अपनी नमाज अदा कर सकें। खुशी की बात ये रही कि सब कुछ बहुत शांति और अच्छे तरीके से हो रहा है। कहीं कोई झगड़ा या परेशानी नहीं हुई, जिससे लोग और भी सुकून से अपनी ईद मना पा रहे हैं।
उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें अपने देश पर गर्व है, जहां सालों से गंगा-जमुनी तहजीब चली आ रही है। यहां अलग-अलग धर्मों के लोग मिलजुल कर रहते हैं और एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं। ईद के मौके पर भी हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सब एक-दूसरे को बधाई देते नजर आते हैं, जो इस देश की खूबसूरती को दिखाता है।
स्थानीय ने बताया कि नमाज के बाद लोगों ने अल्लाह का शुक्र अदा किया कि उन्होंने उन्हें रोजे रखने की ताकत दी और आज ईद की नमाज अदा करने का मौका दिया। कई लोगों ने कहा कि इंशाल्लाह अगले साल भी वो पूरे तीस रोजे रखेंगे। मौसम भी आज बहुत अच्छा था, जिससे माहौल और भी खुशनुमा हो गया। 





 

होर्मुज स्ट्रेट बंद करने पर 20 देशों ने जताई नाराजगी, ईरान से हमले रोकने की अपील

21-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) होर्मुज स्ट्रेट इलाके में हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। कई देशों ने मिडिल ईस्ट में ईरान की ओर से की जा रही कार्रवाई की घोर निंदा की और होर्मुज स्ट्रेट बंद करने को लेकर नाराजगी भी जाहिर की है। इसके साथ ही सभी देशों ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान से हमले रोकने की अपील की।
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, लातविया, स्लोवेनिया, एस्टोनिया, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, चेकिया, रोमानिया, बहरीन और लिथुआनिया के नेताओं ने होर्मुज स्ट्रेट में हालात को लेकर संयुक्त बयान जारी किया है।
संयुक्त बयान में कहा गया, “हम खाड़ी में बिना हथियार वाले कमर्शियल जहाजों पर ईरान के हालिया हमलों, तेल और गैस इंस्टॉलेशन समेत सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों और ईरानी सेना द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को असल में बंद करने की कड़ी निंदा करते हैं। हम बढ़ते संघर्ष पर अपनी गहरी चिंता जताते हैं। हम ईरान से अपील करते हैं कि वह कमर्शियल शिपिंग के लिए स्ट्रेट को रोकने की अपनी धमकियों, माइन बिछाने, ड्रोन और मिसाइल हमलों और दूसरी कोशिशों को तुरंत बंद करे और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करे।”
बयान में आगे कहा गया कि नेविगेशन की आजादी अंतरराष्ट्रीय कानून का एक बुनियादी सिद्धांत है, जिसमें यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी भी शामिल है।
ईरान की हरकतों का असर दुनिया के सभी हिस्सों के लोगों, खासकर सबसे कमजोर लोगों पर पड़ेगा। यूएनएससी प्रस्ताव 2817 के मुताबिक, हम इस बात पर जोर देते हैं कि इंटरनेशनल शिपिंग में इस तरह की दखलअंदाजी और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन में रुकावट अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है। इस बारे में हम तेल और गैस इंस्टॉलेशन समेत सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों पर तुरंत पूरी रोक लगाने की अपील करते हैं।
सभी देशों ने होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता निकालने की कोशिशों का आह्वान किया और कहा, “हम स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने के लिए सही कोशिशों में मदद करने के लिए तैयार हैं। हम उन देशों की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं जो तैयारी की योजना कर रहे हैं। हम स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को सहयोग के साथ रिलीज करने की मंजूरी देने के अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के फैसले का स्वागत करते हैं। हम एनर्जी मार्केट को स्थिर करने के लिए दूसरे कदम उठाएंगे, जिसमें कुछ प्रोड्यूस करने वाले देशों के साथ मिलकर आउटपुट बढ़ाना शामिल है।”
उन्होंने कहा, “हम संयुक्त राष्ट्र और आईएफआईएस के जरिए सबसे ज्यादा प्रभावित देशों को मदद देने के लिए भी काम करेंगे। समुद्री सुरक्षा और नेविगेशन की आजादी से सभी देशों को फायदा होता है। हम सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय खुशहाली और सुरक्षा के बुनियादी सिद्धांतों को बनाए रखने की अपील करते हैं।

 

असम, केरल और पुडुचेरी में ईवीएम-वीवीपैट का पहला रैंडमाइजेशन पूरा हुआ : चुनाव आयोग

21-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) चुनाव आयोग ने शनिवार को जानकारी दी कि असम, केरल और पुडुचेरी में पहला रैंडमाइजेशन पूरा हो गया है। आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव व 6 राज्यों में उपचुनावों का कार्यक्रम 15 मार्च को घोषित किया था।
ईवीएम को दो चरणों वाली रैंडमाइजेशन प्रक्रिया के माध्यम से उनके संबंधित मतदान केंद्रों को आवंटित किया जाता है। पहले चरण में जिला स्तर के गोदामों से विधानसभा क्षेत्रों को ईवीएम का रैंडम आवंटन किया जाता है जबकि दूसरे चरण में एसी स्तर से मतदान केंद्र स्तर तक ईवीएम का रैंडम आवंटन किया जाता है।
चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, सभी चुनाव वाले राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) पास कर चुकी ईवीएम-वीवीपैट मशीनों का पहला रैंडमाइजेशन पूरा करना होगा। असम, केरल और पुडुचेरी के आम चुनाव के साथ ही गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा में होने वाले उपचुनावों के लिए ईवीएम का पहला रैंडमाइजेशन पूरा कर लिया गया है।
पहला रैंडमाइजेशन राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में डीईओ की ओर से ईवीएम प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) के माध्यम से किया गया। निर्वाचन क्षेत्रवार रैंडमाइजेशन से चयनित ईवीएम और वीवीपैट की सूचियां सभी राष्ट्रीय और राज्य मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ उनके संबंधित जिला मुख्यालयों पर साझा की गई हैं।
इन ईवीएम और वीवीपैट को संबंधित विधानसभा के स्ट्रांग रूम में राष्ट्रीय और राज्य मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सुरक्षित रखा जाएगा। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के बाद, पहली और दूसरी रैंडमाइजेशन से चयनित ईवीएम और वीवीपैट की सूची भी सभी चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के साथ साझा की जाएगी।
 

पाक हमलों के कारण 1 लाख से अधिक अफगानी बेघर : एनआरसी की रिपोर्ट

21-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) अंतर्राष्ट्रीय मानवीय राहत एजेंसी नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल (एनआरसी) की रिपोर्ट दावा करती है कि तालिबान-पाकिस्तान के बीच लड़ाई के कारण 1,15,000 (एक लाख 15 हजार) से अधिक अफगानी बेघर हो गए हैं।
अफगानिस्तान में एनआरसी के निदेशक जैकोपो कैरीडी ने कहा, “जिन परिवारों को अपना अस्तित्व खतरे में लग रहा था, उन्हें अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। हजारों लोगों ने कामचलाऊ कैंपों और स्थानीय परिवारों की दया पर पनाह ली है। कइयों को घटिया घर किराए पर लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिसका खर्च उठाना भी मुश्किल है। उन्हें साफ पानी, हेल्थ सर्विस और बच्चों को स्कूली शिक्षा तक नहीं मिल पा रही है।”
एनआरसी के मुताबिक, फरवरी में अफगानिस्तान के कुनार और नंगरहार प्रांतों में पाकिस्तानी हमले शुरू होने के बाद से, 76 अफगान आम लोग मारे गए हैं और 213 घायल हुए हैं।
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक ड्रग रिहैबिलिटेशन हॉस्पिटल पर 16 मार्च को हुए पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक (जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे) को हाईलाइट करते हुए, मानवीय सहायता पहुंचाने वाली एजेंसी ने कहा कि शहरी इलाकों में बढ़ते हमले लड़ाई में बढ़ोतरी का इशारा करते हैं। एनआरसी ने कहा कि अफगानिस्तान में अब तक करीब 800 घरों को नुकसान पहुंचा है, और परिवारों को इस नुकसान से उबरने में वर्षों लग सकते हैं।
कैरीडी ने कहा, “यह बहुत जरूरी है कि लड़ाई में शामिल लोग अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करें। आम लोगों के इंफ्रास्ट्रक्चर को कभी भी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।”
वहीं, अपनी तकलीफ बताते हुए, 65 साल के अफगान नागरिक बख्तियार ने कहा कि भारी गोलाबारी के बाद उन्हें छह बच्चों के साथ पाकिस्तान बॉर्डर के पास तोरखम में अपने घर से भागने पर मजबूर होना पड़ा। एनआरसी ने बख्तियार के हवाले से कहा, “रात के करीब 10 बज रहे थे जब हमने अचानक रॉकेट और गोलियों की आवाज सुनी। कुछ ही मिनटों में, हमले बहुत तेज हो गए। हमारे पास भागने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था।”
एजेंसी ने बताया कि मदद के लिए फंडिंग में कटौती से अफगानिस्तान पर बहुत बुरा असर पड़ा है और यह दुनिया भर में सबसे कम फंड पाने वाले मानवीय मदद में से एक बना हुआ है, लड़ाई की वजह से अब लोगों को जो थोड़ी मदद मिल रही है, वह भी नहीं मिल पा रही है।
कैरीडी ने कहा, “दुनिया में उथल-पुथल के बीच, अफगानों की चिंता की जानी चाहिए; उन्हें भूलना नहीं चाहिए। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें और बंद बॉर्डर उन परिवारों के लिए मुश्किलें और ज्यादा खड़ी कर रहे हैं, जिनकी जिंदगी पहले ही लड़ाई की वजह से बर्बाद हो चुकी है।”
अफगानिस्तान ने 21 फरवरी को अफगान इलाके में पाकिस्तानी कार्रवाई के बाद 27 फरवरी को पाकिस्तानी मिलिट्री ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई शुरू की थी।
इससे पहले बुधवार को, अफगानिस्तान ने कहा कि वह सऊदी अरब, कतर और तुर्की जैसे बीच-बचाव करने वाले देशों के कहने पर ईद के लिए अपने ‘राद अल-ज़ुल्म’ डिफेंसिव ऑपरेशन रोक देगा।
पाकिस्तान ने भी ईद के लिए मिलिट्री ऑपरेशन में कुछ समय के लिए रोक लगाने का ऐलान किया, जिसमें इन्फॉर्मेशन मिनिस्टर अताउल्लाह तरार ने कहा कि यह फैसला इलाके के बीच-बचाव करने वालों के कहने पर लिया गया था।
हालांकि अफगानिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान ने सीजफायरOver 100,000 Afghans Rendered Homeless Due to Pakistani Attacks: NRC Report
का मान नहीं रखा। शुक्रवार को सशस्त्र बलों के प्रमुख फसीहुद्दीन फितरत ने दावा किया कि पाक सेना ने डूरंड लाइन के पास सीज फायर नियमों का उल्लंघन किया।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, बॉर्डर इलाकों में पाकिस्तानी सेना के हमलों में कई लोग मारे गए। फितरत ने कहा कि सीजफायर के बावजूद पाकिस्तान के लगातार हमले इस्लामाबाद की तरफ से “कमिटमेंट की कमी और धोखे को दिखाते हैं।” 

2014-15 से रेल दुर्घटनाओं में 90 प्रतिशत की गिरावट आई: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव

20-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद को बताया कि भारतीय रेल से जुड़ी दुर्घटनाओं की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में भारी गिरावट आई है, और गंभीर दुर्घटनाओं में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है। बुधवार को लोकसभा में लिखित जवाब में मंत्री ने कहा कि भारतीय रेल के लिए सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है, और निरंतर उपायों से परिचालन सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि गंभीर रेल दुर्घटनाओं की संख्या 2014-15 में 135 से घटकर 2025-26 (28 फरवरी तक) में मात्र 14 रह गई है।
मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों से पता चला कि 2004-05 से 2013-14 के दौरान 1,711 गंभीर रेल दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 904 लोगों की मौत हुई और 3,155 लोग घायल हुए। 2014-15 से 2023-24 के बीच यह संख्या घटकर 678 दुर्घटनाएं रह गई, जिनमें 748 लोगों की मौत हुई और 2,087 लोग घायल हुए।
उनके अनुसार, 2024-25 में ऐसी 31 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और 92 लोग घायल हुए, जबकि 2025-26 (फरवरी तक) में 14 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 16 लोगों की मौत हुई और 28 लोग घायल हुए।
वैष्णव ने यह भी बताया कि दुर्घटनाओं में कमी कई सुरक्षा पहलों का परिणाम है, जिनमें बेहतर ट्रैक रखरखाव, आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम और तकनीकी उन्नयन शामिल हैं। सुरक्षा संबंधी गतिविधियों पर व्यय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2013-14 में 39,200 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 1,17,693 करोड़ रुपए हो गया है, और 2026-27 के लिए 1,20,389 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन किया गया है।
मानवीय त्रुटि को कम करने के लिए, 6,665 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जबकि 10,153 से अधिक लेवल क्रॉसिंग गेटों पर इंटरलॉकिंग की व्यवस्था की गई है। 6,669 स्टेशनों पर ट्रैक सर्किटिंग लागू की गई है, जो विद्युत माध्यम से ट्रैक पर यात्रियों की उपस्थिति की पुष्टि करने में सहायक है।
रेल मंत्री ने यह भी बताया कि स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (एटीपी) ‘कवच’ को 2020 में राष्ट्रीय प्रणाली के रूप में अपनाया गया था। कवच के नवीनतम संस्करण को 1,452 किलोमीटर मार्गों पर लागू किया गया है, जिसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे प्रमुख व्यस्त मार्ग शामिल हैं। रेल मंत्री वैष्णव ने कहा कि प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश से भारतीय रेलवे को सुरक्षा बढ़ाने और दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिल रही है।


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