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कतर ने रास लफान औद्योगिक शहर पर हुए मिसाइल हमलों से नुकसान की जानकारी दी

20-Mar-2026
नई दिल्ली।   ( शोर संदेश ) ईरान की ओर से रास लफ्फान औद्योगिक शहर पर किए गए हमले के नुकसान के बारे में कतर ने जानकारी दी। कतर के मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने बताया कि मिसाइल हमलों के कारण कतर की एलएनजी निर्यात क्षमता में 17 प्रतिशत की कमी आई और वार्षिक राजस्व में लगभग 20 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने बताया कि हमारी उत्पादन फैसिलिटी को भारी नुकसान हुआ है। जिसकी मरम्मत में पांच साल तक का समय लगेगा और इसके चलते हमें दीर्घकालिक फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ेगा।
कतर एनर्जी का अनुमान है कि बुधवार 18 मार्च 2026 और गुरुवार 19 मार्च 2026 की सुबह हुए मिसाइल हमलों के कारण उसके रास लफान औद्योगिक शहर को हुए नुकसान से सालाना लगभग 20 अरब डॉलर का राजस्व नुकसान होगा और मरम्मत में पांच साल तक का समय लगेगा, जिससे यूरोप और एशिया के बाजारों में आपूर्ति प्रभावित होगी।
रास लफान औद्योगिक शहर में उत्पादन केंद्रों को हुए नुकसान के बारे में जानकारी देते हुए, ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री, कतर एनर्जी के अध्यक्ष और सीईओ, साद शेरिदा अल-काबी ने कहा कि मुझे यह पुष्टि करते हुए राहत मिली है कि इन अनुचित और संवेदनहीन हमलों में कोई भी घायल नहीं हुआ। ये हमले न केवल कतर राज्य पर, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता पर भी थे। यह हम सभी पर हमला था जो विकास और मानवीय प्रगति के लिए खड़े हैं, जो ऊर्जा तक निष्पक्ष, विश्वसनीय और सुरक्षित पहुंच पर आधारित है।
इन हमलों में द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) उत्पादन करने वाली छह ट्रेनें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) है, जो कतर के निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत है। ट्रेन 4 कतर एनर्जी (66 प्रतिशत) और एक्सॉनमोबिल (34 प्रतिशत) का संयुक्त उद्यम है, और ट्रेन 6 कतर एनर्जी (70 प्रतिशत) और एक्सॉनमोबिल (30 प्रतिशत) का संयुक्त उद्यम है।
अल-काबी ने कहा कि एलएनजी संयंत्रों को हुए नुकसान की मरम्मत में तीन से पांच साल लगेंगे। इसका असर चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम पर पड़ रहा है। इसका मतलब है कि हमें कुछ दीर्घकालिक एलएनजी अनुबंधों पर पांच साल तक के लिए फोर्स मेज्योर घोषित करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
हमलों में शेल की ओर से संचालित उत्पादन-साझाकरण समझौते के तहत संचालित पर्ल जीटीएल (गैस-टू-लिक्विड्स) संयंत्र को भी निशाना बनाया गया, जो प्राकृतिक गैस को उच्च गुणवत्ता वाले स्वच्छ ईंधन में बदलता है और प्रीमियम इंजन तेल और स्नेहक, साथ ही पैराफिन और मोम बनाने में उपयोग होने वाले बेस ऑयल का उत्पादन करता है।
अल-काबी ने आगे कहा कि पर्ल जीटीएल के दो संयंत्रों में से एक को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और इसके कम से कम एक साल तक बंद रहने की उम्मीद है।
कतर ने बताया कि 18.6 मिलियन बैरल कंडेनसेट की हानि होगी। यह कतर के निर्यात का लगभग 24 प्रतिशत है। 1.281 मीट्रिक टन एलपीजी की हानि होगी। यह कतर के निर्यात का लगभग 13 प्रतिशत है। 0.594 मीट्रिक टन नेफ्था की हानि होगी। यह कतर के निर्यात का लगभग छह प्रतिशत है। 0.18 मीट्रिक टन सल्फर का नुकसान होगा। यह कतर के निर्यात का लगभग छह प्रतिशत है और 309.54 एमसीएफए हीलियम का नुकसान होगा। यह कतर के निर्यात का लगभग 14 प्रतिशत है।
ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री, कतर एनर्जी के अध्यक्ष और सीईओ ने कतर की सैन्य और सुरक्षा बलों और ऊर्जा क्षेत्र की आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके साहस और असाधारण व्यावसायिकता ने यह सुनिश्चित किया कि स्थिति को जल्दी और सुरक्षित रूप से नियंत्रित किया जा सके।
 

भारत से पड़ोसी देशों ने किया अनुरोध, घरेलू आपूर्ति और क्षमता को संतुल‍ित रखते हुए भारत कर रहा पड़ोसी देशों की मदद

20-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )भारत ने गुरुवार को कहा कि वह ऊर्जा आपूर्ति आवश्यकताओं के मुद्दे पर बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों की सहायता कर रहा है, साथ ही घरेलू जरूरतों, रिफाइनिंग क्षमता और डीजल की उपलब्धता के बीच संतुलन भी बनाए रखे हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए दोहराया कि नई दिल्ली को बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और अन्य पड़ोसी देशों से ऊर्जा संबंधी अनुरोध प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने बताया कि भारत 2007 से बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति कर रहा है। साथ ही दूसरे पड़ोसी देशों की भी लगातार मदद कर रहा है। रणधीर जायसवाल ने कहा, “ऊर्जा के संबंध में हमें कई पड़ोसी देशों से अनुरोध प्राप्त हुए हैं। मैंने पहले भी इस बारे में बात की थी। हमें बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और कुछ अन्य पड़ोसी देशों से अनुरोध मिले हैं। जैसा कि मैंने पहले संकेत दिया था, भारत 2007 से विभिन्न माध्यमों से बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति कर रहा है। हम वर्तमान में भी बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों की सहायता जारी रखे हुए हैं। यह कार्य हमारी अपनी आवश्यकताओं, रिफाइनिंग क्षमता और डीजल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।”
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा शिपिंग मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे एलपीजी (एलपीजी) की आपूर्ति चिंता का विषय बनी हुई है। जायसवाल ने कहा, “हम सबसे पहले घरेलू खपत और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनकी जरूरतों का ध्यान रखा जाएगा, और उसके बाद हम यह तय करेंगे कि वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए एलपीजी आपूर्ति कैसे की जाए। हालांकि, आपूर्ति की कमी के कारण यह अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है।”
पिछले सप्ताह, एक प्रमुख रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक के रूप में भारत की भूमिका को रेखांकित करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत सरकार को बांग्लादेश से डीजल आपूर्ति का अनुरोध प्राप्त हुआ है, जिसकी समीक्षा की जा रही है। मंत्रालय ने कहा था, “भारत अपने पड़ोसियों के लिए विशेष रूप से रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक है। बांग्लादेश के साथ हमारे संबंधों में लोगों को केंद्र में रखने और विकास-उन्मुख दृष्टिकोण को देखते हुए, हम 2007 से ही नुमालीगढ़ रिफाइनरी से अलग-अलग तरीकों से डीजल की सप्लाई कर रहे हैं, जिनमें जलमार्ग, रेल और बाद में भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन शामिल हैं।”
उन्होंने आगे कहा था, “अक्टूबर 2017 में नुमालीगढ़ रिफाइनरी और बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के बीच आपसी सहमति से तय शर्तों पर हाई-स्पीड डीजल की सप्लाई के लिए एक खरीद-बिक्री समझौता साइन किया गया था। यह बताना जरूरी है कि जहां 2017 से बांग्लादेश को डीजल का एक्सपोर्ट काफी हद तक जारी रहा है, वहीं फैसले लेते समय भारत की रिफाइनिंग क्षमता, हमारी अपनी जरूरतों और डीजल की उपलब्धता को भी ध्यान में रखा जाएगा।”
सरकार ने बार-बार कहा है कि उसे कई अन्य देशों से भी ऐसे अनुरोध प्राप्त हुए हैं, जिनकी जांच भारत की घरेलू ऊर्जा आवश्यकताओं और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।

पीएम मोदी ने जॉर्डन के शाह और क़तर के अमीर से बात की, पश्चिम एशिया में बातचीत और कूटनीति की ज़रूरत पर बल

20-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जॉर्डन के शाह किंग अब्दुल्ला द्वितीय और क़तर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ फ़ोन पर बातचीत की। बातचीत के दौरान, ईद की शुभकामनाएं दीं तथा पश्चिम एशिया में बदलती सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री कार्यालय (सेवा तीर्थ) ने गुरुवार को एक बयान जारी कर बताया कि पीएम मोदी किंग अब्दुल्ला द्वितीय से बात की और उन्हें ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं हैं। कल बातचीत के दौरान, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर चिंता प्रकट की। उन्होंने इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए बातचीत और कूटनीति की ज़रूरत पर बल दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले निंदनीय हैं और इनसे हालात और बिगड़ सकते हैं, जिन्हें टाला जा सकता है। उन्होंने दोहराया कि भारत और जॉर्डन, बिना किसी रुकावट के सामान और ऊर्जा के आवागमन का समर्थन करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी में सहायता करने के लिए जॉर्डन के प्रयासों की भी दिल से सराहना की।
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “अपने भाई, जॉर्डन के शाह महामहिम किंग अब्दुल्ला द्वितीय को फ़ोन पर ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। हमने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर चिंता प्रकट की और इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए बातचीत और कूटनीति की ज़रूरत पर बल दिया। पश्चिम एशिया में ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले निंदनीय हैं और इनसे हालात और बिगड़ सकते हैं, जिन्हें टाला जा सकता है। भारत और जॉर्डन, बिना किसी रुकावट के सामान और ऊर्जा के आवागमन का समर्थन करते हैं। इस क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी में सहायता करने के लिए जॉर्डन के प्रयासों की दिल से सराहना की।”
प्रधानमंत्री मोदी ने क़तर के अमीर, शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ भी बात की और उन्हें ईद की हार्दिक शुभकामनाएं दी तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने शेख तमीम बिन हमद अल थानी से चर्चा के दौरान कतर के साथ भारत की एकजुटता को दोहराया और क्षेत्र के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की।
पीएम मोदी ने कतर में भारतीय समुदाय को दी गई देखभाल और सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया तथा क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम रहने की आशा व्यक्त की। दोनों नेताओं ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
इसके साथ ही पीएम मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस से ओमान के सुल्तान, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों और मलेशिया के पीएम से पश्चिम एशिया संकट की गंभीर स्थिति पर चर्चा की और इसकी जानकारी सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर साझा की है। 
 

अयोध्या में राष्ट्रपति मुर्मु: राम मंदिर में करेंगी ‘श्री राम यंत्र’ की स्थापना

19-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु गुरुवार को अयोध्या का दौरा करेंगी। वे राम जन्मभूमि मंदिर में आयोजित कई धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। इसको लेकर प्रशासन की ओर से बड़े स्तर पर तैयारियां और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम पहले ही पूरे कर लिए गए हैं।
अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मंदिर परिसर की दूसरी मंजिल पर ‘श्री राम यंत्र’ और ‘श्री राम नाम मंदिर’ की स्थापना करेंगी। इस अवसर पर एक भव्य वैदिक अनुष्ठान का आयोजन भी किया जाएगा। यह अनुष्ठान दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के 51 वैदिक विद्वानों द्वारा पुजारी गणेश्वर शास्त्री के मार्गदर्शन में संपन्न कराया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु उन करीब 400 कार्यकर्ताओं को सम्मानित करेंगी, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके अलावा, वे मंदिर परिसर के बाहरी हिस्से ‘परकोटा’ में स्थित एक मंदिर पर ध्वजारोहण भी करेंगी।
अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति का काफिला सुबह करीब 11 बजे मंदिर परिसर पहुंचेगा और वे वहां लगभग चार घंटे तक रुकेंगी। इस दौरान वे विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगी।
इस कार्यक्रम में कई धार्मिक और सामाजिक नेताओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजन के लिए करीब 5,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। इनके लिए सुरक्षा, बैठने की व्यवस्था, परिवहन और आवास की व्यापक तैयारियां की गई हैं।
राष्ट्रपति की यात्रा से पहले अयोध्या शहर को भव्य रूप से सजाया गया है। मंदिर की ओर जाने वाली सड़कों पर भगवा झंडे और आकर्षक बैनर लगाए गए हैं। बुधवार को शहर के विभिन्न हिस्सों में ऐसे बैनर लगाए गए, जिन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें देखी गईं।
तैयारियों को लेकर अयोध्या के जिलाधिकारी निखिल टिकाराम फुंडे ने बताया कि कार्यक्रम को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर ने कहा कि सुरक्षा को लेकर विस्तृत योजना तैयार की गई है और हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया है।
प्रशासन के अनुसार, राष्ट्रपति की यात्रा के दिन ‘वीआईपी दर्शन’ बंद रहेंगे। हालांकि आम श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति रहेगी, लेकिन उस समय दर्शन रोके जाएंगे जब राष्ट्रपति स्वयं मंदिर परिसर में मौजूद होंगी। अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया है कि आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।









 

नववर्ष पर्वों पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की शुभकामनाएं

19-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) देशभर में नववर्ष और आस्था के विभिन्न पर्वों का उल्लास एक साथ देखने को मिल रहा है। गुरुवार को चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुड़ी पड़वा, चेती चांद, नवरेह और साजिबु चेरोबा जैसे पर्व मनाए जा रहे हैं। इस अवसर पर द्रौपदी मुर्मु और सीपी राधाकृष्णन ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि ये सभी पर्व भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता के प्रतीक हैं। उन्होंने कामना की कि ये त्योहार सभी के जीवन में समृद्धि और नई आशाओं का संचार करें।
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में मनाए जाने वाले ये उत्सव नववर्ष के आगमन का स्वागत करते हैं और ‘विविधता में एकता’ की भावना को मजबूत करते हैं।
सीपी राधाकृष्णन ने भी नव संवत्सर, चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुड़ी पड़वा, चेती चांद, नवरेह, साजिबु चेरोबा और चैत्र नवरात्रि के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये पर्व नई शुरुआत, नवीनीकरण और वसंत ऋतु के आगमन के प्रतीक हैं।
उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि ये उत्सव भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं और लोगों के जीवन में नई ऊर्जा, आशा और सकारात्मकता का संचार करते हैं।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अलग-अलग पोस्ट के माध्यम से नवरात्रि और गुड़ी पड़वा सहित विभिन्न पर्वों पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी थीं। उन्होंने मां दुर्गा से सभी के सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
देश के अलग-अलग राज्यों में मनाए जाने वाले ये पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत करते हैं। हर क्षेत्र में अलग-अलग परंपराओं के साथ नववर्ष का स्वागत किया जा रहा है, जो भारत की विविधता को दर्शाता है। 

 

भारत की ऊर्जा क्षमता जनवरी 2026 तक बढ़कर हुई 520.51 गीगावाट

19-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारत की ऊर्जा क्षमता बढ़कर जनवरी 2026 तक 520.51 गीगावाट हो गई है। बिजली की कमी दिसंबर 2025 में कम होकर 0.03 प्रतिशत हो गई है, जो वित्त वर्ष 14 में 4.2 प्रतिशत थी। यह जानकारी सरकार की ओर से गुरुवार को दी गई। 
सरकार की ओर से भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 से पहले निकाले गए दस्तावेज में कहा गया कि वित्त वर्ष 26 में (31 जनवरी, 2026 तक ) देश की ऊर्जा क्षमता (सभी स्रोतों से) में 52,537 मेगावाट (52.53 गीगवाट) की वृद्धि हुई है। इसमें रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी 39,657 मेगावाट (39.65 गीगावाट) है, जिसमें 34,955 मेगावाट की सोलर क्षमता और 4,613 मेगावाट की विंड क्षमता शामिल है। 
सरकार ने बताया कि यह किसी एक वित्त वर्ष में ऊर्जा क्षमता में हुई अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि है। इससे पहले के वित्त वर्ष 2024-25 में ऊर्जा क्षमता में 34,054 मेगावाट की वृद्धि हुई थी। सरकार की ओर से नई दिल्ली के यशोभूमि में भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 का 19 मार्च से 22 मार्च के बीच आयोजित की जा रही है। यह पावर और इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर पर एक बड़ी ग्लोबल कॉन्फ्रेंस-कम-एग्जीबिशन है। 
दस्तावेज में बताया गया कि केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। विद्युत प्रणाली के ट्रांसमिशन और ट्रांसफॉरमेशन सिस्टम को मजबूत करने पर भी उतना ही ध्यान दिया गया है। राज्यों में उत्पादन केंद्रों से लोड केंद्रों तक बिजली को कुशलतापूर्वक पहुंचाने के लिए नए सबस्टेशन, उन्नत ट्रांसफार्मर और विस्तारित उच्च क्षमता वाले ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए गए हैं। इन निवेशों से बाधाएं कम होती हैं, ग्रिड की स्थिरता में सुधार होता है और विभिन्न ऊर्जा स्रोतों को राष्ट्रीय ग्रिड में सुचारू रूप से एकीकृत करना संभव होता है।
सरकार ने बताया कि भारत के नेशनल पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इसने 5 लाख सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) से अधिक ट्रांसमिशन लाइनों का विस्तार किया है और इसकी कुल ट्रांसफॉरमेशन क्षमता 1,407 गीगावोल्ट एम्पीयर (जीवीए) तक पहुंच गई है। उत्पादन और नेटवर्क दोनों को एक साथ मजबूत करके, भारत ने एक ऐसे विद्युत क्षेत्र की नींव रखी है जो न केवल आज बल्कि भविष्य में भी विकास को समर्थन देने में सक्षम है।

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अयोध्या में ‘श्रीराम यंत्र’ स्थापना पूजन में लिया भाग, भक्ति में डूबा माहौल

19-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) वासंतिक नवरात्र और हिंदी नववर्ष के प्रथम दिन अयोध्या धाम में आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संगम देखने को मिला, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राम मंदिर पहुंचकर ‘श्रीराम यंत्र’ स्थापना के विशेष अनुष्ठान में भाग लिया। इस अवसर पर पूरी रामनगरी भक्ति, सुरक्षा और परंपरा के रंग में रंगी नजर आई। 
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु गुरुवार को महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सेना के विशेष विमान से अयोध्या पहुंचीं। यहां से वह कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच सड़क मार्ग से राम मंदिर पहुंचीं। रामनगरी में उनका पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक मौजूद रहे। 
राष्ट्रपति ने ‘जगतगुरु आद्य शंकराचार्य द्वार’ से अयोध्या में प्रवेश किया और मंदिर परिसर का अवलोकन किया। इसके बाद उन्होंने परिसर स्थित दुर्गा माता मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था में विशेष बदलाव किए गए। ट्रस्ट के मुताबिक सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक सभी वीआईपी, सुगम और विशिष्ट दर्शन पास पूरी तरह निरस्त कर दिए गए।
19 मार्च के लिए ऑनलाइन जारी किए गए सभी पास भी रद्द माने गए, जिससे श्रद्धालु केवल सामान्य व्यवस्था के तहत ही दर्शन कर सके। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि राष्ट्रपति मुर्मु मंदिर के द्वितीय तल स्थित गर्भगृह में ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना के अनुष्ठान में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि यह यंत्र भगवान श्रीराम की दिव्य शक्ति, मर्यादा और धर्म की स्थापना का प्रतीक है, जिससे मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और सुदृढ़ होगी। 
माना जाता है कि ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना से मंदिर की पवित्रता और प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इससे अयोध्या धाम से धर्म, शांति और मर्यादा का संदेश और अधिक व्यापक रूप से प्रसारित होगा। इस विशेष अवसर पर केरल की आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी भी अपने करीब एक हजार भक्तों के साथ अयोध्या पहुंचीं। कार्यक्रम में राम मंदिर निर्माण से जुड़े लगभग 2000 लोग और 1984 से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।





 

रक्षा मंत्रालय को मिला नया नवनिर्मित भवन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया प्रवेश

19-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने नवनिर्मित आधिकारिक कार्यालय में प्रवेश किया है। यह कार्यालय रक्षा मंत्रालय के नए भवन में है। रक्षा मंत्रालय का यह भवन कर्तव्य भवन-2 में स्थित है। कर्तव्य भवन-2 में बनाया गया रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह कार्यालय अत्याधुनिक प्रशासनिक परिसर है।
रक्षा मंत्री ने गुरुवार को अपने इस नए कार्यालय में औपचारिक रूप से प्रवेश किया। इस अवसर को रक्षा मंत्रालय के कार्य संचालन में दक्षता, समन्वय और आधुनिकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह नया कार्यालय स्टेट-ऑफ-द-आर्ट व आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। उन्होंने गुरुवार को स्वयं यह जानकारी देते हुए बताया कि रक्षा मंत्रालय के नए भवन, कर्तव्य भवन-2 में स्थित अपने कार्यालय में गुरुवार को प्रवेश किया है। इस दौरान भवन में प्रवेश करने पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने उनका स्वागत किया।
रक्षा मंत्री ने नए कार्यालय में प्रवेश के बाद कहा, “इस स्टेट-ऑफ-द-आर्ट भवन में रक्षा मंत्रालय नई ऊर्जा और पूरी प्रतिबद्धता के साथ भारत के सुरक्षा चक्र को और अधिक मजबूत करने का काम करता रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत का रक्षा कवच और अधिक सुदृढ़ बनेगा, यही हमारा संकल्प है।” विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे भवन व वातावरण में कार्य करने से मंत्रालय को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रक्षा मंत्रालय इस नए वातावरण में पूरी प्रतिबद्धता के साथ देश की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कार्य करता रहेगा।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने दोहराया कि भारत का रक्षा तंत्र निरंतर सुदृढ़ हो रहा है और इसे और मजबूत बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। कर्तव्य भवन-2 को आधुनिक प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है। इस भवन में उन्नत संचार सुविधाएं, बेहतर कार्यस्थल व्यवस्था और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक ढांचा उपलब्ध कराया गया है। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी होने की उम्मीद है।
रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, नए भवन में स्थानांतरित होने से विभिन्न शाखाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा, जिससे नीतिगत फैसलों के क्रियान्वयन में गति आएगी। इसके साथ ही, आधुनिक तकनीकी सुविधाएं कार्यकुशलता को बढ़ाने में सहायक होंगी।
इस अवसर पर मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। यह बदलाव न केवल भौतिक अवसंरचना के उन्नयन का प्रतीक है, बल्कि कार्य संस्कृति में भी सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कर्तव्य भवन-2 स्थित अपने कार्यालय में प्रवेश से पहले रक्षा मंत्री ने यहां विधिवत रूप से पूजा की। इसके बाद उन्होंने नए कार्यालय में कार्यभार संभाला। यह नया भवन भारत की रक्षा व्यवस्था को अधिक सक्षम, संगठित और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने के संकल्प को दर्शाता है।

पश्चिम एशिया से एयर इंडिया की बड़ी पहल, 18 मार्च को 50 उड़ानें संचालित

18-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) एयर इंडिया ग्रुप ने पश्चिम एशिया क्षेत्र से भारत आने-जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट जारी किया है। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस मिलकर 18 मार्च 2026 को कुल 50 उड़ानें (शेड्यूल और नॉन-शेड्यूल) संचालित करेंगे। यह फैसला क्षेत्र में बढ़ती यात्री मांग और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
18 मार्च को जेद्दा और मस्कट से एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस अपनी नियमित शेड्यूल सेवाएं जारी रखेंगी। जेद्दा-भारत रूट पर कुल 14 उड़ानें संचालित होंगी। इसमें एयर इंडिया दिल्ली और मुंबई से एक-एक राउंड ट्रिप सेवा देगी। वहीं एयर इंडिया एक्सप्रेस बेंगलुरु, हैदराबाद और मंगलौर से एक-एक उड़ान संचालित करेगी, जबकि कोझिकोड से दो उड़ानें चलाई जाएंगी। मस्कट से एयर इंडिया एक्सप्रेस 12 शेड्यूल उड़ानें संचालित करेगी, जिनमें कन्नूर, कोच्चि, लखनऊ और तिरुवनंतपुरम जैसे शहर शामिल हैं।
शेड्यूल सेवाओं के अलावा, एयर इंडिया ग्रुप संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब से कुल 24 नॉन-शेड्यूल (एड-हॉक) उड़ानें भी संचालित करेगा। ये उड़ानें स्लॉट उपलब्धता, हवाई यातायात नियंत्रण और अन्य ऑपरेशनल परिस्थितियों पर निर्भर करेंगी। सभी उड़ानों के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और संबंधित देशों के नियामक प्राधिकरणों से आवश्यक अनुमतियां ली गई हैं।
एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि उत्तरी अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उसकी सभी उड़ानें सामान्य शेड्यूल के अनुसार संचालित हो रही हैं। हालांकि, जिन यात्रियों की उड़ानें अस्थायी रूप से प्रभावित हुई हैं, उन्हें विशेष राहत दी जा रही है। ऐसे यात्री बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपनी उड़ान रीबुक कर सकते हैं या पूरा रिफंड ले सकते हैं।
एयर इंडिया ने यात्रियों से अपील की है कि वे रीबुकिंग या कैंसिलेशन के लिए एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अनुरोध दर्ज करें। अधिक जानकारी के लिए 24×7 हेल्पलाइन नंबर +91-11-69329333 और +91-11-69329999 पर संपर्क किया जा सकता है।
एयर इंडिया एक्सप्रेस के यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा दी गई है। यूएई के किसी भी स्टेशन से भारत के किसी भी गंतव्य के लिए अतिरिक्त कमर्शियल उड़ानों पर बिना अतिरिक्त शुल्क के रीबुकिंग की जा सकती है। एयरलाइन प्रभावित यात्रियों से सक्रिय रूप से संपर्क कर रही है और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों पर रीबुकिंग विकल्प भेज रही है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपना मोबाइल नंबर अपडेट रखें, ताकि समय पर जरूरी जानकारी मिल सके।




 

अमेरिका ने होर्मुज के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमला किया

18-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर नए हमले किए हैं। सेना के अधिकारियों का कहना है कि ये ठिकाने अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। यह कार्रवाई “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत की जा रही है, जो अब और तेज हो गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, इन हमलों में भारी वजन वाले बमों का इस्तेमाल किया गया, जो मजबूत और सुरक्षित ठिकानों को भी नष्ट कर सकते हैं। ये मिसाइल ठिकाने ईरान के तटीय इलाके में, होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित थे। यहां तैनात एंटी-शिप मिसाइलें गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा कर रही थीं।
दरअसल, यह कार्रवाई इस पूरे अभियान में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, क्योंकि अब समुद्री क्षेत्र भी इसका अहम हिस्सा बन गया है। होर्मुज स्ट्रेट इस समय अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का मुख्य केंद्र बन गया है। सेंटकॉम ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी नौसेना के विमानों ने सैकड़ों लड़ाकू उड़ानें भरी हैं। इससे यह दिखता है कि अमेरिका समुद्र से भी हवाई ताकत बनाए रखने में सक्षम है।
वहीं एक दिन पहले जारी जानकारी के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए इस अभियान में अब तक 7,000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमला किया जा चुका है। यह अभियान राष्ट्रपति के निर्देश पर शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य ईरान की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करना और उन ठिकानों को निशाना बनाना है जो तुरंत खतरा पैदा कर सकते हैं।
अब तक 100 से ज्यादा ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाया गया है या उन्हें नष्ट कर दिया गया है। साथ ही अमेरिकी सेना 6,500 से ज्यादा लड़ाकू उड़ानें भर चुकी है। हमलों के निशाने पर कई तरह के सैन्य ठिकाने हैं। इनमें बैलिस्टिक मिसाइल साइट, एंटी-शिप मिसाइल ठिकाने, आईआरजीसी (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड) के मुख्यालय, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य संचार से जुड़े सिस्टम शामिल हैं।
इस पूरे ऑपरेशन में अमेरिका ने हवा, जमीन और समुद्र तीनों मोर्चों पर अपनी ताकत का इस्तेमाल किया है। इसमें बी-1, बी-2 और बी-52 जैसे बमवर्षक विमान, एफ-22 और एफ-35 जैसे आधुनिक फाइटर जेट, निगरानी विमान और ड्रोन शामिल हैं। समुद्र में परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत, पनडुब्बियां और मिसाइल से लैस युद्धपोत तैनात किए गए हैं।
जमीन पर पैट्रियट और थाड जैसे मिसाइल रक्षा सिस्टम, रॉकेट आर्टिलरी और ड्रोन से निपटने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे साफ है कि यह अभियान कई स्तरों पर एक साथ चलाया जा रहा है। एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों पर खास ध्यान इसलिए दिया जा रहा है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया में तेल आपूर्ति का एक बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। अगर यहां कोई बाधा आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया के व्यापार और तेल बाजार पर पड़ सकता है।


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