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केंद्र ने जारी किए कोयला एक्सचेंज नियम-2026, ऊर्जा क्षेत्र में आएगा बड़ा सुधार

09-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्र सरकार ने कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए कोयला एक्सचेंज नियम, 2026 जारी कर दिए हैं। यह कदम विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने और ऊर्जा बाजारों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोयला मंत्रालय ने मंगलवार को जारी बयान में बताया कि नए नियमों से देश में कोयला एक्सचेंजों की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। हाल ही में पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2025 के तहत खनिज एक्सचेंज की अवधारणा को कानूनी मान्यता दी गई थी।
– कोयला नियंत्रक संगठन (CCO) को कोयला एक्सचेंजों के पंजीकरण और विनियमन का जिम्मेदार प्राधिकरण बनाया गया है।
– पात्र संस्थाएं CCO से पंजीकरण लेकर कोयला एक्सचेंज स्थापित और संचालित कर सकेंगी।
– पंजीकरण 25 वर्ष की अवधि के लिए वैध होगा।एक्सचेंज बाजार नियम और उपनियम बनाने की भी छूट होगी।
नए कोयला एक्सचेंज के शुरू होने से कोयला व्यापार में “एक से अनेक” मॉडल की जगह “अनेक से अनेक” प्रतिस्पर्धी मंच बनेगा। इससे:
– पारदर्शी और बाजार-आधारित मूल्य निर्धारण संभव होगा
– कोयला उत्पादकों (वाणिज्यिक और कैप्टिव दोनों) को ज्यादा खरीदारों तक पहुंच मिलेगी
– सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियों को भी बेहतर बाजार भागीदारी मिलेगी
– समग्र दक्षता बढ़ेगी और व्यापार करने में आसानी होगी
कोयला मंत्रालय ने कहा कि यह पहल व्यापार सुगमता, पारदर्शिता और आधुनिक ऊर्जा परितंत्र बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अधिक प्रतिस्पर्धी और कुशल कोयला बाजार के जरिए ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और सतत आर्थिक विकास के लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। यह सुधार भारत को आत्मनिर्भर और भविष्य-तैयार ऊर्जा क्षेत्र प्रदान करने की दिशा में एक अहम कदम है। 



 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 13 जून को डुंडीगल स्थित वायु सेना अकादमी में संयुक्त दीक्षांत परेड की समीक्षा करेंगे

09-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) 217वें बैच की संयुक्त दीक्षांत परेड (सीजीपी) 13 जून, 2026 को वायु सेना अकादमी (एएफए) दुंडीगल, हैदराबाद में आयोजित की जाएगी। सैन्य दक्षता से परिपूर्ण यह समारोह भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की विभिन्न शाखाओं के फ्लाइट कैडेटों के पूर्व-कमीशनिंग प्रशिक्षण के सफल समापन के उपलक्ष्य में मनाया जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह परेड के समीक्षा अधिकारी (आरओ) होंगे।
इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भारतीय वायु सेना के सोशल मीडिया हैंडल के साथ-साथ डीडी नेशनल पर 13 जून, 2026 को सुबह 7 बजे से किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है।
समारोह के दौरान, आरओ राजनाथ सिंह स्नातक होने वाले प्रशिक्षुओं को ‘राष्ट्रपति कमीशन’ प्रदान करेंगे। समारोह में भारतीय वायु सेना के फ्लाइट कैडेटों और भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल तथा वियतनाम के अधिकारियों और प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर ‘विंग्स’ और ‘ब्रेवेट्स’ प्रदान किए जाते हैं।
इस सीजीपी में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), पुणे से 30 मई 2025 को उत्तीर्ण होने वाली और शाखा-विशिष्ट प्रशिक्षण के लिए एएफए में शामिल होने वाली महिला कैडेटों के पहले बैच को कमीशन भी दिया जाएगा।
आरओ राजनाथ सिंह फ्लाइंग, नेविगेशन स्ट्रीम और ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं में समग्र योग्यता क्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले फ्लाइट कैडेट्स को ‘राष्ट्रपति पट्टिका’ प्रदान करेंगे। इस कार्यक्रम में आकाश गंगा और एयर वॉरियर ड्रिल टीम (एडब्ल्यूडीटी) के प्रदर्शन के साथ सीजीपी का शुभारंभ किया जाएगा। इसमें वायु सेना प्रमुख (सीएएस) एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के नेतृत्व में फ्लाईपास्ट भी शामिल होंगे। फ्लाईपास्ट में चार प्रकार के प्रशिक्षण विमानों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिनमें पिलाटस पीसी-7 एमकेआईआई, हॉक, किरण और चेतक विमान शामिल हैं। एसयू-30 एमकेआई, सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम और सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम (एसकेएटी) का हवाई प्रदर्शन इस समारोह का मुख्य आकर्षण होगा। 

 

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने जोजिला सुरंग को भारत के अवसंरचना इतिहास का ‘स्वर्ण अध्याय’ बताया

09-Jun-2026

नई दिल्ली। (शोर संदेश)केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जोजिला सुरंग परियोजना को भारत के अवसंरचना विकास के इतिहास में ‘स्वर्ण अध्याय’ बताया है। मंगलवार को जोजिला सुरंग से जुड़े कार्यक्रम के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में गडकरी ने कहा कि 14 किलोमीटर लंबी यह सुरंग लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लिए जीवन रेखा साबित होगी। यह सुरंग साल भर हर मौसम में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करेगी, जो पहले बर्फबारी के कारण कई महीनों तक कट जाता था।

https://x.com/nitin_gadkari/status/2064289159183802401?s=20
जोजिला सुरंग की खासियतें
– देश की सबसे महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं में से एक
– 3,000 मीटर की ऊंचाई पर शून्य से नीचे तापमान में निर्माण
– लगभग 80% स्थानीय श्रमिकों की भागीदारी
– वैश्विक सुरक्षा मानकों के अनुरूप निर्माण
गडकरी ने परियोजना में लगे इंजीनियरों, श्रमिकों और एजेंसियों की सराहना करते हुए कहा कि यह सुरंग चुनौतीपूर्ण भू-भाग और कठिन मौसम में भी सफलतापूर्वक बनाई गई है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जोजिला सुरंग कश्मीर और लद्दाख के बीच निरंतर संपर्क सुनिश्चित करके पर्यटन, व्यापार, आर्थिक गतिविधियों और सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक आवागमन को मजबूती देगी।
इसी के साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लद्दाख में कई नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की भी घोषणा की:
– लेह साउथ बाईपास (48 किमी) – ₹1,000 करोड़
– लेह नॉर्थ बाईपास (7.6 किमी) – ₹200 करोड़
– फातु ला ट्विन-ट्यूब सुरंग (2.6 किमी) – काम तीन महीने में शुरू
– टेला पास सुरंग – ₹3,500 करोड़, अंतिम DPR चरण में, अगले साल मार्च तक टेंडर संभावित
– श्रीनगर-गुमरी सड़क का चौड़ीकरण और उन्नयन
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हिमालयी क्षेत्र में अवसंरचना विस्तार और दूरस्थ सीमावर्ती इलाकों में साल भर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन के अनुरूप उत्तर भारत के दुर्गम क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।





 

 


सैपलिंग संवाद-2026 का उद्घाटन, दक्षिण एशिया में खाद्य प्रसंस्करण से रोजगार और सतत विकास पर जोर

09-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने मंगलवार को गुजरात के अहमदाबाद में सैपलिंग (उन्नत पोषण और विकास के लिए दक्षिण एशियाई नीति नेतृत्व) संवाद-2026 का उद्घाटन किया। “अन्लॉकिंग वैल्यू: दक्षिण एशिया में रोजगार सृजन और सतत विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण को आगे बढ़ाना” विषय पर आयोजित यह दो दिवसीय क्षेत्रीय उच्च-स्तरीय नीति संवाद भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और विश्व बैंक समूह के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण कृषि और समृद्धि के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में रोजगार सृजन, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने भारत की बढ़ती भूमिका को वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण केंद्र के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि मूल्यवर्धन, तकनीक अपनाने और क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से दक्षिण एशिया की खाद्य अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतिगत पहल और अवसंरचना विकास के प्रयास वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण में मदद कर रहे हैं।
दो दिवसीय इस संवाद में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, विकास भागीदारों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, नवप्रवर्तकों और दक्षिण एशियाई देशों के प्रतिनिधियों सहित लगभग 200 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण इकोसिस्टम को मजबूत करना और क्षेत्र में समावेशी, लचीली तथा टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के निर्माण पर विचार-विमर्श करना है।
गुजरात सरकार के कृषि मंत्री जीतूभाई वाघानी ने विभिन्न देशों की भागीदारी का स्वागत करते हुए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को कृषि परिवर्तन का प्रमुख इंजन बताया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र रोजगार, मूल्यवर्धन और आर्थिक विकास को गति देने वाला महत्वपूर्ण माध्यम है। वाघानी ने कृषि और उद्योग के बीच की खाई को कम करने के लिए गुजरात में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान के परिसर की स्थापना का भी समर्थन किया।
संवाद में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा की जा रही है। इनमें दक्षिण एशिया में खाद्य प्रसंस्करण के अवसरों का विस्तार, कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना, अनौपचारिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का औपचारिककरण, तकनीक आधारित नवाचार, खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता मानक, निवेश जुटाना और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है। इन सत्रों में नेस्ले, बायर, राबोबैंक, अजिनोमोटो, आईटीसी, नाबार्ड और फूड इंडस्ट्री एशिया सहित कई प्रमुख वैश्विक और भारतीय संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम के साथ आयोजित नवाचार मेले में कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स, डिजिटल ट्रेसिबिलिटी, टिकाऊ पैकेजिंग, स्मार्ट प्रोसेसिंग तकनीक और आधुनिक भंडारण प्रणालियों से जुड़े नवाचारों का प्रदर्शन किया गया। इसका उद्देश्य नवप्रवर्तकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना है।
इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने “भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर का आकलन” शीर्षक से एक रिपोर्ट भी जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में खाद्य प्रसंस्करण का समग्र स्तर वर्ष 2016 के लगभग 10 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2023 में लगभग 17 प्रतिशत हो गया है। रिपोर्ट में फलों, सब्जियों और डेयरी उत्पादों जैसे नाशवान क्षेत्रों में मूल्यवर्धन की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया गया है। साथ ही अवसंरचना को मजबूत करने, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने के लिए नीतिगत सुझाव भी दिए गए हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य दक्षिण एशियाई देशों के बीच ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना, क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करना, निजी निवेश आकर्षित करना और एमएसएमई क्षेत्र को समर्थन देना है। आयोजकों को उम्मीद है कि यह संवाद खाद्य प्रसंस्करण आधारित विकास, रोजगार सृजन और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के निर्माण के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 

 

 


भारत-बांग्लादेश सीमा पर ड्रग्स और हथियारों की तस्करी रोकने के लिए अमित शाह ने दिए जागरूकता शिविर लगाने के निर्देश

07-Jun-2026
भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ती नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध हथियारों की आवाजाही को रोकने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सीमा से सटे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जागरूक और प्रशिक्षित करने के लिए विशेष शिविर आयोजित करने को कहा है।
अमित शाह ने शनिवार को अगरतला के निकट शालबागान स्थित बीएसएफ त्रिपुरा फ्रंटियर मुख्यालय में सीमा क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसलिए लोगों की भागीदारी बढ़ाना बेहद जरूरी है।
गृह मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर रहने वाले लोगों के लिए विशेष प्रशिक्षण और जागरूकता शिविर लगाए जाएं। इन शिविरों में पटवारी, स्थानीय पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
बैठक में अमित शाह ने यह भी निर्देश दिया कि गृह मंत्रालय के सीसीटीवी मॉडल को सबसे पहले त्रिपुरा में लागू किया जाए। उन्होंने बीएसएफ के सभी कैमरों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड कर जिला प्रशासन से जोड़ने का भी आदेश दिया, जिससे निगरानी व्यवस्था और मजबूत हो सके।
बैठक में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, मुख्य सचिव जेके सिन्हा, पुलिस महानिदेशक अनुराग, और राज्य के सभी आठ सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौजूद रहे। बैठक में राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के साथ व्यापक सीमा प्रबंधन पर चर्चा हुई।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल बाड़ लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्थानीय प्रशासन, स्मार्ट तकनीक और बीएसएफ के समन्वय से ही पूरी तरह सुरक्षित और अभेद्य सीमा सुरक्षा तंत्र तैयार किया जा सकता है।
गृह मंत्री ने मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाने तथा इस अवैध कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने सीमावर्ती जिलों में वित्तीय गतिविधियों, संदिग्ध लेन-देन, बड़ी इमारतों के निर्माण और संपत्ति की खरीद-बिक्री पर कड़ी नजर रखने को कहा।
उन्होंने पिछले पांच वर्षों के भूमि रिकॉर्ड की भी जांच कराने का निर्देश दिया। इसके अलावा अमित शाह ने कलेक्टरों और जीएसटी अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देने तथा नकली मुद्रा के मामलों की जांच के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) से सर्वे कराने की भी बात कही।
 
 

दिल्ली : घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमत में बढ़ोतरी, तेल कंपनियों ने 29 रुपए बढ़ाए दाम

07-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) सरकारी तेल कंपनियों ने एलपीजी गैस सिलेंडर के दामों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की वृद्धि की गई है। इसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है।
दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की नई कीमत आज यानी 7 जून से लागू हो जाएगी। इससे पहले 1 जून को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई थी। तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी के दाम में 42 रुपये की वृद्धि की थी।
जून में हुई इस बढ़ोतरी को मिलाकर बीते पांच महीनों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। फरवरी में कमर्शियल एलपीजी की कीमत में 49 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद मार्च में 115 रुपये की एक और वृद्धि हुई। अप्रैल में 993 रुपये प्रति सिलेंडर की सबसे बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद 1 जून से दरों में एक बार फिर बदलाव किया गया।
बताया गया कि ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने के कारण कीमतों में इजाफा किया गया। तेल मार्केटिंग कंपनियों ने 5 किलो वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (एफटीएल) सिलेंडरों की कीमत में भी 11 रुपये की बढ़ोतरी की थी।
बीते दिनों दिल्ली और आसपास के इलाकों में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमत में भी 2 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई थी। 15 मई से सीएनजी की कीमतों में चार अलग-अलग संशोधनों के जरिए कुल 6 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई।
19 मई को पेट्रोल 86 पैसे प्रति लीटर और डीजल 83 पैसे प्रति लीटर महंगा किया गया था। इस बदलाव के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गई थी।
इससे पहले 15 मई को भी ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। उस समय पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर तथा सीएनजी की कीमत में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई थी।





 

भारत ने नेपाल को 72 स्वास्थ्य सुविधाओं और 12 सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रोजेक्ट सौंपे

07-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शनिवार को अपने नेपाली समकक्ष शिशिर खनल के साथ बैठक की। विदेश मंत्री जयशंकर ने 2015 के भूकंप के बाद पुनर्निर्माण कार्यक्रम के तहत नेपाल को 72 स्वास्थ्य सुविधाएं और 12 सांस्कृतिक विरासत परियोजनाएं वर्चुअली सौंपीं।
मीटिंग के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल के साथ अच्छी मीटिंग के बाद, 2015 के भूकंप के बाद रिकंस्ट्रक्शन प्रोग्राम के तहत 72 स्वास्थ्य सुविधाओं और 12 कल्चरल हेरिटेज प्रोजेक्ट वर्चुअली सौंपे गए।”
उन्होंने कहा, “क्रॉस-बॉर्डर पर्सनल रेमिटेंस को आसान बनाने के लिए यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) भारत और नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस ऑफ नेपाल के बीच मिलकर लिंकेज लॉन्च किया गया।” दोनों नेताओं ने नेपाल के लिए ‘वॉयस फर्स्ट’ लैंग्वेज ट्रांसलेशन प्लेटफॉर्म के लिए नेशनल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलकर बनाने के लिए डिजिटल इंडिया भाषानी और काठमांडू यूनिवर्सिटी के बीच एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) एक्सचेंज किया।
विदेश मंत्री ने दोनों देशों के लोगों की आपसी तरक्की, खुशहाली और भलाई के लिए नेपाल के साथ काम करने का भारत का वादा भी दोहराया। नेताओं ने भारत-नेपाल साझेदारी पर विस्तार से चर्चा की, जिसमें विकास सहयोग, जुड़ाव, ऊर्जा, खासकर हाइड्रो पावर डेवलपमेंट, शिक्षा, स्वास्थ्य, कैपेसिटी बिल्डिंग, डिजिटल, कल्चर और स्पोर्ट्स शामिल थे।
खनल के साथ मीटिंग के दौरान अपनी शुरुआती बातों में, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “भारत और नेपाल के बीच बहुत खास रिश्ता है, जो लोगों के बीच अच्छे संबंधों, बॉर्डर पार कनेक्शन और साझा सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की मजबूत नींव पर बना है। यह साझा भरोसे, अच्छी भावना और आपसी फायदे पर टिका है। हमारे आपसी व्यापार संबंध, वाणिज्य, निवेश, ऊर्जा, विकास सहयोग, शिक्षा, डिजास्टर रिस्पॉन्स और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में लगातार बढ़े हैं।”
उन्होंने कहा, “आज हमारे पास इसे कई दूसरे क्षेत्र में भी आगे बढ़ाने का मौका है, जैसे स्टार्टअप, एआई, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी और दूसरे नए डोमेन में। हम अपने लंबे और खास तौर पर खुले बॉर्डर पर सुरक्षा बनाए रखने के लिए मिलकर काम करते हैं।” दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही एकता पर जोर देते हुए, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत ने पश्चिम एशियाई क्षेत्र में चल रहे संकट के बीच नेपाल को बिना रुकावट फ्यूल सप्लाई सुनिश्चित किया है।

 


वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7% GDP ग्रोथ पर अमित शाह ने जताई प्रसन्नता

06-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी के 7.7 प्रतिशत की दर से विस्तार करने पर प्रसन्नता जताई है। सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर जारी एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा शुरू किए गए दूरदर्शी आर्थिक सुधार देश में आर्थिक समृद्धि को निरंतर गति दे रहे हैं, जिससे भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। ऐसे समय में जब विश्व आर्थिक संकटों से जूझ रहा है, भारत की 7.7 प्रतिशत की विकास दर और सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ते हुए उसका प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि पिछले 12 वर्षों में हमारी अर्थव्यवस्था ने कितनी मजबूती हासिल की है।”
अमित शाह ने आगे कहा, “चाहे महामारी का दौर हो या युद्ध जैसी वैश्विक चुनौतियाँ, मोदी जी की दूरदर्शी नीतियाँ ही देश को हर संकट से सुरक्षित रूप से पार ले जा रही हैं।”
वहीं इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 7.8 प्रतिशत की GDP विकास दर, अर्थव्यवस्था की मज़बूती, सुधारों की सफलता और 140 करोड़ भारतीयों की कड़ी मेहनत को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि सरकार ‘ईज़ ऑफ़ लिविंग’ (जीवन को आसान बनाने) और ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ (कारोबार को सुगम बनाने) को और बेहतर बनाने के लिए हर संभव कोशिश करेगी। प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया, “भारत की विकास की गति मज़बूत बनी हुई है! वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी विकास दर 7.7 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 7.8 प्रतिशत हमारी अर्थव्यवस्था की मज़बूती, सुधारों की सफलता और 140 करोड़ भारतीयों की कड़ी मेहनत को दर्शाती है। हम ‘ईज़ ऑफ़ लिविंग’ (जीवन को आसान बनाने) और ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ (कारोबार को सुगत बनाने) को और बेहतर बनाने तथा अपने युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।”

 

सीएम योगी गोंडा में 516 करोड़ रुपए की लागत वाली 262 परियोजनाओं का करेंगे लोकार्पण और शिलान्यास

06-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को गोंडा को 500 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं की सौगात देंगे। उनके कार्यक्रम को लेकर गोंडा में भी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “आज मां बाराही देवी धाम की पावन धरा जनपद गोंडा में जनकल्याण और विकास को समर्पित 516 करोड़ रुपए की लागत वाली 262 परियोजनाओं के लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम में सहभागी बनूंगा।”
उन्होंने गोंडा वासियों को बधाई देते हुए अपनी पोस्ट में आगे लिखा, “ये परियोजनाएं क्षेत्र के विकास को नई दिशा देंगी, जनसुविधाओं का विस्तार करेंगी व गोंडा की प्रगति और समृद्धि के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएंगी।”
वहीं, गोंडा कि जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने न्यूज़ एजेंसी को बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शनिवार को गोंडा दौरा प्रस्तावित है। वे गोंडा के चकरौत ग्राम सभा में कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां वे कर्नलगंज विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यक्रमों का लोकार्पण करेंगे। जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री आज 21 जून तक चलने वाली प्रदर्शन का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा, वे विभिन्न लाभार्थी योजनाओं के वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। प्रियंका निरंजन ने कहा कि मुख्यमंत्री आज कुल 262 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।
मुख्यमंत्री योगी के दौरे से पहले जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण भी किया। इस दौरान, उन्होंने अलग-अलग स्टॉल पर जाकर वहां मौजूद लोगों से बात की। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री योगी के दौरे को लेकर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।





 

कांगो में इबोला के कंफर्म मामलों की संख्या बढ़कर 452 हुई, 82 लोगों की मौत

06-Jun-2026
कांगो में इबोला के मामले में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। इबोला वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 452 हो गई है। इस वायरस से संक्रमित 82 लोगों की मौत हो गई है। कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला के कंफर्म मामलों की संख्या 452 हो गई है, जिनमें 82 लोगों की जान चली गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य अधिकारियों ने 4 जून को इतुरी और नॉर्थ किवु प्रांतों में 71 नए कंफर्म मामलों की जानकारी दी थी, जिनमें 21 लोगों की मौत हो गई थी। यह वायरस के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन से फैले प्रकोप के बीच तेजी से और लगातार कम्युनिटी ट्रांसमिशन का संकेत है।
शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 258 मरीज आइसोलेशन या अस्पताल की देखरेख में हैं, जबकि आठ लोग ठीक हो चुके हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग (संपर्क में आए लोगों का पता लगाना) में अभी भी बड़ी कमी है। तीनों प्रांतों में जिन 4,766 लोगों के संपर्क में आने की निगरानी की जा रही थी, उनमें से केवल 2,755 लोगों को ही देखा गया है, जो कुल मिलाकर 57.8 प्रतिशत का फॉलो-अप रेट है।
डीआरसी के स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस स्थिति से निपटने में आ रही मुख्य चुनौतियों के बारे में बात की है। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम के दौरान स्वैब लेने का विरोध, इबोला के इलाज की अपर्याप्त स्टैंडर्ड क्षमता, कमजोर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, जरूरी दवाओं की कमी, नॉर्थ किवु में संक्रमण से बचाव के सामान की कमी, खराब अलर्ट रिपोर्टिंग और 21.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग की कमी से मामला काफी गंभीर हो गया है।
युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि युगांडा में भी इबोला के तीन नए मामलों की पुष्टि हुई है, जिससे संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 19 हो गई है।
अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने शुक्रवार को पूरे महाद्वीप के लिए इबोला प्रकोप की तैयारी और उससे निपटने की प्लानिंग शुरू की। जून से नवंबर के बीच अफ्रीकी देशों को प्रकोप की तैयारी, तेजी से पहचान और उससे निपटने में मदद करने के लिए 518 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने की तैयारी की जा रही है।
अफ्रीका सीडीसी और डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अब तक कुल 34 स्वास्थ्यकर्मी इबोला वायरस से संक्रमित हुए हैं, जिनमें से सात की मौत हो गई और छह ठीक हो गए।
अफ्रीका सीडीसी और डब्ल्यूएचओ ने कई बड़ी ऑपरेशनल चुनौतियों का भी जिक्र किया है, जिनमें बुंडिबुग्यो इबोला स्ट्रेन के लिए मेडिकल उपायों की कमी, कमजोर स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर, और पहले से ही कई स्वास्थ्य आपात स्थितियों से जूझ रहे हेल्थ सिस्टम पर दबाव शामिल है। संसाधनों की कमी, लोगों की ज्यादा आवाजाही, असुरक्षा और विस्थापन, स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण, और गलत जानकारी व अविश्वास ने स्थिति को और भी मुश्किल बना दिया है।









 


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