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अंत्योदय से समृद्धि तक: सरकार की योजनाओं से अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंच रहा विकास

12-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) सरकार के ‘अंत्योदय’ मंत्र ने भारत के सबसे पिछड़े और वंचित समुदायों को समावेशी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में सफलता हासिल की है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा है कि जो लोग अब तक विकास की दौड़ में पीछे रह गए थे, उन्हें अवसर और प्रगति के केंद्र में लाया जाए। यह जानकारी शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में दी गई।
फैक्टशीट में बताया गया है कि इन प्रयासों को 24,104 करोड़ रुपए की प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) योजना के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। यह योजना विशेष रूप से अत्यंत कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के लिए बनाई गई है। ये भारत के सबसे अलग-थलग और पिछड़े समुदायों में शामिल हैं, जिनमें से कई लोग पक्के घर, स्वच्छ पेयजल, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित थे।
सरकार ने नवंबर 2023 में पीएम जनमन योजना लॉन्च की थी, ताकि विभिन्न मंत्रालयों के समन्वित प्रयासों के जरिए इन कमियों को दूर किया जा सके। यह कार्यक्रम 18 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले 75 पीवीटीजी समुदायों को लक्षित करता है और 9 मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित 11 प्रमुख हस्तक्षेपों के माध्यम से कार्य करता है।
इन 11 हस्तक्षेपों में आवास, सड़क संपर्क, पाइप से पेयजल आपूर्ति, मोबाइल चिकित्सा इकाइयां, आंगनवाड़ी केंद्र, छात्रावास, विद्युतीकरण, मोबाइल टावर, बहुउद्देश्यीय केंद्र, वन धन विकास केंद्र और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण शामिल हैं।
फैक्टशीट के अनुसार, जनजातीय गांवों में 7.8 लाख पक्के घर बनाए जा चुके हैं और 28,303 से अधिक गांवों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया गया है। वहीं, 5,89,812 जनजातीय परिवारों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है।
जनजातीय क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे का तेजी से विस्तार हुआ है। वंचित समुदायों के विद्यार्थियों को शिक्षा के अधिक अवसर मिले हैं। सफाई कर्मियों को संस्थागत पहचान और सुरक्षा संबंधी बेहतर सुविधाएं मिली हैं। वहीं, पिछड़े और घुमंतू समुदायों को भी लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के दायरे में लाया गया है।
पिछले 12 वर्षों में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के विस्तार ने दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। वर्ष 2018 के बाद इन विद्यालयों का तेजी से विस्तार हुआ, जिससे अनुसूचित जनजाति समुदायों को आधुनिक आवासीय शिक्षा की सुविधा उनके क्षेत्रों के करीब ही मिलने लगी। वर्ष 2026 तक 499 विद्यालयों में 1.56 लाख से अधिक छात्र नामांकित हैं, जबकि 323 नए विद्यालय निर्माणाधीन हैं।
इस बदलाव का असर भौगोलिक स्तर पर भी दिखाई दिया है। जनजातीय क्षेत्र, आकांक्षी जिले और दूरस्थ बस्तियां अब विकास योजनाओं और निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई हैं। विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय से उन क्षेत्रों तक भी योजनाओं का लाभ पहुंचा है, जिन्हें पहले पहुंच से बाहर माना जाता था।
इसी तरह, वर्ष 2021 में शुरू की गई पीएम-अजय योजना अनुसूचित जाति बहुल गांवों के समग्र विकास पर केंद्रित है। यह योजना बुनियादी ढांचे के विकास, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देकर वंचित अनुसूचित जाति समुदायों को सशक्त बनाने का काम कर रही है।
पीएम-अजय योजना के तहत ‘आदर्श ग्राम’ घटक के माध्यम से अनुसूचित जाति बहुल गांवों का क्षेत्र आधारित विकास किया जा रहा है। इसमें विभिन्न योजनाओं के समन्वय, ग्राम विकास योजनाओं और स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त सहायता दी जाती है। यह कार्यक्रम 26 राज्यों के 597 जिलों में स्थित 47,334 गांवों को कवर करता है, जिससे 4 करोड़ से अधिक अनुसूचित जाति नागरिकों और 83 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिल रहा है।
बयान में आगे कहा गया है कि इस कार्यक्रम ने गांव स्तर पर योजना निर्माण और बुनियादी ढांचे की निगरानी को भी मजबूत किया है। 25,000 से अधिक गांवों में आधारभूत सुविधाओं का आकलन किया जा चुका है। इससे सड़क, जल आपूर्ति, शिक्षा, स्वच्छता और संपर्क सुविधाओं की कमियों की अधिक व्यवस्थित तरीके से पहचान करने में मदद मिली है।
सरकार ने युवाओं की भागीदारी और रोजगार सृजन पर भी विशेष जोर दिया है। कौशल विकास, स्वयं सहायता समूहों में भागीदारी और गांवों में बुनियादी ढांचे के निर्माण को अब दीर्घकालिक आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बनाया गया है। बयान में कहा गया है कि इन कदमों का उद्देश्य वंचित समुदायों को स्थायी आर्थिक अवसरों से जोड़ना है।

खाद्य सुरक्षा की दिशा में भारत का आह्वान, ब्रिक्स देशों से किसानों के हित में मिलकर काम करने की अपील

12-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों से अधिक सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सभी सदस्य देश मिलकर छोटे किसानों को सशक्त बनाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और दुनिया भर में टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए काम करें। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ब्रिक्स देशों के सामूहिक प्रयास वैश्विक कृषि को नई दिशा दे सकते हैं और अधिक सुरक्षित, टिकाऊ तथा समावेशी कृषि भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
इंदौर में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए चौहान ने भारत की कृषि उपलब्धियों, सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय कृषि साझेदारियों को मजबूत करने पर भारत के फोकस को उजागर किया और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना पर जोर दिया, जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानती है।
मंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन दुनिया भर के छोटे और सीमांत किसानों के सामने मौजूद चुनौतियों पर सामूहिक रूप से विचार करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव, कृषि लागत में वृद्धि और कृषि बाजारों में अनिश्चितता जैसी चुनौतियां किसानों को प्रभावित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि छोटे किसानों का कल्याण और सशक्तिकरण वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और टिकाऊ कृषि विकास सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है। चौहान ने कहा कि यदि छोटे और सीमांत किसान आर्थिक रूप से मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम बनते हैं, तो दुनिया की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी अधिक मजबूत और लचीली होगी।
उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के कृषि क्षेत्र ने औसतन लगभग 4.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों को जानकारी दी कि देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन अब लगभग 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो कृषि क्षेत्र में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि देश में गेहूं का उत्पादन करीब 118 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जबकि बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन के आंकड़े को पार कर चुका है।
मछली उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह अब 19 मिलियन टन से अधिक हो गया है, जो कृषि और उससे जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक विकास को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम चला रहा है, जिसके माध्यम से बड़ी आबादी को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि भारत की लगभग 43 प्रतिशत कार्यशक्ति कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों से जुड़ी हुई है, जिससे यह देश की अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया है। भारत की कृषि व्यवस्था में छोटे और सीमांत किसानों की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश के लगभग 87 प्रतिशत किसान इसी श्रेणी में आते हैं।
 

अमरनाथ यात्रा 2026 की सुरक्षा तैयारियों की अमित शाह ने की समीक्षा, अभेद्य सुरक्षा ग्रिड बनाने के निर्देश

12-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को अमरनाथ यात्रा 2026 की तैयारियों को लेकर आयोजित सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, केंद्रीय गृह सचिव, थलसेना प्रमुख, आसूचना ब्यूरो (आईबी) के निदेशक, जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के महानिदेशक तथा गृह मंत्रालय, भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस वर्ष अमरनाथ जी यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक आयोजित होगी।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालुओं की सर्वोच्च सुरक्षा और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी सुरक्षा एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ यात्रा के लिए एकीकृत और अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार करने के निर्देश दिए।
गृह मंत्री ने कहा कि यात्रा मार्ग पर जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से मल्टी-लेयर्ड सुरक्षा ग्रिड स्थापित किया जाए। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए ड्रोन, सीसीटीवी निगरानी, सर्विलांस सिस्टम और अन्य आधुनिक तकनीकों के व्यापक उपयोग पर भी जोर दिया।
अमित शाह ने निर्देश दिया कि यात्रा के दौरान विभिन्न सीएपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शिविर स्थलों पर मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी करें। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के पंजीकरण, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन सहित सभी आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बैठक में गृह मंत्री ने कहा कि मौसम की स्थिति और पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए ही श्रद्धालुओं के जत्थों को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने यात्रा मार्ग के अलावा अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रूप से पर्यटन गतिविधियों का आनंद ले सकें।
बैठक में जानकारी दी गई कि यात्रा से जुड़े स्थानीय लोगों और पशुओं का पंजीकरण किया जाएगा तथा उन्हें क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे। यात्रा पंजीकरण और श्रद्धालुओं की सहायता संबंधी जानकारी https://jksasb.nic.in/ पर उपलब्ध है।

दुनिया के शीर्ष 30 फाइनेंशियल सर्विसेज मार्केट्स में मुंबई, दिल्ली एनसीआर और बेंगलुरु शामिल: रिपोर्ट

11-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत फाइनेंशियल सर्विसेज के लिए एक प्रमुख ग्लोबल टैलेंट हब के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। मुंबई, दिल्ली एनसीआर और बेंगलुरु दुनिया के टॉप 30 फाइनेंशियल सर्विसेज मार्केट में से एक हैं। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई थी। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी ‘कोलियर्स इंडिया’ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय शहर श्रम की उपलब्धता, टैलेंट पाइपलाइन, वेंचर कैपिटल फंडिंग गतिविधियों और इंडस्ट्री आउटपुट के मामले में अच्छी स्थिति में हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंशियल सर्विस कंपनियां अपनी लोकेशन से जुड़ी रणनीतियों पर फिर से विचार कर रही हैं, क्योंकि वे टैलेंट तक पहुंच, लागत के मामले में प्रतिस्पर्धा और तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि फाइनेंशियल सर्विस टैलेंट के लिए मुंबई को बड़े इंटरनेशनल मार्केट के साथ-साथ प्रमुख ‘ग्लोबल सेंटर्स’ में शामिल किया गया, जबकि दिल्ली एनसीआर एक अहम ‘रणनीतिक केंद्र’ के तौर पर उभरा।
वहीं, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे की पहचान दुनिया के प्रमुख ‘डोमेस्टिक और ऑपरेशनल सेंटर्स’ के तौर पर की गई। इसके अलावा, एशिया-पैसिफिक लेबर इंडेक्स रैंकिंग में बेंगलुरु, मुंबई और पुणे ने टॉप तीन स्थान हासिल किए। कॉलियर्स इंडिया में ऑफिस सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर अर्पित मल्होत्रा ​​ने कहा, “बेहतरीन टैलेंट, टेक्नोलॉजी की जानकारी और बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता के दम पर भारत तेजी से ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विस हब के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि जैसे-जैसे कंपनियां पारंपरिक ग्लोबल फाइनेंशियल हेडक्वार्टर और डिलीवरी सेंटरों से आगे देख रही हैं, भारतीय शहर रणनीतिक और हाई-वैल्यू वाले बिजनेस कामों में मदद करने के लिए अच्छी स्थिति में हैं।
मल्होत्रा ​​के अनुसार, प्रमुख ग्लोबल और घरेलू बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विस और इंश्योरेंस (बीएफएसआई) कंपनियों द्वारा ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग के कारण, अगले कुछ सालों में भारत में ऑफिस की कुल मांग में इस सेक्टर की हिस्सेदारी 15-20 प्रतिशत तक हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, टैलेंट की उपलब्धता और क्षमता के मामले में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे आगे बना हुआ है। दिल्ली एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु इस क्षेत्र में फाइनेंशियल सर्विस टैलेंट के लिए सबसे मजबूत मार्केट में शामिल हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का फाइनेंशियल सर्विस इकोसिस्टम लगातार विविधतापूर्ण होता जा रहा है। शहर अपनी फ्रंट-ऑफिस क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं और साथ ही डिजिटल बैंकिंग, रिस्क मैनेजमेंट, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में वैल्यू चेन में ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं।





 

होर्मुज के पास हुए जहाज हादसे में तीन भारतीय नाविकों की मौत, केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने की पुष्टि

11-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एमटी सेट्टेबेलो तेल टैंकर हादसे के बाद लापता बताए जा रहे तीन भारतीयों के मौत की पुष्टि की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सोनोवाल ने इस दुखद घटना पर खेद जताया। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ” पलाऊ के झंडे वाले एमटी सेट्टेबेलो पर हुई दुखद घटना के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ। दुख की बात है कि शुरू में लापता बताए गए तीन भारतीय नाविकों के शव मिलने और उनकी पहचान होने के बाद अब उनकी मौत की पुष्टि हुई है।”
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बचाए गए भारतीय नाविकों को जल्द से जल्द भारत वापस लाया जाए। साथ ही जिन नाविकों की मौत हुई है, उनके पार्थिव शरीर भी जल्दी भारत पहुंचाए जाएं ताकि परिवार अंतिम संस्कार कर सकें। मंगलवार को ही एक पालाउ-ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ था। इसमें मौजूद 24 में से 21 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था, जबकि तीन लापता बताए गए। भारत ने इस हमले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को पुष्टि की कि उन्होंने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के उप प्रमुख जैसन मीक्स को तलब कर इस घटना पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था। अमेरिकी सेना की यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया था कि उसने मंगलवार शाम ओमान की खाड़ी से गुजर रहे सेट्टेबेलो नामक जहाज पर अचूक हमला किया था। सेंटकॉम के अनुसार, जहाज ईरानी तेल ले जा रहा था और चालक दल ने अमेरिकी बलों के निर्देशों का पालन नहीं किया था।
हालांकि, जहाज एक रासायनिक एवं तेल उत्पाद टैंकर था, जिसने ओमान के सोहार बंदरगाह से लगभग 20 समुद्री मील (करीब 37 किलोमीटर) उत्तर-पूर्व में इंजन रूम में आग लगने की सूचना दी थी। इसके बाद जहाज से आपातकालीन सहायता की मांग की गई थी। सूचना मिलने पर रॉयलस नेवी ऑफ ओमान ने बचाव अभियान शुरू किया था।









 

अहमदाबाद मेट्रो चरण-2(ए) को कैबिनेट की मंजूरी, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी होगी बेहतर: प्रधानमंत्री मोदी

11-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण-2(ए) को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे अहमदाबाद के शहरी परिवर्तन को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि परियोजना से विशेष रूप से एयरपोर्ट तक पहुंच बेहतर होगी और लोगों को तेज, सुगम तथा सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण-2(ए) को मंजूरी मिलने से कनेक्टिविटी में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि यह विस्तार यातायात के दबाव को कम करेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और सतत शहरी विकास को बढ़ावा देगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण-2(ए) को मंजूरी दी थी। इस चरण के तहत करीब 6.032 किलोमीटर लंबे नए मेट्रो कॉरिडोर का विकास किया जाएगा। इसका उद्देश्य एयरपोर्ट तक निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना और उन प्रमुख आवासीय तथा व्यावसायिक क्षेत्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ना है, जहां वर्तमान में प्रभावी सार्वजनिक परिवहन सुविधा का अभाव है।
इस कॉरिडोर में कुल पांच स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें चार एलिवेटेड और एक अंडरग्राउंड स्टेशन शामिल होगा। चरण-2(ए) के पूरा होने के बाद अहमदाबाद-गांधीनगर कॉरिडोर में सक्रिय मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई 77.63 किलोमीटर हो जाएगी। इस चरण के तहत आश्रम रोड, कोटेश्वर प्राचीन मंदिर, साबरमती नदी, सरदार नगर और एयरपोर्ट स्टेशन विकसित किए जाएंगे।
परियोजना की कुल लागत, जिसमें निर्माण अवधि के दौरान ब्याज (आईडीसी) भी शामिल है, 2,169.04 करोड़ रुपए आंकी गई है। यह विस्तार अहमदाबाद के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य प्रमुख आवासीय और वाणिज्यिक केंद्रों को अहमदाबाद-गांधीनगर मेट्रो कॉरिडोर से सुचारू रूप से जोड़ना है।
सरकार के अनुसार, यह परियोजना 2029 में प्रस्तावित विश्व पुलिस खेलों और 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों के मद्देनजर क्षेत्र में खेल सुविधाओं के विकास को भी बढ़ावा दे सकती है। इसके अलावा, बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी से पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे निवासियों और आगंतुकों दोनों को लाभ मिलेगा।
अहमदाबाद मेट्रो के चरण-2(ए) से निर्माण कार्य के चरम समय में लगभग 2,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं, परियोजना के संचालन और रखरखाव के दौरान करीब 500 लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सरकार का मानना है कि यह परियोजना यातायात जाम कम करने, प्रदूषण घटाने और शहर में जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।







 

नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल बैठक 11 जून को, पीएम मोदी करेंगे अध्यक्षता

10-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को लेकर केंद्र सरकार 11 जून को एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक की थीम “विकसित भारत @2047 के लिए समावेशी मानव विकास” रखी गई है।
बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल और प्रशासक, केंद्रीय मंत्री तथा नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे। चर्चा का केंद्र बिंदु यह होगा कि देश के हर नागरिक तक विकास का लाभ कैसे पहुंचाया जाए और विकसित भारत के विजन को जमीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाए।
नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल बैठक में समावेशी मानव विकास के चार प्रमुख स्तंभों पर विचार-विमर्श होगा। इनमें मजबूत मानव पूंजी और भविष्य के लिए तैयार कौशल, रोजगार, उद्यमिता और विकेंद्रीकृत विकास, स्वास्थ्य, पोषण और कल्याण, तथा समानता और गरिमा शामिल हैं।
बैठक में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, कौशल विकास को मजबूत करने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही शासन व्यवस्था, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), डेटा आधारित प्रणाली और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बेहतर समन्वय के जरिए विकास के लक्ष्यों को हासिल करने की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
बैठक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य राज्यों के विकास विजन को राष्ट्रीय विजन के साथ जोड़ना भी है, ताकि पूरे देश में संतुलित और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके।
इसके अलावा, दिसंबर 2025 में आयोजित मुख्य सचिवों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन की सिफारिशों पर भी चर्चा होगी। सम्मेलन में प्रारंभिक बाल शिक्षा, स्कूली शिक्षा, स्किलिंग, उच्च शिक्षा और खेल एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों जैसे विषयों पर सुझाव दिए गए थे।
सरकार का मानना है कि यह बैठक विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को और मजबूत करेगी तथा मानव विकास से जुड़े क्षेत्रों में ठोस और मापनीय परिणाम सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।





 

इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने पीएम मोदी को दी बधाई, भारत-इटली साझेदारी को बताया भविष्य की राह

10-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने का नया कीर्तिमान स्थापित करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इटली की उनकी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी ने शुभकामनाएं दी हैं। जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए बधाई दी। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं, जो एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि है।”
मेलोनी ने हाल ही में रोम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई मुलाकात का उल्लेख करते हुए आगे लिखा कि उनसे दोबारा मिलना बेहद सुखद रहा। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने मिलकर भारत और इटली के बीच एक “विशेष रणनीतिक साझेदारी” की शुरुआत की है, जो भविष्य को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों और उनके नागरिकों के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी।
ज्ञात हो, पीएम मोदी 19-20 मई 2026 को आधिकारिक यात्रा पर इटली गए थे। मेलोनी ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक खास संदेश भी पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा, “रोम में आपका स्वागत है, मेरे दोस्त!”
दोनों देशों के बीच सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में लगभग 15 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे। वहीं, सांस्कृतिक आदान-प्रदान वर्ष 2027 के लिए भारत-इटली ‘ईयर ऑफ कल्चर एंड टूरिज्म’ शुरू करने का निर्णय लिया गया था।
इस दौरान एक मेलोडी क्षण भी काफी चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इतालवी समकक्ष को मेलोडी टॉफी उपहार स्वरूप दी थी। खुशी का इजहार करते हुए मेलोनी ने कहा था कि ये उपहार बहुत अच्छा है।
दरअसल, पीएम मोदी ने बुधवार को उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिनों का कार्यकाल पूरा किया। यही वजह है कि दुनिया के तमाम देशों से उन्हें बधाई दी जा रही है। इसमें मालदीव के राष्‍ट्रपति, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके, पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे, त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला-बिसेसर समेत कई नेता शामिल हैं। सभी देशों ने संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई और पीएम मोदी की इस उपलब्धि को ऐतिहासिक और अद्भुत करार दिया है।



















 

अमरावती में केंद्रीय सरकारी कार्यालय परिसर को CCEA की मंजूरी, 1,299 करोड़ रुपये की परियोजना

10-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती में सेंट्रल गवर्नमेंट जनरल पूल ऑफिस एकॉमोडेशन (CGGPOA) के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना विभिन्न केंद्रीय सरकारी कार्यालयों को एक ही परिसर में स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है, जिससे विभागों के बीच बेहतर समन्वय और प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ाई जा सके।
यह कार्यालय परिसर 5.53 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा और इसमें दो प्रमुख ब्लॉक बनाए जाएंगे। एक ब्लॉक प्लॉट C-9 पर ग्राउंड प्लस 13 मंजिलों का होगा, जबकि दूसरा ब्लॉक प्लॉट C-8 पर ग्राउंड प्लस 10 मंजिलों का बनाया जाएगा। परियोजना का कुल निर्मित क्षेत्रफल लगभग 23.25 लाख वर्ग फुट (2,16,032 वर्ग मीटर) होगा।
सरकार के अनुसार, इस परिसर में करीब 8,000 अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा लगभग 1,800 कारों के लिए पार्किंग सुविधा भी विकसित की जाएगी।
परियोजना को पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा दक्ष बनाने के लिए इसे भारत के उच्चतम ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप डिजाइन किया जाएगा। परिसर को कम से कम GRIHA 4-स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ विकसित किया जाएगा और यह एनर्जी कंजर्वेशन एंड सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड (ECSBC) 2024 का पालन करेगा।
कार्यालय परिसर में कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए बैंक, एटीएम, डाकघर, क्रेच, मनोरंजन कक्ष, महिला विश्राम कक्ष, 100 सीटों वाला कॉन्फ्रेंस हॉल, 500 सीटों वाला बहुउद्देश्यीय हॉल और चार कैंटीन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। साथ ही, दिव्यांगजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिसर को पूरी तरह बैरियर-फ्री बनाया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस परियोजना से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। निर्माण चरण के दौरान प्रतिवर्ष लगभग 7 लाख मानव-दिवस रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है, जबकि संचालन चरण में करीब 50 हजार मानव-दिवस रोजगार सृजित होंगे।
इस परियोजना की अनुमानित लागत 1,299.08 करोड़ रुपये है, जिसका वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा बजटीय सहायता से किया जाएगा। परियोजना का क्रियान्वयन आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तहत केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा किया जाएगा। सरकार ने बताया कि निविदा प्रक्रिया की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और टेंडर दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।





 

बिरसा मुंडा सामाजिक न्याय की खोज में राष्ट्र का मार्गदर्शन करते रहेंगे: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

09-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक बिरसा मुंडा को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। बिरसा मुंडा को भारत के सबसे प्रमुख आदिवासी नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों में से एक माना जाता है। 1875 में आज के झारखंड में जन्मे बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और आदिवासी समुदायों पर थोपी गई शोषणकारी जमीन नीतियों के खिलाफ ऐतिहासिक ‘उलगुलान’ या ‘महान विद्रोह’ का नेतृत्व किया।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने एक्स पोस्ट में लिखा, “भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर मैं सम्मानित ‘धरती आबा’ को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिनका जीवन साहस, आत्म-सम्मान और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक था। ऐतिहासिक ‘उलगुलान’ के माध्यम से उन्होंने दमन के खिलाफ प्रतिरोध की भावना जगाई और आदिवासी समुदायों को अपने अधिकारों, पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए प्रेरित किया।”
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा, “यह मेरे लिए गहरे व्यक्तिगत सम्मान की बात है कि मुझे झारखंड के राज्यपाल के रूप में पदभार संभालने के पहले ही दिन और हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में उनके पवित्र जन्मस्थान ‘उलिहातू’ पर श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर मिला।”
उल्लेखनीय है कि अपने आंदोलन के जरिए बिरसा मुंडा ने हजारों आदिवासी लोगों को उनके अधिकारों, पहचान और पारंपरिक जमीन के मालिकाना हक के लिए लड़ने के लिए एकजुट किया। हालांकि उनका आंदोलन मुख्य रूप से छोटानागपुर क्षेत्र तक ही सीमित था, लेकिन बिरसा मुंडा की विरासत असम सहित कई राज्यों में भी काफी असरदार है। असम में बड़ी संख्या में आदिवासी आबादी और ‘टी ट्राइब’ (चाय बागान में काम करने वाले आदिवासी समुदाय) के लोग रहते हैं, जिनके पूर्वज औपनिवेशिक काल के दौरान छोटानागपुर पठार से वहां जाकर बस गए थे।
असम के चाय बागान समुदाय के कई लोगों की जड़ें उन इलाकों से जुड़ी हैं, जहां बिरसा मुंडा ने संघर्ष किया था और वे आज भी उन्हें प्रतिरोध, सम्मान और सशक्तिकरण का प्रतीक मानते हैं। हाल के वर्षों में आदिवासी अधिकारों के लिए उनके योगदान को काफ़ी पहचान मिली है।
केंद्र सरकार ने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का सम्मान करने और भारत की समृद्ध आदिवासी विरासत का जश्न मनाने के लिए बिरसा मुंडा की जयंती यानी 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में घोषित किया है।
असम भर के राजनीतिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और आदिवासी समूहों ने भी इस महान नेता को श्रद्धांजलि दी और मूल निवासी तथा हाशिए पर रहने वाले समुदायों के अधिकारों की लड़ाई में उनकी भूमिका को याद किया।
9 जून 1900 को 25 साल की उम्र में ब्रिटिश हिरासत में बिरसा मुंडा का निधन हो गया था, लेकिन उनकी विरासत आज भी देश भर की पीढ़ियों को प्रेरित करती है। 



 


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