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आदिवासी समुदाय लोकतंत्र की जननी: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

21-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस समारोह में शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने आदिवासी समुदायों के योगदान को याद करते हुए कहा कि भारत का इतिहास उनके बिना अधूरा है और यही समुदाय हमारे लोकतंत्र की सच्ची जननी है।
राष्ट्रपति ने कहा कि प्राचीन काल के गणराज्यों से लेकर आज तक आदिवासी परंपराओं में लोकतांत्रिक मूल्य जीवंत रहे हैं। बस्तर का मुरिया दरबार इसका जीता-जागता उदाहरण है, जो सदियों से आदिवासियों की अपनी संसद के रूप में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में आदिवासी विरासत की जड़ें बहुत गहरी हैं।
उन्होंने खुशी जताई कि छत्तीसगढ़ सरकार ने इस साल 1 से 15 नवंबर तक पूरे राज्य में भव्य स्तर पर आदिवासी गौरव पखवाड़ा मनाया। उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का भी जिक्र किया। पिछले साल गांधी जयंती पर शुरू हुआ ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ देश के 50 मिलियन से ज्यादा आदिवासी भाई-बहनों तक पहुंचेगा। इसी तरह 2023 में शुरू हुआ प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन) खास तौर पर 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास के लिए बनाया गया है।
बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर शुरू किए गए ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ की चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि इसके तहत देशभर में करीब 20 लाख स्वयंसेवकों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। ये स्वयंसेवक गांव-गांव जाकर आदिवासी समुदायों के विकास में सीधे योगदान देंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में लोग अब उग्र वामपंथी हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त कोशिशों से जल्द ही वामपंथी उग्रवाद का पूरी तरह खात्मा हो जाएगा। हाल ही में हुए बस्तर ओलंपिक्स में डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों की भागीदारी इसका सुखद संकेत है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने भरोसा दिलाया कि आदिवासी आइकॉनों के आदर्शों पर चलते हुए छत्तीसगढ़ के लोग एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देंगे। समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग मौजूद रहे और राष्ट्रपति के संबोधन का तालियों से स्वागत किया।
 

भारत में 5G सब्सक्रिप्शन का बढ़ रहा आंकड़ा, 2031 के अंत तक 1 अरब के पार होने का अनुमान

21-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारत के वर्ष 2031 के अंत तक 1 अरब 5जी सब्सक्रिप्शन के आंकड़े को पार कर जाने का अनुमान है। यह जानकारी गुरुवार को आई एक रिपोर्ट में दी गई। एरिक्सन मोबिलिटी रिपोर्ट के नवंबर 2025 एडिशन के अनुसार, इससे देश में 79 परसेंट 5जी सब्सक्रिप्शन पेनिट्रेशन होगा। यह देश भर में सर्विस को अपनाने में तेजी से हो रही बढ़ोतरी को दिखाता है।
रिपोर्ट बताती है कि भारत विश्व भर में तेजी से बढ़ते 5जी मार्केट में से एक बना हुआ है। इस वर्ष के अंत तक देश में 5जी यूजर्स की संख्या 394 मिलियन होने का अनुमान है, जो कि कुल मोबाइल सब्सक्राइबर्स का 32 प्रतिशत हिस्सा होगा। एरिक्सन इंडिया के एमडी नितिन बंसल ने कहा कि भारत में मोबाइल डेटा का इस्तेमाल दुनिया भर में सबसे अधिक है, जिसमें प्रत्येक स्मार्टफोन के लिए एवरेज कंज्प्शन 36 जीबी/मंथ बना हुआ है। इसके 2031 तक 65 जीबी तक बढ़ने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि 5जी एफडब्ल्यूए (फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस) इक्विप्मेंट और हेवी डेटा इस्तेमाल इस वृद्धि को बढ़ा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर रिपोर्ट का अनुमान है कि 2031 तक 5जी सब्सक्रिप्शन का आंकड़ा 6.4 अरब तक पहुंच जाएगा, जो कि समग्र मोबाइल सब्सक्रिप्शन का 66 प्रतिशत से अधिक हिस्सा होगा। अकेले 2025 में ग्लोबल 5जी सब्सक्रिप्शन के 2.9 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जो कि एक सिंगल ईयर में 600 मिलियन की वृद्धि को दर्शाता है। नेटवर्क कवरेज भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें 2025 में अतिरिक्त 400 मिलियन लोगों को 5जी एक्सेस मिलेगा।
2024 की तीसरी से 2025 की तीसरी तिमाही के बीच मोबाइल नेटवर्क डेटा ट्रैफिक में 20 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है, जो कि मुख्य रूप में भारत और चीन की वजह से देखा गया। 2025 तक 5जी नेटवर्क मोबाइल डेटा के 43 प्रतिशत को हैंडल करेंगे, जो कि 2031 तक 83 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज करवा सकता है। 5जी इस्तेमाल के मामले में फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस लगातार बढ़ रहा है। ईएमआर का अनुमान है कि 2031 तक 1.4 अरब लोग एफडब्ल्यूए से कनेक्ट हो जाएंगे, जिसमें 90 प्रतिशत यूजर्स 5जी नेटवर्क पर होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में 159 सर्विस प्रोवाइडर्स पहले से ही 5जी बेस्ड एफडब्ल्यूए सर्विस उपलब्ध करवा रहे हैं, जो कि दुनिया भर के एफडब्ल्यूए ऑपरेटर्स के 65 प्रतिशत हिस्से को दर्शाता है।

जनता तक पहुंचे केवल सुरक्षित दवाएं इसलिए बाजार से हटाई जा रही संदिग्ध दवाएं

21-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। देश में दवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी को मजबूत करने के लिए केंद्रीय और राज्य औषधि नियामक संस्थान लगातार सक्रिय हैं। इन्हीं प्रयासों के तहत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) हर माह मानक के अनुरूप न होने वाली (NSQ) और संदिग्ध (Spurious) दवाओं की सूची जारी करता है।
अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं ने 63 दवा नमूनों को गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरने वाला पाया है। वहीं, राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं ने 148 दवा नमूनों को NSQ की श्रेणी में रखा है। यह ध्यान देने योग्य है कि किसी दवा नमूने का NSQ पाया जाना केवल उसके विशेष बैच तक सीमित होता है और इससे बाजार में उपलब्धy अन्य बैचों या ब्रांडों की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
रिपोर्ट में चिंता का विषय यह भी सामने आया कि बिहार से तीन और दिल्ली से दो दवा नमूने संदिग्ध (Spurious) पाए गए हैं। जांच में पता चला कि ये दवाएं अनधिकृत निर्माताओं द्वारा तैयार की गई थीं, जिन्होंने अन्य कंपनियों के ब्रांड नामों का गलत इस्तेमाल किया। वर्तमान में यह मामला जांच के अधीन है और दोषियों के खिलाफ नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
CDSCO और राज्य औषधि नियामकों की संयुक्त पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मानक के अनुरूप न होने वाली और संदिग्ध दवाएं बाजार से हटाई जाएं, ताकि जनता तक केवल सुरक्षित और प्रभावी दवाएं ही पहुंच सकें। विभिन्न स्तरों पर नियामकों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि देश की नियामक प्रणाली सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए निरंतर सुदृढ़ हो रही है।

अफ्रीका में G20 शिखर सम्मेलन का होना खास, कई ग्लोबल मुद्दों पर चर्चा होगी : पीएम मोदी

21-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के निमंत्रण पर आज शुक्रवार को 20वें G20 लीडर्स समिट में शामिल होने के लिए दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग जा रहे हैं। उन्होंने सुबह उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के लिए उड़ान भरी। यह शिखर सम्मेलन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अफ्रीका में आयोजित होने वाला पहला G20 शिखर सम्मेलन होगा। 2023 में भारत की G20 की अध्यक्षता के दौरान, अफ्रीकी संघ G20 का सदस्य बन चुका था।
इससे पहले अपने प्रस्थान वक्तव्य में पीएम मोदी ने कहा कि यह समिट दुनिया भर के जरूरी मुद्दों पर बात करने का एक मौका होगा। इस साल के G20 की थीम ‘एकजुटता, समानता और स्थिरता’ है, जिसके जरिए साउथ अफ्रीका ने नई दिल्ली, भारत और रियो डी जेनेरियो, ब्राजील में हुए पिछले समिट्स के नतीजों को आगे बढ़ाया है। मैं समिट में ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘एक धरती, एक परिवार और एक भविष्य’ के हमारे विजन के हिसाब से भारत का नजरिया पेश करूंगा।
वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, “साउथ अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में G20 समिट में शामिल होने जा रहा हूं। यह एक खास समिट है क्योंकि यह अफ्रीका में हो रहा है। वहां कई ग्लोबल मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान दुनिया के कई नेताओं से मिलेंगे।”
तीन सेशन के टाइटल हैं- इनक्लूसिव और सस्टेनेबल इकोनॉमिक ग्रोथ, जिसमें कोई पीछे न छूटे: हमारी इकॉनमी बनाना; ट्रेड की भूमिका; डेवलपमेंट और कर्ज के बोझ के लिए फाइनेंसिंग; एक मजबूत दुनिया- G20 का योगदान: डिजास्टर रिस्क में कमी; क्लाइमेट चेंज; सही एनर्जी ट्रांजिशन; फूड सिस्टम और सभी के लिए एक सही और न्यायपूर्ण भविष्य: जरूरी मिनरल्स; अच्छा काम; आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस।
समिट के दौरान, G20 लीडर्स और प्रधानमंत्री मोदी जोहान्सबर्ग में मौजूद कुछ नेताओं के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पीएम मोदी साउथ अफ्रीका द्वारा होस्ट की जा रही इंडिया-ब्राजील-साउथ अफ्रीका (आईबीएसए) लीडर्स मीटिंग में भी हिस्सा लेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, भारत ने उन प्रयासों का सफलतापूर्वक मार्गदर्शन किया जिनके परिणामस्वरूप अफ्रीकन यूनियन को G20 में शामिल किया गया। इस उपलब्धि को 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान एक “लैंडमार्क” के रूप में रेखांकित किया गया। G20 लीडर्स समिट 22 और 23 नवंबर को साउथ अफ्रीका के सबसे बड़े शहर और इकोनॉमिक हब जोहान्सबर्ग में होने वाला है।
 

राष्ट्रपति भवन में 22 नवंबर से इस समय आयोजित होगा ‘चेंज ऑफ गार्ड’ समारोह

21-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। राष्ट्रपति भवन की ओर से गुरुवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह समारोह आगामी शनिवार, 22 नवंबर से सुबह 08:30 बजे से 09:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा। अब तक यह कार्यक्रम गर्मियों के मद्देनजर सुबह 8 बजे से होता था, लेकिन मौसम में ठंड बढ़ने के कारण समय में परिवर्तन किया गया है।
‘चेंज ऑफ गार्ड’ एक सैन्य परंपरा
राष्ट्रपति भवन की उप प्रेस सचिव नविका गुप्ता द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि नए समय का प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू होगा। उल्लेखनीय है कि ‘चेंज ऑफ गार्ड’ एक सैन्य परंपरा है जिसकी शुरुआत इतिहास के पन्नों में कहीं खो गई है। प्राचीन काल से ही किलों, महलों और रक्षा प्रतिष्ठानों में तैनात गार्डों को निश्चित अंतराल पर बदला जाता रहा है, ताकि नई और ताजा टुकड़ी जिम्मेदारी संभाल सके। राष्ट्रपति भवन में यह दायित्व सेरेमोनियल आर्मी गार्ड बटालियन निभाती है।
समारोह को हाल में अधिक दृश्यात्मक और जनसुलभ बनाने के लिए इसका स्वरूप बदला गया है और इसका स्थल भी राष्ट्रपति भवन के फोरकोर्ट में स्थानांतरित किया गया है, जहां आम जनता के लिए पहुंच आसान है।
कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाली बटालियन 
समारोह में भाग लेने वाली 1/5 गोरखा राइफल्स (फ्रंटियर फोर्स) भारतीय सेना की सबसे सशक्त और पुरानी बटालियनों में से एक है। 22 मई, 1858 को स्थापित इस बटालियन ने सभी प्रमुख युद्धों में सक्रिय भागीदारी की है और यह 26 बैटल ऑनर्स, तीन थिएटर ऑनर्स तथा चार बार प्राप्त चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ यूनिट सिटेशन से सम्मानित है।
वहीं, प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड (पीबीजी), जिसकी स्थापना 1773 में हुई थी, भारतीय सेना की वरिष्ठतम रेजिमेंट है। यह रेजिमेंट अपने उत्कृष्ट घुड़सवारों, सक्षम टैंकमैन और पैराट्रूपर्स के लिए प्रसिद्ध है।
समारोह का सबसे आकर्षक हिस्सा घुड़सवारी प्रदर्शन 
समारोह का सबसे आकर्षक हिस्सा पीबीजी द्वारा प्रस्तुत घुड़सवारी प्रदर्शन है, जिसके बाद राष्ट्रगान की धुन के साथ कार्यक्रम का समापन होता है।
करीब 50 मिनट का यह समारोह सेरेमोनियल बैंड की धुनों के साथ शुरू होता है
करीब पचास मिनट का यह समारोह सेरेमोनियल बैंड की धुनों के साथ शुरू होता है। परेड कमांडर के आगमन के बाद पीबीजी के घुड़सवार दक्षिण प्रांगण से प्रवेश करते हैं। इसके बाद 1/5 गोरखा राइफल्स की टुकड़ी मार्च करती हुई आती है। नए और पुराने गार्ड का निरीक्षण किया जाता है और सलामी के बाद नए गार्ड की जिम्मेदारी औपचारिक रूप से सौंप दी जाती है। इसके बाद राष्ट्रीय सलामी दी जाती है।
दर्शकों के लिए 50 रुपये प्रति व्यक्ति पंजीकरण शुल्क निर्धारित
यह समारोह हर शनिवार को आयोजित होता है, बशर्ते उस दिन कोई राजपत्रित अवकाश न हो। दर्शकों के लिए 50 रुपये प्रति व्यक्ति पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसका ऑनलाइन भुगतान करना होता है। यह शुल्क नॉन-रिफंडेबल और नॉन-ट्रांसफरेबल है।
राष्ट्रपति भवन की भव्य पृष्ठभूमि, सुंदर उद्यानों और सुसज्जित सैन्य दलों के बीच यह समारोह देश की सैन्य परंपराओं, अनुशासन और शौर्य का अनूठा प्रदर्शन पेश करता है।

किसानों को बड़ी राहत : पीएम फसल बीमा योजना में अब जंगली जानवर और जलभराव से नुकसान को भी कवर करेगी सरकार

21-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज शुक्रवार को किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में अब दो बड़े नुकसान भी शामिल कर लिए गए हैं, जिनकी किसान लंबे समय से मांग कर रहे थे-पहला, जंगली जानवरों द्वारा फसलों को पहुंचाया गया नुकसान और दूसरा, अत्यधिक बारिश के कारण होने वाली बाढ़ या जलभराव से फसल का नुकसान। चौहान ने एक वीडियो संदेश में कहा कि अब यदि जंगली जानवर किसानों की फसलें खराब करते हैं तो उसका मुआवजा मिलेगा। इसी तरह, यदि भारी वर्षा से खेतों में पानी भर जाता है और फसलें बर्बाद होती हैं, तो वह भी बीमा के तहत कवर किया जाएगा। इस फैसले से देशभर के हजारों किसान लाभान्वित होंगे।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि देश ने 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन का नया रिकॉर्ड बनाया है। कुल उत्पादन 357.73 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 8 प्रतिशत ज्यादा है। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन में 106 मिलियन टन की ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है, जो किसानों की मेहनत, आधुनिक तकनीक के उपयोग और केंद्र सरकार की किसान-हितैषी नीतियों का परिणाम है।वहीं तिलहन और दलहन उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है- तिलहन उत्पादन 42.989 मिलियन टन और कुल दलहन उत्पादन 25.683 मिलियन टन तक पहुंच गया है। चना, मूंग, सोयाबीन और मूंगफली जैसी फसलों में बढ़ोतरी का श्रेय सरकार के आयलसीड मिशन (Oilseeds Mission) और (Pulse Self-Reliance Mission) को दिया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार द्वारा तूर, उड़द, चना और मूंग की एमएसपी पर गारंटीशुदा खरीद ने किसानों को सुरक्षित बाजार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नए प्रावधानों के तहत जंगली जानवरों की सूची और प्रभावित जिलों की पहचान राज्य सरकारें करेंगी। किसानों को फसल नुकसान की सूचना 72 घंटों के भीतर फसल बीमा ऐप पर जियो-टैग तस्वीरों के साथ देनी होगी। यह विस्तारित कवरेज खरीफ 2026 सीजन से लागू होगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों का परिश्रम देश की आत्मनिर्भरता और विकास का मजबूत आधार है और सरकार उनकी सुरक्षा और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है।
 

अफ्रीका में जी20 सम्मेलन में शामिल होने पीएम मोदी हुए रवाना

21-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज शुक्रवार सुबह दक्षिण अफ्रीका के तीन दिवसीय दौरे पर रवाना हो गए। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर रवाना होने से ठीक पहले भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंधों को याद करते हुए कहा कि भारत की 2023 की जी-20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को संगठन का स्थायी सदस्य बनाया गया था। अब अफ्रीका महाद्वीप में आयोजित होने वाला यह पहला जी20 सम्मेलन भारत के लिए गर्व की बात है।
राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के निमंत्रण पर जोहान्सबर्ग में जी20 लीडर्स समिट में हिस्सा लेंगे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वे राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के निमंत्रण पर 21 से 23 नवंबर तक जोहान्सबर्ग में आयोजित 20वें जी20 लीडर्स समिट में हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन अफ्रीका में आयोजित होने वाला पहला जी-20 शिखर सम्मेलन होगा।
जी20 शिखर सम्मेलन की इस वर्ष का थीम ‘समानता, एकजुटता और स्थिरता’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस वर्ष का थीम ‘समानता, एकजुटता और स्थिरता’ है। इसके माध्यम से दक्षिण अफ्रीका, नई दिल्ली और रियो डी जनेरियो में आयोजित पिछले जी-20 सम्मेलनों के निष्कर्षों को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने सम्मेलन में भारत के विजन को बताते हुए कहा कि मैं सम्मेलन में भारत का नजरिया ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ के हमारे दृष्टिकोण के अनुरूप रखूंगा। यह दृष्टिकोण वैश्विक सहयोग, समानता और टिकाऊ विकास के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वैश्विक शांति जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद
इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री जी-20 के अलावा आईबीएसए (भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका) के छठे शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे और अन्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इन बैठकों में आर्थिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शांति जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
भारतीय समुदाय से भी संवाद करेंगे पीएम मोदी
साथ ही प्रधानमंत्री मोदी दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले भारतीय समुदाय से भी संवाद करेंगे। यह समुदाय भारत के बाहर सबसे बड़ा प्रवासी समुदायों में से एक है। प्रधानमंत्री इस अवसर पर प्रवासी समुदाय के अनुभव और योगदान को समझेंगे और उनकी समस्याओं व उपलब्धियों पर चर्चा करेंगे।

भारत का खाद्यान्न उत्पादन बीते 10 वर्षों में 100 मिलियन टन से अधिक बढ़ा

21-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। चावल उत्पादन 1,501.84 लाख टन और गेहूं उत्पादन 1,179.45 लाख टन हो गया है, दोनों में पिछले साल के मुकाबले उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि चावल उत्पादन बढ़कर 1,501.84 लाख टन हो गया है, जो कि पिछले साल के उत्पादन 1,378.25 लाख टन से 123.59 लाख टन अधिक है। गेहूं का उत्पादन भी बढ़कर 1,179.45 लाख टन हो गया है, जो कि पिछले साल के उत्पादन 1,132.92 लाख टन से 46.53 लाख टन अधिक है।
मूंग का उत्पादन बढ़कर 42.44 लाख टन, सोयाबीन का 152.68 लाख टन और मूंगफली का 119.42 लाख टन हो गया है
मूंग का उत्पादन बढ़कर 42.44 लाख टन, सोयाबीन का 152.68 लाख टन और मूंगफली का 119.42 लाख टन हो गया है। सरकार ने आगे बताया कि मक्का और श्री अन्न (बाजरा) का उत्पादन क्रमशः 434.09 लाख टन और 185.92 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह क्रमशः 376.65 लाख टन और 175.72 लाख टन था। उन्होंने आगे कहा, “यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में तेजी से हो रही वृद्धि को दर्शाता है।”
2024-25 में तिलहन उत्पादन 429.89 लाख टन अनुमानित है, मूंगफली-सोयाबीन में बढ़ोतरी और रेपसीड-सरसों 126.67 लाख टन रहने का अनुमान है
2024-25 के दौरान कुल तिलहन का उत्पादन रिकॉर्ड 429.89 लाख टन होने का अनुमान है, जो 2023-24 में हुए 396.69 लाख टन उत्पादन से 33.20 लाख टन अधिक है। यह बढ़ोतरी रिकॉर्ड मूंगफली और सोयाबीन के उत्पादन की वजह से हुई है, जिनका अनुमान क्रमशः 119.42 लाख टन और 152.68 लाख टन है। यह पिछले साल के 101.80 लाख टन और 130.62 लाख टन के मुकाबले 17.62 लाख टन और 22.06 लाख टन अधिक है। रेपसीड और सरसों का उत्पादन 126.67 लाख टन होने का अनुमान है।
कृषि मंत्री ने भविष्य की रणनीतियों के बारे में सीनियर अधिकारियों के साथ भी चर्चा की
कृषि मंत्री ने भविष्य की रणनीतियों के बारे में सीनियर अधिकारियों के साथ भी चर्चा की। उन्होंने भरोसा जताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में शुरू किया गया ‘दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन’ दाल उत्पादन बढ़ाने को मजबूत गति देगा।

भारत और अमेरिका ने बढ़ाई नौसैनिक साझेदारी, एडमिरल त्रिपाठी का वॉशिंगटन दौरा सम्पन्न

21-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने संयुक्त राज्य अमेरिका का आधिकारिक दौरा पूरा किया, इस दौरे का उद्देश्य भारत-अमेरिका के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाना था। इस दौरान, एडमिरल त्रिपाठी ने अमेरिका के वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की, जिनमें अमेरिकी नौसेना सचिव जॉन सी. फेलन, युद्ध उप सचिव एल्ब्रिज कोल्बी, इंडोपैकॉम कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो, यूएस पैसिफिक फ्लीट कमांडर एडमिरल स्टीफन पी. कोहलर और यूएस मरीन फोर्सेस पैसिफिक कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जेम्स एफ. ग्लिन शामिल रहे।

इन बैठकों के दौरान समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने, डोमेन अवेयरनेस बढ़ाने, संचालन में सहयोग बढ़ाने और सूचना साझा करने पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने समुद्री मार्ग और अंडर-सी ढांचे की सुरक्षा के साथ-साथ आपदा राहत, खोज और बचाव संचालन, समुद्री डकैती से निपटने और अन्य गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों में समन्वय बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

वहीं अमेरिकी नौसेना सचिव जॉन सी. फेलन ने एक्स पर पोस्ट किया कि इन बैठकों का उद्देश्य संचालन समन्वय बढ़ाना और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना था, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को स्थिर और खुला बनाए रखे। साथ ही MALABAR, PASSEX, CMF और MILAN जैसे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यासों की समीक्षा की गई और मानवरहित प्रणालियों, खुफिया-सर्विलांस-रेकॉनसेंस, साइबर ऑपरेशन और अंतरिक्ष-सक्षम समुद्री क्षमताओं जैसे नए और उभरते क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई। एडमिरल त्रिपाठी ने हवाई में सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन डिजास्टर मैनेजमेंट एंड ह्यूमेनिटेरियन असिस्टेंस का भी दौरा किया, जहां इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आपदा प्रतिक्रिया, समुद्री संचालन में सहयोग पर बढ़ाने पर चर्चा हुई।

इस दौरान वॉशिंगटन के नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी में उन्होंने विश्वविद्यालय के अध्यक्ष वाइस एडमिरल पीटर ए. गार्विन से मुलाकात की और पेशेवर सैन्य शिक्षा, उच्च शिक्षा सहयोग और प्रशिक्षण आदान-प्रदान की समीक्षा की। एडमिरल त्रिपाठी ने आइजनहावर स्कूल, नेशनल वॉर कॉलेज और कॉलेज ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड साइबरस्पेस में नामांकित भारतीय अधिकारियों के साथ भी बातचीत की।
 

 


दुनिया में बनने वाला हर पांच में एक आईफोन भारत में हो रहा मैन्युफैक्चर, घरेलू स्तर पर भी बढ़ी बिक्री ifone

21-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। दुनिया में बनने वाला हर पांच में एक आईफोन भारत में मैन्युफैक्चर किया जा रहा है। साथ ही, कंपनी की ग्लोबल प्रोडक्शन वैल्यू में देश का योगदान 12 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी एप्पल की फाइलिंग में दी गई। फाइलिंग के मुताबिक, एप्पल की भारतीय इकाई (एप्पल इंडिया) की घरेलू बिक्री वित्त वर्ष 25 में बढ़कर 9 अरब डॉलर हो गई है।
एनालिस्ट की ओर से कहा गया कि एप्पल की कुल वैश्विक आय 416.1 अरब डॉलर है। इसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 2 प्रतिशत के करीब है। हालांकि, आईफोन के उत्पादन में भारत की भूमिका बढ़ रही है। कंपनी की ओर से अब भारत में पहली बार हाई-एंड प्रो और प्रो मैक्स मॉडल का उत्पादन भी शुरू कर दिया है।
फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि 2025 में अमेरिकियों 178.4 अरब डॉलर के एप्पल प्रोडक्ट्स खरीदे थे, जो कि कंपनी की कुल आय का 43 प्रतिशत है। वहीं, भारत की ओर से यूएस को आईफोन शिपमेंट में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। एप्पल की आय में यूरोप 26.7 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दूसरे और ग्रेटर चीन 15.4 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है।
पिछले दस सालों में कंपनी की भारतीय इकाई की आय लगभग आठ गुना बढ़ी है, जिसमें मुख्य रूप से आईफोन, मैकबुक, आईपैड, एयरपोड्स और एक्सेसरीज का योगदान है, जबकि सर्विसेज का कुल बिक्री में योगदान काफी कम है। वित्त वर्ष 25 में एप्पल के इंडिया-बेस्ड प्रोडक्शन की फ्रेट-ऑन-बोर्ड वैल्यू 22 अरब डॉलर थी, जिसमें से 7.5 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया गया।
लोकल मैन्युफैक्चरिंग पूरी तरह से आयातित फोन पर लगने वाली 16 प्रतिशत की कस्टम ड्यूटी को बचाकर कंपनी की घरेलू बिक्री को बढ़ाने में मदद कर रही है।
कंपनी की अर्निंग्स कॉल में, एप्पल के सीईओ टिम कुक ने कहा कि जब रिटेल की बात आती है, तो “हम अपने अब तक के सबसे अच्छे लाइनअप के साथ साल के सबसे बिजी समय में जा रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में, हमने इंडिया और यूएई जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में नए स्टोर और यूएस और चीन में नए स्टोर्स खोले हैं।”

 




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