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पीएम मोदी ने सिटीग्रुप चेयरपर्सन जेन फ्रेजर से की मुलाकात, आर्थिक वृद्धि और निवेश अवसरों पर हुई चर्चा

04-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिटीग्रुप की चेयरपर्सन और CEO जेन फ्रेजर से मुलाकात की। बैठक में भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, निवेश अवसरों, वैश्विक पूंजी प्रवाह और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने पर विस्तृत चर्चा हुई। इसकी जानकारी गुरुवार को सामने आई। 
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में अपने विजन को साझा करते हुए आर्थिक विकास की रफ्तार तेज करने, भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों में विस्तार के अवसर प्रदान करने और देश में विदेशी निवेश बढ़ाने पर जोर दिया।
– भारत में निवेश और पूंजी प्रवाह
– वैकल्पिक ऊर्जा (सौर ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन)
– आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इसके नियमन पर विचार
– भारतीय कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय विस्तार में सिटीग्रुप की भूमिका
सिटीग्रुप की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कंपनी भारत के आर्थिक एजेंडे को मजबूत बनाने, वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने और भारतीय कंपनियों को नए बाजारों में पहुंच बनाने में सक्रिय योगदान देना चाहती है।
जेन फ्रेजर के साथ सिटी इंडिया के CEO के. बालासुब्रमण्यम भी मौजूद रहे। उन्होंने भारत में सिटी की 125 वर्षों पुरानी उपस्थिति और मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया।
बता दें कि सिटीग्रुप मुंबई में 3 से 5 जून तक “सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस” आयोजित कर रही है, जिसमें 1,500 से अधिक ग्राहक और निवेशक भाग ले रहे हैं। वर्ष 2027 में सिटी भारत में अपनी 125वीं वर्षगांठ मनाएगी।
यह मुलाकात वैश्विक वित्तीय संस्थानों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के सुधारवादी एजेंडे और भारत की विकास यात्रा पर बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। 











 

भारतीय वायुसेना ने रचा इतिहास, नवी मुंबई एयरपोर्ट पर पहली बार उतरा सुखोई-30 एमकेआई

04-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारतीय वायुसेना ने गुरुवार को एक नया इतिहास रच दिया। वायुसेना का अत्याधुनिक लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई पहली बार नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा। जैसे ही यह शक्तिशाली लड़ाकू विमान रनवे पर उतरा, उसकी गरिमामय उपस्थिति से पूरा माहौल गूंज उठा। इस ऐतिहासिक क्षण का वहां मौजूद लोगों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
यह उपलब्धि केवल एक सफल लैंडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता, त्वरित तैनाती की योग्यता और देश के तेजी से विकसित हो रहे विमानन एवं एयरोस्पेस बुनियादी ढांचे का भी प्रदर्शन है। सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना का प्रमुख बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है, जो वायु श्रेष्ठता स्थापित करने के साथ-साथ सटीक जमीनी हमले करने में भी सक्षम माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी नागरिक हवाई अड्डे पर लड़ाकू विमान की सफल लैंडिंग यह दर्शाती है कि आवश्यकता पड़ने पर उस हवाई अड्डे का उपयोग सैन्य अभियानों, आपातकालीन तैनाती और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए भी किया जा सकता है। यह भारत की नागरिक और सैन्य विमानन संरचना के बीच बढ़ते समन्वय का भी संकेत है।
इससे पहले अक्टूबर 2024 में इसी हवाई अड्डे के रनवे पर भारतीय वायुसेना के सी-295 परिवहन विमान ने पहली ऐतिहासिक लैंडिंग की थी। उस अवसर पर सुखोई-30 ने आसमान में फ्लाईपास्ट किया था। अब पहली बार सुखोई-30 एमकेआई का रनवे पर उतरना वायुसेना की क्षमता विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
भारतीय वायुसेना ने इस उपलब्धि के साथ एक बार फिर प्रदर्शित किया है कि वह किसी भी परिस्थिति में देश के विभिन्न हवाई अड्डों से संचालन करने में सक्षम है। सुखोई-30 एमकेआई की यह पहली लैंडिंग भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति, आधुनिक सैन्य तैयारी और आत्मविश्वास से भरे एयरोस्पेस क्षेत्र का प्रतीक बन गई है।
गौरतलब है कि सुखोई-30 एमकेआई भारत के सबसे महत्वपूर्ण लड़ाकू विमानों में से एक है। कुछ समय पहले राजस्थान के जैसलमेर में भारतीय वायुसेना ने ‘वायुशक्ति’ अभ्यास के दौरान अपनी सैन्य क्षमता का व्यापक प्रदर्शन किया था। पाकिस्तान सीमा के निकट पोखरण रेंज में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान सुखोई-30 एमकेआई की आकाश भेदी गर्जना ने उसकी मारक क्षमता और शक्ति का परिचय दिया था।
‘वायुशक्ति-26’ नामक इस बड़े युद्धाभ्यास में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और वायुसेना प्रमुख एपी सिंह भी मौजूद थे। अभ्यास के दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता का उल्लेख करते हुए यह संदेश दिया गया कि भारतीय वायुसेना हवा में अपना दबदबा कायम रखने और लंबी दूरी तक सटीक वार करने में पूरी तरह सक्षम है।
युद्धाभ्यास के पहले दिन 18 महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए गए थे, जिनमें आतंकवादी शिविर, दुश्मन की हवाई पट्टियां, पेट्रोलियम भंडार, रडार स्टेशन, बंकर, टैंकों के काफिले, संचार केंद्र, रसद केंद्र और सैन्य वाहनों के काफिले शामिल थे। वायुसेना के जवानों ने अत्यंत सटीकता के साथ इन लक्ष्यों को ध्वस्त किया। इस व्यापक अभ्यास में भारत के उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम भी शामिल रहे। 120 से अधिक विमानों की भागीदारी वाले इस युद्धाभ्यास में सुखोई-30 एमकेआई के अलावा तेजस, राफेल, मिग-29, मिराज-2000 और जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों ने भी हिस्सा लिया।
 

गुजरात: धोलेरा मॉडल बना मिसाल, ड्रम प्लांटेशन से बंजर भूमि में लौटी हरित क्रांति

04-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) गुजरात के धोलेरा के अत्यधिक खारे इलाके में ड्रम-आधारित पौधरोपण का उपयोग करने वाली एक प्रायोगिक वनीकरण तकनीक ने शुरुआती दौर में ही शानदार नतीजे दिखाए हैं। इस तकनीक के तहत पहले बंजर रही जमीन पर लगाए गए 3,200 से अधिक पौधे न केवल जीवित रहे बल्कि कई मामलों में तो एक साल के अंदर ही 12 फुट तक बढ़ गए; जिसके परिणामस्वरूप, इस परियोजना का विस्तार अब अतिरिक्त 20 हेक्टेयर जमीन पर किया जा रहा है।
यह पहल अहमदाबाद जिले के धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (डीएसआईआर) के एक्टिवेशन एरिया के ब्लॉक नंबर 29 में लागू की गई है, जिसे धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (डीएसआईआरडीए) से फंडिंग सपोर्ट मिला है। वन विभाग ने बताया कि यह पहल मिट्टी में अत्यधिक खारापन और लंबे समय तक जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए डिजाइन की गई थी जिसकी वजह से ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र में पेड़-पौधों का उगना बेहद मुश्किल रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि साइट के कुछ हिस्सों में मिट्टी में बहुत ज्यादा इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी और बहुत कम कार्बन की मात्रा पाई जाती है जबकि जलभराव छह महीने तक बना रह सकता है। ऐसी परिस्थितियों में पारंपरिक तरीके से पेड़ लगाने के तरीके ज्यादातर असफल रहे हैं। अगस्त 2025 में अहमदाबाद सोशल फॉरेस्ट्री डिवीजन द्वारा विकसित ‘ड्रम प्लांटेशन’ तरीके का इस्तेमाल करके पौधे लगाए गए थे। इस तरीके में छोटे पौधों को प्लास्टिक के ड्रमों के अंदर रखा जाता है, जिनमें रेत, पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी, वर्मी कम्पोस्ट, कोकोपीट और सूखी घास का एक नियंत्रित मिश्रण भरा होता है।
ड्रमों में छेद किए जाते हैं ताकि हवा का आवागमन बना रहे और उन्हें जमीन में लगभग एक फुट नीचे गाड़ दिया जाता है। इससे पौधों की जड़ें मिट्टी की सबसे ज्यादा खारी परतों से ऊपर रहती हैं।अहमदाबाद सोशल फॉरेस्ट्री डिवीजन की उप वन संरक्षक, डॉ. मीनल जानी ने बताया कि इस तरीके को क्षेत्र की पर्यावरणीय बाधाओं को दूर करने के लिए अपनाया गया था।
उन्होंने कहा, “मिट्टी में बहुत ज्यादा इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी थी, कार्बन की मात्रा न के बराबर थी, और खारापन बहुत ज्यादा था। इसके अलावा, इस क्षेत्र में छह महीने तक पानी जमा रहता है, जिससे पौधों का उगना लगभग असंभव हो जाता है।” उन्होंने आगे कहा, “इस समस्या को हल करने के लिए, हमने ‘ड्रम प्लांटेशन’ तकनीक अपनाई, जिसमें पौधों को विशेष रूप से तैयार किए गए माध्यम से भरे ड्रमों के अंदर, जमीन से कुछ ऊपर की सतह पर लगाया जाता है।”
उन्होंने बताया कि पूरे प्लांटेशन क्षेत्र में एक ‘ड्रिप इरिगेशन’ (बूंद-बूंद सिंचाई) सिस्टम लगाया गया है, और डीएसआईआरडीए ने सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए खारा पानी उपलब्ध कराया है। उनके अनुसार, इस व्यवस्था की वजह से, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लगाए गए पौधों के जीवित रहने की दर काफी अच्छी रही है। डॉ. जानी ने कहा, “एक साल से भी कम समय में, कई पौधे बढ़कर 12 फुट तक ऊंचे हो गए हैं, जो इस तरह की जमीन के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।”
उन्होंने यह भी बताया कि कुछ प्रजातियों में फूल और फल आने शुरू हो गए हैं, जिससे प्लांटेशन क्षेत्र में परागण करने वाले कीटों की वापसी हुई है और पक्षियों की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। इस प्लांटेशन में 15 से ज्यादा तरह के पेड़ शामिल हैं, जिनमें साल्वाडोरा पर्सिका, ब्यूटिया मोनोस्पर्मा, बॉम्बैक्स सीइबा, थेस्पेसिया पॉपुलनिया, फिकस बेंघालेंसिस, फिकस रिलिजियोसा, पेल्टोफोरम पेटरोकार्पम, एकासिया निलोटिका, पोंगामिया पिनाटा, टर्मिनलिया अर्जुन, पिथेसेलोबियम डल्से, अजाडिराक्टा इंडिका, कॉर्डिया डाइचोटोमा और टैमारिंडस इंडिका शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि जिस इलाके को पहले पौधों के लगातार बढ़ने के लिए ठीक नहीं माना जाता था, वहां अब पेड़-पौधे उगने लगे हैं। इससे इकोलॉजिकल हलचल के शुरुआती संकेत मिलने लगे हैं, जैसे कि उस जगह के कुछ हिस्सों में कीड़े-मकोड़े, तितलियां और अपने आप उगने वाली घास का वापस आना।
वन विभाग ने आगे बताया कि इस प्रयोग में इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक के ड्रमों को आने वाले चरणों में हटाकर रीसायकल किया जाएगा, ताकि पर्यावरण के नियमों का पालन हो सके और यह पहल लंबे समय तक बनी रहे। इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, डीएसआईआरडीए ने धोलेरा एक्टिवेशन एरिया में इस पहल को 20 हेक्टेयर और जमीन पर फैलाने की मंजूरी दे दी है।
अगले चरण में, अधिकारियों को उम्मीद है कि वे इसी तकनीक का इस्तेमाल करके प्लांटेशन को और भी बड़े इलाके में फैला पाएंगे, जिसके तहत 50,000 से ज्यादा पौधे लगाने की योजना है। यह प्रोजेक्ट धोलेरा में चल रहे औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण को बेहतर बनाने के बड़े प्रयासो का एक हिस्सा है। धोलेरा को गुजरात में एक बड़े औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर हब के तौर पर विकसित किया जा रहा है।
 

पीएम मोदी और डेल्सी रोड्रिगेज की अहम बैठक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी मजबूत करने पर जोर

04-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) पांच दिवसीय भारत दौरे पर आईं वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विस्तृत और व्यापक बातचीत की। दोनों नेताओं ने भारत-वेनेजुएला द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवाओं और ऑटोमोबाइल उद्योग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि दीर्घकालिक और पारस्परिक लाभ सुनिश्चित किए जा सकें।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत के दौरान वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। दोनों पक्षों ने सहमति व्यक्त की कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और वेनेजुएला के बीच सहयोग को और सशक्त बनाना आवश्यक है।
बैठक में ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों नेताओं ने माना कि विकासशील देशों को आर्थिक स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और विकास से जुड़े साझा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए।
इससे पहले डेल्सी रोड्रिगेज ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात की। बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि नई दिल्ली में डेल्सी रोड्रिगेज से मुलाकात कर उन्हें खुशी हुई और भारत-वेनेजुएला संबंधों को मजबूत करने में उनके लंबे समय से दिए गए योगदान की वह सराहना करते हैं।
रोड्रिगेज बुधवार को पांच दिवसीय भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंची थीं। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के संबंधों को और गहरा करना है। विदेश मंत्रालय ने उनके स्वागत में कहा कि यह दौरा भारत और वेनेजुएला के रिश्तों को नई मजबूती देगा तथा द्विपक्षीय साझेदारी को नई गति प्रदान करेगा।
भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा और निवेश क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग रहा है। भारतीय सरकारी कंपनियों ने वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश किया है और भविष्य में इस सहयोग को और विस्तार देने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। 
 

सरकार 2027 तक 5,000 E85 ईंधन स्टेशन शुरू करेगी: हरदीप सिंह पुरी

04-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत देश में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने के लिए चरणबद्ध तरीके से E85 ईंधन वितरण स्टेशनों का विस्तार करेगा। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR), मुंबई, पुणे और नागपुर सहित प्रमुख शहरी गलियारों में शुरुआत में 100 तक E85 ईंधन स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
नई दिल्ली में मारुति सुजुकी वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल के लॉन्च कार्यक्रम में  उन्होंने कहा कि E85, जिसमें 85 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित होता है, को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों के तहत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए मोनो-फ्यूल मानक के रूप में चिन्हित किया गया है।
उन्होंने कहा कि E85 को भारत के वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ते कदम के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में भी सबसे स्वच्छ ईंधन विकल्पों में से एक माना जा रहा है।
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि फ्लेक्स-फ्यूल अवसंरचना का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। दिसंबर 2026 तक E85 स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 500 की जाएगी और 2027 के अंत तक देश के प्रमुख शहरों में 5,000 आउटलेट स्थापित करने का लक्ष्य है।
भारत की परिवहन व्यवस्था में हो रहे बदलाव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक अब दोपहिया वाहनों से आगे बढ़कर चारपहिया वाहनों तक पहुंच चुकी है, जो इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि यदि नए बिकने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों में से 50 प्रतिशत फ्लेक्स-फ्यूल आधारित हो जाएं, तो इससे 311.8 करोड़ लीटर अतिरिक्त एथेनॉल की मांग पैदा होगी, किसानों की आय में लगभग 12,403 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी और लगभग 66.4 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
उन्होंने कहा, “इससे न केवल ऊर्जा आयात बिल कम होगा, बल्कि किसानों को आय का एक अतिरिक्त और टिकाऊ स्रोत भी मिलेगा। इससे किसान केवल अन्नदाता ही नहीं बल्कि ऊर्जा प्रदाता (ऊर्जादाता) भी बनेंगे।”
कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत के स्वच्छ परिवहन समाधानों की ओर तेजी से बढ़ने के साथ अधिक वाहन निर्माता कंपनियों के फ्लेक्स-फ्यूल क्षेत्र में आने की उम्मीद है।
E85 ईंधन को बढ़ावा ऐसे समय में दिया जा रहा है जब पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे तेल विपणन कंपनियों पर दबाव बढ़ा है और देश में ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है।
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि वैश्विक दबावों के बावजूद भारत में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी जापान की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही है।



 

रक्षा मंत्री ने दोगुनी की फील्ड कमांडरों की वित्तीय शक्तियां, परिचालन दक्षता को मिलेगा बड़ा बल

04-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में रक्षा सेवाओं के लिए वित्तीय शक्तियों के संशोधित प्रत्यायोजन (डेलीगेशन ऑफ फाइनेंशियल पावर्स) को जारी किया। चिकित्सा और निर्माण परियोजनाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में वित्तीय शक्तियों में 100% तक वृद्धि की गई है। कुछ मामलों में यह बढ़ोतरी दोगुने से भी अधिक है। इस कदम से फील्ड कमांडरों की परिचालन क्षमता मजबूत होगी और अनुबंधों को शीघ्र अंतिम रूप देने के साथ परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
संशोधित वित्तीय शक्तियों के तहत चालू वित्त वर्ष के बजटीय आवंटन के अनुरूप राजस्व मार्ग से 1.25 लाख करोड़ रुपए से अधिक की खरीद को समर्थन मिलेगा। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इससे आवश्यक उपकरणों और सेवाओं की खरीद प्रक्रिया तेज होगी तथा सैन्य जरूरतों की समय पर पूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने और विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं पर निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशीकरण तथा अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) से संबंधित वित्तीय शक्तियों को दोगुना कर दिया गया है। इससे स्वदेशी रक्षा तकनीकों और उपकरणों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सेना, नौसेना और वायुसेना के कमांडरों को सौंपी गई विशेष वित्तीय शक्तियों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। तत्काल परिचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए निर्धारित कुल वित्तीय सीमा में भी 100% की बढ़ोतरी की गई है। इससे कमांडर आवश्यक संसाधनों की खरीद और तैनाती से जुड़े फैसले अधिक तेजी से ले सकेंगे।
संशोधित व्यवस्था में अग्रणी सेवा द्वारा संयुक्त-सेवा खरीद को बढ़ावा देने के लिए नए प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। सामान्य खरीद की तुलना में उच्चतर अधिकार क्षेत्र के साथ संयुक्त खरीद प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा वस्तुओं और सेवाओं की खरीद को अधिक विकेंद्रीकृत बनाने के लिए कई नए सक्षम वित्तीय प्राधिकरणों की स्थापना की गई है।
वित्तीय शक्तियां आखिरी बार वर्ष 2021 में अधिसूचित की गई थीं। सैन्य बलों के विस्तार, बजटीय आवंटन में वृद्धि और परिचालन एवं रखरखाव व्यय में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए इन शक्तियों में संशोधन आवश्यक हो गया था। रक्षा मंत्रालय के अनुसार अक्टूबर 2025 में अधिसूचित संशोधित रक्षा खरीद नियमावली के साथ यह नया ढांचा रक्षा खरीद प्रक्रिया को और अधिक तेज तथा प्रभावी बनाएगा।
मंत्रालय का मानना है कि संशोधित वित्तीय शक्तियां त्वरित निर्णय लेने में मदद करेंगी और रक्षा बलों की आवश्यकताओं के अनुरूप संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करेंगी। इससे सैन्य तैयारियों और परिचालन क्षमता को और मजबूती मिलेगी।
इस अवसर पर एनएस राजा सुब्रमणि, उपेंद्र द्विवेदी, कृष्णा स्वामीनाथन, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा उत्पादन) संजीव कुमार, सचिव (पूर्व सैनिक कल्याण) सुकृति लिखी, सचिव (रक्षा वित्त) विश्वजीत सहाय, वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ नागेश कपूर, कंट्रोलर जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स अनुग्रह नारायण दास सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 


 

भारत बना वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद, दीर्घकालिक निवेश में बढ़ा भरोसा: पीयूष गोयल

04-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि दुनिया भर का दीर्घकालिक निवेश अब तेजी से भारत की ओर रुख कर रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में न्यूयॉर्क और टोरंटो के प्रमुख निवेशकों के साथ हुई उनकी बैठकों में हर चर्चा ने भारत की भविष्य की विकास यात्रा पर भरोसे को और मजबूत किया।
उन्होंने कहा कि अब निवेशकों के सामने सवाल यह नहीं है कि भारत में निवेश करना है या नहीं, बल्कि यह है कि वे भारत की विकास गाथा को कितनी जल्दी पहचानते हैं और उसमें कितनी तेजी से भागीदारी करते हैं। मुंबई में आयोजित ‘सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026’ को वर्चुअली संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत को दुनिया का सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य बताया। उन्होंने विनिर्माण, कारोबार करने में आसानी, बुनियादी ढांचे, तकनीक अपनाने और वैश्विक व्यापार साझेदारी को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी रूपरेखा प्रस्तुत की।
वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में पहचाना जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले दो दशकों से अधिक समय तक भी भारत इस स्थिति को बनाए रखेगा। गोयल ने कहा कि भारत ने हर संकट को अवसर में बदलने का काम किया है। देश ने बदलते भू-राजनीतिक और आर्थिक हालात के अनुरूप अपनी प्रक्रियाओं और कारोबारी रणनीतियों को ढाला है, जबकि व्यापार, विनिर्माण, निवेश और उद्योग के लिए आकर्षक गंतव्य बना हुआ है।
कनाडा की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि भारत से अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल उनके साथ गया था। उन्होंने भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर मिले सकारात्मक संकेतों और पेंशन फंड, बीमा कंपनियों तथा अन्य संस्थागत निवेशकों की मजबूत रुचि का उल्लेख किया।
उन्होंने आगे कहा कि न्यूयॉर्क में प्रमुख निवेश फर्मों और लगभग 50 कंपनियों के साथ हुई चर्चाओं ने इस धारणा को और मजबूत किया कि भारत दुनिया के लिए एक विश्वसनीय वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र, भरोसेमंद साझेदार और सुरक्षित निवेश गंतव्य है। इसके पीछे लोकतंत्र, कानून का शासन, निर्णायक नेतृत्व, तकनीकी क्षमता और 140 करोड़ लोगों का विशाल उपभोक्ता बाजार प्रमुख कारण हैं।
भारत में सफल दीर्घकालिक निवेशों के उदाहरण देते हुए मंत्री ने बताया कि हुंडई ने वर्ष 1999 में लगभग 20 करोड़ डॉलर के निवेश के साथ भारत में प्रवेश किया था। उस समय बुनियादी ढांचा सीमित था, लेकिन कंपनी ने भारत में विनिर्माण गतिविधियों के जरिए वर्षों में बड़ा मूल्य सृजित किया और लाभांश, रॉयल्टी तथा पूंजीगत लाभ के रूप में उल्लेखनीय रिटर्न हासिल किया।
उन्होंने जेसीबी का उदाहरण भी दिया और कहा कि कंपनी उस समय भारत आई थी जब देश में बुनियादी ढांचा विकास शुरुआती चरण में था। आज जेसीबी भारत में निर्मित उत्पादों को लगभग 130 देशों में निर्यात कर रही है और साथ ही घरेलू मांग को भी पूरा कर रही है। गोयल ने कहा कि ये उदाहरण दिखाते हैं कि भारत घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों के लिए बड़े पैमाने पर विनिर्माण का समर्थन करने की क्षमता रखता है।
वैश्विक निवेशकों को भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनने का निमंत्रण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत केवल एक बड़ा और तेजी से बढ़ता बाजार ही नहीं है, बल्कि नवाचार, डिजाइन और उन्नत विनिर्माण का भी केंद्र बन रहा है। उन्होंने निवेशकों से आग्रह किया कि वे धैर्यपूर्ण और दीर्घकालिक पूंजी निवेश के साथ भारत की नई तकनीकों और भविष्य के उद्योगों की यात्रा में भागीदार बनें।

पीएम मोदी का ‘सुभाषितम’ संदेश: एकजुटता से कई गुना बढ़ती है राष्ट्र की शक्ति

03-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एकजुटता को लेकर एक प्रेरणादायी ‘सुभाषितम’ संदेश शेयर किया। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने संदेश दिया कि एकजुटता और आपसी सहयोग से राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।
एक्स पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “जब नागरिक एकजुटता और आपसी सहयोग के सूत्र में बंधते हैं, तो राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। भारतवासियों के इसी सामूहिक संकल्प से आज देश उन्नति की नित-नई ऊंचाइयों को छू रहा है।”
‘सुभाषितम’ संदेश के साथ पीएम मोदी ने संस्कृत का एक श्लोक भी साझा किया। श्लोक इस प्रकार है: “धूमायन्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च। 
इस श्लोक का अर्थ यह है कि जिस प्रकार लकड़ियां अलग-अलग होने पर अपनी पूर्ण ऊर्जा प्रकट नहीं कर पातीं, किन्तु एकत्र होने पर प्रज्वलित होकर प्रकाश और ऊष्मा प्रदान करती हैं, उसी प्रकार किसी राज्य की उन्नति, समृद्धि और शक्ति उसके नागरिकों की एकता, पारस्परिक सहयोग तथा सामूहिक संकल्प पर आधारित होती है।
इससे पहले, पीएम मोदी ने मंगलवार को दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम को लेकर संस्कृत सुभाषित संदेश शेयर किया था। ‘एक्स’ पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम वह शक्ति है, जो कठिन से कठिन राह को भी आसान बना देती है। आज हमारे युवा साथी इसी संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।”
वहीं, इस पोस्ट के साथ पीएम मोदी ने एक संस्कृत श्लोक ‘निश्चित्य यः प्रक्रमते नान्तर्वसति कर्मणः। अबन्ध्यकालो वश्यात्मा स वै पण्डित उच्यते॥’ भी शेयर किया था। इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, “जो व्यक्ति किसी कार्य को भली-भांति सोच-समझकर दृढ़ निश्चय के साथ आरंभ करता है और उसे बीच में अधूरा नहीं छोड़ता, जो समय का सदुपयोग करता है तथा अपनी इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है, ऐसा व्यक्ति ही वास्तव में बुद्धिमान होता है।”







 

विश्व साइकिल दिवस पर दिल्ली में निकाली गई जागरूकता रैली, स्वस्थ जीवन के लिए साइकिल अपनाने का दिया संदेश

03-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर राजधानी दिल्ली के हौज खास में बुधवार को साइकिल रैली का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य साइकिलिंग को परिवहन के एक टिकाऊ, स्वस्थ और पर्यावरण-अनुकूल माध्यम के रूप में बढ़ावा देना था, ताकि स्वच्छ गतिशीलता और हरित भविष्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
बीवाईसीएस इंडिया फाउंडेशन की सीईओ भैरवी जोशी ने बताया कि 55 से अधिक शहर ‘बाइसाइकिल मेयर्स’ के जरिए हमसे जुड़े हुए हैं, जो साइकिलिंग को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साइकिलिंग को लेकर हमारा मुख्य कार्य जनजागृति करना है। इसके जरिए लोगों को साइकिल के फायदे बताना और इसका अधिक से अधिक इस्तेमाल करने की अपील करते हैं।
उन्होंने कहा कि साइकिलिंग को सिर्फ एक स्पोर्ट्स एक्टिविटी की दृष्टि से न देखें, बल्कि इसको अपनी लाइफस्टाइल बनाएं। रोजमर्रा के काम के लिए साइकिल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के उप महानिदेशक जगदीश राजेश ने कहा कि ‘साइकिल दिवस’ पर यह एक अच्छी पहल है और हम सभी इसी के लिए यहां एकत्रित हुए हैं। उन्होंने कहा कि साइकिलिंग न सिर्फ अपने शरीर के लिए अच्छी है, बल्कि इसका रोजाना इस्तेमाल करके कहीं न कहीं हम लोग राष्ट्र के लिए योगदान दे सकते हैं।
बाइसाइकिल मेयर दिलीप सभरवाल से बातचीत में कहा, “आज विश्व बाइसाइकिल दिवस है। इसे पूरी दुनिया में मनाया जाता है और आज हम इसे यहां दिल्ली में मना रहे हैं।” उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि हम ‘साइकिल टू वर्क’ को प्रमोट करें। हम मानते हैं कि साइकिल का आविष्कार परिवहन के साधन के रूप में हुआ था। इसी को ध्यान में रखते हुए हम चाहते हैं कि लोग अपने आवागमन के लिए रोजाना साइकिल का इस्तेमाल करें।
दिलीप सभरवाल ने कहा, “प्रदूषण और ट्रैफिक की समस्याएं, शारीरिक परेशानियां और तेल संकट, ऐसी अनेक दिक्कतों का समाधान साइकिल ही है। साइकिल से हर व्यक्ति न सिर्फ फिट रह सकता है, बल्कि तेल की बचत और हवा स्वच्छ होती है। इसी उद्देश्य के साथ हमने बुधवार को दिल्ली में साइकिल रैली का आयोजन किया है।”

 

एनसीआर में 7 जून तक भीषण गर्मी से राहत, 4 जून को येलो अलर्ट

03-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लोगों को फिलहाल भीषण गर्मी और लू से राहत मिलने वाली है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, 7 जून तक मौसम अपेक्षाकृत सुहावना बना रहेगा और अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार नहीं जाएगा।
मौसम विभाग ने 4 जून के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दिन गरज-चमक, तेज हवाओं (40-50 किमी/घंटा) और हल्की बारिश की संभावना है। 3 जून को भी कई इलाकों में बादल छाने, बिजली चमकने और हल्की वर्षा होने की संभावना जताई गई है।
– 3 जून: अधिकतम तापमान 38°C, न्यूनतम 27°C। आर्द्रता 70-45% के बीच रह सकती है। दिनभर गरज-चमक के साथ बहुत हल्की से हल्की बारिश संभव है। दोपहर और शाम में बिजली चमकने की गतिविधियां दिखने की संभावना है।
– 4 जून (येलो अलर्ट): अधिकतम 38°C, न्यूनतम 28°C। आर्द्रता 80-50%। सुबह से ही गरज-चमक और हल्की बारिश शुरू हो सकती है। दोपहर-शाम तेज हवाएं, बिजली और हल्की वर्षा। विभाग ने लोगों को खुले में और पेड़ों के नीचे खड़े न होने की सलाह दी है।
– 5 जून: अधिकतम 37°C, न्यूनतम 28°C। आर्द्रता 80-50%। सुबह, दोपहर और रात में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना।
– 6 जून: अधिकतम 38°C, न्यूनतम 28°C। आंशिक बादल छाए रहेंगे। कोई विशेष चेतावनी नहीं।
आईएमडी के अनुसार, जून के पहले सप्ताह में पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमी गतिविधियों के कारण एनसीआर में मौसम सामान्य से अधिक अनुकूल रहेगा। लगातार बादल, हल्की बारिश और तेज हवाओं से तापमान नियंत्रित रहेगा और उमस के बावजूद भीषण गर्मी से राहत मिलेगी।
एनसीआर के सभी इलाकों — दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम — में अगले कुछ दिनों तक यह राहत भरा मौसम बना रहने की उम्मीद है।




 


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