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संसद भवन के जीएमसी बालायोगी सभागृह में मंगलवार को होगी एनडीए संसदीय दल की बैठक

08-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। इस बीच मंगलवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के संसदीय दल की बैठक होगी। एनडीए संसदीय दल की बैठक कल मंगलवार सुबह 9.30 बजे शुरू होगी। यह बैठक संसद भवन के ग्रंथालय के जीएमसी बालायोगी सभागृह में होगी। भारतीय जनता पार्टी ने अपने सांसदों से बैठक में समय से उपस्थित रहने का अनुरोध किया है।
वहीं, आज सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र का आठवां दिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने पर एक खास चर्चा कर रहे हैं। बंकिम चंद्र चटर्जी के लिखे और 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में पहली बार छपे इस राष्ट्रीय गीत ने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। संसद में इस गीत के ऐतिहासिक महत्व और आज की जरूरत पर चर्चा हो रही है।
लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा की शुरुआत दोपहर 12 बजे से हुई। इस दौरान पीएम मोदी के अलावा अनुराग ठाकुर, बिप्लब देब, बांसुरी स्वराज, संबित्र पात्रा, तेजस्वी सूर्या, संतोष पांडेय, सौमित्र खान और राजनाथ सिंह चर्चा करेंगे। वंदे मातरम बहस से जुड़े शेड्यूल के मुताबिक, सत्ताधारी एनडीए सदस्यों को लोकसभा में इसके लिए तय कुल 10 घंटों में से तीन घंटे दिए गए हैं।
दरअसल, शीतकालीन सत्र शुरू होने से ठीक पहले एक राजनीतिक टकराव शुरू हो गया था, जब राज्यसभा सचिवालय ने कहा था कि सांसदों को संसद के अंदर ‘वंदे मातरम’ और ‘जय हिंद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।विपक्ष ने भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए पर भारत की आजादी और एकता के प्रतीकों से असहज होने का आरोप लगाया।
आपको बता दें, संसद का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा और आने वाले दिनों में ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा हंगामेदार रहने की संभावना है, क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राष्ट्रगीत को लेकर अलग-अलग राय है।














 

लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा- ‘बंकिम दा ने हीन भावना को झकझोरा’

08-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) 18वीं लोकसभा के शीतकालीन सत्र के 8वें दिन सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह केवल एक गीत या राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम और मातृभूमि की आजादी के लिए एक पवित्र संघर्ष का प्रतीक था।
पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा, “बंकिम दा ने जब ‘वंदे मातरम्’ की रचना की तब स्वाभाविक ही वह स्वतंत्रता आंदोलन का पर्व बन गया। तब पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण, ‘वंदे मातरम्’ हर भारतीय का संकल्प बन गया। इसलिए वंदे मातरम् की स्तुति में लिखा गया था कि मातृभूमि की स्वतंत्रता की वेदी पर, मोद में स्वार्थ का बलिदान है। यह शब्द ‘वंदे मातरम्’ है। सजीवन मंत्र भी, विजय का विस्तृत मंत्र भी। यह शक्ति का आह्वान है। यह ‘वंदे मातरम्’ है। उष्ण शोणित से लिखो, वत्स स्थली को चीरकर वीर का अभिमान है। यह शब्द ‘वंदे मातरम्’ है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि ‘वंदे मातरम्’ उस समय लिखा गया था, जब 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार सतर्क थी और हर स्तर पर दबाव और अत्याचार की नीतियां लागू कर रही थी। उस दौर में ब्रिटिश राष्ट्रगान ‘गॉड सेव द क्वीन’ को हर घर तक पहुंचाने की मुहिम चल रही थी। ऐसे समय में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपनी लेखनी से जवाब देते हुए ‘वंदे मातरम्’ लिखा और भारतीयों में साहस और आत्मविश्वास की नई लहर पैदा की।
प्रधानमंत्री ने कहा, “जब हम ‘वंदे मातरम्’ कहते हैं, तो यह हमें वैदिक युग की संस्कृति की याद दिलाता है। वेदों में कहा गया है कि माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः, अर्थात यह भूमि मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूं। यही विचार भगवान राम ने भी व्यक्त किया था, जब उन्होंने कहा कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। आज ‘वंदे मातरम्’ इसी महान सांस्कृतिक परंपरा का आधुनिक रूप है।”
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् केवल अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई का मंत्र नहीं था, बल्कि यह मातृभूमि की मुक्ति की पवित्र जंग का प्रतीक था। यह गीत उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के साहस और बलिदान का सम्मान करता है जिन्होंने इसे अपने आंदोलन का हिस्सा बनाया।
प्रधानमंत्री ने सदन में सभी सांसदों से कहा कि इस अवसर पर पक्ष-प्रतिपक्ष का कोई भेदभाव नहीं है, क्योंकि यह समय है ‘वंदे मातरम्’ के ऋण को स्वीकार करने का, जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने बलिदानों से पूरा किया। उन्होंने याद दिलाया कि आज भारत में जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और आजादी है, वह इसी आंदोलन का परिणाम है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “संसद में बैठे सभी सांसदों के लिए यह अवसर है कि वे इस ऋण को स्वीकार करें और उस पवित्र संघर्ष को याद करें, जिसने हमारी मातृभूमि को स्वतंत्र कराया।” 





























 

ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भारत ने की मदद, श्रीलंका ने किया धन्यवाद

08-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  दितवाह तूफान की वजह से श्रीलंका में भारी तबाही और जानमाल नुकसान हुआ है। इस बीच भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत राहत के लिए मानवीय मदद पहुंचाई है। श्रीलंका ने भारत का मदद के लिए धन्यवाद किया है। श्रीलंका के सांसद नमल राजपक्षे ने भारत के हाई कमिश्नर संतोष झा से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान श्रीलंकाई सांसद नमल राजपक्षे ने राहत और बचाव ऑपरेशन के लिए शुक्रिया अदा किया।
कोलंबो में भारतीय हाई कमीशन ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सांसद नमल राजपक्षे ने हाई कमिश्नर संतोष झा से मुलाकात की और ऑपरेशन सागर बंधु के तहत चल रहे राहत और बचाव के कामों के लिए भारत को धन्यवाद दिया। हाई कमिश्नर ने दोहराया कि भारत श्रीलंका के लोगों को फिर से स्थापित करने और सब सामान्य करने की उनकी कोशिशों में मदद करता रहेगा।”
मीटिंग के बाद, राजपक्षे ने एक्स पर लिखा, “श्रीलंका में बाढ़ के दौरान भारत की तेजी से मदद के लिए दिल से धन्यवाद देने के लिए भारतीय हाई कमिश्नर संतोष झा से बात की। मुश्किल समय में हमेशा सबसे पहले हमारा साथ देने भारत रहा है। भारत सरकार और लोगों का शुक्रगुजार हूं।”
इससे पहले रविवार को, भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत दित्वाह से प्रभावित श्रीलंका को लगभग 1000 टन अतिरिक्त मदद भेजी, जिसमें जरूरी खाने का सामान और कपड़े शामिल थे। इनमें से लगभग 300 टन तीन भारतीय नौसेना जहाजों के जरिए कोलंबो पहुंचा।
हाई कमिश्नर संतोष झा ने राहत सामग्री श्रीलंका के व्यापार, कॉमर्स, फूड सुरक्षा और सहयोग विकास मंत्री वसंथा समरसिंघे को सौंपी। भारतीय सेना ने श्रीलंकाई आर्मी के साथ मिलकर कनेक्टिविटी फिर से बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। भारतीय सेना के इंजीनियरों ने श्रीलंकाई आर्मी के इंजीनियरों और सड़क विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर किलिनोच्ची जिले में परांथन-कराच्ची-मुल्लैतिवु (ए35) रोड पर क्षतिग्रस्त पुल को हटाना शुरू किया। 
 

इंडिगो फ्लाइट रद्द होने पर भारतीय रेलवे ने 89 विशेष ट्रेनें चलाई, यात्री दबाव को किया कम

07-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) इंडिगो एयरलाइन की कई उड़ानों के रद्द होने और सर्दियों के मौसम में यात्रा के बढ़ते दबाव को देखते हुए भारतीय रेलवे ने शनिवार को 89 विशेष ट्रेन सेवाओं की घोषणा की है। ये सेवाएं अगले तीन दिनों में 100 से अधिक यात्राओं को कवर करेंगी और प्रमुख शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली, पुणे, हावड़ा और हैदराबाद में यात्री दबाव को कम करने के लिए चलाई जा रही हैं।
सेंट्रल रेलवे ने 14 विशेष ट्रेनें संचालित करने की घोषणा की है, जो पुणे, बेंगलुरु, हजरत निजामुद्दीन, मडगांव, लखनऊ, नागपुर, गोरखपुर और लोकमान्य तिलक टर्मिनस से जुड़ेंगी। ये ट्रेनें 6 से 12 दिसंबर के बीच चलेंगी। दक्षिण-पूर्व रेलवे ने सांत्रागाची से येलाहंका, हावड़ा से मुंबई CSMT और चेरलापल्ली से शालिमार तक सेवाओं की घोषणा की है, जो 6 से 9 दिसंबर तक चलेंगी। दक्षिण-केंद्र रेलवे (South Central Railway) ने 6 दिसंबर को चेरलापल्ली से शालीमार, सिकंदराबाद से चेन्नई इग्मोर और हैदराबाद से मुंबई LTT तक तीन विशेष ट्रेनें चलाईं।
पूर्व रेलवे हावड़ा, नई दिल्ली, सीलदाह और मुंबई के बीच विशेष ट्रेनें चला रहा है, जो 6 से 9 दिसंबर तक चलेंगी। पश्चिम रेल ने मुंबई सेंट्रल और भिवानी, मुंबई सेंट्रल और शकुर बस्ती, तथा बांद्रा टर्मिनस और दुर्गापुरा के बीच सात विशेष ट्रेनें चलाई हैं। इनकी बुकिंग पहले ही खुल चुकी है। गोरखपुर से अतिरिक्त सेवाएं भी संचालित की जाएंगी, जो 7 से 9 दिसंबर के बीच आनंद विहार टर्मिनल और लोकमान्य तिलक टर्मिनस तक चलेंगी। बिहार के यात्रियों की सुविधा के लिए ईस्ट सेंट्रल रेलवे पटना और दरभंगा से आनंद विहार टर्मिनल तक ट्रेनें चला रहा है, जो 6 से 9 दिसंबर तक चलेंगी।
उत्तरी-पश्चिम रेलवे ने हिसार और खड़की, तथा दुर्गापुरा और बांद्रा टर्मिनस के बीच 7 और 8 दिसंबर को विशेष एक-बारगी ट्रेनें संचालित करने का निर्णय लिया है। उत्तरी रेलवे (Northern Railway) नई दिल्ली–उधमपुर वंदे भारत सेवा 6 दिसंबर को चला रहा है। इसके अलावा, नई दिल्ली से मुंबई सेंट्रल, तिरुवनंतपुरम सेंट्रल और अन्य स्थानों तक भी विशेष ट्रेनें चलेंगी। रेल मंत्रालय ने कहा कि इन अतिरिक्त सेवाओं का उद्देश्य यात्रियों की निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करना और हवाई यात्रा में रुकावट के कारण बढ़ी मांग को पूरा करना है।
 

सैन्य झंडा दिवस पर पीएम मोदी ने की नागरिकों से योगदान की अपील, जवानों के साहस और बलिदान को किया नमन

07-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को सैन्य झंडा दिवस के अवसर पर देश की सशस्त्र सेनाओं के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने नागरिकों से सैन्य झंडा दिवस कोष में योगदान की अपील की। यह कोष युद्ध में घायल हुए सैनिकों, वीर नारियों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए बनाया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सैन्य झंडा दिवस पर हम उन बहादुर जवानों को नमन करते हैं जो अदम्य साहस और समर्पण के साथ देश की रक्षा करते हैं। उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा में लगे इन जवानों के अनुशासन, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा को पूरे देश के लिए प्रेरणादायक बताया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस अवसर पर सशस्त्र बलों के साहस और बलिदान को सलाम किया। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों की निस्वार्थ सेवा देश की सुरक्षा का आधार है और राष्ट्र उनका ऋण कभी नहीं चुका सकता। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे उदारतापूर्वक सैन्य झंडा दिवस कोष में योगदान करें, ताकि जवानों और उनके परिवारों को मजबूत सहयोग मिल सके। रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने भी सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को शुभकामनाएं दीं और देश की सुरक्षा में उनके योगदान को सराहा। इसी प्रकार रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भी नागरिकों से कोष में सहयोग करने का आग्रह किया।
सैन्य झंडा दिवस हर वर्ष 7 दिसंबर को 1949 से मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य शहीदों को श्रद्धांजलि देना, सैनिकों के बलिदान को याद करना और जवानों तथा उनके परिवारों के कल्याण के लिए धन एकत्र करना है। इस दिन लोग झंडे खरीदकर और दान देकर सशस्त्र बलों के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हैं।


 

भारत-रूस: दोनों पक्षों ने मध्य-पूर्व और पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

06-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत आए थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच 23वीं वार्षिक शिखर बैठक आयोजित हुई। मुलाकात का उद्देश्य रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करना था।
बैठक में दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान को लेकर भारत और रूस के बीच घनिष्ठ समन्वय की सराहना की, जिसमें दोनों देशों की सुरक्षा परिषदों के बीच संवाद तंत्र भी शामिल है। उन्होंने मॉस्को फॉर्मेट बैठकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया।
दोनों नेताओं ने आईएसआईएस, आईएसकेपी और उनके सहयोगियों सहित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के खिलाफ आतंकवाद-रोधी अभियानों का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई व्यापक और प्रभावी होगी। साथ ही, उन्होंने अफगान जनता के लिए तत्काल और निर्बाध मानवीय सहायता सुनिश्चित करने की आवश्यकता दोहराई।
मध्य-पूर्व और पश्चिम एशिया में शांति एवं स्थिरता को लेकर दोनों देशों ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने संयम बरतने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और ऐसी कार्रवाइयों से बचने का आह्वान किया जो क्षेत्रीय स्थिति को और बिगाड़ सकती हों। इसके साथ ही, उन्होंने ईरान परमाणु मुद्दे को बातचीत के माध्यम से हल करने के महत्व पर बल दिया।
गाजा की मानवीय स्थिति को लेकर दोनों पक्षों ने चिंता व्यक्त की और संघर्ष की समाप्ति, मानवीय सहायता तथा स्थायी शांति के लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच हुए समझौतों और समझ का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
जलवायु परिवर्तन के विषय पर भी दोनों देशों ने सहयोग को बढ़ाने पर सहमति जताई। उन्होंने यूएनएफसीसीसी और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने के महत्व पर जोर देते हुए 10 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित रूस-भारत संयुक्त कार्य समूह की पहली बैठक का स्वागत किया। इसके अलावा, पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 के तहत कार्यान्वयन प्रणालियों, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने वाली प्रौद्योगिकियों के विकास और सतत वित्तीय साधनों के उपयोग पर द्विपक्षीय वार्ताओं में गति लाने पर भी सहमति बनी।
दोनों देशों ने जी20, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने ब्रिक्स संपर्क समूह के समन्वित कार्य से प्राप्त उपलब्धियों का स्वागत किया, जिसमें ब्रिक्स जलवायु अनुसंधान मंच और व्यापार, जलवायु एवं सतत विकास के लिए ब्रिक्स प्रयोगशाला का शुभारंभ शामिल है। दोनों पक्षों ने 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान जलवायु परिवर्तन से निपटने के क्षेत्र में लाभकारी सहयोग को प्रोत्साहित किया।
भारत और रूस ने अपनी विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के लचीलेपन पर संतोष व्यक्त किया और अपनी विदेश नीति की प्राथमिकताओं के तालमेल को सराहा। दोनों देशों ने कहा कि प्रमुख वैश्विक शक्तियों के रूप में वे बहुध्रुवीय विश्व और बहुध्रुवीय एशिया में शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए प्रयास जारी रखेंगे।
राष्ट्रपति पुतिन ने नई दिल्ली में दिए गए भव्य आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया और 2026 में होने वाले 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए उन्हें रूस आने का आमंत्रण दिया। 
 

राष्ट्रपति भवन में पुतिन का भव्य स्वागत, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सम्मान में दिया रात्रिभोज

06-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत आए। इस दौरान उन्होंने राजधानी दिल्ली में आयोजित 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में भाग लिया। राष्ट्रपति भवन पहुंचने पर पुतिन का औपचारिक और भव्य स्वागत किया गया। वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा उनके सम्मान में आयोजित रात्रिभोज में भी शामिल हुए।
राष्ट्रपति मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस रात्रिभोज में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर रूसी राष्ट्रपति 4-5 दिसंबर को 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे।
दोनों देशों के नेताओं ने भारत और रूस के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के संकल्प को दोहराया। यह वर्ष भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की 25वीं वर्षगांठ का प्रतीक है, जिसकी शुरुआत अक्टूबर 2000 में पुतिन की पहली भारत यात्रा के दौरान हुई थी।
नेताओं ने इस दीर्घकालिक और समय की कसौटी पर खरी उतरी साझेदारी की विशिष्ट प्रकृति पर जोर दिया, जो आपसी विश्वास, एक-दूसरे के मूल राष्ट्रीय हितों के प्रति सम्मान और मजबूत रणनीतिक तालमेल पर आधारित है। उन्होंने रेखांकित किया कि साझा वैश्विक जिम्मेदारियों वाली प्रमुख शक्तियों के रूप में भारत और रूस का यह संबंध वैश्विक शांति और स्थिरता की आधारशिला है।
दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों के बहुआयामी, व्यापक और परस्पर लाभकारी स्वरूप की सराहना की, जो राजनीतिक, रणनीतिक, सैन्य, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, परमाणु, अंतरिक्ष, संस्कृति, शिक्षा और मानवीय सहयोग जैसे विविध क्षेत्रों में फैला हुआ है। इस बात पर संतोष व्यक्त किया गया कि पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ नए क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
जटिल और अनिश्चित वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भी भारत-रूस संबंधों की मजबूती पर दोनों नेताओं ने संतोष व्यक्त किया। दोनों पक्ष एक आधुनिक, संतुलित, टिकाऊ और दीर्घकालिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने रणनीतिक साझेदारी की पूर्ण क्षमता का उपयोग करने पर सहमति जताई।
दोनों नेताओं ने येकातेरिनबर्ग और कजान में भारत के दो नए महावाणिज्य दूतावासों के उद्घाटन का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इनके शीघ्र संचालन से अंतर-क्षेत्रीय सहयोग, व्यापारिक संबंधों और जन-जन के बीच संपर्क को और मजबूती मिलेगी।

 


भारत-रूस: संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग के लिए दोनों देश एकजुट

06-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत आए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर उच्च-स्तरीय राजनीतिक संवाद और सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय समन्वयकारी भूमिका के साथ बहुपक्षवाद को पुनर्जीवित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान को प्राथमिकता देने की महत्वता को रेखांकित किया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत और रूस ने वैश्विक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर सहमति जताई। रूस ने सुधारित और विस्तारित सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के प्रति अपने मजबूत समर्थन की पुनर्पुष्टि की।
दोनों पक्षों ने जी20 मंच पर अपने सहयोग को रेखांकित करते हुए इसे और मजबूत करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि भारत की 2023 की जी20 अध्यक्षता ने वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक एवं वित्तीय एजेंडे में मजबूती से स्थापित किया। अफ्रीकी संघ को जी20 की पूर्ण सदस्यता दिए जाने को भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया। उन्होंने ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ’ वर्चुअल शिखर सम्मेलन के आयोजन का स्वागत किया, जिसने विकासशील देशों की स्थिति को मजबूत किया है।
भारत और रूस ने इस बात पर जोर दिया कि जी20 एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच है, जहां विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को समान और पारस्परिक रूप से लाभकारी संवाद का अवसर मिलता है। उन्होंने आम सहमति और प्रमुख उद्देश्यों पर केंद्रित रहकर जी20 के निरंतर और प्रभावी कामकाज के महत्व को स्वीकार किया।
दोनों देशों ने ब्रिक्स साझेदारी को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया और राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक-वित्तीय तथा सांस्कृतिक और जन-से-जन संपर्क के तीन स्तंभों के तहत विस्तारित ब्रिक्स में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। रूस ने 2026 में भारत की आगामी ब्रिक्स अध्यक्षता को पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया।
भारत और रूस ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के ढांचे में अपने संयुक्त कार्य को भी मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत ने 17-18 नवंबर 2025 को मॉस्को में एससीओ सरकार प्रमुखों की बैठक की सफल मेजबानी के लिए रूस की सराहना की। वहीं, रूस ने भारत की पहल पर स्थापित किए जा रहे ‘एससीओ सभ्यता संवाद मंच’ की प्रशंसा की, जिसका उद्घाटन सत्र 2026 में भारत में आयोजित होगा।
दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय कानून, सांस्कृतिक विविधता और सभ्यतागत मूल्यों पर आधारित एक प्रतिनिधित्वपूर्ण, लोकतांत्रिक और न्यायसंगत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में एससीओ की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही एससीओ में राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और मानवीय सहयोग को मजबूत करने पर भी बल दिया।
इस संदर्भ में दोनों देशों ने एससीओ के आधुनिकीकरण की आवश्यकता जताई, विशेष रूप से आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद, मादक पदार्थों की तस्करी, सीमा-पार संगठित अपराध और सूचना सुरक्षा से संबंधित खतरों से निपटने में। इसके तहत ताशकंद में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए ‘यूनिवर्सल सेंटर’ और दुशांबे में ‘ड्रग प्रिवेंशन सेंटर’ की स्थापना पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई। 
 

बाबा साहब के महापरिनिर्वाण दिवस पर सीएम योगी की श्रद्धांजलि, समानता व न्याय आधारित समाज के लिए की अहम घोषणाएं

06-Dec-2025

 नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि समानता और न्याय पर आधारित समाज बनाना ही हमारी सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि बाबा साहब के विचार भारतीय लोकतंत्र की मजबूत नींव हैं और आज भी हर कमजोर वर्ग को प्रेरणा देते हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज में असमानता और भेदभाव के खिलाफ बाबा साहब का संघर्ष सभी के लिए मार्गदर्शक है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में उन राजनीतिक दलों की आलोचना भी की, जो तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियां देश के हित में नहीं हैं और यह बाबा साहब के आदर्शों का अपमान है। योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार सामाजिक न्याय और समानता पर आधारित काम करती है और हर वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
सीएम योगी ने घोषणा की कि राज्य सरकार अगले एक से दो महीनों के भीतर सभी चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों और सफाई कर्मियों को न्यूनतम मानदेय का लाभ दिलाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम श्रमिकों के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में जहां भी बाबा साहेब की मूर्तियां स्थापित हैं, वहां सरकार सुरक्षित बाउंड्री का निर्माण कराएगी, ताकि किसी भी शरारती तत्व द्वारा मूर्तियों को नुकसान न पहुंचाया जा सके। सीएम योगी ने एक्स पोस्ट पर भी लिखा कि बाबा साहेब के विचार और सिद्धांत भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि आंबेडकर ने जिस समाज का सपना देखा था, वह आज भी सबके लिए मार्गदर्शक है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी लखनऊ में बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने भगवान महात्मा बुद्ध की प्रतिमा पर भी श्रद्धांजलि दी और कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, राज्य मंत्री असीम अरुण, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, महापौर सुषमा खर्कवाल और अन्य प्रतिष्ठित लोग उपस्थित रहे।

 


सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ग्वालियर में स्व. कीर्ति नारायण द्विवेदी को दी श्रद्धांजलि

05-Dec-2025
नई दिल्ली, 5 दिसम्बर रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने शुक्रवार को ग्वालियर प्रवास के दौरान वरिष्ठ पत्रकार एवं हरिभूमि तथा आईएनएच न्यूज चैनल के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के सिंधी कॉलोनी स्थित निवास पर पहुँचकर उनके पिताश्री स्व.कीर्ति नारायण द्विवेदी को श्रद्धांजलि अर्पित की। छत्तीसगढ़ भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए पुष्पांजलि अर्पित की और शोकाकुल परिवार के प्रति शोक संवेदनाएँ व्यक्त कीं। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने स्व. कीर्ति नारायण द्विवेदी की धर्मपत्नी रमा द्विवेदी, डॉ. हिमांशु द्विवेदी सहित परिजन से भेंट कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि स्व. द्विवेदी एक सरल, सौम्य व आदर्शवादी व्यक्तित्व थे। गत 25 नवम्बर को कीर्ति नारायण द्विवेदी का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया था।












 



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