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प्रधानमंत्री मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का किया उद्घाटन, संशोधित ‘उड़ान’ योजना लॉन्च

04-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के जोधपुर में एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने संशोधित ‘उड़ान’ योजना भी लॉन्च की, जिसका उद्देश्य देश में विमानन कनेक्टिविटी का विस्तार और विमानन-आधारित विकास को गति देना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद नए टर्मिनल भवन का निरीक्षण किया। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उन्हें टर्मिनल की विभिन्न विशेषताओं की जानकारी दी। इसके बाद प्रधानमंत्री ने नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया।
यह परियोजना 480 करोड़ रुपए की लागत से विकसित की गई है। 23,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह नया टर्मिनल भवन हर साल 20 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम है। इसमें आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे यात्रियों को अधिक सुगम और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।
राजस्थान की शाही विरासत से प्रेरित इस टर्मिनल की वास्तुकला में मेहराब और झरोखों जैसे पारंपरिक तत्वों को आधुनिक डिजाइन के साथ समाहित किया गया है। ऊर्जा-कुशल प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय और हरित भवन निर्माण पद्धतियां इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं। टर्मिनल को 5-स्टार जीआरआईएचए रेटिंग के अनुरूप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नए टर्मिनल के शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने संशोधित ‘उड़ान’ योजना भी लॉन्च की। इस योजना के तहत 28,840 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इसका उद्देश्य अगले 10 वर्षों में विमानन-आधारित विकास को गति देना और देशभर में व्यापक तथा टिकाऊ हवाई कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है।
योजना के तहत मौजूदा अप्रयुक्त हवाई पट्टियों का उपयोग करते हुए 100 हवाई अड्डों के विकास पर विशेष जोर दिया गया है, जिसके लिए 12,000 करोड़ रुपए से अधिक का बजट निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, क्षेत्रीय हवाई अड्डों के शुरुआती वर्षों में उनके संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) के लिए 2,500 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता दी जाएगी। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।







 

केंद्र सरकार ने 23 और व्यक्तियों को ‘आतंकवादी’ घोषित किया, अमित शाह बोले- हर आतंकी मॉड्यूल को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है मोदी सरकार

04-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 23 और व्यक्तियों को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत ‘आतंकवादी’ घोषित किया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार भारत और देशवासियों की सुरक्षा के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। घोषित किए गए 23 आतंकवादियों में 17 पाकिस्तानी और 6 भारतीय नागरिक हैं, जो वर्तमान में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) से भारत विरोधी गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ विजन को आगे बढ़ाते हुए गृह मंत्रालय ने प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े 23 खूंखार आतंकवादियों को यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया है। ये आतंकवादी भारत विरोधी गतिविधियों, आतंकी हमलों, आतंकवाद को बढ़ावा देने, हथियारों की तस्करी, सीमा पार घुसपैठ, आतंकी संगठनों की मदद, फंड जुटाने और आतंकवादियों की भर्ती जैसी गतिविधियों में शामिल हैं। मोदी सरकार भारत और देशवासियों की सुरक्षा के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को खत्म करने के लिए कटिबद्ध है।”
गृह मंत्रालय के अनुसार, इन व्यक्तियों को औपचारिक रूप से आतंकवादी घोषित किए जाने से उनके वित्तीय नेटवर्क, आवाजाही, भर्ती क्षमता और आतंकवाद समर्थित गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह कदम राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल तत्वों के लिए कड़ा संदेश भी होगा। इससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा एवं कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वित कानूनी, जांच और निवारक कार्रवाई को भी मजबूती मिलेगी।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में यूएपीए में संशोधन के बाद पहली बार व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान लागू किया था। गृह मंत्रालय के अनुसार, इस ताजा कार्रवाई के बाद अब तक अधिनियम की धारा 35 के तहत कुल 57 व्यक्तियों को यूएपीए की चौथी अनुसूची में ‘आतंकवादी’ के रूप में सूचीबद्ध किया जा चुका है।
गृह मंत्रालय द्वारा घोषित 23 आतंकवादियों में अधिकांश का संबंध जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम), लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जमात-उद-दावा (जेयूडी), हरकत-उल-मुजाहिद्दीन (एचयूएम), पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल), अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठनों से है। इन पर सीमा पार घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी, ड्रोन के जरिए हथियार पहुंचाने, आतंकी फंडिंग, युवाओं की भर्ती, प्रशिक्षण शिविर संचालित करने और भारत में कई बड़े आतंकी हमलों की साजिश रचने या उन्हें अंजाम देने के आरोप हैं।
गृह मंत्रालय ने जिन 23 व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया है, उनमें मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान, हाफिज अब्दुल शकूर, अब्दुल्ला जिहादी, फिरदौस अहमद भट, गुलाम फरीद, हारून रशीद गनई, बिलाल अहमद मीर, आबिद कयूम लोन, नजीर अहमद गुज्जर, अब्दुल रऊफ, अशफाक अहमद, हाफिज खालिद वालीद, मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की, मौलाना सैफुल्लाह खालिद, मोहम्मद याकूब, मौलाना यूसुफ ताईबी, ओवैस फारूज, कारी याकूब शेख, राणा इफ्तिखार, वसीम नूर जाट और मोहम्मद शहीद फैसल शामिल हैं।

 


ऊर्जा संकट के बीच भारत ने दिखाई क्षमता, विपक्ष अफवाह फैलाने में व्यस्त था: पीएम मोदी

04-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के बालोतरा में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छाशक्ति और प्रयास भारी पड़े हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण पैदा हुए संकट के बावजूद भारत ने दूरदर्शिता, प्रभावी रणनीति और कूटनीतिक प्रयासों के दम पर स्थिति का सफलतापूर्वक सामना किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है। इस युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया है। बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं, लेकिन 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छाशक्ति और भारत के प्रयास भारी पड़े हैं।” उन्होंने कहा कि भारत ने समय रहते संकट का आकलन किया, सही फैसले लिए, संसाधनों का संतुलित उपयोग किया और कूटनीतिक शक्ति का सकारात्मक इस्तेमाल कर इस चुनौती से पार पाया।
पीएम नरेंद्र मोदी ने बिना किसी दल का नाम लिए विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कुछ ताकतें सार्वजनिक रूप से अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थीं। उन्होंने कहा, “उस समय किस स्तर पर दिन-रात काम हो रहा था, किस तरह स्थिति को संभाला जा रहा था, वह मेहनत, प्रयास, धैर्य और नीतिगत व कूटनीतिक स्तर पर उठाए गए संवेदनशील कदम इतिहास में दर्ज होंगे।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी करीब 60% एलपीजी जरूरत आयात से पूरी करता है, जिसमें से लगभग 90% आपूर्ति खाड़ी देशों से होर्मुज मार्ग के जरिए होती थी। युद्ध के कारण यह आपूर्ति लगभग बाधित हो गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने संकट शुरू होते ही रिफाइनरियों की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया और औद्योगिक गैस बनाने वाली रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन के लिए तैयार किया। इसके परिणामस्वरूप सात दिनों के भीतर एलपीजी उत्पादन 35 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़कर 54 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गया।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिन रिफाइनरियों ने पहले कभी एलपीजी का उत्पादन नहीं किया था, उन्हें भी इसके लिए तैयार किया गया। साथ ही रसोई गैस पर दबाव कम करने के लिए बड़े पैमाने पर पीएनजी कनेक्शन दिए गए और कम समय में 11 लाख से अधिक घरों को पीएनजी नेटवर्क से जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि संकट के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हालात ऐसे थे कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2,000 रुपए तक पहुंच सकती थी और कई विशेषज्ञ भी यही अनुमान लगा रहे थे। लेकिन सरकार के प्रयासों से घरेलू एलपीजी सिलेंडर अभी भी 950 रुपए से कम में उपलब्ध है, जबकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को यह 650 रुपए से भी कम कीमत पर मिल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि दो दिन पहले सरकार ने वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की कीमतों में भी बड़ी कटौती की है।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने बालोतरा में लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपए की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इनमें पेट्रोकेमिकल्स, शहरी परिवहन, रेलवे, सड़क, रिन्यूएबल एनर्जी और बिजली ट्रांसमिशन क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं। 



 

रक्षा निर्यात 38 हजार करोड़ रुपए के पार, राजनाथ सिंह ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां

04-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने अभावों से आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास और आत्मविश्वास से विकसित भारत के निर्माण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहले कार्यकाल में अभाव दूर करने, दूसरे कार्यकाल में आकांक्षाओं को उपलब्धियों में बदलने और तीसरे कार्यकाल में ‘सुधार, प्रदर्शन, परिवर्तन’ की नीति के जरिए विकसित भारत की मजबूत नींव रखी जा रही है।
नई दिल्ली में एक मीडिया संगठन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘मेक-इन-इंडिया’ अभियान ने सफलता के नए मानक स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा में परिवर्तनकारी बदलाव आया है और आज दुनिया अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण को गंभीरता से सुनती है। उन्होंने कहा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत देश ने पिछले वर्ष अपने सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन भी शुरू किया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपए के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2014-15 की तुलना में तीन गुना अधिक है। उन्होंने बताया कि रक्षा निर्यात 38 हजार करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है, जो 2013-14 के 686 करोड़ रुपए की तुलना में लगभग 57 गुना अधिक है। उन्होंने इसे मेक-इन-इंडिया पर दुनिया के बढ़ते भरोसे का प्रमाण बताया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि मोबाइल विनिर्माण, ऑटोमोबाइल निर्यात, स्वदेशी लोकोमोटिव उत्पादन और डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि अप्रैल में यूपीआई के जरिए 22.35 अरब लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 29 लाख करोड़ रुपए रहा। उन्होंने कहा कि स्वदेशी 5जी तकनीक का तेजी से विस्तार हो रहा है और 6जी तकनीक के विकास पर भी काम जारी है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी), जनधन, आधार और मोबाइल की ‘जैम’ त्रिमूर्ति के जरिए 51 लाख करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए। इससे लगभग 4.3 लाख करोड़ रुपए के गबन को रोका जा सका। उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने सहकारी संघवाद को भी मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना और नक्सलवाद के खिलाफ लगातार कार्रवाई सरकार के दृढ़ संकल्प का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। पिछले 12 वर्षों में स्टार्टअप की संख्या 500 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो गई है, जबकि यूनिकॉर्न की संख्या 4 से बढ़कर 125 हो गई है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार विकास के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी समान रूप से काम कर रही है। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक और मां कामाख्या दिव्य लोक परियोजना समेत कई पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सूचना के इस दौर में मीडिया की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पत्रकारिता को तेज और अधिक सटीक बना सकती है, लेकिन मानवीय संवेदनशीलता का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की असली ताकत समाज को सही दिशा दिखाने, लोकतंत्र को मजबूत करने और सत्य को सामने लाने में है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि गलत सूचना समाज और सुरक्षा बलों के मनोबल पर गंभीर असर डाल सकती है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले खबर देने से ज्यादा महत्वपूर्ण सही खबर देना है। विशेष रूप से रक्षा बलों, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वालों से जुड़े मामलों में मीडिया को हमेशा सटीकता, निष्पक्षता और तटस्थता बनाए रखनी चाहिए। 







 

उपभोक्ता शिकायत प्रक्रिया को डिजिटल बना रही है ई-जागृति: प्रधानमंत्री मोदी

04-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी द्वारा लिखे गए ई-जागृति पर एक लेख को साझा किया। उन्होंने कहा कि ई-जागृति उपभोक्ता शिकायतों की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर कई चुनौतियों का समाधान कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने अपने लेख में विस्तार से बताया है कि ई-जागृति किस तरह उपभोक्ता शिकायतों की पूरी प्रक्रिया को डिजिटाइज करके उसे अधिक प्रभावी बना रही है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद ई-जागृति में सुधार किए गए हैं। इन सुधारों के माध्यम से उपभोक्ता न्याय व्यवस्था को उन क्षेत्रों से जोड़ा गया है, जहां संरचनात्मक डिजिटल सुधार किए जा रहे हैं। 











 

पीएम मोदी के स्वागत को तैयार ऑस्ट्रेलिया, 8 जुलाई से होगी वार्षिक लीडर्स समिट

04-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 8 से 10 जुलाई के ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले वहां के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा है कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया-भारत वार्षिक लीडर्स समिट के लिए प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने पर गर्व होगा। इस दौरे के दौरान दोनों नेता मेलबर्न में वार्षिक लीडर्स समिट में हिस्सा लेंगे और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा करेंगे।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।
बयान में कहा गया कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है तथा ऑस्ट्रेलिया के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। दोनों देशों के संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं, जिन्हें मजबूत आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों का समर्थन प्राप्त है। व्यापार, रक्षा, सुरक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है, जिससे दोनों देशों को लाभ मिल रहा है।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा, “मुझे अपने मित्र प्रधानमंत्री मोदी का ऑस्ट्रेलिया में वार्षिक लीडर्स समिट के लिए स्वागत करते हुए गर्व महसूस हो रहा है।” उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और भारत की साझेदारी पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है और यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देती है। उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत करने की इच्छा भी जताई।
प्रधानमंत्री अल्बनीज और प्रधानमंत्री मोदी की पिछली मुलाकात नवंबर 2025 में जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। अब दोनों नेता वार्षिक लीडर्स समिट में एक बार फिर आमने-सामने होंगे।
ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 से 11 जुलाई तक प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर न्यूजीलैंड के राजकीय दौरे पर जाएंगे। करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला राजकीय न्यूजीलैंड दौरा होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ऑकलैंड में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान व्यापार, वाणिज्य, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की जाएगी। प्रधानमंत्री बिजनेस और खेल जगत की प्रमुख हस्तियों से भी मुलाकात करेंगे तथा भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।

नरेंद्र मोदी का मेगा दौरा: राजस्थान-गुजरात को 1.06 लाख करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात

03-Jul-2026
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान और गुजरात के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह दोनों राज्यों को करीब 1.06 लाख करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इन परियोजनाओं में पेट्रोकेमिकल, शहरी परिवहन, रेलवे, सड़क, नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली ट्रांसमिशन, विमानन और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे कई अहम क्षेत्र शामिल हैं।
प्रधानमंत्री शनिवार सुबह जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे और संशोधित उड़ान योजना की शुरुआत करेंगे। इसके बाद दोपहर को बालोतरा में करीब 1.06 लाख करोड़ रुपए की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। इस मौके पर वह एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी शाम को गुजरात के अहमदाबाद जिले के साणंद पहुंचेंगे, जहां वे आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट प्लांट का उद्घाटन करेंगे और लोगों को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री जोधपुर से संशोधित उड़ान योजना की शुरुआत करेंगे। अगले 10 वर्षों के लिए 28,840 करोड़ रुपए के बजट वाली यह योजना क्षेत्रीय हवाई संपर्क को नई गति देगी और ‘उड़े देश का आम नागरिक’ के विजन को आगे बढ़ाएगी।
योजना के तहत 100 नए एयरोड्रोम विकसित किए जाएंगे, जिन पर 12,000 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होगा। क्षेत्रीय हवाई अड्डों के शुरुआती संचालन को मजबूत बनाने के लिए 2,500 करोड़ रुपए से अधिक का संचालन एवं रखरखाव समर्थन दिया जाएगा। दूरदराज और कठिन इलाकों में बेहतर संपर्क के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड बनाए जाएंगे। इसके अलावा एयरलाइंस को क्षेत्रीय उड़ानों के संचालन के लिए 10,000 करोड़ रुपए से अधिक की वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) दी जाएगी। योजना में एचएएल ध्रुव और डोर्नियर जैसे स्वदेशी विमान और हेलीकॉप्टरों की खरीद को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री 480 करोड़ रुपए की लागत से बने जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का भी उद्घाटन करेंगे। 23,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह टर्मिनल हर साल 20 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता रखता है। इसमें आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसकी वास्तुकला राजस्थान की शाही विरासत से प्रेरित है, जिसमें मेहराब, झरोखे और आधुनिक डिजाइन का सुंदर मेल देखने को मिलता है। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इसे ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप बनाया गया है तथा इसे 5-स्टार गृह रेटिंग दिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रधानमंत्री बालोतरा के पचपदरा में देश की पहली ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स राष्ट्र को समर्पित करेंगे। एचपीसीएल और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम के रूप में विकसित इस 9 एमएमटीपीए क्षमता वाले कॉम्प्लेक्स पर 79,450 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश हुआ है।
इस अत्याधुनिक परियोजना में रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन एकीकृत है। इसकी पेट्रोकेमिकल क्षमता 2.4 एमएमटीपीएम है। रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0 है और पेट्रोकेमिकल उत्पादन 26 प्रतिशत से अधिक है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप माना जाता है। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और क्षेत्र में पेट्रोकेमिकल एवं प्लास्टिक पार्क के विकास के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री 13,000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना की आधारशिला भी रखेंगे। इसके तहत 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर विकसित होगा, जिसमें 36 स्टेशन होंगे। यह प्रह्लादपुरा से टोड़ी मोड़ तक सीतापुरा, वीकेआई, जयपुर एयरपोर्ट, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल, एसएमएस स्टेडियम, अंबाबाड़ी और विद्याधर नगर जैसे प्रमुख इलाकों को जोड़ेगा।
इसके अलावा प्रधानमंत्री चूरू-सादुलपुर (58 किमी) और चूरू-रतनगढ़ (46 किमी) रेल दोहरीकरण परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे। करीब 900 करोड़ रुपए की लागत से बनी ये परियोजनाएं उत्तर-पश्चिम राजस्थान में रेल संपर्क और माल ढुलाई को मजबूत करेंगी। वह 740 करोड़ रुपए की लागत से बने एनएच-125ए जोधपुर रिंग रोड सेक्शन-2 का भी उद्घाटन करेंगे।
ऊर्जा क्षेत्र में प्रधानमंत्री 5,500 करोड़ रुपए की लागत वाली एसजेवीएन की 1,000 मेगावाट बीकानेर सोलर परियोजना और एनएचपीसी की 300 मेगावाट कर्णीसर बीकानेर सोलर परियोजना राष्ट्र को समर्पित करेंगे। साथ ही 1,900 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली बिजली ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन और 530 किलोमीटर लंबी नई ट्रांसमिशन प्रणाली की आधारशिला रखेंगे। इसी कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों में भर्ती हुए करीब 54,000 युवाओं को नियुक्ति पत्र भी सौंपेंगे।
गुजरात के साणंद में प्रधानमंत्री सीजी सेमी ओएसएटी सुविधा का उद्घाटन करेंगे। 7,500 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विकसित यह परियोजना इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के तहत स्वीकृत पहली चार परियोजनाओं में शामिल है और भारत में वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर उत्पादन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। पूरी क्षमता से संचालन शुरू होने पर यह संयंत्र हर साल 5 अरब (5 बिलियन) सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन करेगा। यह प्लांट ऑटोमोबाइल, औद्योगिक, दूरसंचार, 5जी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करेगा।
यहां वेफर सॉर्टिंग, असेंबली, टेस्टिंग, पैकेज डिजाइन, फेल्योर एनालिसिस, टेस्ट प्रोग्राम डेवलपमेंट, प्रोडक्ट कैरेक्टराइजेशन और लॉजिस्टिक्स जैसी एंड-टू-एंड सेमीकंडक्टर सेवाएं उपलब्ध होंगी।

 


रायपुर मंडल के 13 स्टेशनों पर 226 करोड़ रुपए की इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग परियोजना को मंजूरी

02-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारतीय रेल ने सिग्नलिंग अवसंरचना के आधुनिकीकरण और परिचालन सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के रायपुर मंडल के दुर्ग-तारोकी खंड के 13 स्टेशनों पर 226 करोड़ रुपए की लागत से इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली स्थापित करने की मंजूरी दी है। इस परियोजना से ट्रेन परिचालन अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बनेगा।
परियोजना के तहत 13 स्टेशनों पर मौजूदा पैनल इंटरलॉकिंग (पीआई) प्रणाली को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली से बदला जाएगा। जिन स्टेशनों को इस परियोजना में शामिल किया गया है, उनमें मारौडा (एमएक्सए), रिसमा (आरएसए), गुंडार्देही (जीडीजेड), लाटाबोर (एलबीओ), बलोद (बीएक्सए), कुसुमकासा (केवाईएस), दल्ली राजहरा (डीआरजेड), गुडम (जीयूडीएम), भानुप्रतापुर (बीपीटीपी), केवटी (केईटीआई), अंतागढ़ (एएजीएच), तारोकी (टीडीओके) और रायपुर स्टोर डिपो (आरएसडी) शामिल हैं।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग अत्याधुनिक सिग्नलिंग तकनीक है, जो रूट सेटिंग और सिग्नलिंग कार्यों को स्वचालित बनाती है। इससे परिचालन दक्षता बढ़ेगी, सिग्नलिंग में आने वाली तकनीकी खराबियों की संभावना कम होगी और किसी भी व्यवधान की स्थिति में सेवाओं को जल्दी बहाल किया जा सकेगा।
इस परियोजना से ट्रेन परिचालन की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ने के साथ समयपालन में भी सुधार होगा। साथ ही दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नेटवर्क पर बढ़ते यात्री और माल यातायात के बेहतर संचालन के लिए मजबूत तकनीकी आधार तैयार होगा।
भारतीय रेल ने कहा कि यह मंजूरी राष्ट्रीय रेल नेटवर्क में उन्नत तकनीक के माध्यम से सिग्नलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य सुरक्षित, स्मार्ट और अधिक कुशल रेल परिचालन सुनिश्चित करना है।



 

टीबी मुक्त भारत अभियान को जनभागीदारी से दें नई गति, डेंगू से निपटने के लिए भी व्यापक तैयारी करें: जे.पी. नड्डा

01-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने दिल्ली सरकार के साथ टीबी मुक्त भारत अभियान और डेंगू की तैयारियों की समीक्षा बैठक में अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।
बैठक के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिया कि अभियान से जुड़ा प्रत्येक संदेश सरल और आम लोगों की समझ में आने वाली भाषा में प्रसारित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से अभियान को जमीनी स्तर पर नई गति मिलेगी और लोगों में जागरूकता बढ़ेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने अभियान की प्रभावी निगरानी के लिए प्रत्येक वार्ड की जिम्मेदारी वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को सौंपने के निर्देश दिए। उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रगति (PRAGATI) बैठक में दिए गए सुझावों का उल्लेख करते हुए माई भारत (MY Bharat) के स्वयंसेवकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया, ताकि जमीनी स्तर पर लोगों तक अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।
टीबी की शीघ्र पहचान के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से युक्त अधिक संख्या में हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें उपलब्ध कराने में केंद्र सरकार सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि इससे शुरुआती चरण में टीबी की पहचान आसान होगी और मरीजों का समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि टीबी मुक्त भारत अभियान और डेंगू की रोकथाम, दोनों में आरडब्ल्यूए की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी को और मजबूत बनाया जा सके।
समीक्षा बैठक में दिल्ली सरकार की डेंगू से निपटने की तैयारियों का भी विस्तृत आकलन किया गया। इस दौरान समन्वित कार्रवाई, प्रभावी निगरानी व्यवस्था, जनजागरूकता अभियान तथा समय रहते रोकथाम संबंधी उपायों को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

 

खाद्य प्रसंस्करण से किसानों की आय बढ़ेगी, युवाओं को मिलेगा रोजगार : चिराग पासवान

01-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने महाराष्ट्र के परभणी स्थित वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ (वीएनएमकेवी) में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सहयोग से स्थापित उन्नत कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर (सीआईसी) का उद्घाटन किया। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्थापित इस केंद्र का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, उद्यमिता और किसान सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती दीक्षांत समारोह हॉल में संवाद एवं मार्गदर्शन सत्र का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार में सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता, ऊर्जा, महिला एवं बाल विकास तथा लोक निर्माण (सार्वजनिक उपक्रम) राज्य मंत्री एवं परभणी की पालक मंत्री मेघना ताई बोरदिकर, कुलपति प्रो. (डॉ.) इंद्र मणि, राज्यसभा सदस्य रामराव वाडकुटे, लोकसभा सदस्य संजय जाधव, कृषि प्रसंस्करण योजना निदेशक विनयकुमार अवाटे, कार्यवाहक जिला कलेक्टर एवं जिला परिषद प्रमुख नतिशा माथुर, पुलिस अधीक्षक पंकज कुमावत और शिक्षा निदेशक डॉ. भगवान असेवार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में चिराग पासवान ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसानों की आय बढ़ाने में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि देश कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के साथ कई देशों को निर्यात भी कर रहा है, लेकिन अब कृषि उत्पादों में मूल्यवर्धन कर उन्हें अधिक मूल्य वाले उत्पादों में बदलने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश किसानों के पास छोटी जोत है और पर्याप्त भंडारण सुविधाओं के अभाव में उन्हें अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ती है। ऐसे में किसानों को भंडारण, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि खाद्य अपशिष्ट को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका भी खाद्य प्रसंस्करण है।
केंद्रीय मंत्री ने युवाओं से रोजगार मांगने के बजाय रोजगार सृजित करने वाला बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय उत्पादन से लेकर विपणन तक सभी हितधारकों को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रहा है। इस क्षेत्र के विस्तार में राज्य सरकारों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है।
चिराग पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारीकरण (पीएमएफएमई) योजना के क्रियान्वयन में महाराष्ट्र ने देश में अग्रणी प्रदर्शन किया है। उन्होंने भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने, जैविक खेती को बढ़ावा देने और गुणवत्तापूर्ण प्रसंस्कृत उत्पाद विकसित करने पर जोर दिया।
छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए उत्पाद की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण होती है। अल्पकालिक लाभ के लिए गुणवत्ता से समझौता करने से वर्षों की मेहनत पर पानी फिर सकता है। उन्होंने कहा कि ‘मेड इन इंडिया’ लेबल वाला हर उत्पाद वैश्विक गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना चाहिए और भारत के किसानों में दुनिया का खाद्य भंडार बनने की क्षमता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और कृषि विस्तार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने विश्वविद्यालय और संबंधित संस्थानों से इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए कृषि क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को और मजबूत करने का आह्वान किया। 
 


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