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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का फ्रांस दौरा, आर्थिक और निवेश संबंधों को नई मजबूती देने पर रहेगा फोकस

01-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को फ्रांस के आधिकारिक दौरे की शुरुआत की, जहां वह भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने, आर्थिक सहयोग को गहरा करने और निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगी।
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम फ्रांस के ऐक्स-एन-प्रोवेंस में आयोजित होने वाला भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (ईएफडी) होगा। इस बैठक की सह-अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त, औद्योगिक ऊर्जा और डिजिटल संप्रभुता मंत्री रोलैंड लेस्क्योर करेंगे। इस संवाद के दौरान दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों की तलाश करेंगे और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगे।
फ्रांस प्रवास के दौरान वित्त मंत्री कई वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ अलग-अलग बैठकें भी करेंगी। इसके अलावा वह शीर्ष उद्योगपतियों के साथ एक गोलमेज चर्चा (राउंडटेबल) में भी हिस्सा लेंगी। इन बैठकों में भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, सरकार द्वारा किए गए संरचनात्मक सुधार, बढ़ते निवेश अवसरों और दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को वैश्विक निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ‘नई मध्यम वर्गीय आबादी के विकास को कैसे बढ़ावा दिया जाए’ विषय पर आयोजित एक विशेष पैनल चर्चा में भी भाग लेंगी। यह चर्चा लेस रेनकॉन्ट्रेंस इकोनॉमिक्स डी’ऐक्स-एन-प्रोवेंस के तहत आयोजित होगी, जिसे यूरोप के सबसे प्रतिष्ठित वार्षिक आर्थिक और सार्वजनिक नीति मंचों में से एक माना जाता है।
इस सम्मेलन का आयोजन ले सर्कल डेस इकोनॉमिस्ट्स द्वारा किया जाता है, जिसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, केंद्रीय बैंक प्रमुख, उद्योगपति, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करते हैं। अपने दौरे के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री कैडाराचे स्थित इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (आईटीईआर) परियोजना का भी दौरा करेंगी, जो दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है, जिसमें भारत और फ्रांस सहित 30 से अधिक देश साझेदार हैं।
इसके अलावा, वह कैम्पस साइबर का भी दौरा करेंगी, जिसे फ्रांस का राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास केंद्र माना जाता है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, डिजिटल अर्थव्यवस्था में नवाचार बढ़ाने और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान पर चर्चा होने की उम्मीद है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण प्रोवेंस-आल्प्स-कोटे डी’अजूर (पीएसीए) क्षेत्र के अध्यक्ष रेनॉड मुसेलियर से भी मुलाकात करेंगी। इस बैठक में निवेश, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की जाएगी।



 

दिल्ली सरकार ने अधिसूचित की नई ईवी नीति, 2030 तक स्वच्छ, आधुनिक और हरित परिवहन व्यवस्था बनाने का लक्ष्य

01-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) दिल्ली सरकार ने राजधानी में स्वच्छ, आधुनिक और प्रदूषण मुक्त परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। यह नीति 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी हो गई है और 31 मार्च, 2030 तक लागू रहेगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, नई नीति का उद्देश्य दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के साथ-साथ वायु गुणवत्ता में सुधार करना, पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना, चार्जिंग एवं बैटरी स्वैपिंग अवसंरचना का व्यापक विस्तार करना तथा इलेक्ट्रिक वाहन आधारित मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र (ईको-सिस्टम) विकसित करना है। नीति के अंतर्गत वित्तीय प्रोत्साहन, डिजिटल पारदर्शिता, संस्थागत निगरानी तथा पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को समान महत्व दिया गया है।
नीति में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की नवीनतम रिपोर्ट का विशेष उल्लेख किया गया है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि दिल्ली में विशेषकर शीतकाल के दौरान वायु प्रदूषण में लगभग 23 प्रतिशत योगदान वाहनों से होने वाले उत्सर्जन का है, जो सभी स्रोतों में सबसे अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के कुल वाहनों में लगभग 67 प्रतिशत दोपहिया वाहन हैं, इसलिए इनके तीव्र विद्युतीकरण को वायु प्रदूषण कम करने के लिए अत्यंत आवश्यक माना गया है। इसके अतिरिक्त तिपहिया वाहन, वाणिज्यिक कारें तथा एन-1 श्रेणी के मालवाहक वाहन प्रतिदिन अधिक दूरी तय करते हैं और शहरी प्रदूषण में इनका योगदान भी अपेक्षाकृत अधिक है। इसी कारण नीति में इन श्रेणियों के वाहनों के प्राथमिकता आधारित विद्युतीकरण पर विशेष बल दिया गया है।
मुख्यमंत्री गुप्ता के अनुसार यह नीति केवल इलेक्ट्रिक वाहन खरीद को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी स्वैपिंग, बैटरी रीसाइक्लिंग, ऊर्जा प्रबंधन, डिजिटल सेवा वितरण तथा पर्यावरण संरक्षण को एकीकृत करते हुए दीर्घकालिक स्वच्छ परिवहन व्यवस्था स्थापित करने का व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था भी बनाई गई है। परिवहन विभाग इस नीति का नोडल विभाग होगा तथा इसके अंतर्गत एक समर्पित ईवी सेल स्थापित किया जाएगा। यह सेल नीति के संचालन, स्पष्टीकरण, दिशा-निर्देश जारी करने तथा समन्वय संबंधी कार्यों का दायित्व निभाएगा। इसके साथ एक समर्पित परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता (पीएमसी) भी नियुक्त किया जाएगा।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इलेक्ट्रिक वाहन मॉडलों को प्रोत्साहन व सब्सिडी के लिए पात्र घोषित करने के लिए परिवहन विभाग के अधीन मॉडल अनुमोदन समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति निर्धारित तकनीकी मानकों, पात्रता शर्तों और परिचालन दिशा-निर्देशों के आधार पर विभिन्न ईवी मॉडलों का परीक्षण एवं अनुमोदन करेगी। केवल समिति द्वारा अनुमोदित मॉडल ही सरकारी प्रोत्साहनों के लिए पात्र होंगे। चार्जिंग एवं बैटरी स्वैपिंग अवसंरचना के विस्तार के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। डीटीएल राजधानी में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की योजना, समन्वय, तकनीकी मानक निर्धारण, डिजिटल पोर्टल संचालन तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगा। इसके माध्यम से सार्वजनिक और सामुदायिक चार्जिंग नेटवर्क का चरणबद्ध विस्तार किया जाएगा तथा सिंगल विंडो व्यवस्था के जरिए चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना को भी सरल बनाया जाएगा।
नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और उच्चस्तरीय निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार समिति गठित की जाएगी। इस समिति में परिवहन, ऊर्जा, योजना, पर्यावरण, वित्त विभाग, डीटीएल, डिस्कॉम तथा आवश्यकता अनुसार अन्य विभागों व एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति नीति के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करेगी तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ईवी नीति के प्रभावी संचालन के लिए दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन शीर्ष समिति कार्य करेगी। यह समिति नीति के कार्यान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने, आवश्यक संशोधनों की अनुशंसा करने तथा भविष्य में यदि हाइड्रोजन अथवा अन्य स्वच्छ ईंधन आधारित नई प्रौद्योगिकियां उपलब्ध होती हैं तो उनके संबंध में सरकार को सुझाव देगी। उच्चाधिकार समिति की संरचना एवं कार्यादेश तथा दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन शीर्ष समिति की संरचना एवं कार्यसूची मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद अलग से अधिसूचित की जाएगी।
नई ईवी नीति में बैटरी रीसाइक्लिंग और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को भी विशेष महत्व दिया गया है। पर्यावरण विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि सभी वाहन निर्माता और संबंधित संस्थाएं बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन करें। वहीं दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत बैटरी संग्रह केंद्र विकसित करेगी तथा सुरक्षित संग्रह, भंडारण, परिवहन और अधिकृत रीसाइक्लरों तक बैटरियों के हस्तांतरण के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं अधिसूचित करेगी। नीति के तहत शिक्षा विभाग को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। विभाग स्कूल बसों के चरणबद्ध विद्युतीकरण की निगरानी करेगा तथा विद्यालयों में वायु प्रदूषण, पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण और स्वच्छ परिवहन के प्रति जागरूकता अभियान संचालित करेगा। वहीं राजस्व विभाग चार्जिंग एवं बैटरी स्वैपिंग अवसंरचना के लिए उपयुक्त सरकारी भूमि की पहचान और उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
सीएम गुप्ता का स्पष्ट कहना है कि नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति स्वच्छ वायु, आधुनिक परिवहन, ऊर्जा संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। वित्तीय प्रोत्साहनों, मजबूत चार्जिंग नेटवर्क, संस्थागत निगरानी, डिजिटल पारदर्शिता तथा पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के माध्यम से यह नीति राजधानी को देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के अग्रणी मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही, इससे प्रदूषण में कमी, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा और नागरिकों के लिए अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। 
 

राष्ट्रपति मुर्मु ने आंध्र प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में भाग लिया

01-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार को आंध्र प्रदेश के अनंतपुरमु में आंध्र प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के वर्षों के समर्पण, दृढ़ निश्चय और कड़े परिश्रम की सुखद परिणति है। अनेक सपने संजोए हुए उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रवेश किया था। आज वे ज्ञान एवं आत्मविश्वास से युक्त होकर वह डिग्री यहाँ से लेकर जा रहे हैं जो उनके लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि यद्यपि विद्यार्थियों को सफलता उनके स्वयं के कड़े परिश्रम से मिलती है, किंतु इस सफलता में उनके माता-पिता का त्याग, शिक्षकों का मार्गदर्शन और समाज का भी योगदान होता है। इसलिए, उनकी जिम्मेदारी है कि वे समाज का ऋण भी चुकाएं। चाहे वे रोजगार का सृजन करने वाले उद्यमी बनें, नवाचार को बढ़ावा देने वाले वैज्ञानिक बनें, जनता के लिए काम करने वाले लोकसेवक बनें या फिर समाज की सेवा करने वाले लोकोपकारी बनें, उनकी शिक्षा वंचित वर्ग के सशक्तीकरण का स्रोत बननी चाहिए।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रही बहुआयामी प्रगति से प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं। तेज़ी से बदलती ऐसी दुनिया में, सीखने का काम सिर्फ़ डिग्री प्राप्त करने के साथ समाप्त नहीं हो सकता और न ही होना चाहिए। अपने आप को उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के अनुरूप निरंतर ढालते चलने की प्रवृत्ति ही विद्यार्थियों का मजबूत संबल बनेगी। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे नए विचारों को आजमाने और नवीन ज्ञान अर्जित करने का साहस विकसित करें।
उन्होंने कहा कि सीखने के लिए तत्पर, मानसिक लचीलेपन से लैस, और नवाचारी सोच रखने वाले युवा हमारे देश की अनमोल संपत्ति हैं। हमारे युवा अपने ज्ञान के साथ रचनात्मकता, दृढ़ निश्चय और उत्तरदायित्व के भाव को लेकर चलेंगे, तो वे सामने आने वाली हर चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं। इस तरह वे अधिक समावेशी और समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कहा कि अपने आचरण में नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने से उन्हें बहुत मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, करुणा, समानुभूति और प्रकृति से प्रेम केवल ऊंचे नैतिक आदर्श ही नहीं हैं, बल्कि ये समग्र विकास के आधार भी हैं। इन गुणों से उनका जीवन तो बेहतर बनेगा ही, वे समाज व देश के लिए उपयोगी योगदान भी कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ की संकल्पना हमारे युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और प्रतिबद्धता से ही साकार होगी। वे जीवन में चाहे जिस भी मार्ग को चुनें, उस पर उन्हें पूरी लगन और ईमानदारी के साथ चलते हुए उत्कृष्टता की मंजिल हासिल करनी है।











 

लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन बने सेना के नए उप थल सेनाध्यक्ष

01-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश)  लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन, एवीएसएम, एसएम ने बुधवार को भारतीय सेना के उप थल सेनाध्यक्ष (वाइस चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ) का पदभार ग्रहण किया। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन जून 1988 में महार रेजिमेंट में शामिल हुए थे। लगभग चार दशक के विशिष्ट सैन्य करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में कमान और स्टाफ से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने अर्ध-मरुस्थलीय क्षेत्र में एक इन्फैंट्री बटालियन की कमान संभाली। उन्होंने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में भी सेवाएं दीं। इसके अलावा, उन्होंने स्ट्राइक कोर में एक इन्फैंट्री ब्रिगेड, काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स तथा उत्तरी कमान में एक पिवट कोर की कमान भी संभाली।
उनके सैन्य करियर में ऑपरेशन पवन में भागीदारी, इथियोपिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन में सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में सेवा तथा नियंत्रण रेखा और पूर्वोत्तर के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियानों का व्यापक अनुभव शामिल है। उन्होंने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन के एक सेक्टर की कमान भी संभाली।
लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने उत्तरी कमान में एक कोर की कमान संभाली। इसके बाद उन्होंने दक्षिणी कमान मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्य किया, जहां क्षमता विकास, बल पुनर्गठन और समग्र परिचालन तैयारियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सेना कमांडर बनने के बाद उन्होंने दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।
लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने विभिन्न सैन्य इकाइयों और मुख्यालयों में अनेक महत्वपूर्ण स्टाफ और परिचालन नियुक्तियों पर कार्य किया है। इस दौरान उन्हें पारंपरिक सैन्य अभियानों, आतंकवाद विरोधी अभियानों, उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों, संयुक्त राष्ट्र मिशनों और विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में सैन्य तैयारियों का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।
लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने आर्मी वॉर कॉलेज के उच्च कमान पाठ्यक्रम और केन्या के राष्ट्रीय रक्षा पाठ्यक्रम में भी भाग लिया है। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) और सेना पदक (एसएम) से सम्मानित किया जा चुका है।

अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस: संसद को जन आकांक्षाओं का सबसे बड़ा मंच मानते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

30-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस संसदीय परंपरा और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने का संदेश देता है। अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस का उद्देश्य लोकतंत्र को मजबूत बनाने में संसदों की भूमिका के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना और लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा समावेशी बनाने के प्रयासों को प्रोत्साहित करना है। अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस हर वर्ष 30 जून को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2018 में इस दिवस को आधिकारिक मान्यता दी थी। यह तिथि वर्ष 1889 में अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) की स्थापना की याद में चुनी गई, जो दुनिया के राष्ट्रीय संसदों का सबसे पुराना वैश्विक संगठन है।
संसद किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण संस्था मानी जाती है। यहीं कानून बनाए जाते हैं, सरकार को जवाबदेह बनाया जाता है और जनता की आकांक्षाओं तथा समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाता है। संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह सरकार और जनता के बीच संवाद का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम भी है। यही कारण है कि मजबूत, प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण संसद को स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान माना जाता है। 
अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस संसदों के कामकाज की समीक्षा करने, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने का अवसर प्रदान करता है कि संसद समय के साथ बदलती चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को ढाल सके। इसमें महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने, नई तकनीकों के उपयोग, पारदर्शिता तथा नागरिकों की सहभागिता जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया जाता है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और उसकी संसदीय व्यवस्था विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है। भारतीय संसद में लोकसभा और राज्यसभा शामिल हैं, जहां देश के विभिन्न राज्यों, क्षेत्रों और समाज के विविध वर्गों का प्रतिनिधित्व होता है। स्वतंत्रता के बाद से भारतीय संसद ने अनेक ऐतिहासिक कानून पारित किए हैं, जिन्होंने देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास की दिशा तय की है। भारत में नियमित और स्वतंत्र चुनाव, संसदीय समितियों की सक्रिय भूमिका, विभिन्न विषयों पर व्यापक चर्चा तथा विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच लोकतांत्रिक विमर्श संसदीय व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं हैं। बदलते समय के साथ संसद की कार्यप्रणाली में डिजिटल तकनीकों का उपयोग भी लगातार बढ़ा है, जिससे कार्य अधिक प्रभावी और पारदर्शी हुआ है।
भारत ने हाल के वर्षों में नए संसद भवन के निर्माण के माध्यम से अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं को आधुनिक स्वरूप प्रदान किया है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह भवन भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें सांसदों के लिए बेहतर तकनीकी संसाधन, डिजिटल व्यवस्था तथा अधिक बैठने की क्षमता उपलब्ध कराई गई है, जिससे आने वाले वर्षों में बढ़ते प्रतिनिधित्व की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न अवसरों पर संसद को लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच बताते रहे हैं। उन्होंने सांसदों से सदन की गरिमा बनाए रखने, सार्थक चर्चा, जनहित के मुद्दों पर गंभीर विमर्श तथा विकासोन्मुख कानून बनाने की आवश्यकता पर लगातार बल दिया है। नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान भी उन्होंने इसे विकसित भारत की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का प्रतीक बताया था। इसके अलावा 18वीं लोकसभा के पहले सत्र से पहले भी प्रधानमंत्री मोदी ने सभी दलों से रचनात्मक सहयोग और जनहित में सार्थक चर्चा की अपील की थी। 
भारत अंतर-संसदीय संघ सहित विभिन्न वैश्विक संसदीय मंचों पर सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। भारतीय सांसद जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, आतंकवाद, लैंगिक समानता, डिजिटल शासन और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर अंतर्राष्ट्रीय संवाद में लगातार भाग लेते हैं। इससे भारत का लोकतांत्रिक अनुभव दुनिया के अन्य देशों तक पहुंचता है और वैश्विक सहयोग को भी मजबूती मिलती है।
भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ाने के लिए हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। युवा सांसद भी नई सोच, तकनीकी समझ और नवाचार के साथ संसदीय विमर्श को नई दिशा दे रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और आईपीयू भी संसदों में महिलाओं और युवाओं की अधिक भागीदारी को लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक मानते हैं। 
 

पीएम मोदी ने दी भारत-सेशेल्स साझेदारी को नई दिशा, 19 अहम बिंदुओं पर बनी सहमति

29-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत के पीएम मोदी का तीन दिवसीय सेशेल्स दौरा सम्पन्न हो गया है और वह स्वदेश के लिए रवाना हो चुके हैं। पीएम मोदी के इस दौरे पर भारत और सेशेल्स के बीच 19 मुद्दे फोकस में रहे। इनमें सेशेल्स में यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू करने, जन औषधि योजना पर सहयोग, जलवायु परिवर्तन से निपटने, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा, ब्लू इकोनॉमी तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सेशेल्स यात्रा के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कई महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं। इनमें सेशेल्स में यूपीआई लागू करने और जन औषधि से जुड़े समझौते शामिल हैं। हम क्लाइमेट एक्शन, ग्रीन हाइड्रोजन, एनर्जी, ब्लू इकोनॉमी और भविष्य के अन्य क्षेत्रों में मिलकर काम करते रहेंगे।”
सेशेल्स सरकार को एक फास्ट पेट्रोल वेसल गिफ्ट किया गया, जो समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करता है और हिंद महासागर क्षेत्र में एक नेट सुरक्षा प्रोवाइडर के रूप में भारत की भूमिका को बढ़ाता है। इससे भारतीय रक्षा निर्माण क्षमताओं को भी बढ़ावा मिलता है।
सेशेल्स डिफेंस फोर्स को 10 यूटिलिटी वाहन और लेजर रेडियल क्लास बोट्स के 5 सेट सौंपे गए। द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने के साथ हिंद महासागर क्षेत्र में एक भरोसेमंद और विश्वसनीय पार्टनर के रूप में भारत की भूमिका को बढ़ाता है।
सेशेल्स सरकार को 6 एम्बुलेंस सौंपे गए। यह एक भरोसेमंद मानवीय साझेदार के तौर पर भारत के कमिटमेंट को मजबूत करता है। इससे पब्लिक वेलफेयर के जरिए लोगों के बीच संबंधों को भी मजबूती मिलती है।
भारत ने सेशेल्स को 500 मीट्रिक टन चावल उपलब्ध कराया। इससे खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग मजबूत होगा और ग्लोबल साउथ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित होती है।
सेशेल्स सरकार को 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट सौंपा गया। यह साझेदार देशों की विकास संबंधी जरूरतों को समय पर पूरा करने की भारत की प्रतिबद्धता और उसके विकास साझेदारी मॉडल को दर्शाता है।
प्रोफेशनल और टेक्निकल एजुकेशन सेंटर के लिए वर्चुअल ग्राउंड-ब्रेकिंग सेरेमनी, एक पसंदीदा विकास पार्टनर के तौर पर भारत की भूमिका को फिर से सुनिश्चित करती है। यह लंबे समय के इंस्टीट्यूशनल लिंकेज बनाता है और स्थानीय लोगों के बीच अच्छी भावना पैदा करता है।
सेशेल्स कोस्ट गार्ड के लिए पीएस जोरोस्टर की मरम्मत का काम पूरा हुआ, जो रक्षा सहयोग को गहरा करने के साथ हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढ़ाएगा। इसके अलावा, यह आईओआर में नेट सुरक्षा प्रोवाइडर के तौर पर भारत की भूमिका को दोहराएगा।
ग्लास कॉकपिट वाले डोर्नियर एयरक्राफ्ट का अपग्रेडेशन किया जा रहा है, जो रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाता है और साझेदार देशों के डिफेंस एसेट्स के आधुनिकीकरण में भारत की भूमिका को मजबूत करता है।
सेशेल्स ने कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) की सदस्यता ग्रहण की। इससे आपदा प्रबंधन, जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस (एसएसआईएफएस) और सेशेल्स रिपब्लिक के विदेश मंत्रालय और डायस्पोरा (एमओएफएडी) के बीच एमओयू एक्सचेंज हुआ। यह क्षमता निर्माण के लिए सहयोगी के तौर पर भारत की भूमिका को बढ़ाता है और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध मजबूत करता है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई), इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड, और सेंट्रल बैंक ऑफ सेशेल्स के बीच एमओयू एक्सचेंज हुए। यह सेशेल्स में यूपीआई-आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली को आगे बढ़ाता है, जिससे विश्व पटल पर भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की मौजूदगी हाइलाइट होगी और दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग गहरा होगा। यह लोगों के बीच बेहतर संबंध को भी बढ़ावा देगा।
जन औषधि स्कीम के तहत मेसर्स एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और सेशेल्स रिपब्लिक के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच समझौता हुआ, जो साझेदार देशों में हाई-क्वालिटी और सस्ती भारतीय दवाओं तक पहुंच आसान बनाएगा और यह ग्लोबल फार्मास्युटिकल स्टैंडर्ड्स में भारत की भूमिका को बढ़ाता है।
एग्रीकल्चर रिसर्च और एजुकेशन पर एमओयू और 2026-2031 के लिए वर्क प्लान एक्सचेंज हुए। यह कृषि के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के साथ ग्लोबल साउथ में नॉलेज पार्टनर के तौर पर भारत की स्थिति को बढ़ावा देता है।
भारत गणराज्य और सेशेल्स गणराज्य के बीच एक्सट्रैडिशन ट्रीटी हुई, जो दोनों देशों के बीच कानूनी और सुरक्षा सहयोग को गहरा और ट्रांसनेशनल क्राइम से निपटने में सहयोग को मजबूत करता है।
सेशेल्स के झंडे वाले जहाजों पर सेवा के लिए नाविकों की ट्रेनिंग और सर्टिफ़िकेशन की पहचान पर एमओयू एक्सचेंज हुए। यह भारतीय नाविकों के लिए रोजगार के मौके पैदा करने के साथ कुशल समुद्री मैनपावर के एक लीडिंग ग्लोबल सप्लायर के तौर पर भारत की भूमिका को मजबूत करता है।
शांतिपूर्ण मकसदों के लिए आउटर स्पेस की खोज और इस्तेमाल में सहयोग के लिए एमओयू एक्सचेंज किए गए, जो दोनों देशों में भारतीय सैटेलाइट एप्लिकेशन के इस्तेमाल के अवसर देगा और इसरो की ग्लोबल मौजूदगी बढ़ेगी। दोनों देशों के लिए एक भरोसेमंद स्पेस साझेदार के तौर पर भारत की स्थिति को मजबूत करता है।
नए सेशेल्स नेशनल हॉस्पिटल की शुरुआती तैयारियों को लेकर भी एमओयू एक्सचेंज हुए, जो स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाता और सेशेल्स के भरोसेमंद डेवलपमेंट पार्टनर के तौर पर भारत की भूमिका की पुष्टि करता है।
सेशेल्स सरकार और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ़ इंडिया के बीच अम्ब्रेला लाइन ऑफ क्रेडिट एग्रीमेंट समझौता किया, जो एक पसंदीदा डेवलपमेंट पार्टनर के तौर पर भारत की भूमिका को मजबूत करने के साथ सस्टेनेबल और इनक्लूसिव ग्रोथ का समर्थन करता है।
 

सेशेल्स दौरा संपन्न कर स्वदेश रवाना हुए पीएम मोदी, नवशक्ति विनयगर मंदिर में की पूजा, महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि

29-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन दिवसीय दौरे को पूरा करने के बाद नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। सेशेल्स दौरे के आखिरी चरण में पीएम मोदी ने महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की। इससे पहले उन्होंने नवशक्ति विनयगर मंदिर में पूजा-अर्चना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सेशेल्स के पीस पार्क में महात्मा गांधी की मूर्ति पर फूल चढ़ाए और उनका स्वागत करने के लिए इकट्ठा हुए भारतीय समुदाय के लोगों से भी बात की। तिरंगा लिए हुए भारतीय समुदाय के लोगों ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए ‘मोदी मोदी’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी कई तस्वीरें भी शेयर की हैं। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “विक्टोरिया के पीस पार्क में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। बापू के आदर्श पीढ़ियों से चले आ रहे हैं, जो लोगों को शांति, न्याय और इंसानी सम्मान की तलाश में एकजुट करते हैं। उनके विचार एक बेहतर दुनिया के लिए हमारी मिलकर की जाने वाली कोशिशों को प्रेरित करते रहते हैं।”
इससे पहले पीएम मोदी ने नवशक्ति विनयगर मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंदिर के बाहर एकजुट हुए भारतीय समुदाय के लोगों से भी बात की। पीएम मोदी ने तस्वीर साझा कर एक्स पर लिखा, “विक्टोरिया में अरुलमिगु नवशक्ति विनयगर मंदिर में प्रार्थना की, जो सेशेल्स का प्रमुख हिंदू मंदिर है। भगवान गणेश सभी को बुद्धि, शक्ति और समृद्धि प्रदान करें।”
वहीं भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की तस्वीरें साझा कर प्रधानमंत्री ने लिखा, “मैं सेशेल्स हिंदू कोविल संगम की अरुलमिगु नवशक्ति विनयगर मंदिर बनाने और सेशेल्स में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता के अलग-अलग पहलुओं को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों के लिए सराहना करना चाहूंगा।” पीएम मोदी के मंदिर पहुंचने से पहले वहां उनका इंतजार कर रहे भारतीय समुदाय के लोगों से ​​बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे के लिए बड़ी तैयारी की गई है, जो सेशेल्स के 50वें नेशनल डे सेलिब्रेशन के साथ हो रहा है।
भारतीय समुदाय के एक सदस्य ने कहा, “हमें बहुत खुशी है कि प्रधानमंत्री मोदी 50वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यहां आ रहे हैं। सारे इंतजाम हो गए हैं। हम मंदिर में उनकी लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करेंगे और दुआ करेंगे कि वे भारत के लोगों की सेवा करते रहें। हमने उनके स्वागत के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया है।”
भारतीय समुदाय की एक और सदस्य शशि ने कहा, “सेशेल्स में भारतीय समुदाय पीएम मोदी के दौरे को लेकर बहुत उत्साहित है। हमें उनका स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं और हम उनके दौरे के दौरान इस संबंध को और मजबूत करने की उम्मीद करते हैं।”
भारतीय समुदाय की एक और सदस्य धनलक्ष्मी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री के दौरे से सम्मानित महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं कई पहलों पर सरकार के साथ मिलकर काम करती हूं। हमें यह भी उम्मीद है कि भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए, भारत सरकार मंदिर के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में मदद करेगी।”
इस बीच, सेशेल्स का राष्ट्रीय दिवस समारोह परेड के साथ शुरू हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। सेशेल्स के सैनिक अपने नेशनल फ्लैग के साथ एयरक्राफ्ट से पैराशूट से वेन्यू में उतरे और लोग जोश के साथ देश की आजादी की 50वीं सालगिरह मना रहे थे। पीएम मोदी शनिवार को सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर सेशेल्स पहुंचे थे।















 

असम में बाढ़ के हालातों के मद्देनजर अमित शाह ने सीएम हिमंता बिस्वा सरमा से बात की

29-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) असम में बाढ़ के बीच, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य को केंद्र से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है।
सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी देते हुए सीएम सरमा ने बताया कि गृह मंत्री शाह ने फोन पर उनसे बात की और बाढ़ की स्थिति, खासकर सबसे ज्यादा प्रभावित धेमाजी जिले के हालात के बारे में पूछा।
मुख्यमंत्री ने पोस्ट में लिखा कि मैं गृहमंत्री अमित शाह का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने फोन करके धेमाजी में बाढ़ की स्थिति के बारे में पूछा। मैंने उन्हें अभी चल रहे राहत और पुनर्वास कार्यों के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने इस स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार की ओर से हर संभव मदद और सहयोग का भरोसा भी दिलाया है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, असम और पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश में लगातार बारिश के कारण छह जिलों धेमाजी, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़, चिरांग, लखीमपुर और कोकराझार में 22,124 लोग प्रभावित हुए हैं।
धेमाजी सबसे ज्यादा प्रभावित जिला बना हुआ है जहां लगातार बारिश से इलाके के बड़े हिस्से में पानी भर जाने के कारण 15,483 लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार बाढ़ का पानी 96 गांवों में घुस गया है और लगभग 1,690 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है। इससे फसलें प्रभावित हुई हैं और हजारों किसानों की आजीविका पर असर पड़ा है। प्राधिकरण ने यह भी बताया कि इस बाढ़ के दौरान 48,199 पशु भी प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ बुलेटिन में आगे बताया गया है कि शिवसागर जिले में दिसांग नदी नांगलामुराघाट पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे भारी बारिश जारी रहने पर निचले इलाकों में और ज्यादा पानी भरने का डर पैदा हो गया है।
इस बीच, भारी बारिश और कटाव के कारण धेमाजी जिले में सिमेन नदी पर बना रेलवे पुल आंशिक रूप से ढह गया, जिससे इलाके में रेल संपर्क बाधित हो गया है।
नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे ने आर्चीपाथर और सिमेन चपारी स्टेशनों के बीच ट्रेनों की आवाजाही रोक दी है। 110 मिमी से ज्यादा बारिश के कारण जबरदस्त बाढ़ आ गई और नदी के किनारे का वह बड़ा हिस्सा बह गया जो पुल के एक खंभे (पियर) को सहारा दे रहा था।
अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित जिलों में राहत और पुनर्वास कार्य चल रहे हैं जबकि लगातार बारिश के पूर्वानुमान के बीच प्रशासन अलर्ट पर है। 

 

शिवराज सिंह चौहान की घोषणा: ‘हर पात्र को मिलेगा आवास, कोई भी नहीं रहेगा वंचित’; 29 राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ की बैठक

29-Jun-2026
नई दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ के दूसरे दिन केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर से आए 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ व्यापक मंथन किया। सम्मेलन में न सिर्फ योजनाओं की समीक्षा हुई, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में ‘विकसित ग्राम-विकसित भारत’ के विजन को जमीन पर उतारने के लिए ठोस रणनीतियां भी सामने आईं। इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गांव केवल धूल-मिट्टी या चौपाल का नाम नहीं, बल्कि भारत की शक्ति, भारत की चेतना और भारत की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमें समृद्ध और विकसित भारत बनाना है तो गांव को समृद्ध और विकसित बनाए बिना काम नहीं चलेगा। गांव की प्रगति के बिना देश की प्रगति संभव नहीं है।
पहली बार एक मंच पर देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और नीति-निर्माता एक साथ जुटे। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह सहकारी संघवाद का जीवंत उदाहरण रहा, जहां राजनीतिक भिन्नताओं से ऊपर उठकर विकास पर फोकस किया गया।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब गांव आत्मनिर्भर, रोजगारयुक्त और बुनियादी सुविधाओं से संपन्न बनेंगे। उन्होंने गांव को ‘भारत की आत्मा, शक्ति और चेतना’ बताते हुए कहा कि ग्रामीण विकास ही राष्ट्रीय विकास की धुरी है। शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि 1 जुलाई से ‘विकसित भारत- जी राम जी’ योजना देशभर में लागू होगी जो मनरेगा की जगह लेगी। इसके लिए 95,682 करोड़ रुपए की अंतरिम स्वीकृति दी जा चुकी है। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे समय पर अपनी औपचारिकताएं पूरी करें ताकि योजना का सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
सम्मेलन में ‘लखपति दीदी डैशबोर्ड’ लॉन्च किया गया और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ करते हुए शिवराज सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए अगले 5 वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपए का बैंक लिंकिंग रोडमैप तैयार किया गया है।
शिवराज सिंह ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई अहम बिंदु रखे। उन्होंने कहा कि राज्यों को समय पर अपना वित्तीय हिस्सा जारी करना होगा। ग्रामीण विकास से जुड़े खाली पदों को शीघ्र भरना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के बार-बार ट्रांसफर से काम प्रभावित होता है, जिम्मेदार पदों पर अधिकारियों को कम से कम दो‑तीन वर्ष एक ही स्थान पर रखा जाए, योजनाओं के प्रचार-प्रसार और जन जागरूकता पर विशेष ध्यान व सोशल ऑडिट और एआई आधारित मॉनिटरिंग को मजबूत करने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण सड़क योजना और दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई राज्यों ने उत्कृष्ट कार्य किया है जबकि कुछ को सुधार की जरूरत है। उन्होंने भूमिहीन लाभार्थियों को जमीन उपलब्ध कराने और लंबित आवासों के शीघ्र समाधान पर विशेष जोर दिया।
झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश आदि राज्यों के सफल मॉडल जैसे मल्टी‑चैनल मार्केटिंग, सामुदायिक उद्यम और हाउसहोल्ड आजीविका ऋण योजनाओं का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि इन बेस्ट प्रैक्टिस को सभी राज्यों के साथ साझा किया जाएगा ताकि अच्छा काम पूरे देश में दोहराया जा सके। उन्होंने खुले मन से स्वीकार किया कि कई योजनाओं और प्रक्रियाओं में अभी भी सुधार की गुंजाइश है और भरोसा दिलाया कि यदि राज्यों को किसी नियम या प्रक्रिया में व्यावहारिक दिक्कत है तो ग्रामीण विकास मंत्रालय कैबिनेट और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर उचित संशोधन की दिशा में काम करेगा।
केंद्रीय मंत्री ने संभावित कम बारिश को देखते हुए 14 राज्यों को जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने जल संरक्षण संरचनाओं को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार की तैयारी रखने के निर्देश दिए ताकि किसी भी स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह समय प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि सहभागिता का है। केंद्र नीति बनाए, राज्य उसे लागू करें, पंचायत नेतृत्व करे और जनता सहभागी बने- इसी मॉडल से ग्रामीण भारत की तस्वीर और तकदीर बदली जा सकती है। सम्मेलन में ‘वीबी-जीरामजी’ से जुड़े लोगो डिजाइन, क्विज और डिजिटल कंटेंट प्रतियोगिताओं के विजेताओं को शिवराज सिंह चौहान की ओर से सम्मानित किया गया। साथ ही पुस्तकों का विमोचन भी हुआ जो ग्रामीण विकास के नए विचारों और मॉडलों को आगे बढ़ाने का संकेत है।
 

एल नीनो की चुनौतियों का डटकर सामना करें किसान: चंद्रबाबू नायडू

29-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को किसानों से एल नीनो जैसी प्राकृतिक चुनौती का साहसपूर्वक सामना करने की अपील की। एल नीनो एक ऐसी जलवायु संबंधी घटना है, जो सामान्य वर्षा चक्र को प्रभावित करती है।
मुख्यमंत्री ने नए कृषि सीजन की शुरुआत का प्रतीक माने जाने वाले एरुवाका पूर्णिमा के अवसर पर किसानों को शुभकामनाएं दीं। वहीं, कृषि मंत्री के अच्चन्नायडू ने भी किसानों से एल नीनो की चुनौती का हिम्मत के साथ सामना करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा के दिन किसान एरुवाका की परंपरा निभाते हैं। इस अवसर पर वे भूमि और पशुधन की पूजा करते हैं तथा स्वयं को प्रकृति के साथ जोड़ते हैं। उन्होंने कहा, “मैं प्रार्थना करता हूं कि किसानों के घर भरपूर फसल की खुशियों से रोशन हों। हम उस भूमि में जन्मे हैं, जहां प्रकृति की पूजा की जाती है और हम उन परंपराओं का सम्मान करते हैं। आइए, प्राकृतिक खेती को अपनाकर अपनी भूमि और स्वास्थ्य को विषैले तत्वों से सुरक्षित रखें।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि गठबंधन सरकार कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए हमेशा सक्रिय कदम उठाएगी। इसी क्रम में अन्नदाता सुखीभव योजना के तहत सरकार ने पीएम किसान की राशि किसानों के खातों में जमा कर उनका सहयोग किया है। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि किसान एल नीनो और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से उत्पन्न चुनौतियों पर विजय प्राप्त करेंगे। सरकार की सलाह और दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए वे सफल खेती करेंगे और बेहतर उत्पादन हासिल करेंगे।”
कृषि मंत्री के.अच्चन्नायडू ने विजयवाड़ा स्थित कनक दुर्गा मंदिर में राज्य के किसानों की समृद्धि के लिए पूजा-अर्चना की। इस दौरान अच्छी फसल, अधिक उत्पादन और किसानों को बेहतर लाभ मिलने की कामना करते हुए विशेष प्रार्थनाएं की गईं।
कृषि मंत्री ने कहा कि खरीफ सीजन के लिए आवश्यक उर्वरक और बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों को उनकी उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों को हर संभव सहायता और सहयोग प्रदान करेगी। साथ ही बताया कि खरीफ खेती के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
कृषि मंत्री अच्चन्नायडू ने कहा कि किसानों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और उन्होंने किसानों से एल नीनो की चुनौती का साहस के साथ सामना करने का आह्वान किया।
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भी एरुवाका पूर्णिमा के अवसर पर किसानों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि एरुवाका पूर्णिमा एक कृषि पर्व है, जो मानव और प्रकृति के अटूट संबंध का उत्सव है तथा धरती माता और पशुधन के सम्मान का प्रतीक है। 
 


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