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भारत इंडोनेशिया में प्राचीन शिव मंदिर के संरक्षण में मदद करेगा, पीएम मोदी बुधवार को इस प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे

07-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को घोषणा की कि वे इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ मिलकर योग्याकार्ता में 1,000 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे।
इंडोनेशिया रवाना होने से पहले दिए अपने बयान में पीएम मोदी ने कहा कि वह राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा करेंगे। उन्होंने इस स्मारक को भारत और इंडोनेशिया को एक हज़ार से ज़्यादा सालों से जोड़ने वाले गहरे सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का “एक और शानदार सबूत” बताया।
जकार्ता के इस्ताना मर्देका में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद आज एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ मुझे, योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट को लॉन्च करने का सौभाग्य मिलेगा। एक हजार वर्ष से भी अधिक पुराना प्रम्बानन मंदिर भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
दरअसल, यह संरक्षण प्रोजेक्ट दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का हिस्सा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) प्रम्बानन परिसर में मौजूद कई छोटे मंदिरों के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए इंडोनेशियाई अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
प्रम्बानन, इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर योग्याकार्ता के पास स्थित सबसे बड़े मंदिर परिसरों में से एक है। इसमें 9वीं सदी ईस्वी में बनी मूल संरचनाएं शामिल हैं। भूकंप (जिसमें मई 2006 का जावा भूकंप भी शामिल है), ज्वालामुखी विस्फोट और 11वीं सदी की शुरुआत में राजनीतिक सत्ता में बदलाव के कारण ये मंदिर ढह गए थे, और 17वीं सदी में इन्हें फिर से खोजा गया।
प्रम्बानन मंदिर असल में एक कॉम्प्लेक्स है, जिसमें शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित 240 मंदिर हैं। प्रम्बानन को तीन एक-दूसरे के अंदर बने चौकोर हिस्सों के रूप में डिज़ाइन किया गया था। पूरे परिसर में कुल 224 मंदिर हैं। सबसे अंदर वाले चौकोर हिस्से में 16 मंदिर हैं, जिनमें सबसे मुख्य 47 मीटर ऊंचा केंद्रीय शिव मंदिर है; इसके उत्तर में ब्रह्मा का मंदिर और दक्षिण में विष्णु का मंदिर है।
यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है; इसके अनुसार, मंदिर की पत्थर की नक्काशी में रामायण महाकाव्य के इंडोनेशियाई संस्करण को दर्शाया गया है।
प्रम्बानन मंदिर परिसर इंडोनेशिया और इस क्षेत्र में शास्त्रीय काल की उत्कृष्ट कृति के रूप में शिव कला की भव्य संस्कृति को प्रस्तुत करते हैं। वैश्विक संस्था ने बताया कि 1918 से ही इसके जीर्णोद्धार का काम चल रहा है, जिसमें पत्थरों को आपस में जोड़ने की पारंपरिक विधि और मंदिर के ढांचे को मजबूत करने के लिए कंक्रीट के इस्तेमाल वाली आधुनिक विधि, दोनों का उपयोग किया गया है। मई से अक्टूबर के महीनों में पूर्णिमा की शाम को, मंदिर के दक्षिणी हिस्से में बने खुले थिएटर में रामायण बैले का मंचन किया जाता है।
इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और इंडोनेशिया के पहले शिक्षा मंत्री देवांतारा की साझा विरासत का सम्मान करने के लिए आने वाले साल को ‘सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति का टैगोर-देवान्तरा वर्ष’ घोषित किया।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “हम दोनों देश गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा का शताब्दी वर्ष भी धूम-धाम से मनाएंगे। इंडोनेशिया की विकास यात्रा में महान शिक्षाविद और यहां के पहले शिक्षा मंत्री देवान्तरा जी का अहम योगदान रहा है। शिक्षा को लेकर उनके विचारों पर गुरुदेव टैगोर की सोच का गहरा प्रभाव था। इसलिए भारत-इंडोनेशिया, इस शताब्दी वर्ष को “टैगोर और देवान्तरा year of कल्चरल एण्ड एजुकेशनल डिप्लोमेसी” के रूप में मनाएंगे।”
प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति सुबियांतो के निमंत्रण पर दो दिवसीय दौरे पर सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे, आज मंगलवार को पीएम मोदी ने स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी सहित कई क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों और सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों नेताओं ने एक निजी बैठक की, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय वार्ता हुई।

भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का शुरू होगा नया स्वर्णिम अध्याय : पीएम मोदी

07-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कहा कि भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में नई ऊर्जा, नया विश्वास और नई गहराई आई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी अब नई उड़ान भर रही है और दोनों देश विकास, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, संस्कृति तथा शिक्षा सहित सभी क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि आज से दोनों देशों की साझेदारी का एक नया स्वर्णिम अध्याय शुरू होगा, जिसका सकारात्मक प्रभाव पूरी दुनिया और मानवता पर पड़ेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान प्रदान किए जाने पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, वहां की सरकार और जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतवासियों, भारत-इंडोनेशिया की ऐतिहासिक मित्रता और दोनों देशों के लोगों के स्नेह का सम्मान है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता विश्वास रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत कर रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। साथ ही दोनों देशों के कोस्ट गार्ड हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा के लिए मिलकर काम करेंगे। ब्लू इकोनॉमी, बंदरगाह विकास और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया दोनों के लिए गरीबी उन्मूलन और नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि भारत ने इंडोनेशिया के साथ मिड-डे मील योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अनुभव साझा किए हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए समझौते से इंडोनेशिया के लोगों को भारत की उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती दवाएं आसानी से मिल सकेंगी। भारत वहां डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के क्षमता निर्माण में भी सहयोग करेगा। इसके अलावा भारत में विकसित गेहूं के बीजों की आपूर्ति तथा टिकाऊ खेती और कृषि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी तकनीक आधारित सदी है और दोनों देशों के युवा तकनीक के प्रति स्वाभाविक रूप से आकर्षित हैं। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), दूरसंचार और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। दोनों देश स्टार्टअप सहयोग को भी और गहरा करेंगे। उन्होंने घोषणा की कि इंडोनेशिया में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बेंगलुरु का परिसर खोला जाएगा, जिससे पूरे आसियान क्षेत्र के युवाओं को लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में दशकों पुराना सहयोग रहा है। अब दोनों देशों ने संयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी साझा करने और क्षमता निर्माण को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा क्रिटिकल मिनरल्स, स्टील सप्लाई चेन, स्टेनलेस स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट के क्षेत्र में भी नए समझौते किए गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की यूपीआई सेवा जल्द ही इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली से जुड़ जाएगी, जिससे कारोबार और यात्रा दोनों आसान होंगे। उन्होंने बताया कि दोनों नेता योग्याकार्ता स्थित एक हजार वर्ष पुराने प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण परियोजना की शुरुआत करेंगे। इसके साथ ही गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दोनों देश ‘टैगोर और देवान्तरा वर्ष : सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कूटनीति’ के रूप में विशेष आयोजन करेंगे।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्य और विविधता में एकता भारत और इंडोनेशिया की साझा ताकत हैं। दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से लोकतांत्रिक सहयोग और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर दोनों देशों की सोच समान है और भारत हमेशा आसियान की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करता है। फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत ने दो-राष्ट्र समाधान और दीर्घकालिक शांति के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के सामने एक स्वर्णिम अवसर है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का साझा इतिहास, साझा विश्वास और साझा समृद्धि का भविष्य उन्हें और करीब लाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देश मिलकर ‘इंडोनेशिया एमास’ और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करेंगे। 




 

 


दिल्ली रिज बनेगा राजधानी का ‘ग्रीन लंग्स’, अमित शाह ने शुरू किया 70 लाख पौधारोपण अभियान

07-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को दिल्ली सरकार के महत्वाकांक्षी 70 लाख पौधारोपण अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दिल्ली के रिज क्षेत्र में बड़ी संख्या में कांटेदार बबूल और कई तरह के ऐसे पेड़ हैं, जो देखने में हरियाली का अहसास तो कराते हैं, लेकिन पर्यावरण के लिए उतने लाभदायक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब सरकार इस स्थिति को बदलने के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू कर रही है।
गृह मंत्री ने बताया कि 1994 में भारतीय वन अधिनियम के तहत 7,784 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को अधिसूचित किया गया था, लेकिन पिछले 30 वर्षों में इसकी अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि यह बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है और इसके संरक्षण की दिशा में अब ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
अमित शाह ने रेखा गुप्ता सरकार की सराहना करते हुए कहा कि अब 5,000 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को वन क्षेत्र घोषित किया गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि जल्द ही पूरे रिज क्षेत्र को कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इसके जरिए रिज की जैव विविधता को पुनर्जीवित, मिट्टी और जल संसाधनों का संरक्षण तथा दिल्ली के पर्यावरण को नई ऊर्जा और नया जीवन देने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि अगले तीन वर्षों में पूरे रिज क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से पीपल, बरगद, नीम, गूलर, अर्जुन और जामुन जैसे ऐसे पेड़ लगाए जाएंगे, जो 100 वर्ष से अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसी के साथ दिल्ली रिज को राजधानी के ‘ग्रीन लंग्स’ के रूप में विकसित करने का मिशन शुरू हो गया है।
अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की भी जमकर सराहना की। उन्होंने इसे देश में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक बेहद प्रेरणादायक और अनूठा प्रयास बताया। इस अभियान में नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) भी अहम भूमिका निभा रही है। एनडीएमसी ने इस अभियान के तहत करीब 600 पेड़ और 50 हजार झाड़ियां लगाने का लक्ष्य रखा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “आज दिल्ली सरकार के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम एक ही मंच से आयोजित किए गए हैं। इनमें नरेला में हाई सिक्योरिटी प्रिजन का शिलान्यास, स्वचालित वाहन टेस्टिंग सेंटर और तीन नव निर्मित डेपो का लोकार्पण किया गया। साथ ही, 300 इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन की शुरुआत भी हुई।”
उन्होंने कहा, “आज दिल्ली सरकार के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम एक ही मंच से आयोजित किए गए हैं। इनमें नरेला में हाई सिक्योरिटी प्रिजन का शिलान्यास, स्वचालित वाहन टेस्टिंग सेंटर और तीन नव निर्मित डिपो का लोकार्पण किया गया। साथ ही, 300 इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन की शुरुआत भी हुई।

 


जकार्ता पहुंचे पीएम मोदी, राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने गर्मजोशी से किया स्वागत

06-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंच गए। तीन दिवसीय राजकीय दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी का एयरपोर्ट पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने गर्मजोशी से स्वागत किया। 
लैंडिंग से पहले इंडोनेशियाई वायुसेना के फाइटर जेट्स ने पीएम मोदी के विमान को एस्कॉर्ट किया। यह विशेष राजकीय सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
https://x.com/narendramodi/status/2074088889166536851?s=20
पीएम मोदी के विमान को हवाई क्षेत्र में एस्कॉर्ट किया जाना पहली बार नहीं है। कई बार मेजबान देश की वायुसेना के लड़ाकू विमान उनके विमान को एस्कॉर्ट करते हैं। बताना चाहेंगे इससे पहले मई 2026 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की यात्रा के दौरान यूएई वायुसेना के F-16 लड़ाकू जेट्स और स्वीडन दौरे पर ग्रिपेन फाइटर जेट्स ने भी उनका स्वागत किया था।
प्रधानमंत्री मोदी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में 6 दिवसीय दौरे पर हैं। इंडोनेशिया के बाद वे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाएंगे। यह दौरा भारत-इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है।
दौरे पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर मैं 6-8 जुलाई तक इंडोनेशिया जाऊंगा। 2018 में इंडोनेशिया के मेरे पहले दौरे के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने आपसी संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचाया था। हमारे आपसी संबंधों के बढ़ने के बाद यह मेरा पहला द्विपक्षीय दौरा होगा और राष्ट्रपति प्रबोवो के राजकीय दौरे के बाद होगा, जो 26 जनवरी, 2025 को हमारे गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे।”
उन्होंने आगे कहा कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और जनसंपर्क बहुत मजबूत हैं। इस दौरे के दौरान वे भारतीय प्रवासियों से मुलाकात करेंगे और राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता में प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा करेंगे, जो भारत-इंडोनेशिया के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। यह यात्रा आर्थिक, रणनीतिक सहयोग बढ़ाने और दोनों देशों के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने पर केंद्रित है।

 

प्रधानमंत्री मोदी के इंडोनेशिया दौरे से व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती

06-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार से इंडोनेशिया की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंचेंगे। 6 से 8 जुलाई तक प्रस्तावित इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करना और व्यापक रणनीतिक साझेदारी (कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) को और मजबूत करना है। मई 2018 में भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिए जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी की यह पहली द्विपक्षीय इंडोनेशिया यात्रा होगी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इंडोनेशिया आसियान क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है। पिछले दो दशकों में दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2005-06 में जहां द्विपक्षीय व्यापार 4.3 अरब अमेरिकी डॉलर था, वहीं 2022-23 में यह बढ़कर 38.84 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 28.15 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में भारत ने इंडोनेशिया को 5.38 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया, जबकि इंडोनेशिया से 22.78 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात किया। इस तरह दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 28.15 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
भारत इंडोनेशिया से कोयला खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है, जबकि इंडोनेशियाई कच्चे पाम ऑयल का सबसे बड़ा आयातक है। इसके अलावा भारत इंडोनेशिया से खनिज, रबर, पल्प एवं पेपर तथा हाइड्रोकार्बन का भी आयात करता है। वहीं भारत इंडोनेशिया को रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद, वाणिज्यिक वाहन, दूरसंचार उपकरण, कृषि उत्पाद, गोवंशीय मांस, इस्पात उत्पाद और प्लास्टिक का निर्यात करता है।
वाणिज्य विभाग के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार 2020-21 में 17.49 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो 2021-22 में बढ़कर 26.17 अरब अमेरिकी डॉलर और 2022-23 में 38.84 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। इसके बाद 2023-24 में यह 29.40 अरब अमेरिकी डॉलर और 2024-25 में 28.15 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। वहीं अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के दौरान ही दोनों देशों के बीच व्यापार 22.72 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है।
इंडोनेशियाई अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2000 से 2024 के बीच भारतीय कंपनियों ने इंडोनेशिया में 7,292 परियोजनाओं के जरिए 1.56 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। वहीं उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अनुसार, जनवरी 2000 से सितंबर 2025 तक भारत में इंडोनेशिया का संचयी निवेश 668.37 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
वर्तमान में इंडोनेशिया में लगभग 100 भारतीय कंपनियां और संयुक्त उद्यम विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।
दोनों देशों के बीच पर्यटन और हवाई संपर्क में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बढ़ती मांग को देखते हुए एयर इंडिया ने दिल्ली-बाली मार्ग पर अपनी उड़ानों की संख्या सप्ताह में सात से बढ़ाकर 10 कर दी है। फिलहाल भारत और इंडोनेशिया के बीच चार सीधी हवाई सेवाएं संचालित हैं, जिनमें जकार्ता-मुंबई, बाली-बेंगलुरु, बाली-मुंबई और बाली-दिल्ली मार्ग शामिल हैं। हालांकि, जकार्ता और दिल्ली के बीच अभी तक कोई सीधी उड़ान उपलब्ध नहीं है।
वर्ष 2023 में ऑस्ट्रेलिया के बाद बाली आने वाले पर्यटकों में भारत दूसरा सबसे बड़ा स्रोत देश रहा। वहीं 2024 में 7.1 लाख भारतीय पर्यटकों के साथ भारत इंडोनेशिया आने वाले विदेशी पर्यटकों का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत देश रहा। इस सूची में मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और चीन भारत से आगे रहे।


 

 


कोलकाता में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर भव्य आयोजन, अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि

06-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश)  संस्कृति मंत्रालय पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से सोमवार, 6 जुलाई 2026 को कोलकाता के मिलन मेला प्रांगण में ‘भारत केसरी’ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर एक विशेष स्मृति कार्यक्रम आयोजित करेगा। यह कार्यक्रम उनकी 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे दो वर्षीय राष्ट्रव्यापी आधिकारिक समारोह का हिस्सा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी, पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल, संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत अमित शाह और अन्य अतिथियों द्वारा भवानीपुर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आवास पर पुष्पांजलि अर्पित करने से होगी। इसके बाद इको पार्क में डॉ. मुखर्जी की प्रस्तावित 125 फीट ऊंची प्रतिमा का भूमि पूजन और शिलान्यास किया जाएगा। सरकार के अनुसार यह पहल राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से की जा रही है।
मिलन मेला प्रांगण में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया जाएगा। दुर्लभ तस्वीरों, अभिलेखीय दस्तावेजों और मल्टीमीडिया प्रस्तुति के माध्यम से उनके जीवन, वैचारिक दृष्टिकोण, शैक्षिक सुधारों तथा भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों और औद्योगिक विकास में उनके योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा।
स्मृति समारोह की शुरुआत सामूहिक ‘वंदे मातरम’ गायन से होगी। इसके बाद सीसीआरटी की ओर से ‘सुर, संस्कृति एवं राष्ट्र’ विषय पर संगीतमय श्रद्धांजलि प्रस्तुत की जाएगी। इस प्रस्तुति में भारतीय शास्त्रीय, लोक और पारंपरिक संगीत की विभिन्न विधाओं से जुड़े 57 कलाकार हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम का निर्देशन पद्मश्री तरुण भट्टाचार्य ने किया है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की जाएगी। साथ ही उनकी प्रस्तावित 125 फीट ऊंची प्रतिमा के शिलान्यास पर आधारित एक विशेष वीडियो भी जारी किया जाएगा।
संस्कृति मंत्रालय ने वर्ष 2025 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर दो वर्षीय राष्ट्रव्यापी समारोह की घोषणा की थी। मंत्रालय के अनुसार इस आयोजन का उद्देश्य उनके राष्ट्रवाद, जनसेवा, शिक्षा, सांस्कृतिक चेतना और भारत की एकता के प्रति योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा उनकी विरासत को संरक्षित करना है।







 

 


सरकार ने प्याज की खरीद कीमत में 13 प्रतिशत की वृद्धि की, प्याज किसानों को मिलेगा बेहतर मुनाफा मिलेगा

05-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्र सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए प्याज की खरीद मूल्य में 13 प्रतिशत की वृद्धि की है, जो 1,875 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। संशोधित खरीद मूल्य 4 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई हैं। उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, सरकार के मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए एनएएफईडी और एनसीसीएफ के माध्यम से प्याज की खरीद जारी है। संशोधित खरीद मूल्य से प्याज किसानों को बेहतर लाभ मिलेगा और साथ ही बफर खरीद प्रयासों को भी समर्थन मिलेगा।
वहीं, प्याज का उत्पादन 307.37 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) होने का अनुमान है, जो वर्ष 2024-25 के 307.67 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के लगभग बराबर है। उत्पादन अनुमानों को देखते हुए, फिलहाल प्याज की कुल उपलब्धता चिंता का विषय नहीं है, हालांकि कीमतों में सामान्य मौसमी उतार-चढ़ाव के अनुरूप मामूली वृद्धि की उम्मीद की जा सकती है।
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में प्याज का भंडार पर्याप्त है। फिलहाल, भंडारित प्याज की कमी के कोई संकेत नहीं हैं। अखिल भारतीय स्तर पर दैनिक मंडी आवक 50,000 मीट्रिक टन से अधिक बनी हुई है, जबकि महाराष्ट्र में यह आवक 30,000 मीट्रिक टन से अधिक है, और औसत खुदरा मूल्य लगभग 18 रुपये प्रति किलोग्राम है। बेहतर गुणवत्ता वाला स्टॉक भंडार में बना हुआ है और मंदी के दौर में इसके जारी होने की उम्मीद है। अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 31 रुपये प्रति किलोग्राम है।
मानसून के आगमन में देरी और कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा के कारण व्यापारियों के एक वर्ग द्वारा सट्टेबाजी के आधार पर खरीदारी की जा रही है, हालांकि प्रमुख उपभोक्ता केंद्रों में मौजूदा कीमतों पर कोई खास मांग नहीं है। उपभोक्ता बाजारों में सकारात्मक माहौल के बावजूद, नासिक और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों जैसे उत्पादन केंद्रों में सट्टेबाजी की गतिविधियां देखी जा रही हैं, जो मजबूत वास्तविक मांग के बजाय भविष्य में बाजार में सुधार की उम्मीदों पर आधारित हैं।
उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, प्याज का निर्यात सामान्य है, जून 2026 के दौरान लगभग 1.50 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात हुआ। हालांकि, व्यापारियों को उम्मीद है कि प्याज के निर्यात की गति थोड़े समय के लिए धीमी हो सकती है, मुख्य रूप से इसलिए क्योंकि पाकिस्तान और चीन से ताजा फसलें खाड़ी देशों, श्रीलंका और सुदूर पूर्व जैसे प्रमुख निर्यात स्थलों में प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध हैं।
जहां महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में खरीफ की बुवाई में लगभग 15 दिन की देरी दर्ज की गई है, वहीं कर्नाटक के चित्रदुर्ग और चल्लाकेरे क्षेत्रों में बुवाई की प्रगति सामान्य स्तर से लगभग 60 प्रतिशत होने का अनुमान है।

पीएम मोदी ने गुजरात के चिप संयंत्र में महिलाओं की भागीदारी को सराहा, कहा-‘हमारी युवा शक्ति पर गर्व’

05-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारत के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर उद्योग में युवा कार्यबल, विशेषकर दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों से आने वाली महिला कर्मचारियों की भूमिका को रेखांकित किया।
पीएम मोदी की यह टिप्पणी उन्होंने गुजरात के सानंद में एक दिन पहले सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओसैट) सुविधा का उद्घाटन करने के बाद आई है ।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गुजरात के सानंद में नव उद्घाटित सेमीकंडक्टर संयंत्र में कर्मचारियों के साथ उनकी बातचीत इस दौरे के “सबसे विशेष क्षणों में से एक” रही।
उन्होंने कहा कि इस संयंत्र में कार्यरत कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग देश के दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं का है, जिनमें कई आदिवासी समुदायों से हैं। इन सभी ने सेमीकंडक्टर विनिर्माण में काम करने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
प्रधानमंत्री ने लिखा, “वे भारत के दूरस्थ क्षेत्रों से आती हैं और उनमें से कई आदिवासी पृष्ठभूमि से हैं लेकिन उनके अद्भुत जज्बे ने उन्हें सेमीकंडक्टर तकनीक सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रशिक्षण लिया और आज वे भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा को नई ताकत दे रही हैं।” उन्होंने आगे लिखा, “हमारी युवा शक्ति पर गर्व!”
आपको बता दें कि कल शनिवार को सानंद स्थित संयंत्र में कर्मचारियों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक युवा महिला कर्मचारी से पूछा कि वहां बिताए गए एक वर्ष में उन्हें सबसे अधिक खुशी किस बात से मिली।
महिला कर्मचारी ने बताया कि उनके गांव में परिवार आमतौर पर बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए घर से बाहर नहीं भेजते, लेकिन सेमीकंडक्टर संयंत्र में नौकरी मिलने के बाद लोगों की सोच बदल गई है।
उन्होंने कहा, “मेरे गांव में कोई भी परिवार अपनी बेटी को पढ़ाई के लिए बाहर नहीं भेजता लेकिन अब जब मैं गांव लौटती हूं तो सभी हैरान रह जाते हैं। वे पूछते हैं कि मैं कहां रहती हूं और क्या पढ़ाई करती हूं। मैं उन्हें बताती हूं कि मैं सीजी सेमी में काम करती हूं और यह मेरे लिए बहुत बड़ा अवसर है। लोग इस बात से बेहद खुश हैं कि मैं आत्मनिर्भर बन गई हूं। मेरी सहेलियां भी पूछती हैं कि क्या उन्हें भी यहां आने का मौका मिल सकता है, तो मैं कहती हूं कि हां, आओ और यहां काम करो।”
प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के कर्मचारी कौशल कुमार से भी बातचीत की। उन्होंने पूछा कि क्या यह उनकी गुजरात की पहली यात्रा है और साथ ही राज्य की भीषण गर्मी का भी जिक्र किया। इस पर कौशल कुमार ने बताया कि यह उनका गुजरात का पहला दौरा है।
झारखंड के गिरिडीह जिले की एक अन्य महिला कर्मचारी ने प्रधानमंत्री को बताया कि उन्होंने बिरनी स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) का कोर्स किया और फिर सीजी सेमी में उनका चयन हुआ। उन्होंने बताया कि इस नौकरी के कारण उन्हें विदेश यात्रा का अवसर भी मिला।
वहीं, जब प्रधानमंत्री मोदी ने पूछा कि क्या लोग अक्सर आईटीआई की पढ़ाई को कमतर आंकते हैं, तो महिला कर्मचारी ने कहा कि उनके गांव के लोग शुरुआत में मानते थे कि वह जीवन में कुछ खास नहीं कर पाएंगी।
उन्होंने कहा, “पहले लोग सोचते थे कि मैं सिर्फ गांव की एक लड़की हूं, जो पढ़ाई के लिए बाहर चली गई है और कुछ नहीं कर पाएगी। जब मैं रांची में थी, तब लोग कहते थे कि मैं बस समय बिता रही हूं। लेकिन अब उन्हें एहसास हो गया है कि मैं वास्तव में कुछ सार्थक कर रही हूं।”
ये बातचीत प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सीजी सेमी की आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओसैट) सुविधा के उद्घाटन के बाद हुई। इस संयंत्र में अब व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है।
करीब 7,500 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित यह परियोजना ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत उत्पादन शुरू करने वाली भारत की तीसरी सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई है।
इस संयंत्र में ऑटोमोबाइल, औद्योगिक और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए सेमीकंडक्टर चिप्स की पैकेजिंग और परीक्षण किया जाएगा, जिससे देश के घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को और मजबूती मिलेगी।
शनिवार को आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युवा कर्मचारियों के आत्मविश्वास ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों से उन्होंने मुलाकात की, वे सभी “आत्मविश्वास से भरपूर” थे।
उन्होंने कहा, “देश का लक्ष्य चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और टेस्टिंग को समाहित करते हुए एक पूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करना है। यह उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के विस्तार की व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।”

 

विकसित भारत–जी राम जी के लिए राज्यों को ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त जारी

05-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज रविवार को सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [वीबी–जी राम जी] के क्रियान्वयन की समीक्षा की तथा राज्यों को योजना के संचालन के लिए ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त (मदर सैंक्शन) जारी की।
इस दौरान, चौहान ने कहा कि सरकार का संकल्प था कि 1 जुलाई, 2026 से विकसित भारत–जी राम जी पूरे देश में बिना किसी व्यवधान के लागू हो। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि योजना पूरे देश में सफलतापूर्वक लागू हो चुकी है तथा मनरेगा से विकसित भारत–जी राम जी में ट्रांजीशन पूरी तरह सहज और सुचारु रहा है। अब तक किसी भी प्रकार की तकनीकी अथवा संचालन संबंधी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि गरीब मजदूर भाई-बहनों की सेवा ही भगवान की सेवा है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण श्रमिकों को सम्मानजनक रोजगार, समय पर मजदूरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण सुनिश्चित करना है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत–जी राम जी के अंतर्गत मजदूरी दरों में औसतन लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। अब देश के किसी भी राज्य में मजदूरी ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं होगी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण श्रमिकों की आय और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक है।
चौहान ने आगे कहा कि आज जारी की गई ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त का उद्देश्य राज्यों को समय पर संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि श्रमिकों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे भी अपनी हिस्सेदारी की राशि समय पर जारी करें, जिससे मजदूरी भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकसित भारत–जी राम जी के प्रभावी क्रियान्वयन में धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। पहली किस्त राज्यों की मांग के आधार पर जारी की गई है और भविष्य में भी आवश्यकता के अनुसार धन उपलब्ध कराया जाएगा। चौहान ने कहा कि ग्राम सभाएं और ग्राम पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों का चयन करें ताकि गांवों का समग्र और सहभागी विकास सुनिश्चित हो सके।

 

तीजन बाई के निधन से देशभर में शोक, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री समेत दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

05-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई के निधन पर पूरे देश में शोक की लहर है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने उनके निधन को कला जगत और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, “प्रख्यात पंडवानी कलाकार तीजन बाई के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली उपस्थिति और अनोखी प्रस्तुति से महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत किया। अपनी विलक्षण प्रतिभा, समर्पण और वर्षों की साधना से उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी परंपरा को देश-विदेश में पहचान दिलाई। भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रसार करने में उनका अमूल्य योगदान स्मरणीय रहेगा। मैं उनके प्रियजनों और प्रशंसकों के प्रति गहन संवेदनाएं व्यक्त करती हूं।”
डॉ. तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला और प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पंडवानी को विश्वभर में नई पहचान दिलाई। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर जारी अपने शोक संदेश में कहा कि तीजन बाई का निधन कला और संस्कृति की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने शोकाकुल परिवार और उनके लाखों प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। 
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पद्म विभूषण से सम्मानित प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। अपनी अद्वितीय प्रतिभा और समर्पण से उन्होंने पंडवानी लोककला को विशिष्ट पहचान दिलाई। छत्तीसगढ़ की इस लोककला के संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों व उनके प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।”
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने रायपुर एम्स पहुंचकर तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है। अपनी अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा से उन्होंने पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। राज्य सरकार की ओर से उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पोस्ट किया, “सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका और ‘पद्म विभूषण’ तीजन बाई का निधन अत्यंत दुखद है। विनम्र श्रद्धांजलि। उन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा, सशक्त अभिव्यक्ति और संगीत साधना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा ‘पंडवानी’ को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। भारतीय लोककला व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में उनका योगदान अविस्मरणीय है। मां दंतेश्वरी से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों व उनके प्रशंसकों को यह अथाह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”
छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने लिखा, “आज पंडवानी का एक सुर सदा के लिए शांत हो गया है। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की सशक्त प्रतीक, पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से अलंकृत, विश्वविख्यात पंडवानी की अप्रतिम साधिका तीजन बाई का देहांत छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक चेतना के लिए एक अपूरणीय क्षति है। तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाते हुए अनगिनत कलाकारों को प्रेरणा प्रदान की। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीधाम में स्थान प्रदान करें तथा शोक-संतप्त परिजनों को यह असीम दुख सहने की शक्ति दें।”
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने भी तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “छत्तीसगढ़ की अनमोल रत्न, महान पंडवानी गायिका, पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश में कला और संस्कृति की बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने गायन से पंडवानी विधा को सजीव रखा और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। हम सब आज उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिजनों व प्रशंसकों को संबल दे।”


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