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1,500 करोड़ रुपए से होगा अंबाबाई मंदिर परिसर का विकास, अमित शाह ने रखी आधारशिला

20-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को महाराष्ट्र के प्रसिद्ध करवीर निवासिनी अंबाबाई (महालक्ष्मी) मंदिर के विकास कार्यों का शिलान्यास किया। करीब 1,500 करोड़ रुपए की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत मंदिर परिसर में नए प्रदक्षिणा मार्ग (प्रदक्षिणा पथ) का निर्माण तथा परिवार देवता मंदिरों के संरक्षण और जीर्णोद्धार का कार्य किया जाएगा। इस अवसर पर उनकी पत्नी सोनल शाह भी मौजूद रहीं।
शिलान्यास समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी शामिल हुए। तीनों नेताओं ने माता महालक्ष्मी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और निरीक्षण किया।
इस अवसर पर अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र की पवित्र भूमि और माता अंबाबाई के धाम कोल्हापुर में एक ऐतिहासिक कार्य की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा, “यह वही करवीर नगरी है, जहां माता अंबाबाई सदियों से विराजमान हैं। महाराष्ट्र सरकार द्वारा मंदिर के जीर्णोद्धार और भव्य कॉरिडोर निर्माण का कार्य शुरू किया जा रहा है। इससे कोल्हापुर, महाराष्ट्र और देशभर में माता अंबाबाई के करोड़ों भक्तों में खुशी, उत्साह और भक्ति का अद्भुत माहौल बना है।”
गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने विकास और विरासत संरक्षण का अनूठा संगम देखा है। उन्होंने कहा, “मैं माता अंबाबाई की पावन धरती से महाराष्ट्र की जनता से संवाद कर रहा हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को भी नई पहचान मिली है।”
मंदिर विकास परियोजना को कोल्हापुर की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना के पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बेहतर होंगी और क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। 








 

ओडिशा के विकास के लिए 47 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाएं, पीएम मोदी ने किया लोकार्पण

20-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ओडिशा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मयूरभंज में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का स्पष्ट विजन है कि पूर्वी भारत के विकास से ही भारत का विकास होगा। उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत सरकार ‘पूर्वोदय’ नीति पर काम कर रही है और पूर्वी भारत को विकास का नया केंद्र बनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस पूर्वी भारत को कांग्रेस शासन के दौरान पिछड़ेपन का पर्याय बना दिया गया था, आज वही क्षेत्र देश की प्रगति का प्रवेश द्वार बन रहा है। उन्होंने कहा कि ओडिशा इस सकारात्मक बदलाव का प्रत्यक्ष साक्षी है। उन्होंने ओडिशा की भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर राज्य की जनता को बधाई देते हुए कहा कि मयूरभंज आना और बड़ी संख्या में लोगों का स्नेह प्राप्त करना उनके लिए विशेष अवसर है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के कारण विकास की गति और तेज हुई है।
पीएम मोदी ने संथाली भाषा के लिए ‘ओल चिकी’ लिपि विकसित करने वाले पंडित रघुनाथ मुर्मु को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने संथाली भाषा में भारत के संविधान को उपलब्ध कराया है और ओडिशा की अनेक विभूतियों को पद्म सम्मान से सम्मानित किया है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में ओडिशा सरकार भी राज्य की महान विभूतियों के सपनों को साकार करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में मौजूद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मयूरभंज की धरती पर पली-बढ़ी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होकर राष्ट्र का मार्गदर्शन कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। उनके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।”
पीएम मोदी ने कहा कि ओडिशा की बेटी आज देश के सर्वोच्च पद पर पहुंची है, जो पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के उदार व्यक्तित्व, सहृदय स्वभाव और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण ने न केवल मयूरभंज बल्कि पूरे ओडिशा की पहचान को मजबूत किया है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान ओडिशा के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया है। इन परियोजनाओं पर लगभग 47 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, रेलवे और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी इन परियोजनाओं से राज्य के लोगों को व्यापक लाभ मिलेगा और विकास को नई गति मिलेगी।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहाड़पुर गांव को तेजी से सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत गांव के हर घर तक सौर ऊर्जा की सुविधा पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोणार्क सूर्य मंदिर ओडिशा की विशेष पहचान है, उसी तरह पहाड़पुर भी सोलर विलेज के रूप में नई पहचान बनाएगा। इससे ग्रामीणों को मुफ्त बिजली मिलेगी और अतिरिक्त बिजली बेचकर आय अर्जित करने का अवसर भी प्राप्त होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में ओडिशा और देश के सामने दो महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। वर्ष 2036 में ओडिशा के गठन के 100 वर्ष पूरे होंगे, जबकि 2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा। उन्होंने कहा कि ओडिशा और भारत के विकास का लक्ष्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। ओडिशा की अर्थव्यवस्था जितनी मजबूत होगी, भारत भी उतना ही मजबूत बनेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य की क्षमता और जनता के सहयोग से ओडिशा विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और पीएम मोदी का ओडिशा दौरा ऐतिहासिक: मोहन चरण माझी

20-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को रायरंगपुर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त मौजूदगी को राज्य के इतिहास का एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह अवसर ओडिशा के लिए एक सुनहरे अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राष्ट्रपति को उनके 68वें जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ओडिशा की 4.5 करोड़ जनता की ओर से दोनों गणमान्य नेताओं का स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मयूरभंज के एक दूरस्थ आदिवासी गांव से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का सफर समर्पण, जनसेवा, कड़ी मेहनत और भारतीय लोकतंत्र में अटूट विश्वास का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने उन्हें देशभर की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके दीर्घायु, स्वस्थ और सुखमय जीवन की कामना की।
मोहन चरण माझी ने राष्ट्रपति के जन्मदिन समारोह में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की उपस्थिति ने इस अवसर को और अधिक यादगार बना दिया।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के दो वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार लगातार ओडिशा के विकास में सहयोग कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार गठन के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आठ बार ओडिशा का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रत्येक दौरे के साथ नई विकास परियोजनाओं की शुरुआत हुई है और केंद्र तथा राज्य के बीच सहयोग और मजबूत हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं का समाज के प्रत्येक वर्ग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा, “हर किसी के जीवन में मोदी की थोड़ी-बहुत झलक है।” मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के दूरगामी प्रभावों को रेखांकित करते हुए कहा कि इनसे गरीब, किसान, महिला और वंचित वर्गों को व्यापक लाभ मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले दो वर्षों में कई महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। इनमें महिलाओं के लिए सुभद्रा योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, किसानों के लिए कृषक समृद्धि योजना, गोदावरीश मिश्रा मॉडल प्राइमरी स्कूल योजना, वरिष्ठ नागरिकों के लिए श्री जगन्नाथ दर्शन योजना और आयुष्मान भारत योजना का राज्य में क्रियान्वयन शामिल है।
मोहन चरण माझी ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसा करने वाला ओडिशा देश का पहला राज्य बनेगा। उन्होंने सामान्य, मेडिकल और तकनीकी शिक्षा में सामाजिक तथा शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘उत्कर्ष ओडिशा-मेक इन ओडिशा’ पहल के तहत राज्य की दूसरी औद्योगिक क्रांति तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि 3.11 लाख करोड़ रुपए की लागत वाली 152 औद्योगिक परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास किया गया है। इन परियोजनाओं से लगभग 2.5 लाख रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं, जबकि 44 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां भी प्रदान की गई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के 30 में से 29 जिलों में उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे औद्योगिक विकास अधिक समावेशी बन रहा है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में ओडिशा में ‘रिवर्स माइग्रेशन’ देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में दूसरे राज्यों के लोग रोजगार की तलाश में ओडिशा आएंगे, जबकि ओडिशा के लोगों को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
मोहन चरण माझी ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कारण ओडिशा को 90 हजार करोड़ रुपए की रेलवे परियोजनाएं, 40 हजार करोड़ रुपए की सड़क अवसंरचना परियोजनाएं, 25 हजार करोड़ रुपए की बंदरगाह परियोजनाएं, 25 हजार करोड़ रुपए का जहाज निर्माण एवं मरम्मत क्लस्टर, पारादीप में 80 हजार करोड़ रुपए का पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स और 5 हजार करोड़ रुपए का भुवनेश्वर-कटक-पुरी-पारादीप आर्थिक गलियारा मिला है। उन्होंने कहा कि इस दौरे के दौरान लगभग 50 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं की शुरुआत केंद्र सरकार की ओडिशा के विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, आजीविका और औद्योगिक विकास के क्षेत्रों में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उद्योग-अनुकूल नीतियों के कारण ओडिशा निवेशकों के लिए पसंदीदा गंतव्य बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वर्ष 2036 तक ‘समृद्ध ओडिशा’ और वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हाल ही में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा इस बात का प्रमाण है कि विश्व मंच पर भारत का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ‘विकसित ओडिशा’ और ‘विकसित भारत’ के साझा विजन को साकार करने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी। 

 

भारत-दक्षिण कोरिया ने डिजिटल शासन और लोक प्रशासन में सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर

20-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को नई दिल्ली में दक्षिण कोरिया गणराज्य के गृह एवं सुरक्षा मंत्री युन होजुंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक में डिजिटल शासन, ई-गवर्नेंस, लोक प्रशासन, क्षमता निर्माण और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।
भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए दक्षिण कोरिया के गृह एवं सुरक्षा मंत्री युन होजुंग ने अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों के साथ एक घंटे से अधिक समय तक विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कोरियाई प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार और सुशासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित विशेष रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं।
जितेंद्र सिंह ने इस वर्ष अप्रैल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात के दौरान अंतिम रूप दिए गए संयुक्त रणनीतिक दृष्टिकोण वक्तव्य का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस वक्तव्य ने दोनों देशों की द्विपक्षीय साझेदारी के भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोले हैं।
डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल शासन, सार्वजनिक सेवा वितरण और शिकायत निवारण प्रणाली में भारत द्वारा हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सीपीग्राम, डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र और अन्य प्रौद्योगिकी-आधारित शासन प्लेटफॉर्म पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया दो प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाएं हैं, जो साझा मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और कानून के शासन के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने अयोध्या की राजकुमारी सुरिरत्ना और कोरियाई राजा किम सूरो के बीच ऐतिहासिक वैवाहिक संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच यह सांस्कृतिक जुड़ाव आज भी विशेष महत्व रखता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रपति ली जे म्युंग की हालिया भारत यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे व्यापार एवं निवेश, बंदरगाह और समुद्री मामलों, डिजिटल एवं फिनटेक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति तथा खेल जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और भविष्य में इसके और विस्तार की संभावनाएं हैं।
बैठक के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों देशों के मंत्रालय लोक प्रशासन और सरकारी नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) को अंतिम रूप देने पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच प्रशासनिक सुधारों और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान को और मजबूत करेगा।
वार्ता के दौरान सरकारी सेवाओं के डिजिटल रूपांतरण, लोक प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग, सिविल सेवकों के क्षमता निर्माण, नागरिक भागीदारी और सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणालियों में सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करने जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया। वहीं, कोरियाई प्रतिनिधिमंडल ने स्मार्ट गवर्नेंस, डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं तथा आपदा एवं सुरक्षा प्रबंधन के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर हुई इस बैठक का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दक्षिण कोरिया में योग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कोरियाई प्रतिनिधिमंडल को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।
दोनों पक्षों ने उभरती शासन संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए लोगों के बीच संपर्क और संस्थागत साझेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक का समापन सकारात्मक माहौल में हुआ, जिसमें दोनों नेताओं ने कुशल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देने के लिए भारत-दक्षिण कोरिया सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। 

पूर्वी भारत के विकास से ही होगा विकसित भारत का निर्माण : मयूरभंज में बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

20-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) ओडिशा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर मयूरभंज में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार का स्पष्ट विजन है कि पूर्वी भारत के विकास से ही भारत का विकास होगा। उन्होंने कहा कि ‘पूर्वोदय’ नीति के तहत पूर्वी राज्यों को विकास का नया इंजन बनाया जा रहा है और ओडिशा इस परिवर्तन का प्रमुख उदाहरण बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री ने ओडिशा की भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर राज्य की जनता को बधाई देते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के कारण विकास की गति तेज हुई है और राज्य नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में मौजूद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मयूरभंज की धरती पर पली-बढ़ी ओडिशा की बेटी आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होकर राष्ट्र का मार्गदर्शन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का उदार व्यक्तित्व, सहृदय स्वभाव और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण न केवल मयूरभंज बल्कि पूरे ओडिशा की पहचान को सशक्त बना रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति के दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना भी की।
पीएम मोदी ने पंडित रघुनाथ मुर्मु, डॉ. दमयंती बेश्रा और चरण हेम्ब्रम जैसी विभूतियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि पंडित रघुनाथ मुर्मु ने संथाली भाषा के लिए ‘ओल चिकी’ लिपि का निर्माण किया था। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने संथाली भाषा में भारतीय संविधान उपलब्ध कराया है और ओडिशा की अनेक विभूतियों को पद्म सम्मान से सम्मानित किया है।
प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पैतृक क्षेत्र पहाड़पुर गांव को तेजी से ‘सूर्यग्राम’ यानी सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गांव के प्रत्येक घर तक सौर ऊर्जा पहुंचाई जाएगी। इससे ग्रामीणों को मुफ्त बिजली मिलेगी और अतिरिक्त बिजली बेचकर आय बढ़ाने का अवसर भी प्राप्त होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार कोणार्क का सूर्य मंदिर ओडिशा की पहचान है, उसी प्रकार पहाड़पुर भी भविष्य में सूर्यग्राम के रूप में नई पहचान बनाएगा।
पीएम नरेंद्र मोदी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान ओडिशा के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया है। इन परियोजनाओं पर लगभग 47 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बिजली, सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र की इन परियोजनाओं से राज्य के लोगों को व्यापक लाभ मिलेगा और विकास को नई गति मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस पूर्वी भारत को कांग्रेस शासन के दौरान पिछड़ेपन का पर्याय बना दिया गया था, आज वही क्षेत्र देश की प्रगति का प्रवेश द्वार बन रहा है। उन्होंने कहा कि ओडिशा के पास समुद्री तट, खनिज संपदा, कृषि क्षमता और प्रतिभाशाली युवा शक्ति जैसे अपार संसाधन हैं। इन्हीं क्षमताओं का उपयोग कर राज्य को विकास की नई दिशा दी जा रही है।
पीएम मोदी ने कहा कि ओडिशा में रेलवे अवसंरचना में रिकॉर्ड निवेश किया जा रहा है। नई सड़कें, आर्थिक गलियारे और बंदरगाह विकसित किए जा रहे हैं। ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक उद्योगों में बड़े निवेश आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि ‘उत्कर्ष ओडिशा’ अभियान के तहत अब तक करीब 20 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जबकि साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक की कई मेगा परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार का उद्देश्य लोगों तक स्वयं पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करना है। उन्होंने बताया कि धान खरीद पर किसानों को 3,100 रुपए प्रति क्विंटल देने का निर्णय लिया गया है। सुभद्रा योजना के माध्यम से एक करोड़ से अधिक महिलाओं तक आर्थिक सहायता पहुंचाई गई है। वहीं आयुष्मान भारत योजना के जरिए ओडिशा के लोगों को देशभर में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय जनजातीय क्षेत्रों में काम करते हुए बिताया है और आदिवासी समाज की चुनौतियों को करीब से समझा है। उन्होंने बताया कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और पीएम जनमन योजना के माध्यम से दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और आवास जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभर में करीब 500 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जबकि लगभग 750 विद्यालयों को मंजूरी दी जा चुकी है। मयूरभंज में भी एक नए नवोदय विद्यालय को स्वीकृति प्रदान की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। चार करोड़ से अधिक हेल्थ कार्ड वितरित किए गए हैं और करोड़ों आदिवासी लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही जल जीवन मिशन के तहत घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का कार्य तेजी से जारी है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि वर्ष 2036 में ओडिशा के गठन के 100 वर्ष पूरे होंगे, जबकि 2047 में भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा। उन्होंने कहा कि ओडिशा और भारत के विकास का लक्ष्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। ओडिशा की अर्थव्यवस्था जितनी मजबूत होगी, भारत भी उतना ही मजबूत बनेगा। उन्होंने राज्य की क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि मिलकर ओडिशा को विकास की नई बुलंदियों तक पहुंचाया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उल्लेख करते हुए देश और दुनिया के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में इसमें भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि ज्ञान और योग की भूमि ओडिशा में योग सदियों से संस्कृति और जीवनशैली का हिस्सा रहा है तथा यह स्वस्थ जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम है। 

रक्षा आधुनिकीकरण का दशक: स्वदेशी क्षमता से रणनीतिक महाशक्ति बनने की ओर भारत

17-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) पिछले एक दशक में भारत ने रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन दर्ज किया है। यह बदलाव केवल सैन्य आधुनिकीकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, रक्षा उत्पादन और वैश्विक रणनीतिक साझेदारियों के विस्तार के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक सुदृढ़ीकरण के रूप में सामने आया है। भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए एक विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार और उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी पहचान मजबूत की है।
27 मार्च 2019 को भारत ने मिशन शक्ति के तहत अंतरिक्ष में एक उपग्रह को सफलतापूर्वक नष्ट कर अपनी एंटी-सैटेलाइट क्षमता का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया, जिनके पास ऐसी रणनीतिक क्षमता उपलब्ध है। इसके बाद 11 मार्च 2024 को मिशन दिव्यास्त्र के अंतर्गत लंबी दूरी की ऐसी मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया, जो मल्टीपल वॉरहेड प्रणाली से लैस है और एक साथ कई लक्ष्यों पर प्रहार करने में सक्षम है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आकाश एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली, ब्रह्मोस मिसाइल, एंटी-ड्रोन सिस्टम और एयरबोर्न सर्विलांस प्लेटफॉर्म जैसी स्वदेशी रक्षा प्रणालियों ने भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान किया। 23 अगस्त 2025 को डीआरडीओ ने एक उन्नत वायु रक्षा प्रणाली का सफल परीक्षण किया, जिसमें मिसाइल इंटरसेप्टर, कम दूरी की वायु रक्षा हथियार प्रणाली और लेजर आधारित तकनीकों का एकीकृत उपयोग शामिल था।
स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान को फरवरी 2019 में अंतिम परिचालन मंजूरी प्राप्त हुई और भारतीय वायु सेना द्वारा 83 विमानों की खरीद को स्वीकृति दी गई। फरवरी 2021 में अर्जुन एमके-1ए मुख्य युद्धक टैंक भारतीय सेना में शामिल किया गया, जिससे स्वदेशी बख्तरबंद क्षमता को नई मजबूती मिली। वर्ष 2022 में रक्षा क्षेत्र के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित 75 तकनीकों का विकास किया गया। इनमें निगरानी, साइबर सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, स्वायत्त प्रणालियां और युद्धक्षेत्र सहायता जैसी क्षमताएं शामिल हैं।
भारत ने अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के लिए उन्नत प्रणोदन तकनीकों के विकास में भी महत्वपूर्ण प्रगति की है। 9 जनवरी 2026 को डीआरडीओ ने स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट सुविधा में 12 मिनट से अधिक समय तक सक्रिय रूप से शीतित स्क्रैमजेट फुल-स्केल कंबस्टर का सफल दीर्घकालिक ग्राउंड परीक्षण किया। इसे हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक के विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। भविष्य की उच्च गति वाली मिसाइल तकनीकों के विकास को समर्थन देने के लिए हैदराबाद में अत्याधुनिक हाइपरसोनिक विंड टनल सुविधा भी स्थापित की गई है।
भारत के रक्षा क्षेत्र में हुआ यह परिवर्तन अनुसंधान, नवाचार और रणनीतिक क्षमताओं के सतत विकास के प्रति उसकी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। युद्धक्षेत्र के लिए तैयार प्रणालियों से लेकर भविष्य की उन्नत प्रौद्योगिकियों और सहयोगात्मक नवाचार नेटवर्क तक, देश ने दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। इन उपलब्धियों ने भारत की उस क्षमता को और सशक्त बनाया है, जिसके माध्यम से वह बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकता है और अपनी घरेलू तकनीकी तथा औद्योगिक शक्ति के आधार पर आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था को साकार कर सकता है।
पिछले दशक में भारत की रक्षा कूटनीति राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक प्रभाव और वैश्विक सहभागिता का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरी है। रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए भारत ने प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ रक्षा साझेदारियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। आज रक्षा सहयोग केवल सैन्य आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, रक्षा उद्योग सहयोग, सह-विकास और संयुक्त निर्माण जैसे महत्वपूर्ण आयाम भी शामिल हो चुके हैं।
क्वाड, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) जैसे मंचों के माध्यम से भारत समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। ये प्रयास भारत के बढ़ते रणनीतिक आत्मविश्वास, वैश्विक जिम्मेदारियों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और एक विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार के रूप में उसकी मजबूत होती पहचान को प्रतिबिंबित करते हैं।
पिछले एक दशक में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग अभूतपूर्व रूप से मजबूत हुआ है। 2016 में लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एलईएमओए), 2018 में कम्युनिकेशंस कम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (सीओएमसीएएसए) और 2020 में बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (बीईसीए) जैसे समझौतों ने दोनों देशों के रक्षा संबंधों को संस्थागत मजबूती प्रदान की। अमेरिका द्वारा भारत को ‘मेजर डिफेंस पार्टनर’ का दर्जा और एसटीए-1 की मान्यता दिए जाने से उच्च तकनीक एवं रक्षा उपकरणों तक भारत की पहुंच और सुदृढ़ हुई।
वर्ष 2023 में आईसीईटी पहल और 2025 में ट्रस्ट पहल के माध्यम से दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर निर्माण, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अन्य उभरती रणनीतिक तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा दी। अक्टूबर 2025 में भारत और अमेरिका ने कुआलालंपुर में दस वर्षीय रक्षा साझेदारी फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए, जिससे संयुक्त सैन्य अभ्यासों, रक्षा औद्योगिक सहयोग और हिंद-प्रशांत सुरक्षा सहयोग को नई गति मिली।
वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तनों के बावजूद भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग मजबूत बना हुआ है। दिसंबर 2024 और दिसंबर 2025 में आयोजित अंतर-सरकारी आयोग की बैठकों में दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों के बीच सहयोग अब पारंपरिक खरीद-बिक्री से आगे बढ़कर संयुक्त अनुसंधान, सह-विकास, सह-उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर केंद्रित हो रहा है, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
27 जनवरी 2026 को आयोजित भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता समुद्री सुरक्षा, साइबर रक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और अंतरिक्ष क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का व्यापक ढांचा प्रदान करता है।
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंध भारत की सबसे मजबूत रणनीतिक-औद्योगिक साझेदारियों में शामिल हैं। राफेल लड़ाकू विमान सौदे और प्रोजेक्ट-75 के तहत स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के निर्माण ने इस सहयोग को नई मजबूती दी है। जनवरी 2025 में छठी और अंतिम कलवरी-श्रेणी पनडुब्बी भारतीय नौसेना में शामिल की गई। वहीं 26 राफेल-मरीन लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी मिलने से दोनों देशों के रक्षा संबंध और मजबूत हुए हैं।
भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। 2020 में हुए एसीएसए समझौते ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच लॉजिस्टिक सहयोग को नया आयाम दिया। जिमेक्स नौसैनिक अभ्यास दोनों देशों की समुद्री साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है।
भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच रक्षा संबंध अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी में परिवर्तित हो चुके हैं। जनवरी 2026 में दोनों देशों ने रक्षा उद्योग सहयोग, विशेष अभियानों और आतंकवाद-रोधी प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए।
व्यापक रणनीतिक साझेदारी के बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। अक्टूबर 2025 में कैनबरा में आयोजित पहली रक्षा मंत्रिस्तरीय वार्ता ने समुद्री सुरक्षा, संयुक्त अभ्यासों और रक्षा उद्योग सहयोग को और मजबूत करने का मार्ग प्रशस्त किया।
एससीओ में शामिल होने के बाद भारत ने आतंकवाद-रोधी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इस मंच का प्रभावी उपयोग किया है। जून 2025 में किंगदाओ में आयोजित बैठक में भारत ने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति को दोहराते हुए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया।
नवंबर 2025 में कुआलालंपुर में आयोजित एडीएमएम-प्लस बैठक में भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। एक्ट ईस्ट नीति के तहत वियतनाम, फिलीपींस और इंडोनेशिया के साथ रक्षा सहयोग भी उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुआ है।
वर्ष 2017 में पुनर्जीवित और 2021 में नेताओं के शिखर सम्मेलन स्तर तक उन्नत किए गए क्वाड में भारत एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरा है। 2025 में आयोजित क्वाड-एट-सी मिशन और मालाबार अभ्यास ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को नई दिशा दी।
सागर दृष्टि और महासागर सिद्धांत के आधार पर भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक विश्वसनीय सुरक्षा प्रदाता के रूप में उभरा है। निरंतर नौसैनिक उपस्थिति, समुद्री अभ्यासों और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों ने इस भूमिका को और सुदृढ़ किया है।
पिछले 12 वर्षों में भारत की रक्षा यात्रा केवल सैन्य आधुनिकीकरण की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे राष्ट्र के उदय का प्रतीक है जो अपनी स्वदेशी क्षमताओं के बल पर अपने रणनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। युद्धपोतों, लड़ाकू विमानों, ड्रोन, मिसाइल प्रणालियों और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र, स्टार्टअप्स तथा एमएसएमई की बढ़ती भागीदारी तक, देश ने एक व्यापक और नवाचार-आधारित रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है।
भारत आज हिंद-प्रशांत और उससे आगे एक आत्मविश्वासी और विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार के रूप में उभर रहा है। उसकी रक्षा कूटनीति अब तकनीकी सहयोग, समुद्री सुरक्षा, औद्योगिक साझेदारी और रणनीतिक पहुंच के समन्वित मॉडल पर आधारित है। 2047 की ओर बढ़ते हुए भारत की रक्षा तैयारियां नवाचार, मजबूती और आत्मनिर्भरता से प्रेरित रहेंगी। पिछले दशक में तैयार यह मजबूत आधार भारत को केवल वैश्विक सुरक्षा परिवर्तनों पर प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं, बल्कि उन्हें आकार देने में सक्षम एक सक्रिय शक्ति के रूप में स्थापित करता है।

 


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मध्य प्रदेश दौरे से पहले हाई अलर्ट, ओंकारेश्वर में कड़े सुरक्षा इंतजाम

17-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पांच दिवसीय मध्य प्रदेश दौरे के मद्देनजर राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। विशेष रूप से ओंकारेश्वर के दो दिवसीय कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस और प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने सभी जिलों की पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा इंतजामों को सुदृढ़ करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 18 जून को इंदौर से ओंकारेश्वर पहुंचेंगी। वहां आगमन के बाद वह पूजा-अर्चना करेंगी और ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगी। इसके बाद 19 जून को विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित आधिकारिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी।
राष्ट्रपति के दौरे को सुचारू बनाने के लिए ओंकारेश्वर क्षेत्र में यातायात व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए हैं। ये व्यवस्थाएं 17 जून की रात 12 बजे से 19 जून तक प्रभावी रहेंगी। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए हैं।
राष्ट्रपति का इंदौर एयरपोर्ट पर मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्वागत किया जाएगा। इंदौर से ओंकारेश्वर तक उनकी यात्रा हेलीकॉप्टर या सड़क मार्ग से हो सकती है। अधिकारियों के अनुसार अंतिम निर्णय मौसम की स्थिति को देखते हुए लिया जाएगा।
खंडवा के जिला मजिस्ट्रेट ऋषव गुप्ता ने श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि 18 और 19 जून को राष्ट्रपति का कार्यक्रम निर्धारित है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कारणों से आम लोगों को कुछ असुविधा हो सकती है, इसलिए प्रशासन का सहयोग करें ताकि कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
राष्ट्रपति के दौरे के दौरान भारी वाहनों के रूट में बदलाव किया गया है। इंदौर से खंडवा जाने वाले वाहन महू-मानपुर-धामनोद-खरगोन, सिमरोल-मंडलेश्वर-कसरावद-खरगोन अथवा बड़वाह-मंडलेश्वर-कसरावद-खरगोन मार्ग का उपयोग करेंगे। वहीं, खंडवा से इंदौर की ओर जाने वाला यातायात भीकनगांव-खरगोन-कसरावद मार्ग से संचालित होगा। मंडलेश्वर से आने वाले वाहनों को कसरावद-खालघाट मार्ग से गुजरने के निर्देश दिए गए हैं।
इंदौर और खंडवा की ओर से आने वाले छोटे वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों तक भेजा जाएगा, जहां से श्रद्धालु पैदल दर्शन और पवित्र स्नान के लिए जा सकेंगे। दोनों दिशाओं से आने वाली बसों की पार्किंग मोरतक्का में की जाएगी। राष्ट्रपति के काफिले के आवागमन के दौरान कुछ मार्गों को अस्थायी रूप से वाहन निषेध क्षेत्र घोषित किया जाएगा।
स्थानीय प्रशासन ने राष्ट्रपति के दौरे को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके और आम जनता को न्यूनतम असुविधा हो। 










 

सौर ऊर्जा से साझा समृद्धि और खाद्य सुरक्षा को मिलेगा बल: प्रधानमंत्री मोदी

17-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के महानिदेशक आशीष खन्ना द्वारा लिखित एक लेख साझा किया है। उन्होंने कहा कि यह लेख सौर ऊर्जा और कृषि क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग की संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है।
लेख में बताया गया है कि सौर ऊर्जा एक क्रांतिकारी शक्ति के रूप में उभर रही है। इसमें कृषि क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के लिए भारत के मॉडल को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। लेख के अनुसार, यह मॉडल अफ्रीकी देशों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करता है।
लेख में कहा गया है कि कृषि के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग साझा समृद्धि को मजबूत करने, समुदायों को सशक्त बनाने और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा एक्स पर साझा की गई पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा, “सौर ऊर्जा एक क्रांतिकारी शक्ति के रूप में उभर रही है। कृषि के लिए स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करने का भारत का मॉडल अफ्रीका के लिए एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करता है और यह साझा समृद्धि को मजबूत करता है, समुदायों को सशक्त बनाता है तथा खाद्य सुरक्षा का वादा करता है। यह हमारे किसानों और हम सभी के लिए सही अर्थों में गर्व की बात है।”
प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के महानिदेशक आशीष खन्ना द्वारा लिखित इस ज्ञानवर्धक लेख को पढ़ने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि यह लेख स्वच्छ ऊर्जा और कृषि के बीच बढ़ते संबंधों को बेहतर ढंग से समझने का अवसर प्रदान करता है। 
 

सरकार ने डीजल और ATF निर्यात पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स, पेट्रोल पर शुल्क यथावत

16-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्र सरकार ने मंगलवार से डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर विंडफॉल गेन टैक्स बढ़ा दिया है। हालांकि, पेट्रोल पर शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है।
विंडफॉल गेन टैक्स की समीक्षा हर 15 दिन में की जाती है और कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर भी इसका निर्धारण किया जाता है।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया कि सरकार ने डीजल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) को बढ़ाकर 14 रुपए प्रति लीटर कर दिया है, जो कि पहले 13.5 रुपए प्रति लीटर था। वही, एटीएफ पर एसएईडी को बढ़ाकर 12.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया है, जो कि पहले 9.5 रुपए प्रति लीटर है।
हालांकि, पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसे 1.5 रुपए प्रति लीटर पर जारी रखा गया है।
सरकार ने घरेलू खपत के लिए उपयोग होने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है और इससे घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। इसके कारण सरकार ने 26 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क लगाने का फैसला किया था। 16 मई को पेट्रोल पर निर्यात शुल्क लगाया गया था।
विंडफॉल टैक्स के जरिए सरकार की कोशिश घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों को स्थिर रखना था।
इस कदम का मकसद निर्यातकों को कीमतों के अंतर का गलत फायदा उठाने से रोकना है, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं साथ ही, इसका उद्देश्य वेस्ट एशिया संकट के बीच निर्यात को हतोत्साहित करके पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करना है।








 

 


बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए 16-17 जून को दौड़ेगी स्पेशल ट्रेनें

16-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले हजारों अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए पूर्व मध्य रेलवे ने 16 और 17 जून को विशेष परीक्षा स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। इन ट्रेनों से छात्र-छात्राएं बिना किसी परेशानी के अपने परीक्षा केंद्र तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
16 जून को चलने वाली मुख्य स्पेशल ट्रेनें:
– पाटलिपुत्र → किशनगंज: शाम 8 बजे (बेगूसराय, खगड़िया, नवगछिया, कटिहार रूट)
– पटना → नरकटियागंज: रात 9 बजे (पाटलिपुत्र, सोनपुर, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, चकिया, बापूधाम मोतिहारी, बेतिया रूट)
– पाटलिपुत्र → अररिया: रात 10 बजे (बेगूसराय, खगड़िया, नवगछिया, कटिहार रूट)
– पाटलिपुत्र → नवगछिया: रात 11 बजे (बेगूसराय, खगड़िया रूट)
– पटना → भभुआ: रात 11:30 बजे (तारेगना, जहानाबाद, गयाजी, डेहरी-ऑन-सोन, सासाराम रूट)
– पटना → गयाजी: सुबह 7:15 बजे
– बक्सर → दानापुर: दोपहर 1:30 बजे
– बक्सर → पटना: शाम 6 बजे
– किऊल → गयाजी: दोपहर 12:30 बजे (शेखपुरा-नवादा रूट)
– गयाजी → किऊल: शाम 5:30 बजे (नवादा-शेखपुरा रूट)
– बख्तियारपुर → राजगीर: सुबह 8 बजे (बिहारशरीफ, नालंदा रूट)
– राजगीर → बख्तियारपुर: दोपहर 1 बजे
– बख्तियारपुर → राजगीर: शाम 3:30 बजे (अतिरिक्त)
– राजगीर → बख्तियारपुर: शाम 6:15 बजे (अतिरिक्त)
रेलवे प्रशासन ने सभी अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे इन स्पेशल ट्रेनों का अधिक से अधिक उपयोग करें। ये ट्रेनें केवल परीक्षा संबंधी यात्रा की सुविधा को ध्यान में रखकर चलाई जा रही हैं। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि ट्रेनों का समय और स्टॉपेज की पुष्टि निकटतम रेलवे स्टेशन या आधिकारिक ऐप से कर लें। 

 


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