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संथाली भाषा में संविधान जारी, पीएम मोदी बोले- आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक पहल

26-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को संथाली भाषा में भारत के संविधान के प्रकाशन की सराहना करते हुए इसे एक तारीफ के काबिल प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी समुदायों के बीच संवैधानिक जागरूकता बढ़ेगी और लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूती मिलेगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह एक तारीफ के काबिल काम है। संथाली भाषा में संविधान का प्रकाशन संवैधानिक जागरूकता और लोकतांत्रिक नागरिकता को बढ़ावा देगा। भारत को अपनी समृद्ध भाषाई संस्कृति और देश की प्रगति में जनजातीय भाषाओं के योगदान पर गर्व है।”
प्रधानमंत्री की यह प्रतिक्रिया राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ओल चिकी लिपि में संथाली भाषा में भारत के संविधान के औपचारिक प्रकाशन के बाद आई है। इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने इसे संथाली समुदाय के लिए गर्व और खुशी का क्षण बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से लोग अपनी मातृभाषा में संविधान को पढ़ने और समझने में सक्षम होंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2025 में ओल चिकी लिपि की शताब्दी मनाई जा रही है और इसी अवसर पर संथाली भाषा में संविधान का प्रकाशन ऐतिहासिक महत्व रखता है।
उन्होंने विधि एवं न्याय मंत्री और उनकी टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि शताब्दी वर्ष में संविधान को ओल चिकी लिपि में प्रकाशित करना एक सराहनीय प्रयास है। राष्ट्रपति ने कहा कि संथाली भाषा में संविधान की उपलब्धता अधिकारों, कर्तव्यों और संवैधानिक मूल्यों को अधिक सुलभ बनाकर आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाएगी।
गौरतलब है कि संथाली भाषा को 92वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2003 के तहत संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। यह भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है और झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में बड़ी संख्या में लोग इसे बोलते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने क्षेत्रीय भाषा में संबोधित करते हुए कहा कि संथाली भाषा में भारत का संविधान जारी किया जाना पूरे संथाली समाज के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने दोहराया कि स्वदेशी भाषाओं में संविधान की उपलब्धता नागरिकों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीच की दूरी को कम करती है, जिससे व्यापक भागीदारी और समावेशिता को बढ़ावा मिलता है।



 


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