
00 राष्ट्रपति के कार्यभार ग्रहण करने के पहले खौफनाक आतंकी हमला
नियामी/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजर से आतंक की भयावह खबर सामने आई है। माली से लगी नाइजर की अशांत सीमा के पास स्थित गांवों में रविवार को बाइक सवार कुछ बंदूकधारियों ने कोहराम मचा डाला। जानकारी के अनुसार हमलावरों ने तीन घंटे में 137 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इतना ही नहीं, हमलावरों ने वहां कई घरों को आग के हवाले कर दिया। भीड़ पर अंधाधुंध बरसाई गई गोलियों की इस घटना को सरकार ने हाल ही में हुई सबसे घातक हिंसा करार दिया। हमलावर बड़ी संख्या में थे और बाइक पर सवार थे। सरकार के प्रवक्ता अब्दुर्रहमाने जकरिया ने इस हमले की पुष्टि सोमवार को की। नाइजर की संवैधानिक अदालत ने इसी दिन मोहम्मद बजूम की चुनाव में जीत की पुष्टि भी की थी। नाइजर में चुनाव फरवरी में हुए थे। बजूम देश के नए राष्ट्रपति होंगे। वह दो अप्रैल को राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालेंगे।
गौरलतब है कि जनवरी में देश के पश्चिम में स्थित तोंकम्बंगौ और जरौमदारे गांव में भी हमला किया गया था, जिसमें कम से कम 100 लोग मारे गए थे। उस दिन नाइजर ने 21 फरवरी को राष्ट्रपति चुनाव कराए जाने की घोषणा की थी। वहीं, करीब एक सप्ताह से भी कम पहले हुए हमले में कम से कम 66 लोग मारे गए थे।
नाइजर में हाल ही में हुए हमलों की किसी आतंकवादी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है। स्थानीय अधिकारियों ने पहले करीब 60 लोगों की मौत की पुष्टि की थी, लेकिन अब वहां की सरकार ने बताया कि इस हमले में 137 लोग मारे गए हैं। ध्यान देने वाली बात है कि पश्चिमी नाइजर क्षेत्रों में बीते कुछ सालों से आतंकी गतिविधियां काफी बढ़ी हैं। अभी बीते सप्ताह भी कुछ संदिग्ध आतंकियों ने करीब 66 लोगों की हत्या कर दी थी। इन इलाकों में सिर्फ आम नागरिकों पर ही नहीं बल्कि सुरक्षाबलों पर भी हमले किए गए।

ढाका/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। दक्षिणी बांग्लादेश के रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में सोमवार को भीषण आग लगने से सैंकड़ों आश्रय स्थलों को नुकसान पहुंचा और हजारों शरणार्थी बेघर हो गए। अधिकारियों और चश्मदीदों ने यह जानकारी दी। सरकार की शरणार्थी, राहत और प्रत्यर्पण आयोग के अतिरिक्त आयुक्त मोहम्मद शमशूद दाउजा ने बताया कि कॉक्स बाजार जिले के बालूखाली शिविर में दोपहर में आग लग लग गई और यह तेजी से कम से कम चार ब्लॉक में फैल गई। उन्होंने बताया कि तेजी से फैल रही आग को काबू में करने के लिये दमकलकर्मियों की कम से कम चार इकाइयां जुटी हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी की एक प्रवक्ता लुइस डोनोवान ने ईमेल के जरिए बताया कि अग्निशमन सेवा, बचाव एवं प्रतिक्रिया दल तथा स्वयंसेवी घटनास्थल पर मौजूद हैं। अब तक आग ने आश्रयों, स्वास्थ्य केंद्रों समेत अन्य सेवा स्थलों को प्रभावित किया है। स्वयंसेवी प्रभावितों की मदद कर रहे हैं। इस घटना में तत्काल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है लेकिन मौत और झुलसने की आशंका जताई गई है। लोगों के लापता होने के संबंध में अभी किसी भी खबर की पुष्टि नहीं की जा सकी है। दो रोहिंग्या शरणार्थियों ने द एसोसिएटेड प्रेस को घटनास्थल पर बताया कि आग तेजी से फैली और सोमवार रात में भी इस पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया गया है।

सिडनी/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के बाहरी इलाकों में स्थित समुद्री क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति बन गई है। ऐसे में एहतियात के तौर पर प्रशासन ने क्षेत्र में रह रहे हजारों लोगों को रविवार को जगह खाली करके सुरक्षित स्थान पर जाने के आदेश दिए गए हैं। आपातकालीन सेवाओं ने सिडनी के उत्तर पश्चिम में निचले इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा है। इससे एक दिन पहले प्रशासन ने न्यू साउथ वेल्स प्रांत में भयंकर बाढ़ के खतरे का अलर्ट जारी किया था।
इसके तहत हजारों लोगों ने शहर के उत्तरी इलाके में बने राहत केंद्रों में पहुंचना शुरू कर दिया है। सामने आई तस्वीरों में तारी में एक उफनती नदी में घर को बहते हुए दिखाया गया है। वहीं एक स्थानीय ऑडिटोरियम में करीब 150 लोगों को सोते हुए दिखाया गया है। इस ऑडिटोरियम को पहले जंगल में लगी आग के कारण विस्थापित हुए लोगों के लिए शरणस्थल के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्लब तारी के चीफ एक्जिक्यूटिव पॉल एलेन ने इस बाढ़ को तबाही बताया है। उनके मुताबिक कुछ स्थानीय लोगों ने अपना सबकुछ खो दिया है। वहीं मौसम विभाग ने वीकेंड पर समुद्र से सटे निचले इलाकों में बारिश का अनुमान लगाया गया था। वहीं गुरुवार तक मौसम खराब रहने की भी बात कही गई है।
बारिश इतनी अधिक हुई है कि पूरे सिडनी को पीने का पानी मुहैया कराने वाला वारागंबा बांध भी शनिवार की दोपहर को ओवरफ्लो हो गया। ऐसा 1990 के बाद पहली बार हुआ है। आपातकालीन सेवाओं को मदद के लिए करीब 1000 से अधिक कॉल आईं। वहीं शनिवार से रविवार सुबह तक करीब 100 बाढ़ रेस्क्यू मिशन किए।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। इटली ने अंतरर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आईएसए के तहत संशोधित फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। आईएसए के फ्रेमवर्क समझौते में संशोधन लागू हो गए हैं और इसकी सदस्यता संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों के लिए खोल दी गई है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि फ्रेमवर्क समझौते पर राजदूत विनसेंज़ो डी लूका ने हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्रालय के पास ही आईएसए फ्रेमवर्क समझौते की हस्ताक्षरित प्रतियां रखी जाती हैं। विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रंगला ने भारत में इटली के राजदूत विनसेंज़ो डी लूका से मुलाकात की और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में इटली के शामिल होने का स्वागत किया। उन्होंने इटली की जी-20 की अध्यक्षता और वैक्सीन मैत्री पर भी चर्चा की। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन भारत के प्रधानमंत्री और फ्रांस के राष्ट्रपति ने 2015 में पेरिस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के दौरान संयुक्त रूप से शुरू किया था। इस गठबंधन का उद्देश्य पेरिस जलवायु समझौते को अमल में लाने के लिए काम करना है।

लंदन/ नई दिल्ली (शोर सन्देश)। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन अप्रैल महीने के अंत में भारत का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के कार्यालय ने सोमवार को इस बात की जानकारी दी। यूरोपियन संघ से अलग होने के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का भारत दौरा पहली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय यात्रा होगी, जिसमें ब्रिटेन के अवसरों को बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
इसके अलावा बोरिस जॉनसन की यात्रा का मुख्य उद्देश्य चीन पर भी नजर रखना होगा। बता दें कि भारत ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को 72वें गणतंत्र दिवस के मौके पर आमंत्रित किया था लेकिन कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों की वजह से इस दौरे को रद्द करना पड़ा। ब्रिटेन का मकसद हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में लोकतांत्रिक ताकत को मजबूत करने और साथ में चीन से निपटना है। पिछले कुछ वक्त से हांगकांग, कोरोना महामारी और ब्रिटेन के 5जी नेटवर्क में चीनी कंपनी हुवावे को सक्रिय भूमिका ना मिलने की वजह से चीन और ब्रिटेन के बीच तनाव है, जो किसी से छिपा नहीं है।
बता दें कि पिछले महीने ब्रिटेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोर्नवाल क्षेत्र में जूने में होने वाली जी7 सम्मेलन में शामिल होने का आमंत्रण दिया था। जी7 में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका शामिल हैं। ब्रिटेन ने इस सम्मेलन में भारत, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया को अतिथि राष्ट्र के रूप में आमंत्रित किया था।
गणतंत्र दिवस पर भारत को शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री जॉनसन ने कहा था कि मैं इस साल भारत आने के लिए उत्सुक हूं, ताकि हम हमारी दोस्ती को और मजबूत कर सकें और रिश्तों को आगे बढ़ा सकें। उन्होंने कहा था कि इसका संकल्प प्रधानमंत्री मोदी और मैंने लिया था।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मुश्किल के इस दौर में भारत वैक्सीन मैत्री अभियान के तहत ज्यादातर देशों को स्वदेशी कोरोना वैक्सीन की खेप पहुंचाने में जुटा है। इसी कड़ी में पिछले हफ्ते भारत ने एंटीगुआ और बारबाडोस, सेंट किट्स और नेविस, सेंट विंसेन्ट, ग्रेनेडाइन्स और सूरीनाम जैसे कैरीकॉम देशों को कोरोना वैक्सीन की डोज पहुंचाई थी। भारत की इस दरियादिली की इन देशों के पूर्व दिग्गज क्रिकेटरों ने जमकर तारीफ की है। वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान विवियन रिचर्ड्स, रिची रिचर्डसन, जिमी एडम्स जैसे खिलाड़ियों ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। एक वीडियो संदेश में विवियन रिचर्ड्स ने कहा कि मैं एंटीगुआ और बारबाडोस के लोगों की तरफ से भारत सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की जनता का शुक्रिया अदा करना चाहूंगा कि उन्होंने हमें कोरोना वैक्सीन की खेप पहुंचाई। इससे हमारे रिश्ते और मजबूत होंगे। वहीं, रिची रिचर्ड्सन ने भी भारत की इस दरियादिली की खुले मन से तारीफ की है। उन्होंने कहा कि मैं एंटीगुआ और बारबाडोस की सरकार और जनता की ओर से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताना चाहता हूं कि उन्होंने भारत में बनी कोरोना वैक्सीन की 40 हजार डोज हमें भेजी। वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड में डायरेक्टर जिमी एडम्स ने भी कोरोना वैक्सीन भेजने के लिए भारत की सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत सरकार कैरीकॉम देशों को कोरोना वैक्सीन पहुंचा रही है। वो वाकई तारीफ का काम है। इससे मेरे अपने देश जमैका के लोगों को भी बहुत फायदा होगा। गौरतलब है कि `कैरीकॉम`20 कैरेबियाई देशों का समूह है, जहां करीब 1.6 करोड़ लोग रहते हैं। भारत ने `टीका मैत्री` अभियान के तहत भूटान को 1.5 लाख, मालदीव, मॉरीशस और बहरीन को एक लाख, नेपाल को 10 लाख, बांग्लादेश को 20 लाख, म्यांमार को 15 लाख, सेशल्स को 50,000, श्रीलंका को पांच लाख कोविड-19 रोधी टीके की खुराकें मुहैया कराई हैं। इसके अलावा अनेक देशों को टीके की वाणिज्यिक आपूर्ति भी की गई है।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। अमेरिका भारतीय दवा निर्माता बायलॉजिकल-ई को साल 2022 के आखिर तक एक अरब कोविड-19 टीकों का उत्पादन करने के लिए आर्थिक सहायता देगा। यह घोषणा क्वाड सम्मेलन के बाद व्हाइट हाउस की तरफ से जारी एक दस्तावेज में की गई। वर्चुअल सम्मेलन के दौरान क्वाड नेताओं एक विशाल टीकाकरण पहल शुरू करने का निर्णय लिया, जिसके तहत अमेरिका और जापान की आर्थिक सहायता से भारत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए वायरस टीकों का उत्पादन किया जाना है, जबकि ऑस्ट्रेलिया इन टीकों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर वितरित कराने में मदद देगा। इसे चीन की टीका कूटनीति के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के बाद ट्वीट में कहा, कोविड-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई एकजुट है। हम सुरक्षित कोविड-19 टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक क्वाड साझेदारी शुरू कर रहे हैं।
00 टीका निर्माण के लिए करेंगे संयुक्त साझेदारी : बाइडन...
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा, क्वाड सदस्य कोरोना का टीका बनाने को आपसी सहयोग बढ़ाएंगे। हम एक नई महत्वाकांक्षी संयुक्त साझेदारी शुरू कर रहे हैं, जो वैश्विक लाभ के लिए टीका निर्माण को बढ़ावा देने वाली है और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र को फायदा पहुंचाने के लिए टीकाकरण को मजबूती देगी। इस पर पीएम मोदी ने राष्ट्रपति बाइडन की पहल पर धन्यवाद दिया।
क्वाड (चतुर्भुज सुरक्षा संवाद) समूह के पहले ऐतिहासिक वर्चुअल सम्मेलन के बाद चारों सदस्य देशों अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं ने कहा, विविध दृष्टिकोण रखने के बावजूद हम स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र की साझा परिकल्पना को लेकर एकजुट हैं। समूह ने पहले ऐतिहासिक वर्चुअल सम्मेलन के दौरान चारों सदस्य देशों अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने स्वतंत्र, मुक्त और कानून आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वकालत की।
क्वाड समूह ने चीन का नाम लिए बिना उसके विस्तारवादी रुख के लिए स्पष्ट संदेश देते हुए बिना किसी जबरदस्ती वाले स्वैच्छिक लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की आवश्यकता पर जोर दिया। क्वाड नेताओं ने कहा, हम एक ऐसे क्षेत्र के लिए प्रयासरत हैं, जो मुक्त, स्वतंत्र, समावेशी, स्वस्थ, लोकतांत्रिक मूल्यों से परिपूर्ण हो और किसी जोर जबरदस्ती से दूर हो।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर आसियान के दृष्टिकोण का भी समर्थन करते हैं। क्वाड नेताओं ने कोरोना के आर्थिक व स्वास्थ्य प्रभावों से निपटने, जलवायु परिवर्तन से लड़ने और साइबर स्पेस, अहम तकनीकों, आतंकवाद, गुणवत्तापूर्ण ढांचागत निवेश, मानवीय सहायता व आपदा राहत जैसी साझा चुनौतियों का मिलकर जवाब देने का भी संकल्प लिया गया।
00 इस साल के अंत तक शीर्ष नेताओं की बैठक
सम्मेलन में यह भी तय हुआ कि चारों देशों के विदेश मंत्री समूह के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए साल में एक बार मिलेंगे। वहीं, 2021 के अंत तक चारों देशों के शीर्ष नेता बैठक में मिलेंगे।
00 सम्मेलन के बारे में सुनकर हो गया भावुक : सुगा
जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने कहा, हिंद-प्रशांत को मुक्त और खुला बनाने की खातिर सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हूं। जापान हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए ठोस योगदान देगा।

वाशिंगटन (शोर सन्देश)। शीर्ष अमरीकी वैज्ञानिक ने कहा है कि भारत द्वारा वैश्विक संस्थानों के साथ मिलकर तैयार की गये कोविड टीके ने विश्व को कोरोना महामारी से उबारा है। उन्होंने कहा कि भारत के इस योगदान को कम करके नहीं आंकना चाहिए। ह्यूस्टन के बायलोर कॉलेज ऑफ मेडीसन में नेशनल स्कूल ऑफ ट्रोपिकल मेडीसन के विभागाध्यक्ष डॉक्टर पीटर हॉटेज ने एक वेबिनार में कहा कि विश्व में कोरोना वायरस को रोकने में भारत का कोविड टीका बहुत महत्वपूर्ण है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक डॉक्टर हॉटेज ने कहा कि इस वैश्विक महामारी से निपटने में भारत के बड़े योगदान के बारे में विश्व को पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है।

मोगादिशू/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। अफ्रीकी देश सोमालिया की राजधानी मोगादिशू शुक्रवार देर रात एक आत्मघाती कार बम विस्फोट से दहल गई। मोगादिशू के बंदरगाह के पास एक रेस्तरां के बाहर हुए बम हमले में 20 से अधिक लोगों की जान चली गई और 30 अधिक लोग घायल हो गए हैं। घायलों में से कई की हालत गंभीर बनी हुई है। आपातकालीन सेवा के एक अधिकारी ने शनिवार सुबह इसकी जानकारी दी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, राजधानी में रेस्तरां के बाहर कार बम धमाके के बाद आसमान में धुएं का गुबार उठने लगा। धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास की कई इमारतों की खिड़कियां टूट गईं। धमाके के बाद गोलीबारी भी हुई। आमीन एंबुलेंस सर्विस के संस्थापक डॉ. अब्दुलकादिर अदन ने बताया कि धमाके वाली जगह से 20 शव बरामद किए गए हैं और 30 से ज्यादा घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना के समय वहां मौजूद लोगों ने बताया कि बंदरगाह के पास स्थित ल्युल यमनी रेस्तरां के बाहर धमाका हुआ। घटनास्थल के करीब ही रहने वाले निवासी अहमद अब्दुल्लाही ने बताया, ल्युल यमनी रेस्तरां के बाहर एक तेज रफ्तार कार में धमाका हुआ। मैं रेस्तरां जा रहा था, लेकिन जब धमाका हुआ, तो मैं वहां से सुरक्षित बाहर निकल आया। धमाके के बाद पूरा क्षेत्र धुएं के गुबार से ढक गया।
00 अभी तक किसी ने नहीं ली जिम्मेदारी
ख़बरों के मुताबिक, धमाके वाली जगह पर संपत्तियों को भी खासा नुकसान पहुंचा है। फिलहाल, पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी है। वहीं, अभी तक किसी ने भी इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है।
इस्लामी आतंकवादी संगठन अल-शबाब अक्सर सोमालिया और अन्य जगहों पर इस तरह के बम विस्फोटों को अंजाम देता है। आतंकी संगठन का मकसद अफ्रीकी देश की केंद्र सरकार को खत्म करके अपने अभियान को सफल बनाना है। अल शबाब सोमालिया में इस्लामी शरिया कानून की अपनी सख्त व्याख्या के आधार पर अपना शासन स्थापित करता है।

केप कैनावेरल/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। नासा के पर्सेविरेंस रोवर ने मंगल ग्रह की कुछ आश्चर्यजनक तस्वीरें भेजी हैं। इनमें लैंडिंग के दौरान एक हाई-रिजॉल्यूशन वाली रंगीन सेल्फी भी शामिल है। नासा का पर्सेविरेंस रोवर 18 फरवरी को मंगल की सतह पर उतरा था। यह रंगीन सेल्फी कई कैमरों द्वारा खींची गई वीडियो का हिस्सा है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह पर उतरने की एक `स्टॉप-मोशन फिल्म` भेजा था, जबकि पर्सेविरेंस रोवर के कैमरों ने टचडाउन का वीडियो कैद किया। यह नया स्टिल इमेज उसी फुटेज से लिया गया है, जिसे अभी भी पृथ्वी पर भेजा जा रहा है।
मंगल ग्रह के धरातल पर उतरने से ठीक पहले की तस्वीरों को भी रोवर ने कैमरों में कैद किया है। पर्सेविरेंस रोवर के अधिकांश कैमरे रंगीन तस्वीरें कैप्चर करते हैं, जबकि पहले के रोवर ब्लैक-ऐंड-व्हाइट में तस्वीरें लेते थे। बहरहाल, लैंडिंग के बाद दो हजार्ड कैमरों (हैजकैम्स) ने रोवर के आगे और पीछे के दृश्यों को कैप्चर किया। एक तस्वीर में रोवर का एक पहिया मंगल ग्रह की माटी पर साफ देखा जा सकता है। मंगल ग्रह पर पर्सेविरेंस रोवर के मिशन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य खगोल विज्ञान है, जिसमें प्राचीन सूक्ष्मजीव जीवन के संकेतों की खोज शामिल है।
रोवर मंगल ग्रह की भूविज्ञान और अतीत की जलवायु को चिह्न्ति करेगा, लाल ग्रह पर मानव अन्वेषण का मार्ग प्रशस्त करेगा, और यह मंगल ग्रह से चट्टानों और रिगोलिथ (टूटी हुई चट्टान व धूल) को इकट्ठा करने वाला पहला मिशन होगा। इसके बाद नासा के मिशन, ईएसए (यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी) के सहयोग से, इन नमूनों को मंगल की सतह से एकत्र करने और उन्हें गहन विश्लेषण के लिए पृथ्वी पर वापस लाने के लिए लाल ग्रह पर अंतरिक्ष यान भेजेंगे। आने वाले दिनों में इंजीनियर रोवर के सिस्टम डेटा को अपडेट करेंगे, इसके सॉफ्टवेयर को अपडेट करेंगे और इसके विभिन्न उपकरणों का परीक्षण करेंगे।
अगले कुछ हफ्तों में पर्सेविरेंस रोवर अपनी रोबोटिक आर्म का परीक्षण करेगा और अपनी पहली (छोटी) ड्राइव लेगा।
यह कम से कम एक या दो महीने तक रहेगा जब तका कि पर्सेविरेंस रोवर को इनजेन्यूटी (मिनी हेलिकॉप्टर) को छोड़ने के लिए एक सपाट स्थान नहीं मिलेगा। इसके बाद वह अपने विज्ञान मिशन की शुरुआत करेगा और मंगल ग्रह के चट्टानों के नमूनों से पहली खोज प्रारंभ करेगा।