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*इजराइल ने मीडिया दफ्तरों को भी बनाया निशाना बाइडन ने जताई चिंता*

16-May-2021

 00 इस्राइल-फलस्तीन के बीच खूनी संघर्ष से अमेरिका तक हलचल
वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। इस्राइल और फलस्तीन के बीच खूनी संघर्ष जारी है। इस्राइल के युद्धक विमानों ने रविवार तड़के गाजा सिटी के अहम हिस्से में कई इमारतों, सड़कों और मीडिया दफ्तरों को निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बात कर नागरिकों और पत्रकारों की सुरक्षा पर चिंता जताई। इस्राइली हवाई हमले में शनिवार को गाजा शहर में एक ऊंची इमारत को नष्ट कर दिया, जिसमें एसोसिएटेड प्रेस और अन्य मीडिया आउटलेट्स के कार्यालय थे। जानकारी के मुताबिक, मीडिया कार्यालय में मौजूद सभी पत्रकार, कर्मचारी और फ्रीलांसरों को इमारत से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
00 बाइडन ने गाजा में पत्रकारों को लेकर जताई चिंता
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर वार्ता की। इस दौरान बाइडन ने हमास के मिसाइल हमलों के जवाब में गाजा में इस्राइली हमलों के प्रति पूरा समर्थन व्यक्त किया, लेकिन हमलों में आम नागरिकों के हताहत होने और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। व्हाइट हाउस ने बताया कि बाइडन ने शनिवार को हुई बातचीत के दौरान इस्राइल में अंतरसांप्रदायिक हिंसा और वेस्ट बैंक में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई। बाइडन और नेतन्याहू ने येरुशलम पर भी चर्चा की। इस दौरान बाइडन ने कहा कि यह सभी धर्मों एवं पृष्ठभूमियों के लोगों के लिए एक साथ मिलकर शांति से रहने की जगह होनी चाहिए।
00 इस्राइल ने गाजा में इमारतों और सड़कों को बनाया निशाना
इस्राइल के युद्धक विमानों ने रविवार तड़के गाजा सिटी के अहम हिस्से में कई इमारतों और सड़कों को निशाना बनाया। निवासियों और पत्रकारों द्वारा जारी तस्वीरों के अनुसार, हवाई हमलों से गड्ढा बन गया, जिससे शिफा अस्पताल की ओर जाने वाली एक मुख्य सड़क अवरुद्ध हो गई। शिफा गाजा पट्टी में सबसे बड़ा अस्पताल है। रिपोर्ट के मुताबिक, ताजा हवाई हमलों में दो लोगों की मौत हो गई और 25 घायल हो गए, जिनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। बचावकर्ता अब भी मलबा हटा रहे हैं। दो घंटों तक भारी बमबारी करने के बाद भी इस्राइली सेना ने कोई टिप्पणी नहीं की है।
00 फलस्तीन के राष्ट्रपति और बाइडन के बीच हुई बातचीत
बाइडन ने राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने के बाद फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास के साथ भी फोन पर पहली बार बातचीत की, जिसमें उन्होंने हमास से इस्राइल पर रॉकेट हमले रोकने की अपील की। व्हाइट हाउस ने बताया कि बाइडन ने फलस्तीनी लोगों को सक्षम बनाने की खातिर कदम उठाने के लिए अपना समर्थन जताया ताकि वे गरिमा, सुरक्षा एवं स्वतंत्रता के साथ जी सकें और उन्हें आर्थिक अवसर मिल सकें, जिसके वे हकदार हैं।


*राष्ट्रपति की वरिष्ठ सलाहकार नियुक्त हुईं भारतीय मूल की नीरा टंडन*

15-May-2021

00 बाइडन ने कहा था- मैं चाहता हूं कि मेरे प्रशासन में उनकी कोई भूमिका हो
वॉशिंगटन/नई दिल्ली (शोर सन्देश अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कैबिनेट के लिए चुनी गईं भारतीय मूल की नीरा टंडन को व्हाइट हाउस का वरिष्ठ सलाहकार नियुक्त किया है। इससे पहले उन्हें बाइडन ने प्रबंधन एवं बजट कार्यालय का नेतृत्व करने के लिए चुना था, लेकिन विरोध के बीच मार्च में उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया था। सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस (सीएपी) के संस्थापक जॉन पोडेस्टा ने एक बयान में कहा कि नीरा बुद्धिमत्ता, कड़ी मेहनत और राजनीतिक दृष्टि बाइडन प्रशासन के लिए अहम साबित होगी। हालांकि हमें सीएपी में उनकी विशेषज्ञता और लीडरशिप की कमी खलेगी जिसका 2003 में गठन किया गया था। 

मार्च में व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति जो बाइडन के बजट कार्यालय में नीरा टंडन को निदेशक बनाने का नामांकन प्रस्ताव वापस ले लिया था। दोनों पार्टियों में नीरा के नाम पर उठा विरोध खत्म नहीं किया जा सका था। नीरा ने भी नाम वापसी की घोषणा कर दी थी, क्योंकि वे डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकनों के बीच अपने नामांकन की पुष्टि  के लिए पर्याप्त वोट जुटाने में नाकाम रहीं। 
 नीरा के नाम पर पुष्टि का अनुरोध बाइडन की डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने भी खारिज कर दिया था। तब बाइडन ने कहा था- `सुश्री टंडन ने कहा है कि प्रबंधन कार्यालय और बजट निदेशक के लिए उनका नामांकन वापस ले लिया जाए और मैंने उनका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है।`
बता दें कि टंडन के नामांकन की पुष्टि का रास्ता पहले ही कठिन था और उन्हें पूर्व में कई सांसदों के खिलाफ किए गए ट्वीट के कारण विरोध का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि उन्होंने ऐसे 1,000 से ज्यादा ट्वीट डिलीट कर सीनेटरों से माफी भी मांग ली थी लेकिन उनका विरोध कम नहीं हुआ था।
तब बाइडन ने कहा था कि मैं उनके अनुभव, कौशल और विचारों का बहुत सम्मान करता हूं और चाहता हूं कि मेरे प्रशासन में उनकी कोई भूमिका हो। और आखिरकार बाइडन ने उन्हें इतना महत्वपूर्ण पद देते हुए नई जिम्मेदारी सौंप दी।  


*भारत की कोविड-19 स्थिति बहुत चिंताजनक : टेड्रोस घेब्रेयियस*

15-May-2021

00 डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने दी चेतावनी, कहा- घातक साबित होगा महामारी का दूसरा
जिनेवा/नई दिल्ली (शोर सन्देश) विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयियस ने शुक्रवार को कहा कि भारत की कोविड-19 स्थिति चिंतित कर रही है। उन्होंने कहा कि यहां कई राज्यों में संक्रमण के चिंतित करने वाली संख्या में मामले रहे हैं, अस्पतालों में लोग भर्ती हो रहे हैं और मौतें हो रही हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि महामारी का दूसरा साल दुनिया के लिए पहले साल के मुकाबले अधिक घातक होगा। घेब्रेयियस ने कहा कि डब्ल्यूएचओ कोविड-19 के बढ़ते मामलों से निपटने में भारत की मदद कर रहा है और हजारों की संख्या में ऑक्सीजन सांद्रक, अस्थायी चल अस्पतालों के लिए टेंट, मास्क और अन्य चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति कर रहा है। घेब्रेयियस ने कहा कि भारत की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, कई राज्यों में चिंतित करने के स्तर तक मामले, अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या और मौतों बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी साझेदारों को धन्यवाद देते हैं जो भारत की मदद कर रहे हैं। 


*12 से 15 वर्ष के बच्चों को भी टीका लगाने की तैयारी अनुमति के लिए सीडीसी से सिफारिश*

05-May-2021

 00 अगले सप्ताह मिल सकती है मंजूरी
वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कोरोना महामारी से जूझ रहा अमेरिका अब 12 से 15 वर्ष के बच्चों को टीका लगाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी एजेंसी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन फाइजर कंपनी की कोरोना वैक्सीन को अगले सप्ताह से 12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को टीका लगाने की इजाजत दे सकता है। अमेरिकी सरकार के एक अधिकारी की मानें तो अगले सप्ताह या उससे भी पहले बच्चों के लिए टीके की दो डोज की अनुमति मिल सकती है। इस फैसले पर अंतरिम मुहर लगने से एफडीए फेडरल वैक्सीन एडवाइजरी कमेटी की बैठक बुलाएगा और उसमें 12 से 15 वर्ष के बच्चों के लिए टीका लगाने की सिफारिश करेगा। इसके बाद सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन इस सिफारिश को स्वीकार करेगा। तब जाकर टीकाकरण की शुरुआत होगी। ये पूरी प्रक्रिया कुछ दिन में पूरी होने की उम्मीद है। मालूम हो कि अमेरिका में 16 साल से अधिक उम्र के बच्चों को पहले ही टीका लगाया जा रहा है।
00 बच्चों में वयस्कों जैसे दुष्प्रभाव
फाइजर ने मार्च के आखिर में 12 से 15 वर्ष के 2260 बच्चों पर अध्ययन का परिणाम जारी किया था। इसमें पता चला था कि जिन बच्चों को टीका लगाया गया था उनमें संक्रमण का कोई भी मामला सामने नहीं आया था। बच्चों में भी वयस्कों की तरह दूसरी डोज के बाद दुष्प्रभाव देखने को मिले थे। दर्द, बुखार, ठंड लगना और थकान जैसी शिकायत बच्चों ने भी की थी।


*भारत से आने वाले यात्रियों पर अब इस देश ने लगाई पाबंदी*

01-May-2021

 00 नियमों का उल्लंघन किया तो जाएंगे जेल
सिडनी/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। भारत में कोरोना संक्रमण के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी जारी है। इसे देखते हुए ऑस्ट्रेलिया ने भारत से आने वाले यात्रियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों को जेल भेजा जाएगा। साथ ही, जुर्माना भी लगाया जाएगा। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि लगातार कोरोना मरीजों और कोविड से होने वाली मौतों में बढ़ोतरी को देखते हुए भारतीय पर्यटक और भारत में रह रहे ऑस्ट्रेलियाई नागरिक जो यहां लौटना चाहते हैं, उनके ऑस्ट्रेलिया में प्रवेश करने पर पाबंदी लगा दी गई है। उन्होंने कहा कि यह शुक्रवार को लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों का ही हिस्सा है। बता दें कि आस्ट्रेलियाई सरकार ने शुक्रवार को भारत से आने जाने वाली सभी उड़ानों को भी 15 मई, 2021 तक के लिए स्थगित कर दिया था। ऑस्ट्रेलिया की वजह से लगाए गए इस ताजा प्रतिबंध के बाद कई नागरिक और बड़े क्रिकेट खिलाड़ी भारत में फंस गए हैं।  ऑस्ट्रेलियाई स्वास्थ्य मंत्री ग्रेग हंट ने बताया कि नए प्रतिबंध तीन मई से प्रभावी होंगे। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों को पांच साल की जेल और भारी जुर्माना भरा होगा। 
00 अमेरिका ने भारत से आवाजाही रोकी
भारत में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए अमेरिका ने 4 मई से भारत से आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अमेरिकी सरकार ने सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन की सिफारिश पर ये फैसला लिया है। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जेन साकी ने बताया कि भारत में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ने और कई तरह के वेरिएंट पाए जाने के बाद ये फैसला लिया गया है। 
00 इन देशों ने लगाए प्रतिबंध
नीदरलैंड, कनाडा, ब्रिटेन, सऊदी अरब, न्यूजीलैंड, कुवैत, ओमान, जर्मनी, हांगकांग, सिंगापुर और ईरान जैसे एक दर्जन देशों ने भारत से आने जाने वाली उड़ानों पर पहले से ही रोक लगा रखी है। इसके अलावा इस्राइल समेत कई देशों ने अपने यात्रियों के लिए भारत की यात्रा न करने करने के लिए एडवाइजरी जारी की है। 


*कोरोना से लड़ने भारत को मिला विदेशों का साथ कनाडा देगा 10 मिलियन डॉलर*

28-Apr-2021

टोरंटो/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर खतरनाक रूप से चुकी है और लाखों लोगों को रोजाना संक्रमित कर रही है। देश में बीते 24 घंटे में कोरोना वायरस के 3.60 लाख से ज्यादा मामले सामने आए, वहीं पहली बार एक दिन में तीन हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई। इसी बीच कनाडा की अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्री करीना गुल्ड ने एलान किया कि कोरोना की लड़ाई के बीच कनाडा भारत को दस मिलियन डॉलर की मदद करेगा।  कनाडा की अंतर्राष्ट्रीय विकास मंत्री करीना गोल्ड ने घोषणा की कि कनाडा भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की COVID19 स्थिति में भारत की प्रतिक्रिया का समर्थन करने के लिए रेड क्रॉस को मानवीय सहायता के लिए 10 मिलियन डॉलर की सहायता प्रदान कर रहा है।


*कैरेबियाई द्वीप में फटा ज्वालामुखी इलाके में राख की बारिश*

10-Apr-2021

00 6किमी ऊपर तक उड़े अवशेष
सेंट विंसेंट/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कैरेबियाई द्वीप सेंट विंसेंट पर दशकों से निष्क्रिय पड़े ला सॉफरीयर ज्वालामुखी में धमाका हो गया। शुक्रवार को हुई यह घटना इतनी भायनक थी की आसपास के क्षेत्र में राख का बारिश सी हो गई। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि स्थानीय लोगों को भागकर अन्य स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। हालांकि, सरकार ने भी उन्हें क्षेत्र खाली करने और सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा था। सेंट विंसेंट और द ग्रेनेडाइंस की सबसे ऊंची चोटी माने जाने वाले ला सॉफरियर में कई शक्तिशाली धमाके हुए। ज्वालामुखी में हुआ इस धमाके की वजह से गर्म राख और धुआं हवा में 6 हजार मीटर की ऊंचाई तक फैल गए। यह जानकारी स्थानीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी ने दी है। यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट सीजमिक रिसर्च सेंटर ने कहा कि इसके बाद शुक्रवार दोपहर हुए एक अन्य धमाके में 4 हजार मीटर की ऊंचाई पर राख के बादल जम गए। नेशनल इमरजेंसी मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन ने ट्विटर पर कहा `रेड और ऑरेंज जोन में मौजूद लोगों को बाहर निकाला जाना जारी है। ज्यादा राख गिरने की वजह से प्रक्रिया कुछ हद तक प्रभावित हुई है, क्यों यहां द्रश्यता काफी ज्यादा खराब है।` मामले से जुड़े कई वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें नजर आ रहा है कि लोग अपना सामान लेकर सड़कों पर निकल रहे हैं। एक दूसरे वीडियो में एक युवक कहता हुआ नजर आ रहा है कि लोगों के घरों पर पत्थर गिर रहे हैं। प्रधानमंत्री राल्फ गोंजाल्वेस ने नेशनल रेडियो के जरिए लोगों से इलाके से हटने की अपील की है। उन्होंने लोगों से ज्वालामुखी के रेड जोन को छोड़ने की बात कही है। साथ ही यह जानकारी भी दी गई है कि इलाके बचकर बाहर निकल रहे लोगों के लिए 800 होटल के कमरे तैयार किए गए हैं। 4049 फीट का यह ज्वालामुखी 1979 के बाद से ही नहीं फटा था. वहीं, 1902 में हुए धमाके में 1 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी।


*13 घंटे चली भारत-चीन के बीच 11वीं कोर कमांडर वार्ता*

10-Apr-2021

 00 पूर्वी लद्दाख के बाकी क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी पर जोर
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। भारत और चीन के बीच 11वीं कोर कमांडर-स्तर की वार्ता करीब 13 घंटे चलने के बाद कल रात को 11:30 बजे पूरी हुई। भारत और चीन ने गोगरा हाइट्स, हॉट स्प्रिंग्स और देपसांग मैदानों सहित बाकी बचे फ्रिक्शन पॉइंट से डिसइंगेजमेंट पर चर्चा की। भारत ने गतिरोध वाले इन हिस्सों से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इससे पहले दसवें दौर की सैन्य वार्ता 20 फरवरी को हुई थी। इससे दो दिन पहले दोनों देशों की सेनाएं पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से अपने-अपने सैनिक और हथियारों को पीछे हटाने पर राजी हुईं थीं। वह वार्ता करीब 16 घंटे चली थी। शुक्रवार को हुई वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई लेह स्थित 14 वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पी जी के मेनन ने की।
00 भारत को सीमा पर अब भी खतरा
पिछले महीने थल सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने कहा था कि पैंगोग झील के आसपास के इलाके से सैनिकों के पीछे हटने से भारत को खतरा `कम` तो हुआ है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। भारत और चीन की सेनाओं के बीच पिछले साल पैंगोंग झील के आसपास हुई हिंसक झड़प के चलते गतिरोध पैदा हो गया, जिसके बाद दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे अपने हजारों सैनिकों की उस इलाके में तैनाती की थी। कई दौर की सैन्य और राजनयिक स्तर की वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने फरवरी में पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी हिस्से से सैनिकों और हथियारों को पूरी तरह पीछे हटाने पर सहमति जतायी थी।


*कोरोना की तीसरी लहार : राष्ट्रपति ने दिया देशव्यापी लॉकडाउन का आदेश*

01-Apr-2021

 00 तीन सप्ताह तक बंद रहेंगे स्कूल
नई दिल्ली/पेरिस (वीएनएस)। फ्रांस में कोरोना की तीसरी लहर ने सरकार को देशव्यापी लॉकडाउन लगाने को मजबूर कर दिया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को देशव्यापी लॉकडाउन लगाने का आदेश दिया और कहा कि स्कूलों को तीन सप्ताह के लिए बंद कर दिया जाए ताकि कोविड-19 संक्रमण की तीसरी लहर को पीछे धकेलने में मदद मिले, नहीं तो तीसरी लहर अस्पतालों पर भी भारी पड़ सकता है। इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि `अगर अभी हमने अभी ठोस कदम नहीं उठाया तो हम कोरोना पर नियंत्रण खो देंगे।`
00 चार सप्ताह का देशव्यापी लॉकडाउन
इमैनुएल मैक्रों ने शनिवार से चार सप्ताह का देशव्यापी लॉकडाउन लगाने की घोषणा की है। टेलीविजन पर प्रसारित एक संदेश में उन्होंने कहा कि इस दौरान केवल जरूरी सामान की दुकानों को खुलने की इजाजत होगी और लोगों को दफ्तरों की बजाय घर से काम करना होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि इस दौरान सार्वजनिक सभाओं पर पूरी तरह रोक होगी। बिना उचित कारण के अपने घरों से 10 किलोमीटर से अधिक दूर जाने पर भी रोक होगी। अगले सप्ताह से स्कूलों को भी तीन सप्ताह के लिए बंद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान पड़ने वाले इस्टर शुक्रवार के दिन लोगों को इजाजत होगी कि लॉकडाउन के दौरान जहां रहना चाहते हैं वहां जा सकते हैं। मैक्रों ने कहा कि देश में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं लेकिन इस पर काबू पाना अभी मुश्किल नहीं है, ऐसे में लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के डैशबोर्ड के अनुसार, फ्रांस में कुल संक्रमितों का आंकड़ा 46.46 लाख पहुंच चुका है जबकि यहां कोराना वायरस से अब तक 95,502 लोगों की मौत हो चुकी है। देश में फिलहाल 5,000 लोग कोरना के कारण आईसीयू में भर्ती हैं। हाल के दिनों में यहां ब्रिटेन के नए वेरिंएट के कोरोना वायरस के कारण संक्रमण के मामलों में तेजी आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 31 मार्च को यहां एक दिन में संक्रमण के 29,575 मामले दर्ज किए गए। वहीं 28 मार्च को 41,682 और 29 मार्च को 37,014 मामले दर्ज किए गए थे।
00 जर्मनी में भी हालात खराब
वहीं जर्मनी में भी कोरोना वायरस से हालात खराब होते जा रहे हैं। यहां फिर से 14 दिनों के सख्त लॉकडाउन लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। जर्मन स्वास्थ्य मंत्री जेंस स्पैन ने कहा कि महामारी नियंत्रण पाने के लिए देश में 10 से 14 दिनों का लॉकडाउन जरूरी है।
जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के चीफ ऑफ स्टाफ हेग ब्राउन ने भी देश में कोरोना के हालात को लेकर चिंता जताई है। ब्राउन ने कहा, हम इस समय सबसे खतरनाक फेज से गुजर रहे हैं। हमें अगले कुछ हफ्तों में कोरोना पर काबू पाना होगा।
ब्राउन ने कहा, अगले कुछ हफ्ते यह निर्धारित करेंगे कि क्या हम महामारी पर नियंत्रण पा सकते हैं या नहीं? अगर संक्रमण ऐसे ही बढ़ता रहा, तो कोरोना के नए स्ट्रेन का खतरा भी बढ़ जाएगा और शायद इससे वैक्सीन के प्रभाव पर भी असर पड़ेगा। अगर ऐसा हुआ, तो हमें नई वैक्सीन की जरूरत होगी और हमें वैक्सीनेशन प्रोग्राम फिर से शुरू करना होगा। ब्राजील में हालात दिन-पर-दिन बिगड़ते जा रहे हैं।


*खत्म हुआ स्वेज नहर में ट्रैफिक जाम मालवाहक पोत निकलने के बाद खुला जलमार्ग*

30-Mar-2021

 00 23 मार्च से फंसा था मालवाहक पोत `एवर गिवेन`, जाम हटने में लगेंगे 10 दिन
काहिरा/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। मिस्र की स्वेज नहर में लगभग एक सप्ताह से फंसे विशालकाय मालवाहक पोत को अंततः सोमवार को निकाल लिया गया जिसके बाद विश्व के सबसे अहम जलमार्गों में से एक पर आया संकट समाप्त हो गया। पोत के फंसे होने से समुद्री परिवहन में प्रतिदिन अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा था। रेतीले किनारे पर अटके `एवर गिवेन` नामक पोत को निकालने में कई `टगबोट` का इस्तेमाल किया गया जहां वह 23 मार्च से फंसा हुआ था। विश्लेषकों का मानना है कि रुके हुए सभी पोतों को निकालने में 10 दिन का समय लग सकता है।
पोत को निकालने के लिए `बोस्कालिस` कंपनी की सहायता ली गई। कंपनी के सीईओ पीटर बरडोस्की ने कहा, `हमने उसे निकाल लिया। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारे विशेषज्ञों के दल ने स्वेज नहर प्राधिकरण के सहयोग से एवर गिवेन को सफलतापूर्वक जल के बीच में दोबारा लाने में कामयाबी हासिल की है। इसके बाद स्वेज नहर में आवागमन बहाल हो गया।` स्वेज नहर प्राधिकरण के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ओसामा रबेई ने कहा कि नहर में स्थानीय समयानुसार शाम छह बजे आवागमन बहाल हुआ।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले पशुओं को ढोने वाले पोतों को जाने दिया गया। स्वेज शहर के तट पर फंसे कंटेनर लदे पोतों को लाल सागर में जाते देखा गया। रबेई ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मंगलवार सुबह तक 420 में से 113 पोतों को निकाल दिया जाएगा जो एवर गिवेन के फंसने के कारण रुके थे।




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