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राष्ट्रपति मुर्मु ने पीबीजी सोल्जरथॉन को दिखाई हरी झंडी, मांडविया ने एनसीसी साइक्लोथॉन में लिया हिस्सा

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित समारोह में ‘पीबीजी सोल्जरथॉन’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह भी मौजूद रहे, जो इस पहल के संरक्षक हैं। वहीं, केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में एनसीसी साइक्लोथॉन 2026 को हरी झंडी दिखाई। इसके अलावा जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से ‘नशा मुक्त भारत’ थीम पर आधारित ‘फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल’ का 84वां संस्करण भी शुरू हुआ।
‘सैनिकों के साथ दौड़ें-सैनिकों के लिए दौड़ें’ थीम पर आयोजित पीबीजी सोल्जरथॉन का उद्देश्य फिटनेस और देशभक्ति को बढ़ावा देने के साथ सशस्त्र बलों के साहस, बलिदान और सेवा का सम्मान करना था। इसमें सैनिकों के साथ आम नागरिकों ने भी हिस्सा लिया और सशस्त्र बलों के प्रति एकजुटता का संदेश देते हुए दौड़ लगाई।
सोल्जरथॉन में प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय ध्वज और कार्यक्रम के बैनर लेकर हिस्सा लिया। इस दौरान सैनिकों के प्रति सम्मान, आभार और एकजुटता की भावना प्रदर्शित की गई। आयोजन ने नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच जुड़ाव को मजबूत करने का संदेश दिया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि ‘सैनिकों के लिए दौड़ें, सैनिकों के साथ दौड़ें’ के विजन से प्रेरित सोल्जरथॉन आम नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच संबंधों को मजबूत करने का अनूठा मंच है। उन्होंने कहा कि ‘असली नायकों (सशस्त्र बलों) का समर्थन’ थीम पर आधारित यह आयोजन सैनिकों के समर्पण, साहस और बलिदान को सम्मान देता है। साथ ही यह नागरिकों को सक्रिय भागीदारी के जरिए सैनिकों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए प्रेरित करता है।
आजादी के 79 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में एनसीसी साइक्लोथॉन 2026 का आयोजन किया गया। केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इसे हरी झंडी दिखाई। इस कार्यक्रम में बॉक्सर और ओलंपिक पदक विजेता मैरी कॉम ने भी हिस्सा लिया।
मनसुख मांडविया ने कहा कि देश की आजादी के 79 साल पूरे होने के जश्न के तहत 79 एनसीसी कैडेट साइक्लोथॉन में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनसीसी फिटनेस, अनुशासन और समाज सेवा का प्रतीक है। ये कैडेट देश का भविष्य और उम्मीद हैं। साइक्लोथॉन के जरिए युवा यह संदेश दे रहे हैं कि वे विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे।
एनसीसी साइक्लोथॉन 2026 में शामिल मैरी कॉम ने युवाओं से जीवन में आगे बढ़ने और बहुत कुछ हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एनसीसी की यूनिफॉर्म सिर्फ एक कपड़ा नहीं है, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि युवाओं को यही भावना सिखाना जरूरी है।
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से ‘नशा मुक्त भारत’ थीम पर आधारित ‘फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल’ का 84वां संस्करण शुरू किया गया। कार्यक्रम के जरिए फिटनेस को बढ़ावा देने के साथ युवाओं और आम लोगों को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।








 

 


सफदरजंग अस्पताल में दुनिया की पहली रोबोटिक एवी वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी, भारत ने रचा इतिहास

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) नई दिल्ली स्थित वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित वयस्क मरीज की रोबोटिक तकनीक से सफल सर्जरी कर चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के अनुसार, इस तरह की रोबोटिक एवी वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी दुनिया में पहली बार की गई है। इस सफलता को वैश्विक चिकित्सा जगत में भारत की अत्याधुनिक सर्जिकल क्षमता के महत्वपूर्ण उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।
अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा के नेतृत्व में कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग की टीम ने यह जटिल ऑपरेशन किया। सर्जरी का नेतृत्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) अनुभव गुप्ता ने किया। डॉक्टरों की टीम ने मरीज की जटिल हृदय संरचना को ध्यान में रखते हुए रोबोटिक तकनीक से वाल्व रिप्लेसमेंट को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
ऑपरेशन किए गए मरीज को दो बेहद दुर्लभ जन्मजात हृदय समस्याएं थीं। इनमें पहली कंजेनिटली करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट आर्टरीज (सीसीटीजीए) थी, जिसमें हृदय के निचले कक्ष सामान्य स्थिति के उलट होते हैं। इसके कारण हृदय के दाहिने हिस्से को पूरे शरीर में रक्त पहुंचाने के लिए अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ता है।
मरीज को डेक्स्ट्रोकार्डिया की समस्या भी थी, जिसमें हृदय सामान्य बाईं ओर के बजाय दाईं ओर स्थित होता है। दोनों स्थितियों के कारण मरीज का एवी वाल्व गंभीर रूप से खराब हो गया था और हृदय की कार्यक्षमता लगातार कम हो रही थी। इस जटिल शारीरिक संरचना ने सर्जरी को सामान्य रोबोटिक प्रक्रिया से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया था।
सर्जरी से पहले डॉक्टरों ने मरीज के सीटी स्कैन के आधार पर हृदय की थ्री-डी इमेज तैयार की। इससे डॉक्टरों को हृदय की असामान्य और जटिल बनावट को विस्तार से समझने में मदद मिली। इसके आधार पर ऑपरेशन की विस्तृत योजना तैयार की गई, ताकि सर्जरी के दौरान किसी भी संभावित चुनौती से निपटा जा सके।
आमतौर पर रोबोटिक हार्ट सर्जरी छाती के दाईं ओर से की जाती है, लेकिन मरीज का हृदय दाईं ओर स्थित होने के कारण इस तकनीक को बदलना पड़ा। डॉक्टरों ने बाईं ओर से रोबोटिक सर्जरी करने की रणनीति अपनाई। अस्पताल के अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया पहली बार अपनाई गई और यह सर्जिकल दृष्टि से एक महत्वपूर्ण नवाचार है।
सर्जरी के दौरान छाती की हड्डी काटने के बजाय छोटे-छोटे छिद्रों के जरिए रोबोटिक उपकरणों और हाई-डेफिनिशन 3डी विजुअल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। इससे डॉक्टरों को अत्यधिक सटीकता के साथ खराब एवी वाल्व को बदलने में मदद मिली और ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
रोबोटिक तकनीक से की गई इस तरह की मिनिमली इनवेसिव सर्जरी में छाती की हड्डी काटने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे मरीज को कम दर्द होता है और रक्तस्राव भी अपेक्षाकृत कम होता है। संक्रमण का जोखिम घटने के साथ मरीज के जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौटने की संभावना भी बढ़ती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि केवल एक जटिल सर्जरी की सफलता नहीं है, बल्कि भारत के सरकारी अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञता की बढ़ती क्षमता का प्रमाण भी है। इससे यह संदेश मजबूत हुआ है कि सरकारी संस्थानों में भी विश्वस्तरीय उपचार और अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सफदरजंग अस्पताल की यह सफलता भविष्य में जटिल जन्मजात हृदय रोगों के इलाज के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। साथ ही, इस तरह की सर्जिकल तकनीक दुनिया भर के विशेषज्ञों के लिए नए शोध और उपचार पद्धतियों के विकास का आधार बन सकती है।





 

भारतीय नौसेना को मिला पांचवां गोताखोरी सहायक पोत, डीएससी ए-24 का कोलकाता में जलावतरण

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) पांच गोताखोरी सहायक जहाज (डीएससी) परियोजना के तहत निर्मित पांचवें पोत डीएससी ए-24 (यार्ड-329) का 1 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित टीटागढ़ में आयोजित समारोह में जलावतरण किया गया। कार्मिक प्रमुख वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में कमल सिंह ने जहाज का औपचारिक जलावतरण किया। समारोह में भारतीय नौसेना और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल) के वरिष्ठ अधिकारियों समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
जलावतरण समारोह भारतीय नौसेना की समृद्ध परंपराओं के अनुरूप सैन्य गरिमा और निर्धारित औपचारिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित किया गया। इस दौरान नौसेना और टीआरएसएल के अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति और जहाज की विशेषताओं से जुड़े पहलुओं पर भी जानकारी साझा की।
गोताखोरी सहायक जहाजों का निर्माण मेसर्स टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल), कोलकाता द्वारा किया जा रहा है। डीएससी परियोजना के तहत तैयार किए जा रहे ये पोत भारतीय नौसेना की गोताखोरी और पानी के भीतर सहायता से जुड़ी परिचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
इन जहाजों की विस्थापन क्षमता करीब 300 से 400 टन है और इन्हें द्वि-पतवार डिजाइन पर आधारित बनाया गया है। इस डिजाइन से समुद्र में बेहतर स्थिरता के साथ अधिक डेक क्षेत्र मिलता है। चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों में भी इनकी संचालन क्षमता बेहतर रहने की उम्मीद है, जिससे ये गोताखोरी अभियानों के लिए उपयुक्त बनते हैं।
पोतों का डिजाइन और निर्माण इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (आईआरएस) द्वारा निर्धारित नौसैनिक मानकों और नियमों के अनुरूप किया गया है। इससे इन जहाजों की सुरक्षा, विश्वसनीयता और परिचालन दक्षता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
भारतीय नौसेना में इन जहाजों के शामिल होने से गोताखोरी सहायता, पानी के भीतर जांच और बचाव अभियानों में सहायता की क्षमता बढ़ेगी। इसके अलावा तटीय क्षेत्रों में इनकी तैनाती से नौसेना की परिचालन क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।
डीएससी ए-24 समेत इन जहाजों में इस्तेमाल होने वाले करीब 70% मुख्य और सहायक उपकरण घरेलू निर्माताओं से प्राप्त किए गए हैं। इससे देश में रक्षा उत्पादन और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के प्रयासों को मजबूती मिलती है।
गोताखोरी सहायक जहाज परियोजना भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय की ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप स्वदेशी रक्षा निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। घरेलू उद्योग की भागीदारी से निर्मित ये पोत भारतीय नौसेना की बढ़ती स्वदेशी क्षमता को भी दर्शाते हैं।
















 

पीएम मोदी ने जारी किए वाल्मीकि रामायण और वेदांत भिक्षुओं की कहानियों के कन्नड़ अनुवाद

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मैसूर में रामकृष्ण आश्रम द्वारा निर्मित स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र (विवेक स्मारक) का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने वाल्मीकि रामायण और ‘स्टोरीज ऑफ वेदांत मंक्स’ के कन्नड़ अनुवाद भी जारी किए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन अनुवादों के माध्यम से भारत की कालातीत आध्यात्मिक और साहित्यिक विरासत कन्नड़ भाषी पाठकों, विशेषकर युवाओं के करीब पहुंचेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन प्रकाशनों से युवा अपनी मातृभाषा के माध्यम से देश की सांस्कृतिक और दार्शनिक परंपराओं को समझने और उनसे जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा को स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराना नई पीढ़ी तक विरासत पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर रामकृष्ण आश्रम की अपनी यात्रा और साधुओं से बातचीत की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने कहा कि मैसूर स्थित श्री रामकृष्ण आश्रम में जाना उनके लिए विशेष अनुभव रहा। प्रधानमंत्री ने समाज सेवा और युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में आश्रम के प्रयासों की सराहना की।
अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने आश्रम के साधुओं से बातचीत की। उन्होंने समाज सेवा के लिए संस्था की ओर से किए जा रहे निरंतर प्रयासों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने श्री रामकृष्ण और स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं के माध्यम से मूल्यों, शिक्षा और युवा सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में रामकृष्ण आश्रम की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विवेक स्मारक के उद्घाटन का स्वागत किया। उन्होंने इसे कर्नाटक के लिए ऐतिहासिक अवसर और स्वामी विवेकानंद की विरासत को श्रद्धांजलि बताया।
सूर्या ने कहा कि सांस्कृतिक नगरी मैसूर ने एक और ऐतिहासिक अवसर देखा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने जिस विवेक स्मारक का उद्घाटन किया है, वह 1892 में स्वामी विवेकानंद की मैसूर यात्रा की स्मृति में बनाया गया है। उन्होंने इसे कर्नाटक के लिए गर्व का विषय बताया।
तेजस्वी सूर्या ने कहा कि कार्यक्रम परम पूज्य श्री गौतम आनंद जी महाराज की उपस्थिति में हुआ और यह रामकृष्ण आश्रम की स्थायी विरासत को दर्शाता है। स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध संदेश ‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि विवेक स्मारक देशभर के लाखों युवाओं को प्रेरित करेगा।
सूर्या ने कहा कि विवेक स्मारक केवल एक स्मारक नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा। इसके माध्यम से युवा भविष्य के भारत के निर्माण में योगदान देने और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होंगे।






 

100 सप्ताह का नशामुक्ति अभियान बनेगा जन आंदोलन, नशे से दूर रहें युवा, विकसित भारत के निर्माण में निभाएं भूमिका : पीएम मोदी

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘नशा मुक्त युवा से विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया। नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ 100 सप्ताह तक चलने वाले इस अभियान में उन्होंने हर नागरिक, खासकर युवाओं से सक्रिय रूप से जुड़ने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के युवाओं का तन-मन से स्वस्थ, आत्मविश्वास से भरपूर और नशे जैसी घातक आदतों से दूर रहना जरूरी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह अभियान व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अभियान का नाम ही इसके संकल्प को स्पष्ट करता है। जब देश ने विकसित भारत का लक्ष्य तय किया है, तब यह आवश्यक है कि युवा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहें, आत्मविश्वास से भरपूर हों और ड्रग्स जैसी घातक आदत से हमेशा दूर रहें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी को यह संकल्प लेना होगा कि देश के युवा नशे और ड्रग्स के खतरे को समझें, हर तरह से जागरूक रहें और इससे दूर रहें। उन्होंने कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करती है, बल्कि परिवार और समाज पर भी इसका गंभीर असर पड़ता है।
पीएम मोदी ने कहा कि कुछ काम ऐसे होते हैं, जिन्हें व्यक्ति अकेले करने का प्रयास करता है तो निराशा और थकान महसूस हो सकती है। लेकिन जब वही काम सामूहिक अभियान बन जाता है और करोड़ों लोग कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ते हैं, तो उसमें नई ऊर्जा पैदा होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि इसी सामूहिक शक्ति के साथ चलाया जा रहा यह अभियान हर युवा के मन को छुएगा।
युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे इस बड़े अभियान के लीडर हैं। उन्होंने युवाओं की जागरूकता, समझदारी और कर्तव्यों के प्रति गंभीरता की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि युवा भारत की ‘अमृतपीढ़ी’ हैं और अगले 20-25 वर्षों में वे अपने जीवन को दिशा देने के साथ 2047 तक देश को विकसित भारत की मंजिल तक पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि देश को युवाओं की ऊर्जा, कल्पनाशक्ति और प्रतिभा की जरूरत है। इसलिए देश और अपने जीवन के लिए युवाओं का नशामुक्त रहना बेहद जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले 100 रविवार ‘नशा मुक्त भारत’ की दिशा में 100 मजबूत कदम होंगे। उन्होंने कहा कि यदि कोई युवा गलती से नशे की गिरफ्त में आ भी गया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसके सारे रास्ते बंद हो गए हैं। उन्होंने परिवारों से अपील की कि यदि घर का कोई बच्चा नशे का शिकार हो गया है तो सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में इसे छिपाया नहीं जाना चाहिए। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों और चिकित्सा सहायता की मदद लेकर बच्चे को नशे से मुक्त कराने का प्रयास किया जाना चाहिए। साथ ही, परिवार में बच्चों के साथ खुलकर संवाद की संस्कृति विकसित करने पर भी जोर दिया।
पीएम मोदी ने कहा कि समाज का सहयोग, योग और ध्यान की ताकत नशे के खिलाफ आंतरिक शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि आज नशा छोड़ने के लिए पुनर्वास केंद्र जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। उन्होंने युवाओं और परिवारों से जरूरत के अनुसार इन सुविधाओं की मदद लेने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि कार्यक्रम से स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के हजारों छात्र ऑनलाइन जुड़े हैं। इसके अलावा ‘मायभारत’ के लाखों वॉलंटियर्स और एनएसएस के स्वयंसेवक भी अभियान में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों, संस्थानों और पृष्ठभूमि से जुड़े एक करोड़ से अधिक युवा इस अभियान के साथ एकजुट हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों से भी अपील की कि वे पाठ्यक्रम की पढ़ाई के साथ छात्रों से ड्रग्स के खतरों पर बातचीत करें। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में नशे के खिलाफ जागरूकता का आंदोलन चलाया जाना चाहिए और शिक्षकों के प्रयास इसके सकारात्मक परिणाम ला सकते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ अभियान में सरकार मजबूती से युवाओं के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि देश में नशे के कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। पहले की तुलना में कई गुना अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं और हजारों करोड़ रुपए की ड्रग्स जब्त की गई है। उन्होंने कहा कि यह नशे के खिलाफ सरकार की सख्ती को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपनी क्षमता को बचाकर रखना होगा। उन्होंने कहा कि ड्रग्स कुछ समय के लिए नशा या उत्साह दे सकते हैं, लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम करियर और परिवार दोनों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकते हैं। युवाओं को अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का इस्तेमाल देश के निर्माण और अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए करना चाहिए।
 

सौर शक्ति से बदलेगा भारत का ऊर्जा परिदृश्य, PM-SSY से फ्लोटिंग सोलर को नई रफ्तार

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश)भारत का सौर ऊर्जा क्षेत्र तेजी से विस्तार करते हुए स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के प्रमुख आधार के रूप में उभर रहा है। केंद्र सरकार ने 31 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) को मंजूरी देकर इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। योजना के तहत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के समर्थन से 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। यह पहल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और भारत को वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत की स्थापित सौर क्षमता वर्ष 2014 में करीब 3 गीगावाट थी, जो 30 जून 2026 तक बढ़कर 162.15 गीगावाट पहुंच गई। सौर पार्क, रूफटॉप सौर प्रणाली, सौरीकृत कृषि पंप और अन्य योजनाओं ने देशभर में सौर ऊर्जा की तैनाती को गति दी है। क्षमता, विनिर्माण और उपभोक्ता भागीदारी में लगातार वृद्धि ने सौर ऊर्जा को देश के बिजली मिश्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के तहत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के साथ 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं को समर्थन दिया जाएगा। कम से कम दो घंटे की अवधि के लिए 10,000 मेगावाट भंडारण क्षमता वाली ऊर्जा भंडारण प्रणालियां राज्यों को पीक डिमांड प्रबंधन में मदद करेंगी। मौजूदा जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का इस्तेमाल होने से भूमि संसाधनों पर दबाव भी कम होगा।
PM-SSY के लिए ₹5,070 करोड़ का बजट अनुमान रखा गया है। योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू की जाएगी। इसके तहत सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश लाभान्वित होने के पात्र होंगे। इससे देश की मौजूदा करीब 700 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता बढ़कर 5,000 मेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) के आकलन के अनुसार, भारत के जलाशयों और उपयुक्त अंतर्देशीय जल निकायों में करीब 102.18 GWp फ्लोटिंग सोलर क्षमता की संभावना है। PM-SSY से सालाना करीब 10 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है। योजना से 16,000-17,000 पूर्णकालिक समतुल्य रोजगार पैदा होने के साथ फ्लोटेशन सिस्टम, PV सेल, मॉड्यूल और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के घरेलू विनिर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा।
भारत ने वर्ष 2025 में 37 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी, जिससे वार्षिक वृद्धि के मामले में वह अमेरिका से आगे निकल गया। देश दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सौर विकास बाजार के रूप में भी उभरा है। यह वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
भारत के सौर विस्तार की नींव मजबूत नीतिगत ढांचे पर रखी गई है। राष्ट्रीय सौर मिशन, सोलर पार्क योजना, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और प्रतिस्पर्धी बोली व्यवस्था ने बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा तैनाती को गति दी। इन पहलों ने निवेश, बुनियादी ढांचे और बाजार में भरोसे को मजबूत किया है।
राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र सौर क्षमता के प्रमुख केंद्र हैं। बड़ी सौर परियोजनाओं से 118.79 गीगावाट स्थापित क्षमता जुड़ी है। भड़ला सोलर पार्क, पावागड़ा सोलर पार्क और रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क देश की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं। ग्रिड से जुड़ी रूफटॉप सौर प्रणालियां 27.88 गीगावाट का योगदान देती हैं, जबकि शेष क्षमता हाइब्रिड और ऑफ-ग्रिड सौर परियोजनाओं से आती है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 44.61 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में जोड़ी गई 23.83 गीगावाट क्षमता से करीब दोगुनी है। इसी अवधि में सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता वर्ष 2014 के 2.3 गीगावाट से बढ़कर 31 मार्च 2026 तक करीब 172 गीगावाट हो गई।
देश की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 283.46 गीगावाट तक पहुंच गई, जिसमें 274.68 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता शामिल है। गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता में अब तक की सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि 55.29 गीगावाट दर्ज की गई। 29 जुलाई 2025 को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों ने भारत की बिजली मांग का 51.5% पूरा किया, जो अब तक दर्ज सबसे अधिक मासिक हिस्सा था।
भारत ने COP26 में पंचामृत लक्ष्यों के तहत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। मिशन LiFE के जरिए सतत उपभोग और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
नवीकरणीय खरीद बाध्यताएं (RPO) बिजली वितरण कंपनियों और अन्य बाध्य संस्थाओं के लिए बिजली का एक निर्धारित हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से खरीदना जरूरी बनाती हैं। RPO व्यवस्था से डेवलपर्स और निवेशकों को दीर्घकालिक बाजार निश्चितता मिलती है। वर्ष 2026-27 के लिए RPO लक्ष्य 35.95% निर्धारित किया गया है।
सौर ऊर्जा की मांग उपयोगिताओं और बड़े डेवलपर्स तक सीमित नहीं है। पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना परिवारों को रूफटॉप सौर अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) कृषि क्षेत्र में सौर पंप और फीडर सौरीकरण को बढ़ावा दे रहा है। इन योजनाओं ने परिवारों, किसानों, कारोबारियों और बिजली उपयोगिताओं की भागीदारी बढ़ाई है।
ई-रिवर्स नीलामी व्यवस्था के जरिए डेवलपर्स कम टैरिफ पर बिजली आपूर्ति के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) जैसी खरीद एजेंसियों ने पारदर्शी टैरिफ खोज तंत्र को मजबूत किया है। इसके परिणामस्वरूप सौर बिजली का टैरिफ वर्ष 2010 में करीब ₹18 प्रति यूनिट से घटकर 2017 में भड़ला सोलर पार्क की नीलामी में रिकॉर्ड ₹2.44 प्रति यूनिट तक पहुंचा।
वर्ष 2025 में यूटिलिटी-स्केल सौर पीवी की समतुल्य बिजली लागत (LCOE) भारत में करीब 35 अमेरिकी डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा रही, जबकि वैश्विक औसत 44 अमेरिकी डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा था। कम लागत ने सौर ऊर्जा को देश में अधिक प्रतिस्पर्धी और किफायती बनाने में मदद की है।
सोलर पार्क योजना के तहत फरवरी 2026 तक देशभर में 54 सोलर पार्कों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनकी संयुक्त स्वीकृत क्षमता 39,188 मेगावाट है। राजस्थान में 11, गुजरात में 7, आंध्र प्रदेश में 5, महाराष्ट्र में 4, मध्य प्रदेश में 9 और उत्तर प्रदेश में 8 पार्कों को मंजूरी मिली है। यह बुनियादी ढांचा बड़े पैमाने पर सौर परियोजनाओं के विकास में मदद कर रहा है।
राजस्थान के भड़ला क्षेत्र में करीब 5,700 हेक्टेयर यानी 56 वर्ग किलोमीटर में फैले भड़ला सोलर पार्क की स्थापित क्षमता 2,245 मेगावाट है। 2015 में सोलर पार्क योजना के तहत शुरू हुआ इसका विकास चरणबद्ध तरीके से 2020 तक पूरा हुआ। उच्च सौर विकिरण, कम वर्षा और विरल वनस्पति वाला यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर सौर उत्पादन के लिए उपयुक्त है।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC) कार्यक्रम का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन वाले क्षेत्रों से मांग केंद्रों तक बिजली पहुंचाने के लिए पारेषण नेटवर्क को मजबूत करना है। फरवरी 2026 तक कार्यक्रम ने मजबूत पारेषण नेटवर्क के जरिए 24,567.8 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी को सक्षम बनाया। दस राज्यों में परियोजनाएं करीब 44 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी का समर्थन करने के लिए तैयार की जा रही हैं।
उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल के लिए उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना 2021 में ₹4,500 करोड़ के प्रारंभिक परिव्यय के साथ शुरू हुई थी। वर्ष 2022 में इसमें अतिरिक्त ₹19,500 करोड़ का प्रावधान किया गया। अक्टूबर 2024 तक योजना से करीब ₹35,000 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ और लगभग 10,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए।
अनुमोदित मॉडल और निर्माताओं की सूची (ALMM) को 2019 में सौर पीवी मॉड्यूल और सेल के लिए गुणवत्ता आश्वासन ढांचे के रूप में शुरू किया गया। इसके तहत सरकार समर्थित और प्रतिस्पर्धी बोली वाली निर्धारित परियोजनाओं में केवल सूचीबद्ध निर्माताओं और मॉडलों के उपयोग की अनुमति है। PLI और ALMM ने मिलकर घरेलू सौर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद की है।
13 फरवरी 2024 को ₹75,021 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू की गई पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना का लक्ष्य घरों तक रूफटॉप सौर ऊर्जा पहुंचाना है। जून 2026 तक 43 लाख परिवारों को सौरीकृत किया जा चुका है। दिसंबर 2025 तक ₹14,771.82 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय सहायता वितरित की गई और 9 दिसंबर 2025 तक 7.7 लाख से अधिक परिवारों को शून्य बिजली बिल मिला।
ग्वालियर के जावर कॉलोनी निवासी सुधांशु दुबे ने पीएम सूर्य घर योजना के बारे में जानकारी मिलने के बाद अपने घर में रूफटॉप सौर प्रणाली लगाई। स्थापना और सब्सिडी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में पहुंची। पहले जहां उनका बिजली बिल अक्सर ₹10,000 से अधिक होता था, वहीं सौर प्रणाली लगाने के बाद यह खर्च लगभग नगण्य हो गया।
2019 में शुरू की गई पीएम-कुसुम योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाना है। इसके तहत विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र, स्टैंडअलोन सौर कृषि पंप और ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों के सौरीकरण को समर्थन दिया जाता है। योजना से सिंचाई के लिए दिन में विश्वसनीय बिजली, डीजल पर कम निर्भरता और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करने पर जोर है।
पीएम-कुसुम के तहत करीब 11.49 लाख ऑफ-ग्रिड सौर पंप स्थापित किए गए हैं और 15.89 लाख से अधिक कृषि पंपों को फीडर स्तर पर सौरीकरण के जरिए कवर किया गया है। किसानों की भूमि पर करीब 1,726 मेगावाट विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा क्षमता चालू की गई है। योजना से देशभर में 21.77 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में 44.61 गीगावाट जोड़ी गई सौर क्षमता में वितरित सौर समाधानों का योगदान 16.3 गीगावाट यानी 36% रहा। इसमें पीएम-कुसुम से 7.6 गीगावाट और रूफटॉप सौर से 8.7 गीगावाट क्षमता शामिल थी। इससे स्पष्ट है कि सौर ऊर्जा का विस्तार बड़े बिजली संयंत्रों के साथ-साथ घरों और खेतों तक भी तेजी से हो रहा है।
2015 में पेरिस में COP21 के दौरान भारत और फ्रांस द्वारा सह-स्थापित अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) वैश्विक सौर सहयोग के प्रमुख मंचों में शामिल हो गया है। यह सदस्य देशों को सौर ऊर्जा की तैनाती तेज करने, ज्ञान साझा करने और तकनीकी सहयोग बढ़ाने का मंच प्रदान करता है।
वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG) की परिकल्पना भारत ने 2018 में की थी। COP26 में 2021 में भारत और यूनाइटेड किंगडम ने ग्रीन ग्रिड्स इनिशिएटिव-वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (GGI-OSOWOG) शुरू किया। इसका उद्देश्य परस्पर जुड़े बिजली ग्रिड के जरिए सीमा-पार नवीकरणीय ऊर्जा व्यापार को बढ़ावा देना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देना है।
ISA और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए भारत वैश्विक दक्षिण में नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग को मजबूत कर रहा है। भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान 2030 तक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने की दिशा में सहमति बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
भारत का सौर ऊर्जा क्षेत्र नीतिगत समर्थन, बढ़ते घरेलू विनिर्माण, मजबूत बुनियादी ढांचे और बढ़ती जन भागीदारी के सहारे नए चरण में पहुंच रहा है। पंचामृत प्रतिबद्धताओं और 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए सौर ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का प्रमुख स्तंभ बनी रहेगी। PM-SSY जैसी नई पहल फ्लोटिंग सोलर और ऊर्जा भंडारण के जरिए इस बदलाव को और गति देने के साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा नेतृत्व को मजबूत कर सकती है। 


 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 3 से 5 अगस्त तक ओडिशा के दौरे पर, प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 3 से 5 अगस्त तक ओडिशा के दौरे पर रहेंगी। राष्ट्रपति के आगमन से पहले राज्य प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कटक, खुर्दा और गंजाम जिलों में सुरक्षा और लॉजिस्टिक इंतजामों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मु 3 अगस्त को कटक स्थित जगदगुरु कृपालु विश्वविद्यालय का उद्घाटन करेंगी। इसके बाद 4 अगस्त को वह रेल मार्ग से भुवनेश्वर से बरहमपुर पहुंचेंगी। यहां से राष्ट्रपति तप्तपानी जाएंगी और मां कंधुनी देवी मंदिर तथा शिव मंदिर में दर्शन और आरती करेंगी।
राष्ट्रपति की यात्रा से पहले जिला प्रशासन, ओडिशा पुलिस और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था और लॉजिस्टिक तैयारियों का व्यापक निरीक्षण कर रहे हैं। अधिकारियों का लक्ष्य राष्ट्रपति के दौरे के प्रत्येक कार्यक्रम को सुचारू और बिना किसी बाधा के संपन्न कराना है।
ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में राष्ट्रपति के दौरे की तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में कटक, खुर्दा और गंजाम जिलों में सुरक्षा, यातायात, रेलवे और अन्य व्यवस्थाओं का आकलन किया गया।
मुख्य सचिव अनु गर्ग ने सभी संबंधित विभागों को तय समय-सीमा के भीतर आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने दौरे से जुड़ी सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया, ताकि राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।
बरहमपुर के पुलिस अधीक्षक श्रवण विवेक एम. ने बताया कि राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था तैयार की जा रही है और दौरे से पहले रिहर्सल भी की जाएगी।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि राष्ट्रपति के दौरे वाले स्थानों के संबंध में आईजी की ओर से आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद पुलिस टीम के साथ संबंधित स्थानों का निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।
मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति की स्पेशल ट्रेन के साथ-साथ भुवनेश्वर और बरहमपुर रेलवे स्टेशनों पर साफ-सफाई बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को स्टेशन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और राष्ट्रपति की ट्रेन यात्रा के लिए सभी जरूरी इंतजाम सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अनु गर्ग ने सभी विभागों और संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा है। राज्य प्रशासन राष्ट्रपति के दौरे से जुड़े सुरक्षा, परिवहन, रेलवे और अन्य व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी कर रहा है।

‘आपकी उपलब्धि युवा एथलीटों को प्रेरित करेगी’, पीएम मोदी ने दी पदक विजेताओं को बधाई

01-Aug-2026
नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलीटों का दमदार प्रदर्शन जारी है। शुक्रवार को भारत ने कुल 6 मेडल अपने नाम किए। जैवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा ने सिल्वर, जबकि यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज पर कब्जा जमाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीरज समेत देश के लिए मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने डेकाथलॉन स्पर्धा में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले तेजस्विन शंकर को बधाई देते हुए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भारतीय खिलाड़ी लगातार इतिहास रच रहे हैं और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। तेजस्विन शंकर ने ग्लासगो सीडब्ल्यूजी में पुरुषों के डेकाथलॉन इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। उन्होंने 10 इवेंट्स में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन किया। उन्हें बधाई। वे ऐसे ही कामयाबी हासिल करते रहें। मेरी शुभकामनाएं।”
जूडो में भारत को सिल्वर मेडल दिलाने वाली यामिनी मोर्या की भी पीएम मोदी ने प्रशंसा की। उन्होंने लिखा, “जूडो की 57 किलोग्राम कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीतने पर यामिनी मौर्य को बधाई। उन्होंने बहुत अच्छा खेला और जूडो के प्रति उनका जुनून उनके प्रदर्शन में साफ झलकता है। उनकी इस उपलब्धि से आने वाले समय में कई युवा जूडो की ओर आकर्षित होंगे। उनके भविष्य के प्रयासों के लिए उन्हें बहुत-बहुत शुभकामनाएं।”
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के मेडल की सबसे बड़ी उम्मीद माने जा रहे नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। प्रधानमंत्री ने नीरज को बधाई देते हुए लिखा, “ग्लासगो में पुरुषों के जैवलिन इवेंट में नीरज चोपड़ा के लिए शानदार सिल्वर। उन्होंने एक बार फिर कमाल की निरंतरता, धैर्य और जोश दिखाया है। उनकी सफलताओं पर हर भारतीय को गर्व है। आगे की कोशिशों के लिए मेरी शुभकामनाएं।”
पीएम मोदी ने जैवलिन में ही ब्रॉन्ज जीतने वाले एथलीट यशवीर की भी तारीफ की। उन्होंने अपने एक्स पर लिखा, “पुरुषों की जैवलिन स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर यशवीर सिंह को बधाई। उन्होंने शानदार थ्रो किया, जो उनके जोश और लगन को दर्शाता है। उनकी यह उपलब्धि कई युवा एथलीटों को प्रेरित करेगी। भविष्य के प्रयासों के लिए उन्हें बहुत-बहुत शुभकामनाएं।” 
 

 


पीएम मोदी का आंध्र प्रदेश और कर्नाटक दौरा आज, विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात

01-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शनिवार को आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे, जिसके दौरान वे क्षेत्रीय विकास और आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से कई अवसंरचना, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी परियोजनाओं का उद्घाटन और आधारशिला रखेंगे।
आंध्र प्रदेश में प्रधानमंत्री भोगपुरम स्थित अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उ‌द्घाटन करेंगे। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत 5,640 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित इस ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे की क्षमता प्रति वर्ष 60 लाख यात्रियों को संभालने की है। उम्मीद है कि यह हवाई अड्डा पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार सृजन को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देगा और साथ ही पूरे क्षेत्र में हवाई संपर्क को मजबूत करेगा।
यात्रा से पहले, पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश साझा किया, जिसमें नए हवाई अड्डे के महत्व पर जानकारी दी- “आंध्र प्रदेश के भोगपुरम में अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का लोकार्पण किया जाएगा। यह एक आधुनिक और भविष्योन्मुखी हवाई अड्डा है जो संपर्क, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही, यह परियोजना स्थिरता और ऊर्जा दक्षता के सिद्धांतों का भी पालन करती है।”
प्रधानमंत्री विशाखापत्तनम में एएसआईपी सेमीकंडक्टर परियोजना की आधारशिला भी रखेंगे। यह आंध्र प्रदेश की पहला सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र है, जिसे इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत मंजूरी मिली है। 460 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित इस केंद्र से प्रतिवर्ष लगभग 96 मिलियन सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन होने, उच्च कौशल रोजगार के अवसर पैदा होने और राज्य में सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए एक मजबूत सहायक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में मदद मिलने की उम्मीद है।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में, प्रधानमंत्री मोदी कुरनूल-IV नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के एकीकरण हेतु ट्रांसमिशन सिस्टम के प्रथम चरण (4.5 गीगावाट) की आधारशिला रखेंगे। पावरग्रिड द्वारा एक विशेष प्रयोजन वाहन के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही इस परियोजना में 5,550 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी कुरनूल पवन ऊर्जा क्षेत्र और सौर ऊर्जा क्षेत्र (आंध्र प्रदेश) के लिए 3,550 करोड़ रुपये की लागत से विकसित ट्रांसमिशन सिस्टम भाग ए और भाग बी, साथ ही अनंतपुरम (2,500 मेगावाट) और कुरनूल (1,000 मेगावाट) में सौर ऊर्जा क्षेत्र के लिए पावरग्रिड द्वारा 820 करोड़ रुपये की लागत से कार्यान्वित ट्रांसमिशन योजना का भी उद्घाटन करेंगे। इन परियोजनाओं से कुरनूल और अनंतपुरम में उत्पादित नवीकरणीय ऊर्जा को देश भर के लाभार्थियों तक राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से पहुंचाने में सुविधा होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1,880 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इन प्रमुख परियोजनाओं में एनएच-365बीजी पर रेचेरला से गुरुवायगुडेम और गुरुवायगुडेम से देवरापल्ले के बीच चार लेन वाले ग्रीनफील्ड राजमार्ग तथा एनएच-67 पर ताड़ीपत्री बायपास शामिल हैं। इसके अलावा, वह एनएच-565 पर पेन्चालाकोना-एरपेदु खंड के लिंगसमुद्रम में उच्च स्तरीय पुल की आधारशिला भी रखेंगे।
इन परियोजनाओं से विजयवाड़ा और अन्य शहरी केंद्रों में ट्रैफिक पर दबाव कम होने, सड़क सुरक्षा में सुधार होने, विशाखापत्तनम और हैदराबाद के बीच यात्रा का समय कम होने और क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है।
आंध्र प्रदेश में अपने कार्यक्रमों के बाद, पीएम मोदी कर्नाटक के मैसूरु जाएंगे, जहां वे स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र विवेक स्मारक का उद्घाटन करेंगे और एक जनसभा को संबोधित करेंगे।

 


दिल्ली लक्ष्मी योजना के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल खुला, महिलाओं को हर महीने मिलेंगे 2,500 रुपए

01-Aug-2026
नई दिल्ली। दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार आज शनिवार को ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ शुरू करने जा रही है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपए की आर्थिक मदद मिलेगी।
सीएम रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया, “1 अगस्त से दिल्ली की महिलाओं के जीवन में सम्मान का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। आज से दिल्ली लक्ष्मी योजना के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल खुल गया है। किसी बहन के लिए यह अपने नाम की पहली बचत होगी, किसी के लिए दवा, किताब या घर की कोई जरूरी चीज और किसी के लिए यह एहसास कि अब अपनी हर आवश्यकता के लिए किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा।”
सीएम में लिखा, ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत हर पात्र महिला को प्रतिमाह 2,500 रुपए का आर्थिक संबल मिलेगा। यह राशि केवल खाते में नहीं जाएगी, यह आत्मविश्वास जगाएगी, निर्णय लेने की शक्ति बढ़ाएगी और जीवन को अपने ढंग से जीने का साहस देगी। सभी पात्र महिलाएं दिल्ली सरकार की आधिकारिक वेवसाइट पर जाकर अपना पंजीकरण अवश्य कराएं।
यह योजना सरकार की उन अहम कल्याणकारी पहलों में से एक है, जिसका मकसद राष्ट्रीय राजधानी में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को आर्थिक मदद पहुंचाना है। इस योजना को लागू करने के लिए दिल्ली सरकार ने अपने 2026-27 के बजट में 5,110 करोड़ रुपए रखे हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि जब यह योजना पूरी तरह से लागू हो जाएगी, तो दिल्ली भर में 17 लाख से ज्यादा महिलाओं को इसका फायदा मिलेगा।
पात्रता के नियमों के तहत, 21 से 60 साल की उम्र की वे महिलाएं इस योजना के लिए पात्र होंगी जिनके परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपए तक है। ध्यान देने वाली बात यह है कि जो महिलाएं इनकम टैक्स देती हैं, जीएसटी फाइल करती हैं, सरकारी कर्मचारी हैं, या पहले से ही दूसरी सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक मदद ले रही हैं, वे इसके लिए पात्र नहीं होंगी।
इसी तरह, जिन परिवारों के पास चार पहिया वाहन है, जो सालाना 2,400 यूनिट से ज़्यादा बिजली का इस्तेमाल करते हैं, या जिनके परिवार के सदस्य सरकारी विभागों या पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (पीएसयू) में काम करते हैं, उन्हें भी इस योजना से बाहर रखा जाएगा।
इसके अलावा, तीन से ज्यादा बच्चे होने या आपराधिक रिकॉर्ड होने वाली महिलाएं ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ का लाभ उठाने के लिए पात्र नहीं होंगी। यह योजना लाभार्थियों को आर्थिक मदद पाने के लिए दो विकल्प देती है।
पहले विकल्प के तहत, हर महीने 1,500 रुपए रिकरिंग डिपॉजिट (आरडी) या फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) खाते में जमा किए जाएंगे, जबकि बाकी 1,000 रुपए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) वॉलेट में जमा किए जाएंगे, जिसका इस्तेमाल मंजूरी-प्राप्त जरूरी चीजों की खरीद के लिए किया जा सकेगा। इसके अलावा लाभार्थी चाहें तो 2,500 रुपए की पूरी मासिक सहायता राशि को बैंक खाते और सीबीडीसी वॉलेट में बांटने के बजाय सीधे रिकरिंग डिपॉजिट या फिक्स्ड डिपॉजिट खाते में ले सकते हैं।
सीधी आर्थिक सहायता देने के अलावा, दिल्ली लक्ष्मी योजना का मकसद कई सामाजिक कल्याण के लक्ष्यों को बढ़ावा देना भी है। इनमें स्कूल में दाखिले को बढ़ावा देना, ‘अपार’ योजना और ‘आभा’ आईडी बनाना, समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करना, ‘पोषण’ ट्रैकर पर रजिस्ट्रेशन, ‘एक पेड़ मां के नाम’ और स्वच्छ भारत अभियान जैसे अभियानों में हिस्सा लेना, और महिलाओं को स्वयं-सहायता समूहों और कौशल विकास कार्यक्रमों से जुड़ने के लिए प्रेरित करना शामिल है। इस योजना के तहत आवेदनों की प्रक्रिया खास दिल्ली लक्ष्मी योजना पोर्टल के जरिए की जाएगी।
 

 



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