ब्रेकिंग न्यूज

देश-विदेश

पीओके में चुनाव दिखावा, पाखंडपूर्ण मुखौटे के पार देखना जरूरी: विदेश मंत्रालय

04-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हो रहे “तथाकथित चुनावों” को दिखावा करार दिया है और वैश्विक संगठनों से अपील की कि आम नागरिकों पर हो रही ज्यादती के खिलाफ कदम उठाएं।
मंगलवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में यह तथाकथित स्थानीय चुनाव पूरी तरह से दिखावा है। वास्तिवक स्थिति वहां हो रहे जन प्रदर्शन और पाकिस्तानी बलों द्वारा की जा रही निर्मम हत्याओं की है। ऐसे खोखले दावे वास्तविकता से अलग हैं।”
पीओके में प्रदर्शन को दबाने के लिए पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों के परिणाम को रेखांकित करते हुए जायसवाल ने कहा, “वहां जो जन प्रदर्शन चल रहा है वहां जून से अब तक 90 लोग मारे गए हैं और कई और घायल हुए हैं। वहां की सत्ता व्यवस्था जनता के असंतोष का जवाब गोली से, संचार बंदी, दमन और धमकी से दिया है।”
उन्होंने वैश्विक समुदाय से पाकिस्तान का पाखंड से भरा चेहरा साफ देखनी की अपील की। आगे कहा, “पाकिस्तान अब खोखले चुनावी अभ्यास ये वैधता का भ्रम पैदा कर रहा है। इसके लिए उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। विश्व समुदाय को मानवाधिकार पर पाकिस्तान के पाखंडपूर्ण उपदेशों के मुखौटे के पार वास्तविकता को देखना चाहिए।”
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की फायरिंग और दमनकारी कार्रवाई की दुनिया भर में चर्चा है। जम्मू और कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन 5 जून को शुरू हुए थे।
वहीं पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों को लेकर पूछे गए सवाल पर जायसवाल ने कहा, “सभी ने देखा कि ऑपरेशन सिंदूर में हमने उन्हें कैसा जवाब दिया था। हम तो सभी देशों से क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म और इसे बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की अपील करते हैं। हम पाकिस्तान से भी सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सख्त एक्शन लेने और अपनी धरती से चल रहे आतंकी ठिकानों को खत्म करने की अपील करते हैं।
















 

गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी को बदलाव का माध्यम बनाने पर ब्रिक्स देशों में सहमति

04-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (एनएसओ) के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में “परिवर्तन के प्रेरक के रूप में गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी” विषय के साथ संपन्न हुई। यह बैठक ब्रिक्स के व्यापक विषय “सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास” के अनुरूप आयोजित की गई। कार्यक्रम में ब्रिक्स देशों के एनएसओ प्रतिनिधियों के साथ नीति निर्माता, शिक्षाविद, विचारक, नागरिक समाज संगठनों और तकनीकी विशेषज्ञों समेत 350 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
बैठक के दूसरे दिन “ब्रिक्स सहयोग की संभावनाओं के लिए साझा नवाचार क्षेत्रों की पहचान” विषय पर आयोजित तकनीकी सत्र-III में आधुनिक सर्वेक्षण पद्धतियों और डिजिटल डेटा संग्रहण पर चर्चा हुई। भारत और मिस्र ने सर्वेक्षण तथा जनगणना डेटा संग्रहण के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
भारत ने पेपर आधारित सर्वेक्षण से आधुनिक डिजिटल उपकरणों की ओर बदलाव के दौरान मिले अनुभव और सीख प्रस्तुत की। ई-सिग्मा (ई-सर्वे सूचना संग्रहण और प्रबंधन अनुप्रयोग) कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यू (सीएपीआई) सक्षम प्लेटफॉर्म है, जिसे बड़े पैमाने पर नमूना सर्वेक्षणों को क्लाउड-आधारित आर्किटेक्चर में एकीकृत करने के लिए तैयार किया गया है।
मिस्र ने आधिकारिक आंकड़े तैयार करने में भू-स्थानिक तकनीक के इस्तेमाल को रेखांकित किया। बैठक में सर्वेक्षणों के संचालन में एआई के उपयोग और सर्वेक्षण डेटा के साथ प्रशासनिक डेटा के सूक्ष्म उपयोग के महत्व पर भी जोर दिया गया।
तकनीकी सत्र-IV में व्यापक आर्थिक और क्षेत्रीय सांख्यिकी को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों ने व्यापक आर्थिक सांख्यिकी को मजबूत करने के लिए अपनाई गई प्रमुख रणनीतियों और अब तक की प्रगति साझा की।
भारत ने राष्ट्रीय लेखा प्रणाली, 2025 (2025 एसएनए) के कार्यान्वयन के लिए अपना संक्रमणकालीन रोडमैप प्रस्तुत किया। साथ ही आधिकारिक सांख्यिकी तैयार करने में प्रशासनिक डेटा के प्रभावी इस्तेमाल का प्रदर्शन किया। चीन ने 2025 एसएनए ढांचे को लागू करने में अपनी प्रगति और शुरुआती व्यावहारिक अनुभव साझा किए।
ब्राजील ने वैकल्पिक डेटा स्रोतों, खासकर बढ़ते ई-कॉमर्स और मध्यस्थ प्लेटफॉर्म से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ऑनलाइन डेटा को आधिकारिक आंकड़ों में शामिल करने की संभावनाओं को सामने रखा। ब्राजील ने कहा कि गैर-पारंपरिक डेटा मौजूदा स्रोतों का पूरक बन सकता है और तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य में सदस्य देशों द्वारा तैयार किए जाने वाले आंकड़ों की गुणवत्ता बढ़ा सकता है। इंडोनेशिया ने 2025 एसएनए में संक्रमण की अपनी कार्यान्वयन योजना और आईएसआईसी 5 को अपनाने की दिशा में हुई प्रगति साझा की।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों के प्रमुखों की बैठक के साथ सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने जनाग्रह सेंटर फॉर सिटिजनशिप एंड डेमोक्रेसी के सहयोग से “विकसित होते डेटा इकोसिस्टम में एआई-रेडी पब्लिक डेटा सिस्टम का निर्माण” विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम में जिम्मेदार एआई अपनाने और साक्ष्य-आधारित शासन को समर्थन देने के लिए अंतरसंचालनीय, विश्वसनीय और उच्च-गुणवत्ता वाले सार्वजनिक डेटा सिस्टम के महत्व पर जोर दिया गया। एआई-रेडी पब्लिक डेटा सिस्टम के व्यावहारिक आधारभूत तत्वों पर गोलमेज चर्चा हुई, जिसके बाद भारत, दक्षिण अफ्रीका, रूस, इंडोनेशिया, चीन, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य भागीदार संगठनों के केस स्टडी प्रस्तुत किए गए।
प्रतिभागियों ने खंडित डेटा सिस्टम को एआई-रेडी इकोसिस्टम में बदलने के लिए डेटा गवर्नेंस, अंतरसंचालनीयता, मेटाडेटा मानकों, संस्थागत सहयोग और क्षमता निर्माण को मजबूत करने से जुड़े अनुभव साझा किए। चर्चा में सार्वजनिक हित के लिए एआई की क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल करने में सक्षम मजबूत सार्वजनिक डेटा सिस्टम के निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने के महत्व को रेखांकित किया गया।
बैठक के दौरान भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) और बीपीएस-सांख्यिकी इंडोनेशिया ने आधिकारिक सांख्यिकी, क्षमता निर्माण और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक द्विपक्षीय बैठक में आशय पत्र (एलओआई) पर हस्ताक्षर किए। एलओआई ज्ञान के आदान-प्रदान, तकनीकी एवं पद्धतिगत उन्नति, मानव संसाधन विकास और एआई, मेटाडेटा मानकीकरण तथा ओपन डेटा जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग के लिए ढांचा उपलब्ध कराएगा।
सत्र का समापन ब्रिक्स संयुक्त वक्तव्य को अपनाने और उसके बाद समापन वक्तव्य सत्र के साथ हुआ। संयुक्त वक्तव्य को औपचारिक रूप से अपनाना ब्रिक्स सदस्य देशों में सांख्यिकीय ढांचों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया। इससे अधिक सशक्त, पारदर्शी और नीति-प्रासंगिक आधिकारिक आंकड़ों के लिए आधार तैयार होगा।

सावन का पहला सोमवार आज: देशभर में हर-हर महादेव की गूंज, मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़

03-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक आज सावन के पहले सोमवार की धूम है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक पवित्र नदी तटों, जलाशयों और मंदिरों खासतौर पर शिवालयों में हर-हर महादेव की गूंज हो रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी देवों के देव महादेव की आस्था में डूबी है। तड़के से ही सभी शिवालयों के पट भक्तों के लिए खुले हुए हैं।
शहर के सभी शिवालयों के पट भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन, हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ, उत्तर प्रदेश के काशी विश्वनाथ, उत्तराखंड के हरिद्वार और ऋषिकेश तथा झारखंड के देवघर में जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं। प्रयागराज के संगम क्षेत्र में भी ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान है। 
श्रद्धालु त्रिवेणी तट पर स्नान कर सूर्य भगवान को जल अर्पित कर रहे हैं। चित्रकूट के रामघाट पर मंदाकिनी में आस्था की डुबकी लगाने के बाद भक्त सबसे पहले महाराजाधिराज मतगजेन्द्र नाथ मंदिर (शिवालय) में जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं।दिल्ली में सुरक्षा के मद्देनजर प्रमुख मंदिरों में अर्द्धसैनिक बल, दिल्ली पुलिस और निजी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।
चांदनी चौक स्थित गौरी शंकर मंदिर में भक्त रात दो बजे से ही दर्शन-पूजन कर रहे हैं। मंदिर के बाहर दिल्ली पुलिस के साथ अर्द्धसैनिक बल तैनात हैं। मेटल डिटेक्टर गेट और संदिग्ध वस्तुओं की जांच के लिए मशीनें लगाई गई हैं। इस बार गौरी शंकर मंदिर में भक्त सीधे जलाभिषेक नहीं कर पाएंगे। इसके लिए गर्भगृह के बाहर क्यारियां बनाई गई हैं।
चांदनी चौक के बनखंडी मंदिर और कनॉट प्लेस स्थित विश्वेश्वर महादेव मंदिर में प्रवेश और निकासी के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है। विश्वेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक का अनुष्ठान भी आरंभ हो गया है। सावन के इस पहले सोमवार पर देशभर में शिव भक्ति का यह दृश्य आस्था और श्रद्धा का जीवंत प्रमाण है।



 

सावन के पहले सोमवार पर NCR में बारिश के आसार, मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया

03-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) सावन के पहले सोमवार पर दिल्ली समेत पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लोगों को मौसम राहत देने वाला रहने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार, 4 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। 
विभाग का कहना है कि पूरे सप्ताह आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और रुक-रुक कर हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन हवा में नमी अधिक रहने के कारण उमस लोगों को परेशान कर सकती है।
मौसम विभाग के सात दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार, 3 अगस्त को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस दिन आसमान सामान्यतः बादलों से ढका रहेगा और हल्की बारिश हो सकती है। इस दिन किसी प्रकार की मौसम संबंधी चेतावनी जारी नहीं की गई है। वहीं, 4 अगस्त को भी अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। हालांकि इस दिन मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। पूर्वानुमान के अनुसार पूर्वाह्न, अपराह्न और शाम के समय हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इस दिन अधिकतम आर्द्रता 90 प्रतिशत और न्यूनतम 75 प्रतिशत रह सकती है, जिससे उमस का असर अधिक महसूस होगा।
इसके बाद 5 अगस्त को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मौसम सामान्यतः बादलों से घिरा रहेगा और हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी। किसी प्रकार की चेतावनी जारी नहीं की गई है।
6 अगस्त को भी मौसम का मिजाज लगभग ऐसा ही रहेगा। अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश के आसार हैं। 7 अगस्त को अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस दिन अधिकतम आर्द्रता 95 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जबकि न्यूनतम आर्द्रता 70 प्रतिशत रहने की संभावना है। बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश का दौर जारी रहेगा।
सप्ताह के अंतिम दिन 8 अगस्त को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने का पूर्वानुमान है। इस दिन भी सामान्यतः बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश होने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर होने वाली बारिश से दिन के तापमान में बढ़ोतरी नहीं होगी, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।
हालांकि वातावरण में नमी अधिक होने के कारण उमस बनी रहेगी। ऐसे में लोगों को पर्याप्त पानी पीने, धूप निकलने पर सावधानी बरतने और बारिश के दौरान यातायात संबंधी सलाह का पालन करने की सलाह दी गई है।
 

पीएम मोदी ने एक्स पर शेयर किया सुभाषित, कहा- ‘भाग्य प्रतिकूल हो तो भी धैर्य न छोड़ें’

03-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक सुभाषित शेयर किया। इसमें उन्होंने मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा दी है।
पीएम मोदी ने अपने एक्स पोस्ट में संस्कृत श्लोक साझा करते हुए लिखा,
“त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि दैवे धैर्यात्कदाचित्स्थितिमाप्नुयात्सः।
याते समुद्रेऽपि च पोतभङ्गे सांयात्रिको वाञ्छति कर्म एव।।”
इसका हिंदी अर्थ है कि भाग्य के प्रतिकूल होने पर भी मनुष्य को धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए। धैर्य के बल पर वह कभी भी अपनी खोई हुई अनुकूल स्थिति को पुनः प्राप्त कर सकता है। जिस प्रकार समुद्र के बीच में जहाज टूट जाने पर भी एक कुशल नाविक केवल अपने कर्म यानी जीवित रहने और तैरने के प्रयास की ही इच्छा रखता है और हिम्मत नहीं हारता।
गुरु पूर्णिमा पर भी साझा किया था सुभाषित
इससे पहले 29 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सुभाषित शेयर करते हुए लिखा था, “गुरु पूर्णिमा की सभी देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई। गुरु ज्ञान के साथ ही अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें सुविचार और सुसंस्कारों से सुशिक्षित करते हैं। आइए, उनके आदर्शों को अपने जीवन का संबल बनाएं।”
उन्होंने एक और श्लोक भी साझा किया था-
“प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा।
शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः॥”
इसका अर्थ है कि जो जीवन में प्रेरणा का संचार करे, सही दिशा का संकेत दे, ज्ञान और सत्य का उपदेश करे, उचित मार्ग दिखाए, शिक्षा प्रदान करे तथा जीवन में सत्य का बोध कराकर आत्मविकास का मार्ग प्रशस्त करे, ये गुरु के छह स्वरूप माने गए हैं।
28 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य सुभाषित शेयर करते हुए लिखा था, “प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित है। हमारी परंपरा भी हमें इसी धर्मसम्मत आचरण की प्रेरणा देती है।”
“लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा।
ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः॥
दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा।
श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः॥”
का हिंदी अर्थ है कि प्रकृति और धर्म के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन ही सुख, सुरक्षा और मंगल का आधार है। दिशाओं के रक्षक देवता, इंद्र आदि प्रमुख देवगण, छह ऋतुएं, सभी मास, वर्ष, रात्रियां, दिन और शुभ मुहूर्त सदैव कल्याणकारी हों। वेद, स्मृतियां और धर्म भी सभी प्रकार से सर्वत्र सबकी रक्षा करें।







 

सावन माह में विशेष : ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, तीनों लोकों की रोज़ाना परिक्रमा करने के बाद भगवान शिव यहां करते हैं विश्राम

03-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) सावन माह में विशेष की कड़ी में हम आपको भारत में स्थित भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के बारे में बता रहे हैं। यह शिव शक्ति के वो 12 पवित्र स्थल हैं, जहां भगवान शिव स्वयंभू प्रकट हुए। इससे पहले, आपने प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ, दूसरे मल्लिकार्जुन और तीसरे महाकालेश्वर के बारे में पढ़ा। आज सावन के पहले सोमवार के दिन आपको बारह ज्योतिर्लिंगों में से चौथे ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के बारे में अवगत करा रह हैं। 
स्कंद पुराण, शिव पुराण और वायु पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में ओंकारेश्वर की महिमा का वर्णन मिलता है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के उत्तरी तट पर, इंदौर से लगभग 77 किलोमीटर दूर स्थित है। यह नदी के उत्तरी तट पर स्थित एकमात्र ज्योतिर्लिंग है । माना जाता है कि तीनों लोकों की रोज़ाना परिक्रमा करने के बाद भगवान शिव यहां विश्राम करते हैं। इसलिए, यहां भगवान शिव के सोने के लिए विशेष इंतज़ाम, अनुष्ठान और ‘शयन दर्शन’ की व्यवस्था की जाती है।
हिंदू परंपराओं के अनुसार, ओंकारेश्वर से अनेक पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं, जो इस ज्योतिर्लिंग की धार्मिक महत्ता को रेखांकित करती हैं। एक प्रचलित कथा के अनुसार, विंध्याचल पर्वतमाला के अधिष्ठाता देवता विंध्य ने अपने द्वारा किए गए पापों के प्रायश्चित के लिए भगवान शिव की कठोर आराधना की। उन्होंने एक पवित्र यंत्र की स्थापना की तथा रेत और मिट्टी से एक शिवलिंग का निर्माण कर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव दो ओंकारेश्वर और अमलेश्वर (ममलेश्वर) स्वरूपों में प्रकट हुए। मान्यता है कि जिस स्थान पर मिट्टी का शिवलिंग दिव्य रूप में प्रकट हुआ, वही आगे चलकर ओंकारेश्वर कहलाया।
वहीं, एक अन्य कथा का संबंध इक्ष्वाकु वंश के प्रसिद्ध राजा मंधाता से है, जिन्हें भगवान राम का पूर्वज माना जाता है। कहा जाता है कि राजा मंधाता ने इसी स्थान पर भगवान शिव की घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर शिव ने ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए। कुछ परंपराओं में यह भी वर्णित है कि मंधाता के पुत्र अंबरीष और मुचुकुन्द ने भी यहाँ कठोर तप किया था। इसी कारण इस पर्वत और द्वीप को मंधाता पर्वत अथवा मंधाता द्वीप के नाम से भी जाना जाता है। एक अन्य पौराणिक आख्यान के अनुसार, देवताओं और दानवों के बीच हुए भीषण युद्ध में जब दानवों की विजय होने लगी, तब संकटग्रस्त देवताओं ने भगवान शिव की आराधना की। उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और दानवों का संहार कर देवताओं को विजय प्रदान की। इस कथा के कारण भी ओंकारेश्वर को धर्म और अधर्म के संघर्ष में दिव्य संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।
ओंकारेश्वर का संबंध आदि शंकराचार्य के जीवन से भी जुड़ा हुआ है। परंपरा के अनुसार, यहीं स्थित एक गुफा में उनकी भेंट अपने गुरु गोविन्द भगवत्पाद से हुई थी और उन्होंने उनके सान्निध्य में वेदांत का अध्ययन किया। यह गुफा आज भी ओंकारेश्वर मंदिर के निकट विद्यमान है और एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक तीर्थस्थल मानी जाती है। यहां आदि शंकराचार्य की प्रतिमा भी स्थापित है, जो उनके जीवन और अद्वैत वेदांत परंपरा की स्मृति को संजोए हुए है।
 

संसद में फिर हंगामा, दोनों सदन दोपहर 2 बजे तक स्थगित

03-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) राज्यसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही सोमवार को एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ गई। हालिया छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष राज्यसभा में विधायी कामकाज के स्थगन और नियम 267 के तहत चर्चा की मांग कर रहा है। विपक्षी सांसदों ने अपनी मांग को लेकर नारेबाजी की, जिसके चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा में भी हंगामे की स्थिति बनी रही और वहां भी कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा में सोमवार को लगातार जबरदस्त नारेबाजी होती रही। विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर सभापति के आसन के समीप आ गए और नियम 267 के तहत चर्चा कराने की मांग पर अड़े रहे। कई सांसद हाथों में पोस्टर लेकर प्रदर्शन करते नजर आए। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सांसदों को वापस अपनी सीटों पर लौटने को कहा, लेकिन विपक्षी सांसद नारे लगाते रहे।
इसे लेकर सभापति ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पोस्टर लेकर प्रदर्शन करना नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम 267 के तहत दिए गए नोटिस स्वीकार नहीं किए गए हैं। यह बात पहले भी कई बार कही जा चुकी है और पूर्व में भी इस नियम के तहत चर्चा को अनुमति नहीं दी गई थी। सभापति के इस बयान के बाद सदन में नारेबाजी और हंगामा और तेज हो गया, जिसके बाद कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्षी सांसदों ने नोटिस दिया है और वे नियम 267 के तहत चर्चा चाहते हैं। विपक्षी सांसदों का कहना है कि वे प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस बल के इस्तेमाल समेत अन्य संबंधित मुद्दों पर इस नियम के तहत चर्चा की मांग कर रहे थे। हालांकि, सभापति ने नियम 267 को अस्वीकार कर दिया।
लोकसभा में भी हंगामे की स्थिति बनी रही। यहां भी सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र में अभी तक प्रश्नकाल और शून्यकाल का अधिकांश समय हंगामे की भेंट चढ़ चुका है। सोमवार को भी यही स्थिति बनी रही और राज्यसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही नहीं हो सकी।





 

उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति मुर्मु से की मुलाकात, द्विपक्षीय सहयोग गहरा करने पर सहमति

03-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि यह दौरा द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और विभिन्न क्षेत्रों में आपसी साझेदारी को गहरा करने का अवसर प्रदान करता है।
राष्ट्रपति सचिवालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “उज्बेकिस्तान गणराज्य के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं, जो पुराने व्यापार मार्गों से जुड़े हैं।”
राष्ट्रपति सचिवालय ने आगे लिखा कि दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि यह दौरा द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और अलग-अलग क्षेत्रों में आपसी फायदेमंद साझेदारी को गहरा करने का मौका देता है। 
इससे पहले दिन में सैदोव बख्तियार ओडिलोविच भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंधों को और मजबूत करने के लिए आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। उनके स्वागत में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर लिखा, “उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव का नई दिल्ली में आधिकारिक दौरे पर आने पर बहुत गर्मजोशी से स्वागत है।”
सैदोव भारत सरकार के निमंत्रण पर तीन से पांच अगस्त तक भारत में रहेंगे। राष्ट्रपति मुर्मु से मुलाकात के बाद वे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी बातचीत करेंगे। इसके अलावा, वे नई दिल्ली में एक बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे, जहां दोनों देशों के बीच आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा होगी।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और उज्बेकिस्तान व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा, शिक्षा और कनेक्टिविटी जैसे कई क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना चाहते हैं। दौरे से पहले 20 जुलाई को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सैदोव से टेलीफोन पर बात की थी। दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। 
डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि बातचीत व्यापार, निवेश और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने पर केंद्रित थी। सैदोव ने भी बातचीत को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि दोनों पक्ष विदेश मंत्रालयों के बीच नियमित और भरोसेमंद संवाद जारी रखने पर सहमत हुए। भारत और उज्बेकिस्तान ने रणनीतिक साझेदारी के तहत करीबी कूटनीतिक संपर्क बनाए रखा है। दोनों देशों ने मई में नई दिल्ली में फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन का 17वां राउंड आयोजित किया था, जहां अधिकारियों ने द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और आपसी हितों वाले क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।




 

एनडीए की ‘मंगल मिलन’ बैठक 4 अगस्त को, भाजपा संसदीय दल ने जारी किया पत्र

03-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की संसदीय दल की बैठक ‘मंगल मिलन’ मंगलवार, 4 अगस्त को आयोजित की जाएगी। इसको लेकर भाजपा संसदीय दल की ओर से एक पत्र जारी किया गया है।
भाजपा संसदीय दल की ओर से जारी पत्र में कहा गया है, “राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) संसदीय दल की बैठक, ‘मंगल-मिलन,’ 4 अगस्त (मंगलवार) को सुबह 9.30 बजे संसद भवन ग्रंथालय के जी.एम.सी. बालायोगी सभागृह में आयोजित की जाएगी। राजग के सभी लोकसभा एवं राज्यसभा के माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया समय से पूर्व कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर अपनी गरिमामयी उपस्थिति प्रदान करने का कष्ट करें।”‘
बता दें कि 21 जुलाई को ‘मंगल मिलन’ के तहत पहली बैठक आयोजित की गई थी। परंपरागत रूप से संसद के प्रत्येक सत्र के दौरान एनडीए संसदीय दल की बैठक हर मंगलवार को आयोजित होती रही है। हालांकि इस बार इसे ‘मंगल मिलन’ नाम दिया गया है। गठबंधन का कहना है कि इस नए नाम के जरिए नियमित संसदीय बैठकों को सांस्कृतिक और संगठनात्मक पहचान देने का प्रयास किया गया है।
28 जुलाई को भी ‘मंगल मिलन’ बैठक हुई थी। इस बैठक में पहली बार तृणमूल कांग्रेस के पूर्व बागी नेता और अब एनसीपीआई सांसद शामिल हुए थे। एनसीपीआई सांसद काकोली घोष, शताब्दी रॉय और सायनी घोष भी इस बैठक में शामिल हुईं। ये सभी पहले तृणमूल कांग्रेस में थीं।
एनसीपीआई सांसद काकोली घोष ने बताया था कि 2014 से पहले उन्होंने इस तरह की बैठकें नहीं देखी थीं, और एनडीए में शामिल होकर उन्हें खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि एनसीपीआई के सभी सांसद मिलकर काम कर रहे हैं। एनसीपीआई सांसद शताब्दी रॉय ने बैठक की सराहना करते हुए कहा था कि यह बेहद व्यवस्थित तरीके से आयोजित की गई थी। इसमें संसद में आने वाले विधेयकों, देश के विजन और सरकार की विभिन्न योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी गई।
एनसीपीआई सांसद सायनी घोष ने भी बैठक को ज्ञानवर्धक बताया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्री बैठक में मौजूद थे। बैठक में ब्लू इकोनॉमी जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक विषयों पर विस्तार से प्रस्तुति दी गई। 

शिक्षा से विकसित छत्तीसगढ़ तक: मुख्यमंत्री साय ने नीट क्वालीफाई विद्यार्थियों के साथ साझा किया भविष्य का रोडमैप

03-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में प्रयास आवासीय विद्यालयों के नीट-2026 में सफल विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों का मुख्यमंत्री निवास में स्वागत करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि प्रदेश में संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों के गरीब एवं आदिवासी समुदाय के विद्यार्थियों ने नीट जैसी कठिन परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 17 प्रयास आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों का उद्देश्य दूरस्थ, आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की इस सफलता में उनके माता-पिता का आशीर्वाद, गुरुजनों का समर्पण और विद्यार्थियों की कठोर मेहनत समान रूप से शामिल है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों को भी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आप सभी भविष्य के डॉक्टर हैं। समाज में डॉक्टर का स्थान भगवान के बाद माना जाता है। भगवान हमें जन्म देते हैं और डॉक्टर जीवन बचाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, व्यवहारिक और मिलनसार डॉक्टर भी बनें। उन्होंने कहा कि मरीज के साथ अच्छा व्यवहार स्वयं कई बीमारियों के उपचार का माध्यम बन जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज, प्रदेश और देश की सेवा को अपना सर्वोच्च दायित्व मानने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज शिक्षा सहित हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अपनी संघर्षपूर्ण शिक्षा यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि आज विद्यार्थियों को शासन की ओर से पहले की तुलना में कहीं अधिक संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए प्रदेशभर में नालंदा परिसर संचालित किए जा रहे हैं तथा 34 नए नालंदा परिसर निर्माणाधीन हैं, जहां सातों दिन 24 घंटे ऑनलाइन एवं ऑफलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है। वहां विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास एवं भोजन की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि इसी वर्ष ट्रायबल यूथ हॉस्टल के 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज निजी एवं शासकीय संस्थानों को मिलाकर 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। राज्य सरकार पांच नए मेडिकल कॉलेज भी स्थापित कर रही है, जिससे एमबीबीएस की 250 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी।
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए देशव्यापी 'नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान' का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज देशभर में करोड़ों लोगों ने नशा नहीं करने की शपथ ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह अभियान स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जो आगामी दो वर्षों तक संचालित होगा तथा इसमें माय भारत वालंटियर्स सहित बड़ी संख्या में युवा सहभागी बन रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि युवा स्वस्थ, संस्कारित, परिश्रमी और नशामुक्त रहेंगे तो स्वस्थ छत्तीसगढ़ और स्वस्थ भारत का निर्माण संभव होगा। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के शरीर और मस्तिष्क दोनों को प्रभावित करता है, अपराध को बढ़ावा देता है, पारिवारिक संबंधों को कमजोर करता है तथा पूरे परिवार को संकट में डाल देता है। उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने और समाज को भी इसके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
जगदलपुर प्रयास आवासीय विद्यालय की छात्रा नेल्सा के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा के संसाधनों को लगातार बढ़ा रही है। प्रयास आवासीय विद्यालय इसका एक उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिक परिवारों के बच्चे यदि विदेश में अध्ययन करना चाहते हैं तो उनका संपूर्ण व्यय राज्य सरकार वहन करती है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जिला मुख्यालयों एवं प्रमुख शहरों में 34 नालंदा परिसर निर्माणाधीन हैं, जहां सातों दिन 24 घंटे ऑनलाइन एवं ऑफलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि संसाधनों की कमी किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बने।
अंबिकापुर प्रयास विद्यालय की छात्रा यामिनी पैकरा के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नई शिक्षा नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। शासकीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष विकसित करने के लिए स्मार्ट क्लास प्रारंभ की जा रही हैं, विद्यालयों का नवीनीकरण किया जा रहा है तथा शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब शासकीय विद्यालयों में भी निजी विद्यालयों की तरह पेरेंट्स-टीचर मीटिंग आयोजित की जा रही है। विशेष अवसरों पर अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा न्योता भोज जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि बच्चों को मध्यान्ह भोजन के अतिरिक्त पौष्टिक भोजन भी मिल सके। जवाहर उत्कर्ष योजना के माध्यम से बच्चों को निजी विद्यालयों में भी प्रवेश दिलाया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में शासकीय विद्यालय निजी विद्यालयों से भी बेहतर बनेंगे।
जगदलपुर की छात्रा दिलेश्वरी साहू ने युवाओं की राजनीति एवं प्रशासन में भागीदारी को लेकर प्रश्न पूछा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। डॉक्टर बनकर भी समाज और राष्ट्र की बड़ी सेवा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने सपनों के अनुरूप नौकरी, कृषि, राजनीति, जनसेवा अथवा व्यापार जैसे किसी भी क्षेत्र का चयन करना चाहिए, लेकिन अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा और संस्कार हमेशा सर्वोपरि होने चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति सेवा का एक प्रभावी माध्यम है और लोकतंत्र के माध्यम से समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। सेवा और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं।
सरगुजा के छात्र समीर करकेट्टा के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ लगभग चार से पांच दशकों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा। डबल इंजन सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से 31 मार्च 2026 को प्रदेश नक्सलमुक्त हुआ। उन्होंने कहा कि अब बस्तर और सरगुजा में पर्यटन की अपार संभावनाएं विकसित हो रही हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़ और रानीदाह जैसे प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के साथ अबूझमाड़ का विशाल वन क्षेत्र विश्वभर के पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व के 60 देशों के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों में बस्तर के धुड़मारास को स्थान दिया गया है। नई उद्योग नीति 2024-30 में पर्यटन क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है तथा होमस्टे योजना के माध्यम से जनजातीय परिवारों को पांच कमरों के मकान निर्माण के लिए ऋण एवं अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भोरमदेव मंदिर को भारत सरकार की प्रसाद योजना में शामिल किया गया है, जिसके लिए 168 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। साथ ही दंतेश्वरी, बम्लेश्वरी, चंद्रहासिनी, महामाया एवं बागेश्वरी शक्तिपीठों का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है। राम वन गमन पथ के माध्यम से भगवान श्रीराम से जुड़े स्थलों का विकास भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर में पर्यटन उद्योग के माध्यम से लाखों रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
महासमुंद के छात्र हेमंत यादव के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है। यह देश के मध्य में स्थित राज्य है और चारों महानगरों से बेहतर संपर्क रखता है। प्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध है। देश के लगभग 19 से 20 प्रतिशत लौह अयस्क का उत्पादन छत्तीसगढ़ में होता है। यहां कोयला, बॉक्साइट, हीरा, सोना, लिथियम और यूरेनियम जैसे बहुमूल्य खनिज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद सुरक्षा शिविरों को सेवा डेरे के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां स्कूल, अस्पताल और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदेश बिजली उत्पादन में सरप्लस राज्य है। वर्तमान में लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है तथा ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 3.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए हैं, जिनसे भविष्य में अतिरिक्त 30 हजार मेगावाट उत्पादन होगा। इससे रोजगार और राजस्व दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है तथा 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सिंचाई योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। बस्तर संभाग में देउरगांव और मटनार सिंचाई परियोजनाओं पर लगभग 1700 करोड़ रुपये तथा सिकासार-कोड़ार पाइपलाइन परियोजना पर लगभग 2500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को समृद्ध बनाने के लिए पशुपालन, मत्स्य पालन, हर्बल उत्पादन, राइस मिल, कोल्ड स्टोरेज तथा मूल्य संवर्धन आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। नई उद्योग नीति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य बनेगा।
सरगुजा के छात्र कोमल पटेल के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने कॉमनवेल्थ एवं ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय खेलों में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स में छत्तीसगढ़ की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीतकर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया एवं फिट इंडिया जैसे अभियान युवाओं को नई दिशा दे रहे हैं। जशपुर में 67 करोड़ रुपये की लागत से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तथा 60 करोड़ रुपये से आर्चरी अकादमी का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने खेल अलंकरण समारोह प्रारंभ किया है, जिसके तहत उत्कृष्ट खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता, प्रशस्ति पत्र तथा शासकीय सेवा का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की खेल नीति के अनुसार ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 21 लाख रुपये, स्वर्ण पदक विजेता को 3 करोड़ रुपये, रजत पदक विजेता को 2 करोड़ रुपये तथा कांस्य पदक विजेता को 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।  उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तथा उत्कृष्ट खेल मिशन का भी उल्लेख किया।
राजनांदगांव की छात्रा प्राची मलगामे के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने अपने जीवन संघर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि 10 वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। उन्होंने खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का कोई पूर्व निर्धारित लक्ष्य नहीं था, लेकिन जो भी दायित्व मिला, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में आज भी वे प्रदेश की साढ़े तीन करोड़ जनता के विश्वास पर खरा उतरने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कोई भी कार्य छोटा नहीं होता, केवल उसे पूरी ईमानदारी और समर्पण से करना चाहिए।
सरगुजा की शाहिना अंसारी के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वच्छता को जनजीवन का महत्वपूर्ण आधार माना था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से इसे जनआंदोलन का रूप दिया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2014 को लाल किले से दिए गए आह्वान के बाद देश में स्वच्छता के प्रति व्यापक जागरूकता आई है। गांव-गांव में शौचालय बने हैं और लोगों की आदतों में सकारात्मक परिवर्तन आया है। 
दुर्ग के छात्र निखिल कुमार ठाकुर के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। युवाओं में संस्कार, बड़ों के प्रति सम्मान, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्राचीन काल में भारत विश्वगुरु था और नालंदा तथा तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय विश्वभर के विद्यार्थियों को आकर्षित करते थे। लंबे समय तक विदेशी शासन के कारण यह परंपरा प्रभावित हुई, लेकिन आज भारत आर्थिक दृष्टि से विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर, मेक इन इंडिया, स्वदेशी वैक्सीन निर्माण और ब्रह्मोस जैसी उपलब्धियां नए भारत की शक्ति का परिचायक हैं। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को बताया कि हाल ही में प्रारंभ की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्रदेशवासी अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे शासन तक पहुंचा सकते हैं। इस व्यवस्था में लगभग 8 हजार अधिकारियों को शिकायतों के निराकरण के लिए जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी भी अपने हॉस्टल अथवा शिक्षा से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को इस माध्यम से दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रारंभ के डेढ़ माह में ही इस व्यवस्था को अच्छा प्रतिसाद मिला है और बिजली, पानी, नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन जैसी अनेक समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने अंत में बताया कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री डैशबोर्ड भी विकसित कर रही है, जिसके माध्यम से प्रदेश के सभी शासकीय संस्थानों को जोड़ा जाएगा। इस डैशबोर्ड के जरिए मुख्यमंत्री निवास से ही स्कूलों, अस्पतालों, शिक्षकों की उपस्थिति, राशन की उपलब्धता सहित विभिन्न सेवाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। उन्होंने कहा कि सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक आधारित प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक बेहतर सेवाएं पहुंचाना राज्य सरकार का संकल्प है।












 


Feedback/Enquiry



Log In Your Account