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स्वास्थ

कोरोना योद्धा सम्मानित*

23-Dec-2020

बेमेतरा (शोर सन्देश) कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम और कोविड-19 की व्यवस्थाओं में अग्रिम पंक्ति पर रहकर कार्य करने वाले जिला अस्पताल के तीन कोरोना वॉरियर्स को आज सम्मानित किया गया। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस एक्जीक्यूटिव ब्रांच मैनेजर टीआर साहू द्वारा शारीरिक दूरी के नियमों के पालन के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में तीन लोगों को कोरोना योद्धा सम्मान-2020 प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर श्री साहू ने कहा कोरोना वॉरियर्स की कर्तव्य परायणता और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर ही कोरोना महामारी के खिलाफ जंग जीती जा रही है| उन्होंने कहा इस वैश्विक महामारी में अपने प्राण को जोखिम में डालकर चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करने सेवा देने वाले कारोना योद्धाओं का सम्मान किया जा रहा है। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस द्वारा सम्मानित होने वालों में जिला अस्पताल बेमेतरा में सेवा दे रहे ट्रु-नाट लैब प्रभारी डॉ ऊर्चिता पटेल, दंत चिकित्सक डॉविजया रमन और संजय तिवारी आईसीटीसी (एमएलटी) को कोरोना योद्धा सम्मान-2020 दिया गया। इस अवसर पर जिला अस्पताल के डॉक्टर, मेट्रन, अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।
00 ट्रु-नाट लैब से 24 घंटे के भीतर मिले सेम्पल का रिपोर्टकोरोना ट्रु-नाट लैब प्रभारी डॉ ऊर्चिता पटेल बताती हैं वह बीते मार्च से ही हर दिन निरंतर ड्यूटी पर मुस्तैद रही हैं। उन्होंने कहा वैश्विक महामारी के इस दौर में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच चिकित्सक से लैब स्टॉफ तक सभी जी-जान से टीम वर्क में जुटे हुए हैं। ये सभी अपनी जिम्मेवारियों का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। लेकिन, कोरोना की इस लड़ाई में सबसे कठिन कार्य लैब प्रभारी कर रहे हैं। डॉ ऊर्चिता पटेल ने बताया जब कोविड-19 की वजह से लॉक डाउन शुरु हुआ तब जिला अस्पताल के लैब में ट्रु-नाट मशीन नहीं थी| ट्रु-नाट मशीन स्थापना के लिए मेडिकल कॉलेज से ट्रेनिंग लेकर कई तरह की दिक्कतों का सामना करते हुए लैब की शुरु की गई। एंटीजन टेस्ट रिपोर्ट के बाद सेम्पल ट्रु-नाट मशीन से 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट आने से कोविड-19 के पॉजेटिव मरीजों को आइशोलेशन करने में सुविधाएं मिलने लगी। डॉ पटेल ने बताती हैं लैब टेक्नीशियन, डॉक्टर, एमएमटी ने सैंपल जांच में सराहनीय कार्य किया है। अब तक 3,092 से अधिक लोगों के सैंपल जांचेगए जिसमें से 230 का रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव मिला।
00 लैब में सेम्पल कलेक्शन और जांच से लेकर मशीनों की रखरखाव की जिम्मेदारीकोरोना योद्धा संजय तिवारी आईसीटीसी (एमएलटी) एचआईवी एड्स के लैब अतिरिक्त कोरोना महामारी में आपात कालीन सेवाएं प्रदान करने में तत्पर रहें। कोरोना मरीज की पहचान से इलाज तक की प्रक्रिया में लैब टेक्नीशियन का जांच कार्य एवं कोरोना मरीजों के सैंपल लेने का कार्य अत्यधिक जोखिम भरा था क्योंकि सैंपल लेने के दौरान मरीज और लैब टेक्नीशियन के बीच दूरी के बराबर रहती है। संजय तिवारी बताते हैं मेडिकल लैबरेटरी टेक्निशन (Medical laboratory technician) का कार्य डाक्टरों के निर्देश पर करते हैं। कोरोना योद्धा संजय तिवारी बताते हैं कोरोना वायरस के सेम्पल और मशींस के रख-रखाव से लैबरेटरी में नमूनों की जांच और विश्लेषण में काम आने वाला घोल भी लैब टेक्निशन ही बनाते हैं। मेडिकल साइंस के साथ-साथ लैब सुरक्षा नियमों और जरूरतों के बारे में पूरी जानकारी अपडेट रखना पड़ता है। लैब टेक्निशन होने की वजह से कोरोना नमूनों की जांच का काम करते रहे हैं। उन्होंने बताया जांच के दौरान एमएलटी (Medical laboratory technician) कुछ सैंपलों को आगे आरटीपीसीआर की जांच या फिर जरूरत के अनुसार उन्हें सुरक्षित भी रखने का जिम्मेदारी भरा कार्य करना होता है। 


शोध के अनुसार प्लाज्मा थेरेपी के सकारात्मक परिणाम नही है : डाॅ. पुरी*

27-Nov-2020

00 चंडीगढ़ के विशेषज्ञों ने राज्य के डाक्टरों से साझा की कोविड मैनेजमेंट की नवीनतम जानकारी
00 यूनीसेेफ के सहयोग से आयोजित हुआ वेबीनार
रायपुर (शोर सन्देश) चंडीगढ़ पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट एवं यूनीसेफ के संयुक्त तत्वावधान में क्रिटिकल केयर मैनेजमेंट आफ कोविड 19, चैलेंज एंड रिकमेंडेशन पर एक वेबिनार आयोजित किया गया। चंडीगढ़ पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टी्ट्यॅट पीजीआईएमई आर के इंटेंसिव केयर यूनिट एवं एनेस्थेसिया के विभागाध्यक्ष डाॅ जीडी पुरी इसके मुख्य वक्ता थे। वेबीनार में राज्य की राष्टीय स्वास्थ्य मिशन संचालक डाॅ प्रियंका शुक्ला ,यूनीसेफ के हेल्थ विशेषज्ञ डा श्रीधर ने संयोजक, मेकाहारा के विशेषज्ञ डाॅ ओपी सुंदरानी, डाॅ सुभाष मिश्रा, चंडीगढ़ के चिकित्सकों में डा राजराजन गणेशन,डा नोएल जेम्स,डा इन्दरपाल सिंह सहगल, डॉ. अनन्या राय, डॉ. मनोज गोयल, डॉ. जयश्री मुरली धरन ने भाग लिया। वेबीनार में छत्तीसगढ़ के मेडिकल कालेजों के कोविड मरीजों का इलाज करने वाले डाॅक्टर,जिला अस्पतालेां एवं प्राइवेट अस्पतालोे के डाक्टर ने भाग लिया। डाॅ. पुरी ने कोविड मरीजों के इलाज, कोविड मैनेजमेंट एवं उनके इलाज आदि के संबंध में नवीनतम जानकारी साझा की। वेबीनार मे डाॅ. पुरी ने कहा कि कोरोना के संकमण के केस बढ़ रहे हैं। संक्रमण को कम करने की जिम्मेदारी मेडिकल स्टाॅफ के साथ ही समाज की भी है। यह इस सदी का भयावह पैन्डेमिक है। इसकी रोकथाम के लिए समाज को भी आगे आकर कार्य करना चाहिए। चिकित्सकों ने इलाज में उपयोग हो रही दवाइयो हाइडोक्सीक्लोरोक्वीन, आइवरमेक्टिन, रेमंडेसिविर, एंटीवायरल दवाइयों एवं मरीजों के इलाज के संबंध में प्रश्नों का समाधान किया। डाॅ. पुरी ने कहा कि वर्तमान रिसर्च मे यह देखा गया कि प्लाज्मा थेरेपी के सकारात्मक परिणाम सामने नही आए। इसलिए इतने महंगे उपचार की आवश्यकता नही देखाी गई। चंडीगढ़ की टीम ने डाक्टरो की शंकाओं का समाधान किया और भविष्य में भी हर संभव परामर्श का आश्वासन दिया। 


जारी हुई ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक पुरुष की चयन सह प्रतीक्षा सूची*

27-Nov-2020

बेमेतरा (शोर सन्देश) संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें, .. द्वारा विज्ञापित सीधी भर्ती के पद ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक पुरूष (एमपीडब्ल्यू) पद हेतु पात्र/अपात्र सूची में प्राप्त दावा आपत्ति के निराकरण, एवं उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा याचिका में पारित आदेश अनुसार चयन समिति के निर्णय उपरांत संवर्गवार 21 पदों में (अनारक्षित, अनु.जाति, अनु..जाति, अपिव, दिव्यांग) अभ्यार्थियों की चयन सह प्रतीक्षा सूची जिले के वेबसाईट www.bemetara.gov.in में एवं विभागीय वेबसाईट www.cghealth.nic.in में प्रकाशन किया गया है, अतएव दिव्यांग अभ्यार्थीगण उक्त सूची का अवलोकन कर सकते है। 


एम्स के तीसरे मंजिल से कूदकर कोरोना मरीज ने की आत्महत्या*

26-Nov-2020

रायपुर (शोर सन्देश) राज्य में कोरोना के साथ-साथ मौत का मामला भी तेजी से बढ़ रहा हैं। खबर राजधानी रायपुर के एम्स अस्पताल की है, 49 साल के एक कोरोना मरीज ने तीसरे मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी के मुताबित घटना की सूचना मिलने पर आमानाका पुलिस अस्पताल पहुंच जांच में जुटी है। बताया जा रहा है की आत्महत्या करने वाला व्यक्ति का तीसरे मंजिल पर कोरोना वार्ड के सी-ब्लॉक में उसका इलाज चल रहा था। इसी बीच मौका देख वह तीसरे माले से कूद गया, घटना के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया। 


आयुष्मान कार्ड पर राजधानी के अस्पताल में नहीं हुआ रायगढ़ के पत्रकार का इलाज*

20-Nov-2020

00 8 दिन में वसूले गए 80 हजार, अंततः वापस लौटे विवेक श्रीवास्तव
रायगढ़ (शोर सन्देश) पेट की आंतों में अल्सर, किडनी के दर्द से पीड़ित रायगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार विवेक श्रीवास्तव इलाज के लिए राजधानी रायपुर के अस्पताल में 8 दिन तक भर्ती रहने के बाद आधे अधूरे इलाज से तंग आकर वापस अपने शहर रायगढ़ लौटने को मजबूर हो गए। रायपुर के अस्पताल में उनसे 8 दिन में बतौर फीस 80 हजार रुपये वसूल लिए गए, जबकि उनके पास आयुष्मान कार्ड (डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य कार्ड) भी था। लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें उस कार्ड के एवज में किसी तरह का लाभ देने से साफ इनकार कर दिया। जबकि सरकार की ओर से आयुष्मान कार्ड पर 5 लाख रुपये तक प्रदेश के किसी भी अस्पताल में निशुल्क इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई है। बहरहाल राजधानी रायपुर के अस्पताल से पत्रकार विवेक श्रीवास्तव रायगढ़ वापस होने के लिए रवाना हो चुके थे। दीवाली से कुछ दिन पहले जब रायगढ़ में उन्हें पेट में असहनीय दर्द हुई तो वे इलाज के लिए रायगढ़ के ही मेट्रो बालाजी अस्पताल में गए थे। लेकिन वहां भी उन्हें आयुष्मान कार्ड का लाभ देने से इनकार कर दिया गया था। इसी तरह रायपुर के बालाजी अस्पताल में उन्हें सरकार की योजनाओं का कोई लाभ देने से इनकार कर दिया गया। तब वे राजधानी के ही गुढ़ियारी रोड स्थित सुयश हॉस्पिटल में 8 दिन पहले भर्ती हुए थे। वहां उन्हें अल्सर के अलावे हार्निया की भी तकलीफ की बात बताई गई। सुयश हॉस्पिटल में भी उन्हें आयुष्मान कार्ड या छत्तीसगढ़ सरकार की किसी भी योजना का लाभ देने से साफ इनकार कर दिया गया और इलाज के नाम पर उनसे 8 दिन के दरम्यान 80 हजार रुपये वसूल लिए गए और 5 दिन और रूकने की बात वहां के डॉक्टरों ने कही। 5 दिन और का मतलब सीधे-सीधे और 50 हजार रुपये पत्रकार विवेक श्रीवास्तव के लिए इतनी बड़ी राशि का इंतजाम करना असंभव जैसी बात थी इसलिए वे आधे-अधूरे इलाज के बाद ही अस्पताल से खुद ही छुट्टी लेकर वापस रायगढ़ के लिए रवाना हुए। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक वे रायगढ़ नहीं पहुंचे थे।
यहां यह बताना होगा कि अभी कल ही नेशनल प्रेस डे के अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उनकी सरकार द्वारा पत्रकारों के हित में बनाई गई कई योजनाओं का लंबा-चौड़ा बखान किया था। जिसमें पत्रकारों को इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई थी लेकिन नेशनल प्रेस डे के दूसरे ही दिन एक बीमार पत्रकार ने इलाज के दौरान अपनी आपबीती बताकर भूपेश सरकार के ढपोरशंखीय योजनाओं की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि जब यह एक पत्रकार के साथ अस्पतालों में ऐसा सुलूक किया जा रहा है तो आमजन के साथ कैसा सुलूक किया जाता होता इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकार के आयुष्मान योजना में राज्य के निवासियों को 5 लाख रुपये तक निशुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराने की सुविधा की घोषणा तो बड़े जोर-शोर से की गई थी लेकिन असलियत कुछ और ही है। सरकारी योजनाओं के लाभ से जब पत्रकारों को वंचित किया जा सकता है तो आमजन उन योजनाओं का लाभ किस हद तक ले पाते होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। वरिष्ठ पत्रकार विवेक श्रीवास्तव ने रायपुर के सुयश अस्पताल से लौटते हुए सोशल मीडिया में पोस्ट किया है कि अगर सरकारी योजनाएं कागजी हैं तो सरकार नाटक-नौटंकी करना छोड़ क्यों नहीं देती। 


शिशुओं के लिए आवश्यक है 6 माह तक का स्तनपान डॉ राजेश ध्रुव*

19-Nov-2020

00 राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह
दंतेवाड़ा (शोर सन्देश) शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और उनके स्वास्थ्य की देखभाल के प्रति जागरूकता के लिए जिला अस्पताल दंतेवाड़ा में 15 से 21 नवम्बर तक राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान प्रसूताओं को यह सलाह दी जा रही है कि नवजात शिशुओं को छह माह तक केवल स्तनपान करवाया जाए साथ ही नवजात के बीमारी की पहचान और उसके बेहतर देखभाल के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राजेश ध्रुव ने बताया, राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह के कार्यक्रम के अंतर्गत जन समुदाय को बताया जा रहा कि प्रसव चिकित्सालय में ही कराएं। प्रसव के बाद 48 घंटे तक माँ एवं शिशु की उचित देखभाल के लिए चिकित्सालय में रुकें। जन्म के एक घंटे के भीतर माँ का गाढ़ा पीला दूध पिलाना जरूरी है और छह माह तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान कराया जाए। जन्म के बाद नवजात का सम्पूर्ण टीकाकरण उसके सेहत के लिये बहुत जरूरी है इसे नियमित रूप से पालन करना चाहिये नवजात की नाभि सूखी एवं साफ़ रखें, संक्रमण से बचाएं और माँ शिशु की व्यक्तिगत स्वच्छता का ख्याल रखें। कम वजन और समय से पहले जन्में बच्चों पर विशेष ध्यान की जरूरत होती है शिशु का तापमान स्थिर रखने के लिए कंगारू मदर केयर की विधि उपयुक्त होती है शिशु को स्तनपान कराते रहें क्योंकि कुपोषण और संक्रमण से बचाव के लिए केवल माँ का दूध सर्वोत्तम होता है।  00 नवजात शिशु के देखभाल के लिये निम्न बातों का ध्यान रखना है जरूरी
-नियमित स्तनपान- शिशु को समय पर स्तनपान करवाना बहुत जरूरी है। एक नवजात शिशु को हर 2 से 3 घंटे में स्तनपान करवाया जाना चाहिए, अर्थात 24 घंटों में उसे 8-12 बार स्तनपान कराने की आवश्यकता होती है। शिशु को जन्म के बाद पहले 6 महीनों तक केवल माँ का दूध ही पिलाना चाहिए। माँ के दूध में महत्वपूर्ण पोषक तत्व और एंटीबॉडी होते हैं जो बच्चे के स्वस्थ रहने और विकास के लिए आवश्यक होते हैं। शिशु को कम से कम 10 मिनट के लिए स्तनपान कराएं।  -डायपर बदलना- प्रसव के बाद नवजात शिशु की देखभाल करते समय बारबार डायपर बदलना एक महत्वपूर्ण पहलू है। शिशु को पर्याप्त मात्रा में दूध मिलने पर वह नियमित रूप से मल त्याग करेगा, जैसे ही उसका डायपर भरा हुआ महसूस हो, उसे बदलना जरूरी है
-पर्याप्त निद्रा- नवजात शिशु को शुरुआत के महीनों में प्रतिदिन लगभग 16 घंटे नींद की आवश्यकता होती है। जैसे जैसे उम्र बढ़ती है तो नींद की अवधि कम होती जाती है.  -शिशु को संभालना- शिशु के साथ खेलते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। शिशु को जोर से हिलाएं हवा में उछाले नहीं क्योंकि उसके आंतरिक अंग नाजुक होते हैं और तेज झटकों से उसे नुकसान हो सकता है। संक्रमण से बचाव के लिए बच्चे को पकड़ने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हाथ साफ सुथरे धुले हुए हों। 


दुनिया में होने वाली मौतों का दूसरा प्रमुख कारण है स्ट्रोक*

28-Oct-2020

00 29 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व स्ट्रोक दिवस पर विशेष
रायपुर (शोर सन्देश) विश्व स्ट्रोक दिवस या विश्व आघात दिवस हर वर्ष 29 अक्टूबर को मनाया जाता है। स्ट्रोक ब्रेन अटैक के नाम से भी जाना जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को स्ट्रोक से होने वाले खतरों के प्रति आगाह करने के साथ साथ उनको इससे बचाव के उपाय भी सुझाना है विश्व स्ट्रोक संगठन के अनुसार स्ट्रोक का खतरा हर चार व्यक्तियों में से एक को होता है। इसलिए इस बार की थीमवह एक बनेंरखी गयी है। इस बारे में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मीरा बघेल ने बताया आजकल लोग काफी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं क्योंकि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण किसी की नौकरी छूट गयी है तो किसी का व्यापार बंद हो गया है। ऐसे में उनको स्ट्रोक होने का जोखिम और अधिक है। इसलिए स्ट्रोक के प्रति अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
विश्व स्ट्रोक संगठन के अनुसार पूरी दुनिया में हर वर्ष लगभग 1.70 करोड़ लोग स्ट्रोक्स की समस्या का सामना करते हैं, जिसमें से 60 लाख लोग तो मर जाते हैं जबकि 50 लाख लोग स्थायी रूप से विकलांग हो जाते हैं। दुनिया में होने वाली मौतों में स्ट्रोक दूसरा प्रमुख कारण है, जबकि विकलांगता होने का यह तीसरा प्रमुख कारण है। इतना गंभीर होने के बाबजूद भी कम से कम आधे से अधिक स्ट्रोक्स को लोगों में पर्याप्त जागरूकता पैदा कर रोका जा सकता है किसी भी समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर में आप नियमित जाँच करवा सकते हैं।
00 क्या है स्ट्रोक?
जब रक्त वाहिका नलिकायें किसी रुकावट या रिसाव के कारणमस्तिष्क कोरक्त की आपूर्ति नहीं कर पाती हैं तो ऐसी स्थिति को स्ट्रोक कहते है इसको ब्रेन अटैक के नाम से भी जाना जाता है
00 स्ट्रोक्स के लक्षणों को FAST रणनीति के माध्यम से आसानी से पहचाना जा सकता है
F – फेस : किसी व्यक्ति के मुस्कुराने पर उसका चेहरा एक तरफ लटक रहा है तो उसे स्ट्रोक का खतरा हो सकता है
A – आर्म : किसी व्यक्ति द्वारा दोनों हाथों को उठाने पर एक हाथ का उठ पाना या गिर जाना
S – स्पीच : यदि किसी व्यक्ति द्वारा साधारण शब्द बोलने पर उसकी आवाज में लडख़ड़ाहट होना
T –टाइम टू एक्शन :यदि आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण है तो एम्बुलेंस के लिए आपातकालीन नंबर पर कॉल करें
00 कैसे बचा जा सकता है स्ट्रोक से ?
उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करके- स्ट्रोक्स केलगभग आधे से ज़्यादा मामले उच्च रक्तचाप से जुड़ें होते हैं। इसलिए स्वस्थ जीवन शैली अपनाकरउच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है।
सप्ताह में पांच बार व्यायाम करने से- स्ट्रोक्सके एक तिहाई से अधिक मामले उन लोगों में होते हैं, जो कि नियमित रूप से व्यायाम नहीं करते हैं।इसलिए सप्ताह में पांच बार 20 से 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए
स्वस्थ और संतुलित आहार खाना से- लगभग एक चौथाई स्ट्रोक्स के मामलेअसंतुलित आहार विशेषकर फलों एवं सब्जियों के कम सेवन करने से जुड़े होते हैं। इसलिए खाने में फल एवं सब्जियों को भी संतुलित मात्रा में सेवन करना चाहिए साथ ही स्ट्रोक्स का ज़ोखिम कम करने के लिए नमक का सेवन कम करना चाहिए।
संतुलित वज़न बनाए रखना- लगभग 5 में से 1 स्ट्रोक मोटापे से जुड़ा होता है। इसलिए व्यायाम एवं उचित खानपान के माध्यम से वज़न को नियंत्रित रखना चाहिए।
कोलेस्ट्रॉल कम करना- चार में से एक से ज़्यादा स्ट्रोक के मामले उच्च कोलेस्ट्रॉल से जुड़े होते हैं। इसलिए कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के बारे में अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।
धूम्रपान से दूरी बनाकर- धूम्रपान रोकने से स्ट्रोक का ज़ोखिम कम होता है। इसलिए धूम्रपान से दूरी बनाकर रखना चाहिए
अल्कोहल से दूरी बनाकर- प्रतिवर्ष एक मिलियन से अधिक स्ट्रोक अत्यधिक अल्कोहल के सेवन से जुड़ें है। इसलिए अल्कोहल का सेवन कम करने से स्ट्रोक के ज़ोखिम को कम करने में मदद मिलती है।  मधुमेह को नियंत्रित करके- मधुमेह को नियंत्रित करके स्ट्रोक्स का जोखिम कम किया जा सकता है क्योंकि मधुमेह से स्ट्रोक का ज़ोखिम बढ़ जाता है। यदि आप मधुमेह से पीड़ित है, तो मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए उपचार और जीवन शैली बदलाव के बारे में अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। 


कोरोना संक्रमित अपनी रिपोर्ट की जानकारी वेब पोर्टल पर देख सकेंगे*

27-Sep-2020

रायपुर (शोर सन्देश) कोरोना संक्रमित मरीजों को टेस्ट कराने के बाद अब अपनी रिपोर्ट की जानकारी एक क्लिक पर प्राप्त कर सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल सीजीहेल्थ.एनआईसी.इन पोर्टल पर जाकर प्रदेश का कोई भी व्यक्ति जिसने इस माह की 5 तारीख के बाद कोरोना टेस्ट कराया हो वह अपनी रिपोर्ट देख सकता है और उसका प्रिंट भी ले सकता है। सीजीहेल्थ.एनआईसी.इन पोर्टल को खोलकर उसके दांए तरफ उपर की ओर चेक योर कोविड टेस्ट रिजल्ट लिखा आएगा। उसमें क्लिक करने पर उस व्यक्ति का मोबाइल नंबर पूछा जाएगा। जो जानकारी कोरोना जांच कराते समय दिया हो। मोबाइल नंबर डालने के बाद उस नंबर पर टी पी आएगा। जिसे पोर्टल में डालने पर आपकी कोविड रिपोर्ट दिखेगी। व्यू योर रिपोर्ट में क्लिक करने पर पूरी रिपोर्ट जाएगी जिसे सेव कर के प्रिंट लिया जा सकता है।


2 साल की बच्ची की मौत, शव ले जाने अस्पताल ने नही दी एम्बुलेंस*

27-Sep-2020

00 पॉलीथिन में लपेटकर पिता ने बाइक से घर लाया बच्ची का शव
जांजगीर-चांपा (शोर सन्देश) लॉकडाउन के बीच अस्पताल प्रबंधन की शर्मनाक हरकत सामने आई है। जांजगीर में दो साल की बच्ची को सांप ने काट लिया था। परिजन उसे जिला अस्पताल ले गए, लेकिन बच्ची की मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने शव परिजनों को सौंप दिया, लेकिन ले जाने के एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई। इसके बाद परिजन पॉलीथिन में लपेटकर बाइक से शव ले गए। जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय से थोड़ी दूर स्थित ग्राम बनारी के सबरिया डेरा निवासी शीतल गोंड़ (2 साल) पिता गोपाल प्रसाद गोंड़ शुक्रवार को खेल रही थी। इसी दौरान सांप ने उसे काट लिया। परिजनों को पता चला तो पहले उसकी झाड़-फूंक करते रहे, लेकिन जब तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां इलाज शुरू होने से पहले ही शरीर में जहर फैलने से बच्ची की मौत हो गई।
लॉकडाउन के कारण प्राइवेट वाहन भी नहीं मिल सका अस्पताल प्रशासन ने बच्ची का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। परिजन काफी देर तक शव ले जाने के लिए वाहन तलाश करते रहे, लेकिन लॉकडाउन के चलते उन्हें नहीं मिला। गोपाल ने बताया कि उन्होंने अस्पताल से भी वाहन मांगा, पर नहीं दिया गया। इसके बाद शव को परिजनों ने पॉलीथिन में लपेटा और बाइक पर ही घर ले गए। 


अस्तित्व में आया राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, सुरेश चन्द्र अध्यक्ष नियुक्त*

25-Sep-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) देश में चिकित्सा शिक्षा और व्यवसाय के शीर्ष नियामक के तौर पर, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग 25 सितम्बर 2020 से अस्तित्व में गया है। यह भारतीय चिकित्सा परिषद का स्थान लेगा। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बनने से 26 सितम्बर 2018 को भारतीय चिकित्सा परिषद को अतिक्रमित करने वाले संचालक बोर्ड को भंग कर दिया गया है और लगभग 64 वर्ष पुराने भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम को समाप्त कर दिया गया है। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के ईएनटी विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. सुरेश चन्द्र शर्मा को तीन वर्ष के लिए आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में बडे सुधारों के प्रावधान वाले राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम को राष्ट्रपति ने पिछले वर्ष आठ अगस्त को मंजूरी दी थी। इस आयोग में एक अध्यक्ष, दस पदेन सदस्य और 22 अंशकालिक सदस्य हैं। 




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