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भिलाई इस्पात संयंत्र ने मरीजों के प्रयोग के लिए वेंटिलेटर का किया निर्माण

03-May-2020

 भिलाई(chhatishgarh), आजकल हम सब सबसे अधिक वेंटिलेटर्स की चर्चा सुन रहे हैं, जिसके बारे में पहले बहुत कम जानकारी रही है वर्तमान परिदृश्य में इसकी बेहद जरूरत महसूस की जा रही है चूँकि कोरोना वायरस के चपेट में आने वाले मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होती है और जब मरीज खुद सांस नहीं ले पाते हैं तब वेंटिलेटर्स ऐसे मरीजों की जिंदगी बचाती हैं भिलाई इस्पात संयंत्र ने देश प्रदेश में बड़े पैमाने पर वेंटिलेटर्स की उपलब्धता की आवश्यकता को महसूस करते हुए आतंरिक संसाधनों से वेंटिलेटर का निर्माण किया है। केंद्रीय अनुरक्षण विभाग के सीआरएमईए ईआरएसए ईटीएलए इंस्ट्रूमेंटेशन तथा इनकास विभागों दवारा संयुक्त रूप से निर्मित इस वेंटिलेटर का उद्घाटन आज सेल के डायरेक्टर ;प्रोजेक्ट एवं व्यापार योजनाद्ध एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनिर्बान दासगुप्ता ने उद्घाटन किया।

वेंटिलेटर क्या है-
आखिर ये वेंटिलेटर है क्याघ् और कोरोना वायरस संक्रमित लोगों के लिए यह कितना और क्यों जरूरी है, आखिर क्यों देश विदेश की बड़ी कंपनियां भी वेंटिलेटर बनाने में जुट गई हैं, बहुत सरल भाषा में कहें तो यह एक मशीन है जो ऐसे मरीजों की जिंदगी बचाती है जिन्हें सांस लेने में तकलीफ है या खुद सांस नहीं ले पा रहे हैं। यदि बीमारी की वजह से फेफड़े अपना काम नहीं कर पाते हैं तो वेंटिलेटर सांस लेने की प्रक्रिया को संभालते हैं। इस बीच डॉक्टर इलाज के जरिए फेफड़ों को दोबारा काम करने लायक बनाते हैं। इसलिए वेंटिलेटर का चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष महत्व है।सामान्यत: वेंटिलेटर का उपयोग आईसीयू में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए किया जाता है।भिलाई इस्पात संयंत्र ने देश प्रदेश में बड़े पैमाने पर वेंटिलेटर्स की आवश्यकता को महसूस किया है।
आतंरिक संसाधनों से निर्मित
इस समय देश प्रदेश आपदा की स्थिति में हैंए इस मुश्किल की घडी में भिलाई इस्पात संयंत्र पूरी तरह से देश प्रदेश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं। इस आपदा की घड़ी में इस्पात की अग्रणी ईकाई भिलाई इस्पात संयंत्र हमेशा की ही तरह अपने मजबूत बुलंद इरादों के साथ देश सेवा के लिए अपने अनुभवों को उत्पाद के रूप में परिणित कार्यान्वित करने को अग्रसर एवं संकल्पित है। इसी सोच के तहत वेंटिलेटर के महत्व को देखते हुए भिलाई इस्पात संयंत्र के केंद्रीय अनुरक्षण विभाग ने चुनौती को अवसर में बदला है।मुख्य महाप्रबंधक विद्युत के मार्गदर्शन में आंतरिक संसाधनों का उपयोग करते हुए वेंटिलेटर का निर्माण किया है। प्रायोगिक तौर पर बनाए गए वेंटिलेटर के निर्माण में संयंत्र में उपयोग में आने वाली विभिन्न मशीनों में प्रयुक्त कलपुर्जों को निकाल कर उपयोग किया गया है।
इसका संचालन होगा आसान
सुरक्षा के मद्देनजर इस मशीन में कई उपाय किए गए हैं। मरीज की अवस्था को देखते हुए एंबू बैग की रफ्तार को पीएलसी की सहायता से आसानी से कम या ज्यादा किया जा सकता हैए जिससे उचित मात्रा में हवा मरीज को प्राप्त हो सके। आकार में छोटा होने के कारण इसका संचालन आसान है। विदित हो कि इस प्रायोगिक वेंटिलेटर का उपयोग किसी वास्तविक मरीज पर नहीं किया गया है वर्तमान मे इसका केवल संयंत्र स्तर पर तकनीकी ट्रायल लिया गया है। इस वेंटीलेटर के निर्माण के अलावा टीम ने एक अन्य प्रकार का वेंटीलेटर का निर्माण भी पूर्णत: आतंरिक संसाधनों से किया है जिसका प्रयोग अति गंभीर मरीजों के लिए किया जा सकेगा। इसके अलावा अस्पताल में प्रयोग होने वाले एक पुराने खराब पड़े वेंटीलेटर को भी टीम ने सुधार कर तैयार किया है।
वेंटीलेटर निर्माण के सृजनशील सदस्य हैं
इस वेंटिलेटर का निर्माण विद्युत संगठन के सीजीएम एवं विभाग प्रमुख पी के सरकार के मार्गदर्शन में पूरा हुआ। इस उपकरण को बनाने में मुख्य रूप से सीआरएमई से मानस रंजन रथ, ईटीएल से दीपक जैन, उमाशंकर बड़वाल, अरूप राय, ईआरएस विभाग से कुंतल बघेल, रेमी थॉमा, इंस्ट्रूमेंटेशन विभाग से जीके कुंडू, सी एस सोनी, डीएनडी से तुषार सिंह, मार्स विभाग से हरीश सचदेव, इनकास से गीतांजलि वर्मा, एसएमएस 2 से बालम सिंह, मेंटेनेंस सेक्टर . 9 से मोहिंदर, एके वर्मा आदि लोगों का सक्रिय भूमिका रही है। वेंटिलेटर की जांच एवं गुणवत्ता परखने के लिए जवाहरलाल नेहरू मुख्य चिकित्सालय का भी सहयोग प्राप्त हुआ है।



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