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दिवाली से पहले एलपीजी गैस सिलेंडर के दामों में भारी कटौती, सिर्फ 499 रुपए में पहुंचेगा घर!

17-Oct-2024
नई दिल्ली (शोर संदेश)। त्योहारी सीजन चल रहा है, ऐसे में घरों में सबसे ज्यादा यदि किसी चीज की जरूरत होती है तो वो है एलपीजी गैस. क्योंकि त्योहारी सीजन में हर घर में कुछ न कुछ पकवान व व्यंजन रोज बनाए जाते हैं. पेट्रोलियम कंपनी ने मौके को भांपते हुए एलपीजी गैस सिलेंडर के रेटों में बड़ी कटौती कर दी है. जी हां कंपोजिट गैस सिलेंडर अब आपको सिर्फ 499 रुपए में ही मिल जाएगा. हालांकि आपको बता दें कि 14 किग्रा वाले सिलेंडर के दाम अभी जस के तस ही बने हैं. आपको बता दें कि अप कंपोजिट गैस सिलेंडर को कई शहरों में अनुमति मिल चुकी है..
कई हैं विशेषताएं
आपको बता दें कि यह गैस सिलेंडर आम गैस सिलेंडर से पूरे 300 रुपए तक सस्ता मिल रहा है. यही नहीं इस गैस सिलेंडर की कई खासियत भी हैं. यह उठाने में हल्का होता है. साथ ही छोटे परिवारों के लिए  यह वरदान साबित हो रहा है. इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए दो लोगों की जरूरत नहीं होती. बल्कि घर की महिलाएं भी इसी आराम से उठा सकती हैं. यही नहीं यह पारदर्शी होता है. यानि गैस खत्म होने पर आपको आराम से पता चल जाएगा ताकि आप गैस सिलेंडर भरवा लें
कम खर्च वालों के लिए बेहतर विकल्प
लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम कंपनीज ने कंपोजिट गैस सिलेंडर को विकल्प को तौर पर पेश किया है. जिसकी कीमत आम घरेलू सिलेंडर से पूरे 300 रुपए कम है. जी  हां इंडेन कंपनी का कंपोजिट सिलेंडर उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 499 रुपए में मिल रहा है.  आपको बता दें कि ये नया प्रकार का सिलेंडर है जिसे कंपोजिट सिलिंडर का नाम दिया गया है. फिलहाल इंडेन यानी इंडियन ऑयल ये सिलेंडर उपलब्ध करा रही है. जानकारी के मुताबिक इस सिलेंडर में 10 किग्रा ही एलपीजी गैस आती है.. साथ ही इस सिलेंडर की खासियत यह है कि ये पारदर्शी होते हैं. साथ ही ये उठाने में भी हल्का होता है.
अभी बदलाव की कोई उम्मीद नहीं
आपको बता दें कि कॅामर्शियल सिलेंडर के दाम तो हर माह कुछ न कुछ रिवाइज होते हैं. लेकिन घरेलू सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं किया जाता है. इसलिए लोगों प्रतिमाह धर्य के सिवा कुछ नहीं मिलता. 14.2 किलो के घरेलू गैस सिलिंडरों के दामों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, वहीं आपको बता दें कि कंपोजिट गैस सिलेंडर अभी पूरी तरह से मार्केट में नहीं आया है. कुछ स्थानों पर ही यह मिल रहा है. बताया जा रहा है कि जिन घरों में गैस की कम खपत है ये सिलेंडर उनके लिए बहुत खास हो सकता है.

सिटीजनशिप एक्ट की धारा 6ए की वैधता बरकरार, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

17-Oct-2024
नई दिल्ली (शोर संदेश) । सुप्रीम कोर्ट ने सिटीजनशिप एक्ट की धारा 6A की वैधता पर अपना फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने धारा 6A की वैधता को बरकरार रखा है. CJI डीवाई चंद्रचूड़ का कहना था कि 6ए उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आते हैं और ठोस प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आते हैं. 
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान, पता लगाने और निर्वासन के लिए असम में तत्कालीन सर्बानंद सोनोवाल सरकार में एनआरसी को लेकर दिए गए निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट अब से इस पहचान और निर्वासन प्रक्रिया की निगरानी करेगा.
दरअसल, सिटीजनशिप एक्ट की धारा 6A को 1985 में असम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए संशोधन के बाद जोड़ा गया था. असम समझौते के तहत भारत आने वाले लोगों की नागरिकता के लिए एक विशेष प्रावधान के रूप में नागरिकता अधिनियम में धारा 6ए जोड़ी गई थी. इस धारा में कहा गया है कि जो लोग 1985 में बांग्लादेश समेत क्षेत्रों से 1 जनवरी 1966 या उसके बाद लेकिन 25 मार्च 1971 से पहले असम आए हैं और तब से वहां रह रहे हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए धारा 18 के तहत अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इस प्रावधान ने असम में बांग्लादेशी प्रवासियों को नागरिकता देने की अंतिम तारीख 25 मार्च 1971 तय कर दी.
इससे पहले दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे दायर किया था और कहा था कि वो भारत में अवैध प्रवास की सीमा के बारे में सटीक डेटा नहीं दे पाएगा क्योंकि प्रवासी चोरी-छिपे आए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा...
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा, 6ए उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो जुलाई 1949 के बाद प्रवासित हुए, लेकिन नागरिकता के लिए आवेदन नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, एस6ए उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो 1 जनवरी 1966 से पहले प्रवासित हुए थे. इस प्रकार यह उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो अनुच्छेद 6 और 7 के अंतर्गत नहीं आते हैं. 
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6ए की वैधता बरकरार रखी और 4:1 के बहुमत से फैसला दिया. जस्टिस जे पारदीवाला ने असहमति जताई. जस्टिस पारदीवाला का कहना था कि यह संभावित प्रभाव से असंवैधानिक है.
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत, एमएम सुंदरेश और मनोज मिश्रा बहुमत में रुख रहा. नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6ए को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने सुनवाई की और फैसला सुनाया.
कोर्ट का कहना था कि असम में 40 लाख प्रवासी हैं और पश्चिम बंगाल में 56 लाख प्रवासी हैं. लेकिन इसका प्रभाव असम में ज्यादा है. इसलिए असम को अलग करना वैध है. 1971 की कटऑफ तिथि तर्कसंगत विचार पर आधारित है. ऑपरेशन सर्चलाइट के बाद पूर्वी पाकिस्तान से पलायन बढ़ा है.
कोर्ट ने कहा, 6ए (3) का उद्देश्य दीर्घकालिक समाधान प्रदान करना है. असम समझौता वहां के निवासियों के अधिकारों को कमजोर करना था. बांग्लादेश और असम समझौते के बाद प्रावधान का उद्देश्य भारतीय नीति के संदर्भ में समझा जाना चाहिए. इसे हटाने से वास्तविक कारणों की अनदेखी होगी. भारत में नागरिकता प्रदान करने के लिए पंजीकरण व्यवस्था जरूरी नहीं है. एस 6ए को सिर्फ इसलिए अमान्य नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह पंजीकरण व्यवस्था का अनुपालन नहीं करता है. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि संसद बाद की नागरिकता के लिए शर्तें निर्धारित करने के लिए अलग-अलग शर्तें निर्धारित करने में सक्षम है.
याचिका में क्या तर्क था...
याचिकाकर्ता का तर्क है कि 6ए असंवैधानिक है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 6 और 7 की तुलना में नागरिकता के लिए अलग-अलग तारीखें निर्धारित करता है. अलग-अलग तारीख निर्धारित करने की संसद की क्षमता संविधान में है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, प्रत्येक नागरिक को अनिवार्य रूप से भारत के कानून और संविधान का पालन करना होगा. नागरिकता प्रदान करने से पहले निष्ठा की शपथ का स्पष्ट अभाव कानून का उल्लंघन नहीं है. कोर्ट ने कहा, हम हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं. S6A स्थायी रूप से संचालित नहीं होता है. 1971 के बाद प्रवेश करने वालों को नागरिकता प्रदान नहीं करता है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 1 जनवरी 1966 और 24 मार्च 1971 के बीच आए प्रवासियों के लिए नागरिकता नियम कानून के साथ सामंजस्यपूर्ण भूमिका के लिए बनाए गए थे. एएस6ए उन लोगों के निर्वासन की अनुमति देता है जो कट ऑफ तिथि के बाद अवैध रूप से प्रवेश करते हैं. यह नहीं कह सकते कि आप्रवासन ने असम के नागरिकों के वोट देने के अधिकार को प्रभावित किया है. याचिकाकर्ता किसी भी अधिकार का उल्लंघन साबित करने में विफल रहे हैं.
कोर्ट ने कहा, एस6ए को यह कहने के लिए प्रतिबंधात्मक तरीके से समझने की जरूरत नहीं है कि किसी भी व्यक्ति का पता लगाया जा सकता है और सिर्फ विदेशी अधिनियम के तहत निर्वासित किया जा सकता है. हमें कोई कारण नहीं दिखता कि विदेशियों का पता लगाने के उद्देश्य से आईएए के तहत वैधानिक पहचान का उपयोग 6ए के साथ संयोजन में क्यों नहीं किया जा सकता है. आईईएए और 6ए के बीच कोई विरोध नहीं है.आईईएए और धारा 6ए को सामंजस्य में पढ़ा जा सकता है.

 


बिहार के छपरा और सिवान में जहरीली शराब से 28 की मौत

17-Oct-2024

 

नई दिल्ली ( शोर संदेश ) । बिहार में जहरीली शराब पीने की वजह से 28 लोगों की मौत की खबर आ रही है. मिल रही जानकारी के अनुसार ये मौतें सिवान और छपरा में हुई हैं. पुलिस के अनुसार सिवान में जहरीली शराब से 20 लोगों की जबकि छपरा में 8 लोगों की मौत हिुई है. जहरीली शराब पीने की वजह से कई लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है. इन लोगों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है. कहा जा रहा है कि जहरीली शराब की वजह से मौत का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है.  
जहरीली शराब पीने से मरने वालों का आंकड़ा अभी और बढ़ने की आशंका है. डॉक्टरों के अनुसार जहरीली शराब पीने की वजह से जिन लोगों को अस्पताल में इलाज चल रहा है उनकी हालत बेहद खराब है. उधर, जहरीली शराब से मौत की खबर के बीच राज्य सरकार के मंत्री रत्नेश सादा का अजीबोगरीब बयान सामने आया है. जहरीली शराब पीने से इतनी मौत के बाद भी मंत्री यह नहीं मान रहे हैं कि यह प्रशासनिक विफलता का मामला है. उनका मानना है कि यह कोई प्रशासनिक विफलता नहीं है. अब ऐसे में सवाल ये है कि इतने लोगों की मौत का आखिर जिम्मेदार कौन है? 
हालांकि,मंत्री ने एक बड़ी घोषणा की है कि इस पूरे मामले में अब सभी शराब माफियाओं पर सीसीए लगाया जाएगा.इसको लेकर कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा और सीसीए का प्रस्ताव को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बातचीत की जाएगी और प्रशासनिक तैयारी के बाद शराब माफिया पर सीसीए जाने का निर्णय ले लिया गया है.
पटना मेडिकल कॉलेज में भी पांच की हुई है मौत
छपरा और सिवान से कई गंभीर मरीजों को पटना के मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया था. पटना मेडिकल कॉलेज के एमएस का कहना है कि हमारे पास जितने लोगों को रेफर किया गया था, उनमें से पांच लोगों की मौत हो चुकी है. पांच लोगों में चार की मौत तो अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो गई थी. सत्ता संरक्षण में ज़हरीली शराब के कारण 27 लोगों की हत्या कर दी गई है. दर्जनों की आंखों की रोशनी चली गई. बिहार में कथित शराबबंदी है लेकिन सत्ताधारी नेताओं-पुलिस और माफिया के गठजोड़ के कारण हर चौक-चौराहों पर शराब उपलब्ध है.इतने लोग मारे गए लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक-संवेदना तक व्यक्त नहीं की. जहरीली शराब से,अपराध से प्रतिदिन सैकड़ों लोग मारे जाते हैं लेकिन अनैतिक और सिद्धांतहीन राजनीति के पुरोधा मुख्यमंत्री और उनकी किचन कैबिनेट के लिए यह सामान्य सी बात है.कितने भी लोग मारे जाएं लेकिन मजाल है किसी वरिष्ठ अधिकारी पर कोई कारवाई हो? इसके विपरीत उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा? अगर शराबबंदी के बावजूद हर चौक-चौराहे व नुक्कड़ पर शराब उपलब्ध है. तो क्या यह गृह विभाग और मुख्यमंत्री की विफलता नहीं है? क्या मुख्यमंत्री जी होशमंद है? क्या सीएम ऐसी घटनाओं पर एक्शन लेने व सोचने में सक्षम और समर्थ है? इन हत्याओं का दोषी कौन?
बिहार सरकार का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा
जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर बिहार सरकार किस कदर संवेदनशील है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इस घटना के बाद ना तो कोई आला अधिकारी मौके पर पहुंचा है और न ही बिहार सरकार को कई मंत्री ने इन गांवों का दौरा किया है. बिहार में जहरीली शराब का यह कोई पहला मामला नहीं है. पहले भी इस तरह की घटनाएं हुई है. लेकिन हैरान करने की बात ये है कि राज्य सरकार ने कभी जहरीली शराब बनाने के पीछे जो बड़े प्लेयर हैं उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया जाता है. 
पिछले साल भी सीतामढ़ी में हुई थी 6 लोगों की मौत
 बिहार में जहरीली शराब से मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है. पिछले ही साल सीतामढ़ी में जहरीली शराब पीने से 6 लोगों की मौत हो गई थी. मृतकों के परिवारों का कहना था कि जिन लोगों की उस घटना में मौत हुई थी उन सभी एक साथ बैठकर शराब पी थी. जहरीली शराब पीने के बाद इन लोगों की तबीयत बिगड़ गई थी.इसके बाद इन्हें इलाज के लिए पास के अस्पताल लेकर जाया गया था. जहां इलाज के दौरान एक-एक कर सभी की मौत हो गई थी.

 


आज फिर बम की धमकी, दिल्ली में अकासा के विमान की इमरजेंसी लैंडिंग

16-Oct-2024
नई दिल्ली ,  ( शोर संदेश ) राजधानी दिल्ली से बेंगलुरु जा रही विमान में बम की सूचना के बाद उसकी इमरजेंसी लैंडिग (Emergency landing) दिल्ली में करवायी गयी है. विमान के उड़ान भरने के बाद बम की अफवाह फैली फिर उसे वापस इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर लाया गया. बताते चलें कि इससे पहले मुंबई से दिल्ली जाने वाली इंडिगो की उड़ान में बम होने की सूचना के बाद विमान का मार्ग परिवर्तित कर उसे अहमदाबाद भेजा गया था. एक अधिकारी बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि जांच के दौरान विमान में कुछ नहीं मिला और बम होने की सूचना गलत निकली थी. 
इधर एअर इंडिया और इंडिगो विमानन कंपनी के विमानों में बम होने की अफवाह के मामले में मुंबई पुलिस छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले पहुंची और एक नाबालिग, उसके पिता तथा कुछ अन्य लोगों से पूछताछ की. 
7 विमानों को बम से उड़ाने की मिली थी धमकी
देश में मंगलवार को सात विमानों को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी. इस धमकी के बाद हड़कंप मच गया और सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गईं. विमानों को नजदीकी एयरपोर्ट पर उतारा गया और उसके बाद गहन जांच की गयी. इस दौरान बहुत से यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को परेशानी का सामना करना पड़ा. सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर पोस्ट के माध्यम से यह धमकी दी गई थी.  इसके बाद साथ ही सुरक्षा एजेंसियों ने धमकी देने वाले का पता लगाने के लिए कोशिश तेज कर दी. साथ ही एहतियात के लिए कई कदम उठाए गए. 
सिंगापुर आर्म्ड फोर्सेस ने मंगलवार को एअर इंडिया एक्सप्रेस के एक विमान में बम की धमकी मिलने के बाद उसे आबादी वाले क्षेत्रों से दूर ले जाने के लिए दो लड़ाकू विमानों को भेजा, जिसके बाद विमान को सिंगापुर के चांगी हवाई अड्डे पर सुरक्षित रूप से उतार लिया गया. मदुरै से सिंगापुर जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान संख्या आईएक्स 684 में बम होने की धमकी मिली थी. 
संसदीय समिति के सामने उठा थ्रेट कॉल और एयर फेयर का मुद्दा
राज्यसभा की संसदीय समिति की बैठक में सिविल फ्लाइट को लेकर थ्रेट कॉल और एयर फेयर का मुद्दा उठा.  सरकार की ओर से बताया कि हॉक्स कॉल को लेकर कुछ कदम उठाए गए है. ऐसे लोगों की कुछ पहचान भी हुई है. मीटिंग में सांसदों को कुछ जानकारी दी गई. सरकार थ्रेट कॉल को लेकर गंभीर है.ऐसे कॉल को रोकने के लिये हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं.

सीमा पार आतंकवाद, संप्रभुता... एससीओ की बैठक में पाकिस्तान और चीन पर बरसे भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर, लगाई फटकार

16-Oct-2024
इस्लामाबाद।  ( शोर संदेश )  भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर ने पाकिस्तान की धरती से चीन और पाकिस्तान दोनों को ही कड़ा संदेश दिया है। जयशंकर ने जहां सीमापार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है, वहीं संप्रभुता का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाकर चीन को साफ कर दिया कि भारत सीपीईसी को स्वीकार नहीं करता है। करीब 1 दशक के बाद किसी भारतीय विदेश मंत्री की पाकिस्तान की पहली यात्रा थी। एससीओ शिखर सम्मेलन में जयशंकर ने पाकिस्तान और चीन का बिना नाम लिए उन्हें धो डाला।
भारतीय चाणक्य ने कहा कि एससीओ में सहयोग आपसी सम्म्मान और संप्रभु समानता पर आधारित होना चाहिए। इसे क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को मान्यता देनी चाहिए। इसे वास्तविक साझेदारियों पर बनाया जाना चाहिए न कि एकतरफा एजेंडे पर। डॉ. जयशंकर जब भाषण दे रहे थे तब पाकिस्तान के टेलीविजन ने समिट का लाइव बंद कर दिया। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब चीन ने कश्मीर के मुद्दे को पाकिस्तान में उठाया है।
एससीओ के लक्ष्य दिलाए याद
डॉ. जयशंकर ने एससीओ के सदस्यों से कहा, 'मैं आपसे अनुच्छेद 1 पर ध्यान देने का अनुरोध करता हूं, जो एससीओ के उद्देश्यों और काम को समझाता है। इसका मुख्य मकसद आपसी भरोसा, दोस्ती और अच्छे पड़ोसियों के संबंधों को मजबूत करना है। इसका एक और उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है, खासकर क्षेत्रीय स्तर पर। इसका लक्ष्य संतुलित विकास को बढ़ावा देना और संघर्ष को रोकने के लिए एक सकारात्मक ताकत बनना है। चार्टर ने साफ-साफ बताया था कि हमारी तीन मुख्य चुनौतियां हैं - आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद, जिनसे निपटने के लिए एससीओ पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।'
पाकिस्तान को संदेश
डॉ. जयशंकर ने कहा, 'अगर हम आज की स्थिति देखें तो इन लक्ष्यों पर काम और भी महत्वपूर्ण हो गया है। इसलिए हमारे लिए एक ईमानदार बातचीत करना जरूरी है।' पाकिस्तान को संदेश देते हुए उन्होंने कहा, 'अगर विश्वास की कमी है, सहयोग पर्याप्त नहीं या दोस्ती कमजोर है या अच्छे पड़ोसी जैसे संबंध कहीं गायब हो गए हैं तो हमें साफ तौर पर आत्मनिरीक्षण करने और इन समस्याओं के समाधान खोजने की जरूरत है।'
संप्रभुता और सम्मान की वकालत
डॉ. जयशंकर ने आगे कहा कि हम सब जानते हैं कि दुनिया बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रही है। वैश्वीकरण और संतुलन की पुनर्स्थापना ऐसी हकीकत है, जिसे नकारा नहीं जा सकता। इन सब ने मिलकर व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, ऊर्जा प्रवाह और अन्य सहयोग के क्षेत्रों में कई नए अवसर पैदा किए हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि अगर हम इसे आगे बढ़ाते हैं, तो हमारा क्षेत्र भी इसका बहुत लाभ उठाएगा। इतना ही नहीं अन्य लोग भी इन प्रयासों से प्रेरणा और सीख लेंगे।

डब्ल्यूएचओ की नई खोज, टीके रोकेंगे एंटीबायोटिक का बेजा इस्तेमाल

15-Oct-2024
नई दिल्ली। एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध तब होता है जब बैक्टीरिया, वायरस, फफूंद, और परजीवी एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, संक्रमणों का इलाज करना कठिन हो जाता है, जिससे बीमारी, मौत, और अधिक जटिल संक्रमणों का फैलाव होता है।
वैश्विक स्तर पर, लगभग 5 मिलियन मौतें हर साल एएमआर से जुड़ी होती हैं, जो कुछ स्थानों पर एंटीमाइक्रोबियल के अत्यधिक उपयोग और दूसरों में इन आवश्यक दवाओं की कमी के कारण होती हैं।
टीकों का भूमिका: रोकथाम की शक्ति
डब्ल्यूएचओ के महासचिव डॉ. टेड्रोस अडहनोम घेब्रेयसस ने इस बात पर जोर दिया कि “रोकथाम इलाज से बेहतर है।” टीके संक्रमणों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि संक्रमण पहले ही रोक दिए जाएं, तो दवाओं के प्रतिरोधी रोगाणुओं के विकास की गति धीमी हो सकती है।
निमोनोकोकस और हिब टीके: ये पहले से उपलब्ध टीके खतरनाक संक्रमणों जैसे निमोनिया और मेनिनजाइटिस को रोक सकते हैं। यदि इनका वैश्विक कवरेज बढ़ाया जाए, तो ये हर साल 1,06,000 एएमआर से संबंधित मौतों को टाल सकते हैं।
आर्थ्राइटिस के बचाव के लिए टीके: सामान्य बीमारियों जैसे टायफाइड और मलेरिया के लिए टीके हर साल लाखों एंटीबायोटिक खुराकों को बचा सकते हैं। उदाहरण के लिए, मलेरिया के टीके का उपयोग एंटीबायोटिक्स के दुरुपयोग को प्रति वर्ष 25 मिलियन खुराक तक कम कर सकता है।
प्रतिरोधी रोगाणुओं का इलाज करना अस्पतालों के लिए वैश्विक स्तर पर अनुमानित $730 अरब की लागत लगाता है। अधिक टीकों के परिचय से, इन लागतों का एक-तिहाई हिस्सा बचाया जा सकता है।
वैश्विक कार्रवाई का समय
हाल ही में, विश्व नेताओं ने 2030 तक एएमआर से संबंधित मौतों को 10% तक कम करने का संकल्प लिया है। टीकों तक पहुंच को बढ़ाना इस लक्ष्य को हासिल करने की एक प्रमुख रणनीति होगी। WHO ने स्पष्ट किया है कि टीकों की पहुंच बढ़ाना और नए टीकों का विकास इस वैश्विक स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए आवश्यक है।

एस जयशंकर के दौरे से पाकिस्तानी भी हैरान, भारत के कदम की हो रही जमकर तारीफ

15-Oct-2024
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर मंगलवार को शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पाकिस्तान पहुंच रहे हैं। पाकिस्तान में उनके दौरे को लेकर चर्चा तेज है। वहीं भारत के इस कदम को लेकर पाकिस्तानी काफी हैरान भी हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों को भी उम्मीद नही थी कि तनावपूर्ण संबंधों के बीच भारत विदेश मंत्री को भेजेगा। पाकिस्तानियों को लगता था कि ऐसी स्थिति में जब दोनों देशों ने एक दूसरे के राजनयिकों को वापस बुला लिया है तब कोई ब्यूरोकेट ही एससीओ में शामिल होने पाकिस्तान पहुंचेगा।
15 और 16 अक्टूबर को इस्लामाबाद में एससीओ शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। पिछले साल यह शिखर सम्मेलन गोवा में हुआ था जिसमें हिस्सा लेने पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो पहुंचे थे। उन्होंने इस बहुपक्षीय सम्मेलन में भी कश्मीर का मुद्दा उठा दिया था। इसके बाद भारत में उनकी खूब फजीहत हुई थी। वहीं अब पाकिस्तानी जानकारों का भी कहना है कि एस जयशंकर काफी बुद्धिमान हैं और वह बिलावल भुट्टो वाली गलती कभी नहीं दोहराएंगे। दौरा शुरू होने से पहले ही एस जयशंकर स्पष्ट कर चुके हैं कि पाकिस्तान में द्विपक्षीय मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं होगी।
एस जयशंकर ने कहा था, मैं पाकिस्तान और भारत के बीच संबंधों पर चर्चा करने नहीं जा रहा हूं। बल्कि एससीओ के एक अच्छे सदस्य के तौर पर जा रहा हूं। बता दें कि एससीओ 2001 में बनाया गया था जिसमें भारत, पाकिस्तान, चीन, ईरान, कजाखस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं।
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने क्या कहा
पाकिस्तान ने इस सम्मेलन के लिए वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रण दिया था लेकिन उसे भी लगता था कि भारत किसी जूनियर मंत्री या फिर ब्यूरोक्रेट को भेजेगा। पाकिस्तानी विदेश मंत्री इसहाक डार ने कहा कि मेजबान देश कभी द्विपक्षीय चर्चा का प्रस्ताव नहीं रखता है। अगर भारत की तरफ से कोई पहल होगी तो उसपर विचार जरूर किया जाएगा।
पाकिस्तानी न्यूज चैनल से बात करते हुए पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी ने कहा कि यह भारत का स्मार्ट मूव है। उन्होंने कहा कि दोनों देश अजीब स्थिति में हैं। भारत से हमारे संबंध सामान्य नहीं हैं। ऐसे में भी भारत ने बहुत सोच-समझकर कदम उठाया है। वहीं भारत में पाकिस्तानी उच्चायुक्त रहे अब्दुल बासित ने जयशंकर की तारीफ की और कहा कि जयशंकर काफी सभ्य व्यक्ति हैं और वह पाकिस्तान में बिल्कुल कोई भी द्विपक्षीय मुद्दा नहीं उठाएंगे।
एक अन्य पाकिस्तानी जानकार ने कहा कि जयशंकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफी करीबी हैं और वह हार्डलाइनर्स में से एक हैं। अगर पाकिस्तान का कोई भी रवैया गड़बड़ होता है तो वह जवाब जरूर देंगे। वहीं पाकिस्तान की हालत पहले से ही खराब है ऐसे में शहबाज शरीफ भी कश्मीर जैसे मुद्दे को छेड़ने की गलती नहीं करेंगे। वहीं भारत ने यह सोचकर कदम उठाया है कि दुनिया में यह संदेश ना जाए कि भारत ही बातचीत के बीच रोड़ा अटका रहा है।

लॉरेंस बिश्नोई अपराध से दूर रहने वाले लड़कों को बना रहा शार्प शूटर, कैसे जुटाए 700 सुपारी किलर

15-Oct-2024
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  महाराष्ट्र के सीनियर नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आ रहा है। अब तक पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है तो खंडन भी नहीं किया है। वहीं लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने तो इसकी जिम्मेदारी ही ले ली है। इस हत्याकांड को सलमान खान को धमकी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इसके चलते यह कांड हाईप्रोफाइल हो गया है और पुलिस मुंबई से लेकर दिल्ली तक तफ्तीश में जुटी है। इस बीच जानकारी सामने आई है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग के काम करने का अलग ही तरीका है और पूरे देश में करीब 700 शार्प शूटर उसने खड़े कर लिए हैं।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग की पड़ताल कर रहे कुछ पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह गैंगस्टर अलग ही तरीके से काम करता है। वह आमतौर पर ऐसे लड़कों को अपने साथ लाता है, जिनका पिछला कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं होता। इनके जरिए ही वह बड़ी से बड़ी हत्याओं को अंजाम दिलाता है, जिससे पुलिस को कोई शक नहीं होता और ये लोग आसानी से मूवमेंट कर पाते हैं। इन लड़कों में उन्हें शामिल किया जाता है, जो जेल में कुछ समय पहले ही आए हों। इसके बाद उनकी मीटिंग लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गों से होती है और उन्हें टारगेट सौंपे जाते हैं।
गुजरात की साबरमती जेल में लॉरेंस बिश्नोई खुद बीते साल से ही बंद है। इसके अलावा उसकी गैंग के कई लोग राजस्थान, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की जेलों में कैद हैं। इनके जरिए वह कोई अपराध अंजाम नहीं दे सकता। इसलिए नई पौध खड़ी करता है और उन लोगों को चुनता है, जिनके नाम पर पहले से कोई केस न हों। एनआईए सूत्रों का कहना है कि इसके लिए उन लोगों को भी कई बार चुना जाता है, जो बेरोजगार हों। इन्हें मोटी रकम का लालच मिलता है या फिर विदेश में कहीं सेटल कराने का झांसा दिया जाता है। ऐसा कई लोगों के साथ किया भी गया है और वे कनाडा जैसे देशों में रह रहे हैं।
इस साल दो और कांड कर चुका है लॉरेंस बिश्नोई गैंग
बाबा सिद्दीकी की हत्या के लिए भी इसी पैटर्न का इस्तेमाल हुआ और नए लोगों को इसके लिए चुना गया। लॉरेंस बिश्नोई गैंग कुख्यात होता जा रहा है और पूरे देश में खौफ का दूसरा नाम बन चुका है। इसी साल की शुरुआत में हरियाणा की पार्टी इनेलो के नेता नफे सिंह राठी की हत्या हुई थी। इसके अलावा गुरुग्राम में बुकी सचिन मुंजाल मारा गया था। इन कत्लों के पीछे भी बिश्नोई गैंग का ही नाम सामने आया था। यही नहीं लॉरेंस बिश्नोई के करीबी गुर्गे रोहित गोदारा ने इसकी जिम्मेदारी भी ली थी, जो फिलहाल कनाडा में बसा हुआ है।

हेमंत सोरेन के मंत्री के करीबियों के यहां छापेमारी, झारखंड में 20 से ज्यादा ठिकानों पर ईडी की रेड

14-Oct-2024
रांची। ( शोर संदेश ) झारखंड में सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का बड़ा ऐक्शन देखने को मिला है। ईडी की राज्य में 20 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी चल रही है। ईडी की टीम मंत्री मिथिलेश ठाकुर के करीबियों के यहां भी पहुंची है। वहीं आईएएस मनीष रंजन के सरकारी आवास में भी छापेमारी की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि ईडी का यह ऐक्शन राज्य पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा जल जीवन मिशन में कथित घोटाले से संबंधित है। विभाग के कुछ इंजीनियरों के ठिकानों पर भी छापेमारी की जा रही है। गौरतलब है कि मिथिलेश ठाकुर हेमंत सोरेन कैबिनेट में पेयजल स्वच्छता मंत्री हैं।
क्यों की गई छापेमारी
ईडी के एक सूत्र ने बताया कि रांची और चाईबासा सहित कई जगहों पर छापेमारी की जा रही है। ईडी की टीम आईएएस मनीष रंजन, मंत्री मिथिलेश ठाकुर के पीएस हरेंद्र सिंह, मंत्री के भाई विनय ठाकुर और कई विभागीय इंजीनियरों से संबंधित 20 ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। सूत्र ने आगे बताया कि यह छापेमारी पेयजल और स्वच्छता विभाग के जल जीवन मिशन में अनियमितताओं के मामले में की गई है।
एसके गैस एजेंसी के मालिक विजय अग्रवाल, चाईबासा में मंत्री मिथिलेश ठाकुर के भाई विनय ठाकुर, आईएएस मनीष रंजन, डोरंडा में मिथिलेश ठाकुर के पीएस हरेंद्र सिंह, पेयजल के कई अभियंताओं, रांची के इंद्रपुरी स्थित विजय अग्रवाल के घर समेत करीब 20 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी चल रही है।
ईडी के इस पूरे ऐक्शन से जुड़े एक दूसरे सूत्र ने बताया कि एयरपोर्ट रोड स्थित ईडी कार्यालय से सोमवार सुबह ईडी की टीम निकली। टीम राज्य में कई जगहों पर पहुंची और छापेमारी शुरू की गई। जानकारी के मुताबिक, ईडी की टीम मंत्री मिथिलेश ठाकुर के भाई विनय ठाकुर और उनके पीएस हरेंद्र सिंह के ठिकाने पर पहुंची है। मंत्री के दोनों करीबियों के यहां छापेमारी चल रही है। इसके अलावा आईएएस मनीष रंजन के सरकारी आवास पर भी केंद्रीय एजेंसी की टीम रेड करने पहुंची है। 

जयशंकर के इस्लामाबाद पहुंचने से पहले पाकिस्तान ने की गलतबयानी, क्या मिलेगा करारा जवाब?

14-Oct-2024
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )   विदेश मंत्री एस. जयशंकर के इस्लामाबाद पहुंचने से पहले ही पाकिस्तान की तरफ से भारत पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। पिछले दो दिनों के भीतर पाकिस्तान ने ना सिर्फ कश्मीर का मुद्दा उठाया बल्कि अपने मुल्क की राजनीतिक अस्थिरता को लेकर भी परोक्ष तौर पर भारत पर दोषारोपण करने की कोशिश की है।
वैसे भारत की तरफ से पहले ही यह स्पष्ट किया जा चुका है कि विदेश मंत्री जयशंकर की इस हफ्ते की पाकिस्तान यात्रा को दोनों देशों के संबंधों से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए। इसके बावजूद शाहबाज शरीफ की सरकार की तरफ से उन मुद्दों को उठाने की कोशिश की जा रही है जो भारत को नागवार हैं।
15-16 अक्टूबर, 2024 को होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए रूस, चीन समेत कई विदेशी प्रतिनिधिमंडल पहुंचने लगे हैं। भारतीय विदेश मंत्री मंगलवार की सुबह बैठक में हिस्सा लेने वहां पहुंचेंगे।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ईशाक दार ने इस्लामाबाद में संवाददाताओं से कहा कि पाकिस्तान के लिए गाजा के साथ ही कश्मीर भी प्राथमिकता वाला मुद्दा है। वह पीएम शरीफ की अगुवाई में कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में बता रहे थे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर के साथ कोई द्विपक्षीय बैठक नहीं है।
क्या ध्यान भटका रहा पाकिस्तान?
एक दिन पहले दार ने प्रमुख विपक्षी दल पीटीआई और एक 'पड़ोसी' देश पर एससीओ बैठक को बाधित करने की साजिश रचने का आरोप लगाया था। भारत ने आधिकारिक तौर पर इन दोनों बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई। जानकारों का कहना है कि शरीफ सरकार आंतरिक चुनौतियों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बयान दे रही है।



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