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पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने दी रतन टाटा को श्रद्धांजलि

10-Oct-2024
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  दुनियाभर में मशहूर उद्योगपति रतन टाटा का बुधवार देर रात मुंबई में निधन हो गया. उनके निधन से देशभर में शोक की लहर दौड़ गई. उन्होंने 86 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली. रतन टाटा का अंतिम संस्कार मुंबई में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा. उनके निधन पर टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने टाटा समूह की ओर से एक संदेश जारी कर कहा कि पद्मविभूषण रतन टाटा का योगदान अतुल्य है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा है कि रतन टाटा का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत तमाम राजनेताओं ने भारत के 'रतन' रतन टाटा को श्रद्धांजलि दी.
पीएम मोदी ने दी रतन टाटा को श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम राजनेताओं ने उद्योगपति रतन टाटा को श्रद्धांजलि दी. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "श्री रतन टाटा जी एक दूरदर्शी बिजनेस लीडर, दयालु आत्मा और एक असाधारण इंसान थे. उन्होंने भारत के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित व्यापारिक घरानों में से एक को स्थिर नेतृत्व प्रदान किया. साथ ही, उनका योगदान बोर्डरूम से कहीं आगे तक गया. अपनी विनम्रता, दयालुता और हमारे समाज को बेहतर बनाने के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के कारण उन्होंने कई लोगों का प्रिय बना लिया."
इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योगपति रतन टाटा के साथ अपनी कुछ पुरानी तस्वीरें भी साझा की. पीएम मोदी ने एक तस्वीर को साझा करते हुए लिखा, 'श्री रतन टाटा जी के सबसे अनोखे पहलुओं में से एक बड़े सपने देखने और उन्हें वापस देने का जुनून था. वह शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छता, पशु कल्याण जैसे कुछ मुद्दों का समर्थन करने में सबसे आगे थे.'
एक अन्य तस्वीर को शेयर करते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा, "मेरा मन श्री रतन टाटा जी के साथ अनगिनत संवादों से भरा हुआ है. जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था तो मैं उनसे अक्सर मिलता था. हम विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करते थे, मुझे उनका दृष्टिकोण बहुत समृद्ध लगा. जब मैं दिल्ली आया तो ये बातचीत जारी रही. उनके निधन से बेहद दुख हुआ. इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के साथ हैं. ॐ शांति." 
 

हरियाणा-जम्मू कश्मीर के बाद बीजेपी की अगली चुनौतियां क्या हैं, कहां-कहां होने हैं विधानसभा चुनाव

10-Oct-2024
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं.हरियाणा में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला है.जम्मू-कश्मीर में भी बीजेपी को उम्मीद के मुताबिक ही सफलता मिली है. हरियाणा में लगातार तिसरी बार बीजेपी की सरकार बनेगी. ऐसा पहली बार होगा कि हरियाणा में किसी पार्टी की लगातार तिसरी बार सरकार बनेगी. इन प्रमुख राज्यों के चुनाव में तो बीजेपी को उम्मीद के मुताबिक सफलता मिल गई है. ऐसे में आइए अब देखते हैं कि अगले छह महीनों में बीजेपी को किन चुनौतियों का सामना करना है. किन राज्य में उसे चुनाव लड़ना है और किन राज्यों में उपचुनाव.
कहां कहां होने हैं विधानसभा चुनाव
अगले छह महीनों में महाराष्ट्र और झारखंड के साथ दिल्ली विधानसभा का चुनाव प्रस्तावित है.इनमें से महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर और झारखंड विधानसभा का कार्यकाल अगले साल पांच जनवरी को खत्म हो रहा है.माना जा रहा है कि  चुनाव आयोग जल्द ही इन दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम का ऐलान कर सकता है. वहीं दिल्ली विधानसभा का कार्याकाल 23 फरवरी तक है.इनके अलावा छह राज्यों की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी होने हैं. इनके चुनाव कार्यक्रम का ऐलान अभी तक चुनाव आयोग ने नहीं किया है. 
महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव
अगले छह महीनों में जिन दो राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं, उनमें सबसे बड़ा है महाराष्ट्र. महाराष्ट्र की विधानसभा में 288 सीटें हैं. महाराष्ट्र में इस समय शिवसेना, बीजेपी और एनसीपी अजित पवार गुट के महायुति की सरकार है.महायुति में शामिल दोनों दलों तोड़-फोड़ के बाद अस्तित्व में आए हैं.लेकिन इनको अपनी पार्टी का मुख्यनाम लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिला है.महाराष्ट्र में महायुति का मुकाबला शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरदचंद पवार) और कांग्रेस के महाविकास अघाड़ी (एमवीए)से है. 
विधानसभा चुनाव में महायुति और महाविकास अघाड़ी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई है. महायुति अपनी लोक-लुभावन योजनाओं के साथ जनता के बीच जाएगी, वहीं एमवीए दलबदल और पार्टी में तोड़फोड़ के दम पर सत्ता छीने के बाद बदले की लड़ाई लड़ेगा. यह चुनाव अजित पवार, एकनाथ शिंदे, शरद पवार और उद्धव ठाकरे की परीक्षा भी लेगा.
 

रतन टाटा को 'भारत रत्न' देने की मांग, महाराष्ट्र कैबिनेट में प्रस्ताव पास

10-Oct-2024
मुंबई:    ( शोर संदेश )  मशहूर उद्योगपति और टाटा ग्रुप के मानद चेयरमैन रतन टाटा को 'भारत रत्न' देने की मांग की गई है। महाराष्ट्र कैबिनेट में इस संबंध में एक प्रस्ताव पास किया गया। महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया कि उद्योगपति रतन टाटा का नाम भारत रत्न पुरस्कार के लिए प्रस्तावित करते हुए केंद्र सरकार को भेजा जाए। केंद्र सरकार अब महाराष्ट्र कैबिनेट के इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लेगी।
महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में रतन टाटा के निधन पर शोक जताते हुए एक शोक प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद भारत रत्न पुरस्कार के लिए उनका नाम प्रस्तावित करने का फैसला लिया गया। महाराष्ट्र सरकार अब केंद्र सरकार को यह प्रस्ताव भेजेगी। 
ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन
बता दें कि रतन टाटा का 86 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में बुधवार देर रात निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बढ़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आज वर्ली के श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग
नरीमन प्वाइंट स्थित एनसीपीए लॉन में आज सुबह 10 बजे अंतिम दर्शन के लिए लाया गया। यहां बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। देश की नामचीन राजनीतिक हस्तियां, उद्योग जगत से जुड़े लोग, फिल्मी हस्तियां, खेल से जुड़े लोगों के साथ ही समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। 
28 दिसंबर 1937 को हुआ था जन्म
रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को मुंबई में हुआ था। वे 1991 से 2021 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे। इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा को नई बुलंदियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
पद्मभूषण और पद्म विभूषण पुरस्कार
उनके 21 साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंपनी का राजस्व 40 गुना से ज्यादा तथा लभा 50 गुना ज्यादा बढ़ा। उन्होंने टाटा टी को टेटली, टाटा मोटर्स को जगुआर लैंड रोवर तथा टाटा स्टील को कोरस का अधिग्रहण करने में मदद की। टाटा की नैनो कार की संकल्पना भी उन्होंने तैयार की थी।  वर्ष 2000 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मभूषण और 2008 में पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया था।

सेना के जवान का गोलियों से छलनी शव बरामद, अनंतनाग में आतंकवादियों ने किया था अगवा

09-Oct-2024
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों द्वारा सेना के जवान को अगवा किए जाने के एक दिन बाद सिपाही का शव बरामद किया गया है। सेना के जवान का शव गोली लगने के निशान के साथ बरामद किया गया है। जवान कल से लापता था और इलाके में सुरक्षा बलों द्वारा तलाशी अभियान जारी था। 
एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बताया कि कल प्रादेशिक सेना के एक सैनिक के लापता होने के बाद आज सुबह पुलिस और सेना द्वारा बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया था, आज तलाशी के दौरान उसका शव बरामद किया गया है। अधिकारी ने आगे कहा कि सेना के सैनिक की मौत के कारणों और उसके लापता होने के कारणों की जांच की जा रही है।
उसकी पहचान हिलाल अहमद भट निवासी मुकधमपोरा नौगाम अनंतनाग के रूप में हुई है। इससे पहले, सेना की चिनार कोर ने एक पोस्ट में लिखा था, "खुफिया जानकारी के आधार पर, भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर 8 अक्टूबर को कोकरनाग के कजवान जंगल में एक संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया। ऑपरेशन रात भर जारी रहा, क्योंकि प्रादेशिक सेना का एक जवान लापता बताया गया। बड़े पैमाने पर बचाव और तलाशी अभियान जारी है।"
जानकारी के अनुसार, भारतीय सेना के हवाले से बताया कि 5 अक्टूबर को सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया, जिसमें दो आतंकवादी मारे गए।
इससे पहले इसी साल अगस्त में अनंतनाग में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ में भी दो जवान शहीद हो गए थे और तीन अन्य घायल हो गए थे।
इससे पहले डोडा जिले में भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में सेना के चार जवान और एक पुलिस अधिकारी शहीद हो गये थे। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित जैश-ए-मोहम्मद के छद्म समूह 'कश्मीर टाइगर्स' ने ली थी।

हरियाणा में सरकार बनाने की तैयारी तेज, दिल्ली पहुंचे सीएम सैनी, पीएम मोदी से मुलाकात की संभावना

09-Oct-2024
नई दिल्ली।   ( शोर संदेश ) हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणाम आ गए है। बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल कर सत्ता में तीसरी बार हैट्रिक लगाई है। जीत के बाद अब सरकार बनाने की भी तैयारी तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक, इस कड़ी में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बुधवार, 9 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचे हैं। जानकारी आ रही है कि सैनी आज प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात कर सकते हैं।
सीएम नायब सिंह सैनी के साथ हरियाणा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बढ़ौली भी दिल्ली पहुंचे हैं। हरियाणा में BJP की प्रचंड जीत के बाद यह तय माना जा रहा है कि अगले सीएम नायब सिंह ही होंगे। इस कड़ी में दोनों नेता आज दिल्ली में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। सैनी की बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात होने वाली है। 
हरियाणा के नए सीएम के शपथ ग्रहण की तारीख भी सामने आ रह है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 12 तारीख विजय दशमी के दिन नायब सैनी सीएम पद की शपथ ले सकते हैं। आज की बैठक में हरियाणा की नई कैबिनेट के मंत्रियों के नाम पर भी चर्चा होने की संभावना है। सरकार का गठन अगले कुछ दिनों में हो जाएगा। इससे पहले बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व हरियाणा में विधायकों के साथ बैठक करने के लिए पर्यवेक्षकों को वहां भेजेगा।
हरियाणा में बीजेपी ने रचा इतिहास
बता दें बीजेपी ने इस बार हरियाणा में अब तक की सबसे बड़ी जीत हासिल की है। 90 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने 48 सीटों पर फतह हासिल की है। वहीं, कांग्रेस के 37 पर सिमट गई। हरियाणा में ये बीजेपी की लगातार तीसरी जीत है। इस जीत के साथ ही बीजेपी ने हरियाणा में इतिहास रच दिया है। ये पहला मौका है हरियाणा राज्य के गठन के बाद जब कोई एक पार्टी लगातार तीन बार सत्ता में आई हो। 
 

आरबीआई ने लगातार दसवीं बार नहीं बदला रेपो रेट

09-Oct-2024
नई दिल्ली:  ( शोर संदेश ) आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट में एक बार फिर कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। यह लगातार दसवां मौका है जब एमपीसी ने नीतिगत दरों को यथावत रखा है। एमपीसी की तीन दिन तक चली बैठक के बाद आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इसमें लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रेपो रेट को एक बार फिर 6.5% पर बरकरार रखने का फैसला लिया गया है। दास ने कहा कि समिति के 6 में से पांच सदस्यों ने रेपो रेट को यथावत रखने के पक्ष में वोट दिया। रेपो रेट के यथावत रहने का मतलब है कि आपके लोन की किस्त में कोई बदलाव नहीं होगा। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को लोन देता है। इसके कम होने से आपके होम लोन, पर्सनल लोन और कार लोन की किस्त कम होती है। आरबीआई ने रेपो रेट आखिरी बार बदलाव पिछले साल फरवरी में किया था। तब इसे 0.25% बढ़ाकर 6.5% किया गया था।
दास ने कहा कि वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद मौद्रिक नीति महंगाई को काबू में रखने और आर्थिक वृद्धि को गति देने में सफल रही है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने रुख को बदलकर तटस्थ करने का फैसला किया है। बेहतर मॉनसून, पर्याप्त बफर स्टॉक की वजह से इस साल आगे खाद्य महंगाई में कमी आएगी। महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े अर्थव्यवस्था में मजबूत गतिविधियों के संकेत दे रहे हैं। इसकी बुनियाद मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लचीले मौद्रिक नीति ढांचे को आठ साल पूरे हो गए हैं।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। सकल घरेलू उत्पाद में निवेश का हिस्सा 2012-13 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर है। घरेलू मांग में सुधार, कच्चे माल की कम लागत और सरकारी नीतियों से विनिर्माण क्षेत्र में तेजी आ रही है। सामान्य मॉनसून के मद्देनजर वित्त वर्ष 2024-25 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 4.5 प्रतिशत रहने का अपना अनुमान है। प्रतिकूल आधार प्रभाव और खाद्य कीमतों में तेजी के कारण सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़ने की आशंका है।

हरियाणा में जीत के बाद बीजेपी ने राहुल गांधी के घर भेजी जलेबी

09-Oct-2024
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )   बीजेपी ने मंगलवार को लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक जीत दर्ज की. इसका जश्न मनाया जाने लगा तो एक किलो जलेबी कांग्रेस के हेडक्वार्टर भिजवाई गई है. ये किसी दोस्ती या खुशी में नहीं बल्कि राहुल गांधी को एक जवाब के रूप में भेजी गई थी. दरअसल, गोहाना की रैली में राहुल गांधी ने एक स्थानीय मिठाई की दुकान की जलेबी पर टिप्पणी की थी, जो कि पूरे चुनाव में वायरल रही. चुनाव नतीजों से पहले भी सोशल मीडिया पर जलेबी ट्रेंड कर रही थी. इसी जलेबी को लेकर वार-पलटवार का दौर भी जारी था.
जलेबियों का ये मुद्दा हरियाणा विधानसभा चुनाव में हॉट टॉपिक रहा. अब जब कांग्रेस हरियाणा का चुनाव हार गई है तो बीजेपी जलेबियों को लेकर उन पर तंज कस रही है. हरियाणा बीजेपी ने एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी के घर जलेबी भिजवाने की बात कही है.
जलेबी के चक्कर में फंस गए राहुल गांधी 
हरियाणा में बीजेपी की जीत के बाद पार्टी के ट्विटर हैंडल पर एक ट्वीट कर कहा गया कि भारतीय जनता पार्टी हरियाणा के समस्त कार्यकर्ताओं की तरफ से राहुल गांधी जी के लिए उनके घर पर जलेबी भिजवा दी है. बीजेपी का ये ट्वीट हरियाणा में कांग्रेस की हार पर तंज और बीजेपी की जीत की खुशी जाहिर कर रहा है.
खास बात यह है कि इस ट्वीट में ऑर्डर डिटेल का स्क्रीन शॉट भी अटैच किया गया, जिसमें दिखाई दे रहा है कि जलेबी का ऑर्डर कनॉट प्लेस के बीकानेरवाला स्वीट्स से 24 अकबर रोड (कांग्रेस हेडक्वार्टर) के लिए किया गया. इसमें जलेबी की कीमत भी लिखी हुई है, जो कि 609 रुपए है.  बीजेपी ने ट्वीट कर कहा है कि उन्होंने कार्यकर्ताओं की तरफ से राहुल गांधी के घर पर जलेबी भिजवा दी है.  

हरियाणा चुनाव के नतीजों से उत्साह में बीजेपी, यूपी उपचुनाव और मिशन-27 के लिए मिली ऊर्जा

09-Oct-2024
लखनऊ।  ( शोर संदेश )   हरियाणा चुनावों में तमाम सियासी झंझावात के बावजूद भारतीय जनता पार्टी की विजय यूपी में आसन्न विधानसभा उपचुनावों के लिए पार्टी संगठन को नई ऊर्जा और जोश से भर गई हैं। यही नहीं हरियाणा में लगातार तीसरी बार डबल इंजन की जीत ने यूपी में मिशन:2027 के लिए भी सुखद संदेश दिया है। पार्टी का अब इस ऊर्जा से लबरेज हो उपचुनाव में जी-जान झोंकने के साथ ही मिशन-2027 के लिए जुटना तय माना जा रहा है।
लोकसभा चुनाव की हार के बोझ को किया कम
हरियाणा की जीत का कई मायने में यूपी पर असर पड़ना तय है। अव्वल तो लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पीडीए समीकरण के आगे मात खाए संगठन में यह जीत नए सिरे से जूझने का जज्बा भरेगी। वहीं कुछ हद तक मायूस हो रहे कार्यकर्ताओं को भी एक उम्मीद जगेगी कि चुनौतियों के बीच परिश्रम कर मनचाहे परिणाम हासिल किए जा सकते है। साथ ही मिशन:2027 के लिए लगाई जा रही अटकलों पर भी विराम लगना तय माना जा रहा है। ऐसा नहीं है कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी संगठन ने हाथ-पैर डाल दिए हों। जहां खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे बढ़ कर उपचुनाव की 10 सीटों पर मोर्चा संभाल रखा है। मुख्यमंत्री न केवल लगातार सीटों पर जाकर संपर्क कर रहे हैं बल्कि समीक्षा और सरकार की योजनाओं के जरिये समाजवादी पार्टी की सरकारों के कारनामों से भी मतदाताओं को सतर्क कर रहे हैं।
संगठन भी जी-जान से जुटा
भाजपा संगठन ने भी हर सीट पर दो या एक-एक मंत्री को प्रभारी बनाया है। कुल 30 मंत्रियों को प्रभारियों के रूप में तैनात किया गया है। मु्ख्यमंत्री, दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद व ब्रजेश पाठक, प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने दो-दो सीटों का जिम्मा संभाल रखा है। पार्टी इन दौरों के जरिये कांग्रेस व सपा द्वारा लोकसभा चुनाव में संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने जैसे मुद्दों पर तस्वीर साफ करने में जुटी है। सभाओं में इसे लेकर बड़े नेता हकीकत बयां करने में लगे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार सपा सरकार की कानून-व्यवस्था की कमियों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। ऐसे में यह जीत उपचुनाव के लिए संजीवनी साबित हो तो हैरत नहीं।
डबल इंजन की जीत भी यूपी में देग संदेश
चाहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हों या फिर पार्टी के प्रदेश मुखिया भूपेंद्र चौधरी उपचुनाव के लिए हो रही सभाओं में डबल इंजन सरकार के फायदे गिनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री केंद्र व राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में लोगों को बताना नहीं भूलते। कौन सी योजना केंद्र ने शुरू की और कैसे यूपी ने उस पर संजीदगी से अमल कर हर वर्ग को लाभ पहुंचाया। कमोबेश मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के हर भाषण के केंद्र में यही विषय रहता है। ऐसे में कहना गलत न होगा कि हरियाणा में डबल इंजन की जीत यूपी में मिशन-2027 के लिए भी राह प्रशस्त करे।

सीएम योगी की रैली मतलब जीत की गारंटी! जम्मू में जहां-जहां गए, खिल गया कमल

09-Oct-2024
नई दिल्ली।   ( शोर संदेश )  सीएम योगी आदित्यनाथ यूं ही फेमस नहीं हैं. कहीं भी चुनाव हो, उम्मीदवारों के बीच सीएम योगी की रैलियों की डिमांड रहती है. वजह है सीएम योगी की रैली मतलब जीत की पक्की गारंटी. उनकी रैलियों में उन्हें देखने और सुनने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ता है. उनकी सभाओं की भीड़ वोटों में भी तब्दील होती है. हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव में भी कुछ ऐसा ही हुआ. हरियाणा और विधानसभा चुनावों में भी सीएम योगी ने धुआं-धार प्रचार किया. भाजपा ने सीएम योगी की लोकप्रियता को देखते हुए दोनों राज्यों में खूब सभाएं करवाईं. सीएम योगी ने जिन-जिन जगहों पर जनसभाएं कीं, वहां के चुनावी नतीजे सामने आ चुके हैं. तो चलिए जानते हैं सीएम योगी की रैलियों का जीत के लिहाज से स्ट्राइक रेट क्या रहा.
दरअसल, सीएम योगी ने हरियाणा में 14 और जम्मू में 4 रैलियां की थीं. सीएम योगी आदित्यनाथ ने जम्मू में चार विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी प्रचार किया था. दिलचस्प बात है कि सीएम योगी ने जम्मू में जहां-जहां प्रचार किया, वहां-वहां भाजपा ने जीत का परचम लहराया है. वहीं, हरियाणा में सीएम योगी की 14 रैलियां हुई थीं. 10 साल के एंटी इंन्कंबेंसी के बावजूद भी सीएम योगी की रैलियों की वजह से भाजपा उन 14 में से 9 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब हुई. सीएम योगी की रैली की वजह से इन सीटों का भाजपा की झोली में जाना बड़ी बात है. वह भी तब, जब भाजपा के खिलाफ एंटी इन्कंबेंसी का माहौल था. हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के नतीजों ने एक बार फिर बता दिया कि क्यों पीएम मोदी के बाद सीएम योगी ही सबसे अधिक पॉपुलर और पहली पसंद हैं.

भारत के लिए छोटा सा देश मालदीव क्यों है इतना जरूरी?

08-Oct-2024
नई दिल्ली।   ( शोर संदेश )  भारत के पड़ोसी द्वीप देश मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू रविवार से चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं. उनके इस दौरे की भारत में खूब चर्चा है क्योंकि वो भारत विरोधी रुख के साथ सत्ता में आए थे लेकिन अब उनके इस रुख में धीरे-धीरे नरमी आ रही है.
राष्ट्रपति मुइज्जू के इस दौरे में कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं और यह भी तय हुआ है कि भारत और मालदीव मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करेंगे.
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई जिसके बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत-मालदीव के संबंध सदियों पुराने हैं और भारत मालदीव का सबसे करीबी पड़ोसी और अच्छा दोस्त है.
पीएम मोदी ने बताया कि मालदीव की जरूरत के हिसाब से 400 मिलियन डॉलर की मुद्रा विनिमय डील पर हस्ताक्षर किए गए हैं. भारत के सहयोग से बनाए गए 700 से अधिक सोशल हाउसिंग यूनिट्स भी मालदीव को हैंडओवर किए गए. 
भारत के लिए इतना अहम क्यों है मालदीव?
मालदीव हिंद महासागर में बसा एक छोटा सा देश हैं जो रणनीतिक रूप से भारत के लिए बेहद अहम है. चीन भारत के पड़ोसी देशों में आर्थिक और रणनीतिक रूप से अपना प्रभाव बढ़ाता जा रहा है. मुइज्जू से पहले मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को भारत समर्थक माना जाता था. उनके शासनकाल में भारत चीन को लेकर निश्चिंत था लेकिन चीनी झुकाव वाले मुइज्जू के सत्ता में आने से भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं.  इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित रखने के लिए भारत को मालदीव का साथ होना बेहद जरूरी है.
रिटायर्ड मेजर जनरल डॉ. अनिल कुमार लाल ने एक ओपिनियन ब्लॉग में लिखते हैं कि हिंद महासागर के क्षेत्रीय द्वीपों में श्रीलंका की तरह ही मालदीव बेहद अहम है. श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर पहले से ही चीन का कब्जा है, इसलिए मालदीव ही एकमात्र ऐसा महत्वपूर्ण देश है जो अब तक भारत के दक्षिण-पश्चिमी समुद्री क्षेत्र की रक्षा कर रहा था.
मालदीव को भारत की जरूरत
पर्यटन पर आश्रित मालदीव हाल के सालों में आर्थिक मंदी, विदेशी मुद्रा भंडार में कमी से जूझ रहा है और उसने भारत, चीन के करोड़ों डॉलर का कर्ज भी ले रखा है. अनुमान है कि मालदीव का कर्ज उसके जीडीपी का 110% है. इतना भारी कर्ज लेकर बैठे मालदीव को लेकर खतरा बढ़ रहा है कि वो अपने सुकुक पर भुगतान करने में विफल हो सकता है. अगर ऐसा होता है, तो यह दुनिया का पहला इस्लामिक बॉन्ड डिफॉल्ट होगा.
भारत ने पिछले महीने मालदीव को डिफॉल्ट से बचाने के लिए 5 करोड़ डॉलर की लाइफलाइन दी है लेकिन निवेशकों और विश्लेषकों का कहना है कि मालदीव पर भारी कर्ज है और इस मदद से उसे राहत नहीं मिलने वाली.



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