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एस जयशंकर ने नीदरलैंड और श्रीलंका समेत कई देशों के विदेश मंत्रियों से की मुलाकात

24-Sep-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) शिखर सम्मेलन से इतर कई देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इनमें नीदरलैंड के विदेश मंत्री डेविड वान वील और श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ भी शामिल हैं।

नीदरलैंड के विदेश मंत्री डेविड वान वील से मुलाकात के बाद एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “न्यूयॉर्क में नीदरलैंड के विदेश मंत्री डेविड वैन वील के साथ हुई बैठक सराहनीय रही। यूरोपीय रणनीतिक स्थिति और भारत के दृष्टिकोण पर एक गहन बातचीत हुई।”
एक अन्य पोस्ट में एस जयशंकर ने लिखा, “श्रीलंका की विदेश मंत्री विजिता हेराथ से मिलकर प्रसन्नता हुई। हमारे द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की।”
सेंट लूसिया के विदेश मंत्री अल्वा बैप्टिस्ट से मुलाकात के बाद जयशंकर ने पोस्ट किया, “सेंट लूसिया के विदेश मंत्री अल्वा बैप्टिस्ट के साथ एक शानदार बातचीत हुई। उनकी संगति का हमेशा आनंद लेता हूं।”
एक अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उन्होंने डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन के साथ चर्चा की। बैठक के बाद जयशंकर ने कहा, “बातचीत की सराहना करता हूं। यूरोप और यूक्रेन संघर्ष में नवीनतम घटनाक्रमों पर उनकी अंतर्दृष्टि मूल्यवान थी। हमने द्विपक्षीय संबंधों और डेनिश प्रेसीडेंसी के तहत भारत-ईयू सहयोग पर भी चर्चा की।”
उन्होंने सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन के साथ भी बातचीत की और इसे समान विचारधारा वाले वैश्विक दक्षिण देशों की उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान एक “त्वरित बातचीत” बताया।
जयशंकर ने एक पोस्ट में लिखा, “न्यूयॉर्क में समान विचारधारा वाले वैश्विक दक्षिणी देशों की उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान सिंगापुर के अपने मित्र विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन के साथ संक्षिप्त बातचीत हुई।”
इसके अलावा, उन्होंने मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील से भी मुलाकात की, जहां उन्होंने द्वीपीय राष्ट्र के विकास के लिए भारत के ‘दृढ़ समर्थन’ को दोहराया।
मॉरीशस के विदेश मंत्री रितेश रामफुल के साथ अपनी बैठक में जयशंकर ने प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम की हालिया भारत यात्रा पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “न्यूयॉर्क में मॉरीशस के विदेश मंत्री रितेश रामफुल से मिलकर प्रसन्नता हुई। प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम की हालिया सफल भारत यात्रा पर चर्चा हुई।” 
 

जीएसटी 2.0 आजाद भारत में अब तक की सबसे बड़ी टैक्स क्रांति: अनुप्रिया पटेल

24-Sep-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बुधवार को कहा कि जीएसटी 2.0 आजाद भारत में अब तक की सबसे बड़ी टैक्स क्रांति है और इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए अनुप्रिया पटेल ने कहा, “जीएसटी सुधार एक बहुत बड़ा साहसिक निर्णय है और यह आजाद भारत में अभी तक की सबसे बड़ी टैक्स क्रांति है। इससे आम आदमी के लिए टैक्स काफी कम हो गया और इस कारण से हम जीएसटी 2.0 को बचत उत्सव के रूप में मना रहे हैं।”

पटेल ने आगे कहा कि जीएसटी सुधार से टैक्स कम होने से आर्थिक गतिविधियां आगे बढ़ेंगी, जिससे देश के विकास की रफ्तार को तेज करने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर आम आदमी हो या देश की आर्थिक गतिविधि हर दृष्टि से जीएसटी 2.0 फायदेमंद है।

केंद्रीय राज्य मंत्री के मुताबिक, जीएसटी सुधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 का भी समर्थन करते हैं, क्योंकि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें देश को स्वस्थ बनाना होगा और इसके लिए किफायती और गुणवत्तापूर्व स्वास्थ्य सुविधा जरूरी है। जीएसटी 2.0 के तहत कई दवाओं पर टैक्स को कम या शून्य किया गया है। लाइफ सेविंग ड्रग्स पर टैक्स को शून्य कर दिया है। वहीं, हेल्थ इंश्योरेंस पर भी टैक्स को 18 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है।

भारत का नया गुड्स एंड सर्विस टैक्स सिस्टम सोमवार से लागू हो गया। जीएसटी सुधार से रोजमर्रा की जरूरी चीजें और लाइफ सेविंग मेडिसिन सहित लगभग 370 प्रोडक्ट पर टैक्स कम हो गया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि इस बदलाव का मकसद उपभोक्ताओं की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का निवेश करना है।

लाइफ सेविंग ड्रग्स के अलावा अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर (यूटीएच) दूध, प्री-पैकेज्ड और लेबल्ड छेना/पनीर, पिज्जा ब्रेड, खाखरा, चपाती/रोटी जैसी ब्रेड सहित 50 से अधिक आइटम अब जीरो टैक्स कैटेगरी में आ चुके हैं।

कैंसर और दुर्लभ बीमारियों जैसी स्थितियों के लिए 33 जरूरी दवाएं और थेरेपी अब शून्य जीएसटी के तहत आते हैं, जबकि कई अन्य दवाओं पर भी टैक्स रेट 12 प्रतिशत से घटाकर जीरो कर दिया गया है। डायग्नोस्टिक किट और ग्लूकोमीटर जैसे मेडिकल डिवाइस पर अब केवल 5 प्रतिशत जीएसटी लागू होगा। 

पीएम मोदी ने सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती शेख अब्दुलअजीज के निधन पर किया शोक व्यक्त

24-Sep-2025
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती और वरिष्ठ विद्वानों की परिषद के प्रमुख शेख अब्दुलअजीज बिन अब्दुल्ला बिन मोहम्मद अल अलशेख के निधन पर दुख जताया है। इसके साथ ही, उन्होंने सऊदी अरब के लोगों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती शेख अब्दुलअजीज बिन अब्दुल्लाह बिन मोहम्मद अल अलशेख के दुखद निधन पर गहरी संवेदना। इस दुख की घड़ी में हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं सऊदी अरब और उसके लोगों के साथ हैं।”
शेख का एक दिन पहले मंगलवार को 82 साल की आयु में निधन हो गया था। सऊदी अरब के शाही दरबार ने मंगलवार (स्थानीय समय) को सऊदी प्रेस एजेंसी (एसपीए) के माध्यम से जारी एक बयान में उनके निधन की पुष्टि की।
शेख अब्दुलअजीज का जन्म 30 नवंबर 1943 को मक्का में हुआ था। 7 साल की उम्र में वे अनाथ हो गए थे, लेकिन कम उम्र में ही उन्होंने कुरान को कंठस्थ कर लिया था। 20 साल की उम्र में अपनी आंखों की रोशनी खोने के बावजूद उन्होंने अपनी धार्मिक शिक्षा जारी रखी और बाद में शरिया का उन्नत अध्ययन किया।
देश के शीर्ष मौलवी पद पर पहुंचने से पहले उन्होंने सऊदी विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक परिषदों में भी कार्य किया। वर्ष 1999 में उन्हें ग्रैंड मुफ्ती नियुक्त किया गया, जिसके बाद वे सऊदी अरब के सर्वोच्च धार्मिक प्राधिकारी बन गए। उन्होंने फतवे जारी किए और देश की न्यायिक व्यवस्था को दिशा दी, जिससे दो दशकों से अधिक समय तक सऊदी समाज को आकार मिला।
उनकी जनाजे की नमाज अस्र की नमाज के बाद रियाद स्थित इमाम तुर्की बिन अब्दुल्ला मस्जिद में पढ़ी जाएगी। शाही आदेश के अनुसार, मक्का स्थित ग्रैंड मस्जिद, मदीना, और सऊदी अरब की अन्य मस्जिदों में जनाजे की नमाज अदा की जाएगी।
 

10 साल से निष्क्रिय खातों में ₹67,000 करोड़ जमा, RBI ने बैंकों को लौटाने के दिए निर्देश

24-Sep-2025
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों से अपील की है कि 67,000 करोड़ रुपए से अधिक से अनक्लेम डिपॉजिट उनके सही मालिकों को लौटाने के प्रयास तेज करें। अनक्लेम डिपॉजिट में निष्क्रिय बचत खाते और चालू खाते, मैच्योर हो चुकी एफडी, अनक्लेम डिविडेंड, ब्याज वारंट और बीमा आय शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन निष्क्रिय खातों के मालिकों का पता लगाने और उनका निपटान करने के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अक्टूबर से दिसंबर तक एक विशेष आउटरीच पहल की योजना बनाई गई है।
दस वर्षों तक निष्क्रिय रहने वाले बचत और चालू खातों में शेष राशि या मैच्योरिटी डेट से दस वर्षों के भीतर क्लेम न किए गए एफडी को अनक्लेम डिपॉजिट के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और बाद में बैंकों द्वारा केंद्रीय बैंक द्वारा संचालित डीईए कोष में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
आरबीआई की यह पहल कम साक्षरता और जागरूकता वाले क्षेत्रों को लक्षित करेगी और प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से विभिन्न भाषाओं में स्थानीय प्रचार करेगी।
राज्य स्तरीय बैंक समितियां (एसएलबीसी) अनक्लेम डिपॉजिट के आंकड़ों का आयु प्रोफाइल और बकेट-वार संकेंद्रण के आधार पर विश्लेषण करेंगी ताकि अधिक स्थानीयकृत विश्लेषण प्रदान किया जा सके, साथ ही जमाओं का पता लगाने और उनका निपटान करने के लिए विशेष प्रयास किए जा सकें।
उदगम पोर्टल, आरबीआई द्वारा शुरू किया गया एक केंद्रीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो जनता को भारत के विभिन्न बैंकों में अपनी अनक्लेम डिपॉजिट खोजने में मदद करता है। यह पोर्टल वर्तमान में लगभग 30 बैंकों की भागीदारी के साथ लगभग 90 प्रतिशत दावा न किए गए जमा मूल्य को कवर करता है।
बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण के अनुसार, सभी बीमा कंपनियों, जिनके पास पॉलिसीधारकों से 10 वर्ष से अधिक की अवधि के लिए दावा न की गई राशि है, को उसे हर वर्ष ब्याज सहित वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष में स्थानांतरित करना आवश्यक है।
इसके अलावा, दावा न की गई राशि को वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष में स्थानांतरित करने के बाद भी, पॉलिसीधारक या दावेदार 25 वर्ष तक की अवधि के लिए अपनी संबंधित पॉलिसियों के तहत देय राशि का दावा करने के पात्र बने रहते हैं।
वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष का उपयोग राष्ट्रीय वृद्धजन नीति और राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक नीति के अनुरूप वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को बढ़ावा देने वाली ऐसी योजनाओं के लिए किया जाता है।

भारत-यूके सीईटीए: बैलेंस्ड आईपी फ्रेमवर्क से स्टार्टअप्स और एमएसएमई को मिलेगा समर्थन

24-Sep-2025
नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा बुधवार को दी गई जानकारी के अनुसार, नीति निर्माताओं, डोमेन एक्सपर्ट्स, शिक्षाविदों और उद्योग प्रतिनिधियों ने एक सेमिनार में भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) प्रावधानों से जुड़े अवसरों और चिंताओं पर विचार-विमर्श किया।
केंद्र ने भारत-यूके सीईटीए के आईपीआर अध्याय पर सीटीआईएल सहयोग से वाणिज्य भवन में सेमिनार आयोजित किया
केंद्र के अनुसार, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने सेंटर फॉर ट्रेड एंड इंवेस्टमेंट लॉ (सीटीआईएल) के सहयोग से वाणिज्य भवन में भारत-यूके सीईटीए में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) अध्याय का रहस्य उजागर विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया।
बौद्धिक संपदा अधिकार अध्याय इनोवेशन को बढ़ावा देने और पहुंच सुनिश्चित करने के बीच एक संतुलित संतुलन बनाता है
सेमिनार में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) अध्याय इनोवेशन को बढ़ावा देने और पहुंच सुनिश्चित करने के बीच एक संतुलित संतुलन बनाता है। साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि ये प्रावधान भारत के आईपी फ्रेमवर्क का आधुनिकीकरण करते हुए जन स्वास्थ्य के लिए सुरक्षा उपायों को मजबूत करते हैं।
उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि इससे स्टार्टअप्स, एमएसएमई और ट्रेडिशनल प्रोड्यूसर सभी को समान रूप से लाभ होगा
इस सेमिनार में पेटेंट प्रक्रियाओं के सामंजस्य पर चिंताओं का समाधान किया गया और विशेषज्ञों ने कहा कि ये प्रक्रियात्मक सुधार हैं, जो किसी भी तरह से भारत की नियामक स्वायत्तता को प्रभावित नहीं करते। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि इससे स्टार्टअप्स, एमएसएमई और ट्रेडिशनल प्रोड्यूसर सभी को समान रूप से लाभ होगा।
सेमिनार में भारत-ब्रिटेन व्यापार वार्ता में भारतीय भौगोलिक संकेतकों के लिए मजबूत संरक्षण पर भी जोर दिया गया। पैनल ने समझौते से जुड़ी कई भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि आईपीआर अध्याय भारत की नीतिगत संभावनाओं को सीमित नहीं करता। बल्कि, यह भारत की अपनी विकासात्मक प्राथमिकताओं के अनुरूप नियम बनाने की क्षमता को मजबूत करता है। साथ ही कहा गया कि यह अध्याय भारत के मौजूदा कानूनी ढांचे को दर्शाता है और वैश्विक साझेदारों और निवेशकों को एक मजबूत और दूरदर्शी बौद्धिक संपदा व्यवस्था के प्रति देश की प्रतिबद्धता का सकारात्मक संकेत देता है।
 

 


पीएम मोदी ने देशवासियों को उपहारों की ई-नीलामी में शामिल होने के लिए किया आमंत्रित

24-Sep-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को विभिन्न आधिकारिक कार्यक्रमों और मुलाकातों के दौरान मिले उपहारों की एक खास कलेक्शन की ऑनलाइन नीलामी में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए देशवासियों से अपील की। इसे लेकर पीएम मोदी ने कुछ उपहारों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं। उन्होंने बताया कि इस नीलामी से मिलने वाली राशि ‘नमामि गंगे’ पहल में इस्तेमाल की जाएगी, जो गंगा नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए भारत का प्रमुख कार्यक्रम है।
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा…
पीएम मोदी ने कुछ उपहारों की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “पिछले कुछ दिनों से, मेरे अलग-अलग कार्यक्रमों के दौरान मुझे मिले उपहारों की ऑनलाइन नीलामी चल रही है। इस नीलामी में भारत की संस्कृति और रचनात्मकता को दर्शाने वाली बेहद रोचक कृतियां शामिल हैं। नीलामी में जरूर भाग लें।”
नीलामी से प्राप्त धनराशि नमामि गंगा प्रोजेक्ट को दान की जाएगी
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है कि नीलामी से प्राप्त धनराशि नमामि गंगा प्रोजेक्ट को दान की जाएगी। पीएम मोदी ने जिन उपहारों की तस्वीरें शेयर की हैं, उनमें कई पेंटिंग, शॉल और भारतीय संस्कृति को दर्शाने वाले उपहार शामिल हैं।
प्रधानमंत्री स्मृति चिन्ह ई-नीलामी का आयोजन संस्कृति मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय, दिल्ली के माध्यम से किया जाता है। साल 2019 में अपनी शुरुआत से ही यह नीलामी नागरिकों को प्रधानमंत्री मोदी को भेंट किए गए स्मृति चिन्हों को खरीदने के लिए आमंत्रित करती रही है।
हर साल लोक कला और हस्तशिल्प से लेकर खेल स्मृति चिन्हों तक हजारों चुनिंदा उपहारों की नीलामी की जाती है। हर साल ही नीलामी से प्राप्त धनराशि का पवित्र गंगा नदी को समर्पित नमामि गंगे परियोजना में योगदान के रूप में उपयोग किया जाता है।
इस बार प्रधानमंत्री मोदी को प्राप्त स्मृति चिन्हों की ई-नीलामी 17 सितंबर को सुबह 10 बजे (प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर) शुरू हुई और 2 अक्टूबर को शाम 5 बजे बंद होगी। सिर्फ इस समयसीमा तक नीलामी की जाने वाली वस्तुएं एनजीएमए, दिल्ली में सार्वजनिक रूप से अवलोकन के लिए और वेबसाइट पर ऑनलाइन बोली लगाने के लिए उपलब्ध हैं। नीलामी में भाग लेने के लिए pmmementos.gov.in पर विजिट करें। 

यूएनजीए में एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से की मुलाकात, व्यापार समझौते को मिली रफ्तार

23-Sep-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। यह मुलाकात दोनों नेताओं की इस साल की व्यापारिक तनातनी के बाद पहली आमने-सामने की बातचीत थी। भारत-अमेरिका संबंधों में हाल के महीनों में तनाव देखने को मिला था, खासकर तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय सामानों पर 25% टैरिफ लगा दिया था। इसके बावजूद दोनों देश अब संबंध सुधारने और एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में काम कर रहे हैं। इस संबंध में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की अगुवाई में भारतीय प्रतिनिधिमंडल वॉशिंगटन में वार्ता कर रहा है।
इससे पहले 16 सितंबर को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के अधिकारियों के भारत दौरे के दौरान “सकारात्मक चर्चा” हुई और दोनों पक्षों ने जल्द ही पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम तेज करने पर सहमति जताई। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी भरोसा जताया है कि भारत और अमेरिका के बीच समझौता करने में “कोई कठिनाई नहीं” होगी। इस मुलाकात से पहले जयशंकर और रुबियो की बातचीत जुलाई में वॉशिंगटन में 10वें क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई थी। जनवरी में भी दोनों नेताओं की चर्चा हुई थी, लेकिन व्यापारिक विवादों के बाद यह उनकी पहली सीधी मुलाकात रही।
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया आदेश से अमेरिका में भारतीय पेशेवरों के बीच चिंता बढ़ी है। नए आदेश के तहत एच-1बी वीजा के लिए नए आवेदकों को 1 लाख डॉलर की फीस देनी होगी। हालांकि व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि यह शुल्क केवल नए आवेदनकर्ताओं पर लागू होगा, मौजूदा वीजा धारकों पर नहीं। इस महीने की शुरुआत में जब ट्रंप ने सर्जियो गोर को भारत में अमेरिकी राजदूत नियुक्त करने के लिए नामित किया, तो रुबियो ने सीनेट की विदेश मामलों की समिति के सामने भारत को अमेरिका के “सबसे अहम रिश्तों में से एक” बताया। उन्होंने कहा, “21वीं सदी की कहानी इंडो-पैसिफिक में लिखी जाएगी और भारत इसका केंद्र है। यही कारण है कि हमने अपने कॉम्बैटेंट कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड रखा।”
जयशंकर और रुबियो की यह मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों में नई ऊर्जा भरने और व्यापारिक मतभेदों को दूर करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

अमेरिका के लिए भारत ‘अत्यंत महत्वपूर्ण’: मार्को रूबियो

23-Sep-2025
नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि भारत उनके देश के लिए ‘अत्यंत महत्वपूर्ण’ है। इसके साथ ही, उन्होंने व्यापार के क्षेत्र में भारत के साथ चल रहे सहयोग का स्वागत किया। अमेरिका और भारत ने मिलकर एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई, जिसमें क्वाड के माध्यम से भी काम होगा।
सोमवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के बाद, रुबियो ने कहा कि अमेरिका के लिए भारत बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, दवाइयां, महत्वपूर्ण खनिज और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर भारत सरकार के निरंतर सहयोग की सराहना की।
यह बयान उस वक्त सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए और भारत को लेकर कई कठोर बयान दिए, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 75वें जन्मदिन पर बधाई दी।
इसके अलावा, विदेश मंत्री जयशंकर के साथ रुबियो की मुलाकात महत्वपूर्ण थी, क्योंकि यह उनकी उस दिन की पहली आधिकारिक बैठक थी। रुबियो संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के लिए आए विश्व नेताओं के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कर रहे हैं।
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि बातचीत के दौरान द्विपक्षीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में प्रगति के लिए निरंतर संवाद की आवश्यकता पर हम सहमत हुए। उन्होंने कहा कि वे संपर्क में रहेंगे। कॉन्फ्रेंस रूम में जाने से पहले, वे बाहर मौजूद मीडिया के सामने सौहार्दपूर्ण ढंग से आए, हाथ मिलाया, लेकिन सवालों के जवाब देने से मना कर दिया। बाद में, जयशंकर ने भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने एक्स पोस्ट में कहा कि वे दोनों अमेरिका-भारत संबंधों को और मजबूत करने के लिए उत्सुक हैं। गोर को दक्षिण और मध्य एशिया के लिए ट्रंप का विशेष दूत भी बनाया गया है। उनकी नियुक्ति को सीनेट की मंजूरी की जरूरत है, जैसा कि सभी राजदूत पदों के लिए होता है। 
 

पंजाब : बाढ़ के बाद सीमा पर हालात सामान्य, बीएसएफ चौकियों की मरम्मत तेज़

23-Sep-2025
गुरदासपुर। पाकिस्तान से सटे पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का पानी कम होने लगा है, जिससे बीएसएफ के जवान वापस आकर पोस्ट को सही करने लगे हैं। बीएसएफ के बॉर्डर आउट पोस्ट को बाढ़ ने काफी नुकसान पहुंचाया था।  
भारत-पाकिस्तान सीमा पर बाढ़ आने से बीएसएफ को भारी नुकसान पहुंचा है। कई जगह पर बाढ़ का पानी आने से सीमा सुरक्षा बल को दर्जनों चौकियां खाली करनी पड़ी थीं। इस दौरान बीएसएफ जवानों ने 550 आम नागरिकों को भी अपने साथ बाढ़ से सुरक्षित निकाला था। बाढ़ की वजह से करतारपुर कॉरिडोर को भी नुकसान पहुंचा था।
बीएसएफ के जवानों ने अपने साथ बाढ़ में फंसे लोगों को भी सुरक्षित निकाला था
गुरदासपुर सेक्टर के बीएसएफ डीआईजी जेके बर्डी ने बताया कि गुरदासपुर में आई बाढ़ ने सबसे पहले बीएसएफ की बॉर्डर आउट पोस्ट को नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद भी कुछ जवानों को बॉर्डर पर तैनात किया गया था। उन्होंने कहा कि बीएसएफ के जवानों ने अपने साथ बाढ़ में फंसे लोगों को भी सुरक्षित निकाला था। बाढ़ के दौरान पानी का बहाव काफी तेज था, इस वजह से हमारी अधिकतर चौकियां डूब गई थीं।
उन्होंने बीएसएफ और आर्मी के कमांडरों का भी धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने इस मुश्किल घड़ी में 1,200 के करीब बीएसएफ जवानों और 550 के करीब नागरिकों को बाढ़ से सुरक्षित बाहर निकाला था। उन्होंने बताया कि बॉर्डर पर पानी भरे होने के बाद भी हर एक बॉर्डर आउटपोस्ट पर 15 से 20 जवान तैनात थे ताकि दुश्मन की हरकत पर लगातार नजर बनी रहे और देश के नागरिक अपने घरों में सुरक्षित रहें। अब बाढ़ का पानी घटने के बाद बीएसएफ की जो बॉर्डर आउट पोस्ट का नुकसान हुआ है, उसे सही किया जा रहा है और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में मेडिकल कैंप लगाने का काम शुरू कर दिया गया है ताकि अब बीमारियों से लोगों को बचाया जा सके।
उन्होंने बताया कि श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर को भी पानी ने नुकसान पहुंचाया है। दर्शनीय स्थल को जाने वाला रास्ता पूरी तरह से टूट चुका है, जिसे दोबारा सही करने का काम चल रहा है ताकि श्रद्धालुओं को श्री करतारपुर साहिब पहुंचने में परेशानी न हो।
 

‘नया साल शांति और समृद्धि लाए’, राष्ट्रपति मुर्मु ने इजरायल को रोश हशनाह की दीं शुभकामनाएं

23-Sep-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग और विश्व भर की यहूदी समुदाय को रोश हाशनाह की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। यह यहूदी नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। यह त्योहार, जिसमें प्रार्थना, पारंपरिक भोजन, नवीनीकरण और शांति के प्रतीक रीति-रिवाज शामिल होते हैं, सांस्कृतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रपति ने एक्स पर कहा
राष्ट्रपति मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “माननीय इसहाक हर्जोग, भारत सरकार और जनता की ओर से, मैं आपको और यहूदी समुदाय को रोश हशनाह की हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं। कामना है कि नया साल सभी के लिए शांति, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य लेकर आए।”
पीएम मोदी ने सोमवार को दुनियाभर के यहूदी समुदाय को दी थी बधाई
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पहले ही इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और दुनिया भर के यहूदी समुदाय को बधाई दी थी। पीएम मोदी ने पोस्ट में कहा, “शना टोवा! मेरे मित्र प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, इजरायल के लोगों और दुनिया भर के यहूदी समुदाय को रोश हशनाह की हार्दिक शुभकामनाएं। मैं सभी के लिए शांति, आशा और अच्छे स्वास्थ्य से भरा नया वर्ष की कामना करता हूं।”
हाल के वर्षों में भारत और इजरायल ने अपने संबंधों को और मजबूत किया है। साथ ही, रक्षा, साइबर सुरक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। पीएम मोदी और नेतन्याहू के बीच व्यक्तिगत संबंध को अक्सर दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी का मुख्य कारण बताया जाता है।
यह शुभकामनाओं का आदान-प्रदान पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी को उनके 75वें जन्मदिन पर नेटन्याहू की शुभकामनाओं के बाद हुआ है। इजरायल के प्रधानमंत्री ने दुनिया के कई नेताओं, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल थे, के साथ प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई दी।
इस साल रोश हशनाह पर्व गाजा में चल रहे संघर्ष के बीच मनाया जा रहा है, जिसमें पिछले एक साल में हजारों लोगों की जान गई है। भारत ने इस क्षेत्र में शांति, संयम और बातचीत की लगातार वकालत की है, जबकि वह इजरायल के साथ अपने करीबी संबंध भी बनाए हुए है।

 




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