ब्रेकिंग न्यूज

देश-विदेश

केंद्र सरकार गन्ना अनुसंधान के लिए ICAR में विशेष टीम का करेगी गठन : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

01-Oct-2025
नई दिल्ली ( शोर संदेश )। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को घोषणा की कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) में गन्ना अनुसंधान और नीति के लिए एक अलग टीम बनाई जाएगी। इस पहल का उद्देश्य किसानों और चीनी उद्योग के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा। शिवराज सिंह ने गन्ने के विकास से जुड़ी एक सेमिनार में बताया कि गन्ने की 238 किस्म उच्च चीनी उत्पादन देती है, लेकिन यह लाल सड़न रोग के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने एकल फसल के खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया, जैसे कि मिट्टी के पोषक तत्वों की कमी और नाइट्रोजन संधारण में कमी, और सुझाव दिया कि दाल और तिलहन जैसी फसलों के साथ इंटरक्रॉपिंग (साथ में उगाना) पर विचार किया जाए।
इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ने उत्पादन लागत कम करने, मशीनरी बढ़ाने, चीनी वसूली दर सुधारने, “per drop, more crop” के सिद्धांत के तहत कुशल सिंचाई अपनाने, बायोप्रोडक्ट्स और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने, और प्राकृतिक खेती अपनाकर उर्वरक पर निर्भरता कम करने पर भी जोर दिया। उन्होंने किसानों को भुगतान में देरी जैसी पुरानी समस्याओं को भी उजागर किया और कहा कि चूंकि मिलों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसका मुख्य प्रभाव किसानों पर पड़ता है। उन्होंने कृषि मजदूरों की कमी पर भी चिंता जताई और प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और मशीनरी बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कृषि मंत्री ने कहा, “मैं ICAR से आग्रह करता हूं कि गन्ना अनुसंधान के लिए एक विशेष टीम बनाई जाए, जो व्यावहारिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे। अनुसंधान का लाभ किसानों और उद्योग दोनों को मिलना चाहिए। ऐसा अनुसंधान जो किसानों के काम न आए, उसका कोई अर्थ नहीं है।” ICAR के महानिदेशक और DARE सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने चार मुख्य अनुसंधान प्राथमिकताओं को उजागर किया। इसके तहत अनुसंधान एजेंडा तय करना, विकास और उद्योग से जुड़ी चुनौतियों से निपटना, और नीति संबंधी सुझाव देने पर चर्चा हुई। उन्होंने उर्वरक की दक्षता बढ़ाने, सूक्ष्म-सिंचाई (micro-irrigation) को बढ़ाने और फसल विविधीकरण पर जोर दिया, जिससे स्थिरता और किसानों की आय मजबूत हो।
वहीं डॉ. देवेंद्र कुमार यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), ने कहा कि 238 किस्म प्रारंभ में लोकप्रिय थी, लेकिन इससे एकल फसल के खतरे बढ़ते हैं। उन्होंने नई किस्मों के लिए तीन साल के परीक्षण चक्र और पैदावार अंतर (yield gaps) का विश्लेषण करने की आवश्यकता पर बल दिया। ICAR के डॉ. राजबीर सिंह ने भी सेमिनार में अपने विचार साझा किए। सेमिनार के अंत में यह आश्वासन दिया गया कि भविष्य की गन्ना अनुसंधान रणनीतियों में किसान-केंद्रित सिफारिशों को शामिल किया जाएगा।
 

प्रवीर रंजन बने CISF के नए महानिदेशक, आधुनिकीकरण और पारदर्शिता पर जोर

01-Oct-2025
नई दिल्ली ( शोर संदेश )। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को नया प्रमुख मिल गया है। 1993 बैच के AGMUT कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रवीर रंजन ने आज मंगलवार को CISF के 32वें महानिदेशक (DG) का पदभार संभाला। CISF मुख्यालय में आयोजित समारोह में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उन्होंने बल के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत भी की।
अप्रैल 2024 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत रंजन अब तक CISF में विशेष महानिदेशक (एयरपोर्ट सुरक्षा) के रूप में तैनात थे और देशभर के महत्वपूर्ण हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे थे। 32 साल लंबे करियर में उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया है। दिल्ली पुलिस में स्पेशल पुलिस आयुक्त (क्राइम और EOW), CBI में DIG, और चंडीगढ़ में पुलिस महानिदेशक (2022-24) के रूप में वे अपनी दक्षता दिखा चुके हैं। CISF में आने से पहले वे ADG भी रह चुके हैं।
प्रवीर रंजन का शैक्षणिक बैकग्राउंड भी मजबूत है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में परास्नातक, उस्मानिया विश्वविद्यालय से पुलिस प्रबंधन में मास्टर, सिंगापुर नेशनल यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक मैनेजमेंट में मास्टर तथा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली से LLM की उपाधि प्राप्त की है। सेवाओं में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 2009 में राष्ट्रपति पुलिस पदक (मेधावी सेवा) और 2016 में राष्ट्रपति पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा) से सम्मानित किया गया था।
पदभार संभालने के बाद अपने पहले संबोधन में उन्होंने कहा कि CISF को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इसके लिए बल में आधुनिकीकरण, कल्याणकारी दृष्टिकोण और पारदर्शी प्रशासन पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्रालय के निर्देशों को प्राथमिकता से लागू किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा और पुलिसिंग में उनके अनुभव और गहन शैक्षणिक पृष्ठभूमि के कारण CISF को नई दिशा और मजबूती मिलेगी। उम्मीद की जा रही है कि उनके कार्यकाल में CISF न केवल राष्ट्रीय स्थापनाओं की सुरक्षा को और मजबूत करेगा, बल्कि आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार होगा।
 

पीएम मोदी ने सीआर पार्क और काली बाड़ी मंदिर में की पूजा-अर्चना, यातायात पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

01-Oct-2025
नई दिल्ली । ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अष्टमी के अवसर पर दक्षिण दिल्ली के चित्तरंजन पार्क (सीआर पार्क) स्थित दुर्गा पूजा पंडाल और काली बाड़ी मंदिर में मां दुर्गा और मां काली के दर्शन किए। उन्होंने आरती उतारी, पूजा-अर्चना की और माथे पर तिलक लगाया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भी प्रधानमंत्री के साथ माता के दर्शन किए। राजधानी दिल्ली में हर साल सीआर पार्क की दुर्गा पूजा विशेष आकर्षण का केंद्र होती है। यहां भव्य पंडाल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें दिल्ली-एनसीआर सहित दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। सीआर पार्क स्थित काली मंदिर परिसर, जिसकी स्थापना 1970 के दशक में हुई थी, बंगाली समुदाय के लिए लंबे समय से आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी के आगमन से पहले विशेष सुरक्षा समूह (SPG) ने सोमवार को सुरक्षा व्यवस्थाओं का आकलन किया था। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत स्थानीय लोगों को पंडाल और मंदिर क्षेत्र की ओर जाने वाली मुख्य सड़कों पर खड़े सभी वाहनों को हटाने का निर्देश दिया गया। भीड़ और उत्सव के कारण दिल्ली यातायात पुलिस ने लोगों को पहले से सचेत किया है। पुलिस की एडवाइजरी के अनुसार, आउटर रिंग रोड (पंचशील से ग्रेटर कैलाश तक), लाल बहादुर शास्त्री मार्ग, जेबी टीटो मार्ग, इंद्र मोहन भारद्वाज मार्ग और सीआर पार्क मेन रोड पर भारी जाम की संभावना है। इसके अलावा, गुरुद्वारा रोड, बिपिन चंद्र पाल मार्ग और सीआर पार्क व ग्रेटर कैलाश-2 की कई आंतरिक सड़कों पर वाहनों की आवाजाही सीमित रहेगी। पंचशील, आईआईटी और नेहरू प्लेस फ्लाईओवर के नीचे से गुजरने वाले रास्तों को भी डायवर्ट किया गया है।
हल्के और भारी मालवाहक वाहनों को अन्य मार्गों से भेजा जाएगा। यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए एमजी रोड, अरबिंदो मार्ग, मथुरा रोड, लाला लाजपत राय रोड और महरौली-बदरपुर रोड जैसी वैकल्पिक सड़कों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। ये यातायात प्रतिबंध 2 अक्टूबर तक प्रभावी रहेंगे।
 

आईएमडी ने आज सौराष्ट्र, कच्छ, गुजरात, कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र में भारी वर्षा की दी चेतावनी

30-Sep-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने  सोमवार को सौराष्ट्र, कच्छ, गुजरात, कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने का अनुमान लगाया है। आईएमडी ने अगले 6 दिनों तक (30 सितंबर को छोड़कर) कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र में अधिकांश कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश तूफान की संभावना जताई है। वहीं, 30 सितंबर को सौराष्ट्र और कच्छ में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश और बहुत भारी बारिश की संभावना है।
एक बयान में आईएमडी ने कहा 29 और 30 सितंबर को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में 2 से 4 अक्टूबर तक पश्चिम बंगाल और सिक्किम में, 1 से 4 अक्टूबर तक बिहार में 2 से 4 अक्टूबर तक झारखंड में, 5 अक्टूबर को पश्चिम मध्य प्रदेश में, 4 और 5 अक्टूबर को पूर्व मध्य प्रदेश, विदर्भ में, 29 सितंबर से 3 अक्टूबर तक छत्तीसगढ़ तथा ओडिशा में अधिकांश/कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश/तूफान के साथ अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।
इसके अलावा, 2 अक्टूबर को गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में, 3 और 4 अक्टूबर को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में, 4 और 5 अक्टूबर को बिहार में बहुत भारी बारिश की संभावना है।
मौसम विभाग ने आज सोमवार को आंध्र प्रदेश, गुजरात, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ हिस्सों में गरज के साथ बारिश और बिजली गिरने की भविष्यवाणी की है। आने वाले 4-5 दिनों के दौरान इन क्षेत्रों में इसी तरह का मौसम रहने की उम्मीद है।
वहीं, उत्तर-पूर्व भारत में 30 सितंबर से 5 अक्टूबर तक असम और मेघालय में, 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में, 1 से 5 अक्टूबर तक अरुणाचल प्रदेश में कई कुछ स्थानों पर हल्की व मध्यम बारिश तूफान के साथ अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। इसके अतिरिक्त 2 और 3 अक्टूबर को असम और मेघालय में बहुत भारी बारिश की संभावना है।
 

दिल्ली-एनसीआर बना देश का सबसे बड़ा थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स हब

30-Sep-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) दिल्ली-एनसीआर देश में सबसे बड़ा थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभरा है। 2021 से अब तक इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कुल लीजिंग एक्टिविटी में इसका हिस्सा एक-चौथाई यानी 25 प्रतिशत है। यह जानकारी हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दी गई। 
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के बाद 24 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ मुंबई और 16 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बेंगलुरु का स्थान आता है
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के बाद 24 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ मुंबई और 16 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बेंगलुरु का स्थान आता है। सीबीआरई की एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, “चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद सहित टॉप छह शहरों ने 2021 से इस वर्ष की पहली छमाही के बीच कुल 3पीएल लीजिंग एक्टिविटी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा लिया।”
ये कंपनियां देश के लॉजिस्टिक्स रियल एस्टेट मार्केट में सबसे बड़ी मांग बढ़ाने वाले कारक के रूप में उभरी हैं
3पीएल कंपनियां अपने ग्राहकों की पूरी सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन संभालती हैं, जिससे वे अपने मुख्य व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। ये कंपनियां देश के लॉजिस्टिक्स रियल एस्टेट मार्केट में सबसे बड़ी मांग बढ़ाने वाले कारक के रूप में उभरी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2021 और 2024 के बीच उन्होंने इस सेक्टर की कुल लीजिंग एक्टिविटी का 40-50 प्रतिशत हिस्सा लिया
रिपोर्ट के अनुसार, 2021 और 2024 के बीच उन्होंने इस सेक्टर की कुल लीजिंग एक्टिविटी का 40-50 प्रतिशत हिस्सा लिया। 2025 की पहली छमाही में इनका हिस्सा 30 प्रतिशत से अधिक था। सीबीआरई के इंडिया, साउथ-ईस्ट एशिया, मिडिल ईस्ट एंड अफ्रीका के चेयरमैन और सीईओ अंशुमन मैगजीन ने कहा, “दिल्ली-एनसीआर की रणनीतिक लोकेशन, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स सेक्टर ने इसे इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण हब बना दिया है।”
हालांकि, टियर-II और III शहर भी नए ग्रोथ हब के रूप में उभर रहे हैं
उन्होंने आगे कहा, “हालांकि, टियर-II और III शहर भी नए ग्रोथ हब के रूप में उभर रहे हैं। इन शहरों में बढ़ती खपत और कम जमीन की लागत से 3पीएल कंपनियों को मेट्रो शहरों से आगे विस्तार करने और खपत केंद्रों के पास स्थानीय हब बनाने के लिए प्रोत्साहित करने की संभावना है।”
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे की गई 3पीएल कंपनियों में से लगभग 76 प्रतिशत अब अपने लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन में वेयरहाउस मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही हैं। इसके अलावा, 3पीएल कंपनियां इंटरनेट ऑफ थिंग्स सेंसर, कन्वेयर एंड सॉर्टेशन सिस्टम और गुड्स-टू-पर्सन पिकिंग सिस्टम जैसी टेक्नोलॉजी अपना रही हैं, जो स्मार्ट, ऑटोमेटेड वेयरहाउस की ओर एक बड़े बदलाव को दर्शाता है।
2021 से 2025 की पहली छमाही के दौरान 3पीएल फर्म भारत में वैल्यू और वॉल्यूम को लेकर 1,00,000 वर्ग फुट से अधिक के ‘बिग-बॉक्स’ लीजिंग की मुख्य वजह थीं। यह ई-कॉमर्स, रिटेल और मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए स्केलेबल और फ्यूचर-रेडी वेयरहाउसिंग सॉल्यूशन की बढ़ती जरूरत को दर्शाता है। सीबीआरई इंडिया के लीजिंग सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर राम चंदनानी ने कहा, “यह रणनीति कंपनियों को तेजी से स्केल करने के साथ-साथ लागत कम करने में मदद करती है।
 

यूपीआईटीएस : खादी सिर्फ कपड़ा नहीं, आत्मनिर्भरता और सतत जीवनशैली का प्रतीक बनकर उभरा

30-Sep-2025
‘नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025’ में खादी का जादू छाया रहा। खादी न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनकर सामने आई, बल्कि फैशन की दुनिया में अपनी आधुनिक पहचान भी दर्ज कराई। शानदार फैशन शो में मॉडल्स ने खादी के परिधानों की ऐसी श्रृंखला प्रस्तुत की, जिसमें परंपरागत शिल्प कौशल और आधुनिक डिजाइन का अनोखा संगम देखने को मिला। इसने यह संदेश दिया कि खादी ‘ट्रेडिशन टू ट्रेंड’ की यात्रा तय कर चुकी है और अब वैश्विक फैशन का हिस्सा बन रही है।
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार लोगों से स्वदेशी अपनाने की अपील कर रहे हैं। खादी भी स्वदेशी परिधानों का महत्वपूर्ण अंग है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को आत्मसात करते हुए उत्तर प्रदेश ने खादी और हैंडलूम को नई पहचान दी है। योगी सरकार खादी को सिर्फ परिधान तक सीमित नहीं मानती, बल्कि इसे आत्मनिर्भर भारत और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली का मजबूत आधार मानती है।
प्रदेश सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना ने हजारों बुनकरों और कारीगरों को सीधा लाभ पहुंचाया है। सरकार का लक्ष्य है कि खादी को स्थानीय से वैश्विक स्तर तक ब्रांड बनाकर उत्तर प्रदेश को ‘हैंडलूम हब’ के रूप में स्थापित किया जाए। राज्य में खादी उत्पादों की खपत लगातार बढ़ रही है। युवाओं में टिकाऊ फैशन को लेकर बढ़ती जागरूकता ने खादी को आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बना दिया है। यही वजह है कि आज खादी को ‘फैब्रिक ऑफ फ्यूचर’ कहा जाने लगा है।
‘यूपीआईटीएस 2025’ में खादी की प्रस्तुति ने यह स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश न केवल परंपरा को संजो रहा है, बल्कि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप उसे वैश्विक मंच पर भी स्थापित कर रहा है।
सीएम योगी का कहना है कि सरकार का प्रयास है कि खादी को सिर्फ एक कपड़े के रूप में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, कारीगरी और सतत विकास के प्रतीक के रूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाए। सरकार का प्रयास इसी दिशा में है। उत्तर प्रदेश ने खादी को वैश्विक फैशन जगत में उतारकर दुनिया को यह दिखाया है कि स्थानीय शिल्प और आत्मनिर्भरता से भी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई जा सकती है।

भारतीय डिस्कॉम का परिचालन घाटा वित्त वर्ष 26 में एक तिहाई कम होने का अनुमान: रिपोर्ट

30-Sep-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) राज्य बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का परिचालन घाटा चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 26) में एक तिहाई घटकर लगभग 8,000-10,000 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 12,000-15,000 करोड़ रुपए था। यह जानकारी सोमवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई।  
परिचालन दक्षता में सुधार, कुछ प्रमुख राज्यों में टैरिफ वृद्धि की मंजूरी और औसत बिजली खरीद लागत (एपीपीसी) में मामूली कमी, घाटा कम होने की प्रमुख वजह हैं
परिचालन दक्षता में सुधार, कुछ प्रमुख राज्यों में टैरिफ वृद्धि को मंजूरी और औसत बिजली खरीद लागत (एपीपीसी) में मामूली कमी घाटा कम होने की वजह है। क्रिसिल रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “परिचालन घाटे में कमी आने से डिस्कॉम्स के लिए ऋण वृद्धि की गति धीमी हो गई है, जिससे उनके ऋण मैट्रिक्स में कुछ सुधार हुआ है।” हालांकि, राज्य सब्सिडी पर उनकी निर्भरता बनी हुई है, कुल ऋण भार अभी भी ऊंचा बना हुआ है और ऋण चुकाने हेतु नकदी संचय के उच्च स्तर तक पहुंचने के लिए औसत राजस्व प्राप्ति (एआरआर) में और सुधार की आवश्यकता होगी।
इसके अलावा, वाणिज्यिक और औद्योगिक (सीएंडआई) यूजर्स द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद के लिए ओपन एक्सेस को अपनाने में वृद्धि से उत्पन्न जोखिमों के प्रति डिस्कॉम अभी भी संवेदनशील हैं। क्रिसिल रेटिंग्स के उप मुख्य रेटिंग अधिकारी मनीष गुप्ता ने कहा, “इस वित्तीय वर्ष में, परिचालन अंतर पिछले वित्तीय वर्ष के 12 पैसे से घटकर 5-10 पैसे और वित्तीय वर्ष 20 के 60 पैसे से काफी कम होने की उम्मीद है।”
उन्होंने आगे कहा कि इस वित्तीय वर्ष में सुधार हमारे सैपंल सेट में शामिल 11 राज्यों में से 4 में स्वीकृत टैरिफ वृद्धि और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) युक्तिकरण के तहत कोयले पर क्षतिपूर्ति उपकर को हटाने से प्रेरित होगा, जिससे एपीपीसी में 4-6 पैसे प्रति यूनिट की कमी आएगी। परिचालन दक्षता में सुधार पिछले वित्त वर्ष में कुल तकनीकी और वाणिज्यिक (एटीएंडसी) घाटे में 15 प्रतिशत की कमी से स्पष्ट दिखता है, जो वित्त वर्ष 20 में 19 प्रतिशत था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सुधार बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश के बाद आया है, जिसमें कंडक्टरों और ट्रांसफार्मरों का प्रतिस्थापन, फीडर पृथक्करण और केबलों को भूमिगत करना शामिल है। पिछले पांच वित्त वर्षों में, परिचालन अंतर लगातार कम हुआ है, जो उच्च सब्सिडी प्राप्ति और कुछ राज्यों द्वारा ईंधन और बिजली खरीद मूल्य समायोजन तंत्र को अपनाने के कारण एआरआर में 110 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि से प्रेरित है। क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक गौतम शाही ने कहा, “हालांकि 30 राज्य डिस्कॉम का कर्ज पिछले वित्त वर्ष के 6.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर इस वित्त वर्ष में 6.7-6.8 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा, लेकिन उनका ब्याज कवरेज पिछले वित्त वर्ष के 1.2 गुना से बढ़कर 1.3 गुना हो जाएगा।”

असम की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान देंगे GST सुधार, चाय से लेकर पर्यटन तक हर सेक्टर को फायदा

30-Sep-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) असम की अर्थव्यवस्था को हाल ही में लागू किए गए GST सुधारों से नई मजबूती मिलने जा रही है। राज्य की पहचान यहां की चाय, रेशम, हस्तशिल्प, पर्यटन और खास कृषि उत्पादों से है, ऐसे में अब टैक्स कम होने से उपभोक्ताओं को बचत होगी और किसानों, बुनकरों तथा कामगारों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। असम के चाय उद्योग में लगभग 6.84 लाख लोग काम करते हैं। हाल ही में चाय पर GST को घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे चाय की कीमतों में लगभग 11% की कमी आएगी। 2024 में भारत ने 255 मिलियन किलोग्राम चाय का निर्यात किया था, और अब सस्ती कीमतों से असम की चाय की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और मजबूत होगी। घरेलू स्तर पर गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर पर अधिक मात्रा में चाय बिकेगी, जिससे चाय बागानों की आय और मजदूरों की मजदूरी में सुधार होगा। खासकर असम की GI टैग्ड चाय उत्पादकों को लगभग 11% की लागत में राहत मिलेगी। खाद और अन्य इनपुट पर भी टैक्स घटने से उत्पादन खर्च कम होगा।
वहीं असम के रेशमी कपड़े और हस्तशिल्प उद्योग में 12.83 लाख बुनकर और 12.46 लाख करघे जुड़े हुए हैं। मूगा सिल्क उत्पादन में असम का योगदान देशभर का 95% है। GST को 5% करने से इन उत्पादों की कीमत लगभग 6.25% तक कम हो जाएगी। इससे बुनकरों को अपने उत्पादों के लिए अच्छे दाम मिलेंगे और निर्यात भी बढ़ेगा। गामोसा जैसी सांस्कृतिक पहचान वाले उत्पाद पर भी टैक्स घटने से ज्यादा बिक्री होगी। इसी तरह असम जाबी, अशरिकांडी टेराकोटा, मिशिंग हैंडलूम, पानी मेटेका और बिहू ढोल जैसे उत्पादों को भी फायदा होगा।
असम में काजीरंगा-ब्रह्मपुत्र पर्यटन सर्किट, माजुली, पोबितोरा और गुवाहाटी जैसे प्रमुख स्थान लाखों लोगों को रोजगार देते हैं। 2015-16 में पर्यटन से जुड़े 6.51 लाख नौकरियां थीं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। होटल के 7,500 रुपये तक के किराए वाले कमरों पर GST घटकर 5% हो गया है, जिससे पर्यटकों के लिए रहना सस्ता होगा और आने वालों की संख्या बढ़ेगी। पर्यटन से जुड़े होटल कर्मचारी, टूर गाइड, नाविक और स्थानीय युवा इससे लाभान्वित होंगे। होटल के जरूरी सामान जैसे टॉयलेटरीज, पैकेज्ड पानी और खाने-पीने की चीजें भी अब 5% GST पर उपलब्ध होंगी।
असम के कई खास कृषि उत्पाद GI टैग्ड हैं। GST सुधार से इनकी प्रोसेस्ड चीजें सस्ती होंगी और किसानों को ज्यादा दाम मिलेगा। गोहाटी, नलबाड़ी, बारपेटा और दर्रांग जैसे क्षेत्रों में उगाया जाने वाला GI जोहा चावल अब 5% GST स्लैब में है। इससे तैयार उत्पादों पर लगभग 6-11% की लागत में कमी आएगी। यह यूरोप, वियतनाम और मिडिल ईस्ट में निर्यात होता है। बोका साउल (मैजिक राइस) को ब्रह्मपुत्र घाटी और अपर असम में छोटे किसान उगाते हैं। इस पर GST 12%/18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। कीमतों में 6–11% कमी आएगी जिससे किसानों को फायदा होगा। नगांव, सोनितपुर और कामरूप जिलों में उगाए जाने वाले काजी नेमु (असम नींबू) से बने जूस, अचार और सॉस पर टैक्स घटकर 5% हो गया है। इससे कीमतें 6.25-11% तक कम होंगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी। सोनितपुर की GI टैग्ड तेजपुर लीची भी अब 5% GST स्लैब में है। लीची से बने पल्प, जैम और जेली अब लगभग 6.25% सस्ते हो जाएंगे। इससे उपभोक्ताओं को सस्ती कीमत पर उत्पाद मिलेंगे और किसानों को अधिक आमदनी होगी।
 

राष्ट्रपति मुर्मु से मिले आईएसएस, आईएसडीएस और केन्द्रीय अभियांत्रिकी सेवा के प्रोबेशनर अधिकारी

30-Sep-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारतीय सांख्यिकी सेवा (आईएसएस), भारतीय कौशल विकास सेवा (आईएसडीएस) और केन्द्रीय अभियांत्रिकी सेवा (सीईएस) के प्रोबेशनर अधिकारियों ने सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में भेंट की। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अधिकारियों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा दी और कहा कि ईमानदारी और समर्पण से सेवा करके वे भारत को अधिक समृद्ध, सक्षम और समावेशी बना सकते हैं।
भारतीय सांख्यिकी सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ठोस नीति निर्माण और क्रियान्वयन का आधार सटीक सांख्यिकीय विश्लेषण है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों की विश्वसनीयता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण किसी भी निर्णय को प्रभावी बनाते हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे देश की बढ़ती डेटा आवश्यकताओं को विशेषज्ञता और पारदर्शिता से पूरा करेंगे।
भारतीय कौशल विकास सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कौशल और ज्ञान किसी भी देश की वास्तविक संपत्ति हैं। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में वही देश आगे बढ़ते हैं जिनके पास उच्च प्रशिक्षित कार्यबल होता है। भारत के लिए यह आवश्यक है कि युवा उन्नत तकनीकी कौशलों को अपनाएं। उन्होंने भरोसा जताया कि आईएसडीएस अधिकारी देश के लिए एक मजबूत और भविष्य-उन्मुख कार्यबल तैयार करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
केन्द्रीय अभियान्त्रिकी सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इंजीनियर तकनीकी प्रगति और आर्थिक विकास के आधार स्तंभ हैं। सरकार की बुनियादी ढांचा विकास योजनाओं में अभियान्त्रिकी सेवाओं की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्होंने आग्रह किया कि विकास परियोजनाओं में टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल उपायों को अपनाया जाए। उन्होंने यह जानकर संतोष व्यक्त किया कि सीपीडब्ल्यूडी हरित तकनीकों को बढ़ावा दे रहा है।
राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि वे केवल नीतियों को लागू करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने अनुभव और फीडबैक से नीति-निर्माण में भी सहयोग करें। समाज के कमजोर और हाशिए पर खड़े वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही वास्तविक प्रगति का संकेत है। राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारी यदि सेवा-भाव, निष्ठा और पारदर्शिता के साथ कार्य करेंगे तो भारत दुनिया के सामने एक आदर्श राष्ट्र के रूप में उभरेगा।

शिरीष चंद्र मुर्मु को आरबीआई का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया गया

30-Sep-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) केंद्र सरकार ने सोमवार को शिरीष चंद्र मुर्मु को तीन साल के लिए भारतीय रिजर्व बैंक का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया। उनकी नियुक्ति को केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने मंजूरी दे दी है। यह 9 अक्टूबर से लागू होगी। वह एम राजेश्वर राव की जगह लेंगे, जिनकी सेवा अवधि 8 अक्टूबर को समाप्त होने वाली है।
वर्तमान में शिरीष आरबीआई में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं और सुपरविजन विभाग की देखरेख करते हैं। कानून के अनुसार, आरबीआई में चार डिप्टी गवर्नर होने चाहिए। दो बैंक के अंदर से, एक अर्थशास्त्री और एक कमर्शियल बैंकिंग सिस्टम से।
टी राबी शंकर, पूनम गुप्ता और स्वामीनाथन जे अन्य डिप्टी गवर्नर हैं।
राजेश्वर राव ने इस पद पर पांच साल पूरे कर लिए हैं। वे पहली बार 2020 में तीन साल के कार्यकाल के लिए डिप्टी गवर्नर बने थे, और बाद में 2023 और 2024 में उन्हें एक-एक साल का दो बार विस्तार दिया गया।
पिछले महीने की शुरुआत में सरकार ने पूर्व आरबीआई गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल को तीन साल की अवधि के लिए इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर नियुक्त किया था।
यह नियुक्ति कृष्णमूर्ति वी सुब्रह्मण्यम की सेवाओं को अचानक समाप्त किए जाने के बाद हुई, जिससे उनका कार्यकाल लगभग छह महीने पहले ही समाप्त हो गया। पटेल को भारत की मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण वाली मौद्रिक नीति ढांचे को डिजाइन करने में मदद करने का श्रेय दिया जाता है।
उर्जित पटेल एक भारतीय अर्थशास्त्री हैं, जिनका जन्म केन्या में हुआ था। उन्होंने भारत की मुद्रास्फीति-नियंत्रण मौद्रिक नीति (इन्फ्लेशन-टारगेटिंग मॉनेटरी पॉलिसी) को डिज़ाइन करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे 30 साल से अधिक समय से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ काम कर रहे हैं।
पटेल ने 1992 में भारत आने से पहले पांच साल तक आईएमएफ के लिए वाशिंगटन, डीसी में काम किया। बाद में वे नई दिल्ली में आईएमएफ के डिप्टी रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव बने।
वर्ष 2016 में उन्होंने रघुराम राजन की जगह लेते हुए आरबीआई के 24वें गवर्नर के रूप में कार्य शुरू किया। उनका कार्यकाल 1992 के बाद सबसे छोटा रहा, और वे 2018 में निजी कारणों से इस्तीफा देने वाले पहले आरबीआई गवर्नर बने।
 



kalyan chart

Feedback/Enquiry



Log In Your Account