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पीएम मोदी ने नेपाल आपदा पर जताया दुख, ‘भारत हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध’

05-Oct-2025
नई दिल्ली । ( शोर संदेश ) नेपाल में बारिश ने तबाही मचा रखी है, जिससे कई जगहों पर जलभराव हो गया है। बाढ़ और भूस्खलन में कई लोगों की जान चली गई है। इसे लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि नेपाल में भारी बारिश से हुई जनहानि और क्षति दुखद है। इस कठिन समय में हम नेपाल की जनता और सरकार के साथ हैं। एक मित्रवत पड़ोसी और प्रथम प्रतिक्रियादाता के रूप में भारत हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
नेपाल में शुक्रवार से लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से अलग-अलग जगहों पर भूस्खलन, बाढ़ और जलभराव जैसी स्थिति देखने को मिल रही है। भारत में दार्जिलिंग की सीमा से सटे इलाम जिले में सबसे ज्यादा मौतें हुईं। इलाम के मुख्य जिला अधिकारी सुनीता नेपाल ने बताया कि शनिवार को हुए भूस्खलन में तीन मकान ढह गए और अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि भूस्खलन में ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है, इसलिए मौत का आंकड़ा बढ़ने की संभावना है। इलाम जिला प्रशासन कार्यालय (डीएओ) ने जिले के स्थानीय प्रशासन से भूस्खलन और बाढ़ से हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अधिकारी सुनीता नेपाल ने कहा कि भूस्खलन की वजह से इलाम को दक्षिणी झापा जिले से जोड़ने वाला मेची राजमार्ग भी कई जगहों पर अवरुद्ध हो गया। जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, शुक्रवार से भारी बारिश हो रही थी, लेकिन रविवार सुबह स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ।
मौसम विज्ञान विभाग ने रविवार को जारी एक नोटिस में कहा कि अधिकांश जिलों में बारिश कम हुई है और काठमांडू घाटी के ललितपुर जिले के कुछ हिस्सों में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई
मौसम विज्ञान विभाग ने रविवार को जारी एक नोटिस में कहा कि अधिकांश जिलों में बारिश कम हुई है और काठमांडू घाटी के ललितपुर जिले के कुछ हिस्सों में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई। विभाग ने कहा, “काठमांडू, मोरंग, सुनसरी, उदयपुर, सप्तरी, सिराहा, धनुषा, सरलाही, सिंधुली और रामेछाप जिलों के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो रही है।” विभाग ने रविवार दोपहर और रात को पूर्वी कोशी प्रांत के पहाड़ी जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। भूस्खलन के कारण कई राजमार्ग को भी नुकसान पहुंचा है, जिसकी वजह से आवाजाही भी बाधित हो गई।
नेपाल सरकार ने काठमांडू घाटी में आने-जाने वाले वाहनों के प्रवेश और निकास पर अभी भी प्रतिबंध जारी रखा है। मेट्रोपॉलिटन ट्रैफिक पुलिस डिवीजन के अनुसार, घाटी को जोड़ने वाले प्रमुख राजमार्ग, पृथ्वी राजमार्ग (काठमांडू को पश्चिमी नेपाल से जोड़ता है), बीपी राजमार्ग (राजधानी को दक्षिण-पूर्वी नेपाल से जोड़ता है) और अरानिको राजमार्ग (काठमांडू को चीनी सीमा से जोड़ता है) पूरी तरह से अवरुद्ध हो गए हैं। वहीं, देश की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने एक वीडियो संदेश जारी कर नागरिकों से घर के अंदर रहने और जब तक बहुत जरूरत न हो, यात्रा करने से परहेज करने की अपील की है। इसके अलावा उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है।

विजयादशमी पर राष्ट्रपति मुर्मु, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को दीं शुभकामनाएं

03-Oct-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। तीनों नेताओं ने इस पर्व को बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक बताया और समाज में सत्य, न्याय, धर्म और सद्भाव को बढ़ावा देने का आह्वान किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए कहा कि विजयादशमी अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है और यह त्योहार हमें सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में यह पर्व रावण दहन और दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है, जो भारत की जीवन-मूल्यों को दर्शाता है। राष्ट्रपति ने लिखा कि यह त्योहार हमें क्रोध और अहंकार जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों का त्याग करने और संघर्ष तथा शौर्य जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियों को अपनाने का संदेश देता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कामना है कि यह पर्व हमें एक ऐसे समाज और देश के निर्माण के लिए प्रेरित करे, जहां न्याय, समानता और सद्भाव के साथ सभी लोग आगे बढ़ सकें।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी एक्स पर विजयादशमी की बधाई दी। उपराष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी संदेश में कहा गया कि यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है और यह हमें सत्य, धर्म और साहस के स्थायी मूल्यों की याद दिलाता है। संदेश में लिखा गया कि विजयादशमी हमें ईमानदारी से काम करने, न्याय की रक्षा करने और समाज में सकारात्मक योगदान देने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी के लिए खुशी, शांति और समृद्धि की कामना की और कहा कि यह पर्व देश की सेवा के लिए हमारे संकल्प को और मजबूत करे।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विजयादशमी की शुभकामनाएं एक्स के माध्यम से दी। उन्होंने लिखा कि विजयादशमी अच्छाई और सत्य की बुराई और असत्य पर जीत का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी कामना है कि इस पावन अवसर पर हर व्यक्ति को साहस, बुद्धि और भक्ति के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले। उन्होंने देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं और उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। 

पद्म भूषण से सम्मानित शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन, पीएम मोदी ने जताया दुख

03-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज गायक और पद्म भूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार सुबह निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे और मिर्जापुर में उन्होंने अंतिम सांस ली। सुबह करीब 4:15 बजे उनका देहांत हुआ। पंडित मिश्र किराना घराने के प्रतिष्ठित गायक थे और शास्त्रीय व भक्ति संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जाने जाते थे। पिछले महीने उन्हें सीने में दर्द और हल्के हार्ट अटैक की शिकायत के बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में उनके सीने में संक्रमण और एनीमिया की समस्या सामने आई थी। सुधार के बाद हाल ही में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई थी, लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उनका निधन हो गया।
उनका पार्थिव शरीर सुबह 11 बजे तक वाराणसी लाया जाएगा, जहां लोग श्रद्धांजलि और अंतिम दर्शन करेंगे। उनके अंतिम संस्कार की तैयारी शाम 7 बजे के लिए की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से मैं अत्यंत दुखी हूं। उन्होंने अपना पूरा जीवन भारतीय कला और संस्कृति के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जनसामान्य तक पहुंचाने के साथ-साथ भारतीय परंपरा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में भी अमूल्य योगदान दिया।”
पीएम मोदी ने यह भी याद किया कि 2014 में वाराणसी सीट से नामांकन के दौरान पंडित मिश्र उनके प्रस्तावक रहे थे। उन्होंने लिखा, “मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ कि मुझे उनका स्नेह और आशीर्वाद हमेशा मिलता रहा। इस दुख की घड़ी में मैं उनके परिवार और चाहने वालों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं। ओम शांति!” पंडित छन्नूलाल मिश्र का जीवन भारतीय शास्त्रीय संगीत को समर्पित रहा। वे खयाल, ठुमरी, दादरा और भजन गायकी के लिए प्रसिद्ध थे। 2010 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यश भारती सम्मान भी प्रदान किया गया था। उनके निधन से संगीत जगत में गहरा शोक है और भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया ने अपना एक बड़ा स्तंभ खो दिया है।

आरएसएस की शताब्दी पर पीएम मोदी ने स्वयंसेवकों को सराहा, कहा- ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से किया राष्ट्रनिर्माण

03-Oct-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) विजयादशमी के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ अपना जीवन देश निर्माण के लिए समर्पित किया है। प्रधानमंत्री ने एक विस्तृत ब्लॉग पोस्ट में लिखा, “सौ वर्ष पहले विजयादशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। यह कोई बिल्कुल नया निर्माण नहीं था, बल्कि भारत की सनातन राष्ट्रीय चेतना का ही एक नया रूप था, जो समय-समय पर चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रकट होती रही है। हमारे समय में संघ उसी राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। हमारी पीढ़ी के स्वयंसेवकों के लिए यह सौभाग्य है कि हम संघ की शताब्दी देख रहे हैं।” उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. के.बी. हेडगेवार को नमन किया और सभी स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं दीं।
पीएम मोदी ने संघ की भूमिका समझाते हुए कहा कि जैसे नदियां हर क्षेत्र को समृद्ध करती हैं, वैसे ही संघ ने शिक्षा, कृषि, सामाजिक कल्याण, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय कल्याण जैसे अनेक क्षेत्रों में काम करके राष्ट्र को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा, “संघ का मंत्र हमेशा एक ही रहा है- राष्ट्र प्रथम।” प्रधानमंत्री ने लिखा कि संघ की स्थापना से ही उसका उद्देश्य राष्ट्रनिर्माण रहा है और इसके लिए उसने “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण” का मार्ग चुना। उन्होंने दैनिक शाखा को एक अद्वितीय साधन बताया, जहां से हर स्वयंसेवक “मैं” से “हम” की यात्रा शुरू करता है और व्यक्तिगत रूपांतरण से समाज व राष्ट्र की सेवा करता है।
इतिहास की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “संघ की स्थापना के समय से ही उसने राष्ट्र को अपनी प्राथमिकता माना। डॉ. हेडगेवार और कई स्वयंसेवक स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से शामिल हुए। डॉ. हेडगेवार कई बार जेल भी गए। विभाजन के समय और अन्य आपदाओं में भी संघ ने सेवा और राहत कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।” पीएम मोदी ने कहा कि पिछले सौ वर्षों में संघ ने समाज के हर वर्ग में आत्मविश्वास जगाया और दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों तक पहुंच बनाई। सेवा भारती, विद्या भारती, एकल विद्यालय और वनवासी कल्याण आश्रम जैसी संस्थाओं को उन्होंने आदिवासी समाज को सशक्त बनाने वाले स्तंभ बताया।
सामाजिक बुराइयों पर संघ की लड़ाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “जातिगत भेदभाव और छुआछूत जैसी समस्याओं के खिलाफ संघ हमेशा डटा रहा। गुरुजी ने ‘ना हिंदू पतितो भवेत’ का संदेश दिया। पूज्य बालासाहेब देवरस ने कहा था कि अगर छुआछूत गलत नहीं है तो दुनिया में कुछ भी गलत नहीं है। बाद में राज्जू भैया और सुदर्शन जी ने भी यही संदेश आगे बढ़ाया। आज मोहन भागवत जी ने ‘एक कुआं, एक मंदिर और एक श्मशान’ की बात कर समाज को एकजुट करने का आह्वान किया।”
वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि आज भारत विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है, लेकिन विदेशी निर्भरता, एकता तोड़ने की साजिशें और घुसपैठ जैसी चुनौतियां सामने हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इनसे निपट रही है और संघ ने भी इनसे निपटने के लिए ठोस रोडमैप तैयार किया है। प्रधानमंत्री ने संघ के “पंच परिवर्तन” का भी उल्लेख किया-स्व-बोध (औपनिवेशिक मानसिकता छोड़कर स्वदेशी अपनाना), सामाजिक समरसता (हाशिये पर खड़े वर्गों के लिए न्याय और समानता), कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करना), नागरिक शिष्टाचार (नागरिक कर्तव्यों का पालन), और पर्यावरण संरक्षण (भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रकृति की रक्षा) शामिल है। उन्होंने कहा कि इन संकल्पों के मार्गदर्शन में संघ अपनी दूसरी शताब्दी की यात्रा शुरू कर रहा है और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में उसका योगदान महत्वपूर्ण होगा।
 

भारत-ईएफटीए व्यापार समझौता लागू, 100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख नौकरियों का अवसर

03-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच हुआ ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (टीईपीए) एक अक्टूबर से लागू हो गया है। इस समझौते से भारत को अगले कुछ वर्षों में 100 अरब डॉलर का निवेश मिलेगा और लगभग 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। इसके साथ ही भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक साझेदारी और मजबूत होगी। ईएफटीए में चार देश -स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। इस समझौते के लागू होने के बाद भारत और इन देशों के बीच व्यापार करना आसान हो जाएगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह भारत का पहला ऐसा व्यापार समझौता है, जिसमें निवेश प्रतिबद्धता भी शामिल है। इसका मकसद भागीदार देशों के बीच हितों का संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
समझौते के लागू होने पर आयोजित एक कार्यक्रम में पीयूष गोयल ने कहा कि ईएफटीए देशों की कुल आबादी अकेले मुंबई की आबादी से भी कम है, लेकिन साझेदारी उनकी क्षमता और बड़े दिल से प्रेरित है। उन्होंने इस समझौते को विजयादशमी और नवमी के शुभ अवसर पर लागू होना भी खास बताया। उनके अनुसार, यह शुरुआत समृद्धि, स्पष्टता और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। गोयल ने कहा कि टीईपीए सिर्फ टैरिफ कम करने या निवेश की प्रतिबद्धता का समझौता नहीं है, बल्कि यह एक स्थिर और भरोसेमंद ढांचा है, जो निवेशकों का विश्वास बढ़ाता है और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच स्थिरता का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि यह समझौता शिक्षा, कृषि, उद्योग, प्रौद्योगिकी और कई अन्य क्षेत्रों में बड़े अवसर खोलेगा।
उन्होंने भारत की ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि यहां डेटा की लागत अमेरिका की तुलना में केवल 3 प्रतिशत है और वैश्विक औसत से भी काफी कम है। उन्होंने एबीबी और नेस्ले जैसी स्विस कंपनियों के भारत से पुराने जुड़ाव को याद किया और कहा कि भारत न केवल एक बड़ा बाजार है, बल्कि वैश्विक विस्तार का केंद्र भी है। गोयल ने उदाहरण देते हुए बताया कि नेस्ले इंडिया और एबीबी इंडिया जैसी कंपनियों के शेयरों का उच्च प्राइस-टू-अर्निंग रेश्यो भारत की अर्थव्यवस्था में विश्वास और भविष्य की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।कार्यक्रम में उन्होंने ईएफटीए देशों के उद्योगों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया और कहा कि भारत का माहौल पारदर्शी, खुला और निवेशक-हितैषी है। यहां लगभग सभी क्षेत्रों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता भारत और ईएफटीए दोनों की सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है और आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच साझेदारी और गहरी होगी। 
 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को दो टूक : सर क्रीक में हिमाकत की तो बदल जाएंगे इतिहास और भूगोल

03-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने सर क्रीक क्षेत्र में कोई भी हिमाकत की तो उसे ऐसा करारा जवाब मिलेगा कि उसका इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि 1965 की जंग में भारतीय सेना लाहौर तक पहुंचने का सामर्थ्य दिखा चुकी है और आज भी हमारी सेनाएं कराची तक पहुंचने का रास्ता जानती हैं। विजयादशमी के अवसर पर गुरुवार को रक्षा मंत्री भुज एयरबेस पहुंचे, जहां उन्होंने सेना के जवानों के साथ शस्त्र पूजा की। इस दौरान उन्होंने हाल ही में सफल रहे ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने लेह से लेकर सर क्रीक तक भारत की डिफेंस प्रणाली को तोड़ने की नाकाम कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया को यह संदेश गया है कि भारतीय सेना जब चाहे, जहां चाहे और जैसे चाहे पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।”
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत ने अपनी शक्ति के बावजूद संयम दिखाया क्योंकि यह कार्रवाई केवल आतंकवाद के खिलाफ थी। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य युद्ध छेड़ना नहीं था, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देना था। मुझे खुशी है कि हमारे सैनिकों ने ऑपरेशन सिंदूर के सभी लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया।” रक्षा मंत्री ने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी सर क्रीक विवाद बना हुआ है। भारत ने कई बार बातचीत के जरिए समाधान की कोशिश की, लेकिन पाकिस्तान की नीयत साफ नहीं है। उन्होंने बताया कि हाल ही में पाकिस्तान ने सर क्रीक के पास अपना सैन्य ढांचा बढ़ाया है, जो उसकी मंशा को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर पाकिस्तान ने सर क्रीक में कोई हरकत की, तो उसे ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे। पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि कराची का एक रास्ता क्रीक से होकर गुजरता है।”
महात्मा गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि गांधी जी मनोबल का ज्वलंत उदाहरण थे। उन्होंने बिना हथियारों के ब्रिटिश साम्राज्य को झुकने पर मजबूर किया। राजनाथ सिंह ने कहा, “हमारे सैनिकों के पास शस्त्र भी हैं और अटूट मनोबल भी। हमारे सामने कोई भी चुनौती टिक नहीं सकती।” उन्होंने शस्त्र पूजा के मौके पर मां दुर्गा से प्रार्थना की कि वे भारतीय सैनिकों को शक्ति और साहस प्रदान करें ताकि वे अधर्म और आतंकी शक्तियों का नाश करते रहें और राष्ट्र को अजेय बनाए रखें। उन्होंने कहा कि थल सेना, वायु सेना और नौसेना हमारी शक्ति के तीन स्तंभ हैं और सरकार लगातार तीनों सेनाओं की संयुक्त शक्ति पर जोर दे रही है।
इसके साथ ही रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए भारतीय सैनिकों और अधिकारियों को विशेष बधाई दी और कहा कि शस्त्र पूजा केवल शस्त्रों का ही नहीं, बल्कि उन्हें धारण करने वाले सैनिकों के सम्मान का प्रतीक है।

मानेसर में ‘नमो वन’ की नींव रखकर वन्यजीव सप्ताह 2025 का हुआ शुभारंभ

03-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को हरियाणा के मानेसर में ‘नमो वन’ का शिलान्यास किया। इस कार्यक्रम के साथ ही वन्यजीव सप्ताह 2025 के समारोहों की शुरुआत हुई। इस मौके पर हरियाणा के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह भी मौजूद रहे। समारोह में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण भी किया गया।
इस अवसर पर स्कूली बच्चों, वन विभाग के अधिकारियों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई हितधारकों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। कार्यक्रम में जंगल और वन्यजीव संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत की समृद्ध जैव विविधता को बचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि हर साल 2 से 8 अक्टूबर तक मनाया जाने वाला वन्यजीव सप्ताह पूरे देश में लोगों को पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का एक अभियान है।
इस बार वन्यजीव सप्ताह का विषय ‘सेवा पर्व’ रखा गया है। इसका उद्देश्य प्रकृति के प्रति सेवा और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना है। इस थीम के जरिए पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने और नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया जा रहा है।
 

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मिला जबरदस्त समर्थन, 1.15 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव आए : अश्विनी वैष्णव

03-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को बताया कि सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को भारी समर्थन मिला है। इस योजना के तहत सरकार को 1.15 लाख करोड़ रुपए (1,15,351 करोड़) के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह स्कीम देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों और कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि योजना की रूपरेखा तैयार करते समय जितना निवेश और रोजगार का लक्ष्य तय किया गया था, उससे कहीं अधिक प्रस्ताव सरकार के पास आए हैं। वैष्णव ने बताया कि इस योजना की एप्लीकेशन विंडो 30 सितंबर को बंद हो गई थी और अब तक मिले निवेश प्रस्ताव अनुमान से कई गुना ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने लगभग 59,000 करोड़ रुपए निवेश मिलने का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक प्रस्ताव इससे कहीं अधिक आए हैं। हालांकि कैपिटल इक्विपमेंट सेगमेंट के लिए एप्लीकेशन विंडो अभी भी खुली है।
मार्च 2025 में केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना को 22,919 करोड़ रुपए के बजट के साथ छह वर्षों के लिए मंजूरी दी थी। इस स्कीम का उद्देश्य-भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना, घरेलू मूल्य संवर्धन (DAV) बढ़ाना और भारतीय कंपनियों को ग्लोबल वैल्यू चेन (GVC) से जोड़ना है। सरकार ने इस योजना के तहत अनुमान लगाया था कि लगभग 59,350 करोड़ रुपए का निवेश, 4,56,500 करोड़ रुपए का उत्पादन, और करीब 91,600 प्रत्यक्ष रोजगार के साथ बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। वहीं, कंपनियों ने अब तक दिए प्रस्तावों में 1.41 लाख रोजगार देने की प्रतिबद्धता जताई है, जो सरकार के शुरुआती लक्ष्य से कहीं ज्यादा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी सचिव एस. कृष्णन ने भी पुष्टि की कि कंपनियों ने रोजगार सृजन के मामले में अपेक्षाओं से अधिक रुचि दिखाई है। उनका कहना था कि यह योजना भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाएगी और ‘मेक इन इंडिया’ के विजन को नई गति देगी।

सरकार ने ई-कचरे और कबाड़ की बिक्री से कमाए 3,296.71 करोड़ रुपए : डॉ. जितेंद्र सिंह

03-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने ई-कचरे और कबाड़ की बिक्री से 3,296.71 करोड़ रुपए की कमाई की है। पिछले चार वर्षों में सरकार ने 696.27 लाख वर्ग फुट से अधिक कार्यालय स्थान को साफ करके दोबारा इस्तेमाल में लाया है। यह जानकारी उन्होंने नई दिल्ली के नेहरू पार्क में “विशेष स्वच्छता अभियान 5.0” के शुभारंभ समारोह में दी।
डॉ. सिंह ने कहा कि इस अभियान ने शासन और सार्वजनिक सेवाओं में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने बताया कि इसके पिछले चरणों में 137.86 लाख से ज्यादा पुरानी फाइलों को नष्ट किया गया और देश भर में 12.04 लाख से अधिक जगहों की सफाई की गई। उन्होंने प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) तथा अन्य विभागों की सक्रिय भूमिका की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने श्रमदान किया, “एक पेड़ मां के नाम” पहल के तहत वृक्षारोपण किया और पुरानी फाइलों की सफाई में हिस्सा लिया। उन्होंने स्वच्छता अभियान को स्वतंत्र भारत की “एक बड़ी सफलता की कहानी” बताते हुए कहा कि 2 अक्टूबर से शुरू हो रहा यह नया चरण स्वच्छता को संस्थागत बनाने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और सरकारी कार्यालयों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है।
डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लाल किले से पीएम के आह्वान ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन बना दिया है, जिसे देशभर में लोगों ने अपनाया है। उन्होंने सफाई मित्रों को सुरक्षा किट और मिठाई वितरित करके सम्मानित किया और उनकी अहम भूमिका को स्वीकार किया।
उन्होंने आगे बताया कि इस चरण के लिए मंत्रालयों और विभागों ने पहले ही महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। इनमें 6.9 लाख जन शिकायतों की समीक्षा, 26.9 लाख से अधिक भौतिक फाइलों का निपटान और 5.2 लाख ई-फाइलों की समीक्षा शामिल है।
डॉ. सिंह ने यह भी घोषणा की कि भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार 10 अक्टूबर को “सुशासन और अभिलेख” नामक प्रदर्शनी आयोजित करेगा, जिसमें पुराने विशेष अभियानों के दौरान मिले ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रदर्शित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विशेष अभियान 5.0 सरकार की पारदर्शिता, दक्षता और जनभागीदारी के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराता है और महात्मा गांधी की स्वच्छता तथा नागरिक जिम्मेदारी की प्रेरणा को आगे बढ़ाता है।
 

आरएसएस के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने कहा– ‘संघ की 100 वर्षों की यात्रा त्याग, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की मिसाल’

02-Oct-2025
नई दिल्ली।  शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा को त्याग, निःस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण की अद्भुत मिसाल बताया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आरएसएस के शताब्दी समारोह का हिस्सा बनकर अत्यंत गौरवान्वित अनुभव कर रहा हूं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अपने गठन के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्र निर्माण का विराट उद्देश्य लेकर चल रहा है। संघ ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का रास्ता चुना। इस रास्ते पर सतत चलने के लिए नित्य और नियमित चलने वाली शाखा के रूप में कार्य पद्धति को चुना।
उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार जानते थे कि हमारा राष्ट्र तभी सशक्त होगा, जब हर व्यक्ति के भीतर राष्ट्र के प्रति दायित्व का बोध जागृत होगा। हमारा राष्ट्र तभी ऊंचा उठेगा, जब भारत का हर नागरिक राष्ट्र के लिए जीना सीखेगा। इसलिए वे व्यक्ति निर्माण में निरंतर जुड़े रहे। उनका तरीका अलग था। हमने बार-बार सुना है कि डॉ. हेडगेवार जी कहते थे कि जैसा है, वैसा लेना है। जैसा चाहिए, वैसा बनाना है।
उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “लोग संग्रह का उनका यह तरीका अगर समझना है तो हम कुम्हार को याद करते हैं। जैसे कुम्हार ईंट पकाता है तो जमीन की सामान्य-सी मिट्टी से शुरू करता है। वह मिट्टी लाता है और उस पर मेहनत करता है। उसे आकार देकर तपाता है। खुद भी तपता है और मिट्टी को भी तपाता है। फिर उन ईंटों को इकट्ठा करके भव्य इमारत बनाता है। ऐसे ही डॉ. हेडगेवार बहुत ही सामान्य लोगों को चुनते थे। फिर उन्हें सिखाते थे, विजन देते थे और उन्हें गढ़ते थे। इस तरह वे देश को समर्पित स्वयंसेवक तैयार करते थे।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संघ के बारे में कहा जाता है कि इसमें सामान्य लोग मिलकर असामान्य अभूतपूर्व कार्य करते हैं। व्यक्ति निर्माण की यह सुंदर प्रक्रिया आज भी हम संघ की शाखाओं में देखते हैं।
पीएम मोदी ने कहा, “संघ शाखा का मैदान एक ऐसी प्रेरणा भूमि है, जहां से स्वयंसेवक की ‘अहम् और वहम’ की यात्रा शुरू होती है। संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण की यज्ञ वेदी हैं। उन शाखाओं में व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास होता है। स्वयंसेवकों के मन में राष्ट्र सेवा का भाव और साहस दिन प्रतिदिन पनपता रहता है।”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्वयंसेवकों के लिए त्याग और समर्पण सहज हो जाता है। श्रेय के लिए प्रतिस्पर्धा की भावना समाप्त हो जाती है। उन्हें सामूहिक निर्णय और सामूहिक कार्य का संस्कार मिलता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण का महान उद्देश्य, व्यक्ति निर्माण का स्पष्ट पथ और शाखा जैसी सरल व जीवंत कार्य पद्धति यही संघ की 100 वर्ष की यात्रा का आधार बनी हैं।
 



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