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फिलीपींस में 6.7 तीव्रता के भूकंप ने मचाई भारी तबाही, 19 की मौत, कई शहरों की बिजली गुल

02-Oct-2025
नई दिल्ली। शोर संदेश ) फिलीपींस में भूकंप ने भारी तबाही मचा दी है। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को बताया कि मध्य फिलीपींस के सेबू प्रांत में कल मंगलवार रात 6.9 तीव्रता के भूकंप से धरती हिली। इस घटना में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए।
वहीं, स्थानीय न्यूज पेपर सनस्टार सेबू ने प्रांतीय सूचना कार्यालय के हवाले से बताया कि भूकंप के केंद्र बोगो शहर में 13 लोग मारे गए, जबकि उत्तरी सेबू के सैन रेमिगियो शहर में चार अन्य की मौत हो गई।
सेबू के मेडेलिन नगरपालिका ने कम से कम एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की सूचना दी है, साथ ही दो पुलों को भी नुकसान पहुंचा। सनस्टार सेबू ने आगे बताया कि भूकंप के पीड़ितों का सेबू प्रांतीय अस्पताल (बोगो शहर) में आना जारी है। इसकी वजह से अस्पताल के मेडिकल स्टाफ की परेशानी भी बढ़ गई।
फिलीपींस के ज्वालामुखी और भूकंप विज्ञान संस्थान ने बताया कि स्थानीय समयानुसार मंगलवार को रात 9:59 बजे सेबू प्रांत में 6.7 तीव्रता का भूकंप आया। संस्थान ने बाद में तीव्रता को संशोधित कर 6.9 कर दिया और बताया कि भूकंप बोगो शहर से लगभग 19 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में, 5 किलोमीटर की गहराई पर आया।
भूकंप का झटका मध्य फिलीपींस के कई पड़ोसी प्रांतों के साथ-साथ दक्षिणी फिलीपींस के कुछ क्षेत्रों में भी महसूस किया गया। कई गांवों की सड़कों को भी नुकसान पहुंचा। भूकंप के कारण बिजली की लाइनें टूट गईं, जिससे सेबू और आसपास के मध्य द्वीपों में बिजली गुल हो गई। हालांकि, फिलीपींस के राष्ट्रीय ग्रिड निगम ने एक अपडेट में कहा कि सेबू और चार अन्य प्रमुख मध्य द्वीपों में आधी रात के तुरंत बाद बिजली बहाल कर दी गई।
फिलीपींस प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” पर स्थित है, जो भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधि के लिए संवेदनशील क्षेत्र है।

भारतीय रेलवे में तकनीकी बदलाव का युग : मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन से सफर होगा तेज, सुरक्षित और आरामदायक

02-Oct-2025
नई दिल्ली। शोर संदेश  मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन भारतीय रेल इतिहास में जल्द ही एक तकनीकी बदलाव के युग का शुरुआत करेगी। जिसमें नवीनतम हाई-स्पीड रेल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जो एक सुरक्षित, आरामदायक और कुशल रेल यात्रा अनुभव को सुनिश्चित करेगी। ये ट्रेनें 320 किमी/घंटा तक की गति से चल सकेंगी, जिससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा में लगने वाले समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-सूरत यात्रा का समय घटाकर केवल 60 मिनट कर देगी। वर्तमान में, मुंबई और सूरत के बीच सबसे तेज ट्रेन 12951 नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस है, जो 2 घंटे 43 मिनट का समय लेती है, हलांकि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव कहते हैं “इस तरह आप सूरत से लगभग एक घंटे में मुंबई जा सकते हैं, अपना काम निपटा सकते हैं और वापस आकर अपने परिवार के साथ समय बिता सकते हैं।” यह परियोजना मुंबई और अहमदाबाद के बीच हवाई यात्रा पर निर्भरता को भी कम करेगी, जो हवाई अड्डों पर भीड़भाड़ में योगदान करती है और इसकी पर्यावरणीय लागत भी अधिक होती है।
बुलेट ट्रेन यात्रियों के लिए एक अधिक किफायती और टिकाऊ विकल्प प्रदान करेगी, जिससे परिवहन से होने वाले उत्सर्जन में समग्र कमी आएगी। यह ट्रेन विद्युत कर्षण द्वारा संचालित होगी और बुलेट ट्रेनों में प्रयुक्त तकनीक यह सुनिश्चित करेगी कि ये न केवल तेज हों, बल्कि अत्यधिक ऊर्जा-कुशल भी हों। सुचारू संचालन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेन प्रणाली अत्याधुनिक सिग्नलिंग और संचार तकनीकों से पूरी तरह एकीकृत होगी। इसके अलावा, ट्रेनें उन्नत सुरक्षा उपायों से लैस भी होंगी। पर्यावरणीय लाभ में बुलेट ट्रेन से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। ट्रेनें, विशेष रूप से उच्च गति के लिए डिजाइन की गई, कारों और विमानों की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल होती हैं। परिवहन के एक से अधिक टिकाऊ रूप की ओर यह बदलाव देश के परिवहन नेटवर्क के समग्र कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में योगदान देगा।
इसके अलावा, जैसे-जैसे परियोजना आगे बढ़ेगी, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए, ट्रेनों को ऊर्जा-कुशल बनाने पर अधिक जोर दिया जाएगा। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी व्यापक आर्थिक वृद्धि लाने की क्षमता है। परिवहन के एक उच्च-गति साधन के रूप में, बुलेट ट्रेन सड़कों और मौजूदा रेल नेटवर्क पर भीड़भाड़ को कम करेगी। यह कॉरिडोर गतिशीलता को बढ़ाएगा, निवेश आकर्षित करेगा और इससे जुड़े क्षेत्रों में व्यापार के नए अवसर खुलेंगे। दोनों शहरों के बीच यात्रा समय में कमी से विनिर्माण, खुदरा और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का मानना है कि मुम्बई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। “यह वास्तव में एक बहुत ही महत्वपूर्ण परियोजना है। मुंबई, ठाणे, वापी, सूरत, बड़ौदा, आणंद और अहमदाबाद सहित सभी प्रमुख शहरों की अर्थव्यवस्थाएं एक ही अर्थव्यवस्था बन जाएंगी। इसलिए क्षेत्रीय विकास में भारी वृद्धि होगी।”
गौरतलब है कि 508 किलोमीटर लंबा मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (एमएएचएसआर) कॉरिडोर गुजरात, महाराष्ट्र और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली से होकर गुजरता है। अहमदाबाद बुलेट ट्रेन पहल लोगों की यात्रा के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी, जो देश के दो सबसे जीवंत शहरों के बीच बेजोड़ गति, सुविधा और दक्षता प्रदान करेगी। उच्च गति कनेक्टिविटी पर केंद्रित डिजाइन के साथ, यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल यात्रा के समय को न केवल काफी हद तक कम करेगी, बल्कि व्यापारिक संपर्क और क्षेत्रीय वाणिज्य को बढ़ाकर आर्थिक समृद्धि को भी बढ़ावा देगी। अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके, बुलेट ट्रेन मौजूदा परिवहन नेटवर्क पर दबाव को कम करने का वादा करती है, साथ ही हवाई और सड़क यात्रा का एक टिकाऊ, पर्यावरण के अनुकूल विकल्प प्रदान करती है। मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर भारत भर में भविष्य की उच्च गति वाली रेल परियोजनाओं के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा, जिससे देश आधुनिक परिवहन बुनियादी ढांचे में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित होगा और साथ ही एक हरित, अधिक परस्पर जुड़े भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा।

फिलीपींस में 6.9 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही, पीएम मोदी ने जताया शोक

02-Oct-2025
नई दिल्ली।  शोर संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को फिलीपींस में आए शक्तिशाली भूकंप में जान गंवाने वालों के प्रति गहरा दुख जताया और भारत की एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि “फिलीपींस में आए भूकंप से जानमाल के नुकसान की खबर से गहरा दुख हुआ है। मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। भारत इस कठिन समय में फिलीपींस के साथ खड़ा है।” यह भूकंप मंगलवार देर रात फिलीपींस के केंद्रीय हिस्से में सेबू द्वीप के तट पर आया, जिसकी तीव्रता 6.9 दर्ज की गई और गहराई लगभग 10 किलोमीटर थी। वहीं बुधवार सुबह तक मौतों की संख्या बढ़कर 69 हो गई। फिलीपींस की क्षेत्रीय सिविल डिफेंस अधिकारी जेन अबापो ने बताया कि यह आंकड़ा स्थानीय आपदा एजेंसी के डाटा पर आधारित है और अभी सत्यापन जारी है। अधिकारियों के अनुसार यह पिछले एक दशक में देश में आया सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक है।
भूकंप के कारण कई इमारतें ढह गईं, बिजली आपूर्ति बाधित हुई और लोग अपने घरों से बाहर निकलने पर मजबूर हो गए। बोगो सिटी के अस्पताल में घायलों की भारी संख्या के कारण हालात बिगड़ गए, जिसके बाद तटरक्षक बलों ने डॉक्टरों और नर्सों की टीम तुरंत भेजी। राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत और बचाव का आश्वासन दिया और कहा कि “हम नुकसान और ज़रूरतों का आकलन कर रहे हैं, राहत कार्यों में तेजी लाई जाएगी।” फिलीपींस के भूकंप विज्ञान संस्थान (Phivolcs) ने बताया कि अब तक करीब 800 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए हैं, जिनमें से सबसे शक्तिशाली की तीव्रता 6 रही। हालांकि सुनामी का कोई खतरा नहीं है। प्रभावित इलाकों में लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
भूकंप में 100 साल पुराना एक चर्च भी ढह गया। सेबू द्वीप, जो फिलीपींस का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और लगभग 34 लाख लोगों का घर है, सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। हालांकि मकटान-सेबू अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा, जो देश का दूसरा सबसे व्यस्त हवाईअड्डा है, चालू रहा। फिलीपींस प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र में स्थित है, जहां ज्वालामुखी और भूकंप अक्सर आते रहते हैं। इस साल जनवरी में दो बड़े भूकंप आए थे लेकिन उनमें कोई हताहत नहीं हुआ था। 2023 में 6.7 तीव्रता का समुद्री भूकंप आठ लोगों की मौत का कारण बना था। सरकार और राहत एजेंसियां अभी भी मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश कर रही हैं और बचाव कार्यों में तेजी लाई जा रही है।

 


प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में BRCP फेज III को हरी झंडी, 12 साल का रोडमैप तैयार

02-Oct-2025
नई दिल्ली। शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट ने बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (BRCP) के तीसरे चरण (फेज III) को मंजूरी दे दी है। यह चरण 2025-26 से 2030-31 तक लागू होगा, और इसके बाद 2031-32 से 2037-38 तक जारी रखने के प्रस्ताव हैं, जिससे कुल 12 वर्षों में इस कार्यक्रम का संचालन होगा। इसका कुल लागत अनुमान 1,500 करोड़ रुपये है, जिसमें विभाग ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी (DBT) 1,000 करोड़ और यूनाइटेड किंगडम की वेलकम ट्रस्ट (WT) 500 करोड़ रुपये का योगदान देगा।
फेज III का उद्देश्य भारत में उच्च स्तरीय बायोमेडिकल रिसर्च के लिए बेहतरीन वैज्ञानिक प्रतिभा को विकसित करना, अंतर-विषयक शोध को बढ़ावा देना, और गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए सिस्टम को मजबूत करना है। यह चरण देश में वैज्ञानिक क्षमता के क्षेत्रीय अंतर को कम करने और वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने वाली बायोमेडिकल रिसर्च को सशक्त बनाने पर केंद्रित होगा।
BRCP की शुरुआत DBT और Wellcome Trust, UK के साझेदारी में 2008-09 में हुई थी। इस कार्यक्रम ने भारत में विश्व स्तरीय बायोमेडिकल शोध के लिए शोध फेलोशिप और ग्रांट प्रदान की। इसके बाद, फेज II को 2018-19 में और अधिक विस्तार के साथ लागू किया गया था।
अर्ली करियर और इंटरमीडिएट रिसर्च फेलोशिप्स — बुनियादी, क्लिनिकल और पब्लिक हेल्थ रिसर्च के लिए, जो वैज्ञानिक करियर के प्रारंभिक चरणों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक की सुविधाएं प्रदान करेंगी।
कोलैबोरेटिव ग्रांट्स प्रोग्राम — इसमें करियर डेवलपमेंट ग्रांट्स और कैटालिटिक कोलैबोरेटिव ग्रांट्स शामिल हैं, जो मजबूत शोध रिकॉर्ड वाले भारतीय शोधकर्ताओं की टीमों के लिए होंगे।
फेज III में मेंटरशिप, नेटवर्किंग, जनसंवाद और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इस कार्यक्रम से 2,000 से अधिक छात्रों और पोस्टडॉक्टोरल फेलो को प्रशिक्षण मिलेगा, उच्च प्रभाव वाले शोध प्रकाशनों का निर्माण होगा, पेटेंट योग्य खोजें संभव होंगी, और महिलाओं के समर्थन में 10-15% वृद्धि होगी। साथ ही, 25-30% सहयोगी कार्यक्रम TRL4 और उससे ऊपर की स्थिति तक पहुंचेंगे।
फेज I और II ने भारत को बायोमेडिकल विज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया है। फेज III इस दिशा में एक नई रणनीतिक पहल है, जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिभा, क्षमता और अनुवाद पर निवेश करेगी।

एनसीआरबी रिपोर्ट में यूपी में सांप्रदायिक दंगे शून्य, कानून-व्यवस्था बनी मिसाल

02-Oct-2025
नई दिल्ली। शोर संदेश राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ‘क्राइम इन इंडिया 2023’ रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति की तारीफ की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में यूपी में सांप्रदायिक और धार्मिक दंगों की संख्या शून्य रही। यह योगी आदित्यनाथ सरकार की 2017 से लागू जीरो टॉलरेंस नीति का परिणाम है। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में अपराध दर राष्ट्रीय औसत से 25 प्रतिशत कम रही। देश में कुल अपराध दर 448.3 थी, जबकि यूपी में यह केवल 335.3 दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश शांति और सामाजिक सद्भाव का गढ़ बन चुका है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2012-2017 के बीच यूपी में 815 दंगे हुए थे, जिनमें 192 लोग मारे गए। वहीं 2007-2011 में 616 घटनाओं में 121 मौतें हुईं। इसके विपरीत, 2017 के बाद कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ। बरेली और बहराइच में हुई दो हिंसक घटनाओं को भी सरकार ने 24 घंटे के भीतर नियंत्रित कर शांति बहाल कर दी।
एनसीआरबी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूपी में विभिन्न अपराधों में राष्ट्रीय औसत से उल्लेखनीय कमी आई है। उदाहरण के लिए, बलवा के मामलों में देश में 39,260 मामले (क्राइम रेट 2.8) दर्ज हुए, जबकि यूपी में केवल 3,160 मामले (क्राइम रेट 1.3) रहे। फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में भारत में 615 घटनाएं हुईं, जबकि यूपी में मात्र 16 मामले दर्ज हुए। डकैती के मामलों में भारत में 3,792 मामले (क्राइम रेट 0.3) थे, जबकि यूपी में केवल 73 मामले दर्ज हुए, जिससे राज्य को ‘नियर जीरो’ क्राइम रेट का दर्जा मिला।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त नीतियों, त्वरित कार्रवाई और पारदर्शी शासन के चलते यूपी में अपराधों पर काबू पाया गया है। एनसीआरबी की रिपोर्ट साबित करती है कि यूपी में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मामले में यह सरकार देश के लिए मिसाल बन गई है। 

विजयादशमी की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को दीं शुभकामनाएं, सत्य के मार्ग पर चलने का किया आह्वान

02-Oct-2025
नई दिल्ली।  शोर संदेश राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विजयादशमी की पूर्व संध्या पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि विजयादशमी अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की जीत का पर्व है, जो भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों की गहरी झलक पेश करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह पर्व लोगों को सकारात्मकता अपनाने और समाज में प्रेम, भाईचारे तथा करुणा की भावना बढ़ाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने इस अवसर पर सभी नागरिकों से एकजुट होकर देश और समाज के लिए काम करने का आह्वान किया।
देशभर में नवरात्रि का पर्व उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है और अब लोग विजयादशमी की तैयारियों में जुटे हैं। उत्तर भारत में यह पर्व भगवान राम की रावण पर विजय की स्मृति में रावण दहन के रूप में मनाया जाता है, वहीं पूर्वी और दक्षिणी भारत में इसे दुर्गा पूजा के रूप में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर वध की याद में मनाया जाता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि ये परंपराएं हमारे सांस्कृतिक वैविध्य और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती हैं। उन्होंने कामना की कि विजयादशमी का यह पर्व देशवासियों को एक ऐसे समाज के निर्माण की दिशा में प्रेरित करे, जहां न्याय, समानता और सद्भाव सर्वोपरि हों।
इस वर्ष विजयादशमी का उत्सव 2 अक्टूबर को पूरे देश में मनाया जाएगा। दिल्ली, लखनऊ, अयोध्या समेत कई शहरों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन होगा, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

दिल्ली के विकास और पार्टी के सुशासन में वीके मल्होत्रा का योगदान अविस्मरणीय: पीएम मोदी

01-Oct-2025
नई दिल्ली ।( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली भाजपा के पहले अध्यक्ष प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा के घर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। विजय कुमार मल्होत्रा का मंगलवार सुबह निधन हो गया है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।पीएम मोदी ने वीके मल्होत्रा को याद करते हुए कहा कि दिल्ली के विकास और हमारी पार्टी के सुशासन के एजेंडे को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फोटो शेयर करते हुए लिखा, ”वीके. मल्होत्रा के आवास पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की। दिल्ली के विकास और हमारी पार्टी के सुशासन के एजेंडे को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा।”
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने वीके मल्होत्रा के निधन पर दुख जाहिर करते हुए एक्स पर लिखा,” विजय कुमार मल्होत्रा ने एक उत्कृष्ट नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई, उन्हें जनमानस से जुड़े मुद्दों की बहुत अच्छी समझ थी। उन्होंने दिल्ली में हमारी पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। संसदीय मामलों में उन्हें अपने कार्यकलापों के लिए भी याद किया जाएगा। उनके निधन से दुख पहुंचा है। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना।”
दिल्ली से 5 बार सांसद और 2 बार विधायक रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार मल्होत्रा का मंगलवार को निधन हो गया। भाजपा के दिग्गज नेताओं में शुमार विजय कुमार मल्होत्रा अपनी मजबूत छवि के लिए जाने जाते थे।
विजय कुमार मल्होत्रा की शख्सियत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनने से पहले 1999 के लोकसभा चुनाव में भारी मतों से हराया था। भारतीय राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल विजय कुमार मल्होत्रा ने 9वीं और 14वीं लोकसभा में दिल्ली सदर और दक्षिण दिल्ली निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया। 82 साल की उम्र में भी मोदी सरकार द्वारा कोई पद न दिए जाने के बावजूद वीके मल्होत्रा ने दिल्ली के लिए भाजपा का चुनाव अभियान अध्यक्ष बनने की पेशकश की और सभी 7 सीटें दिलाकर भाजपा को शानदार जीत दिलाई।

घरेलू मांग और सरकारी पूंजी निवेश से भारतीय कंपनियों का राजस्व होगा मजबूत: रिपोर्ट

01-Oct-2025
नई दिल्ली ( शोर संदेश ) । क्रिसिल की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू खपत और सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार पूंजी निवेश (कैपेक्स) से चालू वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों के राजस्व में 8 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है।
क्रिसिल रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर सोमशेखर वेमुरी ने कहा कि कुल मिलाकर कॉर्पोरेट क्रेडिट क्वालिटी आउटलुक मजबूत बना हुआ है और ईबीआईटीडीए 12 प्रतिशत पर स्थिर रहने की उम्मीद है। जीएसटी सुधार, आयकर में छूट, कम महंगाई और ब्याज दर घरेलू खपत को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं। सरकार का लगातार पूंजी निवेश और घरेलू मांग में सुधार इंफ्रास्ट्रक्चर और कंजप्शन-लिंक्ड सेक्टर्स के लिए क्रेडिट क्वालिटी आउटलुक को सपोर्ट करेंगे।
वेमुरी ने कहा, “इसके अलावा, बैलेंस शीट का लेवरेज पिछले दशक के निचले स्तर के करीब है, यानी वैश्विक चुनौतियां बढ़ती हैं तो स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि निर्यात से जुड़े क्षेत्र वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ द्विपक्षीय समझौतों सहित व्यापार वार्ता के सकारात्मक परिणामों और घरेलू नीतियों के समर्थन से इस प्रभाव को कम किया जा सकता है।”
इस वित्त वर्ष में बैंकों और गैर-बैंकों की क्रेडिट क्वालिटी आउटलुक स्थिर बना हुआ है। जीएसटी सुधार और आयकर में कटौती से खपत में सुधार, कम ब्याज दरें और नीतिगत दरों में कमी से दूसरे छमाही में क्रेडिट ग्रोथ बढ़ने की उम्मीद है। 
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि बैंक क्रेडिट पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 11-12 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा, जबकि गैर-बैंकों का एयूएम पिछले वित्त वर्ष की तरह 18 प्रतिशत की बेहतर दर से बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क, जल, सिंचाई और पावर सेगमेंट में विविध ऑर्डर बुक से कंस्ट्रक्शन सेक्टर को लाभ होगा। रिन्यूएबल एनर्जी, रोड एसेट्स, कमर्शियल रियल एस्टेट और डेटा सेंटर जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों के लिए मजबूत और अनुमानित कैश फ्लो से मदद मिलेगी।
वेकेशन और बिजनेस ट्रैवल में बढ़ती मांग से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को लाभ होगा, क्योंकि मांग सप्लाई से अधिक है। इसी तरह, कम महंगाई, कर में राहत और प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग से मजबूत लाभप्रदता के कारण एफएमसीजी सेक्टर को बढ़ती मांग से लाभ होगा।
हालांकि, अमेरिकी टैरिफ का असर कुछ एक्सपोर्ट से जुड़े सेक्टर की क्रेडिट क्वालिटी पर पड़ेगा, क्योंकि भारत के कुल सामान निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है। डायमंड सेक्टर में, ऑपरेटिंग प्रॉफिट कम होगा क्योंकि टैरिफ की चुनौतियों से खासकर लैब ग्रोन डायमंड से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण मांग पर दबाव बढ़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में ऑर्डर मिलने के बावजूद, प्रतिस्पर्धा बढ़ने से झींगा एक्सपोर्ट करने वालों की कमाई में भी गिरावट आएगी।
 

इस साल भारत का फार्मा निर्यात 30 अरब डॉलर करेगा पार, घरेलू बाजार 2030 तक होगा दोगुना : जितेंद्र सिंह

01-Oct-2025
नई दिल्ली । ( शोर संदेश ) केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत के फार्मास्यूटिकल्स निर्यात का वर्तमान मूल्य लगभग 27.8 अरब डॉलर है और यह साल के अंत तक 30 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश का घरेलू फार्मा बाजार, जो वर्तमान में 60 अरब डॉलर का है, 2030 तक 130 अरब डॉलर तक दोगुना होने की संभावना है। केंद्रीय मंत्री ने भारत के मेडटेक क्षेत्र में तेजी से विस्तार पर भी प्रकाश डाला। यह क्षेत्र वर्तमान में 15-20% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है और इसमें देशभर के लगभग 800 मेडिकल डिवाइस निर्माता शामिल हैं। उन्होंने यह बातें उत्तर प्रदेश सरकार और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के बीच फार्मा, बायोटेक और मेडटेक में नवाचार और निवेश बढ़ाने के लिए हुए समझौते (MoU) के अवसर पर कही। यह सहयोग डीबीटी के बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) और उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल (UPPPC) के माध्यम से केंद्र-राज्य साझेदारी मॉडल के तहत भारत के स्वास्थ्य और बायोटेक क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य शोध, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, कौशल क्षमता निर्माण और छोटे और मध्यम उद्यमों (SME और MSME) के लिए मजबूत संबंध बनाना है। अधिकारियों ने कहा कि यह सहयोग उभरती तकनीकों में निवेश को तेज करेगा और उनके व्यावसायीकरण में मदद करेगा। डॉ. सिंह ने भारत में बायोटेक स्टार्टअप्स के तेजी से बढ़ते आधार पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि 2014 में स्टार्टअप्स की संख्या केवल 50 थी, जो आज 11,000 से अधिक हो गई है। उन्होंने इस वृद्धि के लिए सरकार की नीतियों और पूरे सरकार दृष्टिकोण को श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि भारत अब वैक्सीन का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बन चुका है, जहां दुनिया की 60% से अधिक वैक्सीन का निर्माण होता है और 200 से अधिक देशों को भारतीय वैक्सीन डोज भेजे जाते हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि DBT-UP समझौते जैसे सहयोग विकसित भारत 2047 के विजन को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।
वहीं उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य को फार्मा, बायोटेक और मेडटेक का केंद्र बनाने की महत्वाकांक्षा पर जोर दिया। उन्होंने लखनऊ में बायोटेक पार्क, ग्रेटर नोएडा में मेडिकल डिवाइस पार्क और ललितपुर में बल्क ड्रग और फार्मा पार्क जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया, जिन्हें नए सहयोग के तहत और विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि DBT-BIRAC का सहयोग स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने, शोध सहयोग को मजबूत करने और किफायती स्वास्थ्य नवाचारों के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद करेगा।
भारत की बायोइकोनॉमी का मूल्य वर्तमान में लगभग 165 अरब डॉलर है। DBT के सचिव और BIRAC के अध्यक्ष डॉ. राजेश एस. गोखले ने कहा कि यह समझौता नवाचार पाइपलाइन को खोलने और किफायती तकनीकों को बढ़ाने में मदद करेगा। BIRAC के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार ने कौशल विकास, इनक्यूबेशन और व्यावसायिकरण के महत्व पर जोर दिया, ताकि नवाचार तेजी से बाजार तक पहुंच सकें। MoU हस्ताक्षर समारोह में उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित कुमार घोष सहित DBT, BIRAC और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने निष्कर्ष में कहा कि केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से भारत किफायती और सुलभ स्वास्थ्य समाधान का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
 

महिला सशक्तिकरण : आदिवासी और दलित महिलाओं की कहानियां आज समाज को कर रही प्रेरित

01-Oct-2025
नई दिल्ली ( शोर संदेश ) । पिछले गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जब राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा की, तो पुरस्कारों की लिस्ट में जोरशोर से महिला शक्ति दिखी। ग्रामीण पृष्ठभूमि के बाबजूद समाज में बदलाव की लड़ाई लड़ती महिलाओं को पद्मश्री लिस्ट में शामिल किया गया। रही सही कसर तब पूरी हो गई जब परेड में पहली बार तीनों सेनाओं की एक महिला टुकड़ी ने मार्च किया। महिला सशक्तिकरण की दिशा में ये पहली तस्वीर थी। फिर पद्म पुरस्कारों की एक से बढ़कर एक कहानियों ने ध्यान खींचा कि ये महिलाएं कौन हैं ? मसलन, हाथी की परी नाम से मशहूर पारबती बरुआ तमाम रूढ़िवादी विचारों को पीछे छोड़ देश की पहली महिला महावत बनीं। पारबती ने वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हुए मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में डटकर काम किया। पारबती ने महज 14 वर्ष की आयु में अपने पिता से महावत बनने के गुर सीखने शुरू किए। जंगली हाथियों से निपटने और उन्हें पकड़ने में पारबती ने तीन राज्य सरकारों की मदद की।
उसी तरह सरायकेला की सहयोगी चामी मुर्मु झारखंड की रहने वाली पर्यावरण-वनरोपण के लिए तीन हजार से अधिक वृक्षारोपण के प्रयास को गति दी और तीन हजार महिलाओं के साथ पौधे लगाए। स्वयं सहायता समूह की मदद से 40 से ज्यादा गांवों की 30000 महिलाओं को सशक्त बनाया। ऐसे ही अंडमान की नारियल अम्मा ने 150 से अधिक किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। एक ओर पूर्वी सियांग की हर्बल मेडिसिन विशेषज्ञ यानंग जमोह लेगो ने आदि जनजाति के पारंपरिक उपचार प्रणाली को पुनर्जीवित किया। यानंग ने 10000 से अधिक रोगियों को चिकित्सा देखभाल प्रदान की और औषधीय जड़ी-बूटियों के बारे में 1 लाख व्यक्तियों को शिक्षित किया।
वहीं स्मृति रेखा चकमा त्रिपुरा की रहने वाली हैं और लोनलूम शाॅल बुकर हैं। दुसाध समुदाय की शांति देवी पासवान ने अपने पति शिवन पासवान के साथ गोदना चित्रकारी को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया। गोदना कलाकृति का प्रदर्शन किया और 20 हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया। ये सारी महिलाएं किसी एक राज्य के नहीं हैं। हलांकि इनमेंसे किसी ने भी सरकारी स्कीम के तहत प्रेरित नहीं हुई। सारी कहानियां बदलते भारत में महिलाओं के सुदृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए जैविक खेती, व्यवस्थित चावल गहनीकरण, जैविक खाद उत्पादन (गाय के गोबर और गोमूत्र का उपयोग करके), वृक्षारोपण, वन अधिकार अधिनियम के लिए पैरवी और जनजातियों के लिए सामुदायिक वन जैसी गतिविधियां मुख्य फोकस रही हैं।
325 से अधिक आदिवासी महिलाओं को उनके ब्लॉक के ग्राम प्रतिनिधि, पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया है। 120,000 व्यक्तिगत वन भूमि के स्वामित्व उन महिलाओं को प्रदान किए गए हैं जो मुख्य प्राप्तकर्ता और स्वामी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से रोजगार सृजन में भी प्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं उड़ीसा में आदिवासी और दलित परिवारों के बीच 10.6 करोड़ व्यक्ति दिवस श्रम जुटाया है। इसके अलावा ‘अपना भोजन स्वयं उगाएं’ अभियान ने महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण सेवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। आदिवासी महिलाओं को अपने पर्यावरण-अनुकूल घर बनाने के लिए ब्लॉक ईंट बनाने और राजमिस्त्री कौशल का प्रशिक्षण दिया गया है। 5000 से अधिक आदिवासी महिलाओं को पर्माकल्चर और इकोविलेज डिजाइन शिक्षा में प्रशिक्षित किया गया है।
फिर भी ये कहना गलत होगा कि सरकार कुछ नहीं कर रही है। आये दिन लखपति दीदी और ड्रोन दीदी की चर्चा हम सुनते रहे हैं। पिछले कई वर्षों से मोदी सरकार रोजगार के अवसर प्रदान करने वाले पारंपरिक क्षेत्रों को सुदृढ़ कर रही है और साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष, ऑटोमेशन और रक्षा निर्यात जैसे नए क्षेत्रों में महिलाओं को भी बढ़ावा दे रही है। ड्रोन प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नए रास्ते खोले जा रहे हैं इस क्षेत्र में महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा आगे बढ़ाने के लिए लाखों ड्रोन दीदियों को प्रशिक्षित कर रोजगार दिया जा रहा है। वंदे भारत जैसी ट्रेनों में महिला लोको पायलट आसानी से देखे जा सकते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत की महिलाओं के सशक्तिकरण, उनके सम्पूर्ण स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सुरक्षा एवं रोजगार प्रशिक्षण के साथ सर्वांगीण विकास के लिए कार्यरत है। मंत्रालय “कुपोषण मुक्त भारत” के लिए अपनी प्रतिबद्धता और बच्चों के विकास के प्रति अपने समर्पण में एकजुट होकर प्रयासरत है, और न केवल महिलाओं के विकास के लिए, बल्कि वीमेन लेड डेवलपमेंट के माध्यम से विकसित राष्ट्र निर्माण की प्रेरक कहानियों में, सशक्त महिला नेतृत्व की भूमिका और योगदान का गौरवशाली इतिहास भी लिख रहा है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तीन मिशनों- महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए मिशन शक्ति बच्चों के विकास और सुरक्षा के लिए मिशन वात्सल्य और कुपोषण के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के माध्यम से भावी भारत की तस्वीर में समता, सक्षमता और सहभागिता के विविध रंग भरने के लिए प्रयासरत है। सरकारी योजना मिशन शक्ति का उद्देश्य महिलाओं को जीवन के सभी चरणों में सशक्त बनाना है। यह कार्यक्रम ‘वीमेन लेड डेवलपमेंट’ के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है, जो जीवन के प्रत्येक चरण में महिलाओं को प्रभावित करने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए उन्हें सक्षम बनाता है। इस मिशन का उद्देश्य महिलाओं को सार्वजनिक भागीदारी और रणनीतिक हस्तक्षेपों में शामिल करते हुए समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में समान योगदानकर्ता बनाना है।
 



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