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संसद में आज पेश होंगे महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन विधेयक

16-Apr-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) केंद्र सरकार आज गुरुवार को संसद के विशेष सत्र में देश में अहम बदलाव लाने वाले विधेयक पेश करेगी। यह विधेयक महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से प्रभावी रूप से लागू करने और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित हैं। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 महत्वपूर्ण विधायी प्रस्ताव है। 
इसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण (33 प्रतिशत ) को लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया को सक्रिय करना है। सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पारित करने के लिए 16, 17 और 18 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाया है। सरकार का उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) को अतिशीघ्र अमली जामा पहनाना है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्राविधान किया गया है। संभव है कि विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध न करे। 
लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं की सीटों में बढ़ोतरी के लिए परिसीमन के प्रस्ताव पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव होना तय माना जा रहा है। दक्षिण के राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के कारण नए परिसीमन में उनकी लोकसभा सीटें घट सकती हैं। सरकार ने इस आशंका को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सीटों की बढ़ोतरी हर राज्य के लिए एक समान 50 प्रतिशत होगी। लोकसभा में सीटों की अधिकतम सीमा 850 तय की गई है और किसी भी राज्य की सीटों में कटौती का सवाल ही नहीं उठता।
सरकार ने कहा कि 1976 के बाद से लोकसभा सीटों में बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए स्पष्ट और नया परिसीमन समय की सबसे बड़ी मांग है। परिसीमन प्रक्रिया आखिरी प्रकाशित जनगणना (2011) के आधार पर पूरी की जाएगी। राज्यों के लिए सीटों की संख्या तय नहीं है। हर राज्य के लिए परिसीमन आयोग बनेगा। आयोग राज्य के सभी दलों से चर्चा के बाद सीटों का अंतिम निर्धारण करेगा। 
आज लोकसभा में तीनों विधेयकों पर चर्चा होगी। इसका समय 18 घंटे तय है। 17 अप्रैल को मतदान के साथ लोकसभा में यह प्रक्रिया पूरी होगी। 18 अप्रैल को लोकसभा से पास होने के बाद इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। 10 घंटे की चर्चा के बाद मतदान होगा। उल्लेखनीय है मौजूदा लोकसभा में 543 सीटें हैं।

पटरियों पर दौड़ती प्रगति, समय, समाज और संस्कृतियों को जोड़ने वाली जीवनरेखा

16-Apr-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) मानव सभ्यता के इतिहास में कुछ आविष्कार ऐसे होते हैं, जो केवल तकनीकी उपलब्धि बनकर नहीं रहते, बल्कि समय की दिशा और समाज की गति दोनों को ही परिवर्तित कर देते हैं। रेल उसी श्रेणी का एक अद्भुत, जीवंत और युगांतरकारी आविष्कार है। लोहे की पटरियों पर दौड़ती यह सशक्त धारा मानो गति का मूर्त रूप है, जिसने दूरियों को चुनौती दी, समय को अनुशासन का पाठ पढ़ाया और विविधताओं से भरे मानव समाज को एक अदृश्य सूत्र में पिरो दिया। 16 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व रेल दिवस इस महान प्रणाली के प्रति कृतज्ञता, सम्मान और स्मरण का एक पावन, प्रेरणादायक और गौरवपूर्ण अवसर है।
भारत जैसे विशाल, बहुरंगी और बहुभाषी देश में रेल केवल एक परिवहन का साधन नहीं, बल्कि जनजीवन की धड़कन, राष्ट्र की नाड़ी और संवेदनाओं का प्रवाह है। यह खेतों की हरियाली से महानगरों की चहल-पहल तक, हिमालय की ऊंचाइयों से सागर की गहराइयों तक, और भाषाओं की विविधता से संस्कृतियों की समृद्धि तक एक सजीव सेतु बनकर निरंतर प्रवाहित होती है। भारतीय रेल केवल यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं ले जाती, बल्कि यह उनके सपनों, उम्मीदों और भावनाओं को भी अपने साथ संजोए आगे बढ़ती है मानो हर डिब्बा एक कहानी है, हर यात्रा एक अनुभव।आज भारतीय रेल विश्व के सबसे विशाल रेल नेटवर्कों में से एक होकर केवल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समन्वय की आधारशिला बन चुकी है। यह पटरियों पर दौड़ती मशीनों का समूह मात्र नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा का विस्तार है। एक ऐसा सशक्त प्रतीक, जो हर दिन, हर पल भारत को जोड़ता है, संवारता है और प्रगति की नई दिशाओं की ओर अग्रसर करता है।
रेल यात्रा एक साधारण यात्रा नहीं, बल्कि जीवन का चलता-फिरता दर्पण है। प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन जैसे ही गति पकड़ती है, यात्रियों के मन में भी नई उम्मीदों की लहर दौड़ पड़ती है। खिड़की के बाहर बदलते दृश्य हरी-भरी फसलें, बहती नदियां, दूर तक फैले पहाड़ मानो प्रकृति की एक निरंतर चलती हुई चित्रकला हो। गांधी जी ने ठीक ही कहा था कि रेलवे ने भारत को एक राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाई है। एक रेल डिब्बे में बैठा तमिल भाषी, बांग्‍ला भाषी और पंजाबी भाषी जब अपनी रोटी साझा करते हैं, तब “विविधता में एकता” का जीवंत रूप प्रकट होता है। यहां एक ही सीट पर अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और जीवन के अनुभव मिलते हैं। सहयात्रियों के साथ होने वाली छोटी-छोटी बातचीत, साझा भोजन और अनायास बने रिश्ते इस यात्रा को और भी यादगार बना देते हैं। यह यात्रा केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मीयता और अनुभवों का विस्तार है।
18वीं और 19वीं शताब्दी में औद्योगिक क्रांति ने परिवहन के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन किया। इसी दौर में भाप इंजन का विकास हुआ। 1804 में रिचर्ड ट्रेविथिक ने पहला भाप चालित इंजन बनाया। 1825 में जॉर्ज स्टीफेंसन ने पहली सार्वजनिक रेलवे लाइन (स्टॉकटन-डार्लिंगटन) शुरू की। 1830 में लिवरपूल से मैनचेस्टर के बीच पहली यात्री रेलवे सेवा शुरू हुई। यह समय रेलवे के वास्तविक जन्म का काल माना जाता है।
भाप इंजन से बुलेट ट्रेन तक रेलवे का उद्भव औद्योगिक क्रांति के साथ हुआ, जब भाप इंजन ने परिवहन के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। भारत में पहली रेलगाड़ी 1853 में मुंबई से ठाणे के बीच चली, जिसने एक नए युग की शुरुआत की। औपनिवेशिक काल में रेलवे का विस्तार मुख्यतः ब्रिटिश हितों के लिए हुआ। कच्चे माल की ढुलाई और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए। लेकिन भारत की आज़ादी के बाद रेलवे ने जनसेवा और राष्ट्र निर्माण का स्वरूप धारण कर लिया। आज भारत में रेलवे का आधुनिकीकरण तीव्र गति से हो रहा है। हाई-स्पीड रेल और बुलेट ट्रेन परियोजनाएं,जैसे मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर देश को तकनीकी रूप से उन्नत राष्ट्रों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
भारत में रेल यात्रा आम जनता के लिए सबसे किफायती और सुलभ साधन है। यह गरीब, मध्यम वर्ग और उच्च वर्ग ,सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध है। लंबी दूरी की यात्रा को सस्ता और सुविधाजनक बनाकर रेलवे ने सामाजिक समावेशन को बढ़ावा दिया है। अर्थव्यवस्था की रीढ़-रेलवे देश की माल ढुलाई का प्रमुख साधन है। कोयला, लौह अयस्क, खाद्यान्न, उर्वरक, सीमेंट और पेट्रोलियम पदार्थों की बड़े पैमाने पर ढुलाई रेलवे के माध्यम से होती है। इससे उद्योगों को निरंतर गति मिलती है और उत्पादन चक्र बाधित नहीं होता।
समय के साथ रेलवे ने सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किए हैं। आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली, स्वचालित ब्रेकिंग सिस्टम, ट्रैक मॉनिटरिंग और डिजिटल निगरानी के माध्यम से दुर्घटनाओं में कमी आई है। सुरक्षा तकनीक: ‘कवच’ जैसी स्वदेशी सुरक्षा प्रणालियों का विकास रेल दुर्घटनाओं को शून्य पर लाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। वंदे भारत एक्सप्रेस: यह ‘मेक इन इंडिया’ का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो गति और सुविधा का नया मानक स्थापित कर रही है। यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
ब्रिटिश शासन में रेलवे का उद्देश्य आर्थिक शोषण और प्रशासनिक नियंत्रण था। रेल नेटवर्क का विस्तार बंदरगाहों और व्यापारिक केंद्रों तक सीमित था। स्वतंत्रता के बाद रेलवे का राष्ट्रीयकरण हुआ और इसे जनहित के लिए विकसित किया गया। नए रेल मार्गों का निर्माण, विद्युतीकरण, डबल लाइनिंग और आधुनिक तकनीकों का समावेश इन सबने रेलवे को नई ऊचाइयों तक पहुंचाया। रीबी उन्मूलन में रेलवे की भूमिका-रेलवे ने आर्थिक अवसरों का विस्तार किया है। यह लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में। छोटे व्यापारी, स्टॉल संचालक, कुली और सेवा प्रदाता रेलवे से जुड़े हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों को शहरों से जोड़कर रेलवे ने शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को सुलभ बनाया है, जिससे गरीबी उन्मूलन में सहायता मिली है। भारत के विकास में रेलवे का योगदान- रेलवे देश की अर्थव्यवस्था की धुरी है। यह कृषि, उद्योग और व्यापार को जोड़ने वाला माध्यम है। बिना रेलवे के संसाधनों का वितरण और आर्थिक संतुलन संभव नहीं होता।
रेल भारत की “एकता में अनेकता” का जीवंत प्रतीक है। एक ही डिब्बे में विभिन्न राज्यों के लोग साथ यात्रा करते हैं, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता है और आपसी समझ बढ़ती है।उत्तर में हिमालय की चोटियों से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी के तटों तक, और उत्तर-पूर्व के दुर्गम पहाड़ों से लेकर पश्चिम के रेगिस्तान तक, रेलवे ने भारत के हर कोने को जोड़ा है। पर्यटन में रेलवे की भूमिका-रेलवे ने पर्यटन को नई दिशा दी है। धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों तक आसान पहुंच ने पर्यटन उद्योग को बढ़ावा दिया है। विशेष ट्रेनें और लक्ज़री सेवाएं भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करती हैं। भारत के एकीकरण में रेलवे की भूमिका-रेलवे ने देश के विभिन्न हिस्सों को एक सूत्र में बांधा है। यह भौगोलिक दूरी को कम करने के साथ-साथ भावनात्मक एकता को भी सुदृढ़ करता है। भौगोलिक समावेशन में योगदान-रेलवे ने दुर्गम और पिछड़े क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ा है। पहाड़ी, रेगिस्तानी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में रेल संपर्क ने विकास के नए द्वार खोले हैं। हाई-स्पीड रेल और बुलेट ट्रेन भविष्य की ओर बढ़ते कदमों के उदाहरण हैं। भारत में हाई-स्पीड रेल परियोजनाएं आधुनिक तकनीकी विकास का प्रतीक हैं। बुलेट ट्रेन परियोजना देश की परिवहन प्रणाली को नई दिशा देगी जहां गति, सुरक्षा और सुविधा का अद्वितीय संगम होगा।
 

पीएम मोदी ने पोइला बोइशाख, रोंगाली बिहू और रोंगाली बिहू के पावन अवसर पर शुभकामनाएं दीं

15-Apr-2026
नई दिल्ली( शोर संदेश )। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को पोइला बोइशाख, रोंगाली बिहू और विशु के पावन अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। 
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर बंगाली समुदाय के लोगों से कहा कि मेरी प्रार्थना है कि आने वाला वर्ष आपकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति लेकर आए। सुख और भाईचारे की भावना सदा बनी रहे। आपको अच्छे स्वास्थ्य और ढेर सारी खुशियों की शुभकामनाएं। उन्होंने आगे कहा कि यह पश्चिम बंगाल की उस शाश्वत समृद्ध संस्कृति का जश्न मनाने का भी अवसर है जिसने भारत की सभ्यतागत भावना को आकार दिया है।
पोइला बोइशाख, जिसे बंगला नोबो बोरशो के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन से बंगाली कैलेंडर की शुरुआत होती है। बंगाली समुदाय के लोग इस दिन को नए साल के रूप में मनाते हैं। पोइला बैसाख का अर्थ है बैसाख का पहला दिन, बंगाली चंद्र-सौर कैलेंडर का प्रारंभिक महीना जो आमतौर पर प्रत्येक वर्ष 14 या 15 अप्रैल को पड़ता है। 
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर अलग-अलग पोस्टों के माध्यम से इन त्योहारों की शुभकामनाएं दी हैं। वहीं असम के लोगों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आप सभी को रोंगाली बिहू की शुभकामनाएं!” 
उन्होंने कहा कि यह जीवंत त्योहार नई शुरुआत, समृद्धि और एकजुटता की भावना का उत्सव मनाता है। यह त्योहार असमिया संस्कृति को खूबसूरती से प्रदर्शित करता है, जो पूरे विश्व में लोकप्रियता हासिल कर रही है। मैं आपके लिए सफलता, खुशी और उत्तम स्वास्थ्य से भरे वर्ष की प्रार्थना करता हूं।
वहीं एक अन्य एक्स पोस्ट में पीएम मोदी ने केरल के लोगों को विशु कि शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आप सभी को विशु की हार्दिक शुभकामनाएं ! उन्होंने कहा कि यह त्योहार आशा और खुशी का प्रतीक है। यह सभी के प्रति सकारात्मकता और कृतज्ञता पर बल देता है। आने वाला वर्ष आनंद, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य से परिपूर्ण हो। यह वर्ष नए अवसर, सफलता और चारों ओर शांति लेकर आए।


 

सम्राट चौधरी ने बिहार के 24 वे मुख्यमंत्री के रूप में ली शपथ

15-Apr-2026
नई दिल्ली( शोर संदेश )। बिहार में मंगलवार को भाजपा के मुख्यमंत्री ने शपथ ली। सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभाल ली है। राज्यपाल सैयद अताउल हसनैन ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। बिहार में मुख्यमंत्री के पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी के नाम पर आधिकारिक मुहर लगी थी।
बिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (राकेश कुमार) का जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले के तारापुर प्रखंड स्थित लखनपुर गांव में हुआ था। वह एक प्रतिष्ठित राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी सात बार विधायक और सांसद के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, वहीं उनकी माता पार्वती देवी भी बिहार विधानसभा की सदस्य रही हैं। पिछड़ा वर्ग (कुर्मी समुदाय) से संबंध रखने वाले सम्राट चौधरी को राज्य की राजनीति में ओबीसी वोट बैंक पर पकड़ रखने वाला एक कद्दावर नेता माना जाता है।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। उन्होंने 1990 में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से राजनीति की शुरुआत की। 1999 में कम उम्र में राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने थे। वे बिहार के सबसे युवा मंत्रियों में से एक थे। वर्ष 2000 और 2010 में सम्राट परबत्ता से विधायक चुने गए। कुछ दिन जेदयू में रहने के बाद वर्ष 2017 में वे भाजपा में शामिल हो गए।
वर्ष 2023 में वे बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। जनवरी 2024 में नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाए गए और वित्त, स्वास्थ्य, शहरी विकास, पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभाग को संभाला। फिर 2025 के विधानसभा चुनाव में तारापुर से जीत दर्ज की। सिर्फ आठ से नौ साल में भाजपा में उनकी तेज तरक्की को पार्टी की ओबीसी आउटरीच रणनीति का नतीजा माना जा रहा है। 


 

ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर का भारत का आधिकारिक दौरा, दोनों देशों की पार्टनरशिप’ को और बढ़ावा मिलेगा

15-Apr-2026
नई दिल्ली( शोर संदेश )। ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर बुधवार को अपने पहले आधिकारिक दौरे पर भारत पहुंचे। क्रिश्चियन स्टॉकर इस दौरे पर व्यापार, निवेश और नई तकनीक जैसे खास क्षेत्रों में आपसी संबंधों को मजबूत करने पर जोर देंगे। 
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर का भारत के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर गर्मजोशी से स्वागत है। एयरपोर्ट पर युवा मामले और खेल मंत्री रक्षा खडसे ने उनका स्वागत किया। भारत और ऑस्ट्रिया के बीच अच्छे और दोस्ताना संबंध हैं। चांसलर स्टॉकर के दौरे से ‘बेहतर भारत-ऑस्ट्रिया पार्टनरशिप’ को और बढ़ावा मिलेगा।”
स्टॉकर पहली बार चार दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं और 2025 में ऑफिस संभालने के बाद एशिया का उनका पहला आधिकारिक दौरा है। इस दौरे के दौरान, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापार, निवेश, ग्रीन टेक्नोलॉजी और जरूरी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर फोकस करते हुए कई तरह की बातचीत करेंगे।
स्टॉकर के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी है, जिसमें वरिष्ठ मंत्री, सरकारी अधिकारी और बिजनेस लीडर शामिल हैं, जो इस दौरे के मजबूत इकोनॉमिक फोकस को दिखाता है। दोनों पक्षों से एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इनोवेशन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने के मौके तलाशने की उम्मीद है। यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक जुड़ाव के बीच हो रहा है। चर्चा में आपसी फायदे के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ मल्टीलेटरल फोरम में सहयोग पर भी बात होने की उम्मीद है।
भारत और ऑस्ट्रिया के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध हैं, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं। यह दौरा 2024 में पीएम मोदी के ऑस्ट्रिया दौरे से बने मोमेंटम को आगे बढ़ाएगा और उम्मीद है कि इससे भारत-ऑस्ट्रिया साझेदारी और मजबूत होगी, जिससे रणनीतिक और आर्थिक सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।
इससे पहले 2025 में, 12 दिसंबर को वियना में हुए भारत-ऑस्ट्रिया फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन के आठवें राउंड में, विदेश मंत्रालय में सचिव (वेस्ट) सिबी जॉर्ज और ऑस्ट्रिया के फॉरेन अफेयर्स के सेक्रेटरी जनरल निकोलस मार्शिक ने आपसी संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की थी। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों पक्षों ने भारत-ईयू संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा की और आपसी हितों के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

हिमाचल दिवस: प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने दी शुभकामनाएं

15-Apr-2026
नई दिल्ली( शोर संदेश )। देवभूमि हिमाचल प्रदेश आज स्थापना दिवस मना रहा है। 15 अप्रैल 1948 को 30 छोटी-बड़ी पहाड़ी रियासतों को मिलाकर एक मुख्य आयुक्त प्रांत के रूप में हिमाचल का गठन हुआ था। 25 जनवरी 1971 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ, लेकिन स्थापना का मुख्य दिवस 15 अप्रैल को मनाया जाता है। हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया है, “समस्त हिमाचलवासियों को हिमाचल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पावन देवभूमि अपनी समृद्ध परंपराओं, अनुपम सांस्कृतिक धरोहर और यहां के लोगों की कर्मठता, कर्तव्यनिष्ठा और विनम्रता के कारण विशेष पहचान रखती है। इस पुनीत अवसर पर मैं प्रदेश के सभी परिवारजनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं ।”
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए एक्स पोस्ट पर लिखा है, “हिमाचल दिवस के अवसर पर हम अपने किसानों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त करते हैं, जिनके परिश्रम से हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ और जीवंत बनी हुई है। हमारी सरकार ने प्रदेश के इतिहास में पहली बार अदरक को एमएसपी के दायरे में शामिल किया है, जिसके लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम का मूल्य निर्धारित किया गया है। साथ ही, किसानों के हितों को सशक्त और व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने के लिए पहली बार किसान आयोग का गठन किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जाए तथा उनके अधिकारों को और अधिक मजबूत किया जाए।”
हिमाचल प्रदेश सरकार की सरकारी वेबसाइट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश 15 अप्रैल, 1948 को भारतीय संघ के एक भाग-राज्य (सी) के रूप में अस्तित्व में आया, जिसमें बघत, भज्जी, बघल, बीजा, बलसेन, बुशहर, चंबा, दरबोटी, देलोठ-धाड़ी, धामी, घुंड, जुब्बल, खानेती, क्यारहोटी, कुमारसैन, कुनिहार, कुठार, मंडी, मधान, महलो, मंगल, कोट (रतेश), क्योंथल, राविनीगढ़, संगरी, सिरमौर, सुहेत, थारोच, थियोग आदि 30 छोटे-बड़े पहाड़ी राज्यों को एकीकृत किया गया था। उस समय ये सभी क्षेत्र चार जिलों का हिस्सा थे।
1954 में पड़ोसी राज्य बिलासपुर को हिमाचल प्रदेश में शामिल किया गया। हिमाचल प्रदेश 1956 तक भारतीय संघ का ‘सी’ राज्य बना रहा था। 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग ने राज्यों को भाग ए, बी, सी आदि श्रेणियों में वर्गीकृत करने की प्रथा को समाप्त करने की सिफारिश की। 25 जनवरी 1971 को राज्य का दर्जा मिलने तक हिमाचल प्रदेश का केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा बना रहा। 1960 में महासू जिले की सीमावर्ती चीनी तहसील को एक अलग प्रशासनिक इकाई के रूप में गठित किया गया और किन्नौर जिले का गठन हुआ, जिससे जिलों की कुल संख्या में वृद्धि हुई।
1 नवंबर, 1966 को तत्कालीन पंजाब राज्य का पुनर्गठन किया गया, जिसमें हरियाणा को एक अलग राज्य के रूप में गठित किया गया और कुल्लू, कांगड़ा, शिमला और होशियारपुर जिले के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों तथा गुरदासपुर जिले के डलहौजी का हिमाचल प्रदेश में विलय कर दिया गया तथा चार नए जिले कुल्लू, लाहौल-स्पीति, कांगड़ा और शिमला बनाए गए। 
 

तमिलनाडु में चुनावी माहौल गरम, आज नागरकोविल में मोदी का रोड शो

15-Apr-2026
नई दिल्ली( शोर संदेश )। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज बुधवार को तमिलनाडु के नागरकोविल पहुंचकर शाम को एक भव्य रोड शो में शामिल होंगे। इस दौरान भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता उनके साथ रहेंगे।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अब गिनती के हिसाब से केवल एक सप्ताह ही बचा है। प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली से विशेष विमान के माध्यम से केरलम के तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। वहां से दोपहर 3:30 बजे विशेष हेलीकॉप्टर से शाम 4:10 बजे नागरकोविल पहुंचेंगे। इसके बाद 4:15 बजे नागरकोविल में बनाए गए हेलिपैड से वेप्पमूडु क्षेत्र तक कार से जाएंगे। 
प्रधानमंत्री शाम 4:30 से 5:30 बजे तक वेप्पमूडु से वडसेरी तक लगभग 1.5 किलोमीटर तक भव्य रोड शो में भाग लेंगे। इसके बाद शाम 5:45 बजे नागरकोविल से हेलीकॉप्टर के जरिए तिरुवनंतपुरम रवाना होंगे। वहां से शाम 6:20 बजे विशेष विमान से दिल्ली जाएंगे।

पीएम मोदी आज कर्नाटक दौरे पर, गुरु भैरवैक्य मंदिर का करेंगे लोकार्पण

15-Apr-2026
नई दिल्ली।( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज बुधवार को कर्नाटक के दौरे पर रहेंगे। पीएम मोदी पूर्वाह्न लगभग 11 बजे मांड्या जिले के क्षेत्र आदिचुंचनगिरी में गुरु भैरवैक्य मंदिर का लोकार्पण करेंगे। इस अवसर पर वह उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी करेंगे।
इस दौरे में प्रधानमंत्री मोदी पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा जी के साथ मिलकर “सौंदर्य लहरी और शिव महिम्न स्तोत्रम” नामक पुस्तक का विमोचन भी करेंगे।
आपको बता दें, गुरु भैरवैक्य मंदिर आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ के 71वें पीठाधीश्वर पूजनीय संत श्री श्री श्री डॉ. बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी की स्मृति के प्रति समर्पित स्मारक है। पारंपरिक द्रविड़ वास्तुकला शैली में निर्मित इस मंदिर की स्थापना महान संत के जीवन और विरासत के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप की गई है। यह मंदिर केवल श्रद्धा का केंद्र ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
श्री डॉ. बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी समाज सेवा के प्रति अपने आजीवन समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित थे। उन्होंने अनेक शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थापना की। उनका दृढ़ विश्वास था कि समाज की सेवा ही सबसे उच्चतम पूजा है, और उनकी शिक्षाओं ने जाति, पंथ और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर लाखों लोगों को प्रेरित किया।
 

दक्षिणी तमिलनाडु में हल्की बारिश का अनुमान, अन्य हिस्सों में गर्मी बढ़ने की संभावना

14-Apr-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) अप्रैल के शुरुआती दिनों में मौसम में बदलाव और हल्की बारिश में गर्मी से राहत दी। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कन्याकुमारी और तिरुनेलवेली जिलों सहित दक्षिणी तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में मध्यम वर्षा का पूर्वानुमान जताया है। वहीं, राज्य के कई आंतरिक क्षेत्रों में तापमान में वृद्धि होने के संकेत दिए हैं। नवीनतम मौसम बुलेटिन के अनुसार, कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली और पश्चिमी घाट के जिलों में सोमवार को एक या दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इन छिटपुट बारिशों से दक्षिणी क्षेत्रों में चल रही भीषण गर्मी से कुछ समय के लिए राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, तमिलनाडु के बाकी हिस्सों में मुख्य रूप से शुष्क मौसम रहने की संभावना है।
पुडुचेरी में भी इसी तरह शुष्क मौसम रहने की उम्मीद है, जहां बारिश की कोई संभावना नहीं है। आईएमडी ने तमिलनाडु के आंतरिक जिलों में अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि का संकेत दिया है। कुछ क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिससे दिन के समय गर्मी बढ़ेगी।
इसके विपरीत, तटीय तमिलनाडु और पुडुचेरी में अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। तटीय क्षेत्रों में तापमान स्थिर रहने के बावजूद, उच्च आर्द्रता और गर्मी के संयोजन से निवासियों को असुविधा हो सकती है। मौसम अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति उमस भरी और कष्टदायक हो सकती है। चेन्नई में दिन भर आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। शहर में अधिकतम तापमान 36 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा, जबकि न्यूनतम तापमान लगभग 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। शहर में भारी बारिश की संभावना नहीं है और उमस भरा मौसम बना रहेगा।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने मछुआरों के लिए कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की है, जो मछली पकड़ने की गतिविधियों के लिए अपेक्षाकृत स्थिर समुद्री परिस्थितियों का संकेत देता है। अधिकारियों ने विशेष रूप से आंतरिक जिलों में रहने वालों को गर्मी से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी बरतने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और दोपहर के समय लंबे समय तक बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी है।

महिला नेतृत्व से सिस्टम बनता है संवेदनशील : नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में पीएम मोदी

14-Apr-2026
नई दिल्ली।( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया था, तब सभी राजनीतिक दलों ने मिलकर इसे सर्वसम्मति से पारित किया था। उस समय एक सुर में यह भी मांग उठी थी कि इस कानून को हर हाल में 2029 तक लागू किया जाए।
पीएम मोदी ने कहा कि इस बार भी सरकार की प्राथमिकता यही है कि सभी जरूरी फैसले संवाद, सहयोग और सहभागिता के जरिए लिए जाएं। उन्हें विश्वास है कि जिस तरह पहले इस अधिनियम ने संसद की गरिमा बढ़ाई थी, उसी तरह इस बार भी सामूहिक प्रयास से संसद नई ऊंचाइयों को छुएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने देश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि आज भारत में राष्ट्रपति से लेकर वित्त मंत्री जैसे अहम पद महिलाओं के पास हैं और वे इन जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं। इससे देश का गौरव लगातार बढ़ रहा है।
पीएम मोदी ने पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी को भी एक बड़ा उदाहरण बताया और कहा कि आज देश में 14 लाख से अधिक महिलाएं लोकल गवर्नमेंट बॉडीज में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। करीब 21 राज्यों में पंचायतों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि लाखों महिलाओं की यह सक्रियता दुनियाभर के बड़े नेताओं और राजनीतिक विशेषज्ञों को भी हैरान करती है। कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, तो सिस्टम अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनता है। जल जीवन मिशन की सफलता इसका एक उदाहरण है, जहां पंचायत स्तर पर महिलाओं की अहम भूमिका रही है।
उन्होंने 2014 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय करोड़ों महिलाएं ऐसी थीं, जिन्होंने कभी बैंक का दरवाजा तक नहीं देखा था। बैंकिंग से जुड़ाव न होने के कारण उन्हें उसका लाभ नहीं मिल पाता था, लेकिन जनधन योजना के जरिए महिलाओं के 32 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खोले गए, जिससे उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ी।
प्रधानमंत्री ने बताया कि आज देश की बेटियां नए-नए बिजनेस में अपनी पहचान बना रही हैं। मुद्रा योजना के तहत दिए गए कुल लोन में से 60 प्रतिशत से अधिक लोन महिलाओं ने लिए हैं। वहीं, देश के स्टार्टअप रिवोल्यूशन में भी महिलाएं आगे हैं। वर्तमान में 42 प्रतिशत से ज्यादा रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला डायरेक्टर है।
महिलाओं के करियर को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मैटरनिटी लीव को बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के कई समृद्ध देशों में भी इतनी लंबी छुट्टी की सुविधा नहीं है, और जब वे इसके बारे में बताते हैं तो लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं।
महिलाओं के जीवन के हर चरण को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई गईं।
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से सरकार ने महिलाओं के जीवन के हर चरण को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई हैं। जन्म से लेकर जीवन के अंतिम पड़ाव तक महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास लगातार जारी है। स्किल इंडिया मिशन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि कुछ साल पहले शुरू किए गए व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का असर अब दिखने लगा है। ड्रोन दीदी जैसी पहल के जरिए महिलाएं कृषि क्षेत्र में नई क्रांति ला रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक दिलचस्प टिप्पणी करते हुए कहा कि शासन में आने के बाद उन्होंने बैंकों में ‘गरीबों की अमीरी और अमीरों की गरीबी’ दोनों देखी है। उन्होंने यह भी कहा कि आज देश की माताएं और बहनें ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान की ब्रांड एंबेसडर बन रही हैं। महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास का विजन न केवल महिलाओं को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि समाज की पुरानी सोच को भी चुनौती दे रहा है।
आर्थिक सशक्तीकरण पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने बताया कि पहले ज्यादातर संपत्तियां पुरुषों के नाम पर होती थीं। इस स्थिति को बदलने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले घरों को महिलाओं के नाम पर रजिस्टर करने की पहल की गई। 
 


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