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जादवपुर में पीएम मोदी का वादा: ‘आपका तप बेकार नहीं जाएगा’, टीएमसी पर तीखा हमला

25-Apr-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश)  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के जादवपुर में जनसभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि बंगाल का हर व्यक्ति भाजपा की सरकार के लिए समर्थन दे रहा है। इस दौरान, पीएम मोदी ने सत्तारूढ़ टीएमसी पर भी तीखा प्रहार किया। जादवपुर की रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैं विश्वास दिलाता हूं कि जो लोग धूप में तप कर रहे हैं, मैं उनका तप बेकार नहीं जाने दूंगा। इस क्षेत्र का विकास करके मैं आपके इस तप को ब्याज समेत लौटाऊंगा।”
पहले चरण के मतदान को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “देश आजाद होने के बाद कभी ऐसा मतदान नहीं देखा। हर तरफ यही चर्चा है कि भाजपा को जनता का समर्थन मिला है। आज बंगाल के छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारी भयमुक्त होकर भाजपा के साथ हैं। आज बंगाल के टैक्सीवालों से लेकर रिक्शा चालकों तक सभी भाजपा की सरकार के लिए समर्थन दे रहे हैं। आज नाव चलाने वाले हों या नाम कमाने वाले हों, हर कोई खुलेआम परिवर्तन के लिए भाजपा के भरोसे पर बंगाल का भाग्य बनाने के लिए तैयार है। सरकारी कर्मचारी से लेकर पुलिसकर्मियों तक सभी उज्ज्वल बंगाल के लिए मैदान में आए हैं। शिक्षकों से लेकर वकील और डॉक्टर तक सभी भाजपा के समर्थन में उतरे हुए हैं।”
पीएम मोदी ने तृणमूल कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “पिछले 15 सालों में टीएमसी ने बंगाल को केवल लूटने का काम किया है। ऐसा कोई काम नहीं, जहां टीएमसी का करप्शन नहीं। इसलिए बंगाल की जनता कह रही है कि भर्ती घोटाला, चिटफंड घोटाला, कोयला खनन घोटाला, बालू खनन घोटाला, गरीबों के राशन की लूट, तस्करों को छूट और कट मनी व कमीशन नहीं चलेगा।”
महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी पीएम मोदी ने टीएमसी पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “भाजपा का विश्वास है कि बेटी सशक्त होगी, तो समाज सशक्त होगा। इसलिए हम हर योजना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि बंगाल की हर बहन आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने। लेकिन आपने देखा कि कुछ दिन पहले देश की संसद में टीएमसी और उसके साथियों ने महिला आरक्षण का विरोध किया। देश चाहता है कि राजनीति में बेटियों की भागीदारी बढ़े। लेकिन TMC नहीं चाहती। भाजपा चाहती है कि देश की नारी शक्ति सशक्त हो, लेकिन टीएमसी इसके विरोध में खड़ी हो गई है।”
जादवपुर यूनिवर्सिटी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “इस यूनिवर्सिटी का नाम दुनिया भर में सम्मान से लिया जाता था। कैंपस की नींव ही राष्ट्रवाद पर रखी गई थी। लेकिन आज यहां की स्थिति देखिए, कैंपस के अंदर धमकियां दी जा रही हैं, दीवारों पर देश विरोधी बातें लिखी जा रही हैं और छात्र अपनी पढ़ाई के बजाय सड़कों पर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।”
उन्होंने कहा, “जो सरकार अपने ही राज्य के सबसे बड़े शिक्षण संस्थान को नहीं बचा सकती, वो बंगाल का भविष्य क्या बचाएगी, बंगाल के नौजवानों के भविष्य क्या बचाएगी।”जादवपुर की जनता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कमल छाप पर दिया आपका हर वोट दवाई, सिंचाई और सुनवाई, हर चीज की आजादी देगा। कमल छाप पर दिया आपका हर वोट उस सोच से आजादी देगा, जो बंगाल में हिंसा और रक्तपात को बढ़ावा देती है। कमल छाप पर दिया आपका हर वोट आपके सपनों को उड़ान देगा, बंगाल को फिर से भारत का नंबर 1 स्टेट बनाएगा। कमल छाप पर दिया आपका हर वोट बंगाल को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का बंगाल बनाएगा।”
 

बंगाल चुनाव : पीएम मोदी ने ममता सरकार पर साधा निशाना, बोले- झालमुड़ी मैंने खाई, ‘झाल’ टीएमसी को लगी

24-Apr-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) पश्चिम बंगाल में गुरुवार को एक ओर जहां पहले चरण के तहत 152 सीटों पर मतदान जारी है, वहीं दूसरे चरण की 142 सीटों के लिए चुनाव प्रचार भी पूरी तेजी पर है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृष्णानगर में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर जमकर निशाना साधा।
अपने भाषण में पीएम मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा, “झालमुड़ी मैंने खाई है लेकिन झाल (मिर्ची) टीएमसी को लगी है।” उन्होंने कहा कि 4 मई को बंगाल में भाजपा-एनडीए की जीत का जश्न मनाया जाएगा, मिठाई बांटी जाएगी और झालमुड़ी भी बांटी जाएगी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान हो रहा है और तमिलनाडु में भी मतदान जारी है। उन्होंने सभी मतदाताओं को शुभकामनाएं देते हुए अपील की कि इस बार मतदान के नए रिकॉर्ड बनें और लोकतंत्र के इस पर्व को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाए।
उन्होंने दावा किया कि पिछले 50 वर्षों में यह पहला चुनाव है, जिसमें हिंसा सबसे कम हुई है। उन्होंने कहा कि पहले हर हफ्ते हिंसा की घटनाएं होती थीं और उन्हें आत्महत्या का नाम दे दिया जाता था। उन्होंने चुनाव आयोग की सराहना करते हुए कहा कि आयोग ने एक बार फिर बंगाल की धरती पर लोकतंत्र की प्रतिष्ठा स्थापित की है और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित किया है। साथ ही, उन्होंने सरकारी कर्मचारियों की भी तारीफ की, जो इस बार जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब तक की जानकारी के अनुसार मतदान पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ रहा है। कृष्णानगर में भय पर भरोसे की जीत का माहौल दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भय खत्म हो रहा है और भरोसा आगे बढ़ रहा है। जिन लोगों की आवाज सालों से दबाई गई थी, वे अब खुलकर बोल रहे हैं। गांव-गांव, गली-गली, महिलाएं-पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी बदलाव की बात कर रहे हैं।
पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि 15 साल पहले जनता ने वामपंथ के खिलाफ आवाज उठाई थी और अब वही जनता तृणमूल कांग्रेस के कथित ‘जंगलराज’ के खिलाफ खड़ी है। यह चुनाव न मोदी लड़ रहा है और न ही भाजपा के कार्यकर्ता बल्कि यह चुनाव बंगाल की जनता खुद लड़ रही है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां ज्यादा मतदान हुआ है, वहां भाजपा को मजबूत समर्थन मिला है, जैसा कि पुडुचेरी और असम में देखा गया। उन्होंने विश्वास जताया कि बंगाल में भी भाजपा की जीत तय है।
टीएमसी सरकार पर हमला करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पार्टी ने 10 लाख एमएसएमई और हजारों उद्योग लगाने का वादा किया था लेकिन हकीकत में कई फैक्ट्रियां बंद हो गईं और जूट मिलें भी बंद पड़ी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पतालों को लेकर भी समस्याएं बनी हुई हैं और यहां तक कि एम्स कल्याणी के निर्माण में भी बाधाएं डाली गईं लेकिन भाजपा ने उसे पूरा कराया।
उन्होंने कहा कि टीएमसी घुसपैठियों को बढ़ावा देती है और उन्हें संरक्षण देती है जबकि भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम करती है। 4 मई के बाद पश्चिम बंगाल में सुशासन की नई शुरुआत होगी। उन्होंने मातुआ और नामशूद्र समुदाय के लोगों को भरोसा दिलाया कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। कोई भी आपको नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा। साथ ही उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार बनने के बाद नागरिकता देने की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बंगाल का हर वर्ग (किसान, सरकारी कर्मचारी, डॉक्टर, वकील, शिक्षक, दुकानदार, रिक्शा और टैक्सी चालक) सभी भयमुक्त वातावरण और बेहतर व्यवस्था के लिए वोट कर रहे हैं। पुलिस भी अब गुंडों के दबाव से मुक्त होकर जनता की सेवा के लिए वोट डालने वालों की मदद कर रही है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने वाले अधिनियम को टीएमसी ने पास नहीं होने दिया।
 

ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को बिना किसी समय सीमा के बढ़ाया, नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी

24-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ अपने युद्धविराम को बढ़ा दिया है, जबकि व्यापक नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी गई है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है और तेहरान पर आर्थिक दबाव जारी रखने के संकेत दिए हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका दोहरी रणनीति अपना रहा है-सैन्य हमलों को रोकते हुए वित्तीय और समुद्री प्रतिबंधों को और कड़ा किया जा रहा है।
उन्होंने बुधवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा,राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम के विस्तार की घोषणा की है और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के कारण पूरी तरह बदनाम हो चुके एक शासन को उदारता से कुछ लचीलापन भी दिया है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सैन्य कार्रवाई में विराम का मतलब दबाव में कमी नहीं है। उन्होंने कहा, “सैन्य और प्रत्यक्ष हमलों पर युद्धविराम है लेकिन ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ जारी है और प्रभावी व सफल नौसैनिक नाकेबंदी भी जारी है।”
व्हाइट हाउस के अनुसार, इस नाकेबंदी से ईरान को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। लीविट ने कहा, “हम इस नाकेबंदी के जरिए उनकी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह जकड़ रहे हैं। उन्हें रोज़ 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है,” और जोड़ा कि ईरान तेल की खेप भेजने या भुगतान बनाए रखने में असमर्थ है।
आर्थिक दबाव बढ़ने के बावजूद, प्रशासन ने बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय करने से परहेज किया है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ने कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है, अंततः समय-सीमा का निर्धारण कमांडर-इन-चीफ द्वारा किया जाएगा,” और बातचीत के लिए कम समय होने की खबरों को खारिज किया।
जब उनसे पूछा गया कि क्या युद्धविराम या नाकेबंदी अनिश्चित काल तक जारी रहेगी, तो लीविट ने स्पष्ट जवाब देने से इनकार कर दिया और कहा कि राष्ट्रपति ही तय करेंगे कि “कब उन्हें लगे कि यह संयुक्त राज्य अमेरिका और अमेरिकी जनता के हित में है।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के नेतृत्व के भीतर मतभेद बातचीत को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अंदरूनी स्तर पर काफी विभाजन है… व्यवहारिक लोगों और कट्टरपंथियों के बीच संघर्ष चल रहा है,” और बताया कि वॉशिंगटन तेहरान से “एकजुट प्रतिक्रिया” का इंतजार कर रहा है।
व्हाइट हाउस ने माना कि ईरान से आने वाले विरोधाभासी संकेतों ने प्रक्रिया को जटिल बना दिया है। लीविट ने कहा, “वे सार्वजनिक रूप से जो कहते हैं, वह निजी तौर पर अमेरिका से कही गई बातों से काफी अलग है,” और आधिकारिक ईरानी बयानों पर पूरी तरह भरोसा न करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी वार्ताकार पहले ही ईरानी समकक्षों से सीधे संपर्क कर चुके हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि अंततः निर्णय लेने का अधिकार किसके पास है।
प्रशासन के रुख का बचाव करते हुए लीविट ने कहा कि वॉशिंगटन के पास बढ़त है। उन्होंने कहा, “इस समय सभी पत्ते राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ में हैं… ईरान बहुत कमजोर स्थिति में है।”
उन्होंने कहा कि संकट के दौरान राष्ट्रपति के सार्वजनिक बयानबाजी से बातचीत पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। “संयुक्त राज्य अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप अपनी मांगों और ‘रेड लाइन्स’ को लेकर बहुत स्पष्ट रहे हैं,” उन्होंने कहा।
अलग से, लीविट ने बताया कि प्रशासन विमानन क्षेत्र के घटनाक्रमों पर नजर रख रहा है, खासकर स्पिरिट एयरलाइंस के संभावित राहत पैकेज की खबरों के बीच, लेकिन इस पर कोई विवरण नहीं दिया।
 

छत्तीसगढ़ में एमएसपी खरीद बढ़ी, बिहार में पहली बार दाल की संगठित खरीद शुरू: केंद्र

24-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्र सरकार ने गुरुवार को बताया कि छत्तीसगढ़ में एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीद को काफी बढ़ाया गया है। साथ ही, बिहार में ‘आत्मनिर्भर दलहन मिशन’ के तहत पहली बार दाल की संगठित खरीद शुरू की गई है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने पीएम-आशा योजना के तहत एमएसपी खरीद को मजबूत किया है, जिसमें नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनसीसीएफ) और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनएएफईडी) छत्तीसगढ़ में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
वहीं, एनसीसीएफ ने बिहार में पहली बार मसूर दाल की संगठित खरीद शुरू की है, जो दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बताया कि यह पहल वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था से जुड़ी है, जिसमें सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर डब्ल्यूडीआरए-मान्यता प्राप्त गोदामों का उपयोग किया जा रहा है।
22 अप्रैल 2026 तक बिहार में 32,000 मीट्रिक टन मसूर खरीद का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए 16 पीएसीएस/एफपीओ रजिस्टर किए गए हैं, 59 किसानों को जोड़ा गया है और अब तक 100.4 मीट्रिक टन की खरीद पूरी हो चुकी है। एनएएफईडी भी राज्य में अपने नेटवर्क के जरिए ‘प्राइस सपोर्ट स्कीम’ के तहत खरीद को और बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
छत्तीसगढ़ में पीएम-आशा के तहत खरीद में तेजी आई है। ‘ई-सम्युक्ति पोर्टल’ के जरिए किसानों की डिजिटल भागीदारी बढ़ाई गई है और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसमें दूरदर्शन के माध्यम से भी प्रचार किया गया है।
वर्तमान में 85 पीएसीएस केंद्र सक्रिय हैं और धमतरी, दुर्ग, बालोद, बलौदाबाजार, रायपुर, रायगढ़ और सारंगढ़ जिलों में खरीद जारी है। जल्द ही सरगुजा, कोंडागांव और कोरिया जिलों में भी इसे बढ़ाया जाएगा। आधिकारिक बयान के अनुसार, एनसीसीएफ और एनएएफईडी दोनों राज्यों में अपने काम को और बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी और कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाता है।
मंत्रालय के अनुसार, ये कदम एमएसपी आधारित खरीद व्यवस्था को मजबूत करने, किसानों को बेहतर दाम दिलाने और उन्हें औपचारिक सप्लाई चेन से जोड़ने के लिए उठाए गए हैं। खरीद से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार से पारदर्शिता, दक्षता और पहुंच में और सुधार होने की उम्मीद है। 

55,000 किमी ट्रैक नवीनीकरण से मजबूत हुआ रेलवे नेटवर्क, सफर हुआ तेज और सुरक्षित: पीएमओ

23-Apr-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) भारतीय रेलवे ट्रैक का आधुनिकीकरण देश में तेज और भरोसेमंद रेल नेटवर्क तैयार करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। ट्रैक रिन्यूअल,एडवांस टेस्टिंग और मशीनों के जरिए रखरखाव से ट्रेन की रफ्तार बढ़ी है और सफर पहले से ज्यादा सुगम हो गया है। इन सुधारों से देरी कम हो रही है और यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई की बढ़ती मांग को भी बेहतर तरीके से पूरा किया जा रहा है।
यह जानकारी गुरुवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए दी। पोस्ट में नीचे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के एक मीडिया लेख का लिंक शेयर किया गया है, जिसमें कहा गया है कि भारत के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिकीकरण ने सुरक्षा और गति को मजबूत किया है।
भारतीय रेलवे ने 2014 से अब तक उन्नत निरीक्षण तकनीकों, मशीनीकृत रखरखाव और उन्नयन के माध्यम से लगभग 55,000 किलोमीटर पटरियों का नवीनीकरण किया है, जिससे वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी तेज सेवाओं को बढ़ावा मिला है। यह सब हाल के वर्षों में निरंतर रेल परिवर्तन प्रयासों का हिस्सा है।
इसके अलावा, 80,000 किलोमीटर से ज्यादा मजबूत 60 किलो के रेल लगाए गए हैं, जो भारी लोड और तेज रफ्तार को संभालने में सक्षम हैं।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लेख में बताया कि भारत में प्रतिदिन 25,000 से ज्यादा ट्रेनें चलती हैं, जो हर दिन 2 करोड़ से अधिक यात्रियों को यात्रा कराती हैं। इसके साथ ही बड़ी मात्रा में कोयला, लोहा, अनाज, स्टील और सीमेंट जैसी वस्तुओं की ढुलाई भी इसी नेटवर्क के जरिए होती है। इस पूरे सिस्टम की नींव रेलवे ट्रैक ही है। अगर ट्रैक अच्छी स्थिति में हो तो ट्रेनें तेज और सुरक्षित चलती हैं, लेकिन खराब ट्रैक की वजह से देरी और हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि ट्रैक की अहमियत को समझते हुए भारतीय रेलवे ने करीब एक दशक पहले बड़े स्तर पर आधुनिकीकरण कार्यक्रम शुरू किया था, जिसमें आधुनिक मशीनों से ट्रैक बदलना, एडवांस तकनीक से जांच, मशीन-आधारित मेंटेनेंस और सुरक्षा के लिए फेंसिंग जैसे कदम शामिल थे। इन प्रयासों से रेलवे नेटवर्क की स्थिति में साफ सुधार देखा गया है।
रेल मंत्री ने यह भी कहा कि मजबूत ट्रैक के साथ-साथ समय रहते खामियों का पता लगाना भी जरूरी है। इसके लिए अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (यूएसएफडी) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके जरिए लाखों किलोमीटर ट्रैक और करोड़ों वेल्ड की जांच की गई है। इस तकनीक से ट्रैक के अंदर छिपी दरारों का पता पहले ही चल जाता है, जिसके चलते रेल और वेल्ड फेल होने के मामलों में करीब 90 प्रतिशत तक कमी आई है। 
 

 


तेलंगाना परिवहन निगम के कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, बस सेवाएं ठप

23-Apr-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीजीएसआरटीसी) के कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रहने के कारण राज्यभर में सार्वजनिक सड़क परिवहन सेवाएं गुरुवार को भी ठप रहीं। कुछ जिलों में किराये की और निजी बसों को तैनात करके टीजीएसआरटीसी आंशिक सेवाएं संचालित कर रही है। प्रबंधन ने इलेक्ट्रिक बसों को भी तैनात किया है और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवाएं भी ले रहा है।
हैदराबाद और अन्य जिलों में हजारों यात्रियों को हड़ताल के कारण लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए कैब, ऑटो रिक्शा और निजी वाहनों पर निर्भर नजर आ रहे हैं। लोगों ने शिकायत की कि निजी बसें मनमाने ढंग से किराया वसूल रही हैं।
ग्रेटर हैदराबाद में भी यात्री मेट्रो और एमएमटीएस ट्रेनों का इस्तेमाल कर रहे थे क्योंकि अधिकारियों ने जनता को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए अपने परिचालन को तेज कर दिया है। हड़ताल के दूसरे दिन, कर्मचारियों ने डिपो के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) के आह्वान पर, कर्मचारी डिपो के बाहर जमा हुए और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। विभिन्न राजनीतिक दलों ने हड़ताली कर्मचारियों को समर्थन दिया। विपक्षी दलों के नेताओं ने भी कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।
प्रमुख विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने सरकार से कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को हल करने का आग्रह किया। हैदराबाद के महात्मा गांधी बस स्टेशन (एमजीबीएस) और जुबली बस स्टेशन (जेबीएस) से आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों की आरटीसी बसें चलाई जा रही थीं।
टीजीएसआरटीसी राज्य के सबसे बड़े बस स्टेशन एमजीबीएस से कुछ किराए की बसें भी चला रही हैं। लगभग 40,000 कर्मचारी अपनी 32 मांगों के समर्थन में हड़ताल पर हैं। मुख्य मांगों में टीजीएसआरटीसी का सरकार में विलय और वेतन संशोधन शामिल हैं।
टीजीएसआरटीसी के प्रबंध निदेशक नागी रेड्डी ने हड़ताल को अवैध करार दिया है। उन्होंने कर्मचारियों से काम पर लौटने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के वेतन में कटौती की जाएगी और उनके खिलाफ अन्य कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी। परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने एक बार फिर टीएसजीआरटीसी कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि आरटीसी प्रदेश की ग्रामीण आबादी के लिए जीवन रेखा बनी हुई है, जो प्रतिदिन लगभग 65 लाख यात्रियों को सेवा प्रदान करती है। इनमें लगभग 40 लाख महिलाएं शामिल हैं जो रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए इन सेवाओं पर निर्भर हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया है। आरटीसी कर्मचारियों द्वारा उठाए गए 32 मुद्दों में से 29 पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बन चुकी है जबकि शेष तीन तकनीकी मुद्दों पर चर्चा जारी है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि लंबे विचार-विमर्श के बावजूद, कर्मचारी प्रतिनिधि वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की समिति के साथ चर्चा से बाहर चले गए, और इस कदम को आरटीसी संचालन को अस्थिर करने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताया।

 

भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग को नई गति, सह-विकास और सह-उत्पादन पर जोर

23-Apr-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी के रक्षा उद्योग प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक में टेक्नोलॉजी के सह-विकास और सह-उत्पादन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित इस बैठक में दोनों देशों के रक्षा उद्योग से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान रक्षा उत्पादन, उन्नत तकनीक और उद्योगों के बीच साझेदारी को लेकर व्यापक चर्चा हुई।
रक्षा मंत्री ने बताया कि जर्मन उद्योग जगत ने भारत में रक्षा क्षेत्र में हो रहे सुधारों और निवेश के अनुकूल माहौल की सराहना की है। उन्होंने जर्मन कंपनियों से अपील की कि वे भारत के साथ मिलकर आधुनिक और विशेष तकनीकों के क्षेत्र में संयुक्त विकास और उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ें।
राजनाथ सिंह ने कहा कि इस तरह का सहयोग न केवल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा को भी बढ़ावा देगा। उन्होंने भरोसा जताया कि विश्वसनीय साझेदारों के साथ मिलकर भारत रक्षा उत्पादन और तकनीकी नवाचार को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
इस दौरान बोरिस पिस्टोरियस के साथ बैठक में ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप’ पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रक्षा मंत्री की यह बैठक उनके तीन दिवसीय जर्मनी दौरे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। इस दौरान उन्होंने भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की।
रक्षा मंत्री ने जर्मनी में रह रहे भारतीय समुदाय की सराहना करते हुए उन्हें भारत और जर्मनी के बीच एक ‘जीवंत सेतु’ बताया। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय दोनों देशों को करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत तेजी से आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्टार्टअप इकोसिस्टम की भी सराहना की और कहा कि देश के युवा नए विचारों के साथ नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

पीएमआईएस में बड़ा बदलाव, अब अंतिम वर्ष के छात्र भी कर सकेंगे आवेदन

23-Apr-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय (एमसीए) ने प्रधानमंत्री प्रशिक्षण योजना के पात्रता मानदंडों का विस्तार किया है। अब स्नातक और स्नातकोत्तर के अंतिम वर्ष के छात्र भी इस योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे।
अंतिम वर्ष के छात्रों को मिलेगा उद्योग का अनुभव
प्रधानमंत्री प्रशिक्षण योजना (पीएमआईएस) के तहत यह बदलाव छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही शीर्ष कंपनियों में सशुल्क प्रशिक्षण का अवसर देगा। इससे उन्हें वास्तविक कार्य अनुभव हासिल करने में मदद मिलेगी।
18-25 वर्ष के युवा कर सकेंगे आवेदन
18 से 25 वर्ष की आयु के पात्र छात्र पीएमआईएस पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, उन्हें योजना के मौजूदा पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा।
एनओसी अनिवार्य, संस्थान से लेनी होगी अनुमति
आवेदन के दौरान छात्रों को अपने शिक्षण संस्थान से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जमा करना होगा। इसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रशिक्षण से उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों को मिलेगा बल
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के उस उद्देश्य को आगे बढ़ाती है, जिसमें कौशल विकास, उद्योग से जुड़ाव और शिक्षा से रोजगार में सुगम बदलाव पर जोर दिया गया है।
रोजगार क्षमता और कौशल विकास पर फोकस
योजना के जरिए छात्रों को समस्या-समाधान, संचार, टीमवर्क और अनुकूलन क्षमता जैसे जरूरी कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा, जो आधुनिक कार्यस्थल के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
हर महीने मिलेगी वित्तीय सहायता
पीएमआईएस के तहत चयनित प्रशिक्षुओं को प्रति माह कम से कम 9,000 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिससे प्रशिक्षण के दौरान आर्थिक सहयोग भी मिलेगा।
300 से ज्यादा कंपनियां दे रहीं अवसर
योजना के पायलट चरण में 300 से अधिक कंपनियां भाग ले रही हैं और विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध करा रही हैं। फिलहाल इसका तीसरा चरण जारी है।
शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी होगी कम
इस पहल का उद्देश्य अकादमिक शिक्षा और उद्योग की जरूरतों के बीच की दूरी को कम करना है, ताकि छात्र डिग्री पूरी करते ही नौकरी के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। 
 

केदारनाथ धाम के कपाट खुले, पीएम मोदी ने तस्वीरें साझा कर कहा ‘हर हर महादेव’

23-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के अवसर पर अपनी पिछली यात्राओं की कुछ तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के अवसर पर, अपने पिछले दौरों की कुछ तस्वीरें साझा कर रहा हूं। हर हर महादेव!”
भव्य सजावट और पुष्प वर्षा से स्वागत
देवभूमि उत्तराखंड में बुधवार को श्री केदारनाथ धाम के कपाट विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस अवसर पर मंदिर को 51 क्विंटल से अधिक फूलों से सजाया गया और हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
चारधाम यात्रा के साथ बढ़ा उत्साह
कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की शुरुआत हो गई है, जिससे देश-विदेश के श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।
12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान
हिमालय की गोद में स्थित केदारनाथ मंदिर हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और चारधाम यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण कपाट बंद रहते हैं और गर्मियों में शुभ मुहूर्त पर फिर खोले जाते हैं।
पीएम मोदी का विशेष जुड़ाव
प्रधानमंत्री मोदी का केदारनाथ धाम से विशेष जुड़ाव रहा है। 2013 की आपदा के बाद यहां पुनर्निर्माण कार्यों को तेजी दी गई और उन्होंने कई बार दौरा कर विकास परियोजनाओं की समीक्षा की।

रक्षा मंत्री ने जर्मनी में सबमरीन प्लांट का क‍िया दौरा, उन्नत नौसेना तकनीक देखी

23-Apr-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने आधिकारिक दौरे के दौरान जर्मनी के कील शहर में टीकेएमएस के सबमरीन बनाने वाले प्लांट का दौरा किया। वहां उन्हें आधुनिक नौसेना तकनीकों और क्षमताओं के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरे में उनके साथ जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस भी मौजूद थे। यह शिपबिल्डिंग सुविधा आधुनिक और उन्नत पनडुब्बियां बनाने के लिए जानी जाती है।

रक्षा मंत्री ने बुधवार को सोशल मीड‍िया पोस्ट करते हुए इस दौरे को “काफी जानकारी देने वाला” बताया। उन्होंने कहा कि यहां दिखाई गई तकनीक और ऑपरेशनल क्षमता काफी प्रभावशाली है। उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरे से उन्हें आधुनिक पनडुब्बी निर्माण और समुद्री क्षेत्र में हो रहे नए विकास को करीब से समझने का मौका मिला, जो आज के समय में वैश्विक सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने सबमरीन यार्ड का निरीक्षण किया और अधिकारियों से बातचीत भी की। इस दौरान उन्हें डिजाइन, इंजीनियरिंग और तैनाती से जुड़ी कई अहम बातें समझाई गईं। उन्होंने कुछ तस्वीरें भी साझा कीं, जिनमें वे भारत और जर्मनी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ डॉकयार्ड में बातचीत करते और जानकारी लेते नजर आए।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस तरह के दौरे दोनों देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करेंगे। यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। इसमें तकनीक साझा करना, साथ मिलकर विकास करना और नौसेना की ताकत बढ़ाना शामिल है।

भारत अपनी पनडुब्बी क्षमता और समुद्री ताकत को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है, और जर्मनी जैसे देशों के साथ सहयोग उसी दिशा में एक अहम कदम है। इससे पहले बुधवार को राजनाथ सिंह ने बर्लिन में अपने जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग बढ़ाने और बदलती वैश्विक चुनौतियों से निपटने पर चर्चा की।

उन्होंने सुरक्षा और रक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर बात की, खासकर नई तकनीकों के क्षेत्र में मिलकर काम करने और उत्पादन बढ़ाने पर। रक्षा मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों ने सैन्य सहयोग को अपनी रणनीतिक साझेदारी का अहम हिस्सा बनाने पर सहमति जताई।


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