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पद्म भूषण से सम्मानित शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन, पीएम मोदी ने जताया दुख

03-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज गायक और पद्म भूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार सुबह निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे और मिर्जापुर में उन्होंने अंतिम सांस ली। सुबह करीब 4:15 बजे उनका देहांत हुआ। पंडित मिश्र किराना घराने के प्रतिष्ठित गायक थे और शास्त्रीय व भक्ति संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जाने जाते थे। पिछले महीने उन्हें सीने में दर्द और हल्के हार्ट अटैक की शिकायत के बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में उनके सीने में संक्रमण और एनीमिया की समस्या सामने आई थी। सुधार के बाद हाल ही में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई थी, लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उनका निधन हो गया।
उनका पार्थिव शरीर सुबह 11 बजे तक वाराणसी लाया जाएगा, जहां लोग श्रद्धांजलि और अंतिम दर्शन करेंगे। उनके अंतिम संस्कार की तैयारी शाम 7 बजे के लिए की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से मैं अत्यंत दुखी हूं। उन्होंने अपना पूरा जीवन भारतीय कला और संस्कृति के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जनसामान्य तक पहुंचाने के साथ-साथ भारतीय परंपरा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में भी अमूल्य योगदान दिया।”
पीएम मोदी ने यह भी याद किया कि 2014 में वाराणसी सीट से नामांकन के दौरान पंडित मिश्र उनके प्रस्तावक रहे थे। उन्होंने लिखा, “मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ कि मुझे उनका स्नेह और आशीर्वाद हमेशा मिलता रहा। इस दुख की घड़ी में मैं उनके परिवार और चाहने वालों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं। ओम शांति!” पंडित छन्नूलाल मिश्र का जीवन भारतीय शास्त्रीय संगीत को समर्पित रहा। वे खयाल, ठुमरी, दादरा और भजन गायकी के लिए प्रसिद्ध थे। 2010 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यश भारती सम्मान भी प्रदान किया गया था। उनके निधन से संगीत जगत में गहरा शोक है और भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया ने अपना एक बड़ा स्तंभ खो दिया है।

आरएसएस की शताब्दी पर पीएम मोदी ने स्वयंसेवकों को सराहा, कहा- ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से किया राष्ट्रनिर्माण

03-Oct-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) विजयादशमी के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ अपना जीवन देश निर्माण के लिए समर्पित किया है। प्रधानमंत्री ने एक विस्तृत ब्लॉग पोस्ट में लिखा, “सौ वर्ष पहले विजयादशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। यह कोई बिल्कुल नया निर्माण नहीं था, बल्कि भारत की सनातन राष्ट्रीय चेतना का ही एक नया रूप था, जो समय-समय पर चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रकट होती रही है। हमारे समय में संघ उसी राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। हमारी पीढ़ी के स्वयंसेवकों के लिए यह सौभाग्य है कि हम संघ की शताब्दी देख रहे हैं।” उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. के.बी. हेडगेवार को नमन किया और सभी स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं दीं।
पीएम मोदी ने संघ की भूमिका समझाते हुए कहा कि जैसे नदियां हर क्षेत्र को समृद्ध करती हैं, वैसे ही संघ ने शिक्षा, कृषि, सामाजिक कल्याण, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय कल्याण जैसे अनेक क्षेत्रों में काम करके राष्ट्र को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा, “संघ का मंत्र हमेशा एक ही रहा है- राष्ट्र प्रथम।” प्रधानमंत्री ने लिखा कि संघ की स्थापना से ही उसका उद्देश्य राष्ट्रनिर्माण रहा है और इसके लिए उसने “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण” का मार्ग चुना। उन्होंने दैनिक शाखा को एक अद्वितीय साधन बताया, जहां से हर स्वयंसेवक “मैं” से “हम” की यात्रा शुरू करता है और व्यक्तिगत रूपांतरण से समाज व राष्ट्र की सेवा करता है।
इतिहास की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “संघ की स्थापना के समय से ही उसने राष्ट्र को अपनी प्राथमिकता माना। डॉ. हेडगेवार और कई स्वयंसेवक स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से शामिल हुए। डॉ. हेडगेवार कई बार जेल भी गए। विभाजन के समय और अन्य आपदाओं में भी संघ ने सेवा और राहत कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।” पीएम मोदी ने कहा कि पिछले सौ वर्षों में संघ ने समाज के हर वर्ग में आत्मविश्वास जगाया और दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों तक पहुंच बनाई। सेवा भारती, विद्या भारती, एकल विद्यालय और वनवासी कल्याण आश्रम जैसी संस्थाओं को उन्होंने आदिवासी समाज को सशक्त बनाने वाले स्तंभ बताया।
सामाजिक बुराइयों पर संघ की लड़ाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “जातिगत भेदभाव और छुआछूत जैसी समस्याओं के खिलाफ संघ हमेशा डटा रहा। गुरुजी ने ‘ना हिंदू पतितो भवेत’ का संदेश दिया। पूज्य बालासाहेब देवरस ने कहा था कि अगर छुआछूत गलत नहीं है तो दुनिया में कुछ भी गलत नहीं है। बाद में राज्जू भैया और सुदर्शन जी ने भी यही संदेश आगे बढ़ाया। आज मोहन भागवत जी ने ‘एक कुआं, एक मंदिर और एक श्मशान’ की बात कर समाज को एकजुट करने का आह्वान किया।”
वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि आज भारत विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है, लेकिन विदेशी निर्भरता, एकता तोड़ने की साजिशें और घुसपैठ जैसी चुनौतियां सामने हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इनसे निपट रही है और संघ ने भी इनसे निपटने के लिए ठोस रोडमैप तैयार किया है। प्रधानमंत्री ने संघ के “पंच परिवर्तन” का भी उल्लेख किया-स्व-बोध (औपनिवेशिक मानसिकता छोड़कर स्वदेशी अपनाना), सामाजिक समरसता (हाशिये पर खड़े वर्गों के लिए न्याय और समानता), कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करना), नागरिक शिष्टाचार (नागरिक कर्तव्यों का पालन), और पर्यावरण संरक्षण (भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रकृति की रक्षा) शामिल है। उन्होंने कहा कि इन संकल्पों के मार्गदर्शन में संघ अपनी दूसरी शताब्दी की यात्रा शुरू कर रहा है और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में उसका योगदान महत्वपूर्ण होगा।
 

भारत-ईएफटीए व्यापार समझौता लागू, 100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख नौकरियों का अवसर

03-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच हुआ ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (टीईपीए) एक अक्टूबर से लागू हो गया है। इस समझौते से भारत को अगले कुछ वर्षों में 100 अरब डॉलर का निवेश मिलेगा और लगभग 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। इसके साथ ही भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक साझेदारी और मजबूत होगी। ईएफटीए में चार देश -स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। इस समझौते के लागू होने के बाद भारत और इन देशों के बीच व्यापार करना आसान हो जाएगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह भारत का पहला ऐसा व्यापार समझौता है, जिसमें निवेश प्रतिबद्धता भी शामिल है। इसका मकसद भागीदार देशों के बीच हितों का संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
समझौते के लागू होने पर आयोजित एक कार्यक्रम में पीयूष गोयल ने कहा कि ईएफटीए देशों की कुल आबादी अकेले मुंबई की आबादी से भी कम है, लेकिन साझेदारी उनकी क्षमता और बड़े दिल से प्रेरित है। उन्होंने इस समझौते को विजयादशमी और नवमी के शुभ अवसर पर लागू होना भी खास बताया। उनके अनुसार, यह शुरुआत समृद्धि, स्पष्टता और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। गोयल ने कहा कि टीईपीए सिर्फ टैरिफ कम करने या निवेश की प्रतिबद्धता का समझौता नहीं है, बल्कि यह एक स्थिर और भरोसेमंद ढांचा है, जो निवेशकों का विश्वास बढ़ाता है और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच स्थिरता का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि यह समझौता शिक्षा, कृषि, उद्योग, प्रौद्योगिकी और कई अन्य क्षेत्रों में बड़े अवसर खोलेगा।
उन्होंने भारत की ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि यहां डेटा की लागत अमेरिका की तुलना में केवल 3 प्रतिशत है और वैश्विक औसत से भी काफी कम है। उन्होंने एबीबी और नेस्ले जैसी स्विस कंपनियों के भारत से पुराने जुड़ाव को याद किया और कहा कि भारत न केवल एक बड़ा बाजार है, बल्कि वैश्विक विस्तार का केंद्र भी है। गोयल ने उदाहरण देते हुए बताया कि नेस्ले इंडिया और एबीबी इंडिया जैसी कंपनियों के शेयरों का उच्च प्राइस-टू-अर्निंग रेश्यो भारत की अर्थव्यवस्था में विश्वास और भविष्य की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।कार्यक्रम में उन्होंने ईएफटीए देशों के उद्योगों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया और कहा कि भारत का माहौल पारदर्शी, खुला और निवेशक-हितैषी है। यहां लगभग सभी क्षेत्रों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता भारत और ईएफटीए दोनों की सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है और आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच साझेदारी और गहरी होगी। 
 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को दो टूक : सर क्रीक में हिमाकत की तो बदल जाएंगे इतिहास और भूगोल

03-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने सर क्रीक क्षेत्र में कोई भी हिमाकत की तो उसे ऐसा करारा जवाब मिलेगा कि उसका इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि 1965 की जंग में भारतीय सेना लाहौर तक पहुंचने का सामर्थ्य दिखा चुकी है और आज भी हमारी सेनाएं कराची तक पहुंचने का रास्ता जानती हैं। विजयादशमी के अवसर पर गुरुवार को रक्षा मंत्री भुज एयरबेस पहुंचे, जहां उन्होंने सेना के जवानों के साथ शस्त्र पूजा की। इस दौरान उन्होंने हाल ही में सफल रहे ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने लेह से लेकर सर क्रीक तक भारत की डिफेंस प्रणाली को तोड़ने की नाकाम कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया को यह संदेश गया है कि भारतीय सेना जब चाहे, जहां चाहे और जैसे चाहे पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।”
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत ने अपनी शक्ति के बावजूद संयम दिखाया क्योंकि यह कार्रवाई केवल आतंकवाद के खिलाफ थी। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य युद्ध छेड़ना नहीं था, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देना था। मुझे खुशी है कि हमारे सैनिकों ने ऑपरेशन सिंदूर के सभी लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया।” रक्षा मंत्री ने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी सर क्रीक विवाद बना हुआ है। भारत ने कई बार बातचीत के जरिए समाधान की कोशिश की, लेकिन पाकिस्तान की नीयत साफ नहीं है। उन्होंने बताया कि हाल ही में पाकिस्तान ने सर क्रीक के पास अपना सैन्य ढांचा बढ़ाया है, जो उसकी मंशा को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर पाकिस्तान ने सर क्रीक में कोई हरकत की, तो उसे ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे। पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि कराची का एक रास्ता क्रीक से होकर गुजरता है।”
महात्मा गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि गांधी जी मनोबल का ज्वलंत उदाहरण थे। उन्होंने बिना हथियारों के ब्रिटिश साम्राज्य को झुकने पर मजबूर किया। राजनाथ सिंह ने कहा, “हमारे सैनिकों के पास शस्त्र भी हैं और अटूट मनोबल भी। हमारे सामने कोई भी चुनौती टिक नहीं सकती।” उन्होंने शस्त्र पूजा के मौके पर मां दुर्गा से प्रार्थना की कि वे भारतीय सैनिकों को शक्ति और साहस प्रदान करें ताकि वे अधर्म और आतंकी शक्तियों का नाश करते रहें और राष्ट्र को अजेय बनाए रखें। उन्होंने कहा कि थल सेना, वायु सेना और नौसेना हमारी शक्ति के तीन स्तंभ हैं और सरकार लगातार तीनों सेनाओं की संयुक्त शक्ति पर जोर दे रही है।
इसके साथ ही रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए भारतीय सैनिकों और अधिकारियों को विशेष बधाई दी और कहा कि शस्त्र पूजा केवल शस्त्रों का ही नहीं, बल्कि उन्हें धारण करने वाले सैनिकों के सम्मान का प्रतीक है।

मानेसर में ‘नमो वन’ की नींव रखकर वन्यजीव सप्ताह 2025 का हुआ शुभारंभ

03-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को हरियाणा के मानेसर में ‘नमो वन’ का शिलान्यास किया। इस कार्यक्रम के साथ ही वन्यजीव सप्ताह 2025 के समारोहों की शुरुआत हुई। इस मौके पर हरियाणा के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह भी मौजूद रहे। समारोह में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण भी किया गया।
इस अवसर पर स्कूली बच्चों, वन विभाग के अधिकारियों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई हितधारकों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। कार्यक्रम में जंगल और वन्यजीव संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत की समृद्ध जैव विविधता को बचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि हर साल 2 से 8 अक्टूबर तक मनाया जाने वाला वन्यजीव सप्ताह पूरे देश में लोगों को पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का एक अभियान है।
इस बार वन्यजीव सप्ताह का विषय ‘सेवा पर्व’ रखा गया है। इसका उद्देश्य प्रकृति के प्रति सेवा और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना है। इस थीम के जरिए पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने और नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया जा रहा है।
 

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मिला जबरदस्त समर्थन, 1.15 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव आए : अश्विनी वैष्णव

03-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को बताया कि सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को भारी समर्थन मिला है। इस योजना के तहत सरकार को 1.15 लाख करोड़ रुपए (1,15,351 करोड़) के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह स्कीम देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों और कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि योजना की रूपरेखा तैयार करते समय जितना निवेश और रोजगार का लक्ष्य तय किया गया था, उससे कहीं अधिक प्रस्ताव सरकार के पास आए हैं। वैष्णव ने बताया कि इस योजना की एप्लीकेशन विंडो 30 सितंबर को बंद हो गई थी और अब तक मिले निवेश प्रस्ताव अनुमान से कई गुना ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने लगभग 59,000 करोड़ रुपए निवेश मिलने का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक प्रस्ताव इससे कहीं अधिक आए हैं। हालांकि कैपिटल इक्विपमेंट सेगमेंट के लिए एप्लीकेशन विंडो अभी भी खुली है।
मार्च 2025 में केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना को 22,919 करोड़ रुपए के बजट के साथ छह वर्षों के लिए मंजूरी दी थी। इस स्कीम का उद्देश्य-भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना, घरेलू मूल्य संवर्धन (DAV) बढ़ाना और भारतीय कंपनियों को ग्लोबल वैल्यू चेन (GVC) से जोड़ना है। सरकार ने इस योजना के तहत अनुमान लगाया था कि लगभग 59,350 करोड़ रुपए का निवेश, 4,56,500 करोड़ रुपए का उत्पादन, और करीब 91,600 प्रत्यक्ष रोजगार के साथ बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। वहीं, कंपनियों ने अब तक दिए प्रस्तावों में 1.41 लाख रोजगार देने की प्रतिबद्धता जताई है, जो सरकार के शुरुआती लक्ष्य से कहीं ज्यादा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी सचिव एस. कृष्णन ने भी पुष्टि की कि कंपनियों ने रोजगार सृजन के मामले में अपेक्षाओं से अधिक रुचि दिखाई है। उनका कहना था कि यह योजना भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाएगी और ‘मेक इन इंडिया’ के विजन को नई गति देगी।

सरकार ने ई-कचरे और कबाड़ की बिक्री से कमाए 3,296.71 करोड़ रुपए : डॉ. जितेंद्र सिंह

03-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने ई-कचरे और कबाड़ की बिक्री से 3,296.71 करोड़ रुपए की कमाई की है। पिछले चार वर्षों में सरकार ने 696.27 लाख वर्ग फुट से अधिक कार्यालय स्थान को साफ करके दोबारा इस्तेमाल में लाया है। यह जानकारी उन्होंने नई दिल्ली के नेहरू पार्क में “विशेष स्वच्छता अभियान 5.0” के शुभारंभ समारोह में दी।
डॉ. सिंह ने कहा कि इस अभियान ने शासन और सार्वजनिक सेवाओं में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने बताया कि इसके पिछले चरणों में 137.86 लाख से ज्यादा पुरानी फाइलों को नष्ट किया गया और देश भर में 12.04 लाख से अधिक जगहों की सफाई की गई। उन्होंने प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) तथा अन्य विभागों की सक्रिय भूमिका की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने श्रमदान किया, “एक पेड़ मां के नाम” पहल के तहत वृक्षारोपण किया और पुरानी फाइलों की सफाई में हिस्सा लिया। उन्होंने स्वच्छता अभियान को स्वतंत्र भारत की “एक बड़ी सफलता की कहानी” बताते हुए कहा कि 2 अक्टूबर से शुरू हो रहा यह नया चरण स्वच्छता को संस्थागत बनाने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और सरकारी कार्यालयों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है।
डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लाल किले से पीएम के आह्वान ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन बना दिया है, जिसे देशभर में लोगों ने अपनाया है। उन्होंने सफाई मित्रों को सुरक्षा किट और मिठाई वितरित करके सम्मानित किया और उनकी अहम भूमिका को स्वीकार किया।
उन्होंने आगे बताया कि इस चरण के लिए मंत्रालयों और विभागों ने पहले ही महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। इनमें 6.9 लाख जन शिकायतों की समीक्षा, 26.9 लाख से अधिक भौतिक फाइलों का निपटान और 5.2 लाख ई-फाइलों की समीक्षा शामिल है।
डॉ. सिंह ने यह भी घोषणा की कि भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार 10 अक्टूबर को “सुशासन और अभिलेख” नामक प्रदर्शनी आयोजित करेगा, जिसमें पुराने विशेष अभियानों के दौरान मिले ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रदर्शित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विशेष अभियान 5.0 सरकार की पारदर्शिता, दक्षता और जनभागीदारी के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराता है और महात्मा गांधी की स्वच्छता तथा नागरिक जिम्मेदारी की प्रेरणा को आगे बढ़ाता है।
 

आरएसएस के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने कहा– ‘संघ की 100 वर्षों की यात्रा त्याग, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की मिसाल’

02-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा को त्याग, निःस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण की अद्भुत मिसाल बताया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आरएसएस के शताब्दी समारोह का हिस्सा बनकर अत्यंत गौरवान्वित अनुभव कर रहा हूं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अपने गठन के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्र निर्माण का विराट उद्देश्य लेकर चल रहा है। संघ ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का रास्ता चुना। इस रास्ते पर सतत चलने के लिए नित्य और नियमित चलने वाली शाखा के रूप में कार्य पद्धति को चुना।
उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार जानते थे कि हमारा राष्ट्र तभी सशक्त होगा, जब हर व्यक्ति के भीतर राष्ट्र के प्रति दायित्व का बोध जागृत होगा। हमारा राष्ट्र तभी ऊंचा उठेगा, जब भारत का हर नागरिक राष्ट्र के लिए जीना सीखेगा। इसलिए वे व्यक्ति निर्माण में निरंतर जुड़े रहे। उनका तरीका अलग था। हमने बार-बार सुना है कि डॉ. हेडगेवार जी कहते थे कि जैसा है, वैसा लेना है। जैसा चाहिए, वैसा बनाना है।
उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “लोग संग्रह का उनका यह तरीका अगर समझना है तो हम कुम्हार को याद करते हैं। जैसे कुम्हार ईंट पकाता है तो जमीन की सामान्य-सी मिट्टी से शुरू करता है। वह मिट्टी लाता है और उस पर मेहनत करता है। उसे आकार देकर तपाता है। खुद भी तपता है और मिट्टी को भी तपाता है। फिर उन ईंटों को इकट्ठा करके भव्य इमारत बनाता है। ऐसे ही डॉ. हेडगेवार बहुत ही सामान्य लोगों को चुनते थे। फिर उन्हें सिखाते थे, विजन देते थे और उन्हें गढ़ते थे। इस तरह वे देश को समर्पित स्वयंसेवक तैयार करते थे।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संघ के बारे में कहा जाता है कि इसमें सामान्य लोग मिलकर असामान्य अभूतपूर्व कार्य करते हैं। व्यक्ति निर्माण की यह सुंदर प्रक्रिया आज भी हम संघ की शाखाओं में देखते हैं।
पीएम मोदी ने कहा, “संघ शाखा का मैदान एक ऐसी प्रेरणा भूमि है, जहां से स्वयंसेवक की ‘अहम् और वहम’ की यात्रा शुरू होती है। संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण की यज्ञ वेदी हैं। उन शाखाओं में व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास होता है। स्वयंसेवकों के मन में राष्ट्र सेवा का भाव और साहस दिन प्रतिदिन पनपता रहता है।”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्वयंसेवकों के लिए त्याग और समर्पण सहज हो जाता है। श्रेय के लिए प्रतिस्पर्धा की भावना समाप्त हो जाती है। उन्हें सामूहिक निर्णय और सामूहिक कार्य का संस्कार मिलता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण का महान उद्देश्य, व्यक्ति निर्माण का स्पष्ट पथ और शाखा जैसी सरल व जीवंत कार्य पद्धति यही संघ की 100 वर्ष की यात्रा का आधार बनी हैं।
 

फिलीपींस में 6.7 तीव्रता के भूकंप ने मचाई भारी तबाही, 19 की मौत, कई शहरों की बिजली गुल

02-Oct-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) फिलीपींस में भूकंप ने भारी तबाही मचा दी है। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को बताया कि मध्य फिलीपींस के सेबू प्रांत में कल मंगलवार रात 6.9 तीव्रता के भूकंप से धरती हिली। इस घटना में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए।
वहीं, स्थानीय न्यूज पेपर सनस्टार सेबू ने प्रांतीय सूचना कार्यालय के हवाले से बताया कि भूकंप के केंद्र बोगो शहर में 13 लोग मारे गए, जबकि उत्तरी सेबू के सैन रेमिगियो शहर में चार अन्य की मौत हो गई।
सेबू के मेडेलिन नगरपालिका ने कम से कम एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की सूचना दी है, साथ ही दो पुलों को भी नुकसान पहुंचा। सनस्टार सेबू ने आगे बताया कि भूकंप के पीड़ितों का सेबू प्रांतीय अस्पताल (बोगो शहर) में आना जारी है। इसकी वजह से अस्पताल के मेडिकल स्टाफ की परेशानी भी बढ़ गई।
फिलीपींस के ज्वालामुखी और भूकंप विज्ञान संस्थान ने बताया कि स्थानीय समयानुसार मंगलवार को रात 9:59 बजे सेबू प्रांत में 6.7 तीव्रता का भूकंप आया। संस्थान ने बाद में तीव्रता को संशोधित कर 6.9 कर दिया और बताया कि भूकंप बोगो शहर से लगभग 19 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में, 5 किलोमीटर की गहराई पर आया।
भूकंप का झटका मध्य फिलीपींस के कई पड़ोसी प्रांतों के साथ-साथ दक्षिणी फिलीपींस के कुछ क्षेत्रों में भी महसूस किया गया। कई गांवों की सड़कों को भी नुकसान पहुंचा। भूकंप के कारण बिजली की लाइनें टूट गईं, जिससे सेबू और आसपास के मध्य द्वीपों में बिजली गुल हो गई। हालांकि, फिलीपींस के राष्ट्रीय ग्रिड निगम ने एक अपडेट में कहा कि सेबू और चार अन्य प्रमुख मध्य द्वीपों में आधी रात के तुरंत बाद बिजली बहाल कर दी गई।
फिलीपींस प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” पर स्थित है, जो भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधि के लिए संवेदनशील क्षेत्र है।

भारतीय रेलवे में तकनीकी बदलाव का युग : मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन से सफर होगा तेज, सुरक्षित और आरामदायक

02-Oct-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन भारतीय रेल इतिहास में जल्द ही एक तकनीकी बदलाव के युग का शुरुआत करेगी। जिसमें नवीनतम हाई-स्पीड रेल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जो एक सुरक्षित, आरामदायक और कुशल रेल यात्रा अनुभव को सुनिश्चित करेगी। ये ट्रेनें 320 किमी/घंटा तक की गति से चल सकेंगी, जिससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा में लगने वाले समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-सूरत यात्रा का समय घटाकर केवल 60 मिनट कर देगी। वर्तमान में, मुंबई और सूरत के बीच सबसे तेज ट्रेन 12951 नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस है, जो 2 घंटे 43 मिनट का समय लेती है, हलांकि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव कहते हैं “इस तरह आप सूरत से लगभग एक घंटे में मुंबई जा सकते हैं, अपना काम निपटा सकते हैं और वापस आकर अपने परिवार के साथ समय बिता सकते हैं।” यह परियोजना मुंबई और अहमदाबाद के बीच हवाई यात्रा पर निर्भरता को भी कम करेगी, जो हवाई अड्डों पर भीड़भाड़ में योगदान करती है और इसकी पर्यावरणीय लागत भी अधिक होती है।
बुलेट ट्रेन यात्रियों के लिए एक अधिक किफायती और टिकाऊ विकल्प प्रदान करेगी, जिससे परिवहन से होने वाले उत्सर्जन में समग्र कमी आएगी। यह ट्रेन विद्युत कर्षण द्वारा संचालित होगी और बुलेट ट्रेनों में प्रयुक्त तकनीक यह सुनिश्चित करेगी कि ये न केवल तेज हों, बल्कि अत्यधिक ऊर्जा-कुशल भी हों। सुचारू संचालन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेन प्रणाली अत्याधुनिक सिग्नलिंग और संचार तकनीकों से पूरी तरह एकीकृत होगी। इसके अलावा, ट्रेनें उन्नत सुरक्षा उपायों से लैस भी होंगी। पर्यावरणीय लाभ में बुलेट ट्रेन से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। ट्रेनें, विशेष रूप से उच्च गति के लिए डिजाइन की गई, कारों और विमानों की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल होती हैं। परिवहन के एक से अधिक टिकाऊ रूप की ओर यह बदलाव देश के परिवहन नेटवर्क के समग्र कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में योगदान देगा।
इसके अलावा, जैसे-जैसे परियोजना आगे बढ़ेगी, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए, ट्रेनों को ऊर्जा-कुशल बनाने पर अधिक जोर दिया जाएगा। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी व्यापक आर्थिक वृद्धि लाने की क्षमता है। परिवहन के एक उच्च-गति साधन के रूप में, बुलेट ट्रेन सड़कों और मौजूदा रेल नेटवर्क पर भीड़भाड़ को कम करेगी। यह कॉरिडोर गतिशीलता को बढ़ाएगा, निवेश आकर्षित करेगा और इससे जुड़े क्षेत्रों में व्यापार के नए अवसर खुलेंगे। दोनों शहरों के बीच यात्रा समय में कमी से विनिर्माण, खुदरा और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का मानना है कि मुम्बई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। “यह वास्तव में एक बहुत ही महत्वपूर्ण परियोजना है। मुंबई, ठाणे, वापी, सूरत, बड़ौदा, आणंद और अहमदाबाद सहित सभी प्रमुख शहरों की अर्थव्यवस्थाएं एक ही अर्थव्यवस्था बन जाएंगी। इसलिए क्षेत्रीय विकास में भारी वृद्धि होगी।”
गौरतलब है कि 508 किलोमीटर लंबा मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (एमएएचएसआर) कॉरिडोर गुजरात, महाराष्ट्र और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली से होकर गुजरता है। अहमदाबाद बुलेट ट्रेन पहल लोगों की यात्रा के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी, जो देश के दो सबसे जीवंत शहरों के बीच बेजोड़ गति, सुविधा और दक्षता प्रदान करेगी। उच्च गति कनेक्टिविटी पर केंद्रित डिजाइन के साथ, यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल यात्रा के समय को न केवल काफी हद तक कम करेगी, बल्कि व्यापारिक संपर्क और क्षेत्रीय वाणिज्य को बढ़ाकर आर्थिक समृद्धि को भी बढ़ावा देगी। अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके, बुलेट ट्रेन मौजूदा परिवहन नेटवर्क पर दबाव को कम करने का वादा करती है, साथ ही हवाई और सड़क यात्रा का एक टिकाऊ, पर्यावरण के अनुकूल विकल्प प्रदान करती है। मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर भारत भर में भविष्य की उच्च गति वाली रेल परियोजनाओं के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा, जिससे देश आधुनिक परिवहन बुनियादी ढांचे में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित होगा और साथ ही एक हरित, अधिक परस्पर जुड़े भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा।


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