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फिलीपींस में 6.9 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही, पीएम मोदी ने जताया शोक

02-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को फिलीपींस में आए शक्तिशाली भूकंप में जान गंवाने वालों के प्रति गहरा दुख जताया और भारत की एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि “फिलीपींस में आए भूकंप से जानमाल के नुकसान की खबर से गहरा दुख हुआ है। मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। भारत इस कठिन समय में फिलीपींस के साथ खड़ा है।” यह भूकंप मंगलवार देर रात फिलीपींस के केंद्रीय हिस्से में सेबू द्वीप के तट पर आया, जिसकी तीव्रता 6.9 दर्ज की गई और गहराई लगभग 10 किलोमीटर थी। वहीं बुधवार सुबह तक मौतों की संख्या बढ़कर 69 हो गई। फिलीपींस की क्षेत्रीय सिविल डिफेंस अधिकारी जेन अबापो ने बताया कि यह आंकड़ा स्थानीय आपदा एजेंसी के डाटा पर आधारित है और अभी सत्यापन जारी है। अधिकारियों के अनुसार यह पिछले एक दशक में देश में आया सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक है।
भूकंप के कारण कई इमारतें ढह गईं, बिजली आपूर्ति बाधित हुई और लोग अपने घरों से बाहर निकलने पर मजबूर हो गए। बोगो सिटी के अस्पताल में घायलों की भारी संख्या के कारण हालात बिगड़ गए, जिसके बाद तटरक्षक बलों ने डॉक्टरों और नर्सों की टीम तुरंत भेजी। राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत और बचाव का आश्वासन दिया और कहा कि “हम नुकसान और ज़रूरतों का आकलन कर रहे हैं, राहत कार्यों में तेजी लाई जाएगी।” फिलीपींस के भूकंप विज्ञान संस्थान (Phivolcs) ने बताया कि अब तक करीब 800 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए हैं, जिनमें से सबसे शक्तिशाली की तीव्रता 6 रही। हालांकि सुनामी का कोई खतरा नहीं है। प्रभावित इलाकों में लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
भूकंप में 100 साल पुराना एक चर्च भी ढह गया। सेबू द्वीप, जो फिलीपींस का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और लगभग 34 लाख लोगों का घर है, सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। हालांकि मकटान-सेबू अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा, जो देश का दूसरा सबसे व्यस्त हवाईअड्डा है, चालू रहा। फिलीपींस प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र में स्थित है, जहां ज्वालामुखी और भूकंप अक्सर आते रहते हैं। इस साल जनवरी में दो बड़े भूकंप आए थे लेकिन उनमें कोई हताहत नहीं हुआ था। 2023 में 6.7 तीव्रता का समुद्री भूकंप आठ लोगों की मौत का कारण बना था। सरकार और राहत एजेंसियां अभी भी मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश कर रही हैं और बचाव कार्यों में तेजी लाई जा रही है।

 


प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में BRCP फेज III को हरी झंडी, 12 साल का रोडमैप तैयार

02-Oct-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट ने बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (BRCP) के तीसरे चरण (फेज III) को मंजूरी दे दी है। यह चरण 2025-26 से 2030-31 तक लागू होगा, और इसके बाद 2031-32 से 2037-38 तक जारी रखने के प्रस्ताव हैं, जिससे कुल 12 वर्षों में इस कार्यक्रम का संचालन होगा। इसका कुल लागत अनुमान 1,500 करोड़ रुपये है, जिसमें विभाग ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी (DBT) 1,000 करोड़ और यूनाइटेड किंगडम की वेलकम ट्रस्ट (WT) 500 करोड़ रुपये का योगदान देगा।
फेज III का उद्देश्य भारत में उच्च स्तरीय बायोमेडिकल रिसर्च के लिए बेहतरीन वैज्ञानिक प्रतिभा को विकसित करना, अंतर-विषयक शोध को बढ़ावा देना, और गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए सिस्टम को मजबूत करना है। यह चरण देश में वैज्ञानिक क्षमता के क्षेत्रीय अंतर को कम करने और वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने वाली बायोमेडिकल रिसर्च को सशक्त बनाने पर केंद्रित होगा।
BRCP की शुरुआत DBT और Wellcome Trust, UK के साझेदारी में 2008-09 में हुई थी। इस कार्यक्रम ने भारत में विश्व स्तरीय बायोमेडिकल शोध के लिए शोध फेलोशिप और ग्रांट प्रदान की। इसके बाद, फेज II को 2018-19 में और अधिक विस्तार के साथ लागू किया गया था।
अर्ली करियर और इंटरमीडिएट रिसर्च फेलोशिप्स — बुनियादी, क्लिनिकल और पब्लिक हेल्थ रिसर्च के लिए, जो वैज्ञानिक करियर के प्रारंभिक चरणों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक की सुविधाएं प्रदान करेंगी।
कोलैबोरेटिव ग्रांट्स प्रोग्राम — इसमें करियर डेवलपमेंट ग्रांट्स और कैटालिटिक कोलैबोरेटिव ग्रांट्स शामिल हैं, जो मजबूत शोध रिकॉर्ड वाले भारतीय शोधकर्ताओं की टीमों के लिए होंगे।
फेज III में मेंटरशिप, नेटवर्किंग, जनसंवाद और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इस कार्यक्रम से 2,000 से अधिक छात्रों और पोस्टडॉक्टोरल फेलो को प्रशिक्षण मिलेगा, उच्च प्रभाव वाले शोध प्रकाशनों का निर्माण होगा, पेटेंट योग्य खोजें संभव होंगी, और महिलाओं के समर्थन में 10-15% वृद्धि होगी। साथ ही, 25-30% सहयोगी कार्यक्रम TRL4 और उससे ऊपर की स्थिति तक पहुंचेंगे।
फेज I और II ने भारत को बायोमेडिकल विज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया है। फेज III इस दिशा में एक नई रणनीतिक पहल है, जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिभा, क्षमता और अनुवाद पर निवेश करेगी।

एनसीआरबी रिपोर्ट में यूपी में सांप्रदायिक दंगे शून्य, कानून-व्यवस्था बनी मिसाल

02-Oct-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ‘क्राइम इन इंडिया 2023’ रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति की तारीफ की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में यूपी में सांप्रदायिक और धार्मिक दंगों की संख्या शून्य रही। यह योगी आदित्यनाथ सरकार की 2017 से लागू जीरो टॉलरेंस नीति का परिणाम है। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में अपराध दर राष्ट्रीय औसत से 25 प्रतिशत कम रही। देश में कुल अपराध दर 448.3 थी, जबकि यूपी में यह केवल 335.3 दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश शांति और सामाजिक सद्भाव का गढ़ बन चुका है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2012-2017 के बीच यूपी में 815 दंगे हुए थे, जिनमें 192 लोग मारे गए। वहीं 2007-2011 में 616 घटनाओं में 121 मौतें हुईं। इसके विपरीत, 2017 के बाद कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ। बरेली और बहराइच में हुई दो हिंसक घटनाओं को भी सरकार ने 24 घंटे के भीतर नियंत्रित कर शांति बहाल कर दी।
एनसीआरबी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूपी में विभिन्न अपराधों में राष्ट्रीय औसत से उल्लेखनीय कमी आई है। उदाहरण के लिए, बलवा के मामलों में देश में 39,260 मामले (क्राइम रेट 2.8) दर्ज हुए, जबकि यूपी में केवल 3,160 मामले (क्राइम रेट 1.3) रहे। फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में भारत में 615 घटनाएं हुईं, जबकि यूपी में मात्र 16 मामले दर्ज हुए। डकैती के मामलों में भारत में 3,792 मामले (क्राइम रेट 0.3) थे, जबकि यूपी में केवल 73 मामले दर्ज हुए, जिससे राज्य को ‘नियर जीरो’ क्राइम रेट का दर्जा मिला।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त नीतियों, त्वरित कार्रवाई और पारदर्शी शासन के चलते यूपी में अपराधों पर काबू पाया गया है। एनसीआरबी की रिपोर्ट साबित करती है कि यूपी में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मामले में यह सरकार देश के लिए मिसाल बन गई है। 

विजयादशमी की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को दीं शुभकामनाएं, सत्य के मार्ग पर चलने का किया आह्वान

02-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विजयादशमी की पूर्व संध्या पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि विजयादशमी अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की जीत का पर्व है, जो भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों की गहरी झलक पेश करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह पर्व लोगों को सकारात्मकता अपनाने और समाज में प्रेम, भाईचारे तथा करुणा की भावना बढ़ाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने इस अवसर पर सभी नागरिकों से एकजुट होकर देश और समाज के लिए काम करने का आह्वान किया।
देशभर में नवरात्रि का पर्व उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है और अब लोग विजयादशमी की तैयारियों में जुटे हैं। उत्तर भारत में यह पर्व भगवान राम की रावण पर विजय की स्मृति में रावण दहन के रूप में मनाया जाता है, वहीं पूर्वी और दक्षिणी भारत में इसे दुर्गा पूजा के रूप में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर वध की याद में मनाया जाता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि ये परंपराएं हमारे सांस्कृतिक वैविध्य और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती हैं। उन्होंने कामना की कि विजयादशमी का यह पर्व देशवासियों को एक ऐसे समाज के निर्माण की दिशा में प्रेरित करे, जहां न्याय, समानता और सद्भाव सर्वोपरि हों।
इस वर्ष विजयादशमी का उत्सव 2 अक्टूबर को पूरे देश में मनाया जाएगा। दिल्ली, लखनऊ, अयोध्या समेत कई शहरों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन होगा, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

दिल्ली के विकास और पार्टी के सुशासन में वीके मल्होत्रा का योगदान अविस्मरणीय: पीएम मोदी

01-Oct-2025
नई दिल्ली ।( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली भाजपा के पहले अध्यक्ष प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा के घर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। विजय कुमार मल्होत्रा का मंगलवार सुबह निधन हो गया है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।पीएम मोदी ने वीके मल्होत्रा को याद करते हुए कहा कि दिल्ली के विकास और हमारी पार्टी के सुशासन के एजेंडे को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फोटो शेयर करते हुए लिखा, ”वीके. मल्होत्रा के आवास पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की। दिल्ली के विकास और हमारी पार्टी के सुशासन के एजेंडे को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा।”
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने वीके मल्होत्रा के निधन पर दुख जाहिर करते हुए एक्स पर लिखा,” विजय कुमार मल्होत्रा ने एक उत्कृष्ट नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई, उन्हें जनमानस से जुड़े मुद्दों की बहुत अच्छी समझ थी। उन्होंने दिल्ली में हमारी पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। संसदीय मामलों में उन्हें अपने कार्यकलापों के लिए भी याद किया जाएगा। उनके निधन से दुख पहुंचा है। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना।”
दिल्ली से 5 बार सांसद और 2 बार विधायक रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार मल्होत्रा का मंगलवार को निधन हो गया। भाजपा के दिग्गज नेताओं में शुमार विजय कुमार मल्होत्रा अपनी मजबूत छवि के लिए जाने जाते थे।
विजय कुमार मल्होत्रा की शख्सियत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनने से पहले 1999 के लोकसभा चुनाव में भारी मतों से हराया था। भारतीय राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल विजय कुमार मल्होत्रा ने 9वीं और 14वीं लोकसभा में दिल्ली सदर और दक्षिण दिल्ली निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया। 82 साल की उम्र में भी मोदी सरकार द्वारा कोई पद न दिए जाने के बावजूद वीके मल्होत्रा ने दिल्ली के लिए भाजपा का चुनाव अभियान अध्यक्ष बनने की पेशकश की और सभी 7 सीटें दिलाकर भाजपा को शानदार जीत दिलाई।

घरेलू मांग और सरकारी पूंजी निवेश से भारतीय कंपनियों का राजस्व होगा मजबूत: रिपोर्ट

01-Oct-2025
नई दिल्ली ( शोर संदेश ) । क्रिसिल की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू खपत और सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार पूंजी निवेश (कैपेक्स) से चालू वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों के राजस्व में 8 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है।
क्रिसिल रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर सोमशेखर वेमुरी ने कहा कि कुल मिलाकर कॉर्पोरेट क्रेडिट क्वालिटी आउटलुक मजबूत बना हुआ है और ईबीआईटीडीए 12 प्रतिशत पर स्थिर रहने की उम्मीद है। जीएसटी सुधार, आयकर में छूट, कम महंगाई और ब्याज दर घरेलू खपत को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं। सरकार का लगातार पूंजी निवेश और घरेलू मांग में सुधार इंफ्रास्ट्रक्चर और कंजप्शन-लिंक्ड सेक्टर्स के लिए क्रेडिट क्वालिटी आउटलुक को सपोर्ट करेंगे।
वेमुरी ने कहा, “इसके अलावा, बैलेंस शीट का लेवरेज पिछले दशक के निचले स्तर के करीब है, यानी वैश्विक चुनौतियां बढ़ती हैं तो स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि निर्यात से जुड़े क्षेत्र वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ द्विपक्षीय समझौतों सहित व्यापार वार्ता के सकारात्मक परिणामों और घरेलू नीतियों के समर्थन से इस प्रभाव को कम किया जा सकता है।”
इस वित्त वर्ष में बैंकों और गैर-बैंकों की क्रेडिट क्वालिटी आउटलुक स्थिर बना हुआ है। जीएसटी सुधार और आयकर में कटौती से खपत में सुधार, कम ब्याज दरें और नीतिगत दरों में कमी से दूसरे छमाही में क्रेडिट ग्रोथ बढ़ने की उम्मीद है। 
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि बैंक क्रेडिट पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 11-12 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा, जबकि गैर-बैंकों का एयूएम पिछले वित्त वर्ष की तरह 18 प्रतिशत की बेहतर दर से बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क, जल, सिंचाई और पावर सेगमेंट में विविध ऑर्डर बुक से कंस्ट्रक्शन सेक्टर को लाभ होगा। रिन्यूएबल एनर्जी, रोड एसेट्स, कमर्शियल रियल एस्टेट और डेटा सेंटर जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों के लिए मजबूत और अनुमानित कैश फ्लो से मदद मिलेगी।
वेकेशन और बिजनेस ट्रैवल में बढ़ती मांग से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को लाभ होगा, क्योंकि मांग सप्लाई से अधिक है। इसी तरह, कम महंगाई, कर में राहत और प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग से मजबूत लाभप्रदता के कारण एफएमसीजी सेक्टर को बढ़ती मांग से लाभ होगा।
हालांकि, अमेरिकी टैरिफ का असर कुछ एक्सपोर्ट से जुड़े सेक्टर की क्रेडिट क्वालिटी पर पड़ेगा, क्योंकि भारत के कुल सामान निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है। डायमंड सेक्टर में, ऑपरेटिंग प्रॉफिट कम होगा क्योंकि टैरिफ की चुनौतियों से खासकर लैब ग्रोन डायमंड से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण मांग पर दबाव बढ़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में ऑर्डर मिलने के बावजूद, प्रतिस्पर्धा बढ़ने से झींगा एक्सपोर्ट करने वालों की कमाई में भी गिरावट आएगी।
 

इस साल भारत का फार्मा निर्यात 30 अरब डॉलर करेगा पार, घरेलू बाजार 2030 तक होगा दोगुना : जितेंद्र सिंह

01-Oct-2025
नई दिल्ली । ( शोर संदेश ) केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत के फार्मास्यूटिकल्स निर्यात का वर्तमान मूल्य लगभग 27.8 अरब डॉलर है और यह साल के अंत तक 30 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश का घरेलू फार्मा बाजार, जो वर्तमान में 60 अरब डॉलर का है, 2030 तक 130 अरब डॉलर तक दोगुना होने की संभावना है। केंद्रीय मंत्री ने भारत के मेडटेक क्षेत्र में तेजी से विस्तार पर भी प्रकाश डाला। यह क्षेत्र वर्तमान में 15-20% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है और इसमें देशभर के लगभग 800 मेडिकल डिवाइस निर्माता शामिल हैं। उन्होंने यह बातें उत्तर प्रदेश सरकार और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के बीच फार्मा, बायोटेक और मेडटेक में नवाचार और निवेश बढ़ाने के लिए हुए समझौते (MoU) के अवसर पर कही। यह सहयोग डीबीटी के बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) और उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल (UPPPC) के माध्यम से केंद्र-राज्य साझेदारी मॉडल के तहत भारत के स्वास्थ्य और बायोटेक क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य शोध, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, कौशल क्षमता निर्माण और छोटे और मध्यम उद्यमों (SME और MSME) के लिए मजबूत संबंध बनाना है। अधिकारियों ने कहा कि यह सहयोग उभरती तकनीकों में निवेश को तेज करेगा और उनके व्यावसायीकरण में मदद करेगा। डॉ. सिंह ने भारत में बायोटेक स्टार्टअप्स के तेजी से बढ़ते आधार पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि 2014 में स्टार्टअप्स की संख्या केवल 50 थी, जो आज 11,000 से अधिक हो गई है। उन्होंने इस वृद्धि के लिए सरकार की नीतियों और पूरे सरकार दृष्टिकोण को श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि भारत अब वैक्सीन का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बन चुका है, जहां दुनिया की 60% से अधिक वैक्सीन का निर्माण होता है और 200 से अधिक देशों को भारतीय वैक्सीन डोज भेजे जाते हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि DBT-UP समझौते जैसे सहयोग विकसित भारत 2047 के विजन को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।
वहीं उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य को फार्मा, बायोटेक और मेडटेक का केंद्र बनाने की महत्वाकांक्षा पर जोर दिया। उन्होंने लखनऊ में बायोटेक पार्क, ग्रेटर नोएडा में मेडिकल डिवाइस पार्क और ललितपुर में बल्क ड्रग और फार्मा पार्क जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया, जिन्हें नए सहयोग के तहत और विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि DBT-BIRAC का सहयोग स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने, शोध सहयोग को मजबूत करने और किफायती स्वास्थ्य नवाचारों के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद करेगा।
भारत की बायोइकोनॉमी का मूल्य वर्तमान में लगभग 165 अरब डॉलर है। DBT के सचिव और BIRAC के अध्यक्ष डॉ. राजेश एस. गोखले ने कहा कि यह समझौता नवाचार पाइपलाइन को खोलने और किफायती तकनीकों को बढ़ाने में मदद करेगा। BIRAC के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार ने कौशल विकास, इनक्यूबेशन और व्यावसायिकरण के महत्व पर जोर दिया, ताकि नवाचार तेजी से बाजार तक पहुंच सकें। MoU हस्ताक्षर समारोह में उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित कुमार घोष सहित DBT, BIRAC और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने निष्कर्ष में कहा कि केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से भारत किफायती और सुलभ स्वास्थ्य समाधान का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
 

महिला सशक्तिकरण : आदिवासी और दलित महिलाओं की कहानियां आज समाज को कर रही प्रेरित

01-Oct-2025
नई दिल्ली ( शोर संदेश ) । पिछले गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जब राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा की, तो पुरस्कारों की लिस्ट में जोरशोर से महिला शक्ति दिखी। ग्रामीण पृष्ठभूमि के बाबजूद समाज में बदलाव की लड़ाई लड़ती महिलाओं को पद्मश्री लिस्ट में शामिल किया गया। रही सही कसर तब पूरी हो गई जब परेड में पहली बार तीनों सेनाओं की एक महिला टुकड़ी ने मार्च किया। महिला सशक्तिकरण की दिशा में ये पहली तस्वीर थी। फिर पद्म पुरस्कारों की एक से बढ़कर एक कहानियों ने ध्यान खींचा कि ये महिलाएं कौन हैं ? मसलन, हाथी की परी नाम से मशहूर पारबती बरुआ तमाम रूढ़िवादी विचारों को पीछे छोड़ देश की पहली महिला महावत बनीं। पारबती ने वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हुए मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में डटकर काम किया। पारबती ने महज 14 वर्ष की आयु में अपने पिता से महावत बनने के गुर सीखने शुरू किए। जंगली हाथियों से निपटने और उन्हें पकड़ने में पारबती ने तीन राज्य सरकारों की मदद की।
उसी तरह सरायकेला की सहयोगी चामी मुर्मु झारखंड की रहने वाली पर्यावरण-वनरोपण के लिए तीन हजार से अधिक वृक्षारोपण के प्रयास को गति दी और तीन हजार महिलाओं के साथ पौधे लगाए। स्वयं सहायता समूह की मदद से 40 से ज्यादा गांवों की 30000 महिलाओं को सशक्त बनाया। ऐसे ही अंडमान की नारियल अम्मा ने 150 से अधिक किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। एक ओर पूर्वी सियांग की हर्बल मेडिसिन विशेषज्ञ यानंग जमोह लेगो ने आदि जनजाति के पारंपरिक उपचार प्रणाली को पुनर्जीवित किया। यानंग ने 10000 से अधिक रोगियों को चिकित्सा देखभाल प्रदान की और औषधीय जड़ी-बूटियों के बारे में 1 लाख व्यक्तियों को शिक्षित किया।
वहीं स्मृति रेखा चकमा त्रिपुरा की रहने वाली हैं और लोनलूम शाॅल बुकर हैं। दुसाध समुदाय की शांति देवी पासवान ने अपने पति शिवन पासवान के साथ गोदना चित्रकारी को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया। गोदना कलाकृति का प्रदर्शन किया और 20 हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया। ये सारी महिलाएं किसी एक राज्य के नहीं हैं। हलांकि इनमेंसे किसी ने भी सरकारी स्कीम के तहत प्रेरित नहीं हुई। सारी कहानियां बदलते भारत में महिलाओं के सुदृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए जैविक खेती, व्यवस्थित चावल गहनीकरण, जैविक खाद उत्पादन (गाय के गोबर और गोमूत्र का उपयोग करके), वृक्षारोपण, वन अधिकार अधिनियम के लिए पैरवी और जनजातियों के लिए सामुदायिक वन जैसी गतिविधियां मुख्य फोकस रही हैं।
325 से अधिक आदिवासी महिलाओं को उनके ब्लॉक के ग्राम प्रतिनिधि, पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया है। 120,000 व्यक्तिगत वन भूमि के स्वामित्व उन महिलाओं को प्रदान किए गए हैं जो मुख्य प्राप्तकर्ता और स्वामी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से रोजगार सृजन में भी प्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं उड़ीसा में आदिवासी और दलित परिवारों के बीच 10.6 करोड़ व्यक्ति दिवस श्रम जुटाया है। इसके अलावा ‘अपना भोजन स्वयं उगाएं’ अभियान ने महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण सेवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। आदिवासी महिलाओं को अपने पर्यावरण-अनुकूल घर बनाने के लिए ब्लॉक ईंट बनाने और राजमिस्त्री कौशल का प्रशिक्षण दिया गया है। 5000 से अधिक आदिवासी महिलाओं को पर्माकल्चर और इकोविलेज डिजाइन शिक्षा में प्रशिक्षित किया गया है।
फिर भी ये कहना गलत होगा कि सरकार कुछ नहीं कर रही है। आये दिन लखपति दीदी और ड्रोन दीदी की चर्चा हम सुनते रहे हैं। पिछले कई वर्षों से मोदी सरकार रोजगार के अवसर प्रदान करने वाले पारंपरिक क्षेत्रों को सुदृढ़ कर रही है और साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष, ऑटोमेशन और रक्षा निर्यात जैसे नए क्षेत्रों में महिलाओं को भी बढ़ावा दे रही है। ड्रोन प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नए रास्ते खोले जा रहे हैं इस क्षेत्र में महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा आगे बढ़ाने के लिए लाखों ड्रोन दीदियों को प्रशिक्षित कर रोजगार दिया जा रहा है। वंदे भारत जैसी ट्रेनों में महिला लोको पायलट आसानी से देखे जा सकते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत की महिलाओं के सशक्तिकरण, उनके सम्पूर्ण स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सुरक्षा एवं रोजगार प्रशिक्षण के साथ सर्वांगीण विकास के लिए कार्यरत है। मंत्रालय “कुपोषण मुक्त भारत” के लिए अपनी प्रतिबद्धता और बच्चों के विकास के प्रति अपने समर्पण में एकजुट होकर प्रयासरत है, और न केवल महिलाओं के विकास के लिए, बल्कि वीमेन लेड डेवलपमेंट के माध्यम से विकसित राष्ट्र निर्माण की प्रेरक कहानियों में, सशक्त महिला नेतृत्व की भूमिका और योगदान का गौरवशाली इतिहास भी लिख रहा है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तीन मिशनों- महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए मिशन शक्ति बच्चों के विकास और सुरक्षा के लिए मिशन वात्सल्य और कुपोषण के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के माध्यम से भावी भारत की तस्वीर में समता, सक्षमता और सहभागिता के विविध रंग भरने के लिए प्रयासरत है। सरकारी योजना मिशन शक्ति का उद्देश्य महिलाओं को जीवन के सभी चरणों में सशक्त बनाना है। यह कार्यक्रम ‘वीमेन लेड डेवलपमेंट’ के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है, जो जीवन के प्रत्येक चरण में महिलाओं को प्रभावित करने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए उन्हें सक्षम बनाता है। इस मिशन का उद्देश्य महिलाओं को सार्वजनिक भागीदारी और रणनीतिक हस्तक्षेपों में शामिल करते हुए समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में समान योगदानकर्ता बनाना है।
 

केंद्र सरकार गन्ना अनुसंधान के लिए ICAR में विशेष टीम का करेगी गठन : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

01-Oct-2025
नई दिल्ली ( शोर संदेश )। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को घोषणा की कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) में गन्ना अनुसंधान और नीति के लिए एक अलग टीम बनाई जाएगी। इस पहल का उद्देश्य किसानों और चीनी उद्योग के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा। शिवराज सिंह ने गन्ने के विकास से जुड़ी एक सेमिनार में बताया कि गन्ने की 238 किस्म उच्च चीनी उत्पादन देती है, लेकिन यह लाल सड़न रोग के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने एकल फसल के खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया, जैसे कि मिट्टी के पोषक तत्वों की कमी और नाइट्रोजन संधारण में कमी, और सुझाव दिया कि दाल और तिलहन जैसी फसलों के साथ इंटरक्रॉपिंग (साथ में उगाना) पर विचार किया जाए।
इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ने उत्पादन लागत कम करने, मशीनरी बढ़ाने, चीनी वसूली दर सुधारने, “per drop, more crop” के सिद्धांत के तहत कुशल सिंचाई अपनाने, बायोप्रोडक्ट्स और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने, और प्राकृतिक खेती अपनाकर उर्वरक पर निर्भरता कम करने पर भी जोर दिया। उन्होंने किसानों को भुगतान में देरी जैसी पुरानी समस्याओं को भी उजागर किया और कहा कि चूंकि मिलों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसका मुख्य प्रभाव किसानों पर पड़ता है। उन्होंने कृषि मजदूरों की कमी पर भी चिंता जताई और प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और मशीनरी बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कृषि मंत्री ने कहा, “मैं ICAR से आग्रह करता हूं कि गन्ना अनुसंधान के लिए एक विशेष टीम बनाई जाए, जो व्यावहारिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे। अनुसंधान का लाभ किसानों और उद्योग दोनों को मिलना चाहिए। ऐसा अनुसंधान जो किसानों के काम न आए, उसका कोई अर्थ नहीं है।” ICAR के महानिदेशक और DARE सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने चार मुख्य अनुसंधान प्राथमिकताओं को उजागर किया। इसके तहत अनुसंधान एजेंडा तय करना, विकास और उद्योग से जुड़ी चुनौतियों से निपटना, और नीति संबंधी सुझाव देने पर चर्चा हुई। उन्होंने उर्वरक की दक्षता बढ़ाने, सूक्ष्म-सिंचाई (micro-irrigation) को बढ़ाने और फसल विविधीकरण पर जोर दिया, जिससे स्थिरता और किसानों की आय मजबूत हो।
वहीं डॉ. देवेंद्र कुमार यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), ने कहा कि 238 किस्म प्रारंभ में लोकप्रिय थी, लेकिन इससे एकल फसल के खतरे बढ़ते हैं। उन्होंने नई किस्मों के लिए तीन साल के परीक्षण चक्र और पैदावार अंतर (yield gaps) का विश्लेषण करने की आवश्यकता पर बल दिया। ICAR के डॉ. राजबीर सिंह ने भी सेमिनार में अपने विचार साझा किए। सेमिनार के अंत में यह आश्वासन दिया गया कि भविष्य की गन्ना अनुसंधान रणनीतियों में किसान-केंद्रित सिफारिशों को शामिल किया जाएगा।
 

प्रवीर रंजन बने CISF के नए महानिदेशक, आधुनिकीकरण और पारदर्शिता पर जोर

01-Oct-2025
नई दिल्ली ( शोर संदेश )। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को नया प्रमुख मिल गया है। 1993 बैच के AGMUT कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रवीर रंजन ने आज मंगलवार को CISF के 32वें महानिदेशक (DG) का पदभार संभाला। CISF मुख्यालय में आयोजित समारोह में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उन्होंने बल के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत भी की।
अप्रैल 2024 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत रंजन अब तक CISF में विशेष महानिदेशक (एयरपोर्ट सुरक्षा) के रूप में तैनात थे और देशभर के महत्वपूर्ण हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे थे। 32 साल लंबे करियर में उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया है। दिल्ली पुलिस में स्पेशल पुलिस आयुक्त (क्राइम और EOW), CBI में DIG, और चंडीगढ़ में पुलिस महानिदेशक (2022-24) के रूप में वे अपनी दक्षता दिखा चुके हैं। CISF में आने से पहले वे ADG भी रह चुके हैं।
प्रवीर रंजन का शैक्षणिक बैकग्राउंड भी मजबूत है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में परास्नातक, उस्मानिया विश्वविद्यालय से पुलिस प्रबंधन में मास्टर, सिंगापुर नेशनल यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक मैनेजमेंट में मास्टर तथा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली से LLM की उपाधि प्राप्त की है। सेवाओं में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 2009 में राष्ट्रपति पुलिस पदक (मेधावी सेवा) और 2016 में राष्ट्रपति पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा) से सम्मानित किया गया था।
पदभार संभालने के बाद अपने पहले संबोधन में उन्होंने कहा कि CISF को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इसके लिए बल में आधुनिकीकरण, कल्याणकारी दृष्टिकोण और पारदर्शी प्रशासन पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्रालय के निर्देशों को प्राथमिकता से लागू किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा और पुलिसिंग में उनके अनुभव और गहन शैक्षणिक पृष्ठभूमि के कारण CISF को नई दिशा और मजबूती मिलेगी। उम्मीद की जा रही है कि उनके कार्यकाल में CISF न केवल राष्ट्रीय स्थापनाओं की सुरक्षा को और मजबूत करेगा, बल्कि आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार होगा।
 


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