ब्रेकिंग न्यूज

देश-विदेश

भारत-ब्रिटेन साझेदारी ग्लोबल स्टेबिलिटी और आर्थिक प्रगति का आधार : पीएम मोदी

10-Oct-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर भारत दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मुंबई स्थित राजभवन में अपने समकक्ष कीर स्टारमर का स्वागत किया। इस दौरान, दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रक्रिया के तहत एक बैठक की गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “प्राइम मिनिस्टर स्टारमर के नेतृत्व में भारत और ब्रिटेन के रिश्तों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इस साल जुलाई में मेरी ब्रिटेन यात्रा के दौरान हमने ऐतिहासिक ‘कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक और ट्रेड एग्रीमेंट’ पर सहमति बनाई। समझौते के कुछ ही महीनों में आपका (स्टारमर) यह भारत दौरा और आपके साथ आया अब तक का सबसे बड़ा बिजनेस डेलिगेशन, भारत-ब्रिटेन साझेदारी में आई नई ऊर्जा और व्यापक दृष्टि का प्रतीक है।”
उन्होंने कहा, “मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत और ब्रिटेन के बीच यह बढ़ती हुई साझेदारी ग्लोबल स्टेबिलिटी और आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार बन रही है।” 
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान भारत और ब्रिटेन को ‘नेचुरल पार्टनर’ बताया। उन्होंने कहा, “हमारे संबंधों की नींव में डेमोक्रेसी, फ्रीडम और ‘रूल ऑफ लॉ’ जैसे मूल्यों में साझा विश्वास है।”
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह बहुत खुशी की बात है कि अब ब्रिटेन की 9 यूनिवर्सिटीज भारत में कैंपस खोलने जा रही हैं। साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी के गुरुग्राम कैंपस का हाल ही में उद्घाटन हुआ है और छात्रों का पहला बैच प्रवेश भी ले चुका है।”
पीएम मोदी ने बताया कि हमने मिलिट्री ट्रेनिंग में सहयोग पर समझौता किया है। इसके तहत भारतीय वायुसेना के ‘फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर’ ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स में ट्रेनर्स के रूप में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत की गतिशीलता और ब्रिटेन की विशेषज्ञता मिलकर एक अद्वितीय तालमेल बनाती है। हमारी साझेदारी भरोसेमंद है, टेलेंट और टेक्नोलॉजी ड्रिवन है। इससे पहले, भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत-ब्रिटेन संबंधों को मजबूत बनाने के लिए हम एक साथ मिलकर काम करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई के राजभवन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर का स्वागत किया।”

 


पीएम मोदी ने जताया उपराष्ट्रपति का आभार- ‘देश की सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात है’

10-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की ओर से दी गई हार्दिक शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद किया है। पीएम मोदी ने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करना सम्मान की बात है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 24 वर्षों की समर्पित सेवा पूरी करने और 25वें गौरवशाली वर्ष में प्रवेश करने पर हार्दिक बधाई दी थी। उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में पीएम मोदी की ‘राष्ट्र प्रथम’ की दृष्टि को भी सराहा। इस पर गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतिक्रिया दी और कहा, “उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन जी, आपके स्नेहपूर्ण शब्दों के लिए धन्यवाद।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अपने देश की सेवा करना और 140 करोड़ भारतीयों के सपनों व आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में काम करना मेरे लिए सम्मान की बात है।”इससे पहले, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य स्तर पर पहले और अब भारत के प्रधान सेवक के रूप में देश की सेवा की है।
उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित सेवा के 24 साल पूरे करने और सरकार के मुखिया के रूप में (पहले राज्य स्तर पर और अब भारत के प्रधान सेवक के रूप में) 25वें गौरवशाली वर्ष में प्रवेश करने पर मेरी हार्दिक बधाई। ‘राष्ट्र प्रथम’ के आपके दृष्टिकोण ने भारत को 5 अर्थव्यवस्थाओं से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में बदल दिया है। इसने 25 करोड़ लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला है।”
उपराष्ट्रपति ने आगे लिखा, “आपकी यात्रा लाखों लोगों को प्रेरित करती है, जो धर्म, कर्तव्यबोध और सेवा भाव पर आधारित है। गरीबों को सशक्त बनाने से लेकर ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देने और भारत के सांस्कृतिक गौरव को पुनर्जीवित करने तक, आपका नेतृत्व ‘2047 तक विकसित भारत’ का मार्ग प्रशस्त करता है।”उन्होंने यह भी कहा कि आप (पीएम मोदी) शक्ति, दूरदर्शिता और समर्पण के साथ राष्ट्र का मार्गदर्शन करते रहें। 

भारत-ब्रिटेन उच्चस्तरीय वार्ता में प्रौद्योगिकी, शिक्षा और निवेश सहित 12 बिंदुओं पर सहमति

10-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  भारत और ब्रिटेन के बीच गुरुवार को हुई उच्चस्तरीय वार्ता में प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, शिक्षा, व्यापार एवं निवेश, जलवायु, स्वास्थ्य और अनुसंधान के क्षेत्रों में 12 नई पहल और समझौतों की शुरुआत हुई। दोनों देशों ने इन समझौतों के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग को और गहराई देने तथा साझा विकास के अवसरों को मजबूत करने का संकल्प व्यक्त किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार दोनों देशों के लोगों के लाभ के लिए एक मजबूत और स्थायी साझेदारी के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने आज मुंबई में व्यापक वार्ता की। दोनों पक्षों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की और आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के नए अवसरों की पहचान की।https://x.com/MEAIndia/status/1976223071339151669
चर्चा में भारत-ब्रिटेन संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा हुई, जिसमें व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए), निवेश, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, हरित ऊर्जा और जलवायु कार्रवाई, रक्षा और सुरक्षा तथा लोगों के बीच संबंध शामिल थे। उन्होंने हिंद-प्रशांत, यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति सहित प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर कहा कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक व्यापार समझौता (सीईटीए) एक अभूतपूर्व पहल है। यह युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, व्यापार का विस्तार करेगा और हमारे उद्योगों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभान्वित करेगा। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री स्टारमर और उन्होंने आने वाले समय में हमारे देशों के बीच व्यापारिक संबंधों और आर्थिक संबंधों पर चर्चा की।
उन्होंने बताया कि हमारी बातचीत में प्रमुखता से शामिल हुए अन्य मुद्दों में प्रौद्योगिकी, रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा आदि शामिल थे। विभिन्न ब्रिटिश विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से मिलकर भी हमें बहुत खुशी हुई। हम ब्रिटेन के साथ शैक्षिक और सांस्कृतिक संबंधों को और आगे बढ़ाते रहेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत-यूके कनेक्टिविटी एवं इनोवेशन सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित संयुक्त केंद्र, महत्वपूर्ण खनिज उद्योग गिल्ड और आईआईटी-आईएसएम धनबाद में एक नए सेटलाइट परिसर की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला वेधशाला के दूसरे चरण और जैव-चिकित्सा अनुसंधान करियर कार्यक्रम के तीसरे चरण का शुभारंभ भी किया गया।
शिक्षा के क्षेत्र में बेंगलुरु में लैंकेस्टर विश्वविद्यालय का परिसर खोलने के लिए आशय पत्र सौंपा गया, जबकि गिफ्ट सिटी में सरे विश्वविद्यालय का परिसर स्थापित करने को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई। व्यापार एवं निवेश के क्षेत्र में पुनर्गठित भारत-यूके सीईओ फोरम की उद्घाटन बैठक हुई और संयुक्त आर्थिक व्यापार समिति का पुनर्गठन किया गया, जिससे सीईटीए के कार्यान्वयन में सहयोग मिलेगा तथा आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, जलवायु प्रौद्योगिकी स्टार्टअप फंड में संयुक्त निवेश से जुड़ा एक नया समझौता हुआ, जो जलवायु प्रौद्योगिकी और एआई जैसे क्षेत्रों में नवाचारी उद्यमियों को प्रोत्साहन देगा। स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और ब्रिटेन की नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर रिसर्च (एनआईएचआर) के बीच आशय पत्र पर भी हस्ताक्षर किए गए।
इससे पहले मुंबई के राजभवन में अपने मित्र, प्रधानमंत्री कीर स्टारमर का स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हुई। उनकी पहली भारत यात्रा होने के कारण, यह निश्चित रूप से एक विशेष अवसर है। भारत में सबसे बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति इसे और भी खास बनाती है और भारत-ब्रिटिश संबंधों की प्रबल संभावनाओं को दर्शाती है। 
 

कफ सिरप मामला: जांच से जुड़ी पीआईएल पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

10-Oct-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  कफ सिरप मामले में सुप्रीम कोर्ट अदालत की निगरानी में जांच की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। याचिका में इस गंभीर मामले की जांच राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या सीबीआई के माध्यम से विशेषज्ञों की समिति बनाकर कराए जाने की मांग की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने सुनवाई 10 अक्टूबर के लिए निर्धारित की।
वकील विशाल तिवारी की तरफ से दाखिल जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई कि मामले की निगरानी कोर्ट के रिटायर जज करें, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, याचिका में कफ सिरप में इस्तेमाल रसायन डायइथाइलीन ग्लाइकॉल और एथलीन ग्लाइकॉल की बिक्री और निगरानी के लिए सख्त नियम बनाए जाने की मांग भी की गई है। पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिए जाने और विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर को एक जगह ट्रांसफर कर संयुक्त जांच कराने की भी अपील की गई है।
याचिका में उन कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने, उन्हें तुरंत बंद करने और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है, जो विषैले कफ सिरप का उत्पादन कर रही हैं। साथ ही बाजार से संबंधित उत्पादों को वापस मंगाने और ड्रग्स रिकॉल पॉलिसी बनाने की भी गुजारिश की गई है।
इससे पहले, मध्य प्रदेश पुलिस ने छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने के कारण 20 से ज्यादा बच्चों की मौत के मामले में दवा कंपनी के मालिक को गिरफ्तार किया। तमिलनाडु की इस कंपनी के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ है।मामले में छिंदवाड़ा जिले के परासिया उप-मंडल के सिविल अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रवीण सोनी को निलंबित किया जा चुका है। जांच के लिए एसआईटी का भी गठन हुआ है।

भारत में जैव-चिकित्सा अनुसंधान को नई दिशा, 1,500 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुआ अनुसंधान करियर कार्यक्रम का तीसरा चरण

10-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) केंद्र सरकार ने जैव-चिकित्सा अनुसंधान करियर कार्यक्रम के तीसरे चरण को मंजूरी दे दी है। यह कार्यक्रम 2025-26 से 2030-31 तक चलेगा और 2037-38 तक विस्तारित सेवा अवधि में लागू रहेगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश में जैव-चिकित्सा विज्ञान, क्लिनिकल और जनस्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व स्तरीय अनुसंधान इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके तहत कुल 1,500 करोड़ रुपये का खर्च किया जाएगा, जिसमें भारत सरकार के जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की ओर से 1,000 करोड़ रुपये और ब्रिटेन के वेलकम ट्रस्ट की ओर से 500 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
इस कार्यक्रम के तहत 2,000 से अधिक शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित करने, उच्च प्रभाव वाले प्रकाशन तैयार करने, पेटेंट योग्य खोजों को बढ़ावा देने और 25-30% परियोजनाओं को तकनीकी तैयारी स्तर (TRL-4) या उससे ऊपर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, महिलाओं वैज्ञानिकों के लिए 10-15% अधिक सहायता देने की योजना है ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान में समावेशिता को बढ़ावा दिया जा सके। यह कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत, स्वस्थ भारत, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे प्रमुख राष्ट्रीय मिशनों से जुड़ा हुआ है। बता दें कि जैव-प्रौद्योगिकी विभाग ने 2008 में वेलकम ट्रस्ट (यूके) के साथ मिलकर “जैव-चिकित्सा अनुसंधान करियर कार्यक्रम” की शुरुआत की थी। इसके पहले दो चरणों में 2,388 करोड़ रुपये का निवेश किया गया और 721 शोध अनुदान प्रदान किए गए। कार्यक्रम के दूसरे चरण में भारत और विदेशों के 90 वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ था।
तीसरे चरण में ‘अर्ली करियर’ और ‘इंटरमीडिएट फेलोशिप’, सहयोगात्मक अनुदान कार्यक्रम और अनुसंधान प्रबंधन कार्यक्रम जैसी योजनाओं के माध्यम से विभिन्न स्तरों पर वैज्ञानिकों को सहायता दी जाएगी। इसके तहत नए अनुसंधान फेलोशिप, सहयोगात्मक अनुदान और क्षमता-विकास की पहलें की जाएंगी। यह कार्यक्रम न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत करेगा बल्कि अनुसंधान प्रबंधन, विज्ञान प्रशासन और नियामक मामलों में भी प्रशिक्षण प्रदान करेगा। “जैव-चिकित्सा अनुसंधान करियर कार्यक्रम” का प्रभाव पहले ही कई क्षेत्रों में दिख चुका है। कोविड-19 महामारी के दौरान इस कार्यक्रम के अंतर्गत 70 से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं को वित्तपोषित किया गया, जिसमें 10 वैक्सीन उम्मीदवार, 34 डायग्नोस्टिक उपकरण और 10 उपचार विधियां विकसित की गईं। डीबीटी-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (NIBMG) ने विश्व का पहला मौखिक कैंसर जीनोमिक वैरिएंट डेटाबेस (dbGENVOC) विकसित किया, जिसमें 2.4 करोड़ से अधिक वैरिएंट शामिल हैं।
इसके साथ ही, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से ‘राष्ट्रीय एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस मिशन’ भी शुरू किया गया है ताकि दवा प्रतिरोधक संक्रमणों से निपटने के लिए अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दिया जा सके। भारत में बायो-रिपॉजिटरी और क्लिनिकल ट्रायल नेटवर्क भी स्थापित किए गए हैं जो अनुसंधान को प्रयोगशाला से रोगियों तक पहुंचाने में सहायक हैं। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘बायोकेयर’, ‘जानकी अम्माल अवार्ड’ और ‘वुमन इन इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप रिसर्च जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। साथ ही, ‘विमेन लीडर्स इन ग्लोबल हेल्थ’ सम्मेलन के माध्यम से महिला वैज्ञानिकों को वैश्विक मंच पर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
भारत का जैव-चिकित्सा अनुसंधान मानव जीनोमिक्स, संक्रामक रोग जीवविज्ञान, वैक्सीन, डायग्नोस्टिक्स, थेराप्यूटिक्स, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, स्टेम सेल रिसर्च, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, समुद्री जैव प्रौद्योगिकी और जनस्वास्थ्य पोषण जैसे क्षेत्रों में केंद्रित है। इन पहलों के माध्यम से भारत ने न केवल सस्ती और स्वदेशी स्वास्थ्य तकनीक विकसित की है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य नवाचार में अग्रणी भूमिका भी निभाई है। यह कार्यक्रम भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने का एक बड़ा कदम है। जैव-चिकित्सा अनुसंधान अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारत के हर नागरिक तक सस्ती, सुलभ और नवाचारी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का माध्यम बन गया है।

भारत-यूके व्यापार समझौता बनेगा नई आर्थिक साझेदारी की आधारशिला : पीएम मोदी

10-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हो रहा व्यापार समझौता दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साझा विकास और समृद्धि का रोडमैप है। यह समझौता न केवल मार्केट एक्सेस को बढ़ाएगा बल्कि दोनों देशों के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को मजबूती देगा और लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आयोजित भारत-यूके सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वर्तमान में भारत और यूके के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 56 अरब डॉलर का है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने इस व्यापार को 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि यह लक्ष्य निर्धारित समय से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत राजनीतिक स्थिरता और व्यापक मांग के साथ निवेश के लिए आदर्श स्थान है, जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर, वित्त, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य कई क्षेत्रों में बड़े अवसर मौजूद हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था निरंतर सुधारों की दिशा में बढ़ रही है और स्थिरता व आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य के व्यापार और विकास के लिए रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ खनिज) जैसे रणनीतिक सेक्टर्स बहुत महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि ये औद्योगिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ब्रिटिश समकक्ष कीर स्टार्मर ने संयुक्त रूप से सीईओ फोरम में भाग लिया। इस बैठक में दोनों देशों के प्रमुख व्यापारिक और वित्तीय नेता एक साथ उपस्थित थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उद्योग जगत के नेताओं और नीति निर्माताओं के अथक प्रयासों से भारत और ब्रिटेन ने व्यापार और आर्थिक सहयोग की एक मजबूत नींव तैयार की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र राजभवन में प्रधानमंत्री कीर स्टारमर से मुलाकात के बाद कहा, “भारत और ब्रिटेन स्वाभाविक साझेदार हैं। हमारी बढ़ती साझेदारी वैश्विक स्थिरता और आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।” दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत और पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति और स्थिरता पर भी चर्चा की। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति बहाल करने के लिए बातचीत और कूटनीति ही सर्वोत्तम रास्ता है।
 

देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाना सरकार का मुख्य लक्ष्य : शिवराज सिंह चौहान

10-Oct-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि और किसान कल्याण विभाग का मुख्य उद्देश्य देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना और पोषणयुक्त अनाज उपलब्ध कराना है। इसके लिए विभाग छह प्रमुख आयामों पर काम कर रहा है- उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, किसानों को उचित दाम दिलाना, नुकसान की भरपाई करना, कृषि का विविधीकरण बढ़ाना और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 2014 से अब तक भारत में खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। गेहूं, चावल, मक्का और सोयाबीन के उत्पादन में रिकॉर्ड हासिल किए गए हैं और देश इन फसलों में आत्मनिर्भर बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत ने अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कृषि निर्यात भी किया है।
उन्होंने कहा कि भारत अभी भी दालों में आत्मनिर्भर नहीं है, जबकि यह विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक और उपभोक्ता देश है। इस कमी को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में दलहन मिशन शुरू किया गया है। चौहान ने बताया कि 2030-31 तक दालों का क्षेत्रफल 275 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 310 लाख हेक्टेयर किया जाएगा। वर्तमान में दाल उत्पादन 242 लाख टन है, जिसे बढ़ाकर 350 लाख टन करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह उत्पादकता को 881 किलो प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 1,030 किलो प्रति हेक्टेयर करने का लक्ष्य है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इसके लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की गई है। इसमें अनुसंधान और विकास (R&D) को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि ऐसी किस्में विकसित की जा सकें जो अधिक उत्पादक, रोग-प्रतिरोधी और जलवायु अनुकूल हों। किसानों को इन बीजों की 126 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों के रूप में आपूर्ति की जाएगी और 86 लाख मुफ्त मिनी किट्स भी वितरित की जाएंगी।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दालों के दाम बढ़ाने के लिए 1,000 प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाएंगी, जिनके लिए सरकार 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी देगी। इसमें केंद्र और राज्य सरकारें, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और प्रगतिशील किसान मिलकर काम करेंगे। इसके साथ ही उत्पादकता बढ़ाने के लिए 100 जिलों का चयन किया गया है, जहां पीएम धन धान्य कृषि योजना के अंतर्गत सिंचाई, भंडारण, ऋण सुविधा और फसल विविधीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि नीति आयोग एक डैशबोर्ड बनाकर 11 विभागों की 36 योजनाओं की निगरानी करेगा। इन योजनाओं का औपचारिक शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अक्टूबर को पूसा संस्थान में करेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए अब तक 10,000 किसान उत्पादक संगठन (FPO) बनाए जा चुके हैं, जिनमें से 1,100 एफपीओ का टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से अधिक है। कुल 52 लाख किसान एफपीओ के शेयरधारक हैं और इन संगठनों का कुल टर्नओवर 15,000 करोड़ रुपये से अधिक है। प्रधानमंत्री मोदी कार्यक्रम के दौरान ऐसे उत्कृष्ट एफपीओ को सम्मानित करेंगे।
शिवराज सिंह चौहान ने आगे बताया कि रासायनिक खादों से मुक्त खेती को बढ़ावा देने के लिए अब तक 15 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए नामांकित किया गया है। इनमें से 6.20 लाख हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती की जाएगी और डेढ़ लाख किसानों को प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं। कोविड काल में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा घोषित एक लाख करोड़ रुपये के कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के अंतर्गत अब तक 1 लाख 17 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं।
 

कस्तूरी कॉटन भारत” बनेगा भारतीय शुद्धता, गुणवत्ता और सततता का प्रतीक : गिरिराज सिंह

09-Oct-2025
नई दिल्ली।( शोर संदेश ) वस्त्र मंत्रालय और कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) द्वारा संयुक्त रूप से मंगलवार को ‘विश्व कपास दिवस 2025’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था — “Cotton 2040: Technology, Climate & Competitiveness”। इस अवसर पर केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह और वस्त्र एवं विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने भाग लिया।
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि “कस्तूरी कॉटन भारत” आने वाले वर्षों में देश का गौरव बनेगा। यह न केवल भारतीय कपास की शुद्धता और गुणवत्ता का प्रतीक है, बल्कि सतत (sustainable) विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
आगे उन्होंने कहा कि भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक 350 अरब अमेरिकी डॉलर का वस्त्र उद्योग और 100 अरब डॉलर का निर्यात हासिल करने के साथ-साथ कार्बन न्यूट्रलिटी प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि “कपास केवल एक फसल नहीं, बल्कि भारतीय कृषि की आत्मा है — यह हमारे किसानों की मेहनत, उम्मीद और धैर्य का प्रतीक है।”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संतुलन वस्त्र क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती हैं। इसलिए जल और ऊर्जा का संयमित उपयोग, मिट्टी संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा अपनाना जरूरी है ताकि देश के वर्षा आधारित कपास क्षेत्र सुरक्षित रह सकें और किसानों की मेहनत आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्धि लाए।
उन्होंने बताया कि भारत विश्व के कुल कपास क्षेत्र का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा रखता है, फिर भी उत्पादन लगभग 450 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है, जो कई देशों के मुकाबले काफी कम है। इसके समाधान के लिए कपास उत्पादकता मिशन पर विचार चल रहा है। साथ ही, सरकार द्वारा पिछले वर्षों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में हुई बढ़ोतरी किसानों के हितों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाती है।
आगे गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत के किसान सतत फाइबर उत्पादन में विश्व का नेतृत्व कर सकते हैं। उन्होंने सभी हितधारकों — जिन्नर्स, स्पिनर्स, ब्रांड्स और निर्यातकों — से किसानों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने और “कस्तूरी कॉटन भारत” को मिस्र के गीज़ा या अमेरिकी सुपीमा की तरह वैश्विक पहचान दिलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पबित्रा मार्गेरिटा ने कहा कि भारत को गुणवत्ता, स्थिरता और नैतिक उत्पादन में नेतृत्व हासिल करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने बताया कि ‘5F’ (Farm-Fibre-Factory-Fashion-Foreign) दृष्टिकोण के तहत “कस्तूरी कॉटन” पहल वस्त्र उद्योग को नई दिशा देगी।
वस्त्र सचिव नीलम शमी राव ने बताया कि भारत का कपास क्षेत्र छह मिलियन किसानों की आजीविका से जुड़ा है और 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है। उन्होंने तकनीक आधारित परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया — जैसे उन्नत कपास प्रजनन, डिजिटल ट्रैसेबिलिटी, और आधुनिक जिनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर।
विकास आयुक्त (हैंडलूम्स) डॉ. एम. बीना ने कहा कि मंत्रालय द्वारा ATUFS, PM MITRA, और NTTM जैसी योजनाओं के माध्यम से उद्योग को लगातार सहयोग दिया जा रहा है। वहीं, संयुक्त सचिव पद्मिनी सिंगला ने कहा कि “मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी” के तहत मंत्रालय उत्पादन, गुणवत्ता और ट्रैसेबिलिटी पर केंद्रित एक समग्र योजना पर कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के समापन पर “कस्तूरी कॉटन भारत” पहल के तहत कई प्रमुख संगठनों — नितिन स्पिनर्स, अरविंद लिमिटेड, आरएसआर इंटरनेशनल, ऑल इंडिया कॉटन एफपीओ एसोसिएशन, बीटल रीजन, होहेनस्टीन, ICAR-CIRCOT और नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर (NAEC) — के साथ वाणिज्यिक एवं सामुदायिक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
 

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 10,907 करोड़ के 5 लाख से अधिक ऋण आवेदन स्वीकृत

09-Oct-2025
नई दिल्ली।( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजीएमबीवाई) ने स्वच्छ और सस्ती सौर ऊर्जा से घरों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने सितंबर 2025 तक ₹10,907 करोड़ की राशि के 5.79 लाख से अधिक ऋण आवेदनों को स्वीकृति दी, जिससे घरों की छत पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने के लिए लाभार्थियों को मिलने वाली वित्तीय सहायता में वृद्धि हुई है।
ऋण देने की प्रक्रिया जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाती है
वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी कर यह जानकारी दी है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के कार्यान्वयन को ऋण वितरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करके, कम ब्याज दरों पर ज़मानत से मुक्त सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान करके और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के माध्यम से सरलीकृत वित्तपोषण के माध्यम से सक्रिय रूप से समर्थन दिया जा रहा है। इस सिलसिले में ऋण देने की प्रक्रिया जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाती है जो प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के राष्ट्रीय पोर्टल (pmsuryaghar.gov.in) के साथ जुड़ा हुआ है। इससे लाभार्थियों के लिए निर्बाध डिजिटल आवेदन प्रक्रिया, बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव और डेटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया सुनिश्चित होती है।
ऋण योजना के प्रमुख लाभ
इस आदर्श ऋण योजना में जो प्रमुख लाभ शामिल हैं, उनमें बिना किसी संपत्ति संबंधी जमानत के प्रतिस्पर्धी ब्याज पर 2 लाख रुपये तक का ऋण, बिजली की लागत बचत के अनुरूप पुनर्भुगतान के लिए लंबी अवधि, भुगतान से 6 महीने की स्थगन अवधि, आवेदक की ओर से कम अंतर पर योगदान और स्वयं-घोषणा के आधार पर डिजिटल स्वीकृति प्रक्रिया शामिल हैं।
ऋण योजना में सुधार
दरअसल, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सक्रिय भागीदारी से ऋण देने की प्रक्रिया को आसान बनाने और योजना की पहुंच बढ़ाने के लिए कई सुधार किए गए हैं। उपयोगकर्ताओं से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर ऋण योजना में उल्लेखनीय सुधार किए गए हैं, जिनमें पात्रता का दायरा बढ़ाने के लिए सह-आवेदकों को जोड़ना, क्षमता-आधारित सीमाएं हटाना और दस्तावेज़ संबंधी आवश्यकताओं को सरल बनाना शामिल हैं।
वहीं, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के समन्वय से वित्तीय सेवा विभाग इस योजना के अंतर्गत ऋणों की प्रगति की सक्रिय रूप से समीक्षा करता है और राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों तथा अग्रणी जिला प्रबंधकों के साथ सहयोग के माध्यम से इसके कार्यान्वयन को मजबूत करता है जिससे योजना को तेजी से अपनाया जा सके, इसकी बेहतर पहुंच हो और इसका व्यापक रूप से प्रसार हो सके।
 

सेमीकंडक्टर भारत का नया ‘चरखा’ : ज्योतिरादित्य सिंधिया

09-Oct-2025
नई दिल्ली।( शोर संदेश )। केंद्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को कहा कि सेमीकंडक्टर भविष्य में भारत के लिए उसी तरह का प्रतीक होंगे जैसा आज़ादी की लड़ाई में ‘चरखा’ था। उन्होंने इसे आधुनिक युग में भारत के आत्मनिर्भर बनने की यात्रा का प्रतीक बताया।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 में बोलते हुए सिंधिया ने कहा कि आज सेमीकंडक्टर वही भावना दर्शाते हैं जो पहले चरखा दर्शाता था – स्वदेशी और आत्मनिर्भरता।
उन्होंने कहा, “भारत एक स्टार्टअप वर्ल्ड कप की मेज़बानी कर रहा है जिसमें 500 कंपनियाँ फंडिंग के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगी। देश डिज़ाइन इन इंडिया, सॉल्व फॉर इंडिया और स्केल फ्रॉम इंडिया की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।”
सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक नई तकनीकी क्रांति की ओर अग्रसर है, जिसे उन्होंने ‘4D सिस्टम’ – लोकतंत्र (Democracy), जनसांख्यिकी (Demography), डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच (Digital-first approach), और डिलीवरी (Delivery) — के रूप में परिभाषित किया।
उन्होंने बताया कि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन पहले ही ₹91,000 करोड़ तक पहुँच चुका है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
सिंधिया ने कहा, “भारत की महत्वाकांक्षा केवल 5G तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत 6G एलायंस के माध्यम से वैश्विक पेटेंट का 10 प्रतिशत योगदान देने की योजना बना रहा है।”
उन्होंने यह भी बताया कि भारत का टेलीकॉम और डिजिटल विकास दुनिया के लिए उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जिसमें 5G कनेक्टिविटी देश के 99.9% जिलों तक पहुँच चुकी है और डेटा की कीमत दुनिया में सबसे कम – मात्र ₹9.11 प्रति GB – है।
सिंधिया ने कहा कि आज भारत में 1.2 अरब मोबाइल ग्राहक हैं, जो विश्व की मोबाइल आबादी का 20% हैं। देश के ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ता 60 मिलियन से बढ़कर 944 मिलियन इंटरनेट ग्राहकों तक पहुँच चुके हैं।
IMC 2025 में मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत केवल तकनीक को अपना नहीं रहा है, बल्कि नवाचार, किफायती सेवाओं और समावेशिता के ज़रिए वैश्विक डिजिटल परिवर्तन का नेतृत्व भी कर रहा है।
 


Feedback/Enquiry



Log In Your Account