
रायपुर (शोर सन्देश) कोरोना संक्रमण के कारण राज्य में उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने मितव्ययता के लिए और भी कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। इसी सिलसिले में पूर्व से किए जा रहे उपायों को विस्तार देते हुए अब नवा रायपुर में निर्माणाधीन नये राजभवन, विधानसभा भवन, सीएम हाउस, मंत्रीगणों व वरिष्ठ अधिकारियों के आवास, नये सर्किट हाउस के निर्माण कार्यों में तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इन कार्यो का भूमिपूजन 25 नवंबर 2019 को किया गया था। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बीते 26 अप्रैल को सभी विभागों को निर्देश दिए गए है कि गत वर्ष की तरह ही वित्तीय वर्ष 2021-22 में भी मितव्ययता बरती जाए। अब इससे भी आगे जाकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर नवा रायपुर में चल रहे प्रमुख निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता द्वारा नवा रायपुर में निर्माणाधीन नये राजभवन, नये सीएम हाउस, मंत्रीगणों व वरिष्ठ अधिकारियों के आवास, नये सर्किट हाउस के निर्माण कार्यों में तत्काल प्रभाव से रोक के लिए संबंधित ठेकेदारों को आदेश जारी किया गया है। इसके साथ ही सेक्टर-19 में नवीन विधानसभा भवन के निर्माण के लिए 245 करोड़ 16 लाख और 118 करोड़ के कार्यो की पूर्व में जारी निविदाओं को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।

रायपुर (शोर सन्देश)। कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस का प्रकोप छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल रहा है. रायपुर एम्स में 15 मरीज भर्ती कराए गए. ज्यादातर मरीजों की आंखों में इन्फेक्शन फैला है. एम्स प्रबन्धन ने पुष्टि की है. इधर, प्रदेश के सभी जिलों में ब्लैक फंगस के उपचार के लिए सभी जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिए हैं.

कांकेर (शोर सन्देश)।पालूरमेटा गांव में नक्सलियों ने बीती रात पुलिस मुखबिरी के शक में एक ग्रामीण की गला रेतकर हत्या कर दी। घटना की आमाबेड़ा थाना प्रभारी बीआर ध्रुव ने पुष्टि की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्रान्तर्गत पालूरमेटा गांव में बीती रात 15 से 20 नक्सली पहुंचे थे, जिसमें से 3 नक्सली गांव में सुखधर गावड़े को घर से निकालकर अपने साथ ले गए। बाद में उस पर पुलिस के लिए मुखबिरी करने का आरोप लगाते हुए गला रेतकर हत्या कर दी। नक्सल वारदात के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने किसी तरह पुलिस को घटना की जनाकारी दी है।

00 आईसीएमआर ने जारी की एडवाइजरी
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कोरोना महामारी से देश में बचे कोहराम के बीच एक और खतरा सामने आ रहा है। दिल्ली और गुजरात में कोरोना संक्रमण को मात देने वाले लोगों को ब्लैक फंगस यानी काली फफूंद का अटैक देखने को मिल रहा है। यह बीमारी आंखों पर सबसे ज्यादा हमला करता है। कुछ मरीजों में आंखों की रोशनी जाने के मामले सामने आए हैं। डॉक्टरी भाषा में इस बीमारी को म्यूकॉमिकोसिस कहा जाता है। गुजरात के सूरत में इस बीमारी के 40 से अधिक केस सामने आए हैं। इनमें से आठ की आंखों की रोशनी चली गई है। दिल्ली में भी डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना महामारी सामने आने के बाद ब्लैक फंगस के मरीज भी बढ़ गए हैं। वहीं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एडवाइजरी जारी कर बताया है कि कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के लिए यह म्यूकोरमाइकोसिस जानलेवा साबित हो रहा है। ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस वातावरण में मौजूद रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता को कमजोर कर देता है । सही समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों की जान तक जा सकती है। खासकर यह बीमारी डायबिटीज और क्रॉनिकल बीमारी वालों के लिए खतरनाक है।
00 क्या है यह ब्लैक फंगस
यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, म्यूकॉमिकोसिस या ब्लैक फंगस एक दुर्लभ फंगल संक्रमण है। इसे श्लेष्मा रोग या ज़ाइगोमाइकोसिस भी कहा जाता है। यह एक गंभीर संक्रमण है जो श्लेष्म या कवक के समूह के कारण होता है जिसे श्लेष्माकोशिका कहा जाता है। ये मोल्ड पूरे वातावरण में रहते हैं। यह आमतौर पर हवा से फंगल बीजाणुओं को बाहर निकालने के बाद साइनस या फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह त्वचा पर कट, जलने या अन्य प्रकार की त्वचा की चोट के बाद भी हो सकता है।
00 कब नजर आता है यह फंगस
कोरोना संक्रमण से उबरने के दो-तीन दिन बाद काली फफूंद के लक्षण दिखाई देते हैं। यह फंगल संक्रमण सबसे पहले साइनस में तब होता है जब रोगी कोविड -19 से ठीक हो जाता है और लगभग दो-चार दिनों में यह आंखों पर हमला करता है। सूरत के किरण अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संकेत शाह के मुताबिक, इसके अगले 24 घंटों में यह संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस में सरदर्द, बदन दर्द, तेज बुखार, खांसी, सांस लेने में समस्या, आंखों और नाक के पास लाल होना, खून की उल्टी, मानसिक स्थिति बदल जाना जैसे कई लक्षण दिखते हैं। केंद्र सरकार और आईसीएमआर ने इसे नजर अंदाज नहीं करने की सलाह दी है। ऐसी स्थिति होने पर चिकित्सकों से परामर्श लेने को कहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और (आईसीएमआर) ने बीमारी की निगरानी, जांच और इलाज के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें बताया गया है ‘‘ ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस का इलाज नहीं किया जाए तो इससे मरीज की जान तक जा सकती है। हवा में मौजूद फफूंद सांस के रास्ते शरीर में पहुंचता है और धीरे-धीरे फेफड़े को प्रभावित करना शुरू कर देता है’’
00 किसे है सबसे ज्यादा खतरा...
डॉ. संकेत शाह के अनुसार, फंगल संक्रमण कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों पर हमला करता है। सबसे बुरी तरह प्रभावित होने वालों में अनियंत्रित शुगर लेवल (मधुमेह के लोग) और ऐसे लोग हैं जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं या वे दवाएं लेते हैं जो कीटाणुओं और बीमारी से लड़ने की शरीर की क्षमता को कम करती हैं। किरण अस्पताल में ईएनटी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजय स्वरूप के अनुसार, संक्रमण आमतौर पर उन रोगियों में देखा जाता है, जो कोविड -19 से ठीक हो गए हैं, लेकिन उनमें मधुमेह, किडनी या कमजोर हार्ट या कैंसर जैसे कॉमरेडिडिटीज हैं।
00 डायबीटिज मरीजों के लिए यह है खतरनाक
आईसीएमआर-स्वास्थ्य मंत्रालय के परामर्श में कहा गया इस बीमारी का सबसे बड़ा खतरा, मधुमेह का अनियंत्रित होना, स्ट्रॉयड की वजह से प्रतिरक्षण क्षमता में कमी, लंबे समय तक आईसीयू में रहने वाले मरीजों पर यह जल्द प्रभाव छोड़ता है। इस संक्रमण से बचने के लिए कोरोना मरीजों को अस्पतालों से छुट्टी देने के बाद भी ब्लड में ग्लूकोज की निगरानी जरूरी है। एंटीबायोटिक, एंटीफंगल दवा, स्ट्रॉयड और संक्रमणमुक्त पानी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सावधानियां और टीकाकरण ही उपाय है। भारत सरकार ने पहले 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगवाया और अब 18 साल से 44 साल आयु वालों को टीका लगाया जा रहा है। हालांकि टीकों की कमीं इस काम में बड़ी बाधा बन रही है। इस बीच, केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिसका फायदा भारत के लोगों को मिलेगा। केंद्र सरकार ने पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट से कहा है कि ब्रिटेन को भेजी जाने वाली कोविशिल्ड की 50 लाख डोज का इस्तेमाल भारत में ही करें। यानि अब इन टीकों को ब्रिटेन निर्यात नहीं किया जाएगा और भारत में 18+ के टीकाकरण में इस्तेमाल किया जाएगा। इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि देश में अब तक कोरोना रोधी वैक्सीन की 16.71 करोड़ डोज लगाई जा चुकी हैं। इसमें टीकाकरण अभियान के 112वें दिन शुक्रवार को 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दी गईं कुल 21.27 लाख डोज भी शामिल हैं। इनमें से 18-44 साल आयुवर्ग के 2.96 लाख लोगों को पहली डोज लगाई गई। मंत्रालय ने बताया कि अब तक 16 करोड़ 71 लाख 64 हजार से ज्यादा डोज लाभार्थियों को दी जा चुकी हैं। लाभार्थियों में 45 से 60 साल आयुवर्ग के 5.46 करोड़ को पहली और 58.29 लाख को दूसरी डोज दी गई हैं। जबकि, 60 साल से ज्यादा उम्र के 5.34 करोड़ लोगों को पहली और 1.42 करोड़ लोगों को दूसरी डोज दी जा चुकी हैं।

बिलासपुर (शोर सन्देश)। छत्तीसगढ़ में 18-44 वर्ष आयुवर्ग के टीकाकरण में आरक्षण के मामले में आज हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रस्ताव रखा गया कि तीनों वर्गों अंत्योदय, एपीएल और बीपीएल कार्डधारियों को बराबरी से टीकाकरण होगा, अर्थात एक तिहाई के हिसाब से सभी वर्ग को बराबरी से टीका लगाया जाएगा। राज्य सरकार के इस प्रस्ताव पर हाई कोर्ट विचार कर रही है। ज्ञातव्य है कि देश में कोरोना वैक्सीनेशन के तीसरे चरण की शुरूआत 1 मई से हुई थी। छत्तीसगढ़ में भी वैक्सीनेशन की शुरूआत हो गई है। इस बीच सरकार ने नया आदेश जारी कर सिर्फ अन्त्योदय कार्ड धारियों को पहले टीका लगाने का आदेश जारी किया था। वहीं राज्य सरकार वैक्सीनेशन में रजिस्ट्रेशन करने वालों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही थी। वर्गीकरण के खिलाफ कई लोगों ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। वहीं आज चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई चल रही है।

रायपुर (शोर सन्देश)। बस्तर टाइगर के नाम से विख्यात दिवंगत महेंद्र कर्मा के बेटे दीपक कर्मा का गुरूवार सुबह करीब 3 बजे कोरोना से निधन हो गई। कांग्रेस के युवा नेता दीपक कर्मा करीब बीस दिन पहले कोरोना संक्रमित हुए थे, जिसके बाद वे होम आइसोलेशन में स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे, स्वास्थ्य ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें पहले जगदलपुर में भर्ती कराया गया था, लेकिन उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आने पर उन्हें रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके लंग्स में काफी इंफेक्शन होने के कारण उन्हें डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी बचाया नहीं जा सका और वे कोरोना से जंग हर गए। उनके मौत की खबर आते ही पूरे बस्तर अंचल में शोक की लहर है। उल्लेखनीय है कि बस्तर आंध्रप्रदेश से लगा इलाका है और आंध्रप्रदेश के तरफ से कोरोना की तीसरी लहर आने की बात कही जा रही है, जिसे लेकर प्रशासन अलर्ट है। वहीं बस्तर का इलाका नक्सल प्रभवित और ग्रामीण क्षेत्र होने के चलते यहां स्वास्थ्य सेवा की कमी भी है ऐसे में यदि कोरोना की यहां तीसरी लहर आती है तो स्थिति काफी भयावह हो सकती है।

रायपुर (शोर सन्देश)। छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण से बिगड़ते हालात के बीच सरकार ने 15 दिनों के लिए लॉकडाउन का विस्तार कर दिया है. प्रदेश के सभी जिलों में आगामी 15 मई तक के लिए लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है. सरकार ने सभी 28 जिलों के कलेक्टरों को इस बाबत आदेश दे दिए हैं. इसमें बताया गया है कि कोरोना संक्रमितों की संख्या नहीं घटने की वजह से सभी जिलों में धारा 144 लागू रहेगी. इस दौरान सभी धार्मिक स्थान, स्कूल-कॉलेज, शराब दुकान, बाजार, मंडी, मॉल, सुपर मार्केट, शादी हॉल, पार्क, जिम और होटल बंद रहेंगे. छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन की अवधि में विस्तार करने की वजह बताते हुए सरकार ने कहा है कि कोरोना संक्रमितों की संख्या नहीं घटने के कारण यह फैसला लिया गया है. इसके अलावा सरकार ने बस्तर संभाग में कोरोना के नए स्ट्रेन का खतरा बढ़ता देख लॉकडाउन के नियमों का सख्ती से पालन कराने का आदेश दिया है. कहा गया है कि कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कराने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं. मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम मानने के लिए सख्ती बरती जाए. आपको बता दें कि एक दिन पहले ही यह खबर आई थी कि छत्तीसगढ़ में कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या में तेजी से सुधार हो रहा है. इस कारण देश के सर्वाधिक संक्रमित 10 राज्यों की लिस्ट से छत्तीसगढ़ बाहर आ गया है. लेकिन आज एक बार फिर सरकार की ओर से कोरोना संक्रमण में वृद्धि को देखते हुए लॉकडाउन बढ़ाने का निर्णय लिया गया है.

सतीष देवागन रायपुर (शोर सन्देश) छत्तीसगढ़ में कोरोना वैश्विक महामारी के दिन प्रतिदिन बढ़ते वैश्विक संक्रमण के चलते आम आदमी का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है| कोरोना संक्रमण के रोकथाम हेतु पूरे छत्तीसगढ़ में पिछले 10 - 15 दिनों से लॉक डाउन लगा हुआ है | लॉकडाउन के चलते मजदूर एवं निर्धन वर्ग के लोगों को दो जून की रोटी के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है पूरे छत्तीसगढ़ में उद्योग धंधे एवं व्यापार नहीं के बराबर चल रहे हैं जहां मजदूरों को रोजगार मिल सके एवं इनकी रोजी रोटी का जुगाड़ हो सके जिससे वह अपनी पेट की आग बुझाने के साथ ही कोरोनावायरस से बचने के लिए मास्क एवं सेनीटाइजर खरीद सके | कोरोना काल की ऐसी विषम परिस्थितियों में समाज सेवा की मिसाल पेश करते हुए पिछड़ा वर्ग महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती विद्या सेन ने जरूरतमंदों के लिए सेवा का हाथ बढ़ाया है| महात्मा गांधी नगर वार्ड क्रमांक 52 अमलीडीह रायपुर की रहने वाली श्रीमती विद्या सेन ने अभी पिछले 8 - 10 दिनों से रोज गरीब, बेसहारा एवं जरूरतमंद लोगों के लिए प्रतिदिन घर में भोजन के 150 - 200 पैकेट बनाकर स्कूटी में पूरे रायपुर शहर में घूम घूम कर गरीब, बेसहारा,एवं जरूरतमंद लोगों को भोजन का पैकेट वितरित कर रही है| भोजन में चावल, रोटी दाल, सब्जी एवं अचार का पैकेज बनाकर जरूरतमंदों में बांटकर समाज सेवा की मिसाल बनी है| श्रीमती विद्या सेन जरूरतमंदों के हिसाब से सूखा राशन का पैकेट बनाकर भी वितरित करती हैं इसके साथ ही इन्होंने ऐसे गरीब, निर्धन, असहाय एवं जरूरतमंदों को जो मास्क एवं सेनीटाइजर नहीं खरीद पाते हैं उन्हें इनके द्वारा मुफ्त में मास्क एवं सैनिटाइजर वितरित किया गया | सेवा के इस पुनीत कार्य में भोजन तैयार करने एवं पैकेट बनाने में उनके पति कैलाश सेन उनके पिता राजकुमार सेन उनकी मां कुमारी सेन, दीदी पिंकी सेन एवं उनके पड़ोसी श्वेता शुक्ला एवं बच्चे यश सेन, मुस्कान सेन तथा बिट्टू शुक्ला उनकी पूरी सहायता करते है | कोरोना कॉल के इस संकट के समय में इनका समाज सेवा का यह कार्य निश्चित ही सराहनीय है इनके जैसे और भी लोगों को जो सक्षम हो उन्हें समाज सेवा में आगे आकर संकट की इस घड़ी में शासन का सहयोग करना चाहिए एवं जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए |

00 कुछ ही देर में कलेक्टर जारी करेंगे आदेश
रायपुर (शोर सन्देश)। राजधानी रायपुर में लॉक डाउन 26 अप्रैल को ख़त्म हो रहा है। लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए तथा केंद्र के सुझाव पर विचार करते हुए राजधानी रायपुर में 5 मई तक लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया। लॉक डाउन की पुष्टि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुझावों के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने निर्णय लिया है। प्रदेश के जिलों में लॉकडाउन लगाए जाने के आदेश कलेक्टरों को जारी कर दिये गए हैं। कुछ ही देर में रायपुर कलेक्टर इसके संबंध में आदेश जारी करेंगे।