

रायपुर ( शोर संदेश )। रायपुर में होने जा रही 24वीं राष्ट्रीय वनवासी क्रीड़ा प्रतियोगिता के लिए जनजातीय खिलाड़ियों का रायपुर पहुॅचना शुरू हो गया है। आज दूरस्थ अण्डमान-निकोबार द्वीप और उत्तर पूर्वी राज्य मणिपुर से खिलाड़ी रायपुर पहुँचें। अण्डमान-निकोबार से 20 सदस्यीय दल और मणिपुर से 28 खिलाडियों का रायपुर पहुँचने पर गाजे-बाजे के साथ भव्य स्वागत किया गया। शबरी कन्या आश्रम परिसर में सभी खिलाड़ियों, कोच और प्रबंधकों का तिलक लगाकर पुष्प गुच्छों के साथ रायपुर में स्वागत किया गया।
अण्डमान-निकोबार से आये खिलाड़ियों में विशेष पिछड़ी जनजाति ग्रेट अण्डमानी की 2 सदस्य जुरोल और पिगरी भी शामिल है। मणिपुर के खिलाड़ियों ने रायपुर पहॅुंचने पर किए गए स्वागत के प्रति खुशी जाहिर की। अण्डमान-निकोबार के खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता के लिए की गई व्यवस्थाओं की भी तारीफ की। सभी खिलाड़ी इस प्रतियोगिता के उत्साह से भरे नजर आएं। आने वाले दो दिनों में अन्य प्रदेशों से भी तीरंदाजी और फुटबॉल के जनजातीय खिलाड़ी रायपुर पहॅुंचेंगे। खिलाड़ियों का स्वागत अमर बंसल, सचिव स्वागत समिति, डॉ अनुराग जैन सचिव वनवासी विकास समिति, उमेश कच्छप, अध्यक्ष वनवासी विकास समिती छत्तीसगढ़, प्रवीण ढोलके क्षेत्रीय संगठन मंत्री , सुभाष बड़ोले क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री, राम नाथ कश्यप प्रान्त संगठन मंत्री, रवि गोयल, गोपाल बियानी, श्रीमती माधवी जोशी ने किया ।
अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम से संम्बद्ध संस्था वनवासी विकास समिति छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित की जा रही 24वीं राष्ट्रीय वनवासी क्रीड़ा प्रतियोगिता 27 से 31 दिसम्बर तक राजधानी रायपुर में होगी। प्रतियोगिता में वनवासी कल्याण आश्रम के कार्यक्षेत्र अनुसार 33 प्रांतों के आठ सौ से अधिक जनजातीय बालक-बालिकाएं भाग लेंगे। प्रतियोगिता में फुटबॉल और तीरंदाजी की प्रतिस्पर्धायें होंगी। फुटबॉल की प्रतिस्पर्धाएं कोटा स्टेडियम और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय मैदान पर होंगी। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए सभी तैयारियां तेजी से की जा रही हैं।
वनवासी विकास समिति के प्रचार-प्रसार प्रभाग के प्रभारी राजीव शर्मा ने बताया कि देशभर में जनजातीय खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने और उन्हें पहचान कर भविष्य के राष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार करने के उद्देश्य से यह प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। इस बार 24वीं प्रतियोगिता राजधानी रायपुर में हो रही है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में अण्डमान निकोबार से लेकर दिल्ली, पंजाब तक के लगभग 33 प्रांतों से जनजातीय खिलाड़ी शामिल होंगे। तीरंदाजी की प्रतियोगिता जूनियर और सब जूनियर वर्ग में बालक-बालिकाओं के लिए होगी। फुटबॉल प्रतियोगिता में जूनियर सब जूनियर वर्ग में जनजातीय बालक अपने खेल का जौहर दिखाएंगे।
शर्मा ने बताया कि विभिन्न प्रांतों से प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए रायपुर आने वाले जनजातीय खिलाड़ियों के आवास और भोजन की व्यवस्था वनवासी विकास समिति द्वारा की जा रही है। रोहणीपुरम स्थित शबरी कन्या आश्रम परिसर में बालिकाओं को रखा जाएगा। सरस्वती शिशु मंदिर और सरस्वती शिक्षा संस्थान परिसरों में बालकों के आवास की व्यवस्था रहेगी। सभी के लिए शबरी कल्याण आश्रम परिसर में नास्तें और भोजन की व्यवस्था की गई है। आवास स्थल से खेल मैदान तक आने-जाने के लिए खिलाड़ियों को वाहन व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी। प्रतियोगिता में विजेताओं को मेडल और ट्रॉफी के साथ प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।





रायपुर ( शोर संदेश )। महिला-बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े रविवार को सूरजपुर जिले के ग्राम बतरा स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल में आयोजित जिला स्तरीय युवा संसद प्रतियोगिता कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा संसद युवाओं के नेतृत्व क्षमता का विकास करता है।
युवा संसद के माध्यम से छात्रों को सरकार की कार्यप्रणाली को जानने और समझने का अवसर मिलता है। युवा संसद कार्यक्रम के माध्यम से राजनीति सीखकर आज कई नेता अच्छे मुकाम पर पहुंच चुके हैं। युवा संसद का उद्देश्य युवाओं को सशक्त बनाना और उन्हें लोकतंत्र में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करना है, साथ ही सार्वजनिक मुद्दों पर विचार करने और अपनी राय बनाने के लिए भी प्रोत्साहित करना है।
मंत्री राजवाड़े ने इस अवसर पर विद्यालय के स्काउट गाइड के बच्चों से भी मुलाकात की और युवा संसद कार्यक्रम के सभी विजेताओं को प्रमाणपत्र प्रदान किए।

भिलाई (शोर संदेश )। सेक्टर चार स्थित एसएनजी स्कूल में वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता एवं मैराथन सीजन-2 का आयोजन 7 दिसंबर शनिवार को श्रीनारायण गुरु विद्या भवन सेक्टर-4 स्कूल परिसर में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रफुल ठाकुर आईपीएस कमांडेंट 4वीं बटालियन माना रायपुर, विशिष्ट अतिथि इंद्रजीत सिंह छोटू युवा डायरेक्टर एचटीसी, समाजसेवी मलकीत सिंह ,वी.के. बाबू स्कूल प्रबंधक, टी.यू. सुनील, पी.एस. सुरेश कोषाध्यक्ष, विनय पीतांबरन उपाध्यक्ष, शिक्षा, के.टी. अनिल उप महासचिव शिक्षा, ई.भारती स्कूल प्राचार्य, शिक्षक, छात्र व छात्रों के पालक सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
इस अवसर पर एसएनजीवीबी परिवार कार्यक्रम में आये अतिथियों और गणमान्य व्यक्तियों द्वारा शांति, समृद्धि और एकता के प्रतीक गुब्बारे छोडे और कई कबूतर उड़ाए। कार्यक्रम के प्रारंभ मेें अतिथियों का बांस के पौधे भेंट कर उनका स्वागत किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि आईपीएस प्रफुल्ल ठाकुर ने लोगो से सतर्क रहने तथा बैंक, पुलिस आदि से धोखाधड़ी की कॉल को समझदारी से संभालने का आग्रह किया। उन्होंने विद्यार्थियों तथा अभिभावकों को अपने जीवन की रक्षा के लिए सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी।
ठाकुर ने अपने बाल्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि वे हिन्दी माध्यम के छात्र रहे, उनकी प्रारंभिक शिक्षा कोरर भानुप्रतापपुर, कांकेर जिले में हुई। पोष्ट ग्रेजुएशन व लॉ की पढ़ाई सेक्टर-7 कल्याण कालेज से हुई और आज वह छत्तीसगढ़ राज्य में आईपीएस की भूमिका निभा रहे है। इस दौरान कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एचटीसी के युवा डायरेक्टर इन्द्र्रजीत सिंह छोटू ने एस.एन.जी.वी.बी. की पूरी टीम भावना की सराहना की तथा उपस्थित लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने और प्लास्टिक का उपयोग नही करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि बेहतर परिणाम के लिए कोई भी काम टीम वर्क के रुप में करें इससे जरूर सफलता मिलेगी इन्द्रजीत ने आगे कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेल को भी अपने जीवन में उतारें क्योंकि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ्य मस्तिष्क के लिए खेल आवश्यक है। कार्यक्रम में प्रारंभ में प्राचार्य ने स्वागत भाषण दिया और अभिभावकों से आव्हान किया कि वे अपने बच्चों को मोबाइल का अत्याधिक उपयोग करने की अनुमति देने के स्थान पर उन्हें आउटडोर खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। विनय पीताम्बरन ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए, साथ ही उनमें खेल भावना भी होनी चाहिए।
के.टी. अनिल ने सभी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने अंदर खिलाड़ी कौशल कैसे विकसित करें। टी.यू. सुनील ने अपने संबोधन में हमें विशिष्ट अतिथियों तथा उनके व्यक्तित्व से अवगत कराया। वी.के. बाबू ने अभिभावकों से विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया कि वे बिना ड्राइविंग लाइसेंस के दो पहिया वाहन न चलाएं। इस दौरान जहां रेड क्रॉस ड्रिल और विभिन्न सदनों एस.एन., आर.टी., एम.टी., आर.एल. के प्रदर्शन किये वहीं एन.सी.सी., स्काउट और गाईड के छात्रों ने आकर्षक मार्च पास्ट किये। इसके अलावा विद्यालय के छात्रों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देकर सबका मनमोह लिया। छात्रोंं ने छत्तीसगढ के पारंपरिक खेल गेड़ी दौड़ के साथ ही अन्य कई प्रकार के खेलों में भाग लिये इसमेंं उत्कृष्ट प्रदर्शन कर एस.एन.सदन ने चैम्पियनशिप जीती।
आर टी हाउस उपविजेता रहा। इसके अतिरिक्त, विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को मुख्य अतिथि आईपीएस प्रफुल्ल ठाकुर, विशेष अतिथि इन्द्रजीत ङ्क्षसह छोटू भैया, प्राचार्य ई भारती सहित अन्य अतिथियों ने उनको पुरस्कृत करते हुए प्रदर्शन के आधार पर व्यक्तिगत प्रतिभागियों को पदक और प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनका हौसला अफजाई किये। विद्यालय प्रबंधन द्वारा कार्यक्रम में आये सभी अतिथियों का शाल-श्रीफल से सम्मान किया। कार्यक्रम का समापन ध्वजारोहण और राष्ट्रगान के साथ हुआ।


कोंडागांव ( शोर संदेश )। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में बस्तर संभाग के युवाओं के खेल प्रतिभा को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है। इसके माध्यम से न केवल यहां के खेल प्रतिभाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शन के लिए नया मंच मिल रहा है बल्कि यहां के युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर भी मिला है। इसके अंतर्गत जिला स्तरीय प्रतियोगिता 20 से 24 नवंबर तक भव्य आयोजन हुआ, जिसमें जिले के सभी विकासखण्ड से लगभग 2000 खिलाड़ियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। जिला स्तरीय आयोजन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता खिलाड़ी अब संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक में अपनी खेल कौशल का प्रदर्शन करेंगे। जिले के खिलाड़ियों में संभाग स्तर पर खेलने के लिए जोश एवं उत्साह साफ दिखाई दे रहा है और इसके लिए खिलाड़ी अपने स्तर पर तैयारियों में जुट गये हैं। कोण्डागांव जिले से विभिन्न खेलों में 368 खिलाड़ी भाग लेंगे।
जिला स्तरीय प्रतियोगिता के व्हॉलीबॉल खेल में कोण्डागांव विकासखण्ड के विजेता खिलाड़ियों ने बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय आयोजन में भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई है। कोण्डागांव विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम गोलावंड के रहने वाले व्हालीबॉल टीम ने भी जिला स्तरीय बस्तर ओलंपिक में टीम भावना के साथ खेलते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जीत हासिल किया है। उनकी टीम के सभी सदस्य एक ही गांव के रहने वाले हैं, व्हालीबॉल खेल के प्रति ग्रामीण युवाओं के इसी जुनून के कारण उन्होंने टीम बनाकर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। अब टीम के सभी सदस्य संभाग स्तर पर अपनी खेल प्रतिभा को दिखाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
गोलावंड के युवा व्हॉलीबाल खेल में अपनी नई पहचान बना रहे हैं। युवाओं का सपना है कि व्हॉलीबाल खेल के क्षेत्र में अपने कौशल का प्रदर्शन कर जिले और राज्य का नाम रोशन करें। उनके सपने को साकार करने की दिशा में बस्तर ओलम्पिक एक नई उम्मीद बनी है। टीम के कप्तान अलेख कोर्राम ने बताया कि वे कक्षा 10वीं के छात्र हैं और कक्षा 09 से विद्यालयीन खेलों में भाग लेते आ रहे हैं। उनके परिवार में शुरू से ही खेल का माहौल रहा है और इसी माहौल में पले-बढ़े हैं। उनके पिता पीलाराम कोर्राम भी अपने समय में एक अच्छे खिलाड़ी रह चुके हैं और जिला स्तरीय प्रतियोगिता के विजेता भी रहे चुके हैं। साथ ही उनकी माता सुनीता कोर्राम भी खिलाड़ी रह चुकी हैं। इसके अलावा उनका बड़ा भाई मनमोहन भी व्हॉलीबाल के खिलाड़ी हैं। इस तरह बचपन से ही खेल के प्रति लगाव रहा है। उन्होंने बताया कि पहली बार उन्हें जिला स्तरीय प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिला है। अलेख ने उम्मीद जताया कि अपने टीम के साथ संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक में अच्छे प्रदर्शन करेंगे।
विशाल कोर्राम भी 10वीं के छात्र हैं और कक्षा 07वीं से स्कूल के प्रतियोगिताओं में भाग लेते आ रहे हैं। उनके परिवार में माता-पिता और चार भाई हैं। बस्तर ओलंपिक में उन्हें विकाखण्ड के साथ जिला स्तर पर स्तर पर पहली बार खेलने का मौका मिला है और उनकी टीम विजय हुई हैं। इसी प्रकार जशवंत कोर्राम ने बताया कि वे कक्षा 11वीं के छात्र हैं। बस्तर ओलंपिक के माध्यम से उन्हें पहली बार जिला स्तर के आयोजन में खेलने का मौका मिला है। उन्होंने बताया कि बस्तर ओलंपिक के आयोजन से उन्हें अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए अच्छा मंच मिला है। टीम में युशांत सेठिया, यशवंत सेठिया, विशाल कोर्राम और अभिजित कोर्राम सहित गांव के अन्य युवा शामिल है। पढ़ाई के साथ खेल के प्रति समर्पण और जुनून ने आज ग्रामीण युवाओं को इस मुकाम तक पहुंचाया है। सभी युवा खिलाड़ियों उनकी प्रतिभा को नया मंच देने के लिए मुख्यमंत्री साय को धन्यवाद दिया।
बस्तर क्षेत्र में लंबे समय से माओवाद ने विकास को बाधित किया था। युवा वर्ग जो कभी माओवाद के प्रभाव से मुख्य धारा से जुड़ नहीं पाए थे वे अब बस्तर ओलम्पिक के माध्यम से खेलों की ओर रुख कर रहे हैं। साथ ही ऐसे कई युवा हैं जो सेना में शामिल हो कर देश की रक्षा करने की सोच रखते हैं उनके सपनों में बस्तर ओलम्पिक ने पंख लगा दिए हैं। आज क्षेत्र के युवाओं ने खेलों में भागीदारी के माध्यम से न केवल अपनी क्षमताओं को पहचाना है, बल्कि अपने गांव, जिला और राज्य का नाम रोशन करने की ओर कदम बढ़ाया है। ऐसे में बस्तर ओलम्पिक का आयोजन ऐसे युवाओं के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह न केवल राज्य के पारंपरिक खेलों को सहेजने और संवारने का माध्यम बना है, बल्कि युवाओं के भविष्य को गढ़ने में मददगार हो रहा है। )। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में बस्तर संभाग के युवाओं के खेल प्रतिभा को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है। इसके माध्यम से न केवल यहां के खेल प्रतिभाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शन के लिए नया मंच मिल रहा है बल्कि यहां के युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर भी मिला है। इसके अंतर्गत जिला स्तरीय प्रतियोगिता 20 से 24 नवंबर तक भव्य आयोजन हुआ, जिसमें जिले के सभी विकासखण्ड से लगभग 2000 खिलाड़ियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। जिला स्तरीय आयोजन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता खिलाड़ी अब संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक में अपनी खेल कौशल का प्रदर्शन करेंगे। जिले के खिलाड़ियों में संभाग स्तर पर खेलने के लिए जोश एवं उत्साह साफ दिखाई दे रहा है और इसके लिए खिलाड़ी अपने स्तर पर तैयारियों में जुट गये हैं। कोण्डागांव जिले से विभिन्न खेलों में 368 खिलाड़ी भाग लेंगे।
जिला स्तरीय प्रतियोगिता के व्हॉलीबॉल खेल में कोण्डागांव विकासखण्ड के विजेता खिलाड़ियों ने बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय आयोजन में भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई है। कोण्डागांव विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम गोलावंड के रहने वाले व्हालीबॉल टीम ने भी जिला स्तरीय बस्तर ओलंपिक में टीम भावना के साथ खेलते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जीत हासिल किया है। उनकी टीम के सभी सदस्य एक ही गांव के रहने वाले हैं, व्हालीबॉल खेल के प्रति ग्रामीण युवाओं के इसी जुनून के कारण उन्होंने टीम बनाकर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। अब टीम के सभी सदस्य संभाग स्तर पर अपनी खेल प्रतिभा को दिखाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
गोलावंड के युवा व्हॉलीबाल खेल में अपनी नई पहचान बना रहे हैं। युवाओं का सपना है कि व्हॉलीबाल खेल के क्षेत्र में अपने कौशल का प्रदर्शन कर जिले और राज्य का नाम रोशन करें। उनके सपने को साकार करने की दिशा में बस्तर ओलम्पिक एक नई उम्मीद बनी है। टीम के कप्तान अलेख कोर्राम ने बताया कि वे कक्षा 10वीं के छात्र हैं और कक्षा 09 से विद्यालयीन खेलों में भाग लेते आ रहे हैं। उनके परिवार में शुरू से ही खेल का माहौल रहा है और इसी माहौल में पले-बढ़े हैं। उनके पिता पीलाराम कोर्राम भी अपने समय में एक अच्छे खिलाड़ी रह चुके हैं और जिला स्तरीय प्रतियोगिता के विजेता भी रहे चुके हैं। साथ ही उनकी माता सुनीता कोर्राम भी खिलाड़ी रह चुकी हैं। इसके अलावा उनका बड़ा भाई मनमोहन भी व्हॉलीबाल के खिलाड़ी हैं। इस तरह बचपन से ही खेल के प्रति लगाव रहा है। उन्होंने बताया कि पहली बार उन्हें जिला स्तरीय प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिला है। अलेख ने उम्मीद जताया कि अपने टीम के साथ संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक में अच्छे प्रदर्शन करेंगे।
विशाल कोर्राम भी 10वीं के छात्र हैं और कक्षा 07वीं से स्कूल के प्रतियोगिताओं में भाग लेते आ रहे हैं। उनके परिवार में माता-पिता और चार भाई हैं। बस्तर ओलंपिक में उन्हें विकाखण्ड के साथ जिला स्तर पर स्तर पर पहली बार खेलने का मौका मिला है और उनकी टीम विजय हुई हैं। इसी प्रकार जशवंत कोर्राम ने बताया कि वे कक्षा 11वीं के छात्र हैं। बस्तर ओलंपिक के माध्यम से उन्हें पहली बार जिला स्तर के आयोजन में खेलने का मौका मिला है। उन्होंने बताया कि बस्तर ओलंपिक के आयोजन से उन्हें अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए अच्छा मंच मिला है। टीम में युशांत सेठिया, यशवंत सेठिया, विशाल कोर्राम और अभिजित कोर्राम सहित गांव के अन्य युवा शामिल है। पढ़ाई के साथ खेल के प्रति समर्पण और जुनून ने आज ग्रामीण युवाओं को इस मुकाम तक पहुंचाया है। सभी युवा खिलाड़ियों उनकी प्रतिभा को नया मंच देने के लिए मुख्यमंत्री साय को धन्यवाद दिया।
बस्तर क्षेत्र में लंबे समय से माओवाद ने विकास को बाधित किया था। युवा वर्ग जो कभी माओवाद के प्रभाव से मुख्य धारा से जुड़ नहीं पाए थे वे अब बस्तर ओलम्पिक के माध्यम से खेलों की ओर रुख कर रहे हैं। साथ ही ऐसे कई युवा हैं जो सेना में शामिल हो कर देश की रक्षा करने की सोच रखते हैं उनके सपनों में बस्तर ओलम्पिक ने पंख लगा दिए हैं। आज क्षेत्र के युवाओं ने खेलों में भागीदारी के माध्यम से न केवल अपनी क्षमताओं को पहचाना है, बल्कि अपने गांव, जिला और राज्य का नाम रोशन करने की ओर कदम बढ़ाया है। ऐसे में बस्तर ओलम्पिक का आयोजन ऐसे युवाओं के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह न केवल राज्य के पारंपरिक खेलों को सहेजने और संवारने का माध्यम बना है, बल्कि युवाओं के भविष्य को गढ़ने में मददगार हो रहा है।