कवर्धा (शोर संदेश)। क्षय (टीबी) रोग पर नियंत्रण के लिए कबीरधाम जिले में नई शुरुआत की गई है। इसके अंतर्गत टीबी रोग से ग्रसित लोगों को दवा देने के साथ ही टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट (टीपीटी) भी दिया जा रहा है ताकि खासकर फेफड़े वाली टीबी जैसी अन्य संक्रामक टीबी को फैलने से रोका जा सके। इस शुरुआत के साथ कबीरधाम छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां टीपीटी दिया जाना शुरू किया गया है। जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. बीएल राज ने बतायाः टीबी रोग पर नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों के अंतर्गत टीबी ग्रस्त लोगों के उपचार के लिए उन्हें नियमित रूप से दवाई तो दी ही जा रही है। साथ ही अब इंफेक्शन मोड पर भी दवा शुरू की गई है और टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट (टीपीटी) दिया जा रहा है, ताकि संक्रमण भविष्य में बीमारी का रूप न ले पाए। उन्होंने आगे बतायाः किसी न किसी के शरीर में बैक्टीरिया हो सकता है इसलिए टीपीटी उन घरों में विशेष रूप से दी जा रही है, जहां टीबी संचार का खतरा है-जैसे-फेफड़े वाली टीबी के मरीज के घर। इस पहल से टीबी रोग पर नियंत्रण करने में काफी हद तक सफलता मिल सकती है। टीबी रोग पर नियंत्रण के उद्देश्य से जिले के शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र में सघन सर्वे अभियान भी चलाया जा रहा है जिसके अंतर्गत टीबी के संभावित मरीज को चिन्हित करने के लिए सभी आयु वर्ग के लोगों की जांच की जा रही है। रोग की पुष्टि होने की स्थिति में नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में पीड़ित का उपचार शुरू कराया जाएगा। जिला कार्यक्रम समन्वयक आनंद दास महंत ने बतायाः छत्तीसगढ़ को वर्ष 2023 तक टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे प्रयासों की कड़ी में कबीरधाम जिले में लगातार जन-जागरुकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसे प्राथमिकता में रखकर जिले की जेल, खदान, आश्रय गृह व अन्य संवेदनशील जगहों के साथ ही गांव तथा शहर की विशेषकर मलिन बस्तियों में टीबी रोगी के चिन्हांकन के लिए 25 मई से सघन सर्वे किया जा रहा है, जो कि 10 जुलाई तक चलेगा। इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उन घरों के लोगों को टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट (टीपीटी) दिया जा रहा हैए जहां टीबी के संचार का खतरा है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुजॉय मुखर्जी ने बतायाः टीबी रोग पर नियंत्रण करने हेतु जिले में पहली बार टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट शुरू किया गया है। टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट के लिए राज्य के 12 जिलों का चयन किया गया है जिनमें सबसे पहले कबीरधाम जिले में इसकी शुरुआत की गई है। यह सेवा चिन्हित टीबी ग्रस्त लोगों के घरों में दी जा रही है, ताकि लक्षण महसूस होने पर शुरुआत में ही टीबी रोग को फैलने से रोका जा सके।