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किसान

बलौदाबाजार के किसान ऑयल पाम की ओर बढ़े, मिलेगी नई आय का स्रोत

05-Sep-2025
रायपुरशोर संदेश भारत सरकार द्वारा तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल पाम संचालित किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में किसानों को ऑयल पाम की खेती हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप जिले के कृषकों में इस नई फसल को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। अब तक विकासखंड सिमगा के ग्राम जरौद में 2 हेक्टेयर एवं भाटापारा के ग्राम बिजराडीह में 6 हेक्टेयर, कुल 8 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम पौधों का रोपण कार्य पूर्ण किया जा चुका है।
योजना के अंतर्गत कृषकों को प्रति हेक्टेयर 143 ऑयल पाम पौधों पर 29,000 रुपये की अनुदान राशि दिए जाने का प्रावधान है। पौधों के रखरखाव, खाद-उर्वरक, थाला निर्माण आदि हेतु प्रथम वर्ष से चौथे वर्ष तक 5,250 रुपये प्रतिवर्ष प्रति हेक्टेयर सहायता राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त राज्य शासन द्वारा 2,625 रुपये प्रति हेक्टेयर टॉप-अप सहायता राशि भी प्रदान की जाएगी। अंतरवर्ती फसल हेतु प्रथम से चौथे वर्ष तक अधिकतम 22,375 रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है।
सिंचाई सुविधा हेतु न्यूनतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती करने वाले कृषक को एक बोरवेल हेतु 50,000 रुपये तथा प्रति हेक्टेयर अधिकतम 25,000 रुपये प्रति यूनिट की अनुदान सहायता दी जाएगी। इसी प्रकार पम्पसेट हेतु 27,000 रुपये तथा प्रति हेक्टेयर 16,500 रुपये, फेंसिंग हेतु सीमेंट पोल एवं चौनलिंक पर 1,08,970 रुपये प्रति हेक्टेयर, तथा ड्रिप प्रतिस्थापन हेतु 14,130 रुपये प्रति हेक्टेयर के अतिरिक्त 8,635 रुपये टॉप-अप सहायता राशि प्रदान की जा रही है।
ऑयल पाम की खेती से प्रति एकड़ 10 से 12 टन वार्षिक उत्पादन प्राप्त होता है। इस खेती में न्यूनतम श्रम की आवश्यकता होती है तथा पौधों में रोग लगने की संभावना भी कम रहती है। इसके कारण दवाई पर होने वाला व्यय नगण्य रहता है। इस फसल की विशेषता यह भी है कि कृषकों को दलालों से मुक्ति मिलती है क्योंकि उपज का क्रय सीधे अनुबंधित कंपनियों द्वारा किया जाता है। 
प्रारंभिक 4 वर्षों में प्रति हेक्टेयर लागत लगभग 25,000 से 30,000 रुपये आती है, जिसके अंतर्गत भूमि तैयारी, पौधरोपण, सिंचाई एवं खाद-उर्वरक सम्मिलित हैं। चौथे से छठे वर्ष तक प्रति हेक्टेयर 70,000 रुपये से 2,70,000 रुपये तक की अनुमानित आय प्राप्त होती है। आंधी, तूफान, अतिवृष्टि या असमय वर्षा से इस फसल को नुकसान की संभावना अत्यंत कम रहती है।
ऑयल पाम का उपयोग खाद्य तेल उत्पादन के साथ-साथ कॉस्मेटिक्स एवं अन्य औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। साथ ही राज्य शासन द्वारा उपज क्रय हेतु संग्रहण केन्द्र की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। जिले के विभिन्न विकासखण्डों में ऑयल पाम रोपण कार्य प्रगतिरत है। इच्छुक किसान अधिक जानकारी हेतु श्री शेखर जायसवाल, मोबाईल नंबर +91-8103998548 से संपर्क कर सकते हैं।

किसान हितैषी योजनाओं से बदल रही किस्मत: सीताराम राजपूत बने स्वावलंबन की मिसाल

04-Sep-2025
रायपुर।  शोर संदेश मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पारदर्शी सुशासन का परिणाम अब गावों में दिखने लगा है। नेक नियत व ईमानदारी ने शासकीय योजनाओं को लागू करने से इससे प्रदेश के किसानों का जीवन स्तर कैसे सुधारा जा सकता है, इसका जीता-जागता उदाहरण हमें दिखने को मिल रहा है। जिला मुंगेली के विकासखण्ड पथरिया अंतर्गत ग्राम क़लारजेवरा के कृषक सीताराम राजपूत, पिता ईश्वर प्रसाद ने सब्जी की आधुनिक खेती अपनाकर अपनी मेहनत और लगन से एक नई मिसाल कायम की है। राजपूत के परिवार में उनके दादाजी और पिताजी पहले से ही बागवानी और कृषि कार्य करते आ रहे थे। लगभग 10 वर्षों तक उनके पिता ने परंपरागत धान की खेती की। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सीताराम राजपूत ने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद खेती को अपना व्यवसाय बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने 02 एकड़ भूमि में सब्जी की खेती की शुरुआत की और धीरे-धीरे इसे बड़े पैमाने पर विस्तार दिया। आज सीताराम राजपूत सब्जी की खेती से प्रतिवर्ष लगभग 15-16 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।
जिला उद्यानिकी विभाग मुंगेली के मार्गदर्शन में राजपूत ने विभिन्न योजनाओं का लाभ लिया। इनमें सब्जी मिनीकिट, कृषि यंत्र, बीज, जैविक खाद, सामुदायिक नर्सरी और ड्रिप सेट जैसी आधुनिक सुविधाएँ शामिल हैं। इन संसाधनों का उपयोग कर उन्होंने खेती को लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय का रूप दिया।  सीताराम राजपूत ने स्वच्छ श्रीजना महोत्सव, जिला स्तरीय किसान मेला, मत्स्य पालन एवं कृषि संगोष्ठियों तथा विभिन्न कृषि प्रदर्शनियों में सक्रिय रूप से भाग लेकर अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी यह उपलब्धि जिले के अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणास्रोत है।

पारंपरिक खेती से आधुनिक तकनीक तक : किसान नरेन्द्र की 22 लाख वार्षिक आय

25-Aug-2025
रायपुर।  ( शोर संदेश )  मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम कलार-जेवरा के कृषक नरेन्द्र राजपूत ने इसे सच कर दिखाया है। उद्यानिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों का उत्पादन प्रारंभ किया और आज वे अपनी मेहनत से प्रतिवर्ष 20 से 22 लाख रूपए की आय अर्जित कर रहे हैं।
राजपूत ने वर्ष 2016 से ही कृषि कार्य के साथ उद्यानिकी फसलों की खेती आरंभ की। उन्होंने उद्यानिकी विभाग की राज्य पोषित योजनाओं के अंतर्गत सामुदायिक फेसिंग, ड्रीप सिस्टम, संरक्षित खेती तथा सूक्ष्म सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर सब्जी उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई, बल्कि परिवार को आर्थिक रूप से मजबूती भी मिली। वर्तमान में वे टमाटर, बैंगन सहित विभिन्न सब्जियों का उत्पादन कर स्थानीय बाजार में विक्रय कर रहे हैं। राजपूत का कहना है कि सरकारी योजनाओं का समय पर लाभ लेने और वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने से ही किसानों की आय में बढ़ोतरी संभव है। वे अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं कि वे उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाएं।  राजपूत की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान नवीन तकनीकों एवं शासकीय योजनाओं का सही दिशा में उपयोग करें तो खेती न केवल आजीविका का सशक्त साधन बन सकती है, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती है।

































 

6000 रुपए वार्षिक सहायता से बदल रही किसानों की जिंदगी

23-Aug-2025
रायपुर। शोर संदेश ) केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रतिवर्ष 6000 रुपए की आर्थिक सहायता तीन किश्तों में किसानों को दी जाती है। इसी क्रम में सक्ती जिले के ग्राम पंचायत अचानकपुर अंतर्गत ग्राम डड़ाई निवासी किसान भरतलाल राठौर को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का सीधा लाभ मिल रहा है। इस योजना से उन्हे आर्थिक सम्बल मिला है। किसान भरतलाल ने बताया कि इस सहायता राशि का उपयोग खाद-बीज की खरीद और कृषि से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वे करते हैं तथा अन्य तात्कालिक जरूरतों के लिए उपयोग कर रहे है। भरत लाल ने बताया कि पहले की तरह अब हम किसानों को अपनी खेती-किसानी से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है और वे आत्मनिर्भर होकर कृषि कार्य कर रहे है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह योजना सभी किसानों के लिए बहुत हितकारी है।

बिहान योजना बनी आशा की किरण – अनीता पटेल के जीवन को मिली नई दिशा

19-Aug-2025
रायपुर।  शोर संदेश आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित बिहान योजना आशा की किरण बन रही है। इसी योजना ने मुंगेली जिले के ग्राम पंचायत कंतेली के सुरदा गांव की अनीता पटेल के जीवन को नई दिशा दी है। अनीता पटेल के पास महज 01 एकड़ जमीन थी। पति और तीन बच्चों के साथ उनका जीवन काफी कठिनाईयों में गुजर रहा था। आय कम होने के कारण बच्चों की पढ़ाई भी संकट में पड़ गई थी। ऐसे में शासन की बिहान योजना ने उनकी जिंदगी बदल दी।
अनीता ने “मां शाकम्भरी स्व सहायता समूह” का गठन किया। समूह को 15 हजार रुपये की चक्रीय निधि और 60 हजार रुपये का सामुदायिक निवेश कोष मिला। इस राशि का उपयोग कर उन्होंने सब्जी की खेती शुरू की। खेती का दायरा बढ़ा तो बैंक से शासन की मदद से 01 लाख रुपये का ऋण भी उपलब्ध कराया गया। अनीता पटेल अपनी बाड़ी में ग्राफ्टेड मिर्ची, भाटा और अन्य सब्जियां उगाकर सालाना लगभग ढाई लाख रुपये की आय कमा रही हैं। मुंगेली मंडी नजदीक होने से उन्हें सब्जियों की बिक्री आसान हो जाती है और नगद भुगतान भी मिल जाता है। 
अनीता ने बताया कि “बिहान योजना’’ से जुड़कर न केवल परिवार चलाना आसान हुआ, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो गई है। उन्होंने अन्य महिलाओं को भी इस योजना का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने की अपील की। अनीता ने इस सहयोग के लिए कलेक्टर सहित शासन-प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि अब उनके बच्चों के बेहतर भविष्य के सपनों को सच करने की राह आसान हो गई है।
 

मुख्यमंत्री साय की पहल: रायपुर जिले में डिजिटल क्रॉप सर्वे शुरू

18-Aug-2025
रायपुर,।  शोर संदेश 18 अगस्त 2025 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर रायपुर जिले में डिजिटलक्रॉप सर्वे किया जा रहा है। 15 अगस्त से शुरू हुआ यह सर्वे 30 सितम्बर तक चलेगा। डिजिटल का सर्वे का मुख्य उद्देश्य किसानों की वास्तविक फसल स्थिति का आकलन कर उन्हें राज्य एवं केंद्र शासन की योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाना है। इसके अलावा डिजिटल क्रॉप सर्वे किसानों की समृद्धि और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे खेती को नई तकनीक से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर अपर कलेक्टर नम्रता जैन ने मोहंदी, अपर कलेक्टर राठौर ने मेहरसखा में, इसी प्रकार अपर कलेक्टर नवीन ठाकुर ने मंगसा, एसडीएम नंदकिशोर चौबे ने ग्राम नकटी में, एसडीएम रवि सिंह ने छाटा, एसडीएम आशुतोष देवांगन ने ग्राम अडसेना, अभिलाष पैकरा ने छतौना में डिजिटल फसल सर्वे का निरीक्षण किया। इसी प्रकार तहसीलदारों ने अपने प्रभार क्षेत्र के ग्रामों का निरीक्षण किया। 
उल्लेखनीय है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे फिल्ड स्तर पर सर्वेयर के माध्यम से किया जा रहा है जिसमें सर्वेयर को स्वयं खेत में जाकर वहां की स्थिति और फसल का विवरण एग्रीटेक एप्प में दर्ज करना होता है। साथ में फ़ोटो अपलोड करना होता है जिसके सत्यापन बाद में पटवारी एवं वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा किया जाएगा इससे फसल का वास्तविक मूल्यांकन किया जा सकेगा और जमीन की जो परिसम्मति है उनके संबंध में सही जानकारी प्राप्त होगी।
डिजिटल क्रॉप सर्वे से किसानों को कई प्रकार के लाभ प्राप्त होंगे। फसल बीमा योजना एवं क्षति आकलन पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से किया जा सकेगा। पात्र किसानों को कृषि योजनाओं का लाभ शीघ्रता से मिल सकेगा। इस सर्वे से फसल उत्पादन का अत्याधुनिक डेटा तैयार होगा, जिससे आगामी धान खरीदी व्यवस्था एवं कृषि नीति और अधिक प्रभावी बनाई जा सकेगी। साथ ही किसानों को समय पर तकनीकी मार्गदर्शन एवं आर्थिक सहयोग भी उपलब्ध हो सकेगा।

समय पर मिला खाद, खिल उठी उम्मीदें, संतोष की मेहनत में भरेंगे रंग

14-Aug-2025
रायपुर, शोर संदेश )  14 अगस्त 2025/ आज संतोष केशरवानी के चेहरे पर संतुष्टि और खुशी एक साथ दिख रही है। अपने खेत में लगी धान की फसल के लिए समय पर खाद के लिए जाने से संतोष और उनका परिवार ने चैन की मांग ली है। दरअसल चालू खरीफ मौसम में धान की फसल के लिए खाद की कमी की कुछ खबरों ने संतोष की बैचेनी बढ़ा दी थी। परन्तु मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशों पर राज्य में किसानों को समय पर सोसयटियों से  पर्याप्त मात्रा मे खाद मिल रहा हैं। कल ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों से केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए खाद का अतिरिक्त आबंटन जारी करने को मंजूरी भी दी है। छत्तीसगढ़ को केन्द्र सरकार ने 50 हजार टन डीएपी तथा 50 हजार टन यूरिया का अतिरिक्त आबंटन किया है। 
राज्य में धान की फसल में अब रोपा बयासी का काम तेजी से चल रहा है। ऐसे में धान के पौधों की तेजी से बढ़वार के लिए किसानों को खाद की जरूरत है। इस समय में फॉस्फेटिक खाद की ज्यादा जरूरत पड़ती है। समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद मिल जाने से कोरबा जिले के कोरकोमा गांव के सीमांत किसान संतोष केसरवानी की खेतों की बुआई आसानी हुई और फसल की बेहतर शुरुआत संभव हो सकी। केसरवानी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया खेत हमारा सहारा है, सरकार और समिति की तत्परता से उन्हें खेती बाड़ी के लिए जरूरी खाद बीज आदि सामग्री समय पर मिल गई है। इस मदद से उनकी खेती को नई ऊर्जा मिली है। 
किसान संतोष ने कहा कि उनके पास लगभग 5 एकड़ जमीन है, खरीफ सीजन के शुरुआत से ही वे बेहतर उत्पादन के लिए प्रयत्नशील है, बारिश समय पर होने से खेतों की जुताई से लेकर पौधे तैयार करने में कोई दिक्कत नही हुई। इस सीजन में समितियों से समय पर आवश्यक खाद भी उपलब्ध हो गए। उन्होंने बताया कि इस खरीफ सीजन में कोरकोमा सहकारी समिति से उन्होंने अपनी जरूरत अनुसार 7-7 बोरी डीएपी, यूरिया और सुपर फॉस्फेट खाद क्रय किया है, जिसके लिए उन्हें कोई परेशानी नही हुई, ना ही समिति के बार-बार चक्कर लगाना पड़ा। समिति में जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करते ही उन्हें केसीसी के माध्यम से खाद प्रदान किया गया। संतोष ने बताया कि पिछले खरीफ वर्ष उन्होंने करीब 92 क्विंटल धान बेचा था। इस बार वे शुरुआत से ही पूरे परिवार के साथ बेहतर फसल के लिए मेहनत में जुटे हैं। वक्त पर खेत की बुआई होने से उनकी फसल अच्छी लग रही है, उनकी मेहनत रंग ला रही है, आगे जरूरत अनुसार सिंचाई और समय समय पर खाद का छिड़काव भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी खेती न अब सिर्फ एक जीविका का साधन है, बल्कि उम्मीदों की फसल भी बन गई है। वे कहते हैं, सरकार और सहकारी समिति ने जिस प्रकार से खाद और बीज की व्यवस्था समय पर की, उससे हम जैसे छोटे किसानों को बहुत राहत मिली है। इस पहल ने न केवल उनका आर्थिक बोझ कम किया, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाया है।

आधुनिक बागवानी से आदिवासी किसानों की जिंदगी में नई रोशनी

13-Aug-2025
रायपुर,   ( शोर संदेश )  13 अगस्त 2025 कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड का ग्राम गोलाघाट, चारों ओर पहाड़ों और घने जंगलों से घिरा, अब आधुनिक बागवानी और सब्ज़ी उत्पादन का चमकता उदाहरण बन रहा है। कभी केवल परंपरागत खेती पर निर्भर रहने वाले यहां के आदिवासी किसान अब 18 एकड़ में लीची, आम और विविध सब्ज़ियों की खेती कर रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
विचार से हकीकत तक
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा और कलेक्टर चन्दन त्रिपाठी की पहल पर, वनाधिकार पट्टाधारी किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिए उद्यानिकी विभाग ने ठोस योजना बनाई। गांव के सात किसानों पावेरूस मिंज, जयप्रकाश, बीरबल, सन्तोष, विजय, विश्वास और मनोहर ने इस योजना के तहत बागवानी को अपनाया और बदलाव की राह पर कदम बढ़ाए।
लीची-आम के बाग और सब्ज़ियों की खुशबू
जिला उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक श्री विनय त्रिपाठी के अनुसार, पश्चिम बंगाल की ‘साही’ प्रजाति की 1,600 से अधिक लीची पौधों को 7-7 मीटर की दूरी पर लगाया गया है। इनके बीच बरबट्टी, लौकी, टमाटर, करेला, खीरा और तोरई जैसी सब्ज़ियों की खेती हो रही है। खेतों की चारदीवारी के भीतर चौसा, दशहरी और लंगड़ा किस्म के 300 से अधिक आम के पौधे भी लगाए गए हैं। बागवानी क्षेत्र को ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, बोरिंग और फेसिंग जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है।

तीन साल में भरपूर पैदावार

अधिकारियों का कहना है कि तीन वर्षों में लीची का उत्पादन शुरू हो जाएगा, जबकि आम और सब्ज़ियों से किसानों को तुरंत आय मिलनी शुरू हो चुकी है। उन्नत किस्म की लीची लंबे समय तक उत्पादन देती है, जिससे किसानों को स्थायी लाभ होगा।
किसानों का बदलता जीवन
पावेरूस मिंज का कहना है कि इन फसलों से धान की तुलना में अधिक मुनाफा होगा। किसानों का मानना है कि यह पहल उन्हें धान पर पूरी तरह निर्भर रहने से मुक्त कर रही है और आय के नए स्रोत खोल रही है।

छत्तीसगढ़ के 141879 किसानों को 152.84 करोड़ रुपये का दावा भुगतान

11-Aug-2025


रायपुर(शोर संदेश)। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं मौसम आधारित फसल बीमा योजना अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य के एक लाख 41 हजार 879 पात्र बीमित किसानों को कुल 152 करोड़ 84 लाख 62 हजार रुपये का दावा राशि का भुगतान राष्ट्रव्यापी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से किया जाएगा। जिसमें खरीफ सीजन 2024 के 33 हजार 943 पात्र किसानों को 10 करोड़ 25 लाख 97 हजार रुपये तथा रबी सीजन 2024-25 के एक लाख 7 हजार 936 पात्र किसानों को 142 करोड़ 58 लाख 65 हजार रुपये का दावा भुगतान शामिल है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत यह भुगतान 11 अगस्त 2025 (सोमवार) को राष्ट्रव्यापी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण आधारित स्वचालित प्रणाली के माध्यम से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में राजस्थान के झुंझुनू में आयोजित कार्यक्रम में होगी। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान के मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा होंगे। कार्यक्रम में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  भागीरथ चौधरी, राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीेलाल मीना विशिष्ट अतिथि होंगे।

यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से आरंभ होगा। छत्तीसगढ़ के पात्र बीमित कृषकों को वर्चुअल मोड से कार्यक्रम में शामिल करने हेतु जिला स्तर पर कार्यालय उप संचालक कृषि तथा विकासखण्ड स्तर पर कार्यालय वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी में आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि अधिक से अधिक लाभार्थी कृषक इसका हिस्सा बन सकें।

मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन ने इस अवसर पर कहा कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसे प्रभावी कार्यक्रम किसानों को प्राकृतिक आपदाओं एवं फसल हानि से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह दावा भुगतान हमारे कृषकों के विश्वास और आत्मनिर्भरता को और मजबूत करेगा। हमारी सरकार खेती को लाभकारी बनाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक तकनीक के प्रसार और फसल विविधीकरण के माध्यम से प्रदेश की कृषि को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए संकल्पित है।
 

 


अवैध रासायनिक उर्वरक परिवहन पर कृषि विभाग की कार्यवाही

07-Aug-2025
रायपुर शोर संदेश  मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले में कलेक्टर के निर्देशानुसार किसानों को निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने तथा अवैध उर्वरक परिवहन पर नियंत्रण हेतु सतत् निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में कृषि विभाग की टीम द्वारा ग्राम आमाटोला में एक तीन पहिया वाहन से अवैध रूप से परिवहन किए जा रहे 28 बैग रासायनिक उर्वरक जब्त किए गए। जब्त उर्वरकों में 5 बैग यूरिया, 6 बैग सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं 17 बैग डीएपी शामिल हैं। 
ग्रामीणों से प्राप्त सूचना के आधार पर की गई जांच के दौरान पाया गया कि उक्त उर्वरक आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, आमाटोला से सहायक प्रबंधक गंगाराम साहू द्वारा कृषक बीरधन एवं अन्य के नाम पर परमिट काटकर वाहन के माध्यम से भेजे गए थे एवं उन्हें सहायक प्रबंधक के निवास पर पहुंचाना था। जांच एवं जब्ती की कार्यवाही तहसीलदार अम्बागढ़ चौकी, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारी, समिति सदस्य तथा स्थानीय कृषकों की मौजूदगी में हुई। कृषि विभाग द्वारा उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश, 1985 के अंतर्गत विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए प्रकरण को कलेक्टर न्यायालय, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी में प्रस्तुत किया गया है।














 

 




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