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किसान

जैविक खेती से किसानों की आय और आत्मविश्वास में वृद्धि

20-Sep-2025
रायपुर।  ( शोर संदेश )  प्रदेश में जैविक खेती की ओर किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य प्रदान करने के उद्देश्य से किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों को भी जैविक पद्धति से उगा रहे हैं। इस दिशा में राज्य के उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन और प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में कई किसान जैविक खेती अपनाकर प्रेरणा बन रहे हैं। सक्ति जिला के ग्राम चिस्दा के कृषक बाबूलाल राकेश एक एकड़ क्षेत्र में बैंगन की सफल जैविक खेती कर रहे हैं। वहीं महिला किसान श्रीमती सुशीला गबेल अपने गृह बाड़ी में लौकी, कुंदरु और आम की जैविक खेती कर आसपास के किसानों के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं। इन प्रयासों से न केवल किसानों की आय बढ़ रही है, बल्कि समाज में जैविक उत्पादों के प्रति विश्वास भी मजबूत हो रहा है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में जहां 70 से 75 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है, वहाँ रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग उत्पादन तो बढ़ाता है, लेकिन इसके दुष्परिणामस्वरूप लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। बीमारियों का बढ़ता बोझ और पर्यावरण प्रदूषण गंभीर चुनौती बन चुके हैं।
इन परिस्थितियों में जैविक खेती किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। इससे लागत में कमी आती है, मुनाफा अधिक मिलता है, मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है और प्रदूषण भी नहीं फैलता। साथ ही, जैविक उत्पादों के सेवन से लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर होता है।




 

बिहान से जुड़ी महिलाओं ने गेंदा फूल की खेती में रचा नया इतिहास

19-Sep-2025
रायपुर, ( शोर संदेश ) राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) अंतर्गत महिलाओं के स्व-सहायता समूह गेंदा फूल की खेती कर आजीविका संवर्धन की दिशा में नई मिसाल गढ़ रहे हैं। कांकेर जिले के महिला स्व-सहायता समूहों को बैंक लिंकेज के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया गया है। इसी राशि से समूहों की महिलाओं ने गेंदा फूल की खेती प्रारंभ की है।
उन्नत खेती की दिशा में उद्यानिकी विभाग के सहयोग से माह मई-जून में 50 से 55 महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण उपरांत कांकेर विकासखंड के विभिन्न ग्रामों-पीढ़ापाल से रामरहीम समूह, भीरावाही से जय अंबे समूह, कोकपुर से मां दंतेश्वरी समूह, मुरडोंगरी से पूजा समूह, किरगोली से सरस्वती समूह तथा बारदेवरी से जय अंबे समूह ने 10 से 20 डिसमिल क्षेत्र में गेंदा फूल की खेती प्रारंभ की। इस प्रकार कुल एक एकड़ भूमि में 17,600 पौधों का रोपण किया गया है। साथ ही 50 डिसमिल में अतिरिक्त 2,700 पौधे भी लगाए गए हैं।
मुरडोगरी की पूजा स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती जगबती ने बताया कि 20 से 30 डिसमिल क्षेत्र में की गई खेती से अब तक 69 किलो फूल की उपज प्राप्त हुई है। इसे 60 से 70 रुपए प्रति किलो की दर से विक्रय कर महिलाओं ने 4,000 से 5,000 रुपए की आय अर्जित की है। उन्होंने कहा कि इस गतिविधि से वे न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बना रही हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) अंतर्गत महिलाओं की यह पहल ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणादायी बन रही है। गृह कार्य के साथ-साथ रोजगार अर्जित कर महिलाएं अपने परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं। कलेक्टर नीलेश क्षीरसागर, सीईओ जिला पंचायत हरेश मंडावी ने बताया कि 18 सितम्बर से 35 महिलाओं को गेंदा फूल की उन्नत खेती का प्रशिक्षण आरसेटी में दिया जा रहा है। इससे महिलाएं आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ा सकेंगी तथा भविष्य में अन्य जिलों में विक्रय कर अपनी आय में और वृद्धि कर पाएंगी। 








 

मनरेगा से बदली तकदीर: कुंए ने किसान मार्शल की जिंदगी संवारी

18-Sep-2025
रायपुर, ( शोर संदेश )  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ने ग्रामीण अंचलों में न केवल रोजगार सृजन किया है, बल्कि किसानों के जीवन में समृद्धि लाने का कार्य भी किया है। धरमजयगढ़ विकासखण्ड की ग्राम पंचायत आमापाली के किसान मार्शल उर्फ छोटेया इसका उदाहरण हैं। कभी पानी की कमी से जूझती उनकी  2.5 एकड़ कृषि भूमि आज हरी-भरी फसलों से लहलहा रही है।
पूर्व में उनकी कृषि पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी। सीमित उत्पादन और कम आय के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। इस बीच मनरेगा के तहत उनके खेत में व्यक्तिगत कुंआ निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ। इसके लिए 2.54 लाख रुपये की प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गई। 
कुंआ निर्माण के बाद मार्शल ने अपने खेत में धान, मक्का, मूंगफली एवं विभिन्न सब्जियों की खेती प्रारंभ की। गर्मी के मौसम में मूंगफली की फसल से प्राप्त आमदनी ने उनकी आर्थिक दशा को सुदृढ़ किया। सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से फसलों की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और अब उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 40 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। इस कार्य से मार्शल के परिवार के 5 सदस्यों सहित 20 अन्य जॉब कार्डधारी ग्रामीणों को भी रोजगार मिला। मार्शल की सफलता को देखते हुए चार अन्य किसानों ने व्यक्तिगत कुंआ निर्माण कार्यों की माँग की, जिन्हें प्रशासन द्वारा स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। 


 

जल संरक्षण से बदली सोनवर्षा की तस्वीर, ग्रामीण बने आत्मनिर्भर

13-Sep-2025
रायपुर। ( शोर संदेश ) मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेन्द्रगढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत सोनवर्षा के राधारमण नगर ग्राम में जल संकट लंबे समय से एक गंभीर समस्या बनी हुई थी। भूमिगत जल स्तर 450 फीट से भी नीचे चला गया था, जिससे गर्मियों में ग्रामीणों को पेयजल एवं सिंचाई दोनों के लिए भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता था। इस स्थिति से उबरने हेतु महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत खदान के पास नवीन तालाब निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया। 12.80 लाख रुपए की लागत से 07 अक्टूबर 2023 को प्रारंभ यह कार्य ग्राम पंचायत की देखरेख में पूर्ण किया गया। निर्मित तालाब ने ग्रामीणों के निस्तार के साथ-साथ कृषि, मत्स्य पालन एवं आजीविका संवर्धन का भी प्रमुख साधन प्रदान किया।
तालाब के निर्माण से ग्रामवासियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। जहाँ पहले हर गर्मी में जल संकट एक बड़ी चुनौती बनता था, वहीं अब वर्षभर सिंचाई एवं पेयजल हेतु पर्याप्त जल उपलब्ध है। खेतों में नमी बनी रहने से उत्पादन में वृद्धि हुई है तथा हरी-भरी फसलें ग्रामीणों की समृद्धि का प्रतीक बन रही हैं। तालाब में मछली पालन प्रारंभ होने से ग्रामीणों को आय का नया स्रोत प्राप्त हुआ है, जिससे वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हुए हैं। तालाब निर्माण के दौरान तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। बाँध की ऊँचाई एवं चौड़ाई इस प्रकार निर्धारित की गई कि वर्षा जल का अधिकतम संग्रहण हो सके और लंबे समय तक जल उपलब्ध रहे। पर्याप्त गहराई होने के कारण गर्मियों में भी जल का उपयोग संभव हो पा रहा है। यह केवल सरकारी प्रयास ही नहीं बल्कि सामुदायिक एकजुटता का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। ग्रामवासी बाबू सिंह, जीत नारायण एवं एक्का प्रसाद ने संयुक्त रूप से तालाब में लगभग 3000 मछली बीज डाले हैं। वे स्वयं इसकी देखरेख करते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि तालाब ने उनकी सबसे बड़ी समस्या-जल संकट का समाधान कर दिया है। उनका गाँव आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर है। सोनवर्षा-राधारमणनगर का यह तालाब आज जल संरक्षण एवं ग्रामीण विकास की प्रेरणादायी मिसाल बन चुका है।














 

आधुनिक तकनीक से बदल रहा किसानों का जीवन

12-Sep-2025
रायपुर ( शोर संदेश ) बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कृषक समुदाय खेती-किसानी में आधुनिक तकनीक अपना रहे हैं। इसी कड़ी में नमो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत कृषकों को ड्रोन तकनीक उपलब्ध कराई गई है, जिसके माध्यम से अब तक खरीफ 2025 में लगभग 2200 एकड़ क्षेत्र में तरल उर्वरक एवं कीटनाशकों का छिड़काव किया जा चुका है।
वर्तमान में जिले के सभी विकासखंडों में कुल 6 ड्रोन संचालित हैं। प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों के माध्यम से धान की फसल पर नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, कीटनाशक दवाओं एवं अन्य तरल कृषि उत्पादों का प्रभावी ढंग से छिड़काव किया जा रहा है। ड्रोन तकनीक से मात्र 10 लीटर पानी का उपयोग करते हुए 7 से 10 मिनट में एक एकड़ क्षेत्र में छिड़काव संभव हो पा रहा है। इस पद्धति से कृषकों का समय एवं जल दोनों की बचत हो रही है तथा पौधों पर उत्पाद का असर भी अधिक प्रभावशाली हो रहा है। परिणामस्वरूप किसानों की रुचि ड्रोन आधारित खेती की ओर बढ़ रही है।
उप संचालक कृषि दीपक नायक ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में अधिक प्रभावी हैं। यह उत्पाद नैनो तकनीक से निर्मित होने के कारण फसलों में शीघ्र असर दिखाते हैं, साथ ही परिवहन एवं भंडारण में भी सरल हैं। पारंपरिक यूरिया एवं डीएपी की एक बोरी के स्थान पर एक-एक बोतल नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग कर कृषक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में धान फसल हेतु नैनो यूरिया का छिड़काव अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने यह भी बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों की उत्पादकता बढ़ रही है, बल्कि रासायनिक उर्वरकों पर शासन द्वारा दिए जाने वाले भारी अनुदान के वित्तीय बोझ में भी कमी आ रही है। नैनो उर्वरक मृदा स्वास्थ्य के लिए भी हितकारी सिद्ध हो रहे हैं।

किचन गार्डन की अनोखी पहल : बेलडेगी स्कूल के बच्चे अपनी उगाई सब्जियां खा रहे हैं मिड-डे मील में

10-Sep-2025
जशपुर ।  ( शोर संदेश )  जिले के विकासखंड बगीचा स्थित प्राथमिक विद्यालय बेलडेगी ने बच्चों की थाली तक ताजी और स्वास्थ्यवर्धक पोषक तत्व पहुँचाने की अनोखी पहल की है। अब यहां मिड-डे मील में परोसी जा रही सब्जियां सीधे स्कूल परिसर के किचन गार्डन से आती हैं, जिन्हें बच्चे और शिक्षक मिलकर उगाते हैं। प्रधान पाठक अल्फा किरण मिंज और शिक्षक मुनु राम के मार्गदर्शन में स्कूल परिसर में तैयार इस बागान में भिंडी, टमाटर, बैंगन, पालक, धनिया, लहसुन और मटर जैसी हरी सब्जियां उगाई जा रही हैं। इससे पहले बच्चे लौकी, कद्दू, करेला और तरोई जैसी ताजी सब्जियों का भी स्वाद ले चुके हैं। स्कूल के शिक्षक और विद्यार्थियों ने मिलकर इस बगिया को सजाया-संवारा है। वहीं पंचायत द्वारा लगाए गए सबमर्सिबल पंप ने सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुदर्शन पटेल ने कहा कि बेलडेगी स्कूल ने यह साबित कर दिया है कि यदि संकल्प और सामूहिक प्रयास हों, तो सरकारी योजनाओं को और भी प्रभावी बनाया जा सकता है। बच्चों को न केवल ताजी, पोषक और शुद्ध सब्जियां मिल रही हैं बल्कि वे खेती-बाड़ी और श्रम का महत्व भी सीख रहे हैं। यह पहल पूरे ब्लॉक के लिए मॉडल बन चुकी है।  इस प्रयास से बेलडेगी स्कूल अब सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भी मिसाल कायम कर रहा है।




































 

सौर सुजला योजना से खेतों में निर्बाध सिंचाई, किसानों की बढ़ी आमदनी

10-Sep-2025
रायपुर,।  ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रजत महोत्सव मना रहा है। इन 25 वर्षों में राज्य ने कृषि क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। किसानों की खुशहाली और उन्हें स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने में सौर सुजला योजना बड़ी भूमिका निभा रही है।
सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत साल्ही के किसान अमृत सिंह इस योजना से लाभान्वित होकर अपनी खेती को नई ऊंचाइयों तक पहुँचा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले सिंचाई के लिए बिजली की समस्या का सामना करना पड़ता था, जिससे खेती के साथ पैदावार पर असर पड़ता था। लेकिन सौर सुजला योजना से अब खेतों की सिंचाई निर्बाध रूप से हो रही है।
अमृत सिंह ने बताया कि अब वे सालभर खेती कर पा रहे हैं। धान की फसल के साथ-साथ सब्जियों की खेती करने से उनकी आमदनी में वृद्धि हुई है। लगातार उपलब्ध पानी से खेती आसान हुई और फसल उत्पादन भी दोगुना हो गया है। जिससे आमदनी भी बढ़ी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सौर सुजला योजना किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस योजना से उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिली है और कृषि कार्य में खर्च भी घटा है। शासन की यह योजना प्रदेश के हजारों किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा रही है, जिससे वे अब निर्बाध रूप से खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना रहे हैं।


































 

 


ऑयल पाम खेती बनी किसानों की स्थायी आय का साधन

09-Sep-2025
रायपुर। शोर संदेश परंपरागत खेती से सीमित आमदनी पाने वाले किसानों के लिए अब ऑयल पाम की खेती नई उम्मीद लेकर आई है। जांजगीर चांपा जिले के बम्हनीडीह विकासखंड के ग्राम सोंठी में किसान पुरुषोत्तम शर्मा ने इस फसल को अपनाकर समृद्ध भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाया है।
कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने खेतों का निरीक्षण कर किसानों से चर्चा की और बताया कि ऑयल पाम एक दीर्घकालिक आमदनी देने वाली फसल है। इसकी विशेषता है कि रोपण के तीसरे वर्ष से उत्पादन शुरू होकर लगातार 25-30 साल तक चलता है। प्रति हेक्टेयर औसतन 20 टन उपज मिलती है, जिससे किसान को हर साल ढाई से तीन लाख रुपये की आमदनी हो सकती है।
सरकार किसानों को हर संभव सहयोग दे रही है। ऑयल पाम योजना के अंतर्गत प्रति हेक्टेयर 29 हजार रुपये मूल्य के 143 पौधे निःशुल्क दिए जाते हैं। पौधरोपण, फेंसिंग, सिंचाई और रखरखाव की लागत लगभग 4 लाख रुपये आती है, जिस पर केंद्र से 1.30 लाख और राज्य से 1.29 लाख रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही बोरवेल, पम्प सेट, वर्मी कम्पोस्ट यूनिट, पॉम कटर और ट्रैक्टर ट्रॉली जैसी सुविधाओं पर भी सब्सिडी दी जा रही है।
कलेक्टर ने महिला स्व-सहायता समूहों को भी इस योजना से जोड़ने के निर्देश दिए हैं, ताकि महिलाएं प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार कर सकें और आत्मनिर्भर बनें। किसान पुरुषोत्तम शर्मा का कहना है कि पहले खेती से घर चलाना मुश्किल होता था, लेकिन ऑयल पाम ने हमारी सोच बदल दी। अब हमें आने वाले वर्षों में स्थायी और बेहतर आमदनी का भरोसा है।
















 

छत्तीसगढ़ के किसानों को मिला 6636 करोड़ का ब्याज मुक्त ऋण

09-Sep-2025
रायपुर। शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ में चालू खरीफ सीजन में किसानों को 6636 करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त ऋण वितरित किया जा चुका है। ब्याज मुक्त ऋण वितरण से 14 लाख 96 हजार किसान लाभान्वित हुए है। यह जानकारी आज अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदार नाथ गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में दी गई। अपेक्स बैंक की बोर्ड की बैठक में केदार नाथ गुप्ता ने कहा कि डेयरी, मत्स्य पालन और वनोपज प्रसंस्करण जैसी रोजगार आधारित योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने खाद की उपलब्धता और वितरण की समीक्षा करते हुए कहा सहकारिता के अंतर्गत कि इस साल खरीफ सीजन के लिए राज्य सरकार ने 10.72 लाख मेट्रिक टन खाद वितरण का लक्ष्य रखा है, और अब तक 8 लाख 69 हजार मेट्रिक टन खाद का भंडारण किया गया है। इनमें से 8 लाख 01 हजार मीट्रिक टन खाद किसानों को वितरित किया जा चुका है। समितियों के गोदामों में 67 हजार मेट्रिक टन खाद उपलब्धता है।
बैठक में यह भी बताया गया कि राज्य के सहकारी बैंकों में 262 एटीएम और सभी पैक्स सोसायटियों में 2058 माइक्रो एटीएम स्थापित किए गए हैं। साथ ही किसानों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सभी 2058 पैक्स सोसायटियो को पीएम किसान समृद्धि केंद्र बनाए गए। इससे किसानों को आसानी से अपने खाते से राशि निकालने की सुविधा मिल रही है। बैठक में नाबार्ड के उप महाप्रबंधक अजय थुटे, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक के.एन. कांडे, संयुक्त पंजीयक उमेश तिवारी, उप पंजीयक व महाप्रबंधक युगल किशोर, ओएसडी अविनाश श्रीवास्तव, एजीएम अरुण पुरोहित, एजीएम एल के चौधरी और अन्य बैंक के अधिकारी उपस्थित थे।




 

रजत जयंती महोत्सव विशेष : सूरज की ऊर्जा से रोशन होते खेत और किसान

05-Sep-2025
धमतरी।  शोर संदेश )  छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्ष 2016-17 में प्रारंभ की गई सौर सुजला योजना आज राज्य के किसानों के जीवन में खुशहाली का नया अध्याय लिख रही है। विशेषकर धमतरी जिले में यह योजना किसानों के लिए संजीवनी साबित हुई है। जहां पहले किसान केवल वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहते थे और सिंचाई की कमी से उत्पादन प्रभावित होता था, वहीं अब सूर्य की ऊर्जा से संचालित सोलर पंप किसानों के लिए बारहमासी खेती का भरोसेमंद साधन बन गए हैं।*
धमतरी जिले में अब तक कुल 3068 सोलर पंपों की स्थापना छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (क्रेडा) द्वारा की जा चुकी है। इन पंपों से किसानों को धान, गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन, सब्ज़ी और फल-फूल जैसी फसलों का उत्पादन बड़े पैमाने पर करने का अवसर मिला है।गांव-गांव में किसान अब एक सीजन की जगह पूरे साल खेती कर पा रहे हैं, जिससे उनकी आय दोगुनी हुई है और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया है।
ग्राम गोरेगांव के किसान अमृत लाल बताते हैं कि पहले बरसात पर ही खेती करना पड़ता था। बिजली की लाइन खेत तक नहीं पहुंची थी। अब सौर पंप लगने से साल भर सब्ज़ी और धान की खेती कर पा रहा हूँ। आमदनी भी बढ़ गई है और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई अच्छे से कर पा रहा हूँ।
  ग्राम चिपली के  लक्ष्मी नाथ का कहना है –कि “डीजल पंप से खेती करना बहुत महंगा पड़ता था। तेल के दाम भी बढ़ते रहते थे। अब सूरज की रोशनी से खेतों को पानी मिलता है, कोई खर्च नहीं होता। यह योजना हम जैसे छोटे किसानों के लिए वरदान है।”
   ग्राम भोथली के युवा किसान रामेश्वर ने उत्साहित होकर कहा – पहले गांव में खेती छोड़कर बाहर नौकरी ढूँढने जाना पड़ता था। अब सोलर पंप से अच्छी खेती-बाड़ी  हो रही है ।
  कई  महिला किसान सब्ज़ी की खेती कर शहर में बेच रही है । महीने में इतना कमा लेती  है कि  बाहर जाने की ज़रूरत ही नहीं रही।”
इस योजना के अंतर्गत किसानों को 90 प्रतिशत तक अनुदान शासन द्वारा दिया जाता है। केवल शेष राशि उन्हें अंशदान के रूप में देनी होती है। इतना ही नहीं, एनिकट, स्टॉप डेम एवं चेक डेम के किनारों पर 3 से 5 एचपी क्षमता वाले सरफेस सोलर पंप 97 प्रतिशत अनुदान पर लगाए जा रहे हैं। इससे जल स्रोत के पास बसे छोटे और सीमांत किसान अत्यधिक लाभान्वित हो रहे हैं।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में सौर सुजला योजना के सातवें चरण में धमतरी जिले को 400 सोलर पंपों का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। इसके विरुद्ध अब तक 252 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी स्वीकृति और स्थापना प्रक्रिया क्रेडा द्वारा की जा रही है। वहीं वर्ष 2025-26 के फेस-09 अंतर्गत जिले को 205 सोलर पंप का लक्ष्य मिला है, जिनमें से 165 पंप स्थापित किए जा चुके हैं और शेष पर तेजी से कार्य चल रहा है।
इस योजना ने जिले की कृषि व्यवस्था को एक नई दिशा दी है। किसान अब खरीफ और रबी दोनों मौसम में खेती कर रहे हैं। उत्पादन बढ़ने से उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अतिरिक्त पैदावार से न केवल किसानों की आय दोगुनी हुई है, बल्कि गांवों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।खेतों में मजदूरों, परिवहन और कृषि से जुड़ी अन्य गतिविधियों में रोजगार मिलने से बेरोजगारी की समस्या भी घट रही है।
सौर ऊर्जा आधारित पंप पर्यावरण की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी हैं। जहां डीजल और बिजली से चलने वाले पंप प्रदूषण और खर्च दोनों बढ़ाते थे, वहीं सौर पंप प्रदूषणमुक्त, किफायती और दीर्घकालीन समाधान प्रदान कर रहे हैं। यह योजना सतत विकास और हरित क्रांति की दिशा में एक मजबूत कदम है।
छत्तीसगढ़ के रजत जयंती महोत्सव के अवसर पर यह कहना उचित होगा कि सौर सुजला योजना केवल सिंचाई का साधन नहीं है, बल्कि किसानों के लिए ऊर्जा, आत्मविश्वास और समृद्धि का प्रतीक बन चुकी है। किसानों की ज़ुबानी उनके अनुभव इस बात का प्रमाण हैं कि सूरज की रौशनी अब खेतों के साथ-साथ उनके जीवन को भी रोशन कर रही है।
 यह योजना न सिर्फ कृषि उत्पादन को नई ऊंचाई दे रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान कर रही है। आने वाले समय में इसके विस्तार से प्रदेश का कृषि क्षेत्र नई उड़ान भरेगा और किसान समृद्धि की राह पर और तेजी से आगे बढ़ेंगे।



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