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अमेरिका में ट्रंप को नहीं मिल रहा आम जनता का साथ ! बढ़ती महंगाई को लेकर लोगों में असंतोष

10-Dec-2025
नई दिल्ली( शोर संदेश )। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से टैरिफ को लेकर दिए हालिया बयानों से हलचल मचा दी है। पूरी दुनिया में टैरिफ का दबाव बनाने वाले ट्रंप अब अपने ही देश में बढ़ती महंगाई को लेकर घिरते नजर आ रहे हैं।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति घरेलू चुनाव को देखते हुए आम जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में लग गए हैं। ट्रंप भले ही टैरिफ के जरिए दूसरे देशों पर दबाव बनाने की कोशिशों में किसी हद तक कामयाब रहे हों, लेकिन अमेरिकी जमीन पर जनता में उनके फैसलों को लेकर असंतोष साफ जाहिर है।
मंगलवार को पेंसिलवेनिया के एक कसीनो रिजॉर्ट में ट्रंप एक रैली में शामिल हुए। इस दौरान वह एक बार फिर से अपने पुराने दावों को दोहराते नजर आए। रैली में मौजूद लोग उम्मीद कर रहे थे कि ट्रंप बढ़ती महंगाई से राहत के लिए कोई खास ऐलान कर सकते हैं। उन्होंने पेट्रोल की कम कीमतों, रिकॉर्ड निवेश और नौकरियां बढ़ाने के अपने पुराने दावों को ही दोहराया।
इस दौरान उन्होंने डेमोक्रेट्स और पूर्व की बाइडेन सरकार पर तंज कसा। इसके साथ ही ट्रंप ने ट्रांसजेंडर स्पोर्ट्स, अप्रवास और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे मुद्दों पर फिर से बयानबाजी करते नजर आए। उन्होंने कहा कि ताकत के जरिए शांति लाना उनका लक्ष्य है, और दावा किया कि टैरिफ को लेकर उनके फैसले सफल रहे। अप्रवासी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बाइडेन के नेतृत्व में कई खतरनाक अवैध प्रवासी देश में आ गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मुद्दों की अनदेखी को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी चिंता बढ़ गई है। पार्टी सांसद टोनी गोंजालेस ने चेतावनी दी कि अगर रिपब्लिकन आर्थिक मुद्दों पर ध्यान नहीं देंगे, तो यह उनके लिए नुकसानदेह साबित होगा। हालांकि, जनता के मुद्दों से जुड़ने के लिए ट्रंप ने बढ़ती महंगाई को लेकर ज्यादा कुछ तो नहीं कहा, लेकिन बिना किसी नीति के ‘अमेरिका को फिर से किफायती बनाने’ का नारा दिया।
बता दें, डेमोक्रेट्स हाल के चुनावों में महंगाई और घरों की कीमतों को मुख्य मुद्दा बनाकर आगे बढ़ रहे हैं। कुछ हालिया सर्वे में ट्रंप के लिए मुश्किलें नजर आ रही हैं। कई सर्वे में उनकी अप्रूवल रेटिंग 44 फीसदी पर ही सिमट कर रह गई। अधिकतर लोग ट्रंप के फैसलों से नाखुश नजर आ रहे हैं; उनकी नजर में अमेरिका गलत दिशा में जा रहा है।
वहीं ट्रंप जनता को लुभाने की तमाम कोशिशें कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने 2,000 डॉलर के “टैरिफ डिविडेंड चेक” और नवजात बच्चों के लिए “ट्रंप अकाउंट” का वादा किया है। इसके अलावा, किसानों को टैरिफ वॉर के नुकसान की भरपाई के लिए 12 अरब डॉलर देने की घोषणा की है।
अमेरिका में अब भी महंगाई 3 फीसदी के आसपास है। हालांकि, ट्रंप सरकार इसे तेज गिरावट नहीं मान रही है। ट्रंप इसे बाइडेन के दौर की 19 फीसदी महंगाई का प्रभाव बता रहे हैं। 

यूनेस्को ने दीपावली को ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ माना, उपराष्ट्रपति ने बताया भारतीयों के लिए गौरवशाली क्षण

10-Dec-2025
 नई दिल्ली( शोर संदेश )। भारतीय पर्व दीपावली को वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। इसे यूनेस्को (UNESCO) की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कर लिया गया है। यह निर्णय यूनेस्को की अंतरराष्ट्रीय समिति की बैठक में लिया गया। इससे भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट मान्यता मिली है। भारत के उपराष्ट्रपति, सीपी राधाकृष्णन ने दीपावली को लेकर किए गए यूनेस्को के इस निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इस निर्णय को एक गौरवशाली क्षण बताया है।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बुधवार को इस निर्णय पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किए जाने के फैसले का हर्षपूर्वक स्वागत किया है। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने इसे प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का अत्यंत गौरवशाली क्षण बताया।
उपराष्ट्रपति ने अपने एक आधिकारिक संदेश में कहा कि दीपावली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत उत्सव है। यह एक ऐसा सभ्यतागत उत्सव है, जो पूरे देश को एक सूत्र में बांधता है। दीपावली पर्व की गूंज विश्व स्तर पर सुनाई देती है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह पर्व भारत की बहुसांस्कृतिक परंपराओं, बहुलतावाद और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि दीपावली आशा, सद्भाव और अंधकार पर प्रकाश तथा अधर्म पर धर्म की विजय का शाश्वत संदेश देती है। यह पर्व मानवता के लिए शांति, सौहार्द और नैतिक मूल्यों का मार्गदर्शन करता है।
उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और उसके सार्वकालिक मानवीय संदेश का वैश्विक स्तर पर उत्सव है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह मान्यता आने वाली पीढ़ियों को भारतीय परंपराओं को समझने और संरक्षित करने के लिए प्रेरित करेगी।
दीपावली पर्व को नई दिल्ली के लाल किले में आयोजित यूनेस्को अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र के दौरान मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में अंकित किया गया। इस शिलालेख को केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल, संस्कृति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और 194 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और यूनेस्को के वैश्विक नेटवर्क के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में अपनाया गया।
शेखावत ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए कहा कि यह शिलालेख भारत और विश्वभर के उन समुदायों के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है जो दीपावली की शाश्वत भावना को जीवित रखते हैं। उन्होंने कहा कि यह त्योहार ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ के सार्वभौमिक संदेश का प्रतीक है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने की भावना को दर्शाता है और आशा, नवजीवन तथा सद्भाव का प्रतिनिधित्व करता है।
वहीं, संस्कृति मंत्रालय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह शिलालेख भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के बारे में वैश्विक जागरूकता को बढ़ावा देगा तथा भावी पीढ़ियों के लिए समुदाय-आधारित परंपराओं की रक्षा के प्रयासों को सुदृढ़ करेगा।

व्यक्ति और समाज दोनों को सशक्त बनाते हैं मानवाधिकार : सीपी राधाकृष्णन

10-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )।मानवाधिकार दिवस पर बुधवार को राज्य सभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन में मानवाधिकारों की वैश्विक विरासत को याद करते हुए कहा कि वर्ष 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाई गई सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा का यह 77वां वर्ष है। यह ऐतिहासिक दस्तावेज आज भी विश्वभर में गरिमा, स्वतंत्रता, समानता और न्याय का बुनियादी स्तंभ बना हुआ है।
इस वर्ष की वैश्विक थीम “मानवाधिकार: हमारी रोजमर्रा की अनिवार्यताएं”
इस वर्ष की वैश्विक थीम “मानवाधिकार: हमारी रोजमर्रा की अनिवार्यताएं” का उल्लेख करते हुए सभापति ने कहा कि यह दिन तीन महत्त्वपूर्ण बातें याद दिलाती है, जिसमें मानवाधिकार को सकारात्मक, आवश्यक और सभी के लिए जरूरी किए जा सकते हैं। 
देश सदैव सार्वभौमिक मानवाधिकार मूल्यों का दृढ़ समर्थक रहा है
उन्होंने कहा कि मानवाधिकार व्यक्ति और समाज दोनों को सशक्त बनाते हैं, नुकसान को रोकते हैं और समुदायों को बेहतर दिशा में ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि देश सदैव सार्वभौमिक मानवाधिकार मूल्यों का दृढ़ समर्थक रहा है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के रूप में हमारी यह जिम्मेदारी है कि मानवाधिकार प्रत्येक नागरिक—विशेषकर समाज के कमजोर और हाशिए पर खड़े वर्गों के लिए वास्तविकता बनें।
मानवाधिकार दिवस पर उन्होंने आह्वान किया कि हम पुनः संकल्प लें कि मानवाधिकारों को सभी के लिए सकारात्मक, आवश्यक और सुलभ बनाते हुए ऐसे राष्ट्र और विश्व का निर्माण करें जहां हर व्यक्ति गरिमा और अधिकारों के साथ जीवन जी सके। 

पीएम मोदी ने सी. राजगोपालाचार्य की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

10-Dec-2025
नई दिल्ली, ( शोर संदेश )। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को स्वतंत्रता सेनानी, चिंतक, विद्वान और राजनेता सी राजगोपालाचार्य की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि राजाजी बीसवीं सदी के सबसे तेजस्वी मस्तिष्कों में से एक थे, जिन्होंने समाज में मूल्य सृजन और मानव गरिमा को सर्वोपरि माना। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश स्वतंत्रता संग्राम और सार्वजनिक जीवन में उनके दीर्घकालिक योगदान को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करता है।
पीएम मोदी ने एक्स पर कहा कि स्वतंत्रता सेनानी, चिंतक, बौद्धिक व्यक्तित्व और राजनेता, ये सभी गुण सी राजगोपालाचार्य के जीवन को विशिष्ट बनाते हैं। उन्होंने कहा कि राजाजी बीसवीं सदी के उन महान विद्वानों में हैं, जिन्होंने जनमानस को नई दृष्टि दी और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
https://x.com/narendramodi/status/1998589262334439599?s=20
प्रधानमंत्री ने इस मौके पर उनकी कुछ यादें भी साझा कीं। इस अभिलेख में राजगोपालाचारी की युवा अवस्था की एक तस्वीर, कैबिनेट मंत्री के रूप में उनकी नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना, 1920 के दशक के स्वयंसेवकों के साथ उनकी एक तस्वीर और 1922 का यंग इंडिया का वह संस्करण शामिल है, जिसका संपादन उन्होंने किया था, जब महात्मा गांधी जेल में थे।










 

मानवाधिकार दिवस: राष्ट्रपति मुर्मु एनएचआरसी के मुख्य कार्यक्रम की करेंगी अध्यक्षता

10-Dec-2025
नई दिल्ली, ( शोर संदेश )। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज बुधवार को मानवाधिकार दिवस मनाने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ‘सभी के लिए गरिमा’ पर अपने विचार रखेंगी। एनएचआरसी के अध्यक्ष वी. रामासुब्रमण्यम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव पी. के. मिश्रा भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
इस दिन को मनाने के लिए, इस साल के मानवाधिकार दिवस के लिए संयुक्त राष्ट्र की ओर से चुने गए विषय ‘रोजमर्रा की जरूरतें’ के अनुरूप, एनएचआरसी ‘रोजमर्रा की जरूरतों को सुनिश्चित करना, सार्वजनिक सेवाएं और सभी के लिए गरिमा’ पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित करेगा।
एनएचआरसी के एक बयान में कहा गया है कि सम्मेलन का विषय देश की विकास यात्रा से जुड़ा है, जो इस बात पर जोर देता है कि मानवाधिकार कोई काल्पनिक आकांक्षाएं नहीं हैं। वे रोजमर्रा की जरूरतें हैं जो स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आवास, न्याय, वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाओं के माध्यम से किसी के जीवन की गुणवत्ता तय करती हैं।
आयोग का मानना ​​है कि बुनियादी सुविधाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने और सभी के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा के संवैधानिक वादे को पूरा करने के लिए उत्तरदायी शासन और कुशल सार्वजनिक सेवाएं आवश्यक हैं।
हाल के वर्षों में, देश ने पीएम आवास योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र, आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, वन बंधु कल्याण योजना, आकांक्षी जिले और ब्लॉक कार्यक्रम और अन्य पहलों के माध्यम से बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच का विस्तार करने में उल्लेखनीय प्रगति की है।
सम्मेलन के दो सत्र होंगे। इन दो सत्रों में प्रतिष्ठित डोमेन विशेषज्ञों, भारत सरकार के सचिवों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के इन पहलों पर बोलने और विचार-विमर्श करने की उम्मीद है।
मानवाधिकार दिवस, जो 1950 से हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है, 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (यूडीएचआर) को अपनाने की याद में मनाया जाता है। 













 

सरकार ने 1.35 करोड़ टीबी मरीजों को पोषण सहायता के लिए 4,322 करोड़ रुपए वितरित किए: अनुप्रिया पटेल

09-Dec-2025
नई दिल्ली, ( शोर संदेश )। केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि निक्षय पोषण योजना के तहत 2018 से तपेदिक (टीबी) के 1.35 करोड़ मरीजों को कुल 4,322 करोड़ रुपए की पोषण सहायता दी गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत संचालित ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ (राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम) को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी साझा की।
पटेल ने कहा कि 1 अप्रैल 2018 से शुरू की गई निक्षय पोषण योजना का उद्देश्य टीबी मरीजों को इलाज के दौरान पोषण संबंधी सहायता उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत सभी अधिसूचित टीबी मरीजों को प्रति माह 1,000 रुपए की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है। पहले यह सहायता 500 रुपए प्रति माह थी।
उन्होंने बताया कि निक्षय मित्र पहल के तहत सितंबर 2022 से अब तक 20.3 लाख टीबी मरीजों को कुल 45.66 लाख खाद्य टोकरियां वितरित की गई हैं। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत शुरू की गई यह पहल समुदाय-संचालित है, जिसमें व्यक्ति, संस्थान और गैर-सरकारी संगठन ‘निक्षय मित्र’ के रूप में टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें पोषण, नैदानिक तथा व्यावसायिक सहायता सहित अतिरिक्त सहयोग प्रदान करते हैं। यह सहायता मरीजों को अपना इलाज पूरा करने, जेब से होने वाले खर्च को कम करने और 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मंत्री ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत एक नए दृष्टिकोण को लागू किया जा रहा है, ताकि बिना पहचाने रह जाने वाले टीबी मामलों और टीबी से होने वाली मौतों को कम किया जा सके तथा नए संक्रमणों को रोका जा सके। इस दृष्टिकोण में संवेदनशील आबादी की पहचान, सीने के एक्स-रे से जांच, सभी संदिग्ध मामलों के लिए न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (NAAT), शीघ्र और उचित उपचार की शुरुआत, उच्च जोखिम श्रेणी के मरीजों के लिए विभेदित देखभाल, पोषण सहायता और घरेलू संपर्कों व पात्र आबादी के लिए निवारक उपचार शामिल हैं। 
 

छत्तीसगढ़ के एविएशन विकास पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की दूरदर्शी पहल, प्राक्कलन समिति में रखे बड़े सुझाव

09-Dec-2025
नई दिल्ली, ( शोर संदेश )। प्राकल्लन समिति की महत्वपूर्ण बैठक में वरिष्ठ सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के एविएशन सेक्टर की व्यापक और तेज़ विकास जरूरतों को बेहद प्रभावी तरीके से सामने रखा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की योजनाओं और कार्यों की समीक्षा के दौरान, उन्होंने राज्य में हवाई संपर्क, औद्योगिक विकास और ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन को गति देने हेतु कई निर्णायक सुझाव रखे।
सांसद अग्रवाल ने रायपुर–नवा रायपुर–भिलाई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के भीतर एक बड़े ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मंत्रालय से स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ अब एक नेशनल स्टील और पावर हब के रूप में तेजी से उभर रहा है, ऐसे में राज्य के दूसरे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए अप्रूवल प्रक्रिया में जल्द-से-जल्द तेजी लाई जाए
हालांकि बिलासपुर, रायगढ़, अंबिकापुर और जगदलपुर को UDAN से जोड़ना सकारात्मक कदम है, लेकिन उन्होंने कहा कि 2025-35 के संशोधित UDAN वर्ज़न में छत्तीसगढ़ को और भी अधिक कवरेज मिलना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से आग्रह किया कि अगले बिडिंग राउंड में जगदलपुर, अंबिकापुर, बिलासपुर और रायगढ़ के लिए नई रूट्स, बेहतर सुविधाएँ और उच्च गुणवत्ता वाली सर्विसेज़ अनिवार्य रूप से शामिल हों।
मंत्रालय द्वारा 87 एयरपोर्ट्स को 100% ग्रीन एनर्जी में बदलने की उपलब्धि का स्वागत करते हुए, श्री अग्रवाल ने रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर को भी जल्द से जल्द इस सूची में शामिल करने के लिए स्पष्ट और बाध्यकारी टाइमलाइन तय करने का अनुरोध किया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट, रायपुर में एक डेडिकेटेड सोलर पावर प्लांट स्थापित करने का ठोस प्रस्ताव भी रखा।उन्होंने रायपुर एयरपोर्ट में चल रहे रीकॉन्फ़िगरेशन कार्यों को तुरंत पूरा करने और इसे AAI के ATC टावर अपग्रेडेशन प्रोग्राम में प्राथमिकता के साथ शामिल करने की आवश्यकता बताई।
"विकसित भारत 2047" के मास्टर प्लान के संदर्भ में उन्होंने रायपुर में अगले 5–10 वर्षों में यात्री संख्या बढ़ने का आकलन और इसके अनुरूप कैपेसिटी विस्तार प्रोजेक्ट्स की विस्तृत जानकारी भी मांगी।
साथ ही राजधानी क्षेत्र में एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में PPP मॉडल में प्राइवेट सेक्टर की रुचि के बारे में भी सवाल उठाए। बैठक के दौरान मंत्रालय के अधिकारियों ने भारत में एयरपोर्ट्स के समग्र विकास के अपने मूल्यांकन के तहत अग्रवाल के सुझावों को गंभीरतापूर्वक नोट किया।
 

संसद भवन के जीएमसी बालायोगी सभागृह में मंगलवार को होगी एनडीए संसदीय दल की बैठक

08-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। इस बीच मंगलवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के संसदीय दल की बैठक होगी। एनडीए संसदीय दल की बैठक कल मंगलवार सुबह 9.30 बजे शुरू होगी। यह बैठक संसद भवन के ग्रंथालय के जीएमसी बालायोगी सभागृह में होगी। भारतीय जनता पार्टी ने अपने सांसदों से बैठक में समय से उपस्थित रहने का अनुरोध किया है।
वहीं, आज सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र का आठवां दिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने पर एक खास चर्चा कर रहे हैं। बंकिम चंद्र चटर्जी के लिखे और 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में पहली बार छपे इस राष्ट्रीय गीत ने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। संसद में इस गीत के ऐतिहासिक महत्व और आज की जरूरत पर चर्चा हो रही है।
लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा की शुरुआत दोपहर 12 बजे से हुई। इस दौरान पीएम मोदी के अलावा अनुराग ठाकुर, बिप्लब देब, बांसुरी स्वराज, संबित्र पात्रा, तेजस्वी सूर्या, संतोष पांडेय, सौमित्र खान और राजनाथ सिंह चर्चा करेंगे। वंदे मातरम बहस से जुड़े शेड्यूल के मुताबिक, सत्ताधारी एनडीए सदस्यों को लोकसभा में इसके लिए तय कुल 10 घंटों में से तीन घंटे दिए गए हैं।
दरअसल, शीतकालीन सत्र शुरू होने से ठीक पहले एक राजनीतिक टकराव शुरू हो गया था, जब राज्यसभा सचिवालय ने कहा था कि सांसदों को संसद के अंदर ‘वंदे मातरम’ और ‘जय हिंद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।विपक्ष ने भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए पर भारत की आजादी और एकता के प्रतीकों से असहज होने का आरोप लगाया।
आपको बता दें, संसद का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा और आने वाले दिनों में ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा हंगामेदार रहने की संभावना है, क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राष्ट्रगीत को लेकर अलग-अलग राय है।














 

लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा- ‘बंकिम दा ने हीन भावना को झकझोरा’

08-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) 18वीं लोकसभा के शीतकालीन सत्र के 8वें दिन सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह केवल एक गीत या राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम और मातृभूमि की आजादी के लिए एक पवित्र संघर्ष का प्रतीक था।
पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा, “बंकिम दा ने जब ‘वंदे मातरम्’ की रचना की तब स्वाभाविक ही वह स्वतंत्रता आंदोलन का पर्व बन गया। तब पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण, ‘वंदे मातरम्’ हर भारतीय का संकल्प बन गया। इसलिए वंदे मातरम् की स्तुति में लिखा गया था कि मातृभूमि की स्वतंत्रता की वेदी पर, मोद में स्वार्थ का बलिदान है। यह शब्द ‘वंदे मातरम्’ है। सजीवन मंत्र भी, विजय का विस्तृत मंत्र भी। यह शक्ति का आह्वान है। यह ‘वंदे मातरम्’ है। उष्ण शोणित से लिखो, वत्स स्थली को चीरकर वीर का अभिमान है। यह शब्द ‘वंदे मातरम्’ है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि ‘वंदे मातरम्’ उस समय लिखा गया था, जब 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार सतर्क थी और हर स्तर पर दबाव और अत्याचार की नीतियां लागू कर रही थी। उस दौर में ब्रिटिश राष्ट्रगान ‘गॉड सेव द क्वीन’ को हर घर तक पहुंचाने की मुहिम चल रही थी। ऐसे समय में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपनी लेखनी से जवाब देते हुए ‘वंदे मातरम्’ लिखा और भारतीयों में साहस और आत्मविश्वास की नई लहर पैदा की।
प्रधानमंत्री ने कहा, “जब हम ‘वंदे मातरम्’ कहते हैं, तो यह हमें वैदिक युग की संस्कृति की याद दिलाता है। वेदों में कहा गया है कि माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः, अर्थात यह भूमि मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूं। यही विचार भगवान राम ने भी व्यक्त किया था, जब उन्होंने कहा कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। आज ‘वंदे मातरम्’ इसी महान सांस्कृतिक परंपरा का आधुनिक रूप है।”
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् केवल अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई का मंत्र नहीं था, बल्कि यह मातृभूमि की मुक्ति की पवित्र जंग का प्रतीक था। यह गीत उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के साहस और बलिदान का सम्मान करता है जिन्होंने इसे अपने आंदोलन का हिस्सा बनाया।
प्रधानमंत्री ने सदन में सभी सांसदों से कहा कि इस अवसर पर पक्ष-प्रतिपक्ष का कोई भेदभाव नहीं है, क्योंकि यह समय है ‘वंदे मातरम्’ के ऋण को स्वीकार करने का, जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने बलिदानों से पूरा किया। उन्होंने याद दिलाया कि आज भारत में जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और आजादी है, वह इसी आंदोलन का परिणाम है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “संसद में बैठे सभी सांसदों के लिए यह अवसर है कि वे इस ऋण को स्वीकार करें और उस पवित्र संघर्ष को याद करें, जिसने हमारी मातृभूमि को स्वतंत्र कराया।” 





























 

ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भारत ने की मदद, श्रीलंका ने किया धन्यवाद

08-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  दितवाह तूफान की वजह से श्रीलंका में भारी तबाही और जानमाल नुकसान हुआ है। इस बीच भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत राहत के लिए मानवीय मदद पहुंचाई है। श्रीलंका ने भारत का मदद के लिए धन्यवाद किया है। श्रीलंका के सांसद नमल राजपक्षे ने भारत के हाई कमिश्नर संतोष झा से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान श्रीलंकाई सांसद नमल राजपक्षे ने राहत और बचाव ऑपरेशन के लिए शुक्रिया अदा किया।
कोलंबो में भारतीय हाई कमीशन ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सांसद नमल राजपक्षे ने हाई कमिश्नर संतोष झा से मुलाकात की और ऑपरेशन सागर बंधु के तहत चल रहे राहत और बचाव के कामों के लिए भारत को धन्यवाद दिया। हाई कमिश्नर ने दोहराया कि भारत श्रीलंका के लोगों को फिर से स्थापित करने और सब सामान्य करने की उनकी कोशिशों में मदद करता रहेगा।”
मीटिंग के बाद, राजपक्षे ने एक्स पर लिखा, “श्रीलंका में बाढ़ के दौरान भारत की तेजी से मदद के लिए दिल से धन्यवाद देने के लिए भारतीय हाई कमिश्नर संतोष झा से बात की। मुश्किल समय में हमेशा सबसे पहले हमारा साथ देने भारत रहा है। भारत सरकार और लोगों का शुक्रगुजार हूं।”
इससे पहले रविवार को, भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत दित्वाह से प्रभावित श्रीलंका को लगभग 1000 टन अतिरिक्त मदद भेजी, जिसमें जरूरी खाने का सामान और कपड़े शामिल थे। इनमें से लगभग 300 टन तीन भारतीय नौसेना जहाजों के जरिए कोलंबो पहुंचा।
हाई कमिश्नर संतोष झा ने राहत सामग्री श्रीलंका के व्यापार, कॉमर्स, फूड सुरक्षा और सहयोग विकास मंत्री वसंथा समरसिंघे को सौंपी। भारतीय सेना ने श्रीलंकाई आर्मी के साथ मिलकर कनेक्टिविटी फिर से बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। भारतीय सेना के इंजीनियरों ने श्रीलंकाई आर्मी के इंजीनियरों और सड़क विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर किलिनोच्ची जिले में परांथन-कराच्ची-मुल्लैतिवु (ए35) रोड पर क्षतिग्रस्त पुल को हटाना शुरू किया। 
 


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