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पीएम मोदी ने भांडुप बस दुर्घटना में हुई जनहानि पर शोक व्यक्त किया

30-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज मंगलवार को मुंबई के भांडुप में हुई दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने एक्स पर कहा कि मुंबई के भांडुप में दुर्घटना में हुई जनहानि से मन को अत्‍यंत पीड़ा हुई है।
पीएमओ इंडिया की एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा कि मुंबई के भांडुप में दुर्घटना में हुई जनहानि से मन को अत्‍यंत पीड़ा हुई है। अपने परिजनों को खोने वाले सभी लोगों के प्रति मेरी संवेदनाएं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं ।
कल सोमवार रात उत्तर-पूर्वी मुंबई के भांडुप वेस्ट में भीड़भाड़ वाली स्टेशन रोड पर एक बीईएसटी (बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट) बस ने पैदल चलने वालों को कुचल दिया। इस हादसे में कुछ लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। पुलिस के मुताबिक, बस रिवर्स करते समय बेकाबू हो गई और पास खड़े पैदल चलने वालों से टकरा गई।
मौके पर मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि बस पटरी से उतरने और सड़क पर चल रहे पैदल चलने वालों को टक्कर मारने से कुछ देर पहले तेज रफ़्तार में थी। पुलिस ने कहा कि जांच के तहत इन दावों की पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों ने हादसे की वजह बनने वाली घटनाओं के क्रम का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या कोई मैकेनिकल खराबी या अन्य कारण शामिल थे। घटना की जांच की जा रही है।
वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भांडुप बस हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों को पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की और कहा कि मैं भगवान से उनके जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।

















 

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2014 से 2025 तक देश ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई : अमित शाह

29-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘युवा बिजनेस महासम्मेलन- 2025’ में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 2014 से 2025 तक देश ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश के युवाओं के लिए ढेर सारे अवसर उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में जब प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश का नेतृत्व संभाला उस समय हम विश्व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थे, और 2014 से 2025 के 11 साल में ही हम 11वें से विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं। शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि 2027 तक हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कल रविवार को अहमदाबाद, गुजरात में विश्व उमिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘युवा बिजनेस महासम्मेलन- 2025’ को संबोधित किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विश्व उमिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित युवा बिजनेस महासम्मेलन – 2025 में करीब 15 हजार युवा इकट्ठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज यहां विश्व उमिया फाउंडेशन के एक ऐप का भी उद्घाटन हुआ है, जिसके माध्यम से गुजरात सरकार ने बेहद प्रोफेशनल तरीके से पाटीदार समाज के युवाओं के लिए बिज़नेस के संरक्षण, संवर्धन और वृद्धि के लिए सारी जरूरते पूरी करने का प्रयास किया है।
अमित शाह ने कहा कि आज के युग में इनफार्मेशन बहुत बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि बेशक मन में उमंग, उत्साह, क्षमता हो, लेकिन अगर मार्गदर्शन न हो तो काफी दिक्कतें होती हैं। आज इस कार्यक्रम में समाज एकत्र हुआ है, समाज की शिक्षा की चिंता करनेवाला संगठन भी उपस्थित है और गुजरात व देश के अर्थतंत्र को गति देने का उद्देश्य भी है। शाह ने कहा कि मां उमिया का मंदिर सनातन धर्म का ऐसा केन्द्र बनने वाला है, जिसने संस्कृति को भी जमीन पर उतारा है। एक ही स्थान पर समाज, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि आज इस कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को तकनीकी एक्सपोजर का मौका मिलेगा। आज लॉन्च हुए ऐप के माध्यम से क्लाइंट, मेन्टोर, करियर, ऑपरचुनिटी और मार्केट के बीच सीधा संपर्क हो जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि उमिया फाउंडेशन की स्थापना 16 दिसंबर, 2016 को हुई थी और तब से आज तक निरंतर इसका काम आगे बढ़ा है। उमिया फाउंडेशन ने मां उमिया के प्रति गुजरात और गुजरात के बाहर सभी लोगों में असीम श्रद्धा जगाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि पाटीदार समाज और पूरे गुजरात को मां उमिया के तहत एकत्र होकर सनातन धर्म की मजबूत धरोहर और शाखा बनाने के लिए उमिया फाउंडेशन ने बहुत सुंदर कार्य किया है। शाह ने कहा कि फाउंडेशन ने सैंकड़ों युवाओं को छात्रवृत्ति देकर उच्च शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की ओर आगे बढ़ाने, विकास और प्रकृति के संतुलन के लिए वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाने और समाज को एक सूत्र में बांधने के लिए प्रशंसनीय पुरुषार्थ किया है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने आगे कहा कि कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने युवाओं के विकास के लिए स्टार्टअप इंडिया, स्टेन्ड अप इंडिया, मुद्रा योजना, वोकल फोर लोकल और लोकल फोर ग्लोबल तक की चैन तैयार की है। शाह ने कहा कि 2014 में पूरे देश में स्टार्टअप की संख्या 500 थी, आज यह 2 लाख 6 हजार हो चुकी है। इन 2.06 लाख स्टार्टअप्स के माध्यम से आज 18 लाख स्थायी रोजगार सर्जन हुआ और लाखों लोगों को अस्थायी रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि 2014 में 500 में से चार युनिकॉर्न स्टार्टअप्स भारत में थे, आज देश में 120 युनिकॉर्न स्टार्टअप्स हैं।
अमित शाह ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि 2047 में जब देश की आज़ादी का शताब्दी उत्सव मनाया जाए तब पूरे विश्व में भारत नंबर एक पर हो। ऐसे भारत की रचना करने के लिए दो कार्य बहुत महत्त्वपूर्ण मुद्दे है -पहला आत्मनिर्भर भारत और दूसरा स्वदेशी का आग्रह। अगर हमने इन्हें पूरा कर लिया तो हमें दुनिया में हर क्षेत्र में नंबर एक पर पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में भारत के उत्पादों का निर्यात हो और भारत देश में बनी चीजों का इस्तेमाल करें तो भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बहुत फायदा होगा। 

 

भारतीय नौसेना हर खतरे से निपटने को तैयार: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

29-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पश्चिमी तट पर स्वदेशी पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर पर सवार होकर समुद्री भ्रमण किया। इस दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी भी उनके साथ मौजूद थे।
रविवार को कर्नाटक के कारवार स्थित नौसेना बंदरगाह से राष्ट्रपति पनडुब्बी पर सवार हुईं और दो घंटे से अधिक समय तक समुद्री यात्रा की। भ्रमण के दौरान उन्होंने पनडुब्बी के चालक दल से बातचीत की और विभिन्न ऑपरेशनल प्रदर्शनों का अवलोकन किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के बाद पनडुब्बी में यात्रा करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति हैं। राष्ट्रपति भवन के अनुसार, स्वदेशी कालवरी श्रेणी की पनडुब्बी पर यह पहली यात्रा सैन्य परिचालन परिस्थितियों में सशस्त्र बलों के साथ सर्वोच्च कमांडर की निरंतर सहभागिता को दर्शाती है। इससे पहले नवंबर 2024 में राष्ट्रपति ने स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर भारतीय नौसेना द्वारा किए गए एक परिचालन प्रदर्शन को भी देखा था।
राष्ट्रपति ने आगंतुक पुस्तिका में अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा कि आईएनएस वाघशीर पर नाविकों और अधिकारियों के साथ नौकायन, गोताखोरी और समय बिताना उनके लिए एक अत्यंत विशेष अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि आईएनएस वाघशीर द्वारा सफलतापूर्वक पूरे किए गए अनेक परीक्षण और चुनौतीपूर्ण अभियान चालक दल की असाधारण तत्परता और समर्पण को दर्शाते हैं, जो इसके आदर्श वाक्य ‘वीरतापूर्ण विजय’ के अनुरूप है।
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि वाघशीर के चालक दल का अनुशासन, आत्मविश्वास और उत्साह यह सिद्ध करता है कि भारतीय नौसेना और उसकी पनडुब्बियां किसी भी खतरे और हर परिस्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 

















 

यूपी में शीतलहर का कहर, पहली जनवरी तक बंद रहेंगे 12वीं तक के स्कूल

29-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) उत्तर प्रदेश में बढ़ती ठंड और भीषण शीतलहर को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत राज्य के सभी स्कूलों को पहली जनवरी तक बंद रखने, रैन बसेरों और अलाव की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने और क्षेत्र में लगातार निगरानी रखने की हिदायत दी गई है।
सीएम योगी ने कहा कि मौसम की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए राज्य के सभी आईसीएसई, सीबीएसई और यूपी बोर्ड के स्कूलों को 12वीं कक्षा तक 1 जनवरी तक बंद रखा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ठंड से लोगों को बचाने के लिए हर संभव कदम उठाएं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी कहा कि सभी जनपदों में कंबल और अलाव की व्यवस्था पूरी तरह सुनिश्चित की जाए, ताकि जरूरतमंद लोग सुरक्षित रह सकें। उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति खुले में न सोए और यदि कोई जरूरतमंद हो तो उसे रैन बसेरों में सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए।
सीएम योगी ने अधिकारियों को आदेश दिया कि वे शीतलहर के दौरान लगातार क्षेत्र में भ्रमणशील रहें, ताकि किसी भी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके और लोगों को मदद मिलती रहे।
अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि सभी रैन बसेरों में पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और किसी भी परिस्थिति में जनता को ठंड से बचाने के लिए तत्पर रहें। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और ठंड के इस मौसम में कोई भी जोखिम न उठाया जाए।
सीएम योगी ने कहा कि 25 करोड़ प्रदेशवासियों की सेवा और सुरक्षा हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। शीतलहर से बचाव के लिए सरकार ने सभी जनपदों में रैन बसेरों की व्यवस्था और जरूरतमंदों को कंबल वितरण हेतु पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई है।
उन्होंने बताया कि कल रविवार को गोरखपुर महानगर के ट्रांसपोर्ट नगर और धर्मशाला बाजार क्षेत्र में रैन बसेरों का निरीक्षण किया गया और जरूरतमंदों को भोजन व कंबल वितरित किए गए। 


 

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ऐतिहासिक उड़ान: वर्ष 2025 में MoD की बड़ी उपलब्धियाँ

29-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) रक्षा मंत्रालय (MoD) के लिए वर्ष 2025 बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने देश को मजबूत, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और समावेशी बनाने के लक्ष्य की दिशा में बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और सशस्त्र बलों को आधुनिक बनाने के प्रयासों को नई गति मिली। इसके परिणामस्वरूप भारत ने अब तक का सबसे अधिक रक्षा उत्पादन किया और रक्षा निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में मंत्रालय ने सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और पूर्व सैनिकों के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया। इन सभी क्षेत्रों में तेज़ी और प्रभावी ढंग से काम हुआ। वर्ष 2025 की प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में रक्षा मंत्रालय (MoD) के लिए 6,81,210.27 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह बजट वित्त वर्ष 2024-25 के बजटीय अनुमान से 9.53 प्रतिशत अधिक है और कुल केंद्रीय बजट का 13.45 प्रतिशत हिस्सा बनता है, जो सभी मंत्रालयों में सर्वाधिक है।
सरकार ने वर्ष 2025-26 को ‘सुधार वर्ष’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य रक्षा खरीद प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। इस पहल के माध्यम से सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण को गति मिलेगी और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर व अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे रक्षा क्षेत्र में कार्यकुशलता बढ़ेगी और देश की सुरक्षा क्षमताएं और मजबूत होंगी। साथ ही रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाना और 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करना है।  
रक्षा सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने पूंजीगत परिव्यय के तहत 1,80,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष से 4.65 प्रतिशत अधिक है।
इसमें से 1,48,722.80 करोड़ रुपये सशस्त्र बलों के लिए नए हथियार, उपकरण और तकनीक खरीदने पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 31,277.20 करोड़ रुपये अनुसंधान, विकास और बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए रखे गए हैं।
‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत आधुनिकीकरण बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा घरेलू स्रोतों से खरीद के लिए तय किया गया है। इसमें से 25 प्रतिशत घरेलू निजी उद्योगों से लिया जाएगा। इससे रक्षा उत्पादन, रोजगार के अवसर और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
सशस्त्र बलों के वेतन, भत्तों और रखरखाव के लिए 3,11,732.30 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.24 प्रतिशत अधिक है।
इसमें से 1,14,415.50 करोड़ रुपये गैर-वेतन खर्च के लिए रखे गए हैं, जिससे ईंधन, राशन, उपकरणों के रखरखाव और सेना की परिचालन तैयारियों को मजबूत किया जा सकेगा।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) का बजट बढ़ाकर 26,816.82 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो 12.41 प्रतिशत की वृद्धि है।
इसके अलावा, रक्षा क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए आईडेक्स योजना के तहत 449.62 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिससे स्टार्ट-अप और नई तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा।
पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए ईसीएचएस योजना के तहत 8,317 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
रक्षा पेंशन के लिए 1.61 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष से 13.87 प्रतिशत अधिक है। इससे लगभग 34 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा।
भारतीय तटरक्षक बल के लिए 9,676.70 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें पूंजीगत खर्च में 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी शामिल है।
वहीं, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को 7,146.50 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिससे सीमावर्ती इलाकों में सड़क, सुरंग और पुल निर्माण कार्य तेजी से पूरे किए जा सकेंगे।  
उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो समर्पित रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित किए गए हैं। इन गलियारों ने 8,658 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित किया है। फरवरी 2025 तक 53,439 करोड़ रुपए अनुमानित निवेश क्षमता वाले 253 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों राज्यों में 11 ईकायों में फैले ये केंद्र भारत को रक्षा विनिर्माण महाशक्ति बनाने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और प्रोत्साहन प्रदान कर रहे हैं। 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दशक में आरंभ किए गए नीतिगत सुधारों से पहले भारत का रक्षा क्षेत्र अनेक संरचनात्मक चुनौतियों से जूझ रहा था। रक्षा खरीद प्रक्रियाएं अत्यंत धीमी थीं, जिसके कारण आवश्यक क्षमताओं में गंभीर परेशानियां उत्पन्न हो रही थीं। अत्यधिक आयात निर्भरता ने न केवल देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ाया, बल्कि वैश्विक अस्थिरता के समय भारत की सामरिक कमजोरियों को भी उजागर किया। इससे पहले, प्रतिबंधात्मक नीतियों, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के वर्चस्व और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी तक सीमित पहुंच के कारण निजी क्षेत्र की भागीदारी नगण्य थी। परिणामस्वरूप, रक्षा निर्यात का स्तर अत्यंत निम्न रहा था। 
सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए एक आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी रक्षा उद्योग के निर्माण हेतु कई सुधार शुरू किए हैं। इनके प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:
सुव्यवस्थित रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) के माध्यम से खरीद प्रक्रियाओं में गति लाना, जिससे आवश्यक स्वीकृति प्राप्त होने पर रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) द्वारा अधिग्रहण को शीघ्र अनुमोदन मिल सके।
सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची के माध्यम से देश में रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहित किया गया है। साथ ही, 74% तक स्वचालित मार्ग और 100% तक सरकारी अनुमोदन मार्ग के तहत एफडीआई मानदंडों में उदारता लाई गई है। इसके अतिरिक्त, 1 लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) योजना के माध्यम से डीपीएसयू, निजी क्षेत्र, एमएसएमई और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को सुदृढ़ किया जा रहा है, जिससे रक्षा प्रौद्योगिकी और आत्मनिर्भरता को नई गति मिल रही है।
सरलीकृत लाइसेंसिंग के साथ रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना, जिसमें बुलेटप्रूफ जैकेट, डोर्नियर विमान, चेतक हेलीकॉप्टर, तेज गति के इंटरसेप्टर नौकाएं और हल्के वजन वाले टारपीडो जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
साल 2025 को ‘सुधारों का वर्ष’ घोषित किया गया है। इन गतिविधियों का उद्देश्य सशस्त्र बलों को तकनीकी रूप से उन्नत, युद्ध के लिए तैयार बल में बदलना है, जो बहु-डोमेन एकीकृत संचालन में सक्षम हो। साथ ही रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाना और 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करना है।
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) में सुधार
भारत सरकार ने आत्मनिर्भर देश के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए रक्षा खरीद पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव लाने के लिए कई ऐतिहासिक सुधार किए हैं। रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 और रक्षा खरीद नियमावली (डीपीएम) 2025 जैसे दोनों ढांचे मिलकर इस परिवर्तन की मेरुदंड के रूप में कार्य कर रहे हैं, जो पूंजीगत तथा राजस्व खरीद दोनों में गति, पारदर्शिता, नवाचार एवं आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करते हैं। 
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 एक परिवर्तनकारी नीतिगत ढांचा है, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी घरेलू रक्षा उद्योग के विकास को प्रोत्साहित करते हुए अधिग्रहण प्रक्रिया के आधुनिकीकरण के लिए एक व्यापक नियम-पुस्तिका तथा रणनीतिक रोडमैप के रूप में कार्य करती है। यह नीति देरी तथा आयात पर रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 एक परिवर्तनकारी नीतिगत ढांचा है, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी घरेलू रक्षा उद्योग के विकास को प्रोत्साहित करते हुए अधिग्रहण प्रक्रिया के आधुनिकीकरण के लिए एक व्यापक नियम-पुस्तिका तथा रणनीतिक रोडमैप के रूप में कार्य करती है। यह नीति देरी तथा आयात पर अत्यधिक निर्भरता जैसी पुरानी चुनौतियों को दूर करने हेतु तैयार की गई है और अधिग्रहण के प्रत्येक चरण में स्पष्टता, पारदर्शिता एवं स्वदेशी नवाचार को केंद्र में रखती है।
भारत के रणनीतिक सहयोग और मजबूत नीतिगत फैसले केवल सुधार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे रक्षा आत्मनिर्भरता और तकनीकी स्वतंत्रता की दिशा में एक नए दौर की नींव रख रहे हैं। घरेलू रक्षा उत्पादन और निर्यात में लगातार बढ़ोतरी, साथ ही आधुनिक तकनीकों का तेजी से औद्योगिक ढांचे में शामिल होना, इस क्षेत्र में भारत की प्रगति को साफ तौर पर दिखाता है। आज भारत का एक वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने का सपना अब दूर नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे हकीकत बनता जा रहा है।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन के मूल्य में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान, स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने वाली नीतियों और निजी क्षेत्र के साथ मजबूत साझेदारी का परिणाम है। ‘मेक इन इंडिया’ पर विशेष जोर, मजबूत अनुसंधान एवं विकास व्यवस्था और उभरते स्टार्ट-अप इकोसिस्टम ने इस बदलाव को और तेज किया है।
रक्षा औद्योगिक गलियारों की स्थापना से लेकर रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने तक, सरकार के हर कदम का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और देश की स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत बनाना है। ये सभी प्रयास मिलकर एक ऐसा आधुनिक और तकनीक-आधारित रक्षा तंत्र तैयार कर रहे हैं, जो न केवल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि देश को रक्षा निर्माण और नवाचार के क्षेत्र में एक भरोसेमंद वैश्विक भागीदार के रूप में स्थापित कर रहा है।
 

कोहरे की वजह से IGI एयरपोर्ट पर 128 फ्लाइट रद्द, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

29-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  दिल्ली-एनसीआर समेत लगभग पूरे उत्तर भारत को घने कोहरे ने अपनी चपेट में ले लिया है। विजिबिलिटी कम होने से ट्रेन के साथ-साथ फ्लाइट्स भी देरी से चल रही हैं। इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आज सोमवार को कुल 128 उड़ानें रद्द हुई हैं। इसके चलते यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है।
दिल्ली एयरपोर्ट ने कहा कि घने कोहरे के कारण फिलहाल फ्लाइट ऑपरेशन सीएटी-3 स्थितियों में किए जा रहे हैं, जिससे उड़ानों में देरी हो सकती है या उन्हें रद्द किया जा सकता है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “हमारी ग्राउंड टीमें मौके पर मौजूद हैं और यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव देने के लिए उनकी पूरी मदद कर रही हैं।”
घने कोहरे के कारण इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानों का शेड्यूल बुरी तरह प्रभावित हुआ है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट आईएक्स1221, जो गोवा से दिल्ली आ रही थी, विजिबिलिटी कम होने के चलते अहमदाबाद डायवर्ट कर दी गई। यह फ्लाइट रात 11:55 बजे गोवा के मोपा एयरपोर्ट से रवाना हुई थी और 2:35 बजे दिल्ली पहुंचनी थी, लेकिन 4:07 बजे अहमदाबाद उतरी है। क्रू की ड्यूटी लिमिटेशन पूरी होने के कारण यात्रियों को अब दोपहर 12:30 बजे तक इंतजार करना होगा।
इसके साथ ही इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कुल 128 उड़ानें रद्द हुई हैं, जिनमें 64 आने वाली हैं और 64 ही जाने वाली हैं। इसके साथ ही 8 डायवर्ट हैं और 30 से अधिक देरी से चल रही हैं।
एयरलाइंस ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा से पहले फ्लाइट स्टेटस चेक करें और अतिरिक्त समय लेकर एयरपोर्ट पहुंचें। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटे तक कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है।
वहीं, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने एक बयान में कहा, “कोहरे के कारण उत्तर भारत में चुनिंदा एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी कम है, जिससे फ्लाइट शेड्यूल प्रभावित हो सकते हैं। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे फ्लाइट अपडेट के लिए आधिकारिक संचार चैनलों के माध्यम से अपनी संबंधित एयरलाइंस के संपर्क में रहें और एयरपोर्ट पर पहुंचने व चेक-इन प्रक्रियाओं के लिए अतिरिक्त समय देकर अपनी यात्रा की योजना बनाएं।”
















 

भाषा-संस्कृति और परंपरा का संरक्षण जरूरी : राष्ट्रपति मुर्मु

29-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज सोमवार को पूर्वी सिंहभूम जिले के करनडीह स्थित आदिवासी पूजास्थल ‘दिशोम जाहेरथान’ परिसर में संथाली भाषा की ओलचिकी लिपि के शताब्दी समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए परंपरागत ज्ञान, संस्कृति और अस्मिता को संरक्षित रखने का आह्वान किया। उन्होंने ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मु को श्रद्धांजलि अर्पित की।
अपने संबोधन से पहले राष्ट्रपति मुर्मु ने संथाली भाषा में करीब तीन मिनट तक पारंपरिक ‘नेहोर गीत’ गाया। उन्होंने कहा कि यह प्रार्थना गीत उन्होंने बचपन में सीखा था, जिसमें ‘जाहेर आयो’ (प्रकृति माता) से समाज को सदैव उजाले के मार्ग पर ले जाने की कामना की गई है।
ऑल इंडिया संथाली राइटर्स एसोसिएशन और दिशोम जाहेरथान कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने संथाली भाषा में पूरा संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना उनके लिए भावनात्मक क्षण है, जहां अपने लोगों का प्रेम और इष्टदेवों का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ है।
आदिवासी समाज के स्वाभिमान और अस्तित्व की रक्षा में संथाली लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आप अपने दैनिक जीवन से समय निकालकर ओल चिकी लिपि और संथाली भाषा के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं और ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मु के अधूरे सपनों को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर भारत सरकार की ओर से ओलचिकी लिपि में संविधान के प्रकाशन को संथाली समाज को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि संथाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने के बाद यह आवश्यक है कि देश के नियम-कानून और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जानकारी संथाली भाषा में समाज के लोगों तक पहुंचे। समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु ने संथाली भाषा और ओलचिकी लिपि के उत्थान में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 12 लोगों को सम्मानित किया।
समारोह को राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी संबोधित किया। राज्यपाल ने कहा कि राजभवन के द्वार आम लोगों के लिए सदैव खुले हैं और आदिवासियों के विकास से जुड़े हर प्रयास में राज्यपाल भवन सहयोग करेगा। मुख्यमंत्री सोरेन ने भी संथाली भाषा, संस्कृति और आदिवासी पहचान के संरक्षण के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। 

 

अमित शाह का तीन दिवसीय बंगाल दौरा आज से, चुनावी तैयारियों का लेंगे जायजा

29-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार रात से पश्चिम बंगाल के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह अगले साल राज्य में होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी की तैयारियों की समीक्षा करेंगे।
अमित शाह सोमवार शाम कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके तुरंत बाद वह भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई की कोर टीम के साथ बंद कमरे में बैठक करेंगे, जिसमें चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक स्थिति पर चर्चा की जाएगी।
राज्य समिति के एक सदस्य के अनुसार, गृह मंत्री पार्टी की संगठनात्मक मजबूती की समीक्षा के साथ-साथ भाजपा की राज्य समिति के गठन को लेकर अंतिम सुझाव भी दे सकते हैं। इसके अलावा, वह राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े संवेदनशील मुद्दों से निपटने के लिए एक स्पष्ट रणनीति तय कर सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की समग्र कैंपेन रणनीति की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। इसमें उन प्रमुख मुद्दों को चिह्नित किया जाएगा, जिन्हें चुनाव के दौरान जनता के बीच प्रमुखता से उठाया जाना है।
नए साल के माहौल को देखते हुए अमित शाह अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान किसी भी सार्वजनिक रैली, रोड शो या जनसभा को संबोधित नहीं करेंगे। 30 दिसंबर को केंद्रीय गृह मंत्री मीडिया से बातचीत करेंगे। इसके अलावा वह मध्य कोलकाता स्थित इस्कॉन मंदिर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यालय का दौरा करेंगे, जहां वे संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
अपने दौरे के अंतिम दिन 31 दिसंबर को अमित शाह कोलकाता में आयोजित एक कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करेंगे, जिसका उद्देश्य पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह और ऊर्जा का संचार करना है। इसके बाद वह 31 दिसंबर की शाम नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। 









 

बांग्लादेश में हो रही हिंसक घटनाओं पर भारत की नजर, विदेश मंत्रालय ने बताया गंभीर चिंता का विषय

27-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारत ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बांग्लादेश में हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों के खिलाफ “अविराम शत्रुता” एक गंभीर विषय है और भारत वहां के हालात पर करीब से नजर बनाए हुए है।
शुक्रवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत मयमनसिंह में एक हिंदू युवक की हत्या की कड़ी निंदा करता है और उम्मीद करता है कि इस जघन्य अपराध के दोषियों को न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान अल्पसंख्यकों के खिलाफ 2,900 से अधिक हिंसक घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें हत्या, आगजनी और जमीन पर कब्जे जैसी घटनाएं शामिल हैं।
जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि इन घटनाओं को मीडिया की अति शयोक्ति या केवल राजनीतिक हिंसा बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने बांग्लादेश में भारत विरोधी “झूठे नैरेटिव” को भी सिरे से खारिज किया और कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी है।
इस बीच, बांग्लादेशी मीडिया ने गुरुवार को एक और हिंदू युवक(29 वर्षीय अमृत मंडल) की हत्या की खबर दी। बताया गया कि बुधवार देर रात उन्हें भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। इससे पहले 18 दिसंबर को 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की झूठे ईशनिंदा आरोपों के बाद भीड़ द्वारा नृशंस हत्या कर दी गई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और बांग्लादेशी अधिकारियों के संपर्क में है। भारत ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा दी जाए।
इससे पहले 17 दिसंबर को भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह को तलब कर वहां की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। मंत्रालय ने यह भी चिंता जताई कि कुछ चरमपंथी तत्व ढाका स्थित भारतीय मिशन के आसपास सुरक्षा संकट पैदा करने की योजना बना रहे हैं। भारत ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से अपील की है कि वह अपनी कूटनीतिक जिम्मेदारियों के तहत भारतीय मिशनों और प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।





 

गुजरात: राजनाथ सिंह ने आदिवासी महिलाओं को रोजगार से जोड़ने वाले सेंटर का किया उद्घाटन

27-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार को गुजरात के वलसाड जिले के धरमपुर पहुंचे। यहां उन्होंने श्रीमद राजचंद्र सर्वमंगल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वूमेन का विधिवत उद्घाटन किया। यह विशेष केंद्र खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में रहने वाली महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
उद्घाटन के दौरान राजनाथ सिंह ने श्रीमद राजचंद्र मिशन आश्रम की विभिन्न सामाजिक और सेवा गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने आदिवासी महिलाओं की आजीविका, कौशल विकास और सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की खूब सराहना की।
मिशन द्वारा संचालित कार्यक्रमों में महिलाओं को प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर और स्वरोजगार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे क्षेत्र में गरीबी और बेरोजगारी कम हो रही है। श्रीमद राजचंद्र मिशन धरमपुर ने राजनाथ सिंह के आगमन पर उनका स्वागत किया। आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल से पोस्ट कर बताया गया, “श्रीमद राजचंद्र मिशन धरमपुर हमारे रक्षा मंत्री राजनाथ का धरमपुर में विनम्रतापूर्वक स्वागत करता है। पूज्य गुरुदेव श्री राकेशजी की पवित्र उपस्थिति में श्रीमद राजचंद्र सर्वमंगल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर विमेन का उद्घाटन महिलाओं के लिए गरिमा, आत्मनिर्भरता और स्थायी आजीविका को बनाए रखते हुए सार्थक सामाजिक परिवर्तन के माध्यम से आध्यात्मिक जागृति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
एक अन्य पोस्ट में लिखा, “राजनाथ सिंह ने पूज्य गुरुदेव राकेशजी की पवित्र उपस्थिति में धरमपुर में श्रीमद राजचंद्र सर्वमंगल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर विमेन का उद्घाटन किया। यह सेंटर 11 एकड़ में बना अपनी तरह का एक अनोखा इंटीग्रेटेड अत्याधुनिक कैंपस है। यह ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का एक परिवर्तनकारी मॉडल प्रस्तुत करता है, जो आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाओं को दूर करने के लिए एकीकृत सहायता प्रदान करता है।”
उन्होंने लिखा, “सार्वभौमिक भाईचारे पर उनकी शिक्षाओं और दुनियाभर में लाखों लोगों के दुख को कम करने में उनके प्रभाव का सम्मान करते हुए राजनाथ सिंह ने गुरुदेव राकेशजी की पवित्र उपस्थिति में श्रीमद राजचंद्रजी को नमन किया, जिनकी मूर्ति श्रीमद राजचंद्र सर्वमंगल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर विमेन के परिसर की शोभा बढ़ाती है।”


 


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