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प्रयागराज में माघ मेला-2026 का भव्य शुभारंभ, स्नान पर्व में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

03-Jan-2026
प्रयागराज में शुक्रवार को माघ मेला-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। संगम तट की ओर तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया, जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगाकर लोगों ने पुण्य लाभ अर्जित किया। पहले ही दिन मेले क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। इस दौरान प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया।
माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि तक चलेगा। इस दौरान कई प्रमुख स्नान पर्व और धार्मिक आयोजन होंगे। पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने व्यापक तैयारियां की थीं, जिनका असर जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दिया।
मेले की सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व बताई जा रही है। पूरे मेला क्षेत्र में 400 से अधिक एआई-इनेबल्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके जरिए हर गतिविधि पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। इसके अलावा ड्रोन के माध्यम से भी भीड़ और यातायात की लगातार निगरानी की जा रही है। जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के गोताखोरों को संगम और आसपास के घाटों पर तैनात किया गया है। किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए एटीएस, बम डिस्पोजल स्क्वॉड (बीडीएस) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की भी तैनाती की गई है। मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों में बांटकर पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजय पाल शर्मा ने बताया कि माघ मेला 2026 के पहले बड़े स्नान पर्व को लेकर सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर खास इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, आज माघ मेला 2026 का पहला बड़ा स्नान पर्व है। इसे देखते हुए इलाके की निगरानी के लिए ड्रोन, एआई-इनेबल्ड कैमरे और एआई-आधारित सिस्टम लगाए गए हैं, जिनके जरिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। हमारी ट्रैफिक और सुरक्षा टीमें जमीन पर मौजूद हैं ताकि सब कुछ सुचारू रूप से चलता रहे।
उन्होंने आगे बताया कि सभी पुलिसकर्मियों को एक महीने से अधिक समय तक विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़ी तमाम तरह की ट्रेनिंग पहले ही पूरी कर ली गई थी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए हर जगह हमारी टीमें तैनात हैं और सभी श्रद्धालु सुगमता के साथ स्नान कर वापस जा रहे हैं।
 

दिल्ली शब्दोत्सव 2026’ का आज होगा उद्घाटन, सीएम रेखा गुप्ता समेत अजीत डोभाल भी होंगे शामिल

02-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) तीन दिवसीय भारतीय साहित्यिक और सांस्कृतिक उत्सव “दिल्ली शब्दोत्सव 2026” का उद्घाटन समारोह आज शुक्रवार को नेशनल स्टेडियम में होगा, जिसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौजूद रहेंगी। दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।
इससे पहले, 29 दिसंबर को इवेंट के पोस्टर लॉन्च के बाद, सीएमआज गुप्ता को कला और संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने इवेंट के शेड्यूल और दूसरी संबंधित कैंपेन एक्टिविटीज के बारे में बताया।
सीएम गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “‘दिल्ली शब्दोत्सव’ कार्यक्रम के पोस्टर लॉन्च के बाद, कैबिनेट सहयोगी कपिल मिश्रा के नेतृत्व में आयोजकों की टीम मिली।”
दिल्ली सीएम ने आगे लिखा, “2 से 4 जनवरी तक, दिल्ली सरकार और सुरुचि प्रकाशन द्वारा मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित ‘दिल्ली शब्दोत्सव’ में देश भर के जाने-माने विचारक, लेखक और वक्ता हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के दौरान, किताबों का विमोचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और एक कवि सम्मेलन भी होग।”
इस मौके पर मुख्यमंत्री के कैबिनेट सहयोगी आशीष सूद, विधायक अभय वर्मा और राजकुमार भाटिया, साथ ही अन्य मौजूद थे।
कपिल मिश्रा ने पत्रकारों को बताया कि दिल्ली सरकार का कला और संस्कृति विभाग और एक पब्लिशिंग हाउस मिलकर देश का सबसे बड़ा साहित्य और सांस्कृतिक उत्सव आयोजित करेंगे। उन्होंने कहा, “दिल्ली सरकार 2, 3 और 4 जनवरी को देश का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और साहित्यिक उत्सव आयोजित कर रही है। अब से, यह संस्कृति मंत्रालय के तहत सालाना आयोजित किया जाएगा और इसे ‘दिल्ली शब्दोत्सव’ के नाम से जाना जाएगा।”
इस इवेंट में 100 से ज्यादा जाने-माने वक्ता शामिल होंगे, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, सुनील आंबेकर, मनमोहन वैद्य और सच्चिदानंद जोशी शामिल हैं, साथ ही 40 से ज्यादा किताबों का विमोचन, छह सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और दो कवि सम्मेलन होंगे।
उन्होंने कहा, “दिल्ली एनसीआर के लगभग 40 विश्वविद्यालयों के छात्र भी इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।” मिश्रा ने कहा कि इस इवेंट में भरतनाट्यम, कथक, भजन संध्या, कवि सम्मेलन और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन जैसे कार्यक्रम होंगे।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री इस उत्सव का उद्घाटन करेंगे, जबकि उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी और छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।







 

70 साल की उम्र में 702 किमी साइकिल यात्रा, पीएम मोदी ने विधायक सुरेश कुमार की सराहना की

02-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 70 वर्ष की आयु में बेंगलुरु से कन्याकुमारी तक 702 किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करने वाले कर्नाटक के विधायक एस. सुरेश कुमार से फोन पर बातचीत की और उनके साहस व जज्बे की जमकर तारीफ की।
पीएम मोदी ने कहा कि बेंगलुरु से कन्याकुमारी तक साइकिल से यात्रा करना न केवल तारीफ के काबिल है, बल्कि यह समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से उबरने के बाद यह उपलब्धि हासिल करना उनकी हिम्मत और कभी हार न मानने वाले जज्बे को दर्शाता है। साथ ही, यह फिटनेस को लेकर एक मजबूत संदेश भी देता है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं सुरेश कुमार से फोन पर बात कर उनके इस प्रयास के लिए बधाई दी। वहीं, एस. सुरेश कुमार ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आना मेरे लिए बेहद खुशी की बात है। उन्होंने कन्याकुमारी तक 702 किलोमीटर साइकिल चलाने के लिए मुझे बधाई दी। उन्हें यह जानकर भी खुशी हुई कि 51 वर्षों बाद यह मेरी कन्याकुमारी तक दूसरी साइकिल यात्रा थी, वह भी एक गंभीर बीमारी से उबरने के बाद।”
बेंगलुरु के राजाजीनगर से विधायक सुरेश कुमार एक दुर्लभ बीमारी चिकनगुनिया एन्सेफेलोपैथी (सीई) से पीड़ित हो गए थे। बीमारी के कारण वह महीनों तक बिस्तर पर रहने को मजबूर थे और अपनी उंगलियां तक हिलाने में असमर्थ थे। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने 12 लोगों के एक समूह के साथ ‘राजाजीनगर पेडल पावर’ के बैनर तले बेंगलुरु से कन्याकुमारी तक 702 किलोमीटर की साइकिल यात्रा शुरू की, जिसे उन्होंने पांच दिनों में सफलतापूर्वक पूरा किया।











 

जनजातीय समाज सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिक शिक्षा और तकनीक को अपनाए: राष्ट्रपति मुर्मू

31-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को झारखंड के गुमला जिले के रायडीह प्रखंड में अंतरराज्यीय जन-सांस्कृतिक समागम ‘कार्तिक जतरा’ में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने जनजातीय समाज की अस्मिता और विरासत को संरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के माध्यम से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि शिक्षा विकास की सबसे बड़ी पूंजी है और इसके विस्तार-प्रसार से ही समाज तथा राज्य का समग्र विकास संभव है। झारखंड के गुमला निवासी महान जनजातीय नायक पंखराज साहेब कार्तिक उरांव की स्मृति को नमन करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे सभी के लिए प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने विदेश में शिक्षा ग्रहण करने के बावजूद अपनी सोच को अपनी माटी और अपने लोगों के लिए समर्पित रखा और शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम माना। आज उसी भावना के साथ ‘कार्तिक जतरा’ के माध्यम से लोग उन्हें याद कर रहे हैं, जो अपने आप में एक सार्थक पहल है।
राष्ट्रपति ने कहा कि गुमला जिले में विश्वविद्यालय की स्थापना पंखराज उनका सपना था, जिसे शीघ्र साकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा को जोड़ने वाला यह क्षेत्र नदियों, पहाड़ों, पठारों और जंगलों से समृद्ध है और देश की प्राचीनतम परंपराओं का साक्षी रहा है। भगवान बिरसा मुंडा की जन्मभूमि और कर्मभूमि झारखंड में आकर उन्हें तीर्थ यात्रा जैसा अनुभव होता है। बिरसा मुंडा आज पूरे देश में सामाजिक न्याय और जनजातीय गौरव के महान प्रतीक के रूप में सम्मानित हैं।
गुमला जिले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि महान समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी जतरा टाना भगत का जन्म भी इसी धरती पर हुआ था। उन्होंने महात्मा गांधी के आदर्शों के अनुरूप ब्रिटिश शासन के खिलाफ अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व किया। इसके अलावा, उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में अद्वितीय वीरता का परिचय देने वाले परमवीर चक्र विजेता शहीद एल्बर्ट एक्का को भी श्रद्धापूर्वक याद किया, जिनकी जन्मस्थली गुमला जिला है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने जनजातीय समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की संगीत, नाटक, नृत्य और कला परंपराएं अत्यंत समृद्ध हैं। यही कारण है कि देशभर से 100 से अधिक आदिवासी कलाकारों को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आई आदिवासी पारंपरिक नृत्य मंडलियों ने अपनी लोक कला और संस्कृति का आकर्षक और रंगारंग प्रदर्शन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल देखने को मिला।
 

भारत में वर्ष 2024-25 में हुए रिकॉर्ड 5.5 लाख से ज्यादा ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन : पीयूष गोयल

31-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में 5.5 लाख से ज्यादा घरेलू ट्रेडमार्क आवेदन दर्ज किए गए, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। यह आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाने और नए विचार लाने वाले लोगों के साथ ही रचनाकारों के हितों की रक्षा करने में देश की संस्थाओं की मजबूती को दर्शाता है।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को यह जानकारी साझा की।
पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे ‘आईडिएट इन इंडिया, इनोवेट इन इंडिया, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड’ का जिक्र करते हुए कहा कि ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 पिछले 26 वर्षों से नवाचार करने वालों की सुरक्षा का मजबूत आधार बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के लगातार प्रयासों से भारत का इनोवेशन सिस्टम मजबूत हुआ है। इससे भारत की पहचान वैश्विक बौद्धिक संपदा यानी ग्लोबल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) क्षेत्र में और बेहतर हुई है और इससे भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को फायदा मिल रहा है।
पीयूष गोयल ने बताया कि सबसे ज्यादा ट्रेडमार्क दवाइयों, पशु चिकित्सा और स्वच्छता से जुड़े उत्पादों में दर्ज किए गए।
उन्होंने यह भी कहा कि नीतिगत सुधार, डिजिटलीकरण और नए कदमों की वजह से भारत की स्थिति वैश्विक आईपी प्रणाली में लगातार मजबूत हो रही है।
ट्रेडमार्क अधिनियम ऐसा कानून है, जो कंपनियों और व्यापारियों की ब्रांड पहचान को चोरी या नकल से बचाता है। इससे बाजार में न्यायपूर्ण प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिलता है। इस कानून में समय-समय पर बदलाव किए गए हैं, ताकि यह बदलते वैश्विक व्यापार और आधुनिक जरूरतों के अनुसार बना रहे।
जब कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करती हैं, तब ट्रेडमार्क की सुरक्षा और ज्यादा जरूरी हो जाती है। ऐसे में यह कानून इस बात का भी ध्यान रखता है, ताकि कंपनियों को सही सुरक्षा मिल सके।
एक बार ट्रेडमार्क 10 साल के लिए पंजीकृत होता है और इसके बाद इसे हर 10 साल में नवीनीकृत किया जा सकता है। अगर कोई ट्रेडमार्क बहुत सामान्य हो, गलत जानकारी देता हो या पहले से मौजूद ट्रेडमार्क से बहुत मिलता-जुलता हो, तो उसे मंजूरी नहीं मिलती।
इस कानून के तहत ट्रेडमार्क को किसी और को बेचा या लाइसेंस पर दिया भी जा सकता है। अगर कोई ट्रेडमार्क की नकल करता है, तो उसके खिलाफ जुर्माना, नुकसान की भरपाई और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। 
 

भारत की रिफॉर्म एक्सप्रेस का प्राइमरी इंजन युवा आबादी और लोगों का साहस : पीएम मोदी

31-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) पीएम मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत की रिफॉर्म एक्सप्रेस का प्राइमरी इंजन देश की जनसांख्यिकी, हमारी युवा पीढ़ी और हमारे लोगों का अदम्य साहस है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर पीएम मोदी ने लिखा कि 2025 हर सेक्टर में सुधारों के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण रहा है और इससे देश की विकास यात्रा को रफ्तार मिली और साथ ही विकसित भारत यात्रा के प्रयासों को बढ़ावा मिला है।
उन्होंने पोस्ट में लिखा कि 2025 को भारत के लिए एक ऐसे वर्ष के रूप में याद किया जाएगा, जब सरकार ने पिछले 11 वर्षों में हासिल की गई उपलब्धियों के आधार पर निरंतर राष्ट्रीय मिशन के रूप में सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया। हमने संस्थानों का आधुनिकीकरण किया, शासन व्यवस्था को सरल बनाया और दीर्घकालिक, समावेशी विकास की नींव को मजबूत किया।
इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन जीने में सक्षम बनाना, उद्यमियों को आत्मविश्वास के साथ इनोवेशन करने में सक्षम बनाना और संस्थानों को स्पष्टता और विश्वास के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करना है।
पीएम ने पोस्ट में आगे लिखा कि जीएसटी 2.0 ने टैक्स स्लैब की संख्या को घटाकर दो – 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत कर दिया है। इससे एमएसएमई, किसानों और अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर्स के साथ आम लोगों पर टैक्स का बोझ कम हुआ है।
इसके अलावा, सरकार ने 12 लाख रुपए तक कमाने वालों पर इनकम टैक्स शून्य कर दिया है। इससे बड़ी संख्या में लोगों को फायदा हुआ है। वहीं, सरकार ने पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 को इनकम टैक्स एक्ट 2025 से प्रतिस्थापित कर दिया है।
यह सभी सुधार मिलकर भारत को एक पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-आधारित कर प्रशासन की ओर ले जाएंगे।पीएम ने पोस्ट में बताया कि छोटी कंपनियों के लिए अब टर्नओवर की सीमा 100 करोड़ रुपए तय कर दी गई है। इससे कई छोटी कंपनियों पर अनुपालन का बोझ कम हुआ है।
इसके अलावा इंश्योरेंस कंपनियों में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी गई है। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और लोग को बेहतर उत्पाद मिल पाएंगे।संसद में प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक पेश किया गया है। इससे सेबी में शासन के मानदंडों में सुधार होगा, निवेशकों की सुरक्षा बढ़ेगी, अनुपालन का बोझ कम होगा और विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी आधारित प्रतिभूति बाजार सक्षम होगा।
वहीं, संसद के एक ही सत्र (मानसून सत्र में) पांच ऐतिहासिक समुद्री कानून पारित किए गए, जिसमें बिल ऑफ लैडिंग अधिनियम, 2025; माल ढुलाई विधेयक, 2025; तटीय जहाजरानी विधेयक, 2025; व्यापारिक जहाजरानी विधेयक, 2025; और भारतीय बंदरगाह विधेयक, 2025 शामिल हैं। इन सुधारों से दस्तावेजीकरण सरल हो जाता है, विवाद समाधान आसान हो जाता है और रसद लागत कम हो जाती है। साथ ही, 1908, 1925 और 1958 के पुराने कानूनों को भी प्रतिस्थापित कर दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, भारत ने न्यूजीलैंड, ओमान और यूके के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को साइन किया है। इससे निवेश, रोजगार के अवसरों और स्थानीय उद्योगों को फायदा मिलेगा। साथ ही, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन के संगठन यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के साथ हुआ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) लागू हो चुका है। यह विकसित यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत का पहला मुक्त व्यापार समझौता है।
उन्होंने आगे बताया कि विकसित भारत- जी राम जी अधिनियम, 2025 ने रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है। इससे ग्राम अवसंरचना और आजीविका को मजबूत करने की दिशा में खर्च में वृद्धि होगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने को उच्च आय और बेहतर संपत्ति सुनिश्चित करने का साधन बनाना है।
2025 के सुधारों की अहमियत न केवल उनके व्यापक दायरे में है, बल्कि उनकी अंतर्निहित विचारधारा में भी है। हमारी सरकार ने आधुनिक लोकतंत्र की सच्ची भावना के अनुरूप नियंत्रण की जगह सहयोग और नियमन की जगह सुविधा प्रदान करने को प्राथमिकता दी है।
इन सुधारों का उद्देश्य एक समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है। विकसित भारत का निर्माण हमारी विकास यात्रा का मार्गदर्शक सिद्धांत है। हम आने वाले वर्षों में भी सुधार एजेंडा को आगे बढ़ाते रहेंगे।
पीएम मोदी ने अंत में कहा कि मैं भारत और विदेश में सभी से आग्रह करता हूं कि वे भारत के विकास से अपना जुड़ाव और मजबूत करें। भारत पर भरोसा बनाए रखें और हमारे लोगों में निवेश करते रहें!

काशी तमिल संगमम: भारत की शाश्वत आध्यात्मिक, सांस्कृतिक चेतना का जीवंत सेतु

31-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को रामेश्वरम की पवित्र भूमि पर आयोजित काशी तमिल संगमम 4.0 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए इस पहल को भारत की शाश्वत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रतीक बताया। 
उपराष्ट्रपति ने काशी–तमिलनाडु संबंध को गहन सभ्यतागत और आध्यात्मिक निरंतरता बताया, जो साझा विरासत के माध्यम से भारत की राष्ट्रीय एकता को सशक्त बनाता है
काशी और तमिलनाडु के बीच अटूट बंधन पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह संबंध केवल ऐतिहासिक नहीं है, बल्कि एक गहन सभ्यतागत और आध्यात्मिक निरंतरता है, जिसने हजारों वर्षों से भारत को एकजुट रखा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आदान-प्रदान भारत की साझा विरासत की पुष्टि करते हैं और राष्ट्रीय एकता की भावना को गहरा करते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि काशी तमिल संगमम महाकवि सुब्रमण्यम भारती के एकजुट भारत के स्वप्न को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल से साकार करता है
उपराष्ट्रपति ने महाकवि सुब्रमण्यम भारती के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा कि काशी तमिल संगमम एकजुट, एकीकृत और आत्मविश्वासी भारत के बारे में कवि के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि भारतीजी का यह सपना आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और लक्षित पहलों के माध्यम से साकार हो रहा है।
उपराष्ट्रपति ने कहा, काशी-तमिल संगम जैसी पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान से राष्ट्रीय एकता मजबूत कर विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त करती हैं
प्रधानमंत्री के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि काशी-तमिल संगम जैसी पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान, साझा विरासत और आपसी सम्मान के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे प्रयास देश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर कर रहे हैं।
समापन समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि सहित केंद्रीय मंत्री, विधायक और आईआईटी मद्रास के निदेशक उपस्थित रहे
समापन समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने भाग लिया। साथ ही इस समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन, नैनार नागेंद्रन, विधायक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि समेत कई लोग मौजूद थे।
काशी तमिल संगमम सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों, विचारों के प्रवाह और जीवित परंपराओं से भारत की सांस्कृतिक एकता का उत्सव है
काशी तमिल संगमम एक ऐसे रिश्ते का जश्न है जो सदियों से भारतीय कल्पना में बसा हुआ है। अनगिनत तीर्थयात्रियों, विद्वानों और साधकों के लिए तमिलनाडु और काशी के बीच का सफर कभी भी सिर्फ शारीरिक तौर पर आने-जाने का रास्ता नहीं था। यह विचारों, सोच, भाषाओं और जीवित परंपराओं का एक आंदोलन था। संगमम इसी भावना से प्रेरित है, एक ऐसे बंधन को जिंदा करता है, जिसने पीढ़ियों से भारत के सांस्कृतिक माहौल को शांतिपूर्वक आकार दिया है।
आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान काशी तमिल संगमम भारत की सभ्यतागत विरासत और सांस्कृतिक निरंतरता सुदृढ़ करने का प्रयास बना
जब भारत आजादी के 75 साल पूरे होने पर पूरे देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाए जाने के महत्व के बारे में गहराई और गंभीरता से सोच रहा था और अपनी सभ्यतागत विरासत की गहराई को फिर खोज रहा था, संगमम देश को जोड़ने वाली सांस्कृतिक निरंतरता को फिर से पक्का करने के लिए एक उद्देश्यपूर्ण कोशिश के तौर पर सामने आया।
 

आर्मी हॉस्पिटल ने भारत में आईस्टेंट के साथ पहली 3डी फ्लेक्स एक्वस एंजियोग्राफी सफलतापूर्वक की

31-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारतीय चिकित्सा जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के तहत दिल्ली कैंट स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के नेत्र विज्ञान विभाग ने भारत में पहली बार आईस्टेंट के साथ 3डी फ्लेक्स एक्वियस एंजियोग्राफी सफलतापूर्वक संपन्न की है। यह एंजियोग्राफी उन्नत इमेजिंग तकनीक और न्यूनतम चीर-फाड़ वाली ग्लूकोमा सर्जरी को मिलाकर की गई।
नए स्टैंड-माउंटेड स्पेक्ट्रालिस सिस्टम और अत्याधुनिक 3डी ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप की सहायता से की गई इस प्रक्रिया ने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं को वैश्विक नेत्र चिकित्सा के अग्रिम पंक्ति में स्थापित किया है।
ग्लूकोमा, जो अपरिवर्तनीय अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक है, अपनी धीमी प्रगति के कारण लंबे समय से चिकित्सकों के लिए एक चुनौती बना हुआ है। यह तकनीक एक्वियस आउटफ्लो पाथवे का वास्तविक समय और अत्यंत सटीक दृश्य उपलब्ध कराती है, जिससे सर्जन अधिक लक्षित और प्रभावी उपचार कर सकते हैं व रोगियों के परिणामों में महत्वपूर्ण सुधार संभव हो पाता है।
देश में पहली बार 3डी फ्लेक्स एक्वियस एंजियोग्राफी को आईस्टेंट (न्यूनतम इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी) के साथ एकीकृत कर ग्लूकोमा उपचार में एक नया मानदंड स्थापित किया गया है। इससे सर्जरी के दौरान बेहतर इमेजिंग और दीर्घकालिक रूप से बेहतर परिणाम सुनिश्चित होते हैं। सशस्त्र बल समुदाय के लिए यह उपलब्धि न सिर्फ एक महत्वपूर्ण चिकित्सा मील का पत्थर है, बल्कि दृष्टि संरक्षण और ऑपरेशनल तत्परता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम भी है।
 

तमिलनाडु के पश्चिमी घाट में बारिश का अनुमान, कोहरा छाने की भी संभावना

30-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आज मंगलवार को पश्चिमी घाट और दक्षिणी तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में अलग-अलग जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान लगाया है।
मौसम बुलेटिन के अनुसार, अभी केरल तट के पास दक्षिण-पूर्वी अरब सागर के ऊपर एक एटमॉस्फेरिक सर्कुलेशन एक्टिव है। ऐसा ही एक और सिस्टम दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर मौजूद है, जबकि तीसरा सर्कुलेशन आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तटीय क्षेत्र और आस-पास के इलाकों में बना हुआ है।
इन सिस्टम के मिलेजुले असर से दक्षिण भारत के कुछ खास इलाकों में रुक-रुक कर बारिश होने की उम्मीद है। पश्चिमी घाट के किनारे के जिलों और दक्षिणी तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में दिन के दौरान एक या दो जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
बाकी तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में मौसम ज्यादातर सूखा रहने की उम्मीद है, हालांकि सुबह-सुबह या देर रात के घंटों में कुछ जगहों पर हल्की धुंध या कोहरा छा सकता है।
आईएमडी ने यह भी कहा है कि तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा। हालांकि कुछ जगहों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से 2 से 3 डिग्री सेल्सियस कम हो सकता है। रात और सुबह के शुरुआती घंटों में ठंड बनी रहने की संभावना है।
नीलगिरी जिले और डिंडीगुल जिले की कोडाइकनाल पहाड़ी शृंखलाओं में मौसम विभाग ने देर रात या सुबह के शुरुआती घंटों में हल्का पाला पड़ने या ओस जमने की संभावना जताई है। ऊंचे इलाकों में साफ आसमान और कम तापमान के कारण इस अवधि में ऐसी स्थितियां आम हैं।
चेन्नई में पूरे दिन मौसम आंशिक रूप से बादल वाला रहने की उम्मीद है। शहर में देर रात हल्के कोहरे या धुंध का अनुभव हो सकता है। अधिकतम तापमान 29 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान 21 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है।
मौसम विभाग ने पहाड़ी और निचले इलाकों में रहने वालों को बदलते मौसम की स्थिति से सावधान रहने की सलाह दी है। इसके साथ ही किसानों और यात्रियों को भी स्थानीय मौसम सलाह से अपडेट रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि तापमान और विजिबिलिटी में रुक-रुक कर होने वाले बदलाव रोज़मर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। 

 

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम: 7,280 करोड़ की योजना से देश में दुर्लभ मृदा स्थायी चुम्बक निर्माण को मिलेगी नई रफ्तार

30-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) सरकार ने 7,280 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ ‘धातुमल दुर्लभ मृदा स्थायी चुम्बक’ के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना’ को मंजूरी दे दी है। इस पहल का उद्देश्य भारत में प्रति वर्ष 6,000 मीट्रिक टन (एमटीपीए) की एकीकृत आरईएम निर्माण क्षमता स्थापित करना है, जिसमें दुर्लभ मृदा ऑक्साइड से लेकर तैयार चुम्बक तक की पूरी श्रृंखला शामिल होगी।
इस पहल का उद्देश्य घरेलू स्तर पर एकीकृत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के माध्यम से, इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक एक महत्वपूर्ण घटक में आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करना है। साथ ही, यह भारत को वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत सामग्री उत्पादक बाजार में एक प्रमुख राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण, रणनीतिक क्षेत्रों के लिए सशक्त एवं लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण और देश के दीर्घकालिक नेट जीरो 2070 लक्ष्य सहित व्यापक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का प्रभावी रूप से सुदृढ़ करती है।
आरईपीएम स्थायी चुम्बकों के सबसे शक्तिशाली में से हैं और इनका व्यापक रूप से उन तकनीकों में उपयोग किया जाता है, जिनमें ठोस और उच्च- कार्य क्षमता वाले चुंबकीय घटकों की आवश्यकता होती है। इनकी उच्च चुंबकीय शक्ति और स्थिरता इन्हें निम्नलिखित के लिए अभिन्न बनाती है:
इलेक्ट्रिक वाहन मोटर
पवन टरबाइन जनरेटर
उपभोक्ता एवं औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स
एयरोस्पेस तथा रक्षा प्रणालियां
सटीक सेंसर और एक्चुएटर
छोटे आकार में भी अत्यधिक चुंबकीय प्रदर्शन प्रदान करने वाली आरईपीएम की क्षमता उन्हें उन्नत इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों के लिए अपरिहार्य बनाती है। भारत स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत गतिशीलता और रक्षा जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में विनिर्माण क्षमताओं का तीव्र विस्तार कर रहा है; ऐसे में दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करने और आपूर्ति श्रृंखलाओं की लचीलापन बढ़ाने के लिए उच्च-प्रदर्शन चुम्बकों की विश्वसनीय और स्वदेशी आपूर्ति की व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती जा रही है।
भारत में दुर्लभ-मृदा खनिजों का पर्याप्त संसाधन आधार उपलब्ध है, विशेष रूप से मोनाजाइट के समृद्ध भंडार देश के कई तटीय और अंतर्देशीय क्षेत्रों में विस्तृत रूप से पाए जाते हैं। इन भंडारों में लगभग 13.15 मिलियन टन मोनाजाइट की उपस्थिति का अनुमान है, जिसमें से लगभग 7.23 मिलियन टन दुर्लभ-मृदा ऑक्साइड (आरईओ) निहित हैं। ये संसाधन आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र में स्थित तटीय रेतीले टीलों, लाल रेतीले टीलों तथा अंतर्देशीय जलोढ़ क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ये दुर्लभ-मृदा ऑक्साइड स्थायी चुंबक विनिर्माण सहित विविध रणनीतिक दुर्लभ-मृदा आधारित उद्योगों के लिए प्राथमिक कच्चे माल के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इसके अतिरिक्त, गुजरात और राजस्थान के कठोर चट्टानी क्षेत्रों में लगभग 1.29 मिलियन टन इन-सीटू आरईओ संसाधनों की पहचान की गई है। वहीं, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा संचालित व्यापक अन्वेषण पहलों के परिणामस्वरूप 482.6 मिलियन टन दुर्लभ-मृदा अयस्क संसाधनों का अतिरिक्त आकलन किया गया है। ये संयुक्त संसाधन अनुमान आरईपीएम विनिर्माण सहित विविध दुर्लभ-मृदा आधारित उद्योगों को दीर्घकालिक रूप से सहयोग देने हेतु पर्याप्त एवं विश्वसनीय कच्चे माल की उपलब्धता को दर्शाते हैं।
भारतमें दुर्लभ-मृदा खनिजों का सुदृढ़ संसाधन आधार उपलब्ध होने के बावजूद, स्थायी चुंबकों का घरेलू विनिर्माण अभी विकासशील चरण में है, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान मांग का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा किया जा रहा है। आधिकारिक व्यापार आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान भारत के स्थायी चुंबक आयात का प्रमुख भाग चीन से प्राप्त हुआ, जिसमें मूल्य के आधार पर आयात निर्भरता 59.6 प्रतिशत से 81.3 प्रतिशत तथा मात्रा के आधार पर 84.8 प्रतिशत से 90.4 प्रतिशत के बीच रही है।
इसी संदर्भ में, भविष्य की मांग के अनुमान घरेलू विनिर्माण क्षमता के त्वरित विस्तार की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हैं। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तथा विभिन्न रणनीतिक अनुप्रयोगों में निरंतर वृद्धि के परिणामस्वरूप भारत में आरईपीएम की खपत के वर्ष 2030 तक दोगुनी होने की संभावना है। इसलिए घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और लचीलापन को सुदृढ़ करने हेतु एकीकृत आरईपीएम विनिर्माण क्षमता का विकास आवश्यक हो गया है।
यह योजना भारत में आरईपीएम के संपूर्ण विनिर्माण के लिए एक समग्र और सक्षम ढांचा स्थापित करती है, जो न केवल प्रारंभिक क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करता है, बल्कि दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता व आत्मनिर्भरता को भी सुनिश्चित करता है।
इसका उद्देश्य उच्च-प्रदर्शन वाले चुंबकीय पदार्थों के लिए एक पूर्णतः एकीकृत उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है, जिससे ऑक्साइड फीडस्टॉक से लेकर अंतिम उत्पाद तक 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की घरेलू विनिर्माण क्षमता का सृजन हो सके।
कुल क्षमता को वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से अधिकतम पांच लाभार्थियों के बीच वितरित किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक लाभार्थी 1,200 मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक के लिए पात्र होगा, जिससे पर्याप्त पैमाने के साथ-साथ विविधीकरण सुनिश्चित होगा।
इस योजना में एक सशक्त प्रोत्साहन संरचना शामिल है, जिसके तहत पांच वर्षों में आरईएम उत्पादन के लिए बिक्री-आधारित प्रोत्साहन के रूप में 6,450 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
उन्नत, एकीकृत आरईएम विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना के लिए 750 करोड़ रुपये की पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
यह योजना सात वर्षों में लागू की जाएगी, जिसमें एकीकृत आरईएम सुविधाओं की स्थापना के लिए दो वर्ष की प्रारंभिक अवधि और उसके बाद आरईएम बिक्री से जुड़े प्रोत्साहन राशि के वितरण के पांच वर्ष शामिल हैं। इस सुनियोजित समय-सीमा का उद्देश्य समय पर क्षमता निर्माण में सहायता करना और प्रारंभिक उत्पादन एवं बाजार विकास चरण के दौरान स्थिरता प्रदान करना है।
राष्ट्रीय प्राथमिकताएं और व्यापक सरकारी गतिविधियों के साथ तालमेल
घरेलू स्तर पर आरईएम उत्पादन क्षमता की व्यवस्था अनेक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाती है, क्योंकि ये चुंबक रणनीतिक एवं उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के लिए अनिवार्य हैं, जो भारत की औद्योगिक और तकनीकी प्रगति के केंद्र में हैं। सरकार की यह पहल स्वदेशी उत्पादन के विस्तार, तीव्र गति से विकसित हो रहे उद्योगों के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं के लचीलेपन और सुरक्षा को सुदृढ़ करने तथा साथ-ही-साथ भारत के दीर्घकालिक सतत विकास एवं अन्य लक्ष्यों में योगदान देने का उद्देश्य रखती है।
ये संबंध दर्शाते हैं कि घरेलू आरईपीएम विनिर्माण क्षमता विकसित करना न केवल एक तकनीकी अनिवार्यता है, बल्कि आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने, स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने में तेजी लाने, उन्नत गतिशीलता को सुदृढ़ करने और रक्षा तथा रणनीतिक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की भारत की रणनीति का प्रमुख घटक भी है।
आरईपीएम योजना भारत के महत्वपूर्ण खनिज व उन्नत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार की चल रही कई गतिविधियों के साथ और भी अधिक संरेखित होती है।
नीतिगत सुधारों, विशेष रूप से खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 में किए गए संशोधनों के माध्यम से महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों की एक समर्पित सूची अधिसूचित की गई है तथा सरकार को खनन पट्टों व समग्र लाइसेंसों की नीलामी का अधिकार प्रदान किया गया है। इससे निजी और सार्वजनिक—दोनों ही क्षेत्रों की भागीदारी के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
दुर्लभ-मृदा चुंबक ऊर्जा-कुशल मोटरों, पवन-ऊर्जा प्रणालियों एवं अन्य हरित प्रौद्योगिकियों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं और इसलिए यह पहल देश के व्यापक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन व उसके नेट जीरो 2070 विजन के साथ निकटता से जुड़ी हुई है।
घरेलू स्तर पर आरईएम के उत्पादन को गति देना राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता दोनों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। चूंकि इन चुम्बक का उपयोग रक्षा व एयरोस्पेस प्रणालियों में होता है, इसलिए देश के भीतर एकीकृत उत्पादन क्षमता विकसित करने से महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों के लिए सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित होती है और स्वदेशीकरण के निरंतर प्रयासों को बढ़ावा मिलता है।
 यह राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) के माध्यम से महत्वपूर्ण खनिजों की मूल्य श्रृंखला को सशक्त करने पर भारत के व्यापक ध्यान देने का भी पूरक है, जिसका उद्देश्य उन्नत क्षेत्रों में उपयोग किए जाने वाले दुर्लभ-मृदा तत्वों सहित प्रमुख खनिजों की उपलब्धता व प्रसंस्करण क्षमताओं में सुधार करना है।
महत्वपूर्ण खनिजों के लिए खनन सुधार
खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर अधिनियम) खानों के विनियमन तथा खनिज संसाधनों के विकास के लिए स्थापित किया गया था। भारत के महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र (महत्वपूर्ण व गहरे भंडारों में पाए जाने वाले खनिजों के लिए) को सुदृढ़ बनाने हेतु, खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2023 के माध्यम से इसमें सुधार किए गए हैं। इस संशोधन के तहत खनिज अन्वेषण के सभी क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया है, सरकार को खनिज रियायतों की नीलामी का अधिकार प्राप्त हुआ है और एक नई अन्वेषण लाइसेंस प्रणाली की शुरुआत की गई है।
एनसीएमएम, नियामक सुधार और आरईपीएम विनिर्माण योजना सहित ये सभी गतिविधियां मिलकर आरईपीएम की क्षमता का विस्तार करती हैं। इससे भारत की व्यापक औद्योगिक, स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक प्राथमिकताओं में एकीकृत करने के लिए एक मजबूत घरेलू आधार तैयार होता है।
वैश्विक संदर्भ और भारत के अवसर
दुर्लभ मृदा धातुओं और स्थायी चुम्बकों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान के दौर आए हैं, जिन्होंने इन रणनीतिक संसाधनों तक सुरक्षित और विविध पहुंच की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है। भारत ने दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें नीतिगत सुधारों का कार्यान्वयन और घरेलू उत्पादन एवं विनिर्माण क्षमता निर्माण के प्रयास शामिल हैं।

खान मंत्रालय ने ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, जाम्बिया, पेरू, जिम्बाब्वे, मोजाम्बिक, मलावी और कोटे डी आइवर सहित खनिज समृद्ध देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते किए हैं। भारत खनिज सुरक्षा साझेदारी (एमएसपी), हिन्द-प्रशांत आर्थिक ढांचा (आईपीईएफ) और महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों पर पहल (आईसीईटी) जैसे बहुपक्षीय मंचों में भी भाग लेता है, जो सामूहिक रूप से लचीली महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण के प्रयासों को मजबूती प्रदान करते हैं।
इन प्रयासों के पूरक के रूप में, खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (केएबीएल) अर्जेंटीना जैसे देशों में साझेदारी के माध्यम से लिथियम और कोबाल्ट सहित रणनीतिक खनिज संपदाओं की विदेशी खोज एवं अधिग्रहण में लगी हुई है। ये उपाय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों को सुरक्षित करने की भारत की रणनीति का एक प्रमुख घटक हैं।
इस पृष्ठभूमि में, घरेलू आरईपीएम विनिर्माण क्षमता का विकास भारत को उन्नत सामग्रियों के लिए वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ घरेलू औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने का एक उपयुक्त अवसर प्रदान करता है।
धातुमल दुर्लभ मृदा स्थायी चुम्बक (आरईपीएम) के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, प्रौद्योगिकी आधारित निवेश आकर्षित करने और दीर्घकालिक विस्तारशीलता को सुदृढ़ करना लक्षित करती है। उच्च दक्षता वाली प्रणालियों में इन सामग्रियों की भूमिका को देखते हुए यह पहल भारत के ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों में भी योगदान देती है। इस सरकार की पहल घरेलू क्षमता स्थापित करके और डाउनस्ट्रीम संबंधों को मजबूत करके रोजगार सृजन करने, औद्योगिक क्षमता को बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायक सिद्ध होगी।
 


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