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सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का आज राष्ट्रपति भवन में होगा अनावरण

23-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) राष्ट्रपति भवन में आज सोमवार को ‘राजाजी उत्सव’ मनाया जाएगा, जिसके तहत स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण राष्ट्रपति परिसर के केंद्रीय प्रांगण में किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 131वें एपिसोड के दौरान बोलते हुए, प्रधानमंत्री ने आजादी का अमृत महोत्सव समारोह के दौरान ‘पंच-प्राण’ के लिए किए गए अपने आह्वान को याद किया।
उन्होंने कहा था कि आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान मैंने लाल किले से ‘पंच-प्राण’ की बात की थी। उनमें से एक है गुलामी की मानसिकता से मुक्ति। आज देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़ते हुए भारतीय संस्कृति से जुड़े प्रतीकों को महत्व देने लगा है। हमारे राष्ट्रपति भवन ने भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने राजगोपालाचारी के सार्वजनिक जीवन में योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा, “वे स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल थे। वे उन लोगों में से थे जो सत्ता को पद नहीं बल्कि सेवा मानते थे। सार्वजनिक जीवन में उनका आचरण, संयम और स्वतंत्र सोच आज भी हमें प्रेरित करती है।”
आजादी के बाद भी औपनिवेशिक काल के प्रतीकों के बने रहने पर खेद व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिटिश प्रशासकों की मूर्तियां दशकों तक राष्ट्रपति भवन परिसर में बनी रहीं, जबकि स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रतीकों को वैसी मान्यता नहीं मिली।
उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से, आजादी के बाद भी, ब्रिटिश प्रशासकों की मूर्तियों को राष्ट्रपति भवन में रहने की अनुमति दी गई, लेकिन देश के महानतम सपूतों की मूर्तियों को जगह देने से इनकार कर दिया गया। “प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा का जिक्र करते हुए कहा, “राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की एक प्रतिमा भी थी। अब, इस प्रतिमा के स्थान पर राजाजी की प्रतिमा लगाई जाएगी।”
प्रधानमंत्री मोदी ने श्रोताओं को आगे बताया कि राजजी उत्सव समारोह के अंतर्गत सी. राजगोपालाचारी को समर्पित एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा। यह प्रदर्शनी 24 फरवरी से 1 मार्च तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी।
पीएम मोदी ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे राजगोपालाचारी के जीवन और विरासत के बारे में अधिक जानने के लिए जब भी संभव हो प्रदर्शनी का दौरा करें।






 

चुनाव आयोग राज्य चुनाव आयुक्तों के साथ मंगलवार को राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित करेगा

23-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) मंगलवार को नई दिल्ली में ईसीआई और राज्य निर्वाचन आयुक्तों (एसईसी) का राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित करेगा। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। यह गोलमेज सम्मेलन 27 वर्षों के बाद आयोजित किया जा रहा है। पिछला सम्मेलन वर्ष 1999 में हुआ था।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, एसईसी अपने कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ सम्मेलन में भाग लेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य अपने-अपने कानूनी ढांचे के भीतर चुनावी प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं के संबंध में ईसीआई और एसईसी के कामकाज में तालमेल को बढ़ावा देना है।
दिन भर चलने वाले इस सम्मेलन में चुनावी प्रक्रियाओं को मजबूत करने के साथ-साथ प्रौद्योगिकी, ईवीएम और मतदाता सूची साझा करने पर चर्चा होगी। आयोग के वरिष्ठ अधिकारी ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म सहित प्रमुख तकनीकी और परिचालन पहलों पर भी प्रस्तुति देंगे। प्रस्तुतियों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की मजबूती, पारदर्शिता और सुरक्षा उपायों पर भी प्रकाश डाला जाएगा।
इसके अलावा, जन प्रतिनिधि अधिनियम, 1950 के संदर्भ में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के अनुसार मतदाताओं की पात्रता पर एक तुलनात्मक प्रस्तुति भी दी जाएगी ताकि विभिन्न अधिकार क्षेत्रों में मतदाता सूची तैयार करने को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे पर जानकारीपूर्ण विचार-विमर्श को आसान बनाया जा सके। 





 

पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को लिखा पत्र, कहा-सोनार बंगाल का सपना देखने वाला हर व्यक्ति दुखी

23-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को पत्र लिखा है। उन्होंने ‘एबार भाजपा सरकार’ का नारा देते हुए ममता बनर्जी को घेरा है। पीएम मोदी ने लिखा कि सोनार बंगाल का सपना देखने वाला हर व्यक्ति दुखी है। पश्चिम बंगाल में माताएं-बहनें आज सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं।
पीएम मोदी ने पत्र में लिखा, “जय मां काली…अब बस कुछ ही महीने में पश्चिम बंगाल का भाग्य सुनिश्चित हो जाएगा। आने वाली पीढ़ी का भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ेगा, यह आपके सोचे-समझे फैसले पर निर्भर करता है। मेरे सोनार बंगाल के सपने देखने वाला हर एक जवान, बूढ़ा और महिला आज बहुत पीड़ा में हैं। उनकी पीड़ा से आज मेरा हृदय भी व्यथित है। इसलिए, मैंने मन की गहराइयों से एक संकल्प लिया है, पश्चिम बंगाल को ‘विकसित’ और समृद्ध बनाने का संकल्प। पिछले 11 वर्षों में देशवासियों के आशीर्वाद को ताकत बनाकर मेरी सरकार ने जनकल्याण और समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। किसानों के कल्याण से लेकर युवाओं के सपनों को साकार करने तक, और मातृशक्ति के सशक्तीकरण से लेकर समाज के हर वर्ग तक, हमारी नीतियों और निरंतर प्रयासों के सकारात्मक परिणाम आज साफ दिखाई दे रहे हैं।”
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे लिखा है, “राज्य सरकार के असहयोग और विरोध के बावजूद, आज पश्चिम बंगाल के करीब 5 करोड़ लोग ‘जन-धन योजना’ के माध्यम से बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं। ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत राज्य में 85 लाख शौचालयों का निर्माण किया गया है। जब राज्य की सत्ताधारी पार्टी गरीबों का निवाला छीन रही है, तब हमने छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को 2.82 लाख करोड़ रुपये का लोन देकर मदद का हाथ बढ़ाया है। ‘अटल पेंशन योजना’ के तहत 56 लाख वरिष्ठ नागरिकों को बुढ़ापे में आत्मनिर्भर बनाने का सौभाग्य मुझे मिला है। ‘उज्ज्वला योजना’ के माध्यम से 1 करोड़ से अधिक परिवारों को रसोई गैस देकर माताओं-बहनों को धुएं से मुक्ति दिलाकर मैं धन्य हूं। जो किसान पूरे देश का पेट भरते हैं, आज पश्चिम बंगाल में वही अन्नदाता अपने परिवार का पेट पालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसी कठिन परिस्थिति में ‘किसान सम्मान निधि’ के जरिए 52 लाख से अधिक किसानों को सीधे आर्थिक सहायता देकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाकर, मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं।
पीएम मोदी ने आगे लिखा, “स्वतंत्रता के बाद पश्चिम बंगाल देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करता था और औद्योगिक विकास में अग्रणी था। लेकिन आज इस गौरवशाली राज्य की जर्जर हालत देखकर मेरा मन व्यथित हो उठता है। पिछले छह दशकों के कुशासन और तुष्टिकरण की राजनीति के कारण पश्चिम बंगाल को जो अपूरणीय क्षति हुई है, उसे बयान नहीं किया जा सकता। एक तरफ, रोजगार के अभाव में युवा दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल में मेरी माताएं और बहनें आज सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं।”
प्रधानमंत्री ने लिखा कि स्वामी विवेकानंद और ऋषि अरविंद ने जिस बंगाल का सपना देखा था, वह आज वोट-बैंक की संकीर्ण राजनीति, हिंसा और अराजकता में जकड़ा हुआ है और यह हम सबके लिए अत्यंत पीड़ादायक है। पश्चिम बंगाल की धरती के सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस के ‘आजादी के ललकार’ ने कभी पूरे देश को प्रेरित किया था, पर आज उनकी ही पवित्र भूमि अवैध घुसपैठ और महिलाओं के खिलाफ हिंसा से कलंकित है। कविगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर का सोनार बंगाल पर नकली वोटर हावी हो रहे हैं। अराजकता के अंधेरे में डूबते पश्चिम बंगाल को देखकर आज पूरा देश चिंतित है।
उन्होंने लिखा, “लेकिन कब तक हम चुपचाप यह सब सहते रहेंगे? अब परिवर्तन अनिवार्य है। देश के कई राज्यों में आज जीवन स्तर बेहतर हुआ है, गरीबों के चेहरे पर मुस्कान आई है। ‘आयुष्मान भारत’ से स्वास्थ्य सुरक्षा मिली है, युवाओं को रोजगार मिला है और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। पश्चिम बंगाल भी इस विकास और प्रगति का पूरा हकदार है।”
 

राष्ट्रपति भवन में एडविन लुटियंस की प्रतिमा हटाकर सी. राजगोपालाचारी को दी गई जगह, द्रौपदी मुर्मु ने किया अनावरण

23-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में ‘राजाजी उत्सव’ में शामिल हुई और राष्ट्रपति भवन में स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया।
राष्ट्रपति के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट एक पोस्ट में लिखा गया है कि अशोक मंडप के पास ग्रैंड ओपन सीढ़ी पर स्थित चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा का स्थान ले लिया है। यह पहल औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को मिटाने और भारत की समृद्ध संस्कृति, विरासत, शाश्वत परंपराओं को गर्व से अपनाने तथा भारत माता की सेवा में असाधारण योगदान देने वालों को सम्मानित करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का हिस्सा है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने इस बात पर जोर दिया कि यह कदम औपनिवेशिक काल की विरासत से आगे बढ़ने और देश के इतिहास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रख्यात भारतीय नेताओं को मान्यता देने के व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजगोपालाचारी एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता और विद्वान थे, जिन्होंने 1948 से 1950 तक भारत के अंतिम गवर्नर जनरल के रूप में कार्य किया।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन और राजाजी के परिवार के सदस्य शामिल थे।
वहीं, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ में भाग लिया, जहां भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया, जो औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति की हमारी यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”
इस आयोजन ने राष्ट्रीय प्रतीकों को सम्मानित करने और गणतंत्र की प्रमुख संस्थाओं के भीतर भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को सुदृढ़ करने पर सरकार के निरंतर जोर को रेखांकित किया। 

पीएम मोदी ने मेरठ मेट्रो और नमो भारत ट्रेन को दिखाई हरी झंडी, छात्रों के साथ किया सफर

22-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को शताब्दी नगर नमो भारत स्टेशन पर मेरठ मेट्रो और नमो भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और शहरी परिवहन को मजबूत करने के सरकार के प्रयासों को बड़ा बढ़ावा मिला है।
पीएम मोदी ने मेरठ पहुंचने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने उनका स्वागत किया। इसके बाद, पीएम मोदी शताब्दी नगर नमो भारत स्टेशन पहुंचे और मेट्रो व ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। प्रधानमंत्री ने 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को राष्ट्र को समर्पित किया। साथ ही आरआरटीएस के शेष खंडों का उद्घाटन भी किया, जिनमें दिल्ली में सराय काले खां से न्यू अशोक नगर तक 5 किलोमीटर का हिस्सा और उत्तर प्रदेश में मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक 21 किलोमीटर का हिस्सा शामिल है।
उन्होंने मेरठ साउथ स्टेशन तक मेट्रो की सवारी भी की और उसमें सवार यात्रियों व छात्रों से बातचीत की। इसी दौरान, दो छात्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को कुछ तस्वीरें भी दिखाईं।
180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ, नमो भारत भारत की पहली क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली है। नमो भारत से साहिबाबाद, गाजियाबाद, मोदीनगर और मेरठ जैसे प्रमुख शहरी केंद्र दिल्ली से अधिक तेजी से जुड़ पाएंगे।
कॉरिडोर की शुरुआती स्टेशन सराय काले खान, इस उद्घाटन के साथ शुरू होने वाले चार नमो भारत स्टेशनों में से एक है। यह रणनीतिक रूप से एक प्रमुख मल्टी-मॉडल हब के रूप में स्थित है, जो हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन, वीर हकीकत राय आईएसबीटी और रिंग रोड को सरलता से जोड़ता है। शुरू होने वाले अन्य तीन नमो भारत स्टेशन शताब्दी नगर, बेगमपुल और मोदीपुरम मेरठ में हैं।
एक ही बुनियादी ढांचे पर नमो भारत और मेरठ मेट्रो का यह निर्बाध एकीकरण तेज रफ्तार वाली अंतर-शहरी यात्रा और शहर के भीतर सुगम आवागमन के लिए मददगार साबित होगा, जो भारत में एकीकृत शहरी और क्षेत्रीय परिवहन के लिए एक मिसाल कायम करेगा। इससे सड़क यातायात में भीड़ कम होगी और नतीजतन वाहनों से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में खासी कमी आएगी। 
 

मन की बात: पीएम मोदी ने महाकुंभ के साथ देशवासियों से केरल कुंभ का जिक्र किया

22-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम के 131वें एपिसोड में पिछले वर्ष प्रयागराज में आयोजित किए गए महाकुंभ की चर्चा के साथ ही केरल कुंभ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ की अद्भुत तस्वीरें आपको जरूर याद होंगी। संगम के तट पर उमड़ता जन सैलाब आस्था का अथाह प्रवाह और स्नान के उस पावन क्षण में जैसे भारत अपनी सनातन चेतना से साक्षात्कार कर रहा था। उन्होंने कहा कि महाकुंभ की वही धारा, वही माघ का महीना, वही श्रद्धा का स्वर जब उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ता है तो एक नई पहचान ले लेता है। उन्होंने कहा कि केरल की धरती पर भारतप्पुझा नदी के किनारे तिरुनावाया में सदियों पुरानी एक परंपरा रही है- मामंगम।
उन्होंने कहा कि इसे कई लोग महामाघ महोत्सव या केरल कुंभ भी कहते हैं। माघ के महीने में पवित्र नदी में स्नान और उस क्षण को जीवन का अमिट स्मरण बना लेना यह इसकी आत्मा है। समय के साथ यह परंपरा जैसे ओझल हो गई थी। करीब ढाई सौ वर्षों तक यह आयोजन उसी भव्यता में नहीं हुआ था, जैसे पहले हुआ करता था। लेकिन आज अपनी विरासत को फिर से पहचान रहे हमारे देश में इतिहास ने फिर करवट ली है।
इस बार बिना किसी बड़ी घोषणा के केरल कुंभ का सफल आयोजन हुआ। लोगों ने इसके बारे में एक-दूसरे को बताया। कानों-कान बात पहुंचती गई। देखते ही देखते श्रद्धालु तिरुनावाया पहुंचने लगे। पीएम मोदी ने कहा कि महाकुंभ हो ये केरल कुंभ ये केवल स्नान का पर्व नहीं हैं। यह स्मृति का जागरण है। यह संस्कृति का पुर्नस्मरण है। उत्तर से दक्षिण तक नदियां भले अलग हों, किनारे भले अलग हों पर आस्था की धारा एक ही है, यही भारत है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के 131वें एपिसोड में कई और विषयों पर बात की। उन्होंने एआई समिट को लेकर देशवासियों से बात की। इसके अलावा उन्होंने बच्चों से परीक्षा पर बात की। साथ ही डिजिटल अरेस्ट को लेकर पीएम मोदी ने देशवासियों को सतर्क किया। 



 

पांच दिवसीय भारत दौरे के बाद ब्राजील के लिए रवाना हुए राष्ट्रपति लूला

22-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा का भारत दौरा पूरा हुआ। राष्ट्रपति लूला रविवार को अपने देश वापस लौटने के लिए भारत से रवाना हुए। विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी। राष्ट्रपति लूला 18 से लेकर 22 फरवरी तक भारत के दौरे पर थे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विदेश मंत्रालय की तरफ से जानकारी दी गई, “एक सफल दौरा खत्म हुआ! राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के दौरे ने भारत और ब्राजील के बीच रणनीतिक साझेदारी को काफी बढ़ावा दिया और कई आगे बढ़ने वाले नतीजे दिए। उन्हें एमओएस पबित्रा मार्गेरिटा ने विदा किया।”
इससे पहले राष्ट्रपति लूला ने एक्स पर भारत दौरे की खास वीडियो साझा कर लिखा, “ब्राजील और भारत सिर्फ ग्लोबल साउथ की दो बड़ी डेमोक्रेसी नहीं हैं। हम दुनिया की फार्मेसी और दुनिया के अन्नदाता के बीच, एक डिजिटल सुपरपावर और एक रिन्यूएबल एनर्जी पावरहाउस के बीच मिलन बिंदु हैं। दो बहुत अलग-अलग तरह के देश, जिनकी सांस्कृतिक ताकत और बहुपक्षवाद और शांति के लिए कमिटमेंट है।”
उन्होंने आगे कहा कि अगर हम मिलकर काम करें, तो हम ब्राजील और भारत के बीच आपसी संबंध को मजबूत करेंगे, हम मर्कोसुर के साथ अपने संबंध को मजबूत करेंगे, और हम ग्लोबल साउथ को मजबूत करेंगे।
कल शनिवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों के बीच हुई बातचीत और समझौते को लेकर विस्तार से जानकारी जारी की है।
दोनों नेताओं के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद पीएम मोदी ने संयुक्त बयान में कहा, “राष्ट्रपति लूला और उनके डेलिगेशन का स्वागत करते हुए मुझे अत्यंत खुशी हो रही है। जिस आत्मीयता और गर्मजोशी के साथ आपने पिछले साल ब्राजील में मेरा स्वागत किया था, आज उसी भाव के साथ मैं आपका अभिनंदन करता हूं। यह मेरे लिए विशेष संतोष का विषय है। भारत और ब्राजील के संबंधों को राष्ट्रपति लूला की दूरदृष्टि और प्रेरक संबंधों का लंबे समय से लाभ मिलता रहा है।”
वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “बीते कुछ वर्षों में मुझे इनसे कई बार मिलने का सौभाग्य मिला है। हर मुलाकात में भारत के प्रति इनकी गहरी मित्रता और विश्वास को महसूस किया है। राष्ट्रपति लूला के इस दौरे ने एआई इम्पैक्ट समिट की शोभा भी बढ़ाई और हमारी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा भी दी है। मैं उनकी मित्रता और दोनों देशों के संबंधों के प्रति कमिटमेंट के लिए आभार व्यक्त करता हूं।
 

एआई समिट में भारत को मिला वैश्विक समर्थन, भारी निवेश के संकेत

21-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में 5 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, वैश्विक विशेषज्ञों से संवाद किया और अत्याधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल की। समिट में दुनिया भर के प्रमुख एआई खिलाड़ी शामिल हुए और अनेक स्टार्टअप्स को अपने नवाचार प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
मंत्री ने कहा कि भारत ने एआई स्टैक की बुनियाद तैयार करने के बाद अब उसके उन्नत मॉडल, कंप्यूट क्षमता और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने बताया कि समिट ने वैश्विक स्तर पर सहयोग और विचार-विमर्श के लिए प्रभावी मंच प्रदान किया। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मानव एआई’ विजन को व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला। जिम्मेदार और नैतिक एआई पर विशेष जोर दिया गया और इस पहल में बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई।
मंत्री के अनुसार एआई क्षेत्र में बड़े निवेश के संकेत मिले हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेश में 250 अरब डॉलर से अधिक और डीप-टेक वेंचर कैपिटल में लगभग 20 अरब डॉलर की प्रतिबद्धताएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि यह भारत की तकनीकी क्षमता पर बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।
भारत ने एआई सुरक्षा के लिए 12 संस्थानों का नेटवर्क तैयार किया है, जो शोध और मानकों के विकास पर कार्य कर रहा है। साथ ही सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने और चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण समझौते किए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि भारत की प्रतिभा क्षमता और संतुलित विदेश नीति के कारण दुनिया एआई के नए दौर में भारत की भूमिका को गंभीरता से स्वीकार कर रही है। समिट की घोषणा पर 70 से अधिक देशों ने हस्ताक्षर किए हैं और यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।




 

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शामिल हुए एंटोनियो गुटेरेस, राष्ट्रपति मुर्मु से की मुलाकात

21-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अवसर पर शुक्रवार को एंटोनियो गुटेरेस शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति भवन में द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।
मुलाकात के दौरान गुटेरेस ने एआई समिट के सफल आयोजन के लिए भारत के नेतृत्व और विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र के साथ लंबे समय से चले आ रहे सहयोग की सराहना की। राष्ट्रपति सचिवालय के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मु ने एआई पर वैश्विक वैज्ञानिक पैनल बनाने की पहल का स्वागत किया, जिसका उद्देश्य तकनीक को मानवता की सेवा के लिए उपयोग में लाना है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में बहुपक्षवाद गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें भरोसे की कमी भी शामिल है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मौजूदा ढांचे में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह वर्तमान जियो-पॉलिटिकल वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करे और ग्लोबल साउथ को निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी मिले। उन्होंने कहा कि परिषद में समयबद्ध सुधार संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
राष्ट्रपति ने कहा कि ‘यूएन-80’ पहल सुधारों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है, लेकिन किसी भी पुनर्गठन प्रक्रिया में ग्लोबल साउथ की विकास प्राथमिकताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने गुटेरेस को उनके शेष कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं देते हुए बहुपक्षवाद के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया।
समिट से एक दिन पहले गुटेरेस ने नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। इस बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को समावेशी बनाने और इस दिशा में संयुक्त राष्ट्र की रचनात्मक भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। 
 

33 देशों की मौजूदगी में भारत ने संभाली इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम की कमान

21-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) विशाखापट्टनम में 20 फरवरी को इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम के नौसेना प्रमुखों का सम्मेलन आयोजित हुआ। इस दौरान भारतीय नौसेना ने रॉयल थाई नेवी से सिम्पोजियम की अध्यक्षता औपचारिक रूप से संभाल ली। करीब 16 साल बाद भारत इस महत्वपूर्ण मंच की कमान पर लौटा है।
भारत ने इससे पहले 2008 से 2010 तक इस मंच की पहली अध्यक्षता की थी। अब एक बार फिर देश को हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग को नई दिशा देने की जिम्मेदारी मिली है। सम्मेलन में हिंद महासागर से जुड़े 33 देशों की नौसेनाओं के प्रमुख और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
यह आईओएनएस का 9वां कॉन्क्लेव था, जिसमें अटलांटिक से लेकर प्रशांत महासागर तक के देशों की भागीदारी ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती गंभीरता को रेखांकित किया। भारतीय नौसेना प्रमुख दिनेश के त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि भारत इस मंच को अधिक सक्रिय और परिणामोन्मुख बनाना चाहता है। सदस्य देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत और सूचना साझाकरण को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
कॉन्क्लेव के दौरान आईओएनएस की नई वेबसाइट लॉन्च की गई, जिसे भारतीय नौसेना ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच बेहतर तालमेल और सुरक्षित संवाद सुनिश्चित करना है। साथ ही फिलीपींस को पर्यवेक्षक के रूप में शामिल किया गया और ओमान को मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यसमूह में जोड़ा गया।
भारत ने अपने कार्यकाल के दौरान आईओएनएस मैरीटाइम एक्सरसाइज के आयोजन, आईओएस सागर की तैनाती और सदस्य देशों के बीच नियमित समुद्री सूचना साझा करने की कार्यशालाएं शुरू करने की योजना प्रस्तुत की। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह नेतृत्व परिवर्तन हिंद महासागर क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा प्रयासों को नई गति देगा और सदस्य देशों के बीच भरोसा मजबूत करेगा। 

 



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