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मिडिल ईस्ट संघर्ष का असर, ब्रेंट क्रूड फिर 100 डॉलर के पार

12-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने का असर कच्चे तेल पर स्पष्ट दिखाई देखे लगा है और गुरुवार को कीमत फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ब्रेंट क्रूड का दाम 9 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 100.76 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।
कच्चे तेल में तेजी ऐसे समय पर देखने को मिली है, जब इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) कीमतों में तेजी को कम करने के लिए इमरजेंसी रिजर्व से कच्चा तेल जारी करने का ऐलान कर चुका है।
बीते बुधवार को 32 देशों के सदस्यता वाले आईईए ने इमरजेंसी रिजर्व से 400 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करने का ऐलान किया है, यह अब तक के इतिहास में आईईए द्वारा कच्चा तेल जारी करने का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
इसके अलावा, अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने अलग से घोषणा की कि वह रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व से 172 मिलियन बैरल तेल जारी करेगा, और ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि शिपमेंट अगले सप्ताह शुरू हो सकता है और इसे पूरा होने में लगभग 120 दिन लगेंगे।
इससे पहले मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने के चलते कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि, बाद में गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था।
कच्चे तेल में तेजी की वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही कथित तौर बाधित होना है। इससे साथ,अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष में अब तेल टैंकरों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे इसमें और इजाफा हो गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य, मध्य पूर्व में संकरा समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया में उत्पादित होना वाला करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल का व्यापार होता है।










 

‘तथ्यों से भरा, संसदीय परंपराओं के महत्व को बताया’, पीएम मोदी ने की अमित शाह के भाषण की प्रशंसा

12-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में दिए गए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भाषण की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि इस भाषण में संसद की परंपराओं के महत्व और देश की प्रगति के लिए सामूहिक प्रयास का जिक्र था।
पीएम मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “गृह मंत्री अमित शाह का शानदार भाषण। उनका भाषण तथ्यों से भरा हुआ है और संसदीय परंपराओं के महत्व के साथ-साथ देश की प्रगति के लिए मिलकर काम करने के महत्व को भी बताता है।”
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कल बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है। लगभग 4 दशक के बाद लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है। उन्होंने संसदीय राजनीति और सदन के लिए यह अफसोसजनक घटना करार दिया।
अमित शाह ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष किसी दल के नहीं होते बल्कि सदन के होते हैं और सदन के सभी सदस्यों के अधिकारों के संरक्षक होते हैं। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना कोई साहसिक घटना नहीं है।
उन्होंने कहा कि लगभग 13 घंटों तक पक्ष-विपक्ष ने इस पर चर्चा की है और 42 से अधिक सांसदों ने इसमें हिस्सा लिया है। स्पीकर के निर्णय को अंतिम मानने के विपरीत विपक्ष ने स्पीकर की निष्ठा पर सवालिया निशान खड़ा किया है। शाह ने कहा कि लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है और न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में हमारे लोकतंत्र की एक साख बनी है और पूरी दुनिया इसे स्वीकार करती है। जब इस पंचायत के मुखिया की निष्ठा पर सवालिया निशान लगता है तो सिर्फ देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि हम भी विपक्ष में रहे हैं और उस दौरान तीन बार स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया, लेकिन हमारी पार्टी और गठबंधन ने कभी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने कहा कि हमने रचनात्मक विपक्ष के रूप में काम किया है, स्पीकर की गरिमा का संरक्षण करने का काम किया है और स्पीकर से हमारे कानूनी अधिकारों के संरक्षण की मांग भी की है। शाह ने कहा कि हम कभी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाए।
अपने भाषण में अमित शाह ने कहा कि लोकसभा के नियम 374 में अव्यवस्था, अनुशासनहीनता की स्थिति में स्पीकर को चेतावनी देने, नामित करने, निष्कासित करने और निलंबन का अधिकार है। उन्होंने कहा कि आंदोलन और एक्टिविस्ट को सदन में सदन के नियमों के अनुसार ही चलना पड़ेगा। शाह ने कहा कि नियम 375 के तहत गंभीर अव्यवस्था की स्थिति में सदन को स्थगित करना होता है। उन्होंने कहा कि नियम 380 के अधीन स्पीकर को असंसदीय शब्दों और टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि लय में की गई असंसदीय टिप्पणियां संसद के इतिहास में नहीं रखनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से आने वाले सासंद भी यही संस्कार लेकर जाएंगे। शाह ने कहा कि असंसदीय शब्दों की सूची सदन के अस्तित्व में आने से लेकर आज तक इस पद पर बैठे अनेक महानुभावों ने बनाई और वह सब पर बाध्यकारी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को संविधान ने अधिकार दिया है लेकिन कोई विशेषाधिकार नहीं दिया है। अधिकार का संरक्षण कर सकते हैं लेकिन विशेषाधिकार के मुगालते में जीने वालों को उनकी पार्टी और जनता भी संरक्षण नहीं देती है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 16वीं लोकसभा में 331 बैठकें हुईं, 17वीं लोकसभा में 274 और मौजूदा लोकसभा में 2025 तक 103 बैठकें हुईं। वर्ष 2025 का बजट सत्र 118 प्रतिशत उत्पादकता वाला रहा। उन्होंने कहा कि 16वीं लोकसभा की उत्पादकता 91 प्रतिशत, 17वीं की उत्पादकता 91 प्रतिशत और 18वीं की उत्पादकता 91 प्रतिशत रही और इनमें अधिकतम उत्पादकता मौजूदा स्पीकर ओम बिरला के कार्यकाल में ही हुई है। अध्यक्ष ने शून्य काल की अवधि को 5 घंटे तक पहुंचाया है।
शाह ने कहा कि विधायक और सांसद रहते हुए उन्हें 30 साल हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने कभी नहीं देखा कि स्पीकर ने सदस्यों को रात 12 बजे तक शून्य काल के मुद्दे उठाने का मौका दिया हो। उन्होंने 202 सांसदों को प्रश्न उठाने का मौका दिया और विपक्ष कहता है कि उन्हें मुद्दे उठाने का मौका नहीं मिलता।

पीएम मोदी आज तिरुचिरापल्ली से 2 अमृत भारत रेलगाड़ियों, 2 एक्सप्रेस ट्रेनों और एक पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे

11-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी बुधवार को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से दो अमृत भारत एक्सप्रेस, दो एक्सप्रेस रेलगाड़ियों और एक पैसेंजर ट्रेन, तथा केरल के एर्णाकुलम से एक और पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। ये नई ट्रेन सेवाएं सामूहिक रूप से तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और झारखंड के लाखों यात्रियों को लाभ पहुंचाएंगी।
रेल मंत्रालय के अनुसार, इस अवसर पर केरल में तीन पुनर्विकसित अमृत स्टेशनों का उद्घाटन भी किया जाएगा और शोरनूर-निलांबुर रेलवे लाइन विद्युतीकरण परियोजना राष्ट्र को समर्पित की जाएगी।
तमिलनाडु में एक ऐसा शहर है जहां दो रेलवे स्टेशन एक-दूसरे से मुश्किल से छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, फिर भी अब तक, उनमें से कोई भी अपने लोगों को झारखंड के खनिज-समृद्ध क्षेत्र के लिए सीधी ट्रेन सेवा प्रदान नहीं कर सका था। वह शहर कोयंबटूर है। लेकिन अब यह स्थिति बदलने वाली है, जब प्रधानमंत्री मोदी तिरुचिरापल्ली से ‘पोदानूर-धनबाद अमृत भारत एक्सप्रेस’ को हरी झंडी दिखाएंगे।
दरअसल, दक्षिण के करघा-नगरों से लेकर पूरब के कोयला-खदानों से घिरे पठारों तक, भारतीय रेल ने उस मांग को पूरा किया है जिसे यह क्षेत्र दशकों से संजोए हुए था। पोदानूर जंक्शन कोयंबटूर का दूसरा सबसे बड़ा रेलवे केंद्र है और शहर के दक्षिणी छोर पर स्थित है, यह इस नई ‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ का शुरुआती स्टेशन है। इसके कुछ ही मिनटों बाद कोयंबटूर जंक्शन आता है, जो इसका पहला कमर्शियल हॉल्ट (ठहराव) है। ये दोनों स्टेशन मिलकर कोयंबटूर के लाखों लोगों को ऐसी रेलगाड़ी तक पहुंचने के दो रास्ते उपलब्ध कराते हैं, जो सीधे धनबाद तक जाती है। एक ही ट्रेन, जो आपके घर से लेकर आपकी मंज़िल तक का सफ़र तय करती है।
वहीं पहले, इस यात्रा का मतलब होता था—चेन्नई या विजयवाड़ा के लिए ट्रेन पकड़ना, वहां घंटों इंतज़ार करना, और फिर दूसरी ट्रेन पकड़ना; जिससे पहले से ही लंबे इस सफ़र में एक पूरा दिन और जुड़ जाता था। नई ‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ ने इस पूरे समीकरण को ही बदल दिया है। यह साप्ताहिक सेवा है; यह हर शनिवार सुबह पोदानूर से रवाना होगी और सोमवार तड़के धनबाद पहुंच जाएगी, जबकि वापसी की सेवा हर सोमवार को धनबाद से चलेगी। रास्ते में सलेम, रेनिगुंटा, विजयवाड़ा, झारसुगुड़ा और रांची जैसे स्टेशनों से गुज़रते हुए, यह नई साप्ताहिक रेलगाड़ी उस पूरे कॉरिडोर के हर बड़े स्टेशन से गुजरेगी, जो दक्षिण भारत के औद्योगिक केंद्र को पूर्वी भारत की ‘एनर्जी बेल्ट’ से जोड़ता है।
भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा दो तरह के शहरों के बीच के तालमेल पर चलता है—वे शहर जो चीज़ें बनाते हैं, और वे शहर जो निर्माण की प्रक्रिया को ऊर्जा देते हैं। कोयंबटूर और धनबाद के बीच यह तालमेल लंबे समय से बना हुआ है, भले ही रेलवे ने उन्हें औपचारिक तौर पर अभी तक एक-दूसरे से न जोड़ा हो। सेलम स्टील प्लांट—जो रेलवे ट्रैक, रक्षा उपकरणों और बुनियादी ढांचे में इस्तेमाल होने वाला खास मिश्र धातु (alloy) वाला स्टील बनाता है—अपने लिए ‘कोकिंग कोल’ धनबाद के आस-पास की खदानों से ही लेता है। कच्चा माल मालगाड़ियों से दक्षिण की ओर जाता है; और अब, इन दो दुनियाओं के बीच आने-जाने वाले लोग अमृत भारत एक्सप्रेस से सफ़र करेंगे।
भारत के बिल्कुल किनारे पर एक और शहर है, जहां ज़मीन खत्म हो जाती है और तीन समुद्र मिलते हैं। कन्याकुमारी, और वह तटीय पट्टी जो नागरकोइल से होते हुए उत्तर की ओर फैली हुई है, लंबे समय से तीर्थयात्रियों, मछुआरों और चुपचाप मेहनत करने वाले लोगों का क्षेत्र रही है; ऐसे लोग जिन्होंने इस उपमहाद्वीप के सबसे दक्षिणी छोर पर अपना जीवन बनाया है। फिर भी, अपने इतने महत्व के बावजूद, यह पट्टी दक्कन के आर्थिक अवसरों से लगातार दूर ही रही है। नागरकोइल से हैदराबाद तक की यात्रा का मतलब था ट्रेन बदलना, इंतज़ार करना, और यात्रा में ही दो दिन का ज़्यादातर समय बिताना। इस नई सेवा के शुरू होने से यह दूरी कम हो जाएगी।
वहीं, रामेश्वरम-मंगलुरु एक्सप्रेस और तिरुनेलवेली-मंगलुरु एक्सप्रेस, दोनों ही कर्नाटक तट की ओर जाते हुए कोयंबटूर गलियारे से होकर गुजरेगी। कोयंबटूर ज़िले के निवासियों के पास अब पश्चिम की ओर मंगलुरु जाने के लिए नए और सीधे विकल्प मौजूद हैं, जिसके लिए उन्हें बीच के स्टेशनों पर ट्रेन बदलने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक, रामेश्वरम की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए, यह नई एक्सप्रेस रेलगाड़ी रामनाथस्वामी मंदिर तक की यात्रा को और भी सुगम बनाती है। इसका मार्ग तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक से होकर गुज़रेगा, और यह तटीय क्षेत्र के विद्यार्थियों, व्यापारियों और कामकाजी पेशेवरों को सेवाएं प्रदान करेगी।
केरल में, तीन स्टेशनों का उद्घाटन ‘अमृत भारत स्टेशनों’ के रूप में किया जा रहा है—शोरनूर, कुट्टिप्पुरम और चंगनास्सेरी। इन्हें आधुनिक यात्री सुविधाओं, उन्नत प्लेटफॉर्म, लिफ्ट और एस्केलेटर, मुफ्त वाई-फाई, और स्थानीय कला व संस्कृति से प्रेरित स्टेशन के बाहरी स्वरूप (facades) के साथ फिर से बनाया गया है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इन तीनों स्टेशनों का पुनर्विकास लगभग ₹52 करोड़ की कुल लागत से किया गया है। ये केवल नवीनीकृत इमारतें नहीं हैं। ये इस बात का प्रतीक हैं कि हर भारतीय—चाहे वह किसी भी शहर का रहने वाला हो—एक ऐसे स्टेशन का हकदार है जो देश की आकांक्षाओं को दर्शाता हो।
इन उद्घाटनों के साथ-साथ, शोरनूर-निलांबुर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण कार्य भी राष्ट्र को समर्पित किया जा रहा है। यह लाइन मलप्पुरम जिले से गुज़रते हुए 65 किलोमीटर तक फैली है और इस परियोजना की लागत 90 करोड़ रुपये है। यह विद्युतीकृत गलियारा डीज़ल इंजन की ज़रूरत को खत्म करता है, यात्रा के समय को कम करता है, उत्सर्जन घटाता है, और केरल के सबसे अधिक आबादी वाले जिलों में से एक जिले में अधिक यात्री और मालगाड़ी सेवाओं की निर्बाध शुरुआत को संभव बनाएगा।
 

कच्चे तेल की कीमत में हुई भारी गिरावट, 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे लुढ़की कीमत

11-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) कच्चे तेल की कीमत में बुधवार को गिरावट देखने को मिली और यह 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया है। इसकी वजह आईईए द्वारा इमरजेंसी रिजर्व जारी कर कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने के प्रस्ताव को माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी-ईरान युद्ध के बाद बढ़ी हुई कच्चे तेल की कीमतों को कम करने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) इमरजेंसी रिजर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति पर विचार कर रहा है। 
कई रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरजेंसी रिजर्व से प्रस्तावित आपूर्ति 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद दो चरणों में जारी किए गए 182 मिलियन बैरल से अधिक होगी। जी7 देशों ने आईईए से इस तरह के कदम के लिए तैयार रहने का अनुरोध किया है।इन रिपोर्ट्स के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 0.99 प्रतिशत गिरकर 86.93 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) वायदा 0.75 प्रतिशत गिरकर 82.82 डॉलर हो गया।
हाल के दिन में होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण ब्रेंट क्रूड में करीब 50 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई थी और यह 119 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया था। होर्मुज जलडमरूमध्य, मध्य पूर्व में प्रमुख समुद्री व्यापारिक मार्ग पर स्थित एक संकरा रास्ता है, जिससे दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल होकर जाता है। कच्चे तेल में गिरावट की एक वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका का ईरान के साथ युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है। 
हालांकि, अमेरिका-ईरान युद्ध दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और समाधान के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने या उनकी तैयारी में जुटे होने की खबरों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है।मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई बारूदी सुरंगें बिछाई हैं और हमारे पास इसकी कोई रिपोर्ट नहीं है, तो हम चाहते हैं कि उन्हें तुरंत हटाया जाए!” उन्होंने आगे कहा कि बारूदी सुरंगों को हटाना “सही दिशा में एक बड़ा कदम होगा!” 





 

ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनी, कहा-होर्मुज जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने का प्रयास किया तो सैन्य परिणाम भुगतने होंगे

11-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर ईरान ने होर्मुज जलमार्ग में समुद्री सुरंगें बिछाने की कोशिश की, तो अमेरिका उस पर बड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। इसी बीच, अमेरिकी सेना ने महत्वपूर्ण जहाजरानी मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली 10 संदिग्ध नौकाओं पर हमला कर उन्हें नष्ट कर दिया, जिससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक में तनाव बढ़ गया है।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए चेतावनी जारी करते हुए कहा कि वाशिंगटन फारस की खाड़ी को वैश्विक ऊर्जा बाजारों से जोड़ने वाले संकरे जलमार्ग में किसी भी संभावित बारूदी सुरंग बिछाने के प्रयास पर कड़ी नजर रख रहा है। अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई बारूदी सुरंग बिछाई है और हमारे पास इसकी कोई रिपोर्ट नहीं है, तो हम चाहते हैं कि उन्हें तुरंत हटाया जाए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने तेहरान को चेतावनी दी कि ऐसी किसी भी बारूदी सुरंग को न हटाने पर अभूतपूर्व सैन्य कार्रवाई की जाएगी। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका रणनीतिक जलमार्ग में बारूदी सुरंग बिछाने के किसी भी प्रयास को रोकने के लिए उन्नत तकनीक और मिसाइल क्षमताओं का उपयोग करने के लिए तैयार है।
ट्रंप ने कहा, “मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ तैनात की गई उन्हीं तकनीकों और मिसाइल क्षमताओं का उपयोग होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग बिछाने का प्रयास करने वाली किसी भी नाव या जहाज को स्थायी रूप से नष्ट करने के लिए कर रहे हैं।”
इस चेतावनी के तुरंत बाद, ट्रंप ने लिखा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पिछले कुछ घंटों में हमने 10 निष्क्रिय बारूदी सुरंग बिछाने वाली नौकाओं और या जहाजों को निशाना बनाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया है। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।”
वहीं, अमेरिकी केंद्रीय कमान ने इन अभियानों की पुष्टि की और कहा कि अमेरिकी सैन्य बल समुद्र में ईरानी क्षमताओं के खिलाफ एक व्यापक अभियान के तहत हमले जारी रखे हुए हैं। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान सैकड़ों हवाई संसाधन ईरानी शासन के खिलाफ विनाशकारी युद्ध शक्ति प्रदान करना जारी रखे हुए हैं।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि ये अभियान राष्ट्रपति के सीधे आदेशों के तहत चलाए गए थे और इनका उद्देश्य वैश्विक समुद्री मार्गों के लिए खतरों को रोकना था। राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर, सेंटकॉम होर्मुज जलडमरूमध्य में निष्क्रिय पड़े बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाजों को नष्ट कर रहा है। हम आतंकवादियों को होर्मुज जलडमरूमध्य को बंधक बनाने की अनुमति नहीं देंगे।
अमेरिकी केंद्रीय कमान का कहना है कि इन सैन्य अभियानों का उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों को धमकाने और समुद्र में शक्ति प्रदर्शन करने की ईरान की क्षमता को सीमित करना था। अमेरिकी सेनाएं समुद्र में शक्ति प्रदर्शन करने और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को परेशान करने की ईरानी शासन की क्षमता को कमजोर कर रही हैं।”
उन्होंने कहा, “वर्षों से ईरानी सेनाएं उन जलक्षेत्रों में नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा बनी हुई हैं, जो अमेरिकी, क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा और समृद्धि के लिए आवश्यक हैं।”









 

पीएम मोदी ने अखिल केरल धीवर सभा के स्वर्ण जयंती समारोह को किया संबोधित

11-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को केरलम के दौरे पर पहुंचे और कोच्चि में अखिल केरल धीवर सभा (Akhila Kerala Dheevara Sabha) के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लिया। उन्होंने इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन दिया तथा मछुआरा समुदाय के कल्याण के लिए संगठन के कार्यों की सराहना की। इस दौरान पीएम मोदी को विष्णु की प्रतिमा और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित भी किया गया। 
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि अखिल केरल धीवर सभा मछुआरों के कल्याण के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रही है, जो एनडीए की तटीय समुदायों को सशक्त बनाने की दृष्टि से पूरी तरह मेल खाता है। उन्होंने संगठन के 50 वर्षों के योगदान को सराहा और मछुआरा समुदाय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सभा के सदस्यों को हार्दिक बधाई दी। 
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने राज्य के नाम परिवर्तन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केरल का नाम अब केरलम हो गया है, जो मलयाली संस्कृति और स्थानीय पहचान के अनुरूप है। यह परिवर्तन केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था, जिससे मलयाली भाइयों-बहनों की लंबे समय से चली आ रही इच्छा पूरी हुई है। प्रधानमंत्री ने केरलमवासियों को इस फैसले के लिए बधाई दी और इसे राज्य की सही पहचान मिलने का आनंदपूर्ण क्षण बताया।
पीएम ने कहा, ”आप सभी की बरसों से इच्छा थी की केरल का नाम बदलकर केरलम किया जाए, मैं आज आपके चेहरे पर ख़ुशी देख सकता हूं, भारत के इस सुंदरतम राज्य को मलयाली कल्चर के मुताबिक सही नाम मिला है, सही पहचान मिली है, मैं इस फ़ैसले के लिए केरलमवासियों को बधाई देता हूं।” 
प्रधानमंत्री ने मछुआरा समुदाय की सांस्कृतिक विरासत, समुद्र संरक्षण की परंपरा और प्रकृति के प्रति श्रद्धा की प्रशंसा की। उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र में केन्द्रीय सरकार के प्रयासों का जिक्र किया, जिसमें मत्स्य पालन के लिए अलग मंत्रालय की स्थापना, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केरल के लिए विशेष प्रावधान और मत्स्य सहकारी समितियों को सहायता शामिल है।
पीएम मोदी ने कहा, ”समुद्र की रक्षा के लिए कुरुम्बा देवी के प्रति आपकी श्रद्धा और कुरुम्बा मंदिरों के संरक्षण के आपके प्रयास यह दर्शाते हैं कि भारत ने सदियों से प्रकृति और पर्यावरण को कितना महत्त्व दिया है, आपकी परंपराएं भगवान व्यास से भी जुड़ी हुई हैं, जो उन्हें भारत के इतिहास का एक महत्त्वपूर् हिस्सा बनाती हैं, हमारी धरती के इस गौरव को संरक्षित करने के लिए मैं आप सभी का तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं।” 
मछुआरों की सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि सैटेलाइट तकनीक के माध्यम से समुद्र में जाने वाले मछुआरों की सुरक्षा को मजबूत किया गया है, जिससे परिवारों की चिंता कम हुई है और मौसम संबंधी जोखिमों से बेहतर निपटारा संभव हुआ है।
इस संबंध में उन्होंने कहा, ”हमारी सरकार ने मछुआरा समुदाय की क्षमता और नीली अर्थव्यवस्था में उसकी भूमिका को पहचाना है, भाजपा-एनडीए सरकार ने ही मत्स्य पालन के लिए एक अलग मंत्रालय बनाया है, उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए कई क़दम उठाए गए हैं, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केरल के लिए लगभग 1400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, इसी वजह से केरल में मत्स्य पालन क्षेत्र तेज़ी से प्रगति कर रहा है।” 
”आज मछुआरा समुदाय के उत्थान के लिए कई अहम क़दम उठाए जा रहे हैं, मत्स्य सहकारी समितियों और मत्स्य पालन से जुड़े उद्यमों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे इस क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा मिल रहा है।” 
”समुद्र में जाने वाले मछुआरों की सुरक्षा भी हमारे लिए महत्वपूर्ण है। पहले हमारे मछुआरे भाई-बहन खुले समुद्र में जाते थे, तो उनके घरवाले उनके वापस आने तक चिंता और डर में डूबे रहते थे, क्योंकि समुद्र में मौसम को लेकर हमेशा आशंकाएं बनी रहती थीं।लेकिन अब ऐसा नहीं है। हमने सैटेलाइट के जरिए समुद्र में जाने वाले मछुआरे भाई-बहनों की सुरक्षा को और मजबूत किया है।”
यह कार्यक्रम मछुआरा समुदाय के योगदान, उनकी आजीविका सशक्तिकरण और समुद्री संस्कृति संरक्षण पर केंद्रित था। बताना चाहेंगे प्रधानमंत्री के इस दौरे में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण भी शामिल है।







 

 


रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 765 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी

10-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारतीय रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक को मजबूत करने के लिए सरकार ने 765 करोड़ रुपए की कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेलवे संचालन को बेहतर बनाना, लाइन क्षमता बढ़ाना और नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्सों में आधुनिक संचार प्रणाली विकसित करना है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं में दो व्यस्त माल और यात्री कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करना और वेस्टर्न रेलवे के वडोदरा और मुंबई सेंट्रल डिवीजनों में ऑप्टिकल फाइबर कम्युनिकेशन नेटवर्क का विस्तार शामिल है।
सरकार ने ईस्ट कोस्ट रेलवे के 106 किलोमीटर लंबे दुव्वाडा-विशाखापत्तनम-विजयनगरम सेक्शन में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 318.07 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। रेल मंत्रालय ने बताया कि इस सेक्शन को मौजूदा 1×25 केवी सिस्टम से आधुनिक 2×25 केवी सिस्टम में अपग्रेड किया जाएगा, जिससे इस व्यस्त कॉरिडोर पर माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों की रफ्तार में सुधार होगा और संचालन अधिक भरोसेमंद बनेगा।
मंत्रालय ने कहा कि यह परियोजना रेलवे बजट 2024-25 में शामिल उस राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूरे भारतीय रेलवे में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को आधुनिक बनाना है।इसके अलावा, सरकार ने साउथ सेंट्रल रेलवे के गुंटकल डिवीजन के तहत कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में स्थित 126 किलोमीटर लंबे रायचूर–गुंटकल सेक्शन में भी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 259.39 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है।
मंत्रालय के अनुसार, इस रूट पर भी मौजूदा 1×25 केवी सिस्टम को 2×25 केवी सिस्टम में बदला जाएगा। यह रूट मुंबई-चेन्नई कॉरिडोर का हिस्सा है और इसके अपग्रेड होने से मालगाड़ियों की आवाजाही आसान होगी और यात्री ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी। इससे वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक ट्रेनों के संचालन को भी मदद मिलेगी।
सरकार ने वेस्टर्न रेलवे के वडोदरा और मुंबई सेंट्रल डिवीजनों में कम्युनिकेशन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 187.88 करोड़ रुपए की परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत 4×48 कोर ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। इस योजना के तहत करीब 1,000 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाएगी, जिसमें वडोदरा डिवीजन में 692 किलोमीटर और मुंबई डिवीजन में 308 किलोमीटर शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि इस आधुनिक संचार नेटवर्क से रेलवे में एलटीई आधारित ‘कवच’ प्रणाली को लागू करने में मदद मिलेगी। यह भारत में विकसित ट्रेन टक्कर रोकने वाली स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली है, जिससे रेलवे नेटवर्क पर सुरक्षा और संचालन दोनों में सुधार होगा।
 

भीषण बाढ़ से तबाह मोजाम्बिक को भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, राहत सामग्री और दवाइयों की बड़ी खेप भेजी

10-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) पूर्वी अफ्रीका के देश मोजाम्बिक के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में आई भीषण बाढ़ का जनजीवन पर बुरा असर पड़ा है। हजारों लोग प्रभावित हुए हैं, और कई इलाकों में राहत एवं पुनर्वास की तत्काल जरूरत महसूस की जा रही है। इस कठिन परिस्थिति में भारत ने मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाते हुए बड़े पैमाने पर राहत सामग्री भेजी है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने विभिन्न सोशल प्लेटफॉर्म्स पर इसकी सूचना दी है। इसमें बताया है कि अपनी ह्यूमनिटेरियन असिस्टेंस और डिजास्टर रिलीफ (एचएडीआर) कोशिशों के तहत, भारत ने मोजाम्बिक को सहायता सामग्री पहुंचाई है। इस सहायता में 500 मीट्रिक टन चावल, अस्थायी आश्रय के लिए टेंट, हाइजीन किट और पुनर्वास कार्यों में उपयोगी कई अन्य आवश्यक सामान शामिल हैं।
इसके अलावा आपदा प्रभावित लोगों की तात्कालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 10 मीट्रिक टन आवश्यक राहत सामग्री भी भेजी गई है। राहत अभियान के तहत भारतीय नौसेना के एक जहाज के माध्यम से लगभग 3 टन आवश्यक दवाइयां भी मोजाम्बिक पहुंचाई जा रही हैं, ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों से निपटने में स्थानीय प्रशासन को मदद मिल सके।
भारत पहले ही समुद्री मार्ग के जरिए 86 मीट्रिक टन जीवन रक्षक दवाइयों की खेप मोजाम्बिक भेज चुका है। इन दवाइयों का उद्देश्य आपदा-प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और पीड़ितों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं सबसे बड़ी चुनौती बन जाती हैं। ऐसे में भारत द्वारा भेजी गई खाद्य सामग्री, स्वच्छता किट और दवाइयां राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
भारत ने हमेशा प्राकृतिक आपदाओं के समय अपने मित्र देशों की सहायता की है। हिंद महासागर क्षेत्र और अफ्रीकी देशों के साथ भारत के मजबूत संबंध रहे हैं, और आपदा के समय दी जाने वाली मानवीय सहायता इन संबंधों को और मजबूत करती है। भारत मानवीय, चिकित्सीय और लॉजिस्टिक सहायता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पहल के माध्यम से भारत न केवल संकट के समय मदद पहुंचा रहा है, बल्कि हिंद महासागर और अफ्रीका क्षेत्र में एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को भी मजबूत कर रहा है।




 

प्रधानमंत्री मोदी ने सीआईएसएफ के स्थापना दिवस पर दी शुभकामनाएं

10-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के स्थापना दिवस पर बल के सभी कर्मियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में सीआईएसएफ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपने संदेश में कहा कि सीआईएसएफ अपने दृढ़ संकल्प, अनुशासन और समर्पण के लिए जानी जाती है। बल के जवान पूरे देश में महत्वपूर्ण संस्थानों और परिसंपत्तियों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सीआईएसएफ के कर्मियों की अटूट कर्तव्यनिष्ठा भारत की सुरक्षा और प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देती है। 
सीआईएसएफ देश के कई संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा में तैनात 
उल्लेखनीय है कि 1968 में संसद के 50वें अधिनियम के तहत केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) का गठन हुआ था। केवल 3,129 कर्मियों के साथ अपनी मामूली शुरुआत से, यह बल 2.20 लाख कर्मियों की एक विशाल शक्ति के रूप में विकसित हो गया है, जो देश के लगभग सभी राज्यों में तैनात है। यह बल देश के प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों, मेट्रो नेटवर्क, बंदरगाहों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाता है। वर्तमान में सीआईएसएफ देश के कई संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा में तैनात है। 

 

रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना के लिए ‘डिफेंस फोर्सेज विजन’ रोडमैप किया जारी

10-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को साउथ ब्लॉक में भारतीय सेना के लिए ‘डिफेंस फोर्सेज विजन’ रोडमैप जारी किया। यह बड़ा ब्लूप्रिंट हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ ने रक्षा बलों को आधुनिक, इंटीग्रेटेड और तकनीक से लैस सेना में बदलने के लिए तैयार किया है, जो 2047 तक भारत के विकसित देश बनने के सपने को पूरा करने में मदद कर सके। यह डॉक्यूमेंट भविष्य की युद्ध चुनौतियों के लिए ढलने वाली सेना बनाने के लिए इनोवेशन, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और मॉडर्न ट्रेनिंग फ्रेमवर्क के महत्व पर भी जोर देता है।
इस विजन डॉक्यूमेंट में सशस्त्र बलों में जरूरी सामरिक सुधारों, क्षमता बढ़ाने और संगठनात्मक बदलावों के बारे में बताया गया है, ताकि बदलते भू-रणनीतिक, तकनीकी और सुरक्षा माहौल से अच्छे से निपटा जा सके। इसमें सेना को एक इंटीग्रेटेड, मल्टी-डोमेन और फुर्तीली फोर्स में बदलने की सोची गई है, जो दुश्मनों को रोकने, हर तरह के झगड़े में जवाब देने और तेजी से बदलते ग्लोबल और रीजनल हालात के बीच बढ़ते स्ट्रेटेजिक हितों की रक्षा करने में काबिल हो। इस विजन का एक मुख्य हिस्सा सेनाओं के बीच तालमेल और तालमेल पर जोर देना है, जिससे प्लानिंग, ऑपरेशन और क्षमता विकास में ज़्यादा तालमेल को बढ़ावा मिलेगा।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस विजन में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, जो देश की खास सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से स्वदेशी तकनीक और समाधान अपनाने को बढ़ावा देता है। घरेलू रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी क्षमताओं को मजबूत करने से ऑपरेशनल तैयारी बढ़ने और देश की ग्रोथ में योगदान देने की उम्मीद है। विजन डॉक्यूमेंट में शॉर्ट-टर्म, मिड-टर्म और लॉन्ग-टर्म टाइमलाइन में साफ तौर पर प्राथमिकता वाले क्षमता लक्ष्यों के साथ एक कैलिब्रेटेड रोडमैप अपनाया गया है। यह विश्व स्तरीय डिफेंस फोर्स बनाने के लिए जरूरी सैन्य क्षमताओं, संस्थागत सुधारों और रणनीतिक साझेदारी के विकास में सहयोग करेगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों की जटिलता को पहचानते हुए यह विजन डॉक्यूमेंट पूरे देश के नजरिए की जरूरत पर जोर देता है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा पक्की करने के लिए सैन्य ताकत को कूटनीतिक, तकनीकी और आर्थिक ताकत के साथ जोड़ा जाएगा। लगातार सुधारों, इनोवेशन और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के जरिए इसका मकसद यह पक्का करना है कि भारत की आजादी की सौवीं सालगिरह तक देश की सेना दुनिया भर में सम्मानित, टेक्नोलॉजिकली एडवांस्ड और लड़ाई के लिए तैयार मिलिट्री के तौर पर खड़ी हो, जो मजबूत विकसित भारत में योगदान दे।
इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। 





 


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