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आईएनएस सुदर्शिनी वैलेटा पहुंचा, भारत-माल्टा समुद्री संबंधों को मिली मजबूती

14-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी 12 मार्च 2026 को माल्टा के ऐतिहासिक बंदरगाह वैलेटा पहुंचा। यह उसके ऐतिहासिक समुद्री अभियान लोकायान-26 का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह यात्रा भारत और माल्टा के बीच गहरे समुद्री संबंधों को दर्शाती है और पोत की महत्वाकांक्षी 22,000 समुद्री मील की वैश्विक यात्रा का अहम चरण है। वैलेटा पहुंचने से पहले पोत ने स्वेज नहर को सफलतापूर्वक पार किया और हाल ही में अलेक्जेंड्रिया में भी ठहराव किया था।
आगमन के बाद पोत के कमांडिंग अधिकारी ने माल्टा गणराज्य में भारत की उच्चायुक्त रचिता भंडारी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में भारतीय नौसेना की भूमिका पर चर्चा हुई। उच्चायुक्त ने कहा कि माल्टा में आईएनएस सुदर्शिनी की उपस्थिति महासागर परियोजना की परिकल्पना का सशक्त प्रतीक है। यह समुद्री सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ जन-जन के संबंधों को भी बढ़ावा देती है।
इस यात्रा के दौरान पोत का चालक दल माल्टा के सशस्त्र बलों के साथ पेशेवर बातचीत और शिष्टाचार भेंट करेगा। इससे आपसी विश्वास और सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा। पोत पर सामुदायिक गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें माल्टा में रहने वाले स्कूली बच्चों और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों के लिए निर्देशित “ओपन शिप” कार्यक्रम शामिल है।
आईएनएस सुदर्शिनी फिलहाल अपनी यात्रा के दूसरे महीने में है। यह यात्रा 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से शुरू हुई थी। माल्टा की यात्रा के बाद जहाज फ्रांस के तट की ओर रवाना होगा, जहां वह एस्केल आ सेट समुद्री उत्सव में भाग लेगा। इस उत्सव में वह दुनिया के कई प्रसिद्ध विशाल जहाजों के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करेगा।  

भारत के पास तेल की कोई कमी नहीं, पर्याप्त भंडार मौजूद : केंद्र

13-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारत के रणनीतिक तेल भंडार और 40 तेल निर्यातक देशों से आपूर्ति ने यह सुनिश्चित करने में मदद की है कि देश वैश्विक ऊर्जा संकट जैसी स्थितियों का मजबूती से सामना कर पाए। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा गुरुवार को दी गई। सरकारी अधिकारी ने कहा कि कहा कि देश का व्यापक आर्थिक आधार काफी मजबूत है। हमारे पास 11-12 महीनों तक सामान को आयात करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। यह अगले पांच वर्षों के देश के तेल आयात के बिल चुकाने के लिए भी पर्याप्त है।
इसके साथ देश के पास 70 दिनों से अधिक की बाजार मांग को पूरा करने के लिए कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का भंडार मौजूद है। वहीं, देश ने कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए मध्य पूर्व से निर्भरता घटाई है। अधिकारी ने कहा कि यह सरकार की इस स्थिति से निपटने की बहुसंबद्ध नीति व्यावहारिक आर्थिक कूटनीति को दर्शाता है जिसमें रूसी कच्चे तेल की खरीद, आवश्यक वस्तु अधिनियम का प्रयोग और संप्रभुता से समझौता किए बिना आपूर्ति में विविधता लाना शामिल है। यह संकट मुद्रास्फीति की तुलना में विकास पर अधिक प्रभाव डालता है, जिससे सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए नीतिगत लचीलापन प्राप्त होता है।
भारत की मुद्रास्फीति दर लगभग 2.75 प्रतिशत है, जो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम है। रूस से कच्चे तेल के आयात, ईंधन कर में लचीलेपन और एलपीजी की विनियमित कीमतों के कारण उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें नियंत्रण में बनी हुई हैं। उदाहरण के लिए, जापान में मुद्रास्फीति दर 5 प्रतिशत है और यह सुदूर पूर्वी देश होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्यात होने वाले कच्चे तेल पर 75 से 90 प्रतिशत तक निर्भर है। दूसरी ओर, भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाली आपूर्ति पर अपनी निर्भरता को काफी कम करने के लिए अन्य देशों से ऊर्जा आयात में विविधता लाई है, जो पहले लगभग 50 प्रतिशत थी और बाद में घटकर 20 प्रतिशत हो गई।
पश्चिमी दबाव के बावजूद, भारत रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखे हुए है, जो कुल आयात का लगभग एक तिहाई है। अधिकारी ने बताया कि इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसे अन्य देशों से भी तेल आयात किया जा रहा है, जो राजनीतिक गठबंधन के बजाय विविधीकरण को दर्शाता है।
भारत के पास दो महीने से अधिक का भंडार है, जबकि पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के पास केवल 30 दिन या उससे भी कम का भंडार है। परिणामस्वरूप, पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपए प्रति लीटर की भारी वृद्धि हुई है, वहीं श्रीलंका में भी घबराहट में खरीदारी के चलते ईंधन की कीमतें बढ़ा दी गई हैं और बांग्लादेश को ऊर्जा राशनिंग लागू करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
 

प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से क्षेत्रीय स्थिति पर की चर्चा

13-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन के साथ क्षेत्र की बढ़ती गंभीर स्थिति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर चिंता जताते हुए भारत की शांति, स्थिरता और सुरक्षित पारगमन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ”ईरान के राष्‍ट्रपत‍ि डॉ. मसूद पेजेशकियन से इलाके के गंभीर हालात पर बात की। बढ़ते तनाव और आम लोगों की जान जाने के साथ-साथ सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई। भारतीय नागरिकों की सेफ्टी और सिक्योरिटी, साथ ही सामान और एनर्जी के बिना रुकावट आने-जाने की जरूरत, भारत की टॉप प्रायोरिटी बनी हुई है।”
चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति और स्टेबिलिटी के लिए भारत का कमिटमेंट दोहराया और बातचीत और डिप्लोमेसी की अपील की। म‍िड‍िल ईस्‍ट में बढ़ते तनाव के बीच भी भारत सभी से अपने संबंध मधुर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये बताचीत ऐसे समय हुई है जब ईरान बहुत ही संघर्ष की स्‍थ‍ित‍ि में है। इजरायल के साथ उसकी जंग अभी भी खतरनाक बनी हुई है।
गुरुवार को भी ईरान ने इजरायल पर म‍िसाइलों से हमला क‍िया। ईरान की ओर से इजरायल की राजधानी येरुशलम पर मिसाइलें दागी गईं। एक मिसाइल पुराने शहर, वेस्टर्न वॉल, अल-अक्सा मस्जिद और चर्च ऑफ द होली सेपुलकर से कुछ सौ मीटर दूर गिरी। इसी कारण आज नमाज़ कुछ समय के लिए रोक दी गई। वहीं, इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) ने गुरुवार की शाम को ईरान की ओर म‍िसाइलें दागने का दावा क‍िया।आईडीएफ का कहना है कि रक्षा प्रणाली सक्रिय होकर इन मिसाइलों को रोकने का प्रयास कर रही है। आईडीएफ ने लोगों को सुरक्षित स्‍थानों पर रहने की एडवाइजरी दी है।
आईडीएफ ने आध‍िकार‍िक सोशल मीड‍िया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा, ”रक्षा प्रणाली इन खतरों को रोकने के लिए काम कर रही है। पिछले कुछ मिनटों में फ्रंट कमांड ने संबंधित क्षेत्रों में मोबाइल फोन पर प्रारंभिक निर्देश जारी किए हैं। लोगों से अनुरोध है कि वे जिम्मेदारी से काम करें और दिए गए निर्देशों का पालन करें। अलर्ट मिलने पर सुरक्षित स्थान में प्रवेश करना आवश्यक है और नए निर्देश मिलने तक वहीं रहें।’
 

कतर से 700 भारतीयों की घर वापसी, रियाद के लिए भारतीय एयरलाइंस की उड़ानें शुरू

13-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) पश्चिम एशिया में जारी हालात के बीच भारत सरकार नागरिकों की सुरक्षित वापसी में लगी हुई है। कतर से करीब 700 नागर‍िक देश पहुंचे, तो वहीं रियाद के लिए भारतीय एयरलाइंस की उड़ानें शुरू कर दी गईं।
कल गुरुवार को कतर में भारतीय दूतावास की जारी अपडेट एडवाइजरी के अनुसार, आज लगभग 700 भारतीय नागरिक दो कतर एयरवेज की उड़ानों से रवाना हुए। एक उड़ान दिल्ली और दूसरी मुंबई के लिए थी, जबकि कुछ यात्री अन्य गंतव्यों पर गए। आने वाले दिनों में कतर एयरवेज की रोजाना एक-दो उड़ानें भारत के लिए चलने की संभावना है।
जो भारतीय नागरिक कतर से बाहर जाना चाहते हैं, उनके पास कतर एयरवेज की सीमित उड़ानों से यात्रा करने का विकल्प है। इसके अलावा, यदि उनके पास सऊदी अरब का वैध वीजा है, तो वे सलवा बॉर्डर के जरिए सऊदी अरब होकर भी जा सकते हैं।
एडवाइजरी के अनुसार, हम उन भारतीय नागरिकों के लिए सऊदी अरब का 96 घंटे का अस्थायी ट्रांजिट वीजा जारी कराने में मदद कर रहे हैं जो कतर में विजिट वीजा पर थे और सऊदी अरब के रास्ते बाहर जाना चाहते हैं। इसके लिए रजिस्ट्रेशन हमारे सोशल मीडिया चैनलों पर दिए गए लिंक के माध्यम से किया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार, दूतावास शुक्रवार-शनिवार (13-14 मार्च) को भी खुला रहेगा, ताकि विशेष रूप से तत्काल आधार पर पासपोर्ट नवीनीकरण जैसी जरूरतों में मदद की जा सके।
दूतावास की ओर से कहा गया कि भारतीय समुदाय से अनुरोध है कि कतर के अधिकारियों की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करें। इन एडवाइजरी में बताया गया है कि देशभर में बाजार स्थिर हैं और खुदरा दुकानों पर सभी जरूरी सामान उपलब्ध है। सभी से जिम्मेदारी से व्यवहार करने, अफवाहों से बचने और अनावश्यक सामान जमा न करने की अपील की गई है। केवल उतना ही सामान खरीदें जितना वास्तव में जरूरी हो।
वहीं, पश्चिम एशिया में हवाई यात्रा की स्थिति पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय (एमओसीए) भी नजर बनाए हुए है।
12 मार्च 2026 से भारतीय एयरलाइंस की रियाद से आने-जाने वाली उड़ानें फिर से शुरू हो गई हैं। पहले दिन एयर इंड‍िया और इंड‍िगो की तीन उड़ानें मुंबई के लिए और एयर इंड‍िया एक्‍सप्रेस की एक उड़ान कोझिकोड (कालीकट) के लिए संचालित की जा रही हैं। इससे भारत और रियाद (सऊदी अरब) के बीच अहम हवाई संपर्क फिर बहाल हो गया है।
एमओसीए के अनुसार, 28 फरवरी से 11 मार्च के बीच खाड़ी देशों से कुल 1,50,457 यात्री हवाई मार्ग से भारत पहुंचे।
इसके अलावा 12 मार्च 2026 को पश्चिम एशिया के कई शहरों जैसे अबू धाबी, दुबई, फुजैरा, जेद्दा, मस्कट, रस अल खैमाह, रियाद और शारजाह से भारत के लिए आने वाली 57 उड़ानें तय की गई हैं। हालांकि यह संचालन परिस्थितियों और तकनीकी स्थिति पर निर्भर करेगा।
मंत्रालय एयरलाइंस और अन्य संबंधित पक्षों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है, ताकि यात्रियों की आवाजाही सुचारू रूप से हो सके। हवाई किराए पर भी नजर रखी जा रही है, ताकि टिकट की कीमतें उचित बनी रहें और इस दौरान अनावश्यक बढ़ोतरी न हो।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे उड़ानों के समय और यात्रा से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए अपनी एयरलाइन से संपर्क में रहें। मंत्रालय स्थिति की लगातार समीक्षा करता रहेगा और जरूरत पड़ने पर आगे की जानकारी जारी करेगा। 

 

महाराष्ट्र में तेंदुओं को अनुसूची 2 की प्रजाति के रूप में पुनः वर्गीकृत किया जाएगा

13-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) महाराष्ट्र में अपने प्राकृतिक आवास के नष्ट होने के कारण तेंदुए के मानव बस्तियों में प्रवेश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन मंत्री गणेश नाइक ने विधानसभा में घोषणा की कि महाराष्ट्र कैबिनेट ने तेंदुओं को अनुसूची 1 से अनुसूची 2 में पुनर्वर्गीकृत करने को मंजूरी दे दी है।
कल गुरुवार को उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र वर्तमान में इस बदलाव को औपचारिक रूप देने के लिए केंद्रीय वन्यजीव विभाग से आवश्यक अनुमति मांग रहा है। उन्होंने कहा, “एक बार तेंदुए को अनुसूची 2 में स्थानांतरित कर दिया गया तो यदि कोई तेंदुआ मानव बस्ती में प्रवेश कर जाए और किसी की रक्षा या आत्मरक्षा में मारा जाए तो उस व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।” यह जवाब उन्होंने सदस्य सत्यजीत देशमुख द्वारा प्रस्तुत कॉलिंग अटेंशन मोशन पर दिया।
देशमुख ने अपने क्षेत्र में तेंदुओं की बढ़ती उपस्थिति को रेखांकित किया और उनकी अनुसूची 2 में शामिल करने की मांग की। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि मानव-पशु संघर्ष को कम करने के लिए कौन-कौन से विशेष उपाय किए जा रहे हैं। वन मंत्री गणेश नाइक ने पुनर्वर्गीकरण के फैसले की पुष्टि की और कहा कि उन तेंदुओं को जो मानव बस्तियों में प्रवेश कर मानव जीवन को खतरा पहुंचाते हैं, औपचारिक रूप से ‘मानवहारी’ घोषित करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण उपायों पर भी जानकारी दी। राज्य ने केंद्रीय सरकार को 150 तेंदुओं के नसबंदी प्रस्तावित किए थे। जवाब में केंद्र ने पांच मादा तेंदुओं को प्रयोगात्मक रूप से पकड़कर नसबंदी की अनुमति दी है। साथ ही उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में वन कर्मियों द्वारा नियमित गश्त बढ़ा दी गई है, जहां मानव-तेंदुआ संघर्ष की घटनाएं अधिक होती हैं। जिन क्षेत्रों में तेंदुओं के लगातार बाहर आने की घटनाएं अधिक होती हैं, वहां छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूल कार्यक्रमों को लचीला रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पकड़े गए जानवरों के प्रबंधन के लिए सरकार टाइगर, तेंदुआ और अन्य जंगली शिकारी प्रजातियों के मौजूदा रेस्क्यू सेंटर्स की क्षमता बढ़ा रही है। साथ ही, केंद्रीय जू प्राधिकरण की अनुमति मिलने पर पकड़े गए तेंदुओं को अन्य राज्यों के चिड़ियाघर और वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर्स में स्थानांतरित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस बीच, राज्य मंत्री आशीष जायसवाल ने महाराष्ट्र परिषद में कहा कि राज्य के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने जोर दिया कि समाज के हर वर्ग को ग्रह की सुरक्षा के लिए अपने जीवनशैली में मूलभूत बदलाव अपनाने होंगे। यह उत्तर उन्होंने सदस्य अमोल मिटकरी द्वारा नियम 92 के तहत उठाई गई आधे घंटे की चर्चा पर दिया।
मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सीमेंट-कंक्रीट घर और नई सड़कें विकास प्रक्रिया का एक अविराम हिस्सा हैं, लेकिन इसके साथ ही प्रदूषण के खिलाफ कड़े उपाय भी जरूरी हैं।
उन्होंने कहा, “हम विकास को रोक नहीं सकते, लेकिन हमें जल, वायु और शोर प्रदूषण को कम करने के लिए व्यापक जन जागरूकता अभियान शुरू करना होगा।” उन्होंने सुझाव दिया कि पर्यावरणीय अध्ययन को स्कूल स्तर से अनिवार्य किया जाए, ताकि छात्रों में शुरुआती उम्र से ही पर्यावरण चेतना विकसित हो। मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में खराब होते कचरा प्रबंधन और प्लास्टिक उपयोग में खतरनाक बढ़ोतरी पर भी चिंता जताई। उन्होंने नागरिकों से रोजमर्रा के घरेलू काम, धार्मिक अनुष्ठान और शादियों में प्लास्टिक छोड़कर पर्यावरण-मित्र विकल्प अपनाने की अपील की।

ईरान-इजरायल तनाव के बीच महाराष्ट्र सरकार अलर्ट, एलपीजी सप्लाई सुचारु रखने के लिए राज्यभर में बने कंट्रोल रूम

13-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच देश के कई हिस्सों में गैस व ईंधन संकट को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने पूरे महाराष्ट्र में कंट्रोल रूम स्थापित करने और जिला स्तर पर विशेष समितियां गठित करने का फैसला किया है, ताकि घरेलू व व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहे।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल डिग्गीकर ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि राज्यभर में एलपीजी वितरण की लगातार निगरानी की जाए और आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। सरकार ने साफ कहा है कि राज्य में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है और नागरिकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता पिछले छह महीनों के मुकाबले अधिक है। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए सभी एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि गैस की सप्लाई किसी भी स्थिति में बाधित न होने दी जाए।
गैस सप्लाई में संभावित व्यवधान को रोकने और किसी भी आपात स्थिति में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी। इन समितियों में जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला आपूर्ति अधिकारी और सभी सरकारी गैस कंपनियों के अधिकारी शामिल होंगे।
इन समितियों की मुख्य जिम्मेदारियों में एलपीजी सप्लाई चेन की निगरानी, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और रोजाना स्थिति की रिपोर्ट सरकार को भेजना शामिल होगा। मुंबई-ठाणे राशनिंग क्षेत्र में एक अलग समिति बनाई जाएगी, जो राशनिंग कंट्रोलर के नेतृत्व में काम करेगी। इस समिति में पुलिस के डिप्टी कमिश्नर और डिप्टी कंट्रोलर (राशनिंग) शामिल होंगे। मुंबई और ठाणे के सभी डिप्टी कमिश्नरों के साथ समन्वय का काम जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (प्रशासन) करेंगे।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि जरूरत पड़ने पर कोयला या केरोसिन जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की संभावना पर विचार किया जाए। हालांकि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी नियमों का पूरी तरह पालन हो। जिला स्तर की समितियां होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशनों के साथ बैठकें भी करेंगी, ताकि जहां संभव हो वहां वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सके।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों, सरकारी छात्रावासों, सरकारी स्कूल और कॉलेजों की मेस, मिड-डे मील योजना और सरकार संचालित आश्रम स्कूलों जैसी जरूरी सेवाएं देने वाले संस्थानों को एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। ऐसे संस्थानों की सूची तैयार की जाएगी और उनके लिए अलग प्राथमिकता आदेश लागू किया जाएगा ताकि इन सेवाओं में किसी तरह की बाधा न आए।
गैस सप्लाई को लेकर किसी भी तरह की अफवाह या घबराहट फैलने से रोकने के लिए सरकार ने सूचना प्रसार की विशेष व्यवस्था भी की है। रेडियो, एफएम चैनल, टेलीविजन और प्रिंट मीडिया के जरिए रोजाना सही जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी।
इस काम की जिम्मेदारी सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय और जिला समितियों को दी गई है। साथ ही, सोशल मीडिया पर फैलने वाली फर्जी या भ्रामक खबरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
तेल कंपनियों को गैस बुकिंग ऐप और मिस्ड कॉल सेवाओं में आने वाली तकनीकी समस्याओं को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा राज्य, संभाग, जिला और तालुका स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए व्हाट्सऐप सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि लोग आसानी से अपनी समस्या दर्ज करा सकें।
आने वाले त्योहारों को देखते हुए सार्वजनिक संस्थानों को एलपीजी की आपूर्ति को विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्राम पंचायत सदस्यों से भी सहयोग लिया जाएगा, ताकि गैस सप्लाई को लेकर नागरिकों में किसी तरह की घबराहट न फैले। एलपीजी सिलेंडर लेकर जाने वाले वाहनों और गैस एजेंसियों को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन को सौंपी गई है। जिला प्रशासन, राशनिंग कंट्रोलर और तेल कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रोजाना गैस स्टॉक की स्थिति और आपूर्ति से संबंधित अपडेट राज्य स्तर के कंट्रोल रूम को भेजें।
महाराष्ट्र में एलपीजी की औसत दैनिक मांग लगभग 9,000 मीट्रिक टन है। इस मांग को पूरा करने के लिए पिछले दो दिनों में रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन को 9,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर लगभग 11,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया गया है। सरकार ने साफ कहा है कि राज्य में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है और मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त उत्पादन व स्टॉक उपलब्ध है।
व्यावसायिक एलपीजी के मामले में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर आवंटन किया जा रहा है। अस्पतालों, स्कूलों की मिड-डे मील योजना, आश्रम स्कूलों, सामुदायिक रसोई और सरकारी शैक्षणिक संस्थानों की मेस को प्राथमिकता दी जा रही है।
इसके अलावा घरेलू उपयोग के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का भी पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। राज्य में पेट्रोल और डीजल की भी पर्याप्त उपलब्धता है। महाराष्ट्र की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और बाजार की मांग को पूरा करने के लिए प्रतिदिन लगभग 15,000 किलोलीटर पेट्रोल और 38,000 किलोलीटर डीजल का उत्पादन कर रही हैं।
वहीं, सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे ईंधन की आपूर्ति को लेकर घबराएं नहीं और किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें क्योंकि राज्य में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी तरह से सुनिश्चित की गई हैं।

प्राकृतिक आपदा प्रभावित 6 राज्यों को 1,912 करोड़ की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता

13-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति (एचएलसी) ने वर्ष 2025 के दौरान आई बाढ़, फ्लैश फ्लड, बादल फटने, भूस्खलन और चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ से प्रभावित छह राज्यों के लिए 1,912.99 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी है। यह सहायता राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से दी जाएगी।
गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि इस राशि में आंध्र प्रदेश को 341.48 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़, गुजरात को 778.67 करोड़, हिमाचल प्रदेश को 288.39 करोड़, नगालैंड को 158.41 करोड़ और केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को 330.34 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। यह सहायता राज्यों के राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) में उपलब्ध वर्ष के शुरुआती बैलेंस के 50 प्रतिशत के समायोजन के अधीन होगी।
सरकार प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्यों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और हर संभव मदद प्रदान कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार ने एसडीआरएफ के तहत 28 राज्यों को 20,735.20 करोड़ रुपये और एनडीआरएफ के तहत 21 राज्यों को 3,628.18 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके अलावा राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष (एसडीएमएफ) से 23 राज्यों को 5,373.20 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय आपदा शमन कोष (एनडीएमएफ) से 21 राज्यों को 1,189.56 करोड़ रुपये भी जारी किए गए हैं। 

नई टी20 रैंकिंग जारी रैंकिंग में भारत का दबदबा,अभिषेक पहले और ईशान दूसरे नंबर पर

12-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) आईसीसी ने टी20 बल्लेबाजों की नई रैंकिंग जारी कर दी है। बाएं हाथ के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा अपना पहला स्थान बरकरार रखने में कामयाब रहे हैं। ईशान किशन ने अपने करियर की बेस्ट रैंकिंग हासिल की है।
आईसीसी द्वारा बुधवार को जारी ताजा रैंकिंग में अभिषेक शर्मा पहले स्थान पर बरकरार हैं। टी20 विश्व कप 2026 में खराब फॉर्म से गुजरे अभिषेक ने फाइनल में 21 गेंद पर 52 रन की पारी खेली थी। इसी पारी की बदौलत वह अपना शीर्ष स्थान बचाए रखने में कामयाब रहे हैं।
टी20 विश्व कप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 9 मैचों की 9 पारियों में 317 रन बनाने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन को 2 स्थान का फायदा हुआ है। वह दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। यह उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ टी20 रैंकिंग है। ईशान ने भी विश्व कप फाइनल में 25 गेंदों पर 54 रन की पारी खेली थी।
पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज साहिबजादा फरहान को एक स्थान का नुकसान हुआ है। वह तीसरे स्थान पर चले गए हैं। इंग्लैंड के फिल साल्ट एक स्थान के नुकसान के साथ चौथे स्थान पर चले गए हैं। श्रीलंका के पाथुम निसांका पांचवें स्थान पर हैं। न्यूजीलैंड के विकेटकीपर बल्लेबाज टिम साइफर्ट को 4 स्थान का फायदा हुआ है। वह छठे स्थान पर हैं।
भारतीय बल्लेबाज तिलक वर्मा 1 स्थान के नुकसान के साथ सातवें और डेवाल्ड ब्रेविस आठवें स्थान पर हैं। भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव का विश्व कप बल्ले से अच्छा नहीं रहा था। उन्हें 2 स्थान का नुकसान हुआ है। वह नौवें स्थान पर हैं, जबकि जोस बटलर एक स्थान के नुकसान के साथ दसवें स्थान पर हैं। बटलर का टी20 विश्व कप भी बेहद निराशाजनक रहा था।
इसके अलावा, इंग्लैंड के लिए भारत के खिलाफ सेमीफाइनल में शतक लगाने वाले युवा बल्लेबाज जैकब बेथल को 17 स्थान का फायदा हुआ है। वह 16वें स्थान पर पहुंच गए हैं। फिन एलन 7 स्थान की छलांग लगाते हुए 20वें और भारत के विश्व कप हीरो संजू सैमसन 18 स्थान की छलांग लगाते हुए 22वें स्थान पर पहुंच गए हैं।





 

होर्मुज जलडमरूमध्य में थाई जहाज पर हुए हमले को लेकर भारत ने जताई चिंता

12-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में एक थाई जहाज पर हुए हमले को लेकर भारत ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में विदेश मंत्रालय ने कहा है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के दौरान व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जाना चिंताजनक है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर खतरा पैदा होता है।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार 11 मार्च को जिस थाई मालवाहक जहाज ‘मयूरी नारी’ पर हमला हुआ, वह भारत के गुजरात स्थित कांडला बंदरगाह की ओर आ रहा था। घटना के बाद भारत स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
विदेश मंत्रालय ने खाड़ी देशों और इजरायल में स्थित सभी भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को 24X7 सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, ताकि संकट में फंसे भारतीय तुरंत संपर्क कर सकें।सरकार ने कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। भारत ने क्षेत्र में सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा बनाए रखने की अपील भी की है।
भारत ने दोहराया है कि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना, निर्दोष नागरिक चालक दल के सदस्यों को खतरे में डालना या समुद्री मार्गों पर आवाजाही और व्यापार की स्वतंत्रता में बाधा डालना उच‍ित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और अन्य व्यापारिक सामान का आवागमन होता है। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव के कारण हाल के दिनों में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

पीएम मोदी ने दांडी मार्च की वर्षगांठ पर विभूतियों को याद करते हुए शेयर किया संस्कृत सुभाषितम्

12-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ‘दांडी मार्च’ की वर्षगांठ पर इसमें शामिल सभी विभूतियों को याद करते हुए एक ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर किया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “1930 में आज ही के दिन दांडी मार्च की शुरुआत हुई थी। इसमें शामिल सभी विभूतियों का श्रद्धापूर्वक स्मरण।” उन्होंने ‘संस्कृत सुभाषितम्’ लिखा, “सत्यमेव जयति नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः। येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥”
इस ‘सुभाषितम्’ का संदेश है कि सदैव सत्य की ही विजय होती है और असत्य का नाश होता है। इसलिए उस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, जिस मार्ग पर चलकर ऋषियों ने आनंद और परमसत्य की प्राप्ति की।
इससे पहले, स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण अध्याय ‘दांडी नमक सत्याग्रह’ की वर्षगांठ पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने महात्मा गांधी को याद किया। अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “1930 में आज ही के दिन महात्मा गांधी जी ने दांडी सत्याग्रह शुरू किया था, जिसने हर आयु और वर्ग के भीतर स्वतंत्रता की इच्छा को और भी प्रबल बनाया। यह स्वदेशी की दिशा में उठाया गया ऐसा कदम था, जिसने स्वाधीनता आंदोलन की दिशा बदल दी। दांडी सत्याग्रह के सभी महापुरुषों को नमन करता हूं।”
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “महात्मा गांधी ने 1930 में आज ही के दिन अंग्रेजों के अत्याचारी नमक कानून के विरोध में साबरमती आश्रम से ऐतिहासिक दांडी नमक सत्याग्रह की शुरुआत की थी, जिसने भारतीय स्वाधीनता संग्राम को नई दिशा दी। स्वतंत्रता संग्राम के इस महत्वपूर्ण अध्याय दांडी नमक सत्याग्रह की वर्षगांठ के अवसर पर पूज्य महात्मा गांधी और सत्याग्रहियों को विनम्र अभिवादन।”
वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “पूज्य बापू और अमर संघर्ष के सभी सत्याग्रहियों को कोटि-कोटि नमन। साल 1930 में आज ही के दिन महात्मा गांधी के नेतृत्व में साबरमती आश्रम से आरंभ हुआ दांडी नमक सत्याग्रह भारतीय स्वाधीनता संग्राम की उस ज्योति का प्रज्ज्वलन था, जिसने जन-जन में आत्मबल और स्वराज का नया मंत्र भर दिया। बर्बर और अलोकतांत्रिक ब्रिटिश शासन की जड़ें हिलाने वाले इस अभूतपूर्व ‘दांडी मार्च’ ने यह सिद्ध किया कि सत्य, साहस और सामूहिक संकल्प से साम्राज्य भी डगमगा जाते हैं।”


 


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